दो महीने में ऋषिकेश का तीसरा जवान हुआ सीमा पर शहीद

देश की सीमा पर उत्तराखंड से शहादत देने वाले कभी पीछे नहीं हटते। रविवार को भी उत्तराखंड का एक जवान शहीद हो गया। ऋषिकेश निवासी प्रदीप रावत सीमा पर बारूदी सुरंग में विस्फोट होने के बाद घायल हो गये थे। जिन्हें सैंन्य उपचार के लिये ले जाया गया। जहां उन्होंने दम तोड़ दिया।

जानकारी के मुताबिक प्रदीप रावत (30 वर्ष) पुत्र कुंवर सिंह रावत निवासी अपर गंगानगर ऋषिकेश, गढ़वाल राइफल की चौथी बटालियन में तैनात थे। वर्तमान में जम्मू-कश्मीर के उरी सेक्टर में तैनात थे। रविवार दोपहर करीब 12 बजे एक सैन्य अभियान के दौरान सीमा पर दुश्मन की ओर से बिछाई गई बारूदी सुरंग के फट जाने से प्रदीप रावत गंभीर रूप से घायल हो गए थे, जिन्हें सैन्य वाहन से पहले नजदीकी अस्पताल और फिर हायर सेंटर के लिए रेफर किया गया।

शाम करीब चार बजे हायर सेंटर पहुंचने पर चिकित्सकों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। शहीद प्रदीप रावत मूल रूप से बैराई गांव पट्टी दोगी टिहरी गढ़वाल के रहने वाले हैं। शहीद प्रदीप रावत के पिता कुंवर सिंह रावत सेना से रिटायर्ड हैं, वर्तमान में वह एम्स में कार्यरत है। शहीद प्रदीप रावत तीन बहनों के इकलौते भाई थे। करीब डेढ़ साल पहले ही प्रदीप रावत की शादी हुई थी। वह जनवरी में अपनी मैरिज एनिवर्सरी में छुट्टी आने वाले थे।1उनके चाचा वीर सिंह रावत ने बताया कि सेना के कमांोडग ऑफिसर ने उन्हें फोन पर उनके शहीद होने की जानकारी दी।

प्रदीप रावत की शहदात की सूचना के बाद घर पर कोहराम है। विधानसभा अध्यक्ष प्रेमचंद अग्रवाल ने शहीद के घर पर पहुंचकर उनके पिता कुंवर सिंह रावत को सांत्वना दी। पूर्व क्षेत्रीय सभासद बृजपाल राणा ने बताया कि आर्मी हेड क्वार्टर द्वारा शहीद के घर पर विधिवत सूचना दे दी गई है। सूचना के बाद से ही परिवार व आसपास के क्षेत्र में कोहराम मच गया है। परिवार का रो-रो कर बुरा हाल है। आस पास क्षेत्रों में दो महीने में तीसरी शहादत होने पर माहौल गमगीन है।

एनएसयूआई ने सीएम आवास घेरा, पुलिस ने किया बल प्रयोग

उत्तराखंड सरकार पर रोजगार न दे पाने का आरोप लगाते हुये एनएसयूआई कार्यकर्ताओं ने सीएम का आवास घेरा। इस दौरान पुलिस और एनएसयूआई कार्यकर्ताटों के बीच झड़प भी देखने को मिली। पुलिस ने वाटर कैनन का प्रयोग कर कार्यकर्ताओं की भीड़ को काबू किया।

बढ़ती बेरोजगारी की समस्या को लेकर एनएसयूआइ कार्यकर्ताओं ने दोपहर करीब डेढ़ बजे सीएम आवास कूच किया। हाथीबड़कला में पहले से ही भारी पुलिस बल तैनात कर बैरिकेडिंग लगाई गई थी। जुलूस के पहुंचते ही पुलिस ने बल पूर्वक छात्रों को रोकने का प्रयास किया। इससे नाराज एनएसयूआइ और कांग्रेसी नेताओं ने जबरन बेरिकेडिंग फांदनी शुरू कर दी। भीड़ को नियंत्रित करने के लिए पुलिस ने वाटर कैनन का प्रयोग किया।

इस दौरान कुछ नेताओं की पुलिस के साथ तीखी झड़प भी हुई। करीब दो दर्जन नेता बैरिकेडिंग फांदकर सीएम आवास की ओर घुसने लगे। जिस पर पुलिस ने हल्का बल प्रयोग किया। नेताओं एवं पुलिस के बीच करीब 20 मिनट तक धक्का-मुक्की हुई। नेताओं ने बैरिकेडिंग स्थल पर ही धरना शुरू कर दिया।

करीब एक घंटे बाद एनएसयूआइ के राष्ट्रीय अध्यक्ष फिरोज खान एवं प्रदेश अध्यक्ष मोहन भंडारी ने सिटी मेजिस्ट्रेट मनुज गोयल के माध्यम से मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत को ज्ञापन प्रेषित किया। पुलिस कार्रवाई का कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष प्रीतम सिंह एवं एनएसयूआइ के राष्ट्रीय अध्यक्ष फिरोज खान ने कड़ा विरोध किया।

पूर्व प्रदेश अध्यक्ष संग्राम सिंह पुंडीर ने कहा कि पीएम ने युवाओं से वादा किया था कि प्रतिवर्ष दो करोड़ को रोजगार दिया जाएगा। लेकिन, चार साल पूरे होने के बाद देश में मात्र छह लाख युवाओं को रोजगार मिला।

टिहरी जनक्रांति के नायक श्रीदेव सुमन को सीएम ने दी श्रद्धांजलि

स्वतंत्रता संग्राम के अग्रदूत अमर शहीद श्रीदेव सुमन की पुण्यतिथि पर मुख्यमंत्री ने उन्हें श्रद्धांजलि देकर नमन किया। उन्होंने ने कहा कि टिहरी जनक्रांति के नायक श्रीदेव सुमन का बलिदान को प्रदेश कभी भुला नहीं सकता है। उन्होंने कठिन परिस्थितियों में भी लोकशाही के लिये संघर्ष किया और अपना जीवन बलिदान कर दिया।

मुख्यमंत्री ने डॉ.एम.आर. सकलानी द्वारा सम्पादित पत्रिका सुमन सुधा टीकाराम मैठाणी की पुस्तक गुलदस्ता का विमोचन भी किया। मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र ने टिहरी जन क्रान्ति के नायक अमर शहीद श्रीदेव सुमन का भाव पूर्ण स्मरण करते हुए कहा कि श्रीदेव सुमन ने अपने समय की कठिन परिस्थितियों में लोकशाही के लिए संघर्ष करते हुये अपने प्राणी की बलि दे दी।

अमर शहीद श्रीदेव सुमन नई पीढ़ियों को सदैव प्रेरणा दंेगे। वे हमारे दिलों में एक महानायक के रूप में विराजमान रहेंगे। मुख्यमंत्री ने अमर शहीद श्रीदेव सुमन की उपलब्धियों व संघर्षो पर प्रकाश डालते हुए उनके संपूर्ण जीवन को अनुकरणीय बताया। इस दौरान श्रीदेव सुमन संस्कृति, साहित्य एवं शिक्षा संस्थान द्वारा मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत तथा वित्त मंत्री प्रकाश पन्त को सम्मानित किया गया।

स्वच्छ भारत मिशन में छात्रों को लेना होगा बढ़चढ़कर हिस्सा

भारतीय पेट्रोलियम संस्थान पहुंचे उपराष्ट्रपति एम वैंकेया नायडू ने इफ्काई यूनिवर्सिटी के दीक्षांत समारोह में एमबीए, बीटेक, बीबीए, एलएलबी एवं बीएड के स्नातकों को आठ गोल्ड मेडल, आठ सिल्वर मेडल प्रदान किये गए। उन्होंने विभिन्न पाठ्यक्रमों के कुल लगभग 249 स्नातकों को उपाधि भी प्रदान की।

उन्होंने उपाधि धारक छात्र-छात्राओं को बधाई देते हुए कहा कि आज दुनिया, सूचना तकनीकि के कारण ग्लोबल विजेल में सिमट रही है। समन्वय, सहयोग व प्रतिस्पर्धा की भावना हो। हमारा लक्ष्य उत्कृष्टता व कार्यक्षमता में सुधार होना चाहिए। आज दुनिया बड़ी तेजी से आगे बढ़ रही है और कड़ी प्रतिस्पर्धा है। एलपीजी का युग है अर्थात लिबराईजेशन, प्राईवेटाईजेशन व ग्लोबलाईजेशन।

उपराष्ट्रपति ने कहा कि आज छात्रों के समक्ष अनेक अवसर होने के साथ ही अनेक चुनौतियां भी हैं। विश्वविद्यालयों को इन चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए छात्रों को शिक्षा देनी चाहिए। भारत दुनिया की छठी बड़ी अर्थव्यवस्था बन गया है। यह हमारे लिए गौरव की बात है। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी सुधारों को ठोस तरीके से लागू कर रहे हैं। कई तरह की चुनौतियां आती हैं, और इन पर विजय भी प्राप्त की जाती है।

राज्यपाल डॉ कृष्ण कांत पाल ने कहा कि विद्यार्थियों का चरित्र निर्माण, क्लास रूम में होता है और वही से राष्ट्र निर्माण भी होता है। हमारी शिक्षण संस्थाओं और विश्वविद्यालयों को विभिन्न सम-सामयिक चुनौतियों में सकारात्मक भूमिका निभानी होगी, जिससे यहां पढ़ने वाले विद्यार्थी मजबूती से अपने पैरों पर खड़े हो सकें तथा दुनिया का सामना करें।

इस दौरान सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत ने कहा कि ये अवसर स्नातकों को अपनी दीक्षा व शिक्षा को पूर्णकर दीक्षांत के बाद जीवन के गंतव्य की ओर बढ़ने का है। ज्ञान की कोई सीमा नहीं होती, यह केवल एक पड़ाव है, जहां आप अपनी शिक्षा पूरी करके जा रहे हैं। इसलिए आपके सामने समाज के लिए कुछ करने और योगदान देने की बड़ी अहम जिम्मेदारियां हैं। किसी भी प्रकार का ज्ञान तभी मूल्यवान है, जब वह इस पृथ्वी पर मनुष्यमात्र के कल्याण व विकास का साधन बनता है। हमारे प्राचीन गंथों में ज्ञान को महत्वपूर्ण बताता गया है। आज का युग तकनीक का युग है, इसलिए नित नए परिवर्तनों के अनुसार खुद को ढालने के लिए आप तैयार रहें।

मुख्यमंत्री की सहमति के बाद तय होगा कंसेंसस कमेटी के लिये प्रतिनिधि

बीसीसीआइ की प्रशासक समिति ने उत्तराखंड के खिलाड़ियों की रणजी व अन्य घरेलू क्रिकेट प्रतियोगिताओं में शिरकत करने की राह प्रशस्त करने के बाद राज्य की दो एसोसिएशन ने अपने प्रतिनिधियों के नाम कंसेंसस कमेटी को भेज दिये है। राज्य सरकार अपना प्रतिनिधि मुख्यमंत्री की सहमति के बाद ही तय करेगी। बाकी अन्य दो एसोसिएशन भी जल्द अपने सदस्यों के नाम घोषित करेगी।

बीसीसीआई की मान्यता मिलने के बाद अब उत्तराखंड की क्रिकेट टीम बीसीसीआइ की ओर से वर्ष भर होने वाले विभिन्न आयु वर्गो की प्रतियोगिताओं में शिरकत कर सकेगी। उत्तराखंड में क्रिकेट गतिविधियों के संचालन के लिए बीसीसीआइ ने नौ सदस्यीय कंसेंसस कमेटी का गठन किया है। इसमें मान्यता का दावा करने वाली चार एसोसिएशनों के छह सदस्य, एक सरकारी सदस्य और दो सदस्य बीसीसीआइ के रखे गए हैं।

बीसीसीआइ ने पूर्व जनरल मैनेजर (क्रिकेट ऑपरेशन) प्रोफेसर रत्नाकर शेट्टी को कंसेंसस कमेटी का संयोजक बनाया है। बीसीसीआइ ने सभी क्रिकेट एसोसिएशनों से जल्द से जल्द अपने नाम भेजने को कहा है। मंगलवार को इनमें से उत्तरांचल क्रिकेट एसोसिएशन ने दो प्रतिनिधियों के नाम बीसीसीआइ की प्रशासक समिति को भेज दिए हैं।

उत्तरांचल क्रिकेट एसोसिएशन के सचिव चंद्रकांत आर्य ने बताया कि एसोसिएशन ने सर्वसम्मति से अध्यक्ष प्रदीप सिंह और उनका यानी चंद्रकांत आर्य का नाम तय किया है। इसकी सूचना ईमेल द्वारा प्रशासक समिति को भेज दी गई है। यूनाइटेड क्रिकेट एसोसिएशन ने सचिव संजय गुसाईं का नाम तय करते हुए इसकी सूचना प्रशासक समिति को भेज दी है। हालांकि क्रिकेट एसोसिएशन ऑफ उत्तराखंड अभी तक अपने दो प्रतिनिधि और उत्तराखंड क्रिकेट एसोसिएशन अपने एक प्रतिनिधि का नाम तय नहीं कर पाई हैं।

क्रिकेट एसोसिएशन ऑफ उत्तराखंड के सचिव महिम वर्मा ने कहा कि पदाधिकारी आपस में बैठक कर सदस्यों का नाम तय करेंगे। 22 जून तक नाम तय कर लिए जाएंगे, तब तक के लिए बीसीसीआइ से समय मांगा गया है। उत्तराखंड क्रिकेट एसोसिएशन के सचिव दिव्य नौटियाल ने कहा कि एक-दो दिनों के भीतर प्रतिनिधियों के नाम तय कर बीसीसीआइ को भेज दिए जाएंगे। वहीं सरकार के नामित प्रतिनिधि का नाम मुख्यमंत्री की सहमति के बाद तय किया जाएगा।

पूर्व सैनिक पिता ने दी शहीद बेटे विकास गुरूंग को मुखाग्नि

जब तक सूरज चांद रहेगा। विकास गुरूंग तेरा नाम रहेगा…., पाकिस्तान मुर्दाबाद, हिंदुस्तान जिंदाबाद के नारों के बीच शहीद विकास गुरूंग की अंतिम यात्रा तीर्थनगरी के विभिन्न मार्गों से होती हुयी मुनिकीरेती के पूर्णानंद घाट पहुंची। जहां उनका सैन्य सम्मान के साथ अंतिम संस्कार लामा रिति रिवाज से किया गया। शहीद विकास गुरूंग के पिता रमेश गुरूंग ने अपने बेटे को मुखाग्नि दी।

शनिवार को जम्मू-कश्मीर में नौशेरा के लाम सेक्टर में पाकिस्तान की तरफ से हुई गोलाबारी में 21 गोरखा रायफल में तैनात गुमानीवाला निवासी रायफलमैन विकास शहीद हो गए थे। 21 वर्षीय शहीद का पार्थिव शरीर रविवार को उनके पैतृक आवास पहुुंचा था, तभी से वहां श्रद्धांजलि देने वालों को तांता लगा हुआ था। सोमवार सुबह सेना के जवानों ने शहीद के पार्थिव शरीर को गार्ड ऑफ ऑनर दिया।

शहीद विकास गुरूंग को पूर्णानदं घाट पर 24 फील्ड रेजीमेंट के जवानों ने हवा में 32 राउंड फायर कर सशस्त्र सलामी दी। गंगा घाट पर शहीद जवान का लामा रीति से अंतिम संस्कार किया गया। पिता रमेश गुरुंग ने बेटे को मुखाग्नि दी। घाट पर विधानसभा अध्यक्ष, सेना के अधिकारियों व जन प्रतिनिधियों ने शहीद को पुष्पचक्र अर्पित कर श्रद्धांजलि दी।

इसे पहले सुबह करीब नौ बजे मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने शहीद के घर पहुंच कर उन्हें श्रद्धांजलि दी। मुख्यमंत्री ने कहा कि विकास गुरुंग की कुर्बानी व्यर्थ नहीं जाएगी। ऐसे वीरों के कारण ही हमारा देश सुरक्षित है। विधानसभा अध्यक्ष प्रेमचंद अग्रवाल ने शहीद विकास की स्मृति में द्वार बनाने, उनकी एक आदमकद मूर्ति स्थापित करने और गुलरानी फार्म का नाम शहीद के नाम पर करने की घोषणा की।

शहीद विकास गुरूंग की अंतिम या़त्रा में राजनैतिक संगठनों ने भी शिरकत की। मगर, राजनीति के लिये नहीं बल्कि देशभक्ति की भावना उन्हें एक साथ ले आयी। शहीद की विदाई यात्रा में हर पचास कदम की दूरी पर व्यापारी ने अपने-अपने प्रतिष्ठान बंद कर शहीद को श्रद्धांजलिद अर्पित की। शहीद विकास के सम्मान में देश भक्ति के गीत चल रहे थे। यह देश भक्ति ही थी जो लोगों को भीषण गर्मी में घर से बाहर सड़क तक ले आयी।

सभी वर्ग के लोगों ने दी नम आंखों से विदाई

शहीद की अंतिम यात्रा में क्या बच्चे, क्या बुढ़े और क्या जवान इन सभी के साथ सैकड़ों की संख्या में महिलायें भी चल रही थी। शहीद के घर से लेकर पूर्णानंद घाट तक सभी ने भारत माता की जय जैसे नारे के साथ शहीद जवान को अपनी-अपनी श्रद्धांजलि दी।

युवाओं को नदियों के पुनर्जीवीकरण को आगे आना होगाः त्रिवेन्द्र

मुख्यमंत्री ने मैराथन दौड़ को हरी झंडी दिखाते हुये कहा कि युवाओं को नदियों के पुनर्जीवीकरण के लिये आगे आना होगा। मैड संस्था इस संबंध में बच्चों की ऊर्जा को सही दिशा देने का रचनात्मक कार्य किया है।

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र ने कहा कि रिस्पना एवं कोसी नदी को पुनर्जीवित कर हमें देश के समक्ष रोल मॉडल बनाना होगा। यह कार्य जन सहयोग से ही पूरा किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि इन नदियों के पुनर्जीवन के लिए सरकार को समाजिक संस्थाओं, विभिन्न संगठनों एवं स्थानीय जनता का पूरा सहयोग मिल रहा है।

त्रिवेन्द्र रावत ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के स्वच्छ गंगा मिशन को सफल बनाने के लिए हमें पूरा सहयोग करना होगा। नमामि गंगे के तहत 25 हजार करोड़ रूपये इस प्रोजेक्ट में रखे गये हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि देहरादून को पूर्ण ग्रेविटि का पानी उपलब्ध कराने के लिए अगले वर्ष तक सौंग बांध की नीव रखी जायेगी।

राज्य सरकार द्वारा ईको सिस्टम, पर्यावरण सरंक्षण, जल संरक्षण, नदियों के पुनर्जीवीकरण व स्थानीय उत्पादों पर आधारित स्वरोजगार के अवसर विकसित करने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।

सीएम ने किया प्रयोगशाला कॉम्पलेक्स का उद्घाटन

राजकीय कन्या इंटर कॉलेज देहरादून में नवनिर्मित प्रयोगशाला कॉम्पलेक्स का उद्घाटन राज्य के मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने किया। रोडिक कन्सलटेंसी प्राइवेट लिमिटेड द्वारा इस आधुनिक प्रयोगशाला के लिए सीएसआर मद से सहायता प्रदान की गई है। कॉम्पलैक्स में फिजिक्स, केमिस्ट्री एवं बायोलॉजी की अत्याधुनिक लैब खुलने से छात्राओं में बौद्धिक विकास होगा।

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र ने प्रयोगशाला कॉम्पलैक्स के उद्घाटन समारोह के दौरान कहा कि आईआईटी मुम्बई के इंजीनियरों द्वारा ’के-यान’ नाम से एक ऑल-इन-वन डिवाइस तैयार की गई है। इस डिवाइस से सैकड़ों विद्यालयों में ऑनलाईन माध्यम से एक स्थान से पढ़ाया जा सकता है। के-यान डिवाइस राजपुर रोड स्थित राजकीय पूर्व माध्यमिक विद्यालय देहरादून में लगाई गई है, कुछ अन्य स्कूलों में भी यह डिवाइस लगाई जायेगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार शिक्षा में गुणात्मक सुधार के लिए प्रयासरत है। उत्तराखण्ड में 12 छात्र-छात्राओं पर एक अध्यापक तैनात है, यह स्थिति अन्य राज्यों से काफी अच्छी है।

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र ने कहा कि मुख्यमंत्री बनने के छह माह बाद उन्होंने आईएएस अधिकारियों को स्कूलों में भेजकर स्कूलों की जरूरतों एवं मूलभूत आवश्यकताओं की जानकारी लेने को कहा। आईएएस अधिकारी स्कूलों में जाकर बच्चों से मिले और उनकी समस्याओं को सुना। अधिकारियों के भ्रमण के दौरान स्कूलों की आवश्यकताओं से सबंधित अनेक सुझाव प्राप्त हुए। मुख्यमंत्री ने कहा कि आधुनिक उपकरणों से युक्त इस लैब की स्थापना से छात्राएं विज्ञान एवं तकनीक के प्रायोगिक पहलुओं को बेहतर तरीके से समझ सकेंगी।

गिरफ्तारी देकर एम्स में भ्रष्टाचार व मनमानी के खिलाफ की जांच की मांग

पिछले कई माह से एम्स प्रशासन ऋषिकेश के विरोध में उत्तराखंड जन विकास मंच का धरना व क्रमिक अनशन चल रहा है। मंच ने एम्स में भ्रष्टाचार व नौकरियों में बाहरी लोगों को वरियता के साथ अनियमितता का आरोप लगाया है और इन्हीं मांगों को लेकर वह कई माह से धरना व क्रमिक अनशन कर रहे है। बुधवार को मंच के कार्यकर्ताओं ने बहुल्य संख्या में तहसील पहुंच कर उप जिलाधिकारी के समक्ष अपनी-अपनी गिरफ्तारी दी। हालांकि बाद में उन्हें निजी मुचलके भरने के बाद रिहा कर दिया गया।

उत्तराखंड जन विकास मंच के कार्यकर्ता उप जिलाधिकारी कार्यालय पहुंचे। जहां उन्होंने एम्स प्रशासन के खिलाफ प्रदर्शन किया। मंच के अध्यक्ष आशुतोष शर्मा ने उप जिलाधिकारी के माध्यम से प्रधानमंत्री को प्रेषित ज्ञापन कर कहा कि एम्स में संविदा व आउटसोर्सिग के माध्यम से की जा रही ग्रुप सी व डी की नियुक्तियों में 70 प्रतिशत प्राथमिकता स्थानीय बेरोजगारों को दी जानी चाहिए। मगर, एम्स में नियुक्तियों की आड़ में खुलेआम भ्रष्टाचार हो रहा है।

उन्होंने कहा कि वर्ष 2014 में नियुक्ति को लेकर निकाली गई विज्ञप्ति रद्द कर दी गयी और अभ्यर्थियों का पैसा नहीं लौटाया गया। उत्तराखंड वासियों से फार्म फीस के नाम पर ज्यादा वसूली हो रही है। ज्ञापन में कहा गया कि बीते वर्ष बीएससी नर्सिंग के पदों पर विज्ञप्ति जारी हुई। भारत की यह पहली ऐसी परीक्षा रही, जिसमें कोई भी सफल नहीं हुआ। इस वर्ष फिर विज्ञप्ति जारी की गयी। जिसके भीतर कोई परीक्षा नहीं हुई है। मंच ने निदेशक की भूमिका पर भी सवाल उठाते हुये जांच की मांग की है।

गिरफ्तारी और प्रदर्शन में पूर्व विधायक ओमगोपाल रावत, राजेश व्यास, जयेन्द्र रमोला, हिमांशु बिजल्वाण, सरोज डिमरी, राधा रमोला, देवेन्द्र बैलवाल, जनार्दन तिवारी, भगतराम कोठारी, सत्यवीर तोमर, सुभाष जखमोला, नीरज सहरावत आदि शामिल हुए।

कास्टिंग काउच से संसद भी अछूती नहींः रेणुका चौधरी

पूर्व राज्यसभा सदस्य व कांग्रेसी नेता रेणुका चौधरी अपने बड़बोले बयान के लिये मशहूर है। ऐसा ही एक और बड़ा बयान उन्होंने दिया है। उन्होंने कास्टिंग काउच पर कहा कि सिर्फ फिल्म उद्योग ही नहीं, बल्कि सभी कार्यस्थलों की सच्चाई है। उन्होंने कास्टिंग काउच को संसद से जोड़ते हुये कहा कि संसद भी इससे अछूती नहीं है।

पत्रकार वार्ता के दौरान रेणुका चौधरी ने कहा यह कड़वी सच्चाई है। यह सिर्फ फिल्म उद्योग में ही नहीं है। यह कार्यस्थलों पर भी हर जगह होता है। यह मत सोचिए कि संसद इससे अछूती है या कोई अन्य कार्यस्थल इससे बचा हुआ है। अगर आज आप पश्चिमी दुनिया की ओर देखें तो स्थापित शीर्ष अभिनेत्रियों ने भी ‘मी टू’ (मैं भी) कहने में काफी समय लिया। अब समय आ गया है कि भारत भी आगे आकर कहे- मी टू।

यहां आपको बताना जरूरी हो जाता है कि उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर में हुयी सामूहिक दुष्कर्म की घटना पर रेणुका चौधरी ने अपने बयान में कहा था कि दुष्कर्म तो चलते ही रहते हैं। मालूम हो कि दक्षिण भारत की एक संघर्षरत अभिनेत्री रेड्डी के हाल ही में दिए गए बयान की वजह से कास्टिंग काउच पर काफी बहस हो रही है।

मशहूर कोरियोग्राफर सरोज खान ने मांगी माफी
बॉलीवुड की कोरियोग्राफर सरोज खान ने कास्टिंग काउच संस्कृति का बचाव करने संबंधी अपने बयान पर माफी मांगी है। उन्होंने कहा था इंडस्ट्री में लड़की को दुष्कर्म करके छोड़ नहीं देते, रोजी-रोटी भी देते हैं। इसलिए सिर्फ फिल्म इंडस्ट्री के पीछे नहीं पड़ना चाहिए। ये सारी चीजें लड़की के ऊपर है कि वह क्या करना चाहती है। तुम ऐसे लोगों के हाथ में नहीं आना चाहते तो मत आओ। तुम्हारे पास कला है तो खुद को इंडस्ट्री में बेचने की क्या जरूरत है।