अब उत्तराखंड में भी सवर्णों को मिलेगा आरक्षण

अपर मुख्य सचिव,कार्मिक एवं सतर्कता, राधा रतूड़ी ने बताया कि भारत सरकार द्वारा संविधान संशोधन के उपरान्त आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों को 10 प्रतिशत आरक्षण दिया गया है। इसी क्रम में उत्तराखण्ड सरकार द्वारा भी 5 फरवरी, 2019 को ‘‘उत्तराखण्ड लोक सेवा (आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के लिये आरक्षण) अध्यादेश 2019’’ लागू कर दिया गया है।
इस प्रकार केन्द्र सरकार तथा गुजरात सरकार के बाद उत्तराखण्ड देश में दूसरा राज्य है, जहां उक्त आरक्षण लागू किया गया है। प्रदेश के बेरोजगार शिक्षित युवाओं के लिये यह अच्छी खबर है, जिसके अन्तर्गत आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग भी आरक्षण का लाभ प्राप्त कर सकेंगे। उन्होंने बताया कि यह अध्यादेश समस्त विभागों, उत्तराखण्ड लोक सेवा आयोग तथा अधीनस्थ सेवा चयन आयोग को प्रेषित किया गया है, ताकि इस पर तत्काल अधियाचन एवं विज्ञप्ति जारी की जाये तथा अधिक से अधिक बेरोजगार नौजवानों को शीघ्र रोजगार प्राप्त हो सके।
इसके तहत लोक सेवाओं और पदों में आर्थिक रूप से कमजोर वर्गो के पक्ष में उत्तराखण्ड राज्य के उन स्थायी निवासियों को आरक्षण प्राप्त होगा, जो अनुसूचित जातियों, अनुसूचित जनजातियों और सामाजिक तथा शैक्षणिक रूप से पिछड़े वर्गो के लिए आरक्षण की मौजूदा योजना के अन्तर्गत सम्मिलित नहीं है।
ऐसे आर्थिक रूप से कमजोर वर्गो के व्यक्ति जिनके परिवारों की सभी स्रोतों से कुल वार्षिक आय रु 8 लाख से कम हो आरक्षण के इस प्रयोजन के लिए आर्थिक रूप से कमजोर वर्गो में चिन्हित हैं। परिवार, की आय में सभी स्रोतों से अर्थात् वेतन, कृषि, व्यवसाय, पेशा आदि से प्राप्त आय सम्मिलित होगी। उक्त आय लाभार्थी द्वारा आवेदन के वर्ष से पूर्व वित्तीय वर्ष के लिए आय होगी।

परेड में शामिल होकर एनसीसी कैडेट्स ने बढ़ाया उत्तराखंड का मान

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत से गुरूवार को मुख्यमंत्री आवास स्थित जनता मिलन हाॅल में गणतंत्र दिवस परेड में प्रतिभाग करने वाले एनसीसी कैडेटों ने मुलाकात की। मुख्यमंत्री ने परेड भाग लेने वाले एनसीसी केडैट्स को शुभकामनाएं दी। उन्होंने कहा कि एनसीसी कैडेटों का गणतंत्र दिवस के अवसर पर राजपथ पर आयोजित होने वाली गरिमामय परेड के लिए चयनित होना गर्व एवं सम्मान की बात है। यह उनके जीवन का भी यादगार पल है। ऐसे मौके हर किसी को नही मिलते हैं। इस परेड के अनुभव उन्हें देश सेवा के लिये भी प्रेरित करते रहेंगे। एनसीसी अनुशासन का भी पर्याय है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि जल्द ही प्रदेश में एनसीसी अकादमी की स्थापना की जायेगी। एनसीसी अकादमी के लिए भूमि का चयन किया जा चुका है, जल्द ही इसका शिलान्यास किया जायेगा। उन्होंने कहा कि एनसीसी अकादमी के समीप 6.5 करोड़ की लागत से एक झील का निर्माण भी किया जायेगा। इस एकेडमी की स्थापना से एनसीसी केडेटों को और बेहतर अवसर उपलब्ध होंगे तथा आवश्यक सुविधाएं भी मिल सकेंगी। उन्होंने कहा कि एनसीसी का प्रशिक्षण उन्हें सैन्य बलों में अपनी सेवा देने में भी मददगार रहता है।
गौरतलब है कि इस वर्ष गणतंत्र दिवस परेड के लिए उत्तराखण्ड से कुल 111 एनसीसी कैडेट्स का चयन हुआ था। जिन्होंने अपनी प्रतिभा से प्रदेश का भी नाम रोशन किया है।
इस अवसर पर सचिव शिक्षा डाॅ.भूपिन्दर कौर औलख, महानिदेशक शिक्षा ज्योति यादव, निदेशक एनसीसी ब्रिगेडियर वहल, ब्रिगेडियर एस. मुखर्जी, एस.पी.सिंह, जे.एस.नेगी आदि उपस्थित थे।

“बालिका पंचायत” में मुख्यमंत्री ने छात्राओं से संवाद किया

मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत किसान भवन देहरादून में आयोजित समग्र शिक्षा अभियान के तहत राज्य स्तरीय कार्यक्रम ‘‘बालिका पंचायत‘‘ में सम्मिलित हुए। कार्यक्रम को सम्बोधित करते हुए मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने कहा कि बालिका पंचायत के माध्यम से बच्चों को सामूहिक रूप से रहने का अवसर प्राप्त हुआ है यह अपने आसपास के लोगों को और समाज को समझने का अच्छा अवसर है।
इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने घोषणा की कि इस बालिका पंचायत में प्रतिभाग करने वाले सभी छात्र-छात्राओं के मध्य एक स्मृति प्रतियोगिता एवं इस दौरान अपने संस्मरण लिखने की प्रतियोगिता करवाई जाएगी, जिसके विजेता को मुख्यमंत्री द्वारा 1000 पुरस्कार स्वरूप प्रदान किया जाएगा, साथ ही मुख्यमंत्री ने छात्र-छात्राओं से सुझाव भी मांगे। उन्होंने कहा कि छात्र-छात्राओं से प्राप्त सुझावों पर विचार किया जाएगा।

मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिये कि राज्य के टाॅप-10 छात्र-छात्राओं को शैक्षणिक भ्रमण पर वाघा बाॅर्डर सहित अन्य ऐसे संस्थानों का भ्रमण कराया जाए, जहाँ का भ्रमण कर हमारी युवा पीढ़ी कुछ सीख सके। भ्रमण के लिए स्थानों का चयन बहुत सोच-समझ कर किया जाए ताकि बच्चे ऐसी जगह जा सकें, जहाँ उन्हें सीखने को मिले। मुख्यमंत्री ने कहा कि आज आवश्यकता क्वालिटी एजुकेशन की है। इसके साथ ही हर जिला मुख्यालय में एक ऐसी लाईब्रेरी होनी चाहिए जहां उत्तराखण्ड का साहित्य हो। इससे उन लोगों को सहायता मिलेगी, जो लोग उत्तराखण्ड के साहित्य और इतिहास को जानना-समझना चाहते हैं। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने मोबाईल स्मार्ट क्लास और मोबाईल लैब का भी अवलोकन किया। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के मोबाईल स्मार्ट क्लास और मोबाईल वैन का विस्तार किया जाना चाहिए।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में उच्च शिक्षा और माध्यमिक शिक्षा के माध्यम से अलग-अलग सुपर-100 छात्र-छात्राओं को आने वाली परीक्षाओं की तैयारी के लिए प्रशिक्षण दिया जा रहा है। इस अवसर पर सचिव शिक्षा डाॅ. भूपिन्दर कौर औलख सहित शिक्षा विभाग के अधिकारी भी उपस्थित थे।

सीएम ने की बुरांशखण्डा पेयजल योजना के पुनरूद्धार की घोषणा

मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने गुरुवार को सर्वे एस्टेट, हाथीबड़कला देहरादून में मसूरी विधानसभा क्षेत्र में लगभग 40 करोड़ की विभिन्न विकास योजनाओं का शिलान्यास किया। मुख्यमंत्री ने मसूरी विधायक गणेश जोशी को जन्मदिन की बधाई देते हुए बुरांशखण्डा पेयजल योजना के पुनरूद्धार किए जाने की घोषणा की। उन्होंने इस अवसर पर लगाए गए रक्तदान शिविर की प्रशंसा करते हुए कहा कि रक्तदान महादान होता है। उन्होंने कहा कि एक यूनिट रक्तदान करने से चार लोगों का जीवन बचाया जा सकता है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की महत्वकांक्षी योजना आयुष्मान भारत को और आगे बढ़ाते हुए हमने उत्तराखण्ड अटल आयुष्मान योजना शुरू की है। इस योजना के माध्यम से राज्य के प्रत्येक परिवार को प्रतिवर्ष 5 लाख रूपये तक की कैशलैस स्वास्थ्य सुविधा प्राप्त होगी। उन्होंने कहा कि सभी प्रदेश वासियों को कैशलैस कार्ड उपलब्ध कराये जाएंगे। इसके साथ ही राज्य में एयर एम्बूलेंस सुविधा भी शुरू कर दी गयी है। इसके माध्यम से राज्य के दूरस्थ क्षेत्रों से घायलों को जल्दी से जल्दी हायर सेंटर लाया जा सकेगा और विशेषज्ञ डाॅक्टर्स को दूरस्थ क्षेत्रों में भेजा जा सकेगा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि महिला स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से प्रसाद योजना संचालित की जा रही है। इसके साथ ही महिला स्वयं सहायता समूहों को 5 लाख रूपए तक का ऋण शून्य प्रतिशत ब्याज पर दिया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य तीव्र गति से विकास कर रहा है। हमारी औसत प्रतिव्यक्ति आय 1.90 लाख हो चुकी है। राज्य सरकार ने राज्य में 155 पुलों के निर्माण की स्वीकृति प्रदान की है।
मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर मसूरी विधानसभा क्षेत्र के अन्तर्गत सन्तलादेवी मोटर मार्ग, कालीदास मोटर मार्ग, अनारवाला-मालसी मोटर मार्ग एवं विकासखण्ड सहसपुर में देहरादून-मसूरी मोटर मार्ग सहित विभिन्न मोटर मार्गों के निर्माण, पुनर्निर्माण, सुधारीकरण एवं सुरक्षा दीवार निर्माण का कार्य शामिल है।
इस अवसर पर कैबिनेट मंत्री यशपाल आर्य, विधायक गणेश जोशी, खजान दास भी उपस्थित थे।

सवर्णों को आर्थिक आरक्षण पर शीघ्र अध्यादेश ला सकती है उत्तराखंड सरकार

उत्तराखंड के सवर्ण जाति को आर्थिक आधार पर 10 प्रतिशत आरक्षण का तत्काल लाभ देने के लिए राज्य सरकार शीघ्र अध्यादेश ला सकती है। वित्त मंत्री प्रकाश मंत्री के मुताबिक केंद्र में जब भी कोई संविधान संशोधन होता है तो प्रदेश सरकारें उनको अंगीकार करती है। इसके लिए उन्हें विधानसभा में विधेयक लाना होता है। जानकारी के मुताबिक इस पर जल्द अध्यादेश आ सकता है।

मुख्यमंत्री रावत ने कहा कि जल्द ही सामान्य वर्ग के गरीब लोगों को 10 प्रतिशत आरक्षण का लाभ दिया जाएगा। हालांकि केंद्र से प्रदेश सरकार को अभी संविधान संशोधन की अधिसूचना के संबंध में कोई सूचना प्राप्त नहीं हुई है।

इस बीच मुख्यमंत्री ने अपर मुख्य सचिव (कार्मिक) राधा रतूड़ी को विभागीय स्तर पर आरक्षण का प्रावधान करने की प्रक्रिया के बारे में कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं। इन निर्देशों के क्रम में कार्मिक विभाग के अधिकारियों ने गुजरात सरकार के अधिकारियों से संपर्क किया है। उनका कहना है कि वहां भी अभी आरक्षण देने की घोषणा हुई है। लेकिन इस संबंध में कोई प्रक्रियात्मक कार्रवाई शुरू नहीं हुई है।

कूड़ा निस्तारण पर सरकार का विशेष ध्यानः त्रिवेन्द्र

उत्तराखंड सरकार कूड़ा निस्तारण की दिशा में विशेष ध्यान दे रही है। इसके लिए हरिद्वार में कूड़ा निस्तारण को एक बड़ा प्रोजेक्ट पर काम चल रहा है। इस प्रोजेक्ट में नीदरलैंड के विशेषज्ञ काम कर रहे है। प्रोजेक्ट सफल रहा था तो इससे एविशन फ्यूल, खाद आदि तैयार की जा सकेगी। यह बात मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने कही। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि वीर चंद्र सिंह गढ़वाली योजना के तहत पहले सब्सिडी 30 प्रतिशत मिली थी, जोकि अब बढ़ाकर 50 प्रतिशत की जा रही है।

उन्होने कहा कि डोइवाला के आसपास करीब 25 से 50 एकड़ भूमि पर फिल्म सिटी बनेगी। इसके लिए भूमि तलाशी जाएगी। उत्तराखंड फिल्म जगत के हिसाब से पूरी तरह परिपूर्ण है, यहां की वादियों को कैमरे में कैद किया जाएगा। बड़े पर्दे पर उत्तराखंड की सौंदर्य छवि देखने को मिलेगी। इससे यहां पर्यटन बढ़ेगा।

उन्होने कहा कि अटल आयुष्मान योजना से राज्य में अब तक चार लाख 46 हजार गोल्डन कार्ड लोगों के बनाए जा चुके है। जबकि प्रतिदिन 35 हजार गोल्डन कार्ड विभिन्न क्षेत्रों में बन रहे है। इस योजना के मरीजों के बिल का भुगतान सरकार 15 दिनों के भीतर करेगी। साथ ही सप्ताह भर की निशुल्क दवाइयां भी देने का प्रावधान रखा जा रहा है। उन्होंने कहा कि क्षेत्र में राष्ट्रीय ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज संस्थान (एनआईआरडी) शुरू किए जाने पर काम चल रहा है।

सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद सुभारती मेडिकल कॉलेज हुआ सील

सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद अब उत्तराखंड सरकार सुभारती मेडिकल कॉलेज को चलायेगी। गुरूवार को प्रशासन और पुलिस ने कॉलेज को सील कर दिया।

विदित हो कि दो साल पूर्व मेडिकल काउंसिल आफ इंडिया (एमसीआई) ने सुभारती मेडिकल कॉलेज का निरीक्षण कर तमाम खामियां पाई थी। इस पर एमसीआई ने कॉलेज की मान्यता का आवेदन स्वीकार नहीं किया था। 30 अगस्त 2017 को कॉलेज प्रशासन ने सुप्रीम कोर्ट में एमबीबीएस में दाखिले कराने की अर्जी दायर की। इस पर कोर्ट ने एक सितंबर 2017 में दाखिले के आदेश जारी किये थे।

मगर, इसके बाद मनीष वर्मा नाम के व्यक्ति ने खुद को सपंत्ति का मालिक बताकर सुप्रीम कोर्ट में याचिका डाली। वहीं, कॉलेज के छात्रों ने भी कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। यह सभी छात्र कॉलेज की मान्यता को लेकर आशंकित थे। छात्रों ने स्वयं को अन्य कॉलेज में भेजने की याचिका दाखिल की। सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार और मेडिकल कांउसिल आफ इंडिया का पक्ष जाना।

सुप्रीम कोर्ट ने पाया कि उक्त संपत्ति श्रीदेव सुमन सुभारती मेडिकल कॉलेज की है ही नहीं। कॉलेज संचालकों ने कोर्ट में गलत तथ्यों को पेश किया। इसके बाद न्यायधीश रोहिंटन फली नरीमन व एमआर साह की पीठ ने पुलिस महानिदेशक उत्तराखंड को आदेश दिए कि कॉलेज को तत्काल सील किया जाये। साथ ही एमसीआई के नियमों के अनुरूप एचएनबी उत्तराखंड चिकित्सा शिक्षा विश्वविद्यालय से संबद्ध किया जाए। फैकल्टी व अन्य आवश्यक संसाधन की पूर्ति भी राज्य सरकार के स्तर पर की जाएगी।

बिना अुनमति ड्रोन उड़ा रहे तीन पर्यटकों से पुलिस ने वसूला जुर्माना

एक तो चोरी और ऊपर से सीना जोरी। यह कहावत रविवार को मुनिकीरेती के नीम बीच पर देखने को मिली। दरअसल यहां तीन लोग बिना अनुमति के ड्रोन कैमरे का प्रयोग करते दिखाई दिए। मौके पर मुनिकीरेती थाने से पुलिस पहुंची तो उल्टा पुलिस की कार्यवाही का ही विरोध कर उन्हें लॉ सिखाने लगे। पुलिस ने हंगामे के बीच ड्रोन उड़ा रहे गुलशन से पांच हजार रूपये और हंगामा करने पर डेनिस चिरामल, ऐश्वर्या से पांच सौ-पांच सौ का जुमार्ना वसूल किया।

रविवार को थाना मुनिकीरेती में पुलिस ने तीन लोगों का बिना अनुमति के ड्रोन कैमरा उड़ाने पर किया। पुलिस ने गुलशन चौहान पुत्र राकेश चौहान निवासी टीएचडीसी कॉलोनी रोड ऋषिकेश का पांच हजार रूपये का चालान काटा। वहीं पुलिस की कार्यवाही का विरोध कर रहे दो अन्य डेनिस चिरामल पुत्र डेविड चिरामल निवासी 48/6 ए ओल्ड ब्लांक, चेंबूर, मुंबई और ऐश्वर्या सोरना वीर पुत्री नीरज कुमार नीर निवासी ओबरॉय स्प्लेंडर विक्रोली मुंबई से 500-500 रूपये का जुर्माना वसूला गया है। विदित हो कि यह तीनों किसी विज्ञापन कंपनी के लिये मुनिकीरेती के नीम बीच पर शूटिंग कर रहे थे। मगर, इसके लिये पहले अनुमति नहीं ली गई। जिस कारण पुलिस को कार्यवाही अमल में लानी पड़ी।

हाईकोर्ट का उपनल कर्मियों को बड़ा तोहफा

नैनीताल हाईकोर्ट ने उपनल कर्मियों के पक्ष में सरकार को आदेश दिए है। जिसके अनुसार सरकार को कोर्ट ने कहा कि वह एक वर्ष के भीतर उपनल कर्मियों को नियमावली के अनुसार नियमित करे। साथ ही उन्हें न्यूनतम वेतनमान भी दे।

कोर्ट के फैसले से राज्य के विभिन्न विभागों, संस्थानों, निगमों में कार्यरत 20 हजार से अधिक उपनल कर्मियों को बड़ी सौगात मिली है। साथ ही उपनल कर्मचारियों की यूनियन को सरकार पर नियमित करने के लिए दबाव बनाने का हथियार भी मिल गया है।

पिछले दिनों हाई कोर्ट के वरिष्ठ न्यायाधीश न्यायमूर्ति राजीव शर्मा व न्यायमूर्ति शरद कुमार शर्मा की खंडपीठ ने सरकार से पूछा था कि उपनल कर्मचारियों के नियमितीकरण के लिए क्या नीति बनाई है? सरकार की ओर से जवाब में कोर्ट को बताया गया कि इस प्रकरण पर विचार किया जा रहा है।

मामले के अनुसार कुंदन सिंह नेगी ने मुख्य न्यायाधीश को पत्र भेजकर उत्तराखंड पूर्व सैनिक कल्याण निगम उपनल द्वारा की जा रही नियुक्तियों पर रोक लगाने की मांग की थी। हाई कोर्ट ने इस पत्र का स्वतः संज्ञान लेते हुए जनहित याचिका के रूप में स्वीकार किया था।

याचिका में कहा गया था कि उपनल का संविदा लेबर एक्ट मेें पंजीकरण नहीं है, इसलिए यह असंवैधानिक संस्था है। उपनल का गठन पूर्व सैनिकों व उनके आश्रितों के लिए हुआ था मगर राज्य सरकार ने इस संस्था को आउटसोर्सिंग कर्मचारियों की नियुक्ति का माध्यम बना दिया। जिस पर पूर्ण नियंत्रण राज्य सरकार का है। याचिका में उपनल कर्मियों के सामाजिक व आर्थिक स्थिति को देखते हुए भविष्य के लिए नीति बनाने की मांग की थी।

कोर्ट ने इस मामले में हाई कोर्ट बार एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष एमसी पंत को न्यायमित्र नियुक्त किया था। अधिवक्ता पंत ने कोर्ट को बताया कि कर्मचारियों ने जब याचिका दायर की तो सरकार की ओर से बताया गया कि उन्हें साल में फिक्सनल ब्रेेक दिया जाता है। कोर्ट ने इस ब्रेक को ना देने तथा इसे सर्वोच्च न्यायालय के आदेश के विरुद्ध माना था। सोमवार को हाई कोर्ट की ओर से उपनल कर्मियों को नियमावली के अनुसार नियमित करने तथा उन्हें न्यूनतम वेतनमान देने के आदेश पारित किए।

राज्य के विभिन्न विभागों, निगमों व संस्थानों में 20 हजार से अधिक उपनल कर्मचारी कार्यरत हैं। इसमें ऊर्जा के तीनों निगमों में ही 1200 कर्मी हैं। उपनल कर्मचारी को प्रतिमाह सरकार द्वारा करीब 12 हजार मासिक मानदेय दिया जाता है। इस आधार सरकार करीब 25 करोड़ मासिक व सालाना करीब तीन सौ करोड़ मानदेय दे रही है। नियमित होने अथवा न्यूनतम वेतनमान के बाद सरकार पर सालाना करीब एक हजार करोड़ वित्तीय बोझ पड़ेगा।

सीएम बोले, छात्र और छात्रायें नियमित समाचार पत्र पढ़े

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने कहा कि नागरिक विशेषकर युवा वर्ग विकास व सामाजिक कार्यो हेतु सरकारों पर निर्भरता को कम करने का प्रयास करे। स्वप्रेरणा से सामाजिक दायित्व निभाए। मुख्यमंत्री ने राज्य के युवाओं का आह्वाहन किया कि ऐसे प्रयास किए जाए कि युवाओं की क्षमता, योग्यता, ज्ञान, स्किल, धन, विशेषज्ञता का उपयोग व्यापक सामाजिक विकास व कल्याण के लिए हो। उन्होंने कहा कि टेक्नोक्रेट व प्रोफेशनल अन्तिम व्यक्ति व अन्तिम गांव के विकास में अपनी भूमिका तय करे। मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने सोमवार को आईआरडीटी ऑडिटोरियम, सर्वे चौक देहरादून में आयोजित मुख्यमंत्री सेवा योजना के तहत ‘‘मेरा सामाजिक दायित्व-स्वर्णिम उत्तराखण्ड’’ में बतौर प्रतिनिधि प्रतिभाग किया।

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र ने कहा कि देश की आजादी के 71 वर्षो के बाद भी हम सरकारों पर पूरी तरह से निर्भर है। यह निर्भरता सोने-चांदी की बैसाखी जैसी है। हमें गम्भीरता से विचार करना होगा कि हम स्वयं समाज, राज्य व देश के लिए क्या कर सकते है। हमारी समाज के प्रति क्या जिम्मेदारी है। हमारी स्किलस व विशेषज्ञता दूरस्थ गांवो के विकास में काम आनी चाहिए। मुख्यमंत्री ने कहा कि शहरों की अपेक्षा हमारे गांवो में सामाजिक उत्तरदायित्व बखूबी निभाया जाता है। ग्रामीण समाज परस्पर सहायता, सहयोग व सौहार्द में विश्वास करता है।

मुख्यमंत्री ने छात्र-छात्राओं से आह्वाहन किया कि समाचार पत्रों का नियमित अध्ययन अवश्य करंे। समाचार पत्रों के नियमित अध्ययन से समाज की समस्याओं की जानकारी के साथ ही समाज के प्रति संवेदनाएं जागृत होती है तथा समाज के प्रति जुड़ाव बढ़ता है।

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र ने कहा कि प्रत्येक वर्ष लगभग ढाई से तीन लाख छात्र-छात्राएं बारहवी की परीक्षा पास करते है। यदि सभी छात्र-छात्राएं एक-एक निरक्षर व्यक्ति को पढ़ाने की जिम्मेदारी ले तो राज्य में सौ प्रतिशत साक्षरता शीघ्र ही प्राप्त की जा सकती है। आज दुनियाभर में सामाजिक कार्यो का महत्व बढ़ गया है। इसके साथ ही बच्चों में उद्यमशीलता व प्रोफेशनलिज्म का विकास करना होगा।