सीएम धामी ने प्रभावितों के लिए सभी जरुरी व्यवस्थाएं सुनिश्चित करने के दिये निर्देश

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सचिवालय स्थित आपदा प्रबंधन कंट्रोल रूम में वरिष्ठ अधिकारियों के साथ प्रदेश में अतिवृष्टि से उत्पन्न स्थिति और आपदा राहत एवं बचाव कार्यों की समीक्षा की।
मुख्यमंत्री ने स्थिति पर लगातार नजर बनाए रखने और प्रभावितों को तत्काल राहत पहुंचाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि ये सुनिश्चित कर लिया जाय कि प्रभावितों को रहने खाने एवं अन्य आवश्यक सामग्री की पूर्ण उपलब्धता हो। फूड पैकेट की पर्याप्त उपलब्धता रखी जाए। पेयजल के साथ ही बच्चों को दूध की पर्याप्त व्यवस्था रखी जाए। आवश्यकता पड़ने पर हेलीकॉप्टर से भी खाद्य सामग्री भेजी जाए। जलभराव वाले क्षेत्रों से पानी की निकासी जल्द की जाए। जल जनित रोगों से बचाव के लिए भी सभी आवश्यक व्यस्थाएं की जाय। सभी संबंधित विभाग प्रभावित क्षेत्रों में नुकसान का आकलन कर लें। बारिश से पेयजल, विद्युत, सड़क एवं अन्य व्यवस्थाएं जो प्रभावित हुए हैं, उन्हें शीघ्र सुचारू किया जाय।
सभी विभागीय सचिव अपने अपने विभागों से संबंधित व्यवस्थाएं देखें और अपने जिला स्तरीय अधिकारियों के निरंतर संपर्क में रहें। प्रभावित क्षेत्रों से लोगों को सुरक्षित स्थानों पर ले जाने के साथ ही उनके लिए सभी आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित की जाएं। उत्तर प्रदेश के सिंचाई विभाग से भी लगातार संपर्क में रहें। मुख्यमंत्री ने कहा कि राहत कार्यों के लिए पर्याप्त बजट है। संसाधनों की कमी नहीं आने दी जाएगी।
इस अवसर पर मुख्य सचिव डॉ. एस. एस संधू, अपर मुख्य सचिव राधा रतूड़ी, सचिव आर मीनाक्षी सुंदरम, शैलेश बगोली, सचिव आपदा प्रबन्धन डॉ. रंजीत कुमार सिन्हा, विनय शंकर पांडेय, विभिन्न विभागों के सचिव, अपर सचिव एवं विभिन्न विभागों के अधिकारी एवं आपदा प्रबंधन विभाग के अधिकारी उपस्थित रहे।

विधानसभा में पुस्तकालय और वेबसाईट का राज्यपाल ने किया लोकार्पण

राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (से नि) ने विधानसभा में उत्तराखण्ड विधानसभा के नवनिर्मित पुस्तकालय एवं नवीन वेबसाइट का लोकार्पण किया। इस अवसर पर विधानसभा अध्यक्ष ऋतु खंडूड़ी भूषण और मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी भी उपस्थित रहे। नवनिर्मित पुस्तकालय में लगभग 20 हजार से ऊपर पुस्तकों का समावेश किया गया है। इस विशिष्ट पुस्तकालय में संविधान एवं कानून, लोक प्रशासन और सामान्य ज्ञान सहित विभिन्न विषयों से संबंधित महत्वपूर्ण पुस्तकें उपलब्ध रहेंगी। इसके साथ-साथ देश-विदेश के प्रमुख लेखकों की पुस्तकों का भी समावेश किया गया है जो ई-लाइब्रेरी के रूप में डिजिटल और प्रिंट दोनों रूपों में उपलब्ध रहेगी। राज्यपाल ने अपनी ओर से विधानसभा पुस्तकालय हेतु 108 पुस्तकें देने की घोषणा की।
पुस्तकालय एवं वेबसाइट के लोकार्पण के अवसर पर राज्यपाल ने कहा कि लोकतंत्र के इस मंदिर में माँ सरस्वती के मंदिर की स्थापना किया जाना अपने आप में अलग है। उन्होंने कहा कि पुस्तकों में माँ सरस्वती का वास होता है। पुस्तकालय एक प्रकार से ज्ञान के मंदिर ही हैं और यह ज्ञान का मंदिर हमारी सोच, विचार और धारणा को निरंतर नई ऊंचाइयों तक पहुंचाता है। हमें हर एक जिज्ञासा और हर एक प्रश्न का उत्तर पुस्तकों से प्राप्त होता है। राज्यपाल ने पुस्तकालय की स्थापना के लिए विधानसभा अध्यक्ष को बधाई दी। उन्होंने कहा कि उत्तराखण्ड विधानसभा के विधायकगणों को जहां एक ओर संसदीय कार्यों में सहायता मिलेगी वहीं दूसरी ओर पुस्तकालय में उपलब्ध विशिष्ट पुस्तकों के अध्ययन से उन्हें सामाजिक कार्यों में भी लाभ होगा।
राज्यपाल ने कहा कि इसके साथ-साथ टेक्नोलॉजी को अपनाते हुए नवीन वेबसाइट को अपडेट और आधुनिक बनाया है। तकनीकी का विकास बहुत बड़े स्तर पर प्रारंभ हो गया है, हमें आधुनिक तकनीक को मानवता की सेवा, देश की प्रगति और लोगों की भलाई के लिए हर क्षेत्र में लागू करना होगा। वर्तमान समय में टेक्नोलॉजी, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डिजीटाइजेशन, सोशल मीडिया और मास मीडिया के साथ जुड़ना बहुत जरूरी है। आधुनिक भारत, विकसित भारत और आत्मनिर्भर भारत के सपनों को पूरा करने के लिए नवीन तकनीकों का अपनाना आवश्यक है।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि विधानसभा में नवनिर्मित पुस्तकालय के लोकार्पण एवं नवीन वेबसाइट लांच होने से यहां पर संसदीय परंपराओं के ज्ञान एवं अन्य महत्वपूर्ण आवश्यक जानकारियों के लिए विधानसभा में लोगों को एक ऐसा स्थान मिल गया है, जहां पर ज्ञान वर्द्धन कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि विधानसभा में इस पुस्तकालय के माध्यम से सभी निर्वाचित सदस्य अपनी संसदीय समस्याओं के समाधान के साथ ही संसदीय परंपराओं एवं सदन के भीतर होने वाली कार्यवाहियों की बारीक से जानकारी प्राप्त कर सकते हैं। विधानसभा में पुस्तकालय की बेहतर सुविधा उपलब्ध करवाने के लिए उन्होंने विधानसभा अध्यक्ष ऋतु खंडूड़ी भूषण का आभार व्यक्त किया। संसदीय परंपराओं एवं ज्ञान पर आधारित पुस्तकों का समावेश इस पुस्तकालय में किया गया है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि पुस्तकों के माध्यम से नियमित तरीके से अध्ययन करने की आदत सभी की होनी चाहिए। पुस्तकें हमारे दिमाग के लिए खुराक का कार्य भी करती हैं। उलझनों को सुलझाने में भी पुस्तकें अहम भूमिका निभाती हैं। उन्होंने कहा कि पुस्तकालय में उपलब्ध पुस्तकों से कार्यसूची के अनुसार सदन की कार्यवाही की जानकारियां एवं पुराने अभिलेखों से अनेक लोगों का मार्गदर्शन होगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में आज शैक्षिक सुविधाओं के विस्तार और साक्षरता की उच्च दर से समाज में सभी क्षेत्रों में व्यापक स्तर पर परिवर्तन आया है।
विधानसभा अध्यक्ष ऋतु खंडूड़ी भूषण ने कहा कि पुस्तकालय की स्थापना की प्रेरणा उन्हें अपनी माँ से मिली। चरित्र के निर्माण में पुस्तकों की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। उन्होंने कहा कि विधानसभा स्थित पुस्तकालय में अभी 20 हजार से अधिक पुस्तकों का संग्रहण किया गया, इसे और बढ़ाया जायेगा। उन्होंने कहा कि इस पुस्तकालय के माध्यम से लोगों को संसदीय परंपराओं की जानकारी एवं संविधान की सम्पूर्ण जानकारी प्राप्त करने में बहुत मदद मिलेगी। विधानसभा अध्यक्ष ने कहा कि हमारा प्रयास है कि यहां पर पुस्तकों का संकलन इतना बढ़ाया जाय कि, शोधकर्ताओं को भी यहां पर बुला सकें। उन्होंने कहा कि विधानसभा स्थित पुस्तकालय के लिए जो लोग भी पुस्तकें दान करना चाहते हैं, कर सकते हैं।
नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य ने कहा कि विधानसभा में एक अच्छे पुस्तकालय की जरूरत काफी समय से महसूस हो रही थी। उन्होंने बेहतर पुस्तकालय की व्यवस्था के लिए विधानसभा अध्यक्ष के प्रयासों की सराहना की। पुस्तकें मानवीय मूल्यों की धरोहर है। उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों एवं राज्य आन्दोलनकारियों के देश एवं प्रदेश के योगदान की जानकारी भी लोगों को मिले। इन महानुभावों के जीवन चरित्र पर आधारित पुस्तकों का समावेश भी पुस्तकालय में होना चाहिए।
इस अवसर पर कैबिनेट मंत्री डा. प्रेमचंद अग्रवाल, सुबोध उनियाल, डॉ. धन सिंह रावत, सभापति पुस्तकालय समिति शहजाद सहित अनेक विधायकगण, उच्चाधिकारी एवं विधानसभा के अधिकारी, कर्मचारी उपस्थित रहे।

सीएम ने बरसात से प्रभावित क्षेत्रों का किया औचक निरीक्षण

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने बरसात से प्रभावित क्षेत्रों का औचक निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान आई.एस.बी.टी देहरादून में सड़क पर जल भराव को देखते हुए मुख्यमंत्री ने जिलाधिकारी देहरादून को निर्देश दिये कि जल भराव के कारणों की जाँच की जाय एवं जो भी अधिकारी इसमें दोषी पाये जाते हैं, उन पर सख्त कारवाई की जाए। ड्रेनेज की समस्या का शीघ्र समाधान करवाने के निर्देश मुख्यमंत्री ने दिए।

मुख्यमंत्री ने इसके बाद चन्द्रबनी देहरादून का स्थलीय निरीक्षण किया। चन्द्रबनी में एक कॉलोनी में जंगल से पानी आने की वजह से जलभराव की स्थिति आई। स्थानीय लोगों ने बताया कि यहां पर सुरक्षा दीवार का काम पूरा न होने के कारण यह समस्या आ रही है। मुख्यमंत्री ने जिलाधिकारी देहरादून को निर्देश दिये कि इस समस्या का शीघ्र समाधान किया जाए। यदि लोगों को खाद्यान्न एवं अन्य आवश्यक वस्तुओं की जरूरत पड़ेगी, तो इसकी समुचित व्यवस्था की जाय।

निरीक्षण के दौरान आयुक्त गढ़वाल विनय शंकर पाण्डेय, जिलाधिकारी देहरादून सोनिका एवं जिला प्रशासन के अधिकारी उपस्थित थे।

एक फोन कॉल से दूर होगी देहरादून के नागरिकों की समस्याः सीएम

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मुख्यमंत्री कैम्प कार्यालय में ‘अपणि सरकार’ नागरिक सेवाएं आपके द्वार योजना का फ्लैग ऑफ किया। देहरादून के नागरिकों को एक फोन कॉल पर अपणि सरकार पोर्टल की नागरिक सेवाएं उनके द्वार पर उपलब्ध होगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि नागरिकों को उनके घर पर जाकर जन सेवा केन्द्र के माध्यम से सेवाएं उपलब्ध कराये जाने की शुरूआत की गई है, यह सेवा जल्द ही राज्य के अन्य स्थानों पर भी शुरू की जायेगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार की प्राथमिकता है की नागरिक सेवाओं का लाभ आम जन को उनके घर पर ही मिल जाए। अभी तक 575 सेवाएं ऑनलाइन रूप से अपणि सरकार पोर्टल पर उपलब्ध करायी जा रही हैं।
वर्तमान में पायलट रूप में यह सेवा देहरादून शहर के 100 वार्डों में नजदीकी सी.एस.सी केंद्र के संचालकों द्वारा उपलब्ध करायी जाएगी। सूचना प्रौद्योगिकी, सुराज व विज्ञान प्रौद्योगिकी विभाग के अंतर्गत आई.टी.डी.ए ने “डोर स्टेप डिलीवरी” हेतु सी.एस.सी-एस.पी.वी को यह जिम्मेदारी सौंपी है। देहरादून शहर के सी.एस.सी संचालकों को पुलिस वेरिफिकेशन के उपरांत पहचान-पत्र जारी किए गए हैं। इस सेवा का लाभ उठाने के लिए नागरिक 18009110007 टोल फ्री नंबर पर फोन कर सकते हैं। नागरिकों की सुविधानुसार घर पर ही आवेदन लिया जाएगा तथा संबंधित प्रमाण पत्र / अभिलेख घर पर ही उपलब्ध कराया जाएगा।
सचिव शैलेश बगौली ने बताया कि इस सेवा की तीन माह की समीक्षा उपरांत पूरे प्रदेश में इस सेवा को उपलब्ध कराये जाने का लक्ष्य है। भविष्य में दूर दराज क्षेत्रों में निवास करने वाले वरिष्ठ नागरिकों को इस सेवा से विशेष लाभ होगा।
आई.टी.डी.ए. निदेशक नितिका खण्डेलवाल ने जानकारी दी कि सी.एस.सी. द्वारा केंद्र व राज्य की सरकारी सेवाओं के अलावा व्यावसायिक सेवाएँ जैसे बीमा, शिक्षण, बैंकिंग, पेंशन, डिजी पे, टेली-हेल्थ, टेली-लॉ भी नागरिकों को ग्राम स्तर तक उपलब्ध करायी जा रही हैं।
इस अवसर पर विधायक शिव अरोरा, सचिव विनोद कुमार सुमन, अपर निदेशक आई.टी.डी.ए. गिरीश चंद्र गुणवंत, व आईटीडीए एवं सीएससी-एसपीवी उत्तराखण्ड के अधिकारी उपस्थित थे।

प्रदेश के प्रत्येक बच्चे को कैरियर के सम्बन्ध में परामर्श देने के निर्देश-मुख्य सचिव

मुख्य सचिव डॉ. एस.एस. संधु ने बुधवार को सचिवालय में शिक्षा विभाग के अधिकारियों के साथ बैठक कर प्रदेश के सरकारी स्कूलों में कैरियर काउंसलिंग की व्यवस्था शुरू किए जाने के निर्देश दिए। मुख्य सचिव ने कहा कि प्रदेश के प्रत्येक बच्चे को कैरियर के सम्बन्ध में परामर्श दिया जाए।
मुख्य सचिव ने कहा कि प्रदेश के प्रत्येक बच्चे की काउंसिलिंग सुनिश्चित हो सके इसके लिए प्रोफेशनल कैरियर काउंसलर की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। इसके लिए बच्चों में रुचि और कौशल को जांचने हेतु परीक्षा और उसके परिणाम के उपरांत परामर्श उपलब्ध करवाया जा सके। उन्होंने कहा कि यह परामर्श भौतिक रूप से, दूरस्थ क्षेत्रों में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम या किसी एक कॉमन सेंटर में बच्चों को बुलाकर किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि 8वीं कक्षा से ऊपर सभी बच्चों को इसका लाभ मिलना सुनिश्चित किया जाए।
मुख्य सचिव ने निर्देश दिए कि प्रदेश को आवासीय विद्यालयों से संतृप्त किया जाए। उन्होंने कहा कि छात्रावासों को विद्यालयों के भाग के रूप में ही तैयार किया जाए। उन्होंने कहा कि ऐसे दूरस्थ क्षेत्र जहां सड़कों एवं आधारभूत सुविधाओं की कमी के कारण उत्कृष्ट विद्यालय में शामिल नहीं किया जा सकता, ऐसे स्कूलों के पास लगे कस्बों और छोटे शहरों में आवासीय विद्यालय तैयार किए जाएं। इससे इन दूरस्थ क्षेत्रों के बच्चे भी हॉस्टल में रहकर गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्राप्त कर सकेंगे। उन्होंने कहा कि इसके लिए बजट की कमी नहीं होने दी जाएगी।
मुख्य सचिव ने प्रदेश के प्रत्येक जनपद में 2, 3 मॉडल लैब भी तैयार किए जाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि इन मॉडल लैब को टॉप क्लास का बनाया जाना है। उन्होंने कहा कि छात्रों को रोस्टर के आधार पर इन प्रयोगशालाओं में भेजा जाए। प्रत्येक छात्र को प्रयोगात्मक कार्य करने का अवसर प्रदान किया जाए। उन्होंने कहा कि यह प्रयोगशालाएं आसपास के स्कूलों के सभी बच्चे प्रयोग कर सकें, इसके लिए कौन से स्कूल को किस प्रयोगशाला में जाना है इसका रोस्टर भी तैयार किया जाए।
इस अवसर पर सचिव रविनाथ रमन एवं महानिदेशक शिक्षा बंशीधर तिवारी सहित अन्य उच्चाधिकारी उपस्थित रहे।

पीएम को भाए काफल, कहा-रसीला और दिव्य मौसमी फल है काफल

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी द्वारा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भेंट किये गए उत्तराखंड के प्रसिद्ध फल काफल के प्रत्युत्तर में प्रधानमंत्री ने पत्र के माध्यम से मुख्यमंत्री धामी का आभार व्यक्त किया है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को संबोधित अपने पत्र में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा है कि देवभूमि उत्तराखण्ड से भेजे गए रसीले और दिव्य मौसमी फल ’काफल’ प्राप्त हुए। हमारी प्रकृति ने हमें एक से बढ़कर एक उपहार दिए हैं और उत्तराखण्ड तो इस मामले में बहुत धनी है, जहां औषधीय गुणों से युक्त कंद-मूल और फल-फूल प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं। काफल ऐसा ही एक फल है जिसके औषधीय गुणों का उल्लेख प्राचीन आयुर्वेदिक ग्रंथों में भी मिलता है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा है कि काफल उत्तराखण्ड की संस्कृति में भी रचा बसा है। इसका उल्लेख विभिन्न रूपों में यहां के लोकगीतों में भी पाया जाता है। उत्तराखण्ड जाएं और वहां मिलने वाले विभिन्न प्रकार के पहाड़ी फलों का स्वाद ना लें, तो यात्रा अधूरी लगती है। गर्मियों के मौसम में पक कर तैयार होने वाले काफल राज्य में आने वाले पर्यटकों में भी खासे लोकप्रिय हैं। अपनी बढ़ी हुई मांग के कारण मध्य हिमालयी क्षेत्रों में पाए जाने वाला यह फल स्थानीय लोगों को आर्थिक मजबूती भी प्रदान कर रहा है। मुझे खुशी है कि काफल के लिए उपयुक्त बाजार सुनिश्चित कर गुणों से भरपूर इस फल को ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुंचाने के प्रयास किए जा रहे हैं। बाबा केदार और भगवान बद्री विशाल से उत्तराखंड के लोगों के कल्याण और राज्य की समृद्धि की कामना करता हूँ।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने प्रधानमंत्री के पत्र हेतु हार्दिक आभार व्यक्त करते हुए कहा है कि प्रधानमंत्री के इन स्नेहपूर्ण शब्दों से हमारा तथा समस्त राज्यवासियों का उत्साहवर्धन हुआ है।

हर्बल टूरिज्म पार्क योजना को धरातल पर उतारन के निर्देश

मुख्य सचिव डॉ. एस.एस. संधु ने मंगलवार को सचिवालय में प्रदेश में जड़ी-बूटी के विकास के सम्बन्ध में बैठक ली। मुख्य सचिव ने कहा कि प्रदेश में जड़ी-बूटी और इस क्षेत्र में रोजगार की सम्भावनाओं को देखते हुए, जड़ी-बूटी उत्पादन और प्रसंस्करण को बढ़ावा दिए जाने की आवश्यकता है।
मुख्य सचिव ने कहा कि वन पंचायतों के लिए शीघ्र ही योजना तैयार की जाए। जड़ी-बूटी की दिशा में जो वन पंचायतें पहले से कार्य कर रही हैं, उन्हें इस योजना में अवश्य शामिल किया जाए। उन्होंने योजना के लिए नियम व शर्तों को सरल बनाए जाने के भी निर्देश दिए। कहा कि किसी भी योजना को सफल बनाने के लिए उसके नियमों को सरल रखा जाना जरूरी है। उन्होंने कहा कि हर्बल टूरिज्म पार्क योजना भी शीघ्र शुरू की जाए। योजनाओं को चरणबद्ध तरीके से शुरू किया जा सकता है। जो वन पंचायतें अच्छा कार्य करेंगी, उनको अधिक क्षेत्रफल में कार्य दिया जा सकता है।
मुख्य सचिव ने वन विभाग को लीसा के सम्बन्ध में प्रदेश की नियमावली को भी अपडेट किए जाने के निर्देश दिए। कहा कि लीसा (रेजिन) के उत्पादन में पुराने जमाने की तकनीक प्रयोग की जा रही है।
इस अवसर पर प्रमुख वन संरक्षक अनूप मलिक एवं सचिव दीपेन्द्र कुमार चौधरी सहित जड़ी-बूटी शोध संस्थान के अधिकारी भी उपस्थित रहे।

केदारनाथ पुनर्निर्माण कार्यों को समय से पूरा करने के निर्देश

मुख्य सचिव डॉ. एस.एस. संधु ने मंगलवार को सचिवालय में केदारनाथ पुनर्निर्माण कार्यों की समीक्षा की। मुख्य सचिव ने अधिकारियों को सभी कार्य निर्धारित समय सीमा में पूर्ण करने के निर्देश दिए।
मुख्य सचिव ने कहा कि कार्य समय से पूर्ण हो इसके लिये अधिक से अधिक श्रमिकों की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। रात्रि शिफ्ट में भी कार्य किए जाएँ। निर्माण सामग्री की उपलब्धता भी सुनिश्चित की जाए। मुख्य सचिव ने अल्टरनेटिव ट्रेक रूट के शीघ्र निर्माण के लिए वन विभाग एवं लोक निर्माण विभाग को मिलकर तेज़ी से कार्य करने के निर्देश दिए।
मुख्य सचिव ने लिंचोली का भी मास्टर प्लान शीघ्र तैयार किए जाने के निर्देश दिये। उन्होंने कहा कि सभी कार्य समय पर पूर्ण हो सके इसके लिए साप्ताहिक समय सीमा निर्धारित की जाए। उन्होंने केदारनाथ के साथ ही बद्रीनाथ में बन रहे अस्पतालों के उपकरण आदि खरीदने के लिये भी शीघ्र प्रक्रिया शुरू किए जाने के निर्देश दिए।
बैठक के दौरान बताया गया कि संगम घाट का कार्य 18 अगस्त तक पूर्ण कर लिया जाएगा। इसके साथ ही, एलिवेटेड ब्रिज का कार्य 31 दिसम्बर तक पूर्ण कर लिया जाएगा। बताया गया कि सिविक एमेनिटी बिल्डिंग 30 नवम्बर तक पूर्ण कर ली जाएगी।
इस अवसर पर ओएसडी भास्कर खुल्बे, प्रमुख सचिव आर.के. सुधांशु, सचिव सचिन कुर्वे एवं डॉ. पंकज कुमार पांडेय सहित अन्य अधिकारी उपस्थित रहे।

राज्य सरकार भाषा संस्थान की स्वायत्तता को बरकरार रखते हुए इसके विकास के लिए करेगी हर संभव कार्य-मुख्यमंत्री

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने शुक्रवार को सर्वे चौक स्थित आई.आर.डी.टी. सभागार में आयोजित उत्तराखण्ड भाषा संस्थान द्वारा आयोजित साहित्य गौरव सम्मान समारोह तथा लोक भाषा सम्मेलन में 9 साहित्यकारों को उत्तराखण्ड गौरव सम्मान से सम्मानित किया। उन्होंने कहा कि सम्मानित हुये साहित्यकार अपनी साहित्यिक कृतियों से हमारी लोक भाषा का मान सम्मान बढ़ाते रहेंगे। मुख्यमंत्री ने कहा कि आगामी वर्षों में भाषा संस्थान अपनी साहित्यिक एवं भाषाई गतिविधियों को व्यापक स्तर प्रदान करेगा।
इस अवसर पर मुख्यमंत्री द्वारा जिन साहित्यकारों को प्रतिष्ठित उत्तराखण्ड साहित्य गौरव सम्मान से सम्मानित किया गया उनमें संतोष कुमार निवारी को चन्द्रकुंवर बर्त्वाल पुरस्कार, अमृता पाण्डे को शैलेश मटियानी पुरस्कार, प्रकाश चन्द्र तिवारी को डॉ. पीताम्बर दत्त बड़थ्वाल पुरस्कार, दामोदर जोशी ‘देवांशु’ को भैरव दत्त धूलिया पुरस्कार, राजेन्द्र सिंह बोरा उर्फ त्रिभुवन गिरी को गुमानी पंत पुरस्कार, नरेन्द्र कठैत को भजन सिंह ‘सिंह’ पुरस्कार, महावीर रवांल्टा को गोविन्द चातक पुरस्कार, गुरूदीप को सरदार पूर्ण सिंह पुरस्कार एवं राजेश आनन्द ‘असीर’ को प्रो. उन्नवान चिश्ती पुरस्कार से सम्मानित किया गया। सभी सम्मानित साहित्यकारों को अंगवस्त्र, प्रशस्ति पत्र एवं 1 लाख की सम्मान राशि प्रदान की गई।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि ऐसे आयोजनों से प्रदेश में स्थानीय भाषाओं के साथ-साथ विभिन्न क्षेत्रों में बोली जाने वाली बोलियों व उनमें रचे जा रहे साहित्य को भी प्रोत्साहन मिलेगा। उन्होंने कहा कि देश के अनेक साहित्यकारों ने हिन्दी को विश्व पटल पर स्थापित करने में महान योगदान दिया है। हिंदी एक उदार, ग्रहणशील और सहिष्णु भाषा तो है ही, ये भारत की राष्ट्रीय चेतना की संवाहिका भी है। यह हमारी परंपराओं और हमारी विरासत का बोध कराने वाला एक सतत अनुष्ठान है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि हिन्दी का विकास किसी अन्य भाषा या बोली की कीमत पर नहीं हो रहा है बल्कि आज भारत की सारी भाषाएं एक साथ आगे बढ़ रही है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति में बच्चों को शुरूआती शिक्षा मातृभाषा में देने का प्राविधान किया गया है। इससे यह उम्मीद जगती हैं कि उत्तराखण्ड जैसे पर्वतीय प्रदेश में हिन्दी के साथ-साथ गढ़वाली, कुमाउनी, जौनसारी आदि बोलियों का भी विकास होगा। हमारे यहां गढ़वाली, कुमाउनी और जौनसारी बोलियां बोली जाती है परन्तु हमारे प्रदेश का हिन्दी के साथ गहरा लगाव है। उन्होंने इसे सुखद संयोग बताया कि साहित्य गौरव सम्मान पाने वाले साहित्यकारों में वे साहित्यकार भी शामिल हैं जो अनेक विशिष्ट बोलियों में रचना कर्म कर रहे हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि जो समाज अपनी भाषा और बोलियों का सम्मान नहीं करता वह अपनी प्रतिष्ठा गवां देता है। अपनी भाषा व बोलियों को बचाने और उन्हें बढ़ाने के कार्य में आम लोगों की व्यापक सहभागिता की जरूरत है। इस महत्वपूर्ण कार्य को हम सभी को अपने घर के भीतर से आरम्भ करना होगा। विशेष रूप से बच्चों के साथ संवाद करते समय अपनी मातृभाषा और आम बोलियों का प्रयोग किया जाना चाहिए। वे स्वयं अपने बच्चों को अपनी भाषा व बोली सिखाने का प्रयास कर रहे है। इसमें सभी को सामूहिक रूप से प्रयास करना होगा। हमारी वैचारिक निष्ठा हिन्दी के प्रति रही है। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में इस दिशा में प्रभावी प्रयास किये जा रहे है। आज आधिकारिक मंचों से लेकर शिक्षा तक में हिंदी को अभूतपूर्व स्थान दिया जा रहा है। मेडिकल और इंजिनयरिंग जैसे विषयों की पढ़ाई अब हिंदी में होना कोई स्वप्न नहीं है जबकि कुछ वर्ष पूर्व तक ये महज एक कल्पना थी। हिंदी के गौरव को बनाए रखना हम सभी का दायित्व है विश्वास व्यक्त किया कि हमारी युवा पीढ़ी हिंदी को एक नवीन स्तर देने का कार्य करेगी। हिंदी के विकास के लिए जब हम सभी मिलकर कार्य करेंगे, तभी हिन्दी को अपेक्षित सम्मान प्राप्त होगा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि इस कार्यक्रम के माध्यम से लोक भाषाओं पर विद्वान साहित्यकारों के मध्य विचार-विमर्श किया जाएगा। जिससे हिंदी व अन्य लोक भाषाओं का संरक्षण, विकास और उत्थान हो सके। यहां प्राप्त साहित्यकारों के महत्वपूर्ण सुझावों को संस्थान अपनी भविष्य की कार्ययोजना में अवश्य सम्मिलित करेगा। अपनी स्थापना के बाद से उत्तराखण्ड भाषा संस्थान ने कई महत्वपूर्ण कार्य किये हैं। अब सरकार ने हिन्दी अकादमी, पंजाबी अकादमी, उर्दू अकादमी और लोक भाषा बोली अकादमी को एक छत के नीचे लाते हुए उत्तराखण्ड भाषा संस्थान को पुर्नगठित किया है। हमारी सरकार भाषा संस्थान की स्वायत्तता को बरकरार रखते हुए इसके विकास के लिए हर संभव कार्य करेगी। उन्होंने साहित्यकारों, भाषाविदों, शोधार्थियों से अनुरोध किया कि वे भाषा संस्थान के साथ मिलकर भाषाई विकास के लिए कार्य करें और इस संस्थान को देश के प्रतिष्ठित संस्थान के तौर पर विकसित करने के लिए मिलकर प्रयास करें।
मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखण्ड शैक्षिक व सांस्कृतिक रूप से प्रबुद्ध लोगों की भूमि है इसी के अनुरूप हमारे भाषा संस्थान की पहचान भी पूरे देश में होनी चाहिए। इसके लिये सामूहिक सहयोग एवं प्रयासों की भी उन्होंने जरूरत बताई है। उन्होंने कहा कि हमने उत्तराखण्ड को देश के अग्रणी राज्यों में सम्मिलित करने के लिये विकल्प रहित संकल्प के साथ आगे बढ़ रहे है। सभी संचालित विकास योजनाओं का लाभ समय पर सभी को मिले इसका भी हमारा संकल्प है।
मुख्यमंत्री ने अन्तर्राष्ट्रीय हिन्दी विश्वविद्यालय वर्धा के पूर्व कुलपति प्रो. गिरीश्वर मिश्र द्वारा उत्तराखण्ड में समान नागरिक संहिता कानून बनाये जाने की दिशा में राज्य सरकार के सकारात्मक प्रयासों का उल्लेख करते हुए कहा कि उत्तराखण्ड सम्पूर्ण देश को शुद्ध जल, हवा व पर्यावरण प्रदान करने वाला प्रदेश है। यह ऋषियों मुनियों, तपस्वियों, महान साहित्यकारों व प्रबुद्धजनों की भूमि रही है। ऋषियों मुनियों द्वारा मंत्रो व ऋचाओं के जो शब्द यहां रचे गये वे कभी समाप्त नहीं होते। उन्ही की ऊर्जा का प्रतिफल है कि हमने इस दिशा में पहल की है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि समान नागरिक संहिता के लिये हमने 12 फरवरी, 2022 को जनता से वादा किया था कि हम समान नागरिक संहिता लायेंगे। उत्तराखण्ड देवभूमि है, गंगा-यमुना का प्रदेश है, वनों पर्वतों से आच्छादित है। दो-दो अंतरराष्ट्रीय सीमा से लगा है। धर्म, अध्यात्म एवं संस्कृति का केन्द्र है। राज्य में कोई भी किसी पंथ, समुदाय, धर्म, जाति का हो सबके लिये एक समान कानून हो, इसके प्रयास किये गये है। उन्होंने कहा कि संविधान निर्माताओं में विद्धान लोग थे उन्होंने इसमें इसका प्राविधान किया है। उत्तराखण्ड की जनता ने किसी राजनैतिक दल को लगातार दूसरी बार सरकार बनाने का अवसर प्रदान कर, इस पर 2022 में अपनी मुहर लगाई। समान नागरिक संहिता लागू करने के लिये गठित समिति द्वारा डेढ़ साल में 02 लाख से भी ज्यादा लोगों के सुझाव, विचार लिये। सभी संगठनों, संस्थाओं, स्टेट होल्डरों से वार्ताकर इसका ड्राफ्ट लगभग तैयार किया जा रहा है। हमें जैसे ही यह ड्राफ्ट मिलेगा उसे देवभूमि में लागू करने का कार्य करेंगे। देश में एक विधान एक निशान एक प्रधान के साथ एक कानून की दिशा में हम आगे बढेंगे। इस दिशा में देश के अन्य राज्य भी आगे आयेंगे।
मुख्यमंत्री ोंने कहा कि स्वामी दयानन्द सरस्वती ने हिंदी की महानता से प्रभावित होकर कहा था कि हिंदी के द्वारा सारे भारत को एक सूत्र में पिरोया जा सकता है। एक भाषा के लिए लोकप्रियता और स्वीकारिता का इस से बड़ा मापक क्या होगा कि, भारत जैसे विशाल देश में अनेकों क्षेत्रीय भाषाएं और बोलियां होने के बावजूद हिन्दी किसी सदानीरा नदी की भांति स्वछंदता से प्रवाहित होती है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि देश की विभिन्न भाषाओं के साथ सामंजस्य बिठा लेने की जितनी प्रबल शक्ति हिंदी में है उतनी किसी दूसरी भाषा में नहीं है। आज विश्व, हिंदी के सामर्थ को, इसके महात्म्य को पहचान रहा है और दुनिया के 100 से अधिक देशों में हिन्दी की स्वरलहरियां गूंज रही हैं। वर्ष 1977 में संयुक्त राष्ट्र संघ के अधिवेशन में जब भारत रत्न स्वर्गीय अटल बिहारी वाजपेयी जी ने हिंदी में भाषण दिया था तो वो हम सभी के लिए एक ऐतिहासिक क्षण था।
मुख्यमंत्री ने अटल की कविता ‘गूंजी हिन्दी विश्व में, स्वप्न हुआ साकार, राष्ट्र संघ के मंच से, हिन्दी का जयकार का उल्लेख कर कहा कि अटल जी हिंदी के बड़े उपासक थे और उन्होंने आजीवन इस भाषा की सेवा करने, इसको समृद्ध बनाने का प्रयास किया। आज हमें गर्व है कि उस महान हुतात्मा के दिखाए मार्ग पर प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व में आगे बढ़ कर, हिंदी का वैश्विक प्रचार-प्रसार किया जा रहा है। वर्तमान में हमारे प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी विश्व भर में हिन्दी का माथा ऊँचा कर रहे हैं। भारत रत्न आदरणीय श्री अटल बिहारी वाजपेयी जी के बाद प्रधानमंत्री श्री मोदी जी ही दूसरे ऐसे नेता हैं जो वैश्विक संस्थाओं को हिन्दी में सम्बोधित करते हैं।

संविधान की आठवीं सूची में राज्य की समृद्ध भाषा बोलियों को स्थान मिले इसके भी किये जायेंगे प्रयास-भाषा मंत्री
इस अवसर पर भाषा विभाग के मंत्री सुबोध उनियाल ने कहा कि साहित्य सृजन, समृद्ध लोक संस्कृति उत्तराखण्ड की परम्परा है। इस धरती ने साहित्यकारों को साहित्य सृजन की प्रेरणा देने का कार्य किया है। यहां का शांत एवं आध्यात्मिक वातावरण साहित्य एवं शिक्षा के लिये अनुकूल रहा है। राज्य में लोक भाषाओं को बढावा देने के लिये स्कूलों में इसे अनिवार्य किया गया है। उन्होंने कहा कि बढ़ते शहरीकरण के इस दौर में लोगों को अपनी मातृभाषा के प्रति लगाव कुछ कम हुआ है। इसमें इस लगाव को बढावा देने के प्रयास करने होंगे। यह हम सभी के सामूहिक प्रयासों से ही संभव हो सकेगा। उन्होंने कहा कि संविधान की आठवीं सूची में राज्य की समृद्ध भाषा बोलियों को स्थान मिले इसके भी प्रयास किये जायेंगे। उन्होंने कहा कि उत्तराखण्ड भाषा संस्थान नये प्रयोग एवं सुधारात्मक प्रयासों से विभिन्न भाषाओं के साहित्यकारों को आगे बढ़ाने का प्रयास करेगा। उन्होंने कहा कि अपनी भाषा बोली व संस्कृति को जिन्दा रखना बडी बात है।

उत्तराखण्ड साहित्य गौरव सम्मान भाषा एवं साहित्य सृजन को बढ़ावा देने की दिशा में है बड़ी पहल-प्रो. गिरीश्वर मिश्र
अन्तर्राष्ट्रीय हिन्दी विश्वविद्यालय वर्धा के पूर्व कुलपति प्रो. गिरीश्वर मिश्र ने कहा कि भाषा के कारण ही हमारा अस्तित्व है। भाषा का हमारे जीवन में दखल रहता है।जीवन का स्पंदन है भाषा। उन्होंने कहा कि आज के दौर में भाषा के प्रति जो गम्भीरता हमारे व्यवहार में होनी चाहिए, उसमें कमी आ रही है। हमें इस दिशा में सोचना होगा। उन्होंने उत्तराखण्ड साहित्य गौरव सम्मान की पहल की सराहना करते हुये इसे भाषा एवं साहित्य सृजन को बढ़ावा देने की दिशा में बडी पहल बताया। उन्होंने कहा कि हमारे मनीषियों ने किसी भी शुभ कार्य में मंगलाचरण की परम्परा को प्रमुखता दी है, इस प्रकार सबके मंगल की कामना हमारी परम्परा है। भाषा जोड़ने का कार्य तो करती ही है, अनेकता में एकता के भाव को भी इससे बढ़ावा मिलता है। भाषा मन, विचार और कर्म को एक साथ चलाने का भी माध्यम है। प्रो. मिश्र ने उत्तराखण्ड में समान नागरिक संहिता कानून बनाए जाने के लिये मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी के प्रयासों की सराहना करते हुये इसे सबको साथ लेकर चलने की पहल बताया।

मनुष्य और जीवों में शब्द का ही अंतर है। मनुष्य अकेली प्रजाति है जो कल्पना कर सकती है-अनिल रतूड़ी
साहित्यकार एवं पूर्व पुलिस महानिदेशक अनिल रतूड़ी ने इस अवसर पर भाषा साहित्य एवं संस्कृति के ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक पहलुओं पर विचार व्यक्त करते हुये कहा कि शब्द को ब्रह्म तथा ओम् शब्द को सृष्टि के अन्धकार दूर करने वाला बताया गया है। शब्द से ही साहित्य और भाषा का विकास हुआ है। मनुष्य और जीवों में शब्द का ही अंतर है। मनुष्य अकेली प्रजाति है जो कल्पना कर सकती है। उन्होंने कहा कि कुमाऊँ एवं गढवाल राजवंशो द्वारा अपने शासनकाल में कुमाऊं एवं गढवाली को अपनी राजभाषा बनाया गया था। इसके कई प्रमाण मिलते हैं। उन्होंने अपनी भाषा, बोली और संस्कृति को बढावा देने के प्रयासों की भी जरूरत बतायी। इससे राज्य निर्माण की अवधारणा साकार होने के साथ ही सांस्कृतिक मूल्यों के बेहतर संरक्षण में भी मदद मिलेगी।

उत्तराखण्ड भाषा संस्थान की निदेशक स्वाति एस. भदौरिया ने कहा कि उत्तराखंड भाषा संस्थान राज्य सरकार का एक ऐसा प्रयास है जिसके माध्यम से उत्तराखंड में भाषाओं के संरक्षण, उनके विस्तार और प्रोत्साहन संबंधी कार्यों को संपादित किया जा रहा है। अपने स्थापना के बाद से भाषा संस्थान ने विभिन्न शोध परियोजनाओं, भाषा एवं साहित्यिक संगोष्ठियों तथा सम्मान कार्यक्रमों के माध्यम से साहित्यकारों और जनसामान्य तक पहुंचने का प्रयास किया है।
उत्तराखंड राज्य अनेक भाषाओं, उपभाषाओं और बोलियों का प्रयोग करने वाला ऐसा क्षेत्र है जहां विपुल मात्रा में साहित्य रचा गया है और वर्तमान में भी रखा जा रहा है। उपर्युक्त के दृष्टिगत भाषा संस्थान सरकार की नीतियों के अनुरूप विभिन्न भाषाओं, उपभाषाओं और बोलियों के साहित्य को प्रोत्साहित करने के लिए सतत रूप से प्रयासरत है। इस अवसर पर विधायक खजान दास ने भी अपने विचार रखे।
कार्यक्रम में विधायक मोहन सिंह बिष्ट, प्रमोद नैनवाल, सचिव भाषा विनोद प्रसाद रतूड़ी सहित बडी संख्या में साहित्यकार एवं गणमान्य लोग उपस्थित थे। कार्यक्रम का संचालन साहित्यकार गणेश खुगशाल गणी ने किया।

कैबिनेट मंत्री अग्रवाल ने मोदी सरकार के 9 वर्ष के कार्यकाल की उपलब्धियां बताई

क्षेत्रीय विधायक व कैबिनेट मंत्री डॉ प्रेमचंद अग्रवाल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कार्यकाल के 9 वर्ष पूर्ण होने पर प्रेस वार्ता का आयोजन किया। इस दौरान उन्होंने प्रधानमंत्री के 9 साल के कार्यकाल को सेवा, सुशासन और गरीब कल्याण को समर्पित बताया।
रेलवे रोड स्थित जिला भाजपा कार्यालय ऋषिकेश में प्रेस वार्ता का आयोजन किया गया। मंत्री डॉ अग्रवाल ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में यह 9 साल का कार्यकाल सेवा, सुशासन और गरीब कल्याण को समर्पित रहा है। अनेक जन कल्याणकारी योजनाओं के माध्यम से समाज के हर वर्ग के लोगों के लिए उनके नेतृत्व में योजनाएं चलाई जा रही हैं। बताया कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में भारत की वैश्विक पटल पर अलग पहचान बनी है। विदेश यात्राओं में जिस तरह उनका सम्मान होता है, यह हर एक भारतीय का सम्मान है। आज पूरी दुनिया भारत को नई आशाओं के रूप में देख रही है।
डॉ अग्रवाल ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का देवभूमि उत्तराखण्ड से विशेष लगाव है। उनके मार्गदर्शन में पिछले 9 सालों में उत्तराखण्ड में हर क्षेत्र में तेजी से कार्य हुए हैं। भारत माला परियोजना, ऑल वेदर रोड, रेल कनेक्टिविटी, शिक्षा, चिकित्सा, इन्फ्रास्ट्रक्चर, कनेक्टिविटी के क्षेत्र में राज्य में तेजी से कार्य हुए हैं। केदारनाथ पुनर्निर्माण कार्य पर तेजी से कार्य चल रहा है। बद्रीनाथ में मास्टर प्लान के तहत कार्य प्रगति पर हैं। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने अपना हर क्षण देश सेवा के लिए समर्पित किया है।
डॉ अग्रवाल ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के मार्गदर्शन में सरकार का पूरा ध्यान विकास के नवरत्नों पर है। इसमें पहला रत्न-केदारनाथ-बद्रीनाथ धाम में 1300 करोड़ रुपए से पुनर्निर्माण का कार्य, दूसरा रत्न-ढाई हजार करोड़ रुपए की लागत से गौरीकुण्ड-केदारनाथ और गोविंदघाट-हेमकुण्ट साहिब रोपवे का कार्य, तीसरा रत्न- कुमायूं के पौराणिक मंदिरों को भव्य बनाने के लिये मानसखण्ड मंदिर माला मिशन का कार्य किया जा रहा है। इसके तहत पहले चरण में 16 मन्दिरों को शामिल किया गया है। चौथा रत्न-पूरे राज्य में होम स्टे को तेजी से बढ़ावा दिया जाना। पांचवा रत्न-राज्य में 16 ईको टूरिज्म डेस्टिनेशन का विकास, छठा रत्न-उत्तराखंड में स्वास्थ्य सेवाओं का तेजी से विस्तार, उधमसिंह नगर में एम्स का सेटलाइट सेंटर भी बनाया जा रहा है। सातवां रत्न- करीब 2 हजार करोड़ रुपए की लागत वाली टिहरी लेक डेवलपमेंट परियोजना के कार्य किये जा रहे हैं। आठवां रत्न-ऋषिकेश-हरिद्वार का एडवेंचर टूरिज्म और योग की राजधानी के रूप में विकास किया जा रहा है और नौवा रत्न-टनकपुर-बागेश्वर रेल लाइन इस पर भी जल्द काम शुरू हो जाएगा।
डॉ अग्रवाल ने कहा कि पीएम मोदी के नेतृत्व में केन्द्र सरकार ने गरीबों की सेवा, वंचितों का सम्मान, नारी सशक्तिकरण, स्वास्थ्य सुविधाओं की बेहतरी इन्फ्रास्ट्रक्चर, तकनीकि के विकास, पर्यावरण संरक्षण एवं अन्य अनेक क्षेत्रों में सराहनीय कार्य किये। उन्होंने बताया कि पीएम गरीब कल्याण अन्न योजना के तहत 80 करोड़ लोगों को मुफ्त अनाज, 11.88 करोड़ लोगों को नल से जल, स्वच्छ भारत अभियान के तहत 11.72 करोड़ शौचालयों का निर्माण किया गया और राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग को संवैधानिक दर्जा दिया गया। देश में 48.27 करोड़ जन-धन खाते खोले गये, प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत 3 करोड़ से अधिक आवास दिये गये। देश में 37 करोड़ आयुष्मान भारत हेल्थ एकाउंट बने हैं। पीएम किसान सम्मान निधि के माध्यम से 11 करोड़ से अधिक किसानों को 6000 रूपये सालाना दिये जा रहे हैं। सभी को सस्ती एवं सुलभ स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। कोविड काल में भारत ने दो स्वदेशी वैक्सीन बनाई, इससे भारतवासियों के अलावा अन्य देशों की मदद भी की गई। सड़क, रेल, हवाई कनेक्टिविटी का देश में तेजी से विस्तार हुआ। स्वास्थ्य सुविधाओं को मजबूत बनाने में हर क्षेत्र में तेजी से कार्य हुए।
डॉ. अग्रवाल ने कहा कि भारत को प्रधानमंत्री के नेतृत्व में जी-20 की अध्यक्षता करने का अवसर मिला है। प्रधानमंत्री के विस्तृत विजन की वजह से जी-20 की बैठकें देश के कोने-कोने में हो रही हैं। भारत की अर्थव्यवस्था पहले 11वें स्थान पर थी, जो प्रधानमंत्री के कुशल नेतृत्व की वजह से पांचवें स्थान की अर्थव्यवस्था बन गयी है।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में, आज अभूतपूर्व रूप से भारत का सांस्कृतिक उत्थान हो रहा है। सनातन संस्कृति का परचम विश्व में लहरा रहा है और हमारी आस्था के केन्द्रों का इतिहास और महत्व उसी गौरव के साथ प्रदर्शित किया जा रहा है, जिसके साथ इसे किया जाना चाहिए था।
इस मौके पर जिला अध्यक्ष भाजपा रविंद्र राणा, जिला उपाध्यक्ष दिनेश सती, मनोज ध्यानी, मंडल अध्यक्ष श्यामपुर दिनेश पयाल, पार्षद रीना शर्मा, मंडल अध्यक्ष रायवाला शिवानी भट्ट आदि उपस्थित रहे।