संक्रमित पाए जा रहे मरीजों की निकल रही ट्रेवल हिस्ट्री

(एनएन सर्विस)
प्रदेश में आज 34 और कोरोना पॉजिटिव मामले सामने आए हैं। अब प्रदेश में संक्रमित मरीजों की संख्या 1819 पहुंच चुकी है। अपर सचिव स्वास्थ्य युगल किशोर पंत ने इसकी पुष्टि की है। 
स्वास्थ्य विभाग की ओर से जारी हेल्थ बुलेटिन के अनुसार, आज देहरादून में 14, टिहरी में नौ, हरिद्वार में पांच, उत्तरकाशी में तीन, उधम सिंह नगर, चमोली और नैनीताल में एक-एक कोरोना पॉजिटिव के मामले सामने आए हैं। संक्रमित पाए गए मरीजों की ट्रेवल हिस्ट्री है। अभी तक प्रदेश में 1000 से अधिक मरीज इलाज के बाद घर भेजे जा चुके हैं। जबकि 705 एक्टिव केस हैं।
वहीं, मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत के निर्देश के बाद आयुष विभाग और आयुर्वेद विश्वविद्यालय ने बालावाला क्वारंटीन सेंटर के नोडल अधिकारी आयुर्वेद चिकित्साधिकारी डॉ.नवीन जोशी और असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ.जसप्रीत के निलंबन आदेश जारी कर दिए है। आयुर्वेद विश्वविद्यालय ने विभागीय जांच के लिए प्रोफेसर पंकज कुमार शर्मा को जांच अधिकारी नामित किया है। बता दें कि 12 जून को बालावाला स्थित क्वारंटीन सेंटर में रेल कर्मी ने फांसी लगा कर आत्महत्या कर ली थी। इस मामले में मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने सख्त कार्रवाई कर नोडल अधिकारी व डॉक्टर को निलंबित करने के निर्देश दिए थे।
गौरतलब है कि बीते सप्ताह प्रदेश में सैंपलिंग में 27 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज हुई है, जबकि संक्रमित मरीजों के मामलों में 13 प्रतिशत की कमी आई है। हालांकि कोरोना संक्रमित मरीजों की मौत के आंकड़े बढ़े हैं। अब तक 25 संक्रमितों की मौत हो चुकी हैं। 
प्रदेश में कोरोना संक्रमित मामलों की संख्या 18 सौ पार करने वाली है। हालांकि इसमें 1077 मरीज ठीक हो चुके हैं। 677 संक्रमित मरीज ही अस्पताल में भर्ती है। प्रदेश की रिकवरी दर लगभग 60 प्रतिशत पहुंच गई है। वहीं, डबलिंग रेट 20 दिन हो गई है। कोरोना आंकड़ों का अध्ययन कर रहे सोशल डेवलपमेंट फॉर कम्युनिटी फाउंडेशन के अध्यक्ष अनूप नौटियाल का कहना है कि कोरोना संक्रमण के लिहाज से 13वां सप्ताह उत्तराखंड के लिए मुफीद रहा है। 12वें सप्ताह की तुलना में रिकवरी दर में 104 प्रतिशत का इजाफा हुआ है। लेकिन संक्रमित मरीजों की मौत की संख्या चिंताजनक है।

शराब के नशे में दो प्रवासियों ने केन्द्र व्यवस्थापक को पीटा

(एनएन सर्विस)
मुनिकीरेती थाना क्षेत्र के एक संस्थागत क्वारंटीन सेंटर में प्रवासियों की दबंगई के चलते यहां केंद्र व्यवस्थापक को पीट दिया गया। पीड़ित की तहरीर पर पुलिस ने आरोपियों को गिरफ्तार कर संबंधित धाराओं में मुकदमा कायम किया है। वहीं, रविवार को आरोपियों को न्यायालय के समक्ष पेश किया गया। यहां से न्यायिक हिरासत में दोनों आरोपियों को जेल भेज दिया गया।
जानकारी के अनुसार, तपोवन स्थित एक संस्थागत क्वारंटीन सेंटर में दीवान सिंह रावत सहायक अध्यापक ब्लॉक नरेन्द्र नगर केंद्र व्यवस्थापक के रूप में तैनात है। बीते शनिवार की शाम करीब छह बजे यहां आंध्र प्रदेश से पहुंचे 16 दिन से क्वारंटीन दो युवकों ने शराब के नशे में मारपीट कर दी। मामले को लेकर पीड़ित अध्यापक ने मुनिकीरेती थाने में तहरीर दी। पुलिस ने तहरीर पाकर दोनों आरोपियों कुलदीप जोशी पुत्र डा. व्योम जोशी निवासी जी ब्लॉक, नई टिहरी और जगमोहन पुत्र राजेन्द्र रमोला निवासी रामोल गांव प्रतापनगर को गिरफ्तार किया। पुलिस ने आरोपियों पर आईपीसी की धारा 186,188,323,332,353,504,506 और 51 आपदा प्रबंधन अधिनियम में मुकदमा दर्ज किया है। रविवार को दोनों आरोपियों को न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किया गया। यहां से न्यायिक हिरासत में उन्हें जेल भेज दिया गया है।

ओएसडी पंवार पहुंचे क्वारंटीन सेंटर, अधिकारियों में मचा हड़कंप

देहरादून के क्वारंटीन सेंटर में हुई युवक की मौत को लेकर मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत बेहद नाराज बताये जा रहे है। उन्होंने अपने अधीनस्थ अधिकारियों को क्वारंटीन सेंटरों का औचक निरीक्षण करने के निर्देश दिए हैं। मुख्यमंत्री के निर्देश मिलने पर आज मुख्यमंत्री के विशेष कार्य अधिकारी धीरेंद्र सिंह पवार ने बीते रोज हुए मृतक के क्वारंटाइन सेंटर में जाकर निरीक्षण किया और मौके पर मौजूद डाक्टरों व अधिकारियों से जानकारी ली, मौके पर उन्होंने जरुरी निर्देश भी दिये।
धीरेंद्र सिंह पवार ने डोईवाला विधानसभा के ग्राम सभा कालूवाला में प्राथमिक विद्यालय और बड़ोवाला इंटर कॉलेज के साथ ही नगरपालिका डोईवाला के अंतर्गत लच्छीवाला पंचायत घर व केशवपुरी बस्ती के प्राथमिक विद्यालय में बने क्वारंटीन सेंटरों का औचक निरीक्षण किया। वह व्यवस्थाओं का जायजा लिया तो वहीं अधिकारियों के समय-समय पर क्वारंटाइन सेंटरों में निरीक्षण न करने की शिकायत के बाद अपनी नाराजगी व्यक्त की और अधिकारियों को जमकर फटकार भी लगाई ।
धीरेंद्र सिंह पंवार ने बताया कि इन क्वारंटाइन सेंटरों में रह रहे उत्तराखंड राज्य के प्रवासी इस राज्य का अभिन्न अंग है और उनकी सुरक्षा खाने पीने की व्यवस्था रहने की व्यवस्था सरकार की जिम्मेदारी है जिसके लिए सरकार दृढ़ संकल्पित है। इन्हें किसी प्रकार की कोई परेशानी ना हो इसके लिए सरकार भरसक प्रयास कर रही है जिसके लिए सरकार ने ग्राम सभाओं को एक निश्चित धनराशि भी उपलब्ध कराई है कि जिससे इन क्वारंटाइन सेंटरों में रह रहे लोगों को किसी प्रकार की कोई दिक्कत पेश न आये ।
उन्होंने निर्देश दिए हैं कि अधिकारी इन सेंटरों में समुचित व्यवस्था बनाए रखने में अपना सहयोग दें अगर किसी प्रकार की लापरवाही सामने आती है तो सरकार कार्यवाही करने से पीछे नहीं हटेगी उन्होंने अधिकारियों को समय-समय पर इन क्वारंटाइन सेंटरों में रह रहे प्रवासियों के स्वास्थ्य परीक्षण साफ-सफाई व भोजन इत्यादि की व्यवस्था जांचने परखने हेतु समय-समय पर निरीक्षण के निर्देश दिए हैं तो वहीं उन्होंने कहा कि उनके द्वारा भी इन व्यवस्थाओं के लिए लगातार औचक निरीक्षण किया जाता रहेगा जिससे कि किसी को भी किसी प्रकार की दिक्कत पेश न आये।
निरीक्षण के दौरान कालूवाला व बड़ोवाला में ग्राम प्रधान पंकज रावत, पूर्व प्रधान नरेंद्र सिंह नेगी, पूर्व प्रधान राजकुमार सिंह पुंडीर सहित केशवपुरी में निरीक्षण के दौरान सभासद प्रतिनिधि अमित कुमार भी मौजूद रहे।

भागीरथी फाउंडेशन ने फिर निभाई जिम्मेदारी, सेनिटाइजर, मास्क, साबुन, ग्लब्ज और फेस मास्क बांटे

भागीरथी फाउंडेशन भीमताल ने आज रामलीला मैदान मल्लीताल में एक कार्यक्रम का आयोजन किया। इस कार्यक्रम में फाउंडेशन के सदस्यों ने कोरोना संक्रमण से बचाव हेतु आशा कार्यकत्रियों को आवश्यक वस्तुएं सेनिटाइजर, मास्क, साबुन, ग्लब्ज, फेस मास्क आदि प्रदान किये।
फाउंडेशन के अध्यक्ष मनोज भट्ट ने बताया कि कोरोना संक्रमण के दौर में जहां सोशल डिस्टेंसिंग के चलते लोग घरों से बाहर नही निकल रहे है। वहीं इस परिस्थिति से निपटने के लिए में हमारी बहनें जो आशा कार्यकत्रियां है, दिन-रात सेवा में लगी हुई है। उन्होंने कहा कि ऐसी परिस्थिति में हमारा भी फर्ज है कि कोरोना वारियर के रुप में कार्य कर रही इन बहिनों के स्वास्थ्य की चिंता की जाये। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री के मीडिया सलाहकार रमेश भट्ट ने संस्था के सुझाव पर फाउंडेशन को सेनिटाइजर, मास्क, साबुन, ग्लब्ज, फेस मास्क आदि वस्तुएं उपलब्ध कराई गई। जिसे हमारे द्वारा लगातार कई क्षेत्रों में इनका वितरण किया जा रहा है। इसी क्रम में आज आशा कार्यकत्रियों की सुरक्षा के लिए आवश्यक वस्तुओं का वितरण किया गया।
आशा कार्यकत्रियों ने भागीरथी फाउंडेशन के सभी सदस्यों का धन्यवाद दिया। उन्होंने कहा कि समाज में ऐसा वर्ग और संस्थाओं की जरुरत है जो जरुरतमंद लोगों की सेवा करने के लिए आगे आये। इस मौके पर भागीरथी फाउंडेशन के उपाध्यक्ष शरद पांडेय, कोषाध्यक्ष सुनीता पांडेय, सचिव भास्कर भगवाल, धन सिह राणा, आशु पाठक, सुरेश सुयाल, अनिल शर्मा, रमेश पलड़िया आदि मौजूद रहे।

याद है या भूल गए देहरादून की साप्ताहिक बंदी का आदेश इस शनिवार और रविवार को भी है लागू

राज्य सरकार द्वारा देहरादून में कोरोना संक्रमण को देखते हुए नगर निगम क्षेत्र के बाजारों को अगले आदेश तक यानि की शनिवार और रविवार के लिए बंद करने का निर्णय लिया था। साप्ताहिक बंदी के तहत कल शनिवार और रविवार को देहरादून नगर निगम क्षेत्र बंद रहेगा। बतातें चले कि 5 जून को जिलाधिकारी आशीष श्रीवास्तव की तरफ से इस संबंध में आदेश जारी हुए थे। देहरादून नगर निगम क्षेत्र के बाजार पिछली बार की तरह इस बार भी बंद रहेंगे। इसके अलावा बंदी के दौरान वाहनों का भी संचालन नहीं होगा। सिर्फ आवश्यक सेवा से जुड़ी दुकानें, मेडिकल स्टोर और वाहन के संचालन की इजाजत दी गई है।इस दौरान पेट्रोल पंप, फल-सब्जी, मेडिकल स्टोर, डेयरी, गैसएजेंसी, टिफिन सर्विस, लाइसेंस धारक मीट की दुकानें, औद्योगिक इकाइयां और अस्पतालों की ओपीडी खुली रहेंगी। वहीं स्वास्थ्य, चिकित्सा, पेयजल, नगर निगम और विद्युत विभाग के दफ्तर भी खुले रहेंगे।
वहीं, सभी दुकानें, प्रतिष्ठान, शराब के ठेके, बैंक, सभी सरकारी, अर्द्धसरकारी एवं निजी कार्यालय बंद रहेंगे। आवश्यक सेवाओं से जुड़े वाहन और एंबुलेंस को छोड़ परिवहन सेवाएं बंद रहेंगी। जिलाधिकारी डॉ. आशीष कुमार श्रीवास्तव ने 5 जून को यह आदेश जारी किए थे।

डॉ. आशीष कुमार श्रीवास्तव ने कहा कि जिले में कोरोना के मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। खासकर नगर निगम क्षेत्र में संख्या ज्यादा है। जिसे देखते हुए दो दिन की साप्ताहिक बंदी का निर्णय लिया गया है। डीएम ने बताया कि इस दौरान आदेशों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ आपदा प्रबंधन अधिनियम के तहत कार्रवाई की जाएगी। जिले में लगातार बढ़ रहे कोरोना संक्रमण के मामले चिंता की बात है। लेकिन, प्रशासन अपनी ओर से इसे रोकने की पुरजोर कोशिश कर रहा है। लोगों से भी अपील है कि वह लॉकडाउन के नियमों का पालन करें। जनसहयोग और जागरूकता के जरिये ही हम इस पर अंकुश लगा सकते हैं।

त्रिवेन्द्र का दम, राज्य के लिये लिए है 11 बड़े फैसले, जो बदलेंगे राज्य की दशा और दिशा

मुख्यमंत्री के मीडिया सलाहकार रमेश भट्ट ने बताया कि त्रिवेन्द्र सरकार ने तीन वर्षों में कई ऐसे फैसले लिए है जो जनता के हित के साथ ही जनभावनाओं के लिए बेहद जरुरी थे। इनमें 11 फैसले तो सीधे जनता से जुड़े हुए है। जिनका लाभ बड़ी संख्या में राज्य के लोगों को मिल रहा है या आने वाले समय में मिलने वाला है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत लगातार जनता से जुड़े मुद्दों को लेकर सक्रिय रहते है। रोजगार और स्वास्थ्य के विषय में मुख्यमंत्री ने बड़े और दूरगामी फैसले लिए है।
मीडिया सलाहकार इन 11 बड़े फैसलों की दे रहे है जानकारी-

’11 बड़े फैसले’

’1. जनभावनाओं की राजधानी’: गैरसैंण (भराड़ीसैंण) को राज्य जी ग्रीष्मकालीन राजधानी घोषित करके जनभावनाओं का ख्याल रखा।

’2. चारधाम देवस्थानम बोर्ड गठित’: चार धाम यात्रा के सफल व बेहतर प्रबंधन के लिए चार धाम देवस्थानम बर्ड का गठन किया गया। इससे बद्री केदार, गंगोत्री यमुनोत्री के अलावा 51 बड़े मंदिरों के रखरखाव व प्रबंधन की जिम्मेदारी सरकार को मिली।

’3 अटल आयुष्मान उत्तराखण्ड योजना’: आयुष्मान भारत की तर्ज पर प्रदेश के समस्त परिवारों को सालाना 5 लाख रुपए तक का निशुल्क इलाज उपलब्ध कराने हेतु अटल आयुष्मान उत्तराखण्ड योजना लागू की गई। अपने राज्य के समस्त परिवारों को सुरक्षा कवच देने वाला उत्तराखण्ड पहला राज्य बना। अब तक 2 लाख से ज्यादा लोग मुफ्त उपचार करवा चुके हैं।

’4. स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार’ : साल 2017 में प्रदेश में 1031 डॉक्टर थे जिनकी संख्या अब बढ़कर 2600 के करीब हो गई है। 400 डॉक्टरों को केवल कोरोना काल मे ही नियुक्ति दी गई है। हर जिला अस्पताल में प्ब्न् की सुविधा है। दूरस्थ क्षेत्रों के लोगों को लाभ देने के लिए 35 अस्पतालोंध्केन्द्रों में टेली मेडिसिन सुविधा शुरू की गई है।

’5. ग्रोथ सेंटर’: ग्रामीण संसाधनों से लोकल इकोनॉमी जुटाने का तथा स्वरोजगार से जोड़ने के लिए करीब 100 ग्रोथ सेंटर स्थापित किए जा रहे हैं।

’6. सभी 13 जिलों में 13 नए टूरिस्ट डेस्टिनेशन’ : पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए 13 जिलों में 13 नए थीम बेस्ड टूरिस्ट डेस्टिनेशन विकसित किए जा रहे हैं। टिहरी झील, गूलरभोज जलाशय, ट्यूलिप गार्डन प्रोजेक्ट पूरे हो चुके हैं।

’7. होम स्टे’: ग्रामीण पर्यटन को मजबूत करने के लिए राज्य में 5000 होमस्टे बनाने का लक्ष्य है, जिसमे से अभी तक 2100 होमस्टे बनाये जा चुके हैं।

’8. इन्वेस्टर्स समिट’ : राज्य में उद्योगों और निवेश को विस्तार देने के लिए सिंगल विंडो क्लीयरेंस सुविधा लागू है। 2018 में राज्य में पहली बार इन्वेस्टर्स समिट का आयोजन हुआ जिसमें सवा लाख करोड़ के डवन् साइन हुए। इनमें से भी अब तक 21 हजार करोड़ के निवेश प्रोजेक्ट ग्राउंडेड हो चुके हैं।

’9. फिल्म पॉलिसी’: उत्तराखण्ड में फिल्म निर्माण की संभावनाओं को देखते हुए फिल्म नीति लाई गई। इससे फिल्मकारों को कई तरह की रियायतें दी जा रही हैं। पिछले 3 साल में राज्य में 250 से अधिक फिल्मों व सीरियल्स की शूटिंग हो चुकी है। इससे स्थानीय लोगों को भी रोजगार मिल रहा है।

’10. कोरोना से लड़ाई’ : उत्तराखण्ड सरकार ने कोरोना से लड़ने के लिए पर्याप्त इंतजाम किए हैं। लॉकडाउन पीरियड में कोई भूखा नहीं रहे इसका ख्याल रखा, प्रदेश में रह रहे अन्य प्रदेशों के मजदूरों को कभी भूखा नहीं सोने दिया, उनको उनके घर तक पहुंचाने के पर्याप्त इंतजाम किए। अन्य राज्यों से प्रवासी उत्तराखण्डियों को लाने के लिए भी सभी व्यवस्थायें की।

कोरोना काल मे हेल्थ इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत किया गया। आज राज्य में कोरोना मरीजों की देखभाल व इलाज के लिए 5 डेडिकेटेड कोविड अस्पताल, 10 डेडिकेटेड कोविड हेल्थ सेंटर व 94 कोविड केयर सेंटर स्थापित किए गए हैं।

राज्य में आईसीयू की संख्या को 62 से बढ़ाकर 251 किया गया है। वेंटीलेटर्स कि संख्या को 37 से बढ़ाकर 113 किया गया है। बाइपैप मशीनों की संख्या 4 से बढ़कर 33 की गई है।

’11. मुख्यमन्त्री स्वरोजगार योजना’ : कोरोना के कारण घर लौटे प्रवासियों को घर मे काम देना हमारी प्राथमिकता है। हम राज्य के अधिक से अधिक युवाओं को स्वरोजगार के लिए प्रेरित करना चाहते हैं इसलिए मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना शुरू की गई है। इसके तहत अपना कोई भी काम शुरू करने के लिए ऋण लेने पर 25 प्रतिशत तक सब्सिडी दी जा रही है।

उत्तराखंड में 837 संक्रमित मरीज ठीक हुए

राज्य में कोरोना संक्रमित मरीजों की संख्या लगातार इजाफा हो रहा है। आज प्रदेश में 75 और कोरोना संक्रमित मरीज मिले हैं। अपर सचिव स्वास्थ्य डॉ. युगल किशोर पंत ने इसकी पुष्टि की है। अब प्रदेश में कुल संक्रमित मरीजों की संख्या 1637 हो गई है। जबकि 837 संक्रमित मरीज ठीक हो चुके हैं। अब एक्टिव केस की संख्या 778 हो गई हैं।
स्वास्थ्य विभाग की रिपोर्ट के अनुसार, टिहरी जनपद में 30, देहरादून में 16, चमोली में तीन, हरिद्वार में 15, पौड़ी में एक, रुद्रप्रयाग में छह, ऊधमसिंह नगर में तीन केस सामने आए हैं। वहीं, एक प्राईवेट लैब से आई जांच रिपोर्ट में भी संक्रमित केस सामने आया है।
जबकि बीते दस दिनों में ठीक होने वाले मरीजों की संख्या सक्रिय मामलों से अधिक हो गई है। प्रदेश की रिकवरी दर 51.79 प्रतिशत हो गई है। अपर सचिव युगल किशोर पंत ने बताया कि केंद्र की ओर से कोरोना संक्रमित मरीजों को डिस्चॉर्ज करने के लिए नई गाइडलाइन जारी की गई है। जिसमें संक्रमित मरीज को 10 दिन निगरानी में रखा जाएगा। सात दिन के बाद यदि मरीज में कोरोना के लक्षण नहीं दिखाई देते हैं तो उसे अस्पताल से घर भेजा जाएगा। प्रदेश में रिकवरी दर 51 प्रतिशत पहुंच गई है।   

डॉक्टर समेत तीन में कोरोना की पुष्टि
राजकीय दून मेडिकल अस्पताल की एक और महिला डॉक्टर समेत तीन स्वास्थ्य कर्मियों में कोरोना संक्रमण की पुष्टि हुई है। कोरोना के स्टेट कोऑर्डिनेटर डॉ. एनएस खत्री ने इसकी पुष्टि की है। जूनियर रेजिडेंट महिला डॉक्टर कोरोना संक्रमित मरीजों के इलाज और देखभाल कर रही थीं। जबकि स्वास्थ्य कर्मी भी लगातार रोटेशन पर कोरोना मरीजों की देखभाल कर रहे हैं।  दून अस्पताल समेत अन्य अस्पतालों में डॉक्टरों और स्वास्थ्य कर्मियों के कोरोना संक्रमण की जद में आने से स्वास्थ्य विभाग के साथ ही शासन प्रशासन की भी चिंता बढ़ी हुई है।

नौ पर्वतीय जिलों में अल्मोड़ा की स्थिति सबसे बेहतर

पर्वतीय जिलों में स्थिति अब नियंत्रण में आती दिख रही है। लॉकडाउन-3 में मिली छूट के बाद सैकड़ों की संख्या में प्रवासी उत्तराखंड लौटे, जिसके बाद पहाड़ी क्षेत्रों में एकाएक कोरोना संक्रमण के मरीज मिलने शुरु हुए। लेकिन सुकुन की बात है कि अब उसी रफ्तार से लोग रिकवर भी होने लगे हैं।
नौ पर्वतीय जिलों की बात करें तो अल्मोड़ा सबसे बेहतर स्थिति में है। उत्तरकाशी, टिहरी गढ़वाल, चंपावत और बागेश्वर में भी पचास फीसद से अधिक मरीज स्वस्थ हो चुके हैं। जबकि पिथौरागढ़, चमोली और पौड़ी गढ़वाल में भी स्थिति में सुधार दिख रहा है। रुद्रप्रयाग का रिकवरी रेट जरूर कम है। इधर, प्रदेश की राजधानी दून में रिकवरी रेट अभी भी बहुत कम है। यहां पर मरीजों के ठीक होने की रफ्तार 30 फीसद है।
वहीं, प्रदेश में अब तक कोरोना संक्रमित जिन चैदह मरीजों की मौत हुई है, उनमें नौ मरीज देहरादून जनपद की सूची में शामिल हैं। रिकवरी रेट में नैनीताल और ऊधमसिंहनगर दून से कई बेहतर स्थिति में हैं। जबकि हरिद्वार भी दून के आसपास ही खड़ा दिख रहा है।
उत्तराखंड में कोरोना के 127 नए मामले, टिहरी में सबसे ज्यादा 72 केस
वहीं, अधिकांश मेडिकल स्टोर संचालक केन्द्र की गाइडलाइन का पालन नहीं कर रहे हैं। शासन द्वारा साफ किया गया है कि कोई भी मेडिकल स्टोर संचालक सर्दी, जुकाम, खांसी, बुखार की दवा बिना चिकित्सक के पर्चे के नहीं बेचेगा। अगर बेचेगा तो उसे मरीज का डाटा और दवा का ब्योरा प्रशासन को उपलब्ध कराना होगा। मरीज का नाम, मोबाइल नंबर, ई-मेल का विवरण अलग एक रजिस्टर में अंकित किया जाएगा। पर अभी भी बड़ी संख्या में मेडिकल स्टोर इसका पालन नहीं कर रहे हैं।
वहीं, प्रदेशभर के सभी निजी अस्पतालों की जानकारी भी शासन-प्रशासन को नहीं मिल पा रही है। उनका रिकॉर्ड रखना भी मुश्किल हो रहा है। अस्पताल रोजाना कितने मरीज देख रहे हैं, क्या दवाएं दे रहे हैं इसकी मॉनिटरिंग नहीं हो पा रही है।
चार जिलें सबसे ज्यादा प्रभावित
प्रदेश में कोरोना संक्रमण का ग्राफ लगातार बढ़ता जा रहा है, लेकिन राहत की बात यह है कि एक समय तेजी से पहाड़ चढ़ रहे कोरोना के मामले फिलहाल प्रदेश के चार जिलों में ही सबसे ज्यादा सामने आ रहे हैं। ये जिले हैं देहरादून, नैनीताल, टिहरी और हरिद्वार। कोरोना के 70.29 फीसद मरीज इन्हीं चार जिलों में हैं। इनमें भी सबसे ज्यादा 26.59 फीसद मरीज देहरादून में हैं। इसके बाद मरीजों के मामले में नैनीताल की हिस्सेदारी 22.98 तो टिहरी की 10.53 व हरिद्वार की 10.18 फीसद है।
कोरोना संक्रमण की रफ्तार के साथ प्रदेश में संक्रमित मरीजों की मौत का आंकड़ा भी लगातार बढ़ता जा रहा है। अब तक 14 कोरोना संक्रमित मरीजों की मौत हो चुकी है। इसमें भी सबसे ज्यादा नौ मौतें देहरादून जिले में हुई हैं।

घटते संक्रमण के बीच भारत में नए मरीज बढ़ रहे

देशभर में करीब ढाई महीने लॉकडाउन के बाद धीरे-धीरे दी जा रही ढील के बीच संक्रमितों की संख्या 2.67 लाख के पार पहुंच चुकी है। प्रतिदिन करीब 10 हजार संक्रमित मिल रहे हैं। ऐसे में पिछले दो सप्ताह के आंकड़ों के हिसाब से देखा जाए तो कोरोना वायरस संक्रमण से सबसे ज्यादा प्रभावित शीर्ष-5 देशों में अमेरिका, रूस और ब्रिटेन में घटते संक्रमण के मुकाबले भारत और ब्राजील में इसकी गति बहुत तेज रही है।
सबसे ज्यादा पीड़ित देशों में अब भी अमेरिका पहले नंबर पर है, जहां 20 लाख से ज्यादा मामले मिल चुके हैं। वहीं करीब 7 लाख मामलों के साथ ब्राजील दूसरे, जबकि करीब 5 लाख मामलों के साथ रूस तीसरे नंबर पर है। भारत फिलहाल 5वें नंबर पर चल रहा है, लेकिन उसके अगले तीन दिन में करीब 2.88 लाख मामलों के साथ चैथे नंबर पर चल रहे ब्रिटेन को पछाड़ देने की संभावना है।
आंकड़ों के हिसाब से देखें तो दो सप्ताह पहले जहां भारत और ब्राजील में नए मामले मिलने की दर 5 फीसदी से ज्यादा थी, वहीं अन्य तीनों देशों यह दर 2 फीसदी के आसपास थी। दो सप्ताह के दौरान भारत और ब्राजील में यह दर घटकर 5 फीसदी से नीचे आई है, लेकिन अब भी 4 फीसदी से ज्यादा गति से नए मामले मिल रहे हैं। इसके उलट अन्य तीनों देशों में यह दर घटकर 2 फीसदी से भी नीचे पहुंच चुकी है। ब्रिटेन में तो संक्रमण के नए मामले मिलने की गति महज 0.6 फीसदी ही बची है। 

भारत में नए संक्रमण की दर बढ़ी
भारत में संक्रमण की दर जहां दो सप्ताह पहले 5.6 फीसदी थी, वहीं ब्राजील उस समय 5.4 फीसदी की गति से आगे बढ़ रहा था। लेकिन अब ब्राजील में यह दर घटकर 4.3 फीसदी रह गई है, वहीं भारत में घटने के बावजूद नए संक्रमण की दर अब ब्राजील से भी ज्यादा 4.4 फीसदी आंकी जा रही है। हालांकि ब्राजील के आंकड़े संदेहास्पद भी हैं, क्योंकि लगातार बढ़ते मामलों से आलोचना के बाद अब वहां की सरकार ने मासिक आंकड़े देने बंद कर दिए हैं और रोजाना नए मिलने वाले मामलों की ही जानकारी अपनी वेबसाइट पर दे रही है। 

कम टेस्ट के बावजूद ज्यादा ग्रोथ रेट
सबसे ज्यादा चिंता की बात यह है कि भारत और ब्राजील में अन्य तीन देशों के मुकाबले कोरोना टेस्ट की संख्या बेहद कम होने के बावजूद नए मामले मिलने की दर उनसे कहीं ज्यादा है। एक तरफ जहां रूस प्रति एक हजार की जनसंख्या पर 87.2 टेस्ट करा रहा है, वहीं भारत का आंकड़ा महज 3.4 टेस्ट का है। भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) के आंकड़ों के हिसाब से देश में इस समय करीब 1.3 लाख टेस्ट रोजाना कराए जा रहे हैं, जबकि रूस में यह आंकड़ा 3 लाख और अमेरिका में 5.1 लाख टेस्ट प्रतिदिन का है। विशेषज्ञ पहले ही कह चुके हैं कि भारत में रोजाना होने वाली टेस्टिंग की क्षमता बढ़ने पर नए मामले मिलने की गति और ज्यादा तेजी से बढ़ती दिखाई देगी। 

प्रदेश में कोरोना संक्रमितों की मृत्यु दर, राष्ट्रीय औसत से लगभग एक-तिहाईः उत्पल कुमार

मीडिया सेंटर, सचिवालय में आयोजित प्रेस वार्ता में मुख्य सचिव उत्पल कुमार सिंह ने कहा कि सोमवार को दोपहर तक 25 पॉजिटिव केस आए हैं जबकि 135 कोरोना संक्रमित ठीक हुए हैं। कुल 1380 पॉजिटिव केस में से 697 एक्टिव केस हैं। राज्य में डबलिंग रेट में निरंतर सुधार हो रहा है। अब यह 16 दिन से अधिक हो गई है। हमारा रिकवरी प्रतिशत, राष्ट्रीय औसत के बराबर लगभग 48 प्रतिशत हो गया है। सैपलों के पॉजिटिव होने की दर उत्तराखण्ड में 4.31 प्रतिशत है जबकि देश का औसत 5.37 प्रतिशत है। प्रति मिलियन सैंपल लेने की दर 3169 है। कोरोना संक्रमित व्यक्तियों की मृत्यु दर देश में 2.78 प्रतिशत है जबकि राज्य में यह दर लगभग 1 प्रतिशत है।

कोरोना मरीजों के लिए बेड की संख्या 20 हजार, आईसीयू बेड 243 और वेंटिलेटर 126

मुख्य सचिव ने कहा कि पिछले दिनों में कोरोना के मामलों में वृद्धि देखने को मिली है, परंतु इसमें डरने की आवश्यकता नहीं है। हमने अपनी स्वास्थ्य सुविधाओं में काफी इजाफा किया है। कोरोना मरीजों के लिए बेड की संख्या 20 हजार हो गई है। आईसीयू बेड 243 और वेंटिलेटर 126 उपलब्ध हैं।

कान्टेक्ट ट्रेसिंग पर विशेष ध्यान

मुख्य सचिव ने कहा कि कान्टेक्ट ट्रेसिंग पर विशेष ध्यान दिया गया है। 1380 कोरोना पॉजिटिव के 6294 कान्टेक्ट ट्रेस किए गए हैं। इन कान्टेक्ट के स्वास्थ्य की निगरानी की जाती है। और उनके रिस्क प्रोफाईल का निर्धारण कर आवश्यक कार्यवाही की जाती है। वर्तमान में करीब 1 लाख 30 हजार लोग क्वारेंटाईन में हैं। इनमें से अधिकांश होम क्वारेंटाईन में हैं। राज्य में 55 कंटेनमेंट जोन स्थापित हैं जहां पूरी सख्ती बरती जा रही है।

पहले की तुलना में विभिन्न सूचकों में सुधार

मुख्य सचिव ने दो सप्ताहों के तुलनात्मक आंकड़े देते हुए बताया कि दिनांक 25 मई से 31 मई के दौरान डबलिंग रेट 4.58 दिन, सैंपल पॉजिटिव रेट 8.83 प्रतिशत थी। जबकि 1 जून से 7 जून के दौरान डबलिंग रेट 13 दिन और सैंपल पॉजिटिव रेट 6.16 प्रतिशत थी। इसी प्रकार 25 मई से 31 मई के दौरान 970 सैंपल टेस्ट किए गए और बेड की संख्या 8375 थी। जबकि 1 जून से 7 जून के दौरान 1053 सैंपल टेस्ट किए गए और बेड की संख्या बढ़कर 18234 हो गई।

नियमों के उल्लंघन पर कड़ी कार्रवाई

मुख्य सचिव ने कहा कि नियमों का उल्लंघन करने वालों पर सख्त कार्रवाई की जा रही है। अभी तक लगभग 29737 लोग गिरफ्तार किए गए, 7977 वाहन सीज किए गए और 3 करोड़ 35 लाख रूपए का जुर्माना वसूला गया है। होटल, शॉपिंग मॉल, धार्मिक स्थलों के लिए गाईडलाईन जारी की गई है। इन स्थानों पर फिजीकल डिस्टेंसिंग, सफाई, सेनेटाईजेशन, मास्क का अनिवर्यता से पालन किया जाना है। मुख्य सचिव ने कहा कि अगर अनुशासन का परिचय देते हुए आवश्यक नियमों का पालन किया जाता है तो आगे सुविधाओं में बढ़घेतरी की जा सकती है।

मनरेगा से 3 लाख से अधिक श्रमिकों को मिल रहा काम

मनरेगा के काम में निरंतर वृद्धि हो रही है। प्रदेश में मनरेगा में 2,1816 काम चल रहे है। जिनमें 3,07,451 श्रमिक लगे हैं। 15 हजार नए जॉब कार्ड बनाए गए हैं, इनमें से 11 हजार को काम भी उपलब्ध करवाया गया है।