उत्तराखंड वन बाहुल्य प्रदेश, इसे रोजगार का जरिया बनाना होगा

मुख्य सचिव डॉ. एस.एस. संधु ने सचिवालय स्थित अपने सभागार में प्रदेश में ईको टूरिज्म और जड़ी-बूटी को बढ़ावा दिए जाने के सम्बन्ध में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से सभी जिलाधिकारियों के साथ बैठक ली। बैठक के दौरान मुख्य सचिव ने कहा कि प्रदेश में 70 प्रतिशत से अधिक वन क्षेत्र होने के कारण वन प्रदेश की आर्थिकी का महत्त्वपूर्ण संसाधन बन सकता है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में वनों को आर्थिकी से जोड़ने की आवश्यकता है। हम वनों एवं पर्यावरण को बिना नुकसान पहुंचाए ईको टूरिज्म और इनसे प्राप्त होने वाली जड़ी-बूटियों के माध्यम से प्रदेश में रोजगार सृजन और आर्थिकी को सुधारने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
मुख्य सचिव ने कहा कि ईको टूरिज्म की भांति जड़ी-बूटी को बढ़ावा देने के लिए राज्य स्तर पर मुख्य सचिव की अध्यक्षता में एवं जिला स्तर पर जिलाधिकारी की अध्यक्षता में समितियों का गठन किया गया है। उन्होंने कहा कि प्रत्येक जिले में, जहां भी सम्भव हों, हर्बल विलेज स्थापित किए जाएं। उन्होंने निर्देश दिए कि सभी जनपदों में वन क्षेत्रों में जड़ी-बूटियों की सम्भावनाओं को तलाशते हुए प्रस्ताव तैयार किए जाएं। हितधारकों से संवाद स्थापित कर के इस कार्य में आ रही समस्याओं और उनके निराकरण पर कार्य किया जाए। इसमें वन पंचायतों, स्वयं सहायता समूहों और स्थानीय लोगों को साथ लेकर जड़ी बूटियों का उत्पादन 100 गुना या इससे भी अधिक बढ़ाए जाने की दिशा पर प्रयास किए जाएं।
मुख्य सचिव ने कहा कि जड़ी बूटी के लिए रवन्ना व्यवस्था के सरलीकरण की आवश्यकता है। इसके लिए शीघ्र ही केन्द्र सरकार के नेशनल ट्रांजिट पास से इसे जोड़ा जाएगा। उन्होंने कहा कि जड़ी बूटियों के उत्पादन और चुगान के लिए श्रमिकों के प्रशिक्षण की व्यवस्था भी सुनिश्चित की जाए। उन्होंने इसके लिए पूर्व के शासनादेशों का सरलीकरण भी किए जाने के निर्देश दिए, ताकि कार्यों को आसान किया जा सके। उन्होंने कहा कि साथ ही साथ जनपद स्तरीय समितियों की वित्तीय एवं अन्य शक्तियों को बढ़ाया जाएगा।
इसके साथ ही मुख्य सचिव ने ईको टूरिज्म से सम्बन्धित पिछली बैठक में बाकी बचे जिलों से भी चर्चा की। उन्होंने कहा कि ईको टूरिज्म और वनों से प्राप्त होने वाली जड़ी-बूटियों को अधिक से अधिक बढ़ावा देकर रोजगार सृजन किया जा सकता है। उन्होंने रुद्रप्रयाग और हरिद्वार जनपद को ईको टूरिज्म की दृष्टि से काफी संभावनापूर्ण बताया। कहा कि केदारनाथ में मौसम खराब या भीड़ अत्यधिक होने के कारण यात्रियों को लंबे समय तक रुकना पड़ जाता है। ऐसे में इन यात्रा मार्गों के आसपास विकसित किए जाने वाले छोटे-छोटे ईको टूरिस्ट डेस्टिनेशन बहुत मददगार साबित हो सकते हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे ही हरिद्वार में भी तीर्थ यात्रियों को आसपास के क्षेत्र में ही ईको टूरिज्म और हर्बल पार्क पर्यटकों और तीर्थयात्रियों को आकर्षित कर सकते हैं, जिससे आसपास के क्षेत्रों से लगे लोगों को रोजगार उपलब्ध हो सकेगा।
मुख्य सचिव ने चकराता वन प्रभाग में बनाए गए ईको टूरिज्म और ट्रेकिंग सर्किट ‘थड़ियार मार्च‘ के प्रस्तुतीकरण को देखकर इसी की तर्ज पर अन्य जनपदों में भी इस प्रकार के सर्किट विकसित किए जाने की बात कही।
इस अवसर पर प्रमुख सचिव आर. के. सुधांशु एवं सचिव डॉ. बी. वी. आर. सी. पुरुषोत्तम सहित सम्बन्धित विभागों के उच्चाधिकारी एवं जनपदों से जिलाधिकारी उपस्थित रहे।

मुख्य सचिव ने ऋषिकेश के मास्टर प्लान के लिए की बैठक

मुख्य सचिव डॉ. एस.एस. संधु ने ऋषिकेश शहर के मास्टर प्लान के सम्बन्ध में अधिकारियों के साथ बैठक ली। मुख्य सचिव ने कहा कि ऋषिकेश शहर का यातायात चारधाम यात्रा के दौरान अत्यधिक प्रभावित रहता है। उन्होंने ऋषिकेश मास्टर प्लान हेतु सभी सम्बन्धित विभागों को आपसी तालमेल के साथ कार्य करने के निर्देश दिए।
मुख्य सचिव ने कहा कि ऋषिकेश मास्टर प्लान में 3 जनपद और लगे हुए स्थानीय निकाय भी शामिल हैं। इसके लिए सभी जनपदों के साथ आपसी समन्वय से इस दिशा में कार्य किया जाए। उन्होंने कहा कि चारधाम यात्रा के दौरान ऋषिकेश की यातायात व्यवस्था चरमरा जाती है। उन्होंने मास्टर प्लान में ऋषिकेश शहर की यातायात व्यवस्था को केंद्र में रख कर प्लान तैयार किए जाने के निर्देश दिए।
मुख्य सचिव ने कहा कि ऋषिकेश बाईपास रोड भी प्रस्तावित है, जो इस समस्या को काफी हद तक कम कर देगी। उन्होंने अधिकारियों को नेशनल हाईवे से संपर्क कर मास्टर प्लान में ऋषिकेश बाईपास रोड को भी शामिल किए जाने के निर्देश दिए। मास्टर प्लान तैयार करते हुए 3 या 5 साल का रोलिंग प्लान का भी प्रावधान रखा जाए। उन्होंने कहा कि आमजन को इस मास्टर प्लान की जानकारी हो, और उनके सुझाव लिए जाएं, साथ ही, उनके द्वारा लगाई जाने वाली आपत्तियों को दूर किए जाने के प्रयास किए जाएं।
इस अवसर पर अपर मुख्य सचिव आनन्द बर्द्धन, सचिव आवास एस.एन. पाण्डेय, सम्बन्धित जनपदों के जिलाधिकारी और उपाध्यक्ष एमडीडीए बंशीधर तिवारी सहित सम्बन्धित विभागों के अन्य उच्चाधिकारी उपस्थित थे।

मुख्य सचिव ने ईको टूरिज्म को बढ़ावा देने को जिलाधिकारियों व डीएफओ संग की बैठक

मुख्य सचिव डॉ. एस.एस. संधु ने प्रदेश में ईको टूरिज्म को बढ़ावा देने के लिए आज जनपद नैनीताल, पौड़ी, अल्मोड़ा, टिहरी और चमोली के जिलाधिकारियों और डीएफओ के साथ बैठक की। मुख्य सचिव ने कहा कि प्रदेश का अधिकतर भाग वन क्षेत्र होने के कारण यहां ईको टूरिज्म की अत्यधिक संभावनाएं हैं। ईको टूरिज्म में अधिक से अधिक रोजगार सृजन की संभावनाएं हैं।
मुख्य सचिव ने कहा कि वन विभाग को इसके लिए महत्त्वपूर्ण भूमिका निभानी होगी। उन्होंने कहा कि फॉरेस्ट अधिकारियों को नियामक मानसिकता से बाहर निकल कर बिना पर्यावरण और वन को नुकसान पहुंचाए प्रदेश के विकास में अपनी भागीदारी निभानी होगी। कहा कि सभी जनपदों को इस दिशा में कार्य करना है, जो भी जनपद अच्छा कार्य करेंगे उन्हें पुरस्कृत किया जाएगा। मुख्य सचिव ने कहा कि प्रोफेशनल गाइड प्रशिक्षण प्रदान कर अच्छे से प्रशिक्षित किया जाए। उन्होंने कहा कि ईको टूरिज्म साइट्स को विकसित करने के लिए प्राकृतिक सामग्रियों का अधिक से अधिक प्रयोग कर कंक्रीट स्ट्रक्चर्स से परहेज किया जाए। उन्होंने ईको टूरिज्म साइट्स को जानकारी के लिए सभी होटल और रिजॉर्ट्स में पैंपलेट्स आदि रखने के निर्देश दिए ताकि पर्यटकों को अपने आसपास स्थित ऐसे स्थानों की जानकारी मिल सके, गूगल मैप में भी आसपास के पुराने पर्यटन स्थलों के साथ नए स्थल भी पर्यटकों को मिल सकें।
मुख्य सचिव ने प्रमुख वन संरक्षक को सभी डीएफओ को वन क्षेत्र में स्वीकार्य और अस्वीकार्य गतिविधियों की जानकारी उपलब्ध कराए जाने के निर्देश दिए। उन्होंने सभी प्रकार के पर्यटन स्थलों में पर्यटकों से फीडबैक लिए जाने हेतु सिस्टम विकसित करने के भी निर्देश दिए। कहा कि पर्यटकों से कमियों की जानकारी और सुझाव लेकर उन्हें दूर किए जाने की दिशा में कार्य किए जाने की आवश्यकताएं हैं। उन्होंने कहा कि प्रदेश की 80-90 प्रतिशत साइट्स में रॉक क्लाइंबिंग की संभावनाएं हैं, इन्हें विकसित करते हुए सभी ऐसी साइट्स पर एक्सपर्ट भी अवश्य लगाया जाए। उन्होंने सभी गतिविधियों में स्थानीय लोगों को शामिल करते हुए उस कार्य में लगे लोगों के सुझाव लेकर योजना को सफल बनाए जाने की दिशा में काम किया जाए।
बैठक के दौरान आज जनपद नैनीताल, पौड़ी, अल्मोड़ा, टिहरी और चमोली के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से उक्त जनपदों के डीएफओ द्वारा चिन्हित स्थलों के लिए प्रस्तावित गतिविधियों पर प्रस्तुतीकरण दिया गया।
इस अवसर पर प्रमुख सचिव आर. के. सुधांशु एवं प्रमुख वन संरक्षक (हॉफ) विनोद सिंघल सहित जनपदों से जिलाधिकारी और डीएफओ उपस्थित थे।

मुख्य सचिव ने ली एलोपैथिक चिकित्सकों को आयुर्वेंद का प्रशिक्षण के संबंध में बैठक

मुख्य सचिव डॉ. एस.एस. संधु ने अधिकारियों के साथ आयुष विभाग द्वारा एलोपैथिक चिकित्सकों को आयुर्वेद का प्रशिक्षण दिए जाने के सम्बन्ध में बैठक ली।

मुख्य सचिव ने कहा कि एलोपैथी और आयुर्वेद को एक दूसरे के विरोधाभाषी के तौर पर न देख कर एक दूसरे के पूरक के रूप में देखना चाहिए। उन्होंने कहा कि इस प्रशिक्षण का उद्देश्य यह होना चाहिए कि एलोपैथिक चिकित्सकों के मन में जो आयुर्वेद को लेकर विरोधी मानसिकता और शंकाएं हैं, उन्हें दूर किया जा सके। उन्होंने कहा कि एलोपैथिक चिकित्सकों को आयुर्वेद के प्रशिक्षण के दौरान तथ्यों एवं आवश्यक दस्तावेजों के साथ प्रस्तुतिकरण दिया जाए।

मुख्य सचिव ने कहा कि आयुर्वेद को मात्र एक चिकित्सा पद्धति के रूप में न देखते हुए एक जीवन शैली के रूप में देखना चाहिए। यह मात्र बीमारियों का इलाज ही नहीं करती बल्कि आयुर्वेद को अपनाकर हम अपने शरीर को बीमारियां होने से रोक भी सकते हैं। इसे हमारी दिनचर्या का हिस्सा बनाने के लिए इसके प्रभावों और होने वाले लाभों को आमजन तक पहुंचाना होगा। उन्होंने कहा कि आयुर्वेद, योग, नेचुरोपैथी, यूनानी और होम्योपैथी चिकित्सा पद्धति के विकास से उत्तराखण्ड को विभिन्न प्रकार से लाभ हो सकता है। उन्होंने कहा कि ऋषिकेश पूरे विश्व में योग के लिए जाना जाता है। योग और आयुर्वेद उत्तराखण्ड की आर्थिकी में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। इसे अधिक से अधिक बढ़ावा दिया जाए।

बैठक में बताया गया कि आयुष विभाग शीघ्र ही एलोपैथिक चिकित्सकों के लिए 6 दिवसीय आयुर्वेदिक चिकित्सा पद्धति से सम्बन्धित प्रशिक्षण कार्यक्रम संचालित किया जा रहा है। इस प्रशिक्षण कार्यक्रम के अंतर्गत आयुर्वेद के सम्बन्ध में तथ्यों और सबूतों के माध्यम से बहुत सी भ्रांतियां दूर की जाएंगी। प्रशिक्षण कार्यक्रम का संचालन उत्तराखण्ड आयुर्वेद यूनिवर्सिटी के माध्यम से किया जायेगा।

इस अवसर पर सचिव डॉ. पंकज कुमार पाण्डेय एवं आर. राजेश कुमार सहित उत्तराखण्ड आयुर्वेद यूनिवर्सिटी और एचएनबी उत्तराखण्ड मेडिकल यूनिवर्सिटी के प्रतिनिधि उपस्थित थे।

पौड़ी में कनेक्टिविटी बढ़ाकर पलायन रोका जा सकता हैः मुख्य सचिव

मुख्य सचिव डॉ. एसएस संधु ने सचिवालय में देवप्रयाग और ऋषिकेश के मध्य पौड़ी क्षेत्र से कनेक्टिविटी बढ़ाए जाने के सम्बन्ध में लोक निर्माण विभाग के अधिकारियों और जिलाधिकारी पौड़ी के साथ बैठक आयोजित की।

मुख्य सचिव ने कहा कि कनेक्टिविटी को बढ़ाकर इस क्षेत्र में पलायन को रोका जा सकता है, साथ ही, कनेक्टिविटी बढ़ने से इन क्षेत्रों का विकास हो सकेगा और रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे। उन्होंने जिलाधिकारी पौड़ी से देवप्रयाग से ऋषिकेश के मध्य ऐसे क्षेत्रों को चिन्हित करने के निर्देश दिए जहां मोटर पुल बनाकर अधिक से अधिक जनसंख्या को लाभान्वित किया जा सकता है या ऋषिकेश – देहरादून से कनेक्टिविटी बढ़ाई जा सकती है।
मुख्य सचिव ने लोक निर्माण विभाग को भी निर्देश दिए कि इस सम्बन्ध में अपने स्तर पर भी प्रस्ताव तैयार किए जाएं। उन्होंने कहा कि जिन क्षेत्रों में पहले से झूला पुल हैं इन्हें विकसित कर मोटर पुल बनाकर अपग्रेड भी किया जा सकता है। इसके लिए संभावनाएं तलाशी जाएं।

इस अवसर पर प्रमुख सचिव आर. के. सुधांशु एवं वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से जिलाधिकारी पौड़ी आशीष चौहान उपस्थित थे।

सरकारी भूमि पर भवनों की जानकारी पोर्टल में करें अपलोड

मुख्य सचिव डॉ. एस.एस. संधु ने प्रदेश में लैंड बैंक के सम्बन्ध में शासन के उच्चाधिकारियों और सभी जनपदों के जिलाधिकारियों के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से बैठक की। मुख्य सचिव ने कहा कि प्रदेश के सुनियोजित विकास के लिए प्रदेश में उपलब्ध सभी सरकारी भूमि और भवनों की जानकारी इसके लिए बनाए गए पोर्टल में अपलोड किया जाना सुनिश्चित करें।

मुख्य सचिव ने कहा कि लैंड बैंक बन जाने से प्रदेश का बेहतर तरीके से विकास किया जा सकेगा। उन्होंने कहा कि विभागों की समीक्षाओं के दौरान यह प्रकाश में आया है कि विभिन्न विभाग अच्छे प्रस्ताव भी ला रहे हैं परन्तु विभाग सिर्फ अपने कब्जे की भूमि से बाहर अपनी योजनाओं को शुरू करने पर विचार नहीं करता। जबकि उसकी योजना के लिए बेस्ट सूटेबल स्थान किसी अन्य विभाग के कब्जे में है। उन्होंने कहा कि किसी भी योजना की सफलता उसकी लोकेशन और कनेक्टिविटी और अवसंरचनात्मक सुविधाओं पर निर्भर करती है। उन्होंने कहा कि विभिन्न विभागों के अंतर्गत भवन भी खाली पड़े हैं जो जानकारी के अभाव में अन्य विभागों द्वारा भी प्रयोग नहीं किए जा रहे हैं। पोर्टल पर इसकी जानकारी उपलब्ध होने से इन खाली पड़े भवनों का भी प्रयोग हो सकेगा।

मुख्य सचिव ने कहा कि एक पोर्टल में सभी भूमियों की जानकारी उपलब्ध रहने से किसी भी योजना को सफलतम तरीके से शुरू किया जा सकेगा। इसके लिए सभी विभाग अपने कब्जे के भूमि अथवा भवनों की जानकारी गूगल मैप नक्शे और लैटिट्यूड-लॉन्गिट्यूड के साथ इसके लिए बनाए गए पोर्टल पर अपलोड करें। उन्होंने कहा कि इससे सरकारी भूमियों पर अतिक्रमण पर भी नजर रखी जा सकेगी। सभी शहरों के जो मास्टर प्लान बनाए जा रहे हैं, उसके लिए भी यह लाभप्रद होगा, साथ ही यह राज्य की तस्वीर को एक बेहतर रूप में पूरी तरह से बदल देगा। मुख्य सचिव ने सभी जिलाधिकारियों को जनपद स्तर पर सेंट्रलाइज्ड ग्रीन बिल्डिंग बनाए जाने की दिशा में भी कार्य किए जाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि सभी अधिकारियों कर्मचारियों के एक जगह उपलब्ध होने से कार्य क्षमता बढ़ेगी। इससे समय की बरबादी भी रुकेगी और शहरों का कंजेशन भी कम होगा।
इस अवसर पर प्रमुख सचिव आर. के. सुधांशु, सचिव शैलेश बगोली, डॉ. बी. वी.आर. सी. पुरुषोत्तम, अरविंद सिंह ह्यांकी, डॉ. पंकज कुमार पाण्डेय एवं आयुक्त गढ़वाल एवं कुमायूं सहित वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से सभी जनपदों के जिलाधिकारी उपस्थित थे।

मुख्य सचिव संधु ने पंत नगर से रामनगर तक लिया जी-20 की तैयारियों को लेकर पूरा जायजा

मुख्य सचिव डॉ. एस. एस. संधु ने पन्तनगर एयरपोर्ट पहुँचकर 28 से 30 मार्च तक रामनगर में प्रस्तावित जी-20 सम्मेलन के सफल आयोजन हेतु पन्तनगर एयरपोर्ट पहुॅचकर बैठक व व्यवस्थाओं का जायज़ा लिया।

मुख्य सचिव ने पंतनगर एयरपोर्ट के कक्ष में जिला उधमसिंहनगर व नैनीताल के अधिकारियों की बैठक लेते हुए जी-20 समिट से संबंधित सभी तैयारियों को समय से पूर्ण करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि राज्य के लिए यह गौरव का पल है कि राज्य में ळ20 समिट की तीन बैठकों का आयोजन होना है। रामनगर में होने वाली राउंड टेबल सम्मेलन में विदेशों से टॉप वैज्ञानिक शामिल होंगे तथा चीफ साइंस टेबल राउंड कॉन्फ्रेंस होंगी।
बैठक में मुख्य सचिव ने निदेशक एयरपोर्ट को एयरपोर्ट का सर्वे करते हुए कार्ययोजना तैयार कर एयरपोर्ट का सौंदर्यीकरण, भव्य व आकर्षक बनाने के निर्देश दिए। साथ ही आवश्यकता अनुसार एयरपोर्ट में मरम्मत, रंग रोगन व प्रसाधन की बेहतर व्यवस्था करने के भी निर्देश दिए। इसके साथ ही सुरक्षात्मक दृष्टि से हेंगर, लॉन्ज व अन्य स्थलों पर सीसीटीवी स्थापित करने को भी कहा।

मुख्य सचिव ने मण्डलायुक्त को सम्मेलन में आने वाले आगंतुकों हेतु लाइजनिंग अधिकारी नियुक्त करने के निर्देश दिए। उन्होंने एयरपोर्ट सहित, डेलीगेट्स की एयरपोर्ट से रामनगर तक की यात्रा के दौरान एम्बुलेंस व रामनगर में डॉक्टर्स व विशेषज्ञों की टीम भी तैनात रखने के निर्देश दिए। साथ ही आसपास के चिकित्सालयों को भी हाई अलर्ट पर रखने के निर्देश स्वास्थ्य विभाग को दिये। इसके अलावा पुलिस प्रशासन को सटीक मूवमेंट , ट्रैफिक प्लान तैयार करने को कहा।

जी 20 समिट के दौरान विदेशी डेलीगेट्स को राज्य की संस्कृति की झलक दिखाई जायगी
मुख्य सचिव ने निदेशक संस्कृति विभाग को राज्य की संस्कृति की झलक से विदेशी डेलीगेट्स को रूबरू कराने के निर्देश दिए। कहा रामनगर में आयोजित होने वाली जी 20 समिट के माध्यम से हम अपने उत्तराखंड राज्य की वादियों के साथ ही संस्कृति (नृत्य,गान, परिवेश) से डेलीगेट्स को रूबरू कराएंगे। इससे राज्य को अपनी एक विशिष्ट पहचान मिलेगी। इसके लिए निदेशक संस्कृति विभाग को कार्ययोजना तैयार कर प्रस्तुत करने के निर्देश दिए।

पंतनगर से रामनगर तक किया स्थलीय निरीक्षण
मुख्य सचिव ने पन्तनगर एयरपोर्ट से रूद्रपुर-दोराहा-बाजपुर गडप्पू-रामनगर मार्ग का स्थलीय निरीक्षण किया। इस दौरान एनएच के अभियंताओं को सड़कों की व्यवस्था में सुधार हेतु निर्देशित किया। इसके साथ ही सड़कों पर साइनेज, आवश्यकतानुसार सुरक्षात्मक उपाय , सड़कों पर सही मार्किंग करने, डिवाइडर्स पेंट कराने, दूरी सूचक पत्थरों माइलस्टोनको सही कराने,आवश्यकता अनुसार मरमम्त व निर्माण कार्य कराने एवं रोड को चकाचक बनाने के निर्देश दिये।

जी 20 समिट का व्यापक प्रचार प्रसार किया जाए
मुख्य सचिव ने जी 20 समिट के व्यापक प्रचार प्रसार के निर्देश सम्बन्धित जिलाधिकारी को दिए। कहा कि प्रत्येक 20 किलोमीटर की दूरी पर होर्डिंग, बैनर व अन्य आउटडोर एक्टिविटी के माध्यम से समिट का व्यापक प्रचार किया जाए।

इसके पश्चात मुख्य सचिव ने रामनगर पहुँचकर सीआरवीआर, ताज, नमहा होटल का स्थलीय निरीक्षण कर व्यवस्थाओं का जायजा लिया गया। उन्होंने कहा कि विदेशी डेलीगेट्स के आवासीय व भोजन इत्यादि की समुचित व्यवस्था की जाएगी।

इस अवसर पर अपर मुख्य सचिव आनंद वर्द्धन, प्रमुख सचिव आर. के. सुधांशु, डॉ. बी.वी.आर.सी. पुरुषोत्तम, डॉ. पंकज कुमार पांडेय, मण्डलायुक्त दीपक रावत, आई जी नीलेश आनंद भरणे, विनोद कुमार सुमन, पीसीसीएफ समीर सिंहा, सीसीएफ पी के पात्रो, जिलाधिकारी धीराज सिंह गर्ब्याल, युगल किशोर पन्त, एस एस पी पंकज भट्ट, मंजूनाथ टीसी, यूकाडा के अपर सचिव अनिल गर्ब्याल सहित अन्य अधिकारी उपस्थित थे।

पौड़ी में सीवरेज सिस्टम के विकास को प्लान तैयार करें जिलाधिकारीः मुख्य सचिव

मुख्य सचिव डॉ. एस.एस. संधु ने पौड़ी जनपद में मूलभूत अवसंरचना विकास के सम्बन्ध में अधिकारियों एवं जिलाधिकारी पौड़ी के साथ बैठक की। मुख्य सचिव ने जिलाधिकारी पौड़ी से जनपद के अन्तर्गत सभी सड़कों को गड्ढामुक्त किए जाने के निर्देश दिए।

मुख्य सचिव ने कहा कि पौड़ी में सीवरेज सिस्टम के विकास एवं पार्किंग की समस्या के समाधान के लिए प्लान तैयार किया जाए। उन्होंने कहा कि जनपद में सोलर प्रोजेक्ट्स की अत्यधिक सम्भावनाएं हैं। सोलर प्रोजेक्ट्स के क्षेत्र में अधिक से अधिक बढ़ावा दिया जाए। उन्होंने जनपद में ईको टूरिज्म को बढ़ावा दिए जाने हेतु प्रस्ताव भेजे जाने के भी निर्देश दिए। मुख्य सचिव ने जिलाधिकारी पौड़ी से सभी विभागों से वार्ता कर सुझाव मांगे जाने हेतु भी निर्देशित किया। उन्होंने कहा कि जनपद के विकास के लिए व्यवहारिक प्रस्ताव भेजे जाएं। उन्होंने रांसी स्टेडियम के लिए व्यवहार्य प्रस्ताव तैयार किए जाने हेतु भी निर्देशित किया।

जिलाधिकारी पौड़ी आशीष चैहान ने माउंटेन म्यूजियम, वाटर स्पोर्ट्स, जंगल बेस्ड ईको टूरिज्म और रोप-प्रोजेक्ट्स की सम्भावनाओं पर चर्चा की। मुख्य सचिव ने कहा कि इस दिशा में तेजी से कार्य करते हुए शीघ्र से शीघ्र प्रस्ताव तैयार किया जाए। उन्होंने सभी मंडल स्तरीय अधिकारियों को लगातार अनावश्यक देहरादून के चक्कर लगाने से बचने के लिए निर्देशित किया।

इस अवसर पर सचिव शैलेश बगोली, दिलीप जावलकर, अरविन्द सिंह ह्यांकी, कमिश्नर गढ़वाल सुशील कुमार एवं सचिव विनोद कुमार सुमन सहित वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से जिलाधिकारी पौड़ी आशीष चैहान सहित अन्य अधिकारी उपस्थित थे।

सीएस ने ली स्वास्थ्य विभाग के तहत मोबाइल हेल्थ वेन के संबंध में बैठक

मुख्य सचिव डॉ. एसएस संधु ने गुरुवार को सचिवालय स्थित अपने सभागार में स्वास्थ्य विभाग के अंतर्गत मोबाइल हेल्थ वैन और टेलीमेडिसिन के सम्बन्ध में अधिकारियों के साथ बैठक ली। मुख्य सचिव ने कहा कि प्रदेश के दूरस्थ क्षेत्रों में स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराए जाने हेतु मोबाइल हेल्थ सुविधाएं और टेलीमेडिसिन को अधिक से अधिक बढ़ावा दिया जाए।

मुख्य सचिव ने अधिकारियों को मोबाइल हेल्थ और टेलीमेडिसिन सुविधाओं हेतु 100 प्रतिशत सैचुरेशन प्लान तैयार किए जाने के निर्देश दिए। उन्होंने मोबाइल वैन सुविधा के क्षेत्र में एनएचएम, स्वास्थ्य विभाग और हंस फाउंडेशन द्वारा उपलब्ध कराई जा रही सुविधाओं का विश्लेषण कर गैप चिन्हित कर इसे पूर्ण किए जाने के निर्देश दिए। मुख्य सचिव ने कहा कि जिन क्षेत्रों से स्वास्थ्य केंद्र अधिक दूर हैं उन क्षेत्रों में मोबाइल वैन के दौरे अधिक बढ़ाए जाएं। उन्होंने कहा कि मोबाइल वैन के दौरों की निश्चितता बढ़ाते हुए प्रत्येक क्षेत्र के लिए दिवस निर्धारित किए जाएं। उन्होंने कहा कि मोबाईल वैनों की निश्चितता सुनिश्चित किए जाने हेतु एक स्थायी मॉनिटरिंग और फीडबैक सिस्टम को मजबूत किया जाए।

मुख्य सचिव ने मोबाइल वैन में ब्लड सैम्पल आदि के साथ ही पोर्टेबल एक्स-रे मशीनों की उपयोगिता पर मंथन किया जाए। उन्होंने कहा कि पर्वतीय दूरस्थ क्षेत्रों की आवश्यकताओं को पूरा करने के अनुरूप सुनियोजित प्लान तैयार किया जाए। साथ ही टेलीमेडिसिन की दिशा में किए जा रहे प्रयासों को अधिक से अधिक बढ़ाया जाए। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य की दिशा में आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस की सम्भावनाओं को भी तलाशते हुए इसके प्रयोग की दिशा में कदम बढ़ाए जाने चाहिए।

इस अवसर पर सचिव आर. राजेश कुमार एवं महानिदेशक स्वास्थ्य डॉ. विनीता शाह सहित अन्य विभागीय उच्चाधिकारी भी उपस्थित थे।

ड्रॉन के क्षेत्र में विभिन्न प्रशिक्षण कार्यक्रम संचालित किए जाने चाहिएः सीएस

मुख्य सचिव डॉ. एस.एस. संधु ने मंगलवार को सचिवालय में स्वास्थ्य विभाग और कौशल विकास विभाग के अधिकारियों के साथ द्वितीय मुख्य सचिव सम्मेलन के बिन्दुओं के अनुपालन की समीक्षा की। बैठक के दौरान मुख्य सचिव ने सम्मेलन के बिन्दुओं का अनुपालन सुनिश्चित किए जाने के निर्देश देते हुए टाईमलाइन निर्धारित किए जाने के निर्देश दिए।

मुख्य सचिव ने कहा कि पोषण मिशन को सफल बनाने के लिए व्यवहारिक कदम उठाए जाएं। उन्होंने विभाग द्वारा संचालित विभिन्न कार्यक्रमों में अधिक से अधिक तकनीक का प्रयोग किए जाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि विभिन्न कार्यक्रमों के अन्तर्गत विभिन्न मोबाईल ऐप के बजाय सभी ऐप्स को इंटीग्रेट कर एक ऐप तैयार किया जाए। मुख्य सचिव ने स्वास्थ्य विभाग को महिलाओं के प्रसव पूर्व और प्रसव के उपरान्त आवश्यक विभिन्न जानकारियों के सम्बन्ध में जागरूक करने हेतु वीडियो बनाकर सभी अस्पतालों में प्रदर्शित की जाए। इसके साथ ही विभिन्न रोगों और उनसे बचाव के सम्बन्ध में भी छोटी-छोटी वीडियो बनाकर प्रदर्शित करने की व्यवस्था की जाए।

मुख्य सचिव ने कौशल विकास विभाग को निर्देश दिए कि सभी औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों के छात्रों को उद्योगों के माध्यम से प्रशिक्षण दिलाया जाए। उन्होंने कहा कि सभी छात्र-छात्राओं को इंडस्ट्री में भेजकर एक माह के प्रशिक्षण हेतु योजना तैयार की जाए। इसके लिए विभिन्न उद्योगों से समझौते किए जाएं। इस दौरान छात्रों के रूकने की व्यवस्था विभाग द्वारा करायी जाए। मुख्य सचिव ने कहा कि छात्र-छात्राओं का 50-60 प्रतिशत से अधिक प्रशिक्षण उद्योगों के माध्यम से होना चाहिए। उन्होंने कहा कि ड्रॉन के क्षेत्र में काफी सम्भावनाएं हैं। ड्रॉन के क्षेत्र में विभिन्न प्रशिक्षण कार्यक्रम संचालित किए जाने चाहिए। उन्होंने अधिकारियों को सभी कार्यक्रमों की पोर्टल बेस्ड मॉनिटरिंग किए जाने के भी निर्देश दिए।

इस अवसर पर सचिव आर. राजेश कुमार एवं विजय कुमार यादव सहित सम्बन्धित विभागों के उच्चाधिकारी उपस्थित थे।