पूर्व सैनिकों ने मुख्यमंत्री का जताया आभार, सरकार ने की थी महत्वूपर्ण घोषणा

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत से मुख्यमंत्री आवास में पूर्व सैनिक वेल्फेयर एसोसियेशन के सदस्यों ने भेंट की। उन्होंने शौर्य दिवस के अवसर पर सैनिकों के हित में की गई कल्याणकारी घोषणाओं के लिए मुख्यमंत्री का आभार जताया। मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र ने शौर्य दिवस के अवसर पर सैनिकों की समस्याओं के समाधान के लिये विशेष रूप से अपर सचिव स्तर के अधिकारी को नोडल अधिकारी नियुक्त करने, उत्तराखण्ड के शहीद सैनिकों के लिये उनकी याद में विशाल मेमोरियल बनाना और सबसे महत्वपूर्ण घोषणा प्रदेश के सचिवालय में पूर्व सैनिकों को प्रवेश करने के लिये उनका आई कार्ड ही प्रवेश पत्र माने जाने की घोषणा की थी, इन घोषणाओं के प्रति प्रदेश के सैनिक बहुत प्रभावित हुए हैं जिसके लिए उन्होंने मुख्यमंत्री का आभार जताया है।
इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारा सैन्य बाहुल्य प्रदेश है। देव भूमि के साथ ही हमारे वीर सैनिकों ने अपने अदम्य साहस एवं शौर्य के बल पर इसे वीर भूमि बनाया है। वीर सैनिकों व उनके आश्रितों के कल्याण के लिये राज्य सरकार प्रतिबद्ध है।
इस अवसर पर विधायक मुन्ना सिंह चैहान, पूर्व सैनिक वेल्फेयर एसोसिएशन के केन्द्रीय अध्यक्ष पी.टी.आर शमशेर सिंह बिष्ट, महासचिव ओ. कैप्टन आर.डी.शाही, पी.बी.ओ.आर की अध्यक्षा महिला प्रकोष्ठ राजकुमारी थापा, उपाध्यक्षा कमला गुरूंग सहित बड़ी संख्या में संगठन के सदस्य उपस्थित थे।

हिमालयी राज्यों की सुरक्षा और विकास को केन्द्र सरकार से मांगी मदद

हिमालयन कॉन्क्लेव में गहन मंथन के पश्चात प्रतिभागी हिमालयी राज्यों द्वारा ‘‘मसूरी संकल्प’’ पारित किया गया। इसमें पर्वतीय राज्यों द्वारा हिमालय की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करने और देश की समृद्धि में योगदान का संकल्प लिया गया। साथ ही, प्रकृति प्रदत्त जैव विविधता, ग्लेशियर, नदियों, झीलों के संरक्षण का भी प्रण लिया गया। भावी पीढ़ी के लिए लोककला, हस्तकला, संस्कृति आदि का संरक्षण किया जाएगा। पर्वतीय संस्कृति की आध्यात्मिक परम्परा के संरक्षण व मानवता के लिए कार्य करने का संकल्प लिया गया। समानता व न्याय की भावना के साथ पर्वतीय क्षेत्रों के सतत विकास की रणनीति पर काम किया जाएगा। पर्वतीय सभ्यताओं के महान इतिहास व विरासत के संरक्षण का संकल्प लिया गया।

इससे पूर्व हिमालयन कॉन्क्लेव में बतौर मुख्य अतिथि प्रतिभाग करते हुए केंद्रीय वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने हिमालयन राज्यों के सम्मेलन के आयोजन के लिए आभार व्यक्त करते हुए कहा कि निश्चित रूप से यह आयोजन हिमालयी राज्यो के विकास में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। उन्होंने कहा कि लम्बे समय से इसकी आवश्यकता महसूस की जा रही थी। हिमालयन राज्य भारत का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। इन सभी राज्यों का विकास भारत सरकार की प्राथमिकताओं में है। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि सीमांत क्षेत्रों से पलायन को रोकने के लिए विशेष प्रयास करने होंगे। इसमें पंचायतीराज संस्थाएं महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं। दूरस्थ क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध करा कर ही पलायन को रोका जा सकता है। सीमांत क्षेत्रों में रहने वाले लोग देश की सुरक्षा में आंख और कान का काम करते हैं। इससे सुरक्षा व्यवस्था और मजबूत होगी। हमे विकास के साथ ही पर्यावरणीय सुरक्षा पर भी ध्यान देना होगा। पर्वतीय राज्यों में ऑर्गेनिक कृषि पर फोकस किया जाना चाहिए। इसमें स्थानीय युवाओं को जोड़े जाने की जरूरत है। पर्वतीय क्षेत्रों के युवाओं के लिए स्टार्ट-अप महत्वपूर्ण हो सकते हैं। इससे पलायन तो रुकेगा ही साथ ही क्षेत्र भी आर्थिक रूप से विकसित होगा। केन्द्रीय वितमंत्री ने कहा कि पर्वतीय क्षेत्रों में स्थानीय समुदायों ने हमेशा महत्वपूर्ण भूमिका निभायी है। विकास योजनाओं को फलीभूत करने के लिए स्थानीय समुदायों के सशक्तिकरण को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। सम्मेलन में प्रतिभागी राज्यों द्वारा चर्चा किये गये विषयों पर केन्द्र द्वारा गंभीरता से विचार किया जायेगा।

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने कॉन्क्लेव में आए प्रतिभागियों का स्वागत करते हुए कहा कि हमें गर्व है कि देश की सीमाओं की चैकसी की जिम्मेदारी मिली है। हिमालय राज्यों के सम्मेलन की मेजबानी का अवसर प्राप्त हुआ है यह उत्तराखण्ड के लिए सम्मान की बात है। हिमालय राज्यों की भौगोलिक परिस्थितियां समान हैं। मुझे आशा है कि देश की समृद्धि में योगदान करने के लिए यह एक अच्छा मंच साबित होगा। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के जल की एक-एक बूंद बचाने के संकल्प में हिमालयी राज्यों की महत्वपूर्ण भूमिका है। हम सभी को मिलकर जल संचय एवं जल संरक्षण के लिए काम करना होगा। नदियों के पुनर्जीवीकरण के लिए केन्द्रीय स्तर पर अलग से बजटीय प्रावधान किया जाना चाहिए। इको सिस्टम सर्विसिज के लिए हिमालयी राज्यों को और प्रोत्साहित किये जाने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि 2025 तक आर्थिक विकास के लक्ष्य को हासिल करने के लिए हिमालयी राज्यों में वैलनेस व टूरिज्म पर काम करना होगा। आपदा, पलायन सभी हिमालयी राज्यों की एक समान समस्या है। हम सभी को मिलकर देश की प्रगति के लिए काम करना है।
15वें वित आयोग के अध्यक्ष एन.के. सिंह ने हिमालयन कॉन्क्लेव को ऐतिहासिक बताते हुए कहा कि अपनी साझा समस्याओं को रखने व उनके हल के लिए नीति निर्धारण में यह एक महत्वपूर्ण प्लेटफार्म साबित होगा। केन्द्र भी हिमालयी राज्यों के साथ है। वित आयोग, हिमालयी राज्यों की समस्याओं से भलीभांति अवगत है। सम्मेलन में उठायी गयी बातों से वित्त आयोग भी सहमत है। इन समस्याओं को दूर करने के लिए संवैधानिक दायरे में हर सम्भव प्रयास किया जाएगा। हिमालयी राज्य वैश्विक पर्यावरण के लिए महत्वपूर्ण हैं। यहां जीवन स्तर को सुधारने के लिए क्या सिस्टम बनाया जा सकता है, इस पर विचार किया जाना चाहिए। हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने कहा कि पर्वतीय क्षेत्रों में जीवन अत्यंत कठिन होता है। यहां की समस्याएं अन्य राज्यों से अलग हैं। उन्होंने पर्वतीय क्षेत्रों में रेल व हवाई कनैक्टीविटी विकसित किये जाने की आवष्यकता बतायी। छोटे राज्यों के सीमित संसाधनों को देखते हुए केन्द्र द्वारा वित्तीय सहायता में प्राथमिकता दी जानी चाहिए।

नीति आयोग के उपाध्यक्ष राजीव कुमार ने कहा कि कि हिमालयी राज्यों में विकास की बहुत संभावनाएं हैं। इसके लिए हमें टारगेट सेट करने की आवश्यकता है। पर्यटन की संभावनाओं की दृष्टि से भी सभी हिमालयन राज्य बहुत ही समृद्ध हैं। अभी यहां घरेलू पर्यटकों की अधिकता है। पर्यटन को और अधिक तेजी से विकास करने के लिए अंतरराष्ट्रीय पर्यटकों को आकर्षित किया जाना बहुत ही जरूरी है। वैल्यू एडेड एग्रीकल्चर को प्रोत्साहित करना जरूरी है। लक्ष्यों को निर्धारित कर समयबद्ध तरीके से योजनाओं का क्रियान्वयन करना जरूरी है। इस सम्मेलन के माध्यम से सभी हिमालयन राज्य आपसी तालमेल से नई योजनाओं को साझा कर नीति आयोग के समक्ष रख सकते हैं। हमे अपनी समस्याओं और संभावनाओं का अध्ययन कर उसके अनुसार योजनाओं को बनाना चाहिए। हमे अपनी कृषि की लागत को कम करने की आवश्यकता है। संसाधनों की समीक्षा करने की आवश्यकता है। भविष्य में पानी की समस्या को देखते हुए सभी राज्यों द्वारा जल संरक्षण के लिए विशेष नीतियां बनाई जानी चाहिए। इसके लिए वॉटरशेड मैनेजमेंट की अत्यधिक आवश्यकता है। हमें नदियों के स्रोतों को बचाने के प्रयास करने होंगे। जल संरक्षण के लिए सभी राज्यों को अंतरराजयीय सहयोग से नीतियां तैयार करनी होंगी। सीमांत राज्यों को पलायन को रोकने और सीमांत क्षेत्रों में विकास करने की आवश्यकता है। विकास के लिए आकांक्षी जनपदों में विशेष ध्यान दिया जाना चाहिए।

मेघालय के मुख्यमंत्री कोनराड कोंगकल संगमा ने कहा कि हिमालयी राज्यों में विकास योजनाओं की लागत अधिक होती है। इसलिए केन्द्र द्वारा विभिन्न विकास योजनाओं के मानकों में इस ओर ध्यान दिया जाना चाहिए। आर्थिक विकास व पारिस्थितिकीय संतुलन को बनाये रखना, हिमालयी राज्यों की दोहरी जिम्मेदारी होती है। हमें सतत विकास के लिए रिस्पोंसिबल टूरिज्म पर फोकस करना होगा। उन्होंने पर्वतीय राज्यों में सांस्कृतिक आदान-प्रदान की आवष्यकता पर बल दिया। नागालैंड के मुख्यमंत्री नेफियू रियो ने सम्मेलन को बेहतर शुरूआत बताते हुए पर्वतीय क्षेत्रों में आजीविका संवर्द्धन व इको सिस्टम के महत्व पर जोर दिया। अरूणाचल के उप मुख्यमंत्री चोवना मेन ने कहा कि सीमांत क्षेत्रों में आधारभूत सुविधाओं के विकास पर विषेष ध्यान देना होगा। मिजोरम के मंत्री टी.जे.लालनुनल्लुंगा ने अपने सम्बोधन में प्राकृतिक आपदा, जैव विविधता संरक्षण में स्थानीय लोगो की भागीदारी, डिजीटल कनैक्टीविटी पर जोर दिया। सचिव, पेयजल एवं स्वच्छता भारत सरकार परमेष्वरमन अय्यर ने जल शक्ति अभियान पर प्रस्तुतिकरण दिया। उन्होंने जल संरक्षण में स्प्रिंगषेड मैनेजमेंट को प्रभावी ढंग लागू करने की बात कही। इसमें पारंपरिक ज्ञान के साथ आधुनिक तकनीक का समन्वय उपयोगी सिद्ध होगा। जमींनी स्तर पर पैरा हाइड्रोलॉजिस्ट तैयार किये जाने की संभावनाओं पर भी विचार किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि उत्तराखण्ड में ट्रेंचध्खांटी के माध्यम से जल संरक्षण के पारंपरिक तरीकों की प्रधानमंत्री ने सराहना की है।

राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के सदस्य कमल किशोर ने डिजास्टर रिस्क मैंनेजमेंट पर प्रस्तुतिकरण देते हुए पर्वतीय क्षेत्रों में वहां की परिस्थितियों के अनुरूप भवन निर्माण पर जोर दिय जाने की बात कही। सिक्किम के मुख्यमंत्री के सलाहकार डॉ. महेन्द्र पी.लामा ने केन्द्रीय सहायता में ईको सिस्टम सर्विसेज को विषेष भार दिये जाने की बात कही।
जम्मू कश्मीर के राज्यपाल के सलाहकार के.के.शर्मा, आई.आई.एफ.एम. की डॉ. मधु वर्मा व सुशील रमोला ने भी विचार व्यक्त किये। सम्मेलन के समापन अवसर पर उत्तराखण्ड के पर्यटन मंत्री सतपाल महाराज ने धन्यवाद ज्ञापित किया। बैठक में मुख्य सचिव उत्पल कुमार सिंह, सचिव वित्त अमित नेगी, अपर मुख्य सचिव ओम प्रकाश, डी.जी.पी. अनिल रतूड़ी, सचिव सौजन्या, अपर सचिव सोनिका, महानिदेशक सूचना डॉ. मेहरबान सिंह बिष्ट सहित अन्य राज्यों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

दो तमंचे और तीन जिंदा कारतूस के साथ पांच गिरफ्तार

पौड़ी जनपद की लक्ष्मणझूला पुलिस ने अवैध शस्त्र रखने के आरोप में हरियाणा के पांच लोगों को गिरफ्तार किया है। आरोपियों के कब्जे से दो तमंचे तथा तीन कारतूस बरामद किए गए हैं। पुलिस ने सभी के खिलाफ अवैध शस्त्र रखने के आरोप में आर्म्स एक्ट में मुकदमा दर्ज कर लिया है। साथ ही बरामद कार को सीज कर दिया है।

आरोपियों की पहचान सागर सिंह पुत्र राजेश कुमार, तनुज जांगड़ा पुत्र संजीव कुमार दोनों निवासी नई बस्ती गली नंबर एक वार्ड नंबर 22 थाना लाइन पार जिला इज्जर हरियाणा, नीरज उर्फ भांजा पुत्र पवन कुमार निवासी वार्ड संख्या सात गली नंबर तीन थाना लाइन पार जिला इज्जर हरियाणा, टीनू पुत्र अतर सिंह निवासी वार्ड संख्या 13 गली नंबर 11 डिफेंस कॉलोनी बहादुरगढ़ जिला इज्जर हरियाणा और नवीन पुत्र सतीश कुमार निवासी ग्राम भूपनिया जिला इज्जर हरियाणा के रूप में हुई है।

पुलिस की पूछताछ में आरोपियों ने कबूल किया है कि वे लोगों को डराने धमकाने के लिए अवैध असलहा साथ लेकर चलते हैं। थानाध्यक्ष लक्ष्मणझूला राकेंद्र सिंह कठैत ने बताया कि कांवड़ यात्रा के दौरान कई आपराधिक प्रवृत्ति के लोग घटनाओं को अंजाम देने की कोशिश करते हैं।

ऐसे लोगों की पहचान के लिए पुलिस की टीम अलग-अलग क्षेत्र में चेकिंग अभियान चला रही है। इसी क्रम में शुक्रवार को टीम ने एक वीआईपी नंबर की कार एचआर-13एन-070 को रोका। तलाशी और पूछताछ में पुलिस ने दो अवैध तमंचे (एक 315 बोर, 12 बोर) और तीन कारतूस बरामद किए।

नेगी दा ने कहा, हिलटाॅप से किसानों को मिलेगा रोजगार

सरकार के लिए राहत की खबर है। हिलटाॅप शराब पर राज्य सरकार को अब लोक गायक नरेन्द्र सिंह नेगी का साथ मिल गया है। नरेन्द्र सिंह नेगी ने कहा है कि जब राज्य में शराब की बिक्री और खपत बहुत ज्यादा है तो शराब की फैक्ट्री पर बैन क्यों लगना चाहिए? इस बयान के बाद राजनीतिक अर्थ निकाले जाने लगे है। सरकार के समर्थन में बयान देने के बाद सरकार के फैसले और बुलंद होने का अनुमान लगाए जाने लगे है।
दरअसल, आज मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत लोक गायक नरेन्द्र सिंह नेगी के आवास पर पहंुचे। उन्होंने श्री नेगी को साहित्य अकादमी के द्वारा सर्वोच्च सम्मान दिये जाने के लिए नामित होने पर बधाई दी। इसके बाद कुछ पत्रकारों ने श्री नेगी से सवाल किए। जिसमें उन्होंने हिलटाॅप शराब की फैक्ट्री पर उनकी राय जानी। जिस पर लोक गायक नरेन्द्र सिंह नेगी ने खुलकर अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि क्या आपको पता है कि हमारे यहां शराब की खपत और बिक्री कितनी बढ़ गई है। ऐसे में हम बाहरी राज्यों से शराब मगांकर पी रहे है। या तो सरकार शराब पर पूर्ण पांबदी लगा दे। नही तो शराब फैक्ट्री लगाने का विरोध नही होना चाहिए। उन्होंने कहा कि राज्य में शराब बनेगी तो किसानों और काश्तकारों को भी फायदा पहुंचेगा। माल्टा और अन्य पहाड़ी उत्पादों को अच्छा दाम मिलेगा। सरकार राजस्व भी कमायेगी और राज्य की शराब राज्य में ही बिकेगी। उन्होंने अप्रत्यक्ष कहा कि ऐसे में शराब का गुण कम से कम रोजगार देने के काम तो आयेगा। वरना सभी जानते है कि शराब स्वास्थ के लिए हानिकारक है।
इस बयान के बाद नेगी दा के लिए आम लोगों की सोच कितनी बदलती है। यह तो समय ही बतायेगा। लेकिन अपनी स्पष्ट बात रखकर श्री नेगी ने सरकार को अप्रत्यक्ष रुप से बड़ी राहत दे दी है। कुछ लोग श्री नेगी के बयान को सही भी ठहरा रहे है। लोगों का कहना है कि उत्तराखंड केवल शराब का कंज्यूमर ही बन गया है। ऐसे में शराब से रोजगार और राजस्व बढ़ता है तो दिक्कत कहां है। या तो सरकार शराब राज्य में शराब पर प्रतिबंध लगा दे। नही तो शराब पर राजनीति नही होनी चाहिए।

आप भी सुनिए श्री नरेन्द्र सिंह नेगी ने क्या कहा…

गलोबल वार्मिंग से बचना है तो अधिक से अधिक पेड़ लगाएंः रमेश भटट

मुख्यमंत्री के मीडिया सलाहकार रमेश भटट ने भीमताल के ऐतिहासिक हरेला पर्व में शिरकत की। इस दौरान उन्होंने कहा कि हमारे पूर्वज हरेला पर्व के रुप में हमें पर्यावरण संरक्षण का संदेश दे गये हैं जिसे हम सब को मिलकर आगे बढ़ाना है। उन्होंने हरेला पर्व से जुड़ी अपने बचपन की यादें भी ताजा की। बतातें चले कि मीडिया सलाहकार रमेश भटट भी भीमताल के ही रहने वाले है।
भीमताल के हरेला पर्व में पहंुचने पर स्थानीय लोगों और आयोजकों ने मीडिया सलाहकार रमेश भटटक ा जोरदार स्वागत किया। स्थानीय लोगों का मानना है कि रमेश भटट को मुख्यमंत्री का मीडिया सलाहकार बनाने से भीमताल को एक नई पहचान मिली है। कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथि पहंुचे रमेश भटट ने सभी लोगों का अभिवादन स्वीकार किया। हमारे संवाददाता से बातचीत में उन्होंने कहा कि अपने लोगों के बीच पहंुचना और उनसे बातें करने से ऊर्जा का संचार होता है। भीमताल उनका घर है वह हर किसी को पहचानते है। कार्यक्रम में उन्होंने हरेला पर्व की सभी को शुभकामनायें दी। कहा कि आज हमारी संस्कृति को नई पहचान मिली है। हरेला पर्व आज कई प्रदेशों में मनाया जाने लगा है। उत्तराखंड ने पूरे विश्व को सिखाया है कि पर्यावरण की सुरक्षा कैसे की जाती है।

मीडिया सलाहकार रमेश भटट ने कहा कि मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने हरेला पर्व के माध्यम से विलुप्त हो रही नदियां और सूख रहे प्राकृतिक स्रोतों को फिर से पुनर्जीवित करने का लक्ष्य रखा है। मुख्यमंत्री का मानना है कि नदियों के किनारे और सूख रहे प्राकृतिक स्रोतों को वृहद पौधरोपण कर फिर से जीवित किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि आज मुख्यमंत्री के इस अभियान को व्यापक समर्थन मिल रहा है। रमेश भटट ने सभी से अधिक से अधिक पौधें लगाकर उनका सवंर्धन करने की अपील की। उन्होंने कहा कि आने वाली पीढ़ी को शुद्ध हवा व वातावरण मिल सके इसके लिए सबको वृक्षारोपण व पर्यावरण संरक्षण की ओर ध्यान देना होगा। उन्होंने कहा कि हरेला सुख-समृद्धि व जागरूकता का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि आने वाली पीढ़ी को अच्छा पर्यावरण मिले मिले इसके लिए हमें संकल्प लेना होगा।

मीडिया सलाहकार रमेश भटट ने कहा कि आज पूरा विश्व गलोबल वार्मिग की समस्या से जूझ रहा है। ऐसे में सभी की नजर वन आच्छादित उत्तराखंड में है। उन्होंने कहा कि उत्तराखण्ड जैव विविधता वाला राज्य है। भारत की कुल जैव विविधता में 28 प्रतिशत योगदान उत्तराखण्ड का है। ईकोलॉजी को बचाने की उत्तराखण्ड पर बड़ी जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि हमें अपने पूर्वजों की याद व बच्चों के जन्म व शादी पर वृक्षारोपण करने की पंरपरा को बनाये रखना होगा।

हरेला पर्व पर प्रदेश भर में वृहद स्तर पर वृक्षारोपण किया जा रहा है। इस बार हरेला पर्व पर 6.25 लाख पौधे लगाये जा रहे हैं। कार्यक्रम में उन्होंने सरकार की कल्याणकारी योजनाओं की भी जानकारी दी और अधिक से अधिक लाभ उठाने को कहा। मीडिया सलाहकार रमेश भटट ने हरेला पर्व पर लगाई गई पांरपरिक स्टाॅलों का निरीक्षण भी किया। मौके पर कई सांस्कृतिक कार्यक्रमों का भी आयोजन किया गया। प्रतियोगिताओं में अव्वल आने पर उन्होंने कई बच्चों और छात्रों को सम्मानित भी किया।

समाज में महिलाओं को हुनरमंद बनाया जाना समय की जरूरतः मुख्यमंत्री

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने देहरादून की शहरी बस्ती चीड़ोवाली-कंडोली में उत्तराखण्ड महिला समेकित विकास योजना के अन्तर्गत कामन फेसिलिटी सेन्टर के अधीन संचालित द्विवर्षीय महिला कौशल प्रशिक्षण केन्द्र का शुभारम्भ किया। इस प्रशिक्षण केन्द्र में 120 स्थानीय महिलाओं को जूट व सूती बैग बनाने आदि का प्रशिक्षण दिया जा रहा है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि समाज में महिलाओं को हुनरमंद बनाया जाना समय की जरूरत है। यदि महिलायें मजबूत हुई तो परिवार, समाज व देश मजबूत होगा। उन्होंने महिला व पुरूषों को समाज के विकास की गाड़ी के दो पहिए बताते हुए कहा कि दोनों सशक्त होंगे तो निश्चित रूप में समाज में बदलाव आयेगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में खेती आदि के संसाधनों की सुविधा के साथ ही जीविका के साधनों का विकल्प रहता है, जिसका शहरी क्षेत्रों में अभाव रहता है। उन्होंने कहा कि शहरी क्षेत्रों में जमीन आदि की कमी के कारण यह सुविधायें नहीं उपलब्ध हो पाती हैं। इसके लिये जरूरी है कि शहरों की गरीबों को दूर करने के लिये यहां की महिलाओं को हुनरमंद बनाया जाय, कौशल विकास के जरिये हम वेस्ट को बेस्ट में बदल सकते हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि समाज में महिलाओं को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने के लिये राज्य सरकार द्वारा प्रभावी पहल की जा रही है। उद्यमिता के क्षेत्र में महिलायें 5 हजार तक ओवर ड्राफ्ट ले सकती हैं। महिला समूओं को एग्रोबेस उद्यम के लिये 5 लाख तक शून्य प्रतिशत ब्याज पर ऋण उपलब्ध कराया जा रहा है। हमारा उद्देश्य महिलाओं को दिये गये ऋण के सदुपयोग करने वाला बनाना है। ग्राम लाइट योजना व देव भूमि प्रसाद योजना महिलाओं को आर्थिक स्वावलम्बन की राह दिखा रही है। महिला समूह पहाड़ी भोजन भी तैयार कर रही है। पौड़ी में आयोजित कैबिनेट बैठक में उन्हीं के द्वारा तैयार किया गया भोजन परोसा गया। कम लागत में सबको खाना खिलाने का यह अच्छा प्रयास रहा। इससे एक प्रकार की उद्यमिता भी विकसित हुई है। यह सब हुनरमंद होने का ही परिणाम है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि इस वर्ष केदारनाथ में महिला समूहों ने 2 करोड़ का प्रसाद बिक्री किया। प्रदेश के 625 मन्दिरों में देवभूमि प्रसाद योजना का शुभारम्भ किया जा रहा है। मंशादेवी, बदरीनाथ, जागेश्वर, बागेश्वर से भी इसकी शुरूआत हो गयी है, इसका परिणाम है कि आज चैलाई 55 रू. किलो बिक रहा है। उन्होंने महिलाओं से उत्पादों की बेहतर पैकिंग पर ध्यान देने को कहा। इसमें लोगों का आकर्षण उत्पादों के प्रति बढ़ता है। यदि हम छोटी-छोटी बातों पर ध्यान देंगे तो अपने उत्पादों की बिक्री में भी मदद मिलेगी। उन्होंने महिलाओं से पुष्प उत्पादन, धूप-अगरबत्ती बनाने की दिशा में भी आगे आने को कहा। पर्यावरण अनुकूल सामग्री के उत्पादन से उसकी मांग देश व दुनिया में बढ़ेगी।
इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने कामन फेसिलिटी सेन्टर व प्रशिक्षण केन्द्र का भी निरीक्षण किया तथा प्रशिक्षार्थी महिलाओं से भी संवाद किया। मुख्यमंत्री ने परियर में वृक्षारोपण कर पर्यावरण संरक्षण का भी संदेश दिया। क्षेत्रीय विद्यायक गणेश जोशी ने कहा कि इस प्रकार की पहल महिलाओं के आर्थिक उन्नयन में मददगार होती है, उन्होंने कहा कि महिलाओं की मजबूती समाज की मजबूती से जुड़ी है। महिलाओं को स्वालम्बी बनाने के लिये उन्हें प्रशिक्षित करने की भी उन्होंने जरूरत बतायी। अपर मुख्य सचिव राधा रतूड़ी ने कहा कि महिला समेकित विकास योजना के तहत जानकी देवी एजुकेशन वेलफेयर सोसाइटी द्वारा इस प्रशिक्षण केन्द्र का संचालन किया जा रहा है। पालीथीन के स्थान पर जूट व सूती व फाइबर से बने विभिन्न उत्पादों व अन्य सामग्री का प्रशिक्षण एवं निर्माण यहां पर महिलाओं द्वारा किया जायेगा। इस अवसर पर निदेशक महिला एवं बाल विकास झरना कमठान, संस्था के चेयरमैन संजय जोशी, सचिव कविता चतुर्वदी और प्रशिक्षण प्राप्त करने वाली महिलायें आदि उपस्थित थे।

लक्ष्मणझूला में आवाजाही को लेकर मुख्यमंत्री ने विशेषज्ञों से साझा किए विचार

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने कहा कि लक्ष्मण झूला उत्तराखण्ड की सांस्कृतिक धरोहर है। पिछले 90 सालों से यह देश व दुनिया के पर्यटकों व श्रद्धालुओं के आकर्षण का केन्द्र रहा है। उन्होंने कहा कि लक्ष्मण झूला को संरक्षित करने के लिए यथा संभव प्रयास किये जायेंगे। इस पुल की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए इस पर आवाजाही दुबारा शुरू होने की स्थिति के सम्बन्ध में विशेषज्ञों से और सुझाव लिये जायेंगे।
मुख्यमंत्री ने कहा कि यह हमारी हेरिटेज प्रोपर्टी है। इसे ठीक करने के सभी विषयों पर कार्य किया जायेगा। विशेषज्ञों की राय के बाद इसकी रेट्रोफिटिंग पर ध्यान दिया जायेगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रारम्भ में इसके एक स्क्वायर मीटर में 200 किलो भार क्षमता आंकी गई थी। वर्तमान में इसका पिलर झुक रहा है, आज आधुनिक तकनीक के दौर में इसे कैसे ठीक किया जा सकता है यह देखा जायेगा। मुख्यमंत्री का कहना है कि इस पुल से जन भावानायें जुड़ी हैं, इसका भी हमें ध्यान रखना होगा।
मंगलवार को ग्राफिक ऐरा विश्वविद्यालय के विशेषज्ञों ने मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत से भेंट की, उन्होंने मुख्यमंत्री को अवगत कराया कि उनके संस्थान के तकनीकी विशेषज्ञों द्वारा लक्ष्मण झूला का जीर्णोद्धार किया जा सकता है। ग्राफिक ऐरा के प्रो. पार्थो सेन ने कहा कि अत्याधुनिक तकनीक का प्रयोग करके इस पुल को बचाया जा सकता है। मुख्यमंत्री ने कहा कि इस पुल के लिए तकनीकी अध्ययन आई.आई.टी के वैज्ञानिकों द्वारा किया गया है उनकी सलाह के मद्देनजर ही जन सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए इसमें आवाजाही बन्द की गई है। उन्होंने कहा कि इसके बावजूद भी यदि इसके संरक्षण में कोई तकनीकी जानकारी प्राप्त हो सकती है तो इस दिशा में भी पहल की जा सकती है। उन्होंने ग्राफिक ऐरा विश्वविद्यालय के विशेषज्ञों व लोक निर्माण विभाग के अधिकारियों से सभी तकनीकी पहलुओं को ध्यान में रखते हुए कार्ययोजना बनाने को कहा। उन्होंने कहा कि आईआईटी की रिपोर्ट के हर पहलू का गहनता से अध्ययन किया जाए। मुख्यमंत्री ने कहा कि सुरक्षा की दृष्टि से कोई भी लापरवाही नहीं बरती जायेगी जरूरत पड़ने पर लक्ष्मण झूला को बचाने के लिए अन्य विशेषज्ञों की राय भी ली जायेगी।
इस अवसर पर मुख्य सचिव उत्पल कुमार सिंह, ग्राफिक ऐरा विश्वविद्यालय से डा. सुभाष गुप्ता, डा. अंकुश मित्तल, डा. संजीव कुमार, डा. पवन कुमार इमानी, डा. प्रदीप जोशी, श्रीपर्णा शाह व अर्चना रावत उपस्थित थे।

मुख्यमंत्री ने करोड़ो रुपये के बाढ़ सुरक्षा और नहर कार्यों का किया लोकार्पण

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने कालूवाला देहरादून में सिंचाई विभाग की कुल 7 करोड़ 64 लाख 20 हजार की दो योजनाओं का लोकार्पण किया। जिसमें 4 करोड़ 94 लाख 58 हजार की लागत के बड़ोवाला नहर का पुनरोद्धार एवं 02 करोड़ 69 लाख 63 हजार की लागत का जौलीग्रांट नहर के हेड का विस्तारिकरण व पुनरोद्धार शामिल हैं।
मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर नथुवावाला-बालावाला-मियांवाला नहर सेवा मार्ग का जीर्णोद्धार, सांकरी नहर का पुनरोद्धार, धूड़ वाला नहर का पुनरोद्धार, राजीव नगर केशवपुरी बस्ती, सौंग नदी से बाढ़ सुरक्षा का कार्य, सीपैट संस्थान की सुरक्षा का कार्य, कालूवाला क्षेत्र में सिंचाई के लिए नलकूप निर्माण, कालूवाला में आंतरिक सड़कों के निर्माण, कालूवाला मंदिर के समीप खाली जमीन पार्क के निर्माण व कालूवाला क्षेत्र के लिए प्रवेश स्थल पर वीर शहीदों की स्मृति में शहीद द्वार बनाने की घोषणा की। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने शहीद सैनिकों के परिजनों को सम्मानित भी किया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि मुख्यमंत्री हैल्पलाईन 1905 बनाया गया है। किसी भी समस्या के लिए इस हैल्पलाईन पर कॉल किया जा सकता है। इसमें समाधान तब माना जायेगा, जब शिकायतकर्ता संतुष्ट हो जायेगा उनका समाधान हो चुका है। अभी तक सीएम हैल्पलाईन पर 23 फरवरी को शुरूआत होने से अब तक 14 हजार शिकायतें आयी हैं, जिनमें से 7 हजार शिकायतों का समाधान हो चुका है। सीएम हैल्पनाईन पर सुझाव भी प्राप्त हो रहे हैं, महत्वपूर्ण सुझावों को योजनाओं में सम्मिलित किया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि फेसबुक, ट्वीटर, इंस्ट्राग्राम व यूट्यूब पर जेतंूंजइरच आईडी पर अपने सुझाव दे सकते हैं। जनता से कई ऐसे सुझाव मिलते हैं जो विकास व कई योजनाओं को बनाने में बहुत उपयोगी सिद्ध होते हैं। जन सुझावों के आधार पर राज्य में थानो के लिए निधि बनाने का सुझाव आया। थानों की विभिन्न समस्याओं के समाधान के लिए थाना विविध निधि बनाई गई जो काफी कारगर साबित हुई है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि पिछले ढ़ाई साल में प्रदेश के सर्वांगीण विकास के लिए राज्य सरकार ने हर संभव प्रयास किये हैं। भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाने के लिए राज्य सरकार ने अनेक कदम उठाये और इसके सकारात्मक परिणाम आज हमारे सामने हैं। हर्रावाला में 300 बैड का जच्चा-बच्चा हॉस्पिटल खोला जा रहा है, जो लगभग 2 वर्ष में बनकर तैयार हो जायेगा। रानीपोखरी में नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी बन रही है। जौलाग्रांट एयरपोर्ट का विस्तार किया जा रहा है। कुंआवाला (हर्रावाला) में कोस्ट गार्ड भर्ती सेंटर खोला जा रहा। इसमें प्रतिवर्ष 1500 भर्तियां होंगी। उत्तराखण्ड फिल्म की शूटिंग के लिए डेस्टिनेशन बनता जा रहा है। पिछले ढ़ाई साल में उत्तराखण्ड में 200 से अधिक छोटी व बड़ी फिल्मों की शूटिंग हो चुकी। सूर्यधार, सौंग व मलढ़ूग परियोजनाओं पर कार्य किया जा रहा है। इन परियोजनाओं से देहरादून को पूर्ण ग्रेविटी का पानी उपलब्ध होगा। पर्वतीय क्षेत्रों के लिए 600 करोड़ रूपये का इन्वेस्टमेंट सोलर पैनल के माध्यम से सोलर इनर्जी के लिए योजना लाई गई है। इस और आगे बढ़ाया जायेगा। पांच मेगावाट तक के प्रोजक्ट चाहे वे सोलर के हों या हाइड्रो के हों उत्तराखण्ड के निवासियों के लिए रिजर्व किये गये हैं, ताकि स्थानीय लोगों को रोजगार मिले व उनकी आर्थिक स्थिति में सुधार हो।

मुख्यमंत्री के खिलाफ अभ्रद टिप्पणी करने पर हवालात की सैर

अगर आप सोशल मीडिया में आपत्तिजनक टिप्पणी कर रहे है तो सवधान हो जाइए। सोशल मीडिया पर अभद्र टिप्पणी करना आप को भारी पड़ सकता है। अमूमन सोशल मीडिया पर की गई टिप्पणी से लोग सोचते है कुछ नही होगा। लेकिन सोशल मीडिया पर की गई टिप्पणी जेल भी भिजवा सकती है। दरअसल सोशल मीडिया पर लोग अपनी बात रखने की बजाय आपत्तिजनक पोस्ट डालने लग गए है। जिसका असर समाज में तो पड़ ही रहा है लेकिन जिसके खिलाफ टिप्पणी की जा रही है उसकी भी मानहानि होती है।
ऐसा ही कुछ उत्तरकाशी जिले में हुआ जहां एक युवक को मुख्यमंत्री पर आपत्तिजनक टिप्पणी करना भारी पड़ गया। सोशल मीडिया पर मुख्यमंत्री पर की गई टिप्पणी के मामले में पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर युवक को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू कर दी है।
थाना पुरोला प्रभारी रितुराज ने बताया कि पुरोला भाजपा नगर मंडल कार्यकारिणी अध्यक्ष पवन नौटियाल ने थाने में युवक के खिलाफ तहरीर दी। तहरीर के माध्यम से उन्होंने अवगत कराया कि डेरिका निवासी राजपाल सिंह (34) पुत्र दलवीर सिंह ने फेसबुक में मुख्यमंत्री के क्रियाकलापों को लेकर अभद्र टिप्पणी की। कहा कि एक बार आरोपित को समझाकर छोड़ दिया गया था, लेकिन अपने कृत्य से बाज न आने के चलते शनिवार देर शाम उसने फिर अभद्र टिप्पणी, लाइव वीडियो प्रसारित किया, जिसके चलते पुलिस ने युवक को हिरासत में लेकर उसके खिलाफ मुकदमा दर्ज कर दिया है। युवक से पूछताछ की जा रही है।

डायलिसिस यूनिट पावर सप्लाई बंद, मरीज की मौत

हरिद्वार के मेला अस्पताल में डायलिसिस यूनिट में अचानक पॉवर सप्लाई बंद होने से किडनी की बीमारी से पीड़ित दस मरीजों की हालत बिगड़ गई। गंभीर हाल में एक मरीज को जौलीग्रांट रेफर किया गया जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।
घटना के बाद मरीजों के तीमारदारों ने हंगामा खड़ा कर दिया। मौके पर पहुंची मेयर अनीता शर्मा ने अस्पताल की व्यवस्थाओं पर नाराजगी जताई। बताया जा रहा है कि पीपीपी मोड पर चल रही यूनिट बिना एमडी डॉक्टर और नेफ्रोलॉजिस्ट के चलाई जा रही थी। मेला अस्पताल में अप्रैल में डायलिसिस यूनिट शुरू की गई थी। शनिवार की दोपहर को यूनिट की दस मशीनों पर किडनी के मरीजों की डायलिसिस की जा रही थी। अस्पताल क्षेत्र की बिजली आपूर्ति बाधित होने के बाद जेनरेटर चलाया गया।
करीब दो बजे अचानक से तकनीकी खराबी के कारण जनरेटर बंद हो गया और मशीन बैकअप पर चलने लगी। कुछ ही मिनटों पर मशीन का अलार्म बजने लगा। देखते ही देखते दस मिनट में ही बैकअप समाप्त होने लगा। यूनिट के डॉक्टर, तकनीशियनों और नर्स ने डायलिसिस मशीन के पंप चलाकर बाहर निकले ब्लड को बमुश्किल से शरीर के अंदर पहुंचाया। सभी दस मरीजों की हालत बिगड़ने लगी। एक मरीज की हालत ज्यादा खराब होने पर उन्हें जौलीग्रांट रेफर कर दिया। सूत्रों की मानें तो मरीज विजय शर्मा (62) की मेला अस्पताल में ही मौत हो गई थी।
पीपीपी मोड पर यूनिट चला रहे चंडीगढ़ की संस्था राही केयर प्राइवेट लिमिटेड के मालिक डॉ. शौर्य पयाल का कहना है कि यूनिट में उनकी तरफ से सभी व्यवस्थाएं उपलब्ध हैं। पॉवर सप्लाई प्रभावित होने से यह समस्या खड़ी हुई। उन्होंने एक मरीज की मौत की पुष्टि तो की लेकिन कहा कि यह मौत यूनिट में नहीं हुई है।
सीएमओ प्रेमलाल का कहना है कि विजय शर्मा दस साल से किडनी की बीमारी से पीड़ित थे। कार्डियकअरेस्ट से उनकी मौत हुई है। उनका कहना है कि यूनिट में जो कमियां हैं उनको दूर कराया जाएगा। पाॅवर सप्लाई के पर्याप्त इंतजाम किए जाएंगे।