मुख्य सचिव ने ली मसूरी की धारण क्षमता की प्रथम बैठक

मुख्य सचिव डॉ. एस. एस. संधु की अध्यक्षता में सोमवार को सचिवालय में राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण (एनजीटी) द्वारा मसूरी की धारण क्षमता एवं सुरक्षा उपायों को लेकर गठित 9 सदस्यीय समिति की प्रथम बैठक संपन्न हुई।

बैठक के दौरान मसूरी क्षेत्र के हिमालयी क्षेत्रों में सुरक्षा उपाय, वाहन, यातायात प्रबन्धन, ठहरने, फ्लोरा फौना सहित पर्यावरण के प्रति संवेदनशील क्षेत्रों के वहन क्षमता आदि का समग्र अध्ययन पर चर्चा की गई। बैठक के दौरान बताया गया कि विभिन्न संस्थानों द्वारा पिछले कुछ समय में मसूरी को लेकर कुछ अध्ययन किए गए हैं।

मुख्य सचिव द्वारा समिति के सभी सदस्यों से मसूरी क्षेत्र के लिए उनके स्तर पर किए गए अब तक के सभी अध्ययनों का समिति के समक्ष प्रस्तुतीकरण दिए जाने के निर्देश दिए गए। साथ ही बैठक में निर्णय लिया गया कि गोविन्द बल्लभ पंत राष्ट्रीय हिमालय पर्यावरण संस्थान अब तक किए गए सभी अध्ययनों को संकलित रिपोर्ट तैयार करेगा।

मुख्य सचिव ने कहा कि एनजीटी द्वारा मांगे गए सभी प्रकार के अध्ययनों की रिपोर्ट्स को निर्धारित समय में पूर्ण किया जाए। उन्होंने कहा कि समिति के अंतर्गत सभी संस्थानों द्वारा इसके लिए नोडल अधिकारी नियुक्त कर लिए जाएं।

इस अवसर पर सुप्रीम कोर्ट मॉनिटरिंग कमेटी के सदस्य सचिवएम.सी. घिल्डियाल, प्रमुख सचिव आर. के. सुधांशु, वाडिया इंस्टीट्यूट ऑफ जियोलॉजी, देहरादून, गोविन्द बल्लभ पंत राष्ट्रीय हिमालय पर्यावरण संस्थान, कुमाऊं विश्वविद्यालय, अंतरिक्ष उपयोग केंद्र अहमदाबाद, राष्ट्रीय जल विज्ञान संस्थान, रुड़की और नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ रॉ मैकेनिक्स, बेंगलुरु सहित केन्द्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड एवं उत्तराखण्ड प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारी उपस्थित थे।

देहरादून में यातायात संकुलन को कम करने के संबंध में हुई बैठक

मुख्य सचिव डॉ. एस.एस. संधु ने सचिवालय में देहरादून में यातायात संकुलन को कम करने हेतु सभी सम्बन्धित विभागों के साथ बैठक की। मुख्य सचिव ने कहा कि ट्रैफिक कंजेशन को कम करने के लिए संस्थागत तंत्र बनाया जाए।

मुख्य सचिव ने कहा कि शहर के यातायात संकुलन कम करने की दिशा में लगातार अनुश्रवण प्रणाली की देखरेख के लिए यूनिफाइड मेट्रोपोलिटन ट्रांसपोर्टेशन अथॉरिटी को सक्रिय किया जाए। साथ ही, इसकी प्रत्येक माह बैठक आयोजित की जाए। उन्होंने इसके लिए जहां आवश्यकता हो साइकिल ट्रैक, अंडरपास, अर्बन रोप-वे आदि की संभावनाओं को तलाशे जाने की भी बात कही। कहा कि जहां संभव हों नए रूट्स विकसित किए जाएं।
मुख्य सचिव ने कहा कि जिन जिन स्थानों पर इंजीनियरिंग वर्क से सुधार आ सकता है, इसे सम्बन्धित विभागों द्वारा तुरंत कर लिया जाए। उन्होंने निर्देश दिए कि चैराहों पर अगले 15 दिन में विद्युत पोल को स्थानांतरित कर दिया जाए। जिन स्थानों पर अधिक यातायात संकुलन है उन स्थानों पर सीसीटीवी कैमरे आदि के माध्यम से गलत तरीके से अथवा नो पार्किंग जोन में गाड़ी खड़ी करने वालों का भी चालान किया जाए। इसके लिए ड्रोन कैमरों का भी प्रयोग किया जा सकता है।

मुख्य सचिव ने कहा कि शहर में स्कूल बसों से लगने वाले जाम को किस प्रकार से कम किया जा सकता है, इसके लिए स्कूलों से बात करके सुझाव मांगे जाएं। उन्होंने कहा कि स्कूल टाइम पर स्कूलों के लिए परिवहन निगम की बसों को भी लगाए जाने पर विचार किया जा सकता है। बड़े मॉल और संस्थान जो अपनी पार्किंग का प्रयोग नहीं कर रहे या पार्किंग को अन्य कार्यों के लिए प्रयोग कर रहे हैं, उन्हें शीघ्र नोटिस जारी कर कार्रवाई की जाए।

मुख्य सचिव ने कहा कि यातायात संकुलन को कम करने के लिए सार्वजनिक यातायात प्रणाली में सुधार लाए जाने की आवश्यकता है। कहा कि पब्लिक ट्रांसपोर्ट की फ्रीक्वेंसी बढ़ाई जाए। साथ ही वाहनों की टाइमिंग भी सुनिश्चित किया जाए। अधिक से अधिक तकनीक का प्रयोग करते हुए प्रत्येक बस स्टॉप पर अगली आने वाली बस के पहुंचने का समय भी प्रदर्शित किया जाना चाहिए।

इस अवसर पर अपर मुख्य सचिव आनन्द बर्द्धन, सचिव आर. मीनाक्षी सुंदरम, अरविन्द सिंह ह्यांकी, एस. एन. पाण्डेय, निदेशक यातायात मुख्तार मोहसिन, जिलाधिकारी देहरादून सोनिका, मुख्य नगर अधिकारी मनुज गोयल एवं एसपी ट्रैफिक अक्षय प्रह्लाद कोण्डे सहित अन्य सम्बन्धित विभागों के उच्चाधिकारी उपस्थित थे।

मुख्य सचिव ने ली अधिकारियों की बैठक, एसीआर ऑनलाइन के निर्देश


मुख्य सचिव डॉ. एसएस. संधु ने सचिवालय में शासन और विभागीय अधिकारियों के साथ बैठक आयोजित कर प्रदेश के सभी कार्मिकों की एसीआर ऑनलाइन किए जाने के सम्बन्ध में निर्देश दिए।

मुख्य सचिव ने कहा कि राज्य कर्मचारियों की पदोन्नति में एसीआर का उपलब्ध न होना एक बहुत बड़ा कारण रहा है। अच्छा कार्य कर रहे कार्मिक भी एसीआर की उपलब्धता न होने से या अन्य किसी कारण से पदोन्नति से वंचित रह जाते हैं, जिससे कुंठा होना स्वाभाविक है, और इससे कार्य क्षमता भी प्रभावित होती है। उन्होंने कहा कि एसीआर प्रक्रिया को ऑनलाइन कर इस समस्या से बचा जा सकता है।

मुख्य सचिव ने सभी विभागों को अपने कार्मिकों की एसीआर ऑनलाइन किए जाने के निर्देश दिए हैं। कहा कि इस वर्ष की एसीआर ऑनलाइन ही की जाए साथ ही पुरानी एसीआर को स्कैन कर अपलोड किया जाना भी सुनिश्चित किया जाए।

इस अवसर पर सचिव शैलेश बगोली एवं रविनाथ रमन सहित विभिन्न विभागों के उच्चाधिकारी उपस्थित थे।

मुख्य सचिव ने ली मध्य क्षेत्रीय परिषद की स्थायी समिति की 15वीं बैठक

उत्तराखण्ड के मुख्य सचिव डॉ. एस.एस. संधु की अध्यक्षता में शनिवार को देहरादून में मध्य क्षेत्रीय परिषद की स्थायी समिति की 15वीं बैठक का आयोजन किया गया। बैठक को सम्बोधित करते हुए मुख्य सचिव उत्तराखण्ड डॉ. संधु ने कहा कि केन्द्र व राज्यों के मध्य आपसी समन्वय, आर्थिक और सामाजिक विकास जैसे मुद्दों पर चर्चा तथा केन्द्र सरकार से समाधान हेतु मध्य क्षेत्रीय परिषद् की महत्वपूर्ण भूमिका है। बैठक में छतीसगढ़, मध्य प्रदेश, उत्तराखण्ड तथा उत्तर प्रदेश राज्य में राज्य सरकारों द्वारा संचालित गुड प्रैक्टिसिस पर भी चर्चा की गई।

बैठक के दौरान मध्य क्षेत्रीय परिषद के राज्यों में स्थानीय उत्पादों को अधिक से अधिक बढ़ावा दिए जाने की बात कही गयी। स्थानीय उत्पादों को मिड डे मील के अंतर्गत अधिक से अधिक बढ़ावा दिए जाने की बात की गई। दूरस्थ गांवों में 5 किमी के दायरे में बैंकिंग सुविधा उपलब्ध कराए जाने पर बल दिया गया। इसके साथ ही, भारत नेट 1, भारत नेट – 2 एवं भारत नेट – 3 परियोजनाओं के माध्यम से मोबाईल कनेक्टिविटी को बढ़ाए जाने पर बल दिया गया।

बैठक के दौरान राष्ट्रीय महत्त्व के विषयों पर भी विस्तार से चर्चा की गयी। सभी राज्यों द्वारा अपनाई गयी बेस्ट प्रेक्टिसेज को सभी मध्य क्षेत्रीय परिषदीय राज्यों में लागू किए जाने बात कही गयी। उक्त बिन्दुओं पर छतीसगढ़, मध्य प्रदेश, उत्तराखण्ड तथा उत्तर प्रदेश राज्यों की प्रगति की समीक्षा की गई। सभी राज्यों से बेस्ट प्रैक्टिसेज पर प्रस्तुतीकरण दिया गया।

इस अवसर पर सचिव अंतरराज्यीय परिषद् सचिवालय, गृह मंत्रालय, भारत सरकार से अनुराधा प्रसाद, छतीसगढ़ के मुख्य सचिव अमिताभ जैन, वर्चुअल मध्यम से उत्तर प्रदेश के मुख्य सचिव दुर्गा शंकर मिश्रा, तथा अपर सचिव अंतरराज्यीय परिषद् सचिवालय आशीष श्रीवास्तव, संयुक्त सचिव विक्रांत पाण्डेय, के.एन. राय एवं भारत सरकार से सचिव, अपर सचिव राज्यों एवं वरिष्ठ अधिकारी मौजूद थे।

प्रदेश की नदियों को बचाने और चेक डैम बनाने के निर्देश

मुख्य सचिव डॉ. एस.एस. संधु की अध्यक्षता में शुक्रवार को सचिवालय में प्रदेश की नदियों को बचाए जाने और चेक डैम बनाए जाने आदि के सम्बन्ध में सम्बन्धित विभागों के साथ बैठक आयोजित हुई।
मुख्य सचिव ने कहा कि प्रदेश की नदियों के पुनरोद्धार के लिए प्रयास किए जाने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि प्रदेश की नदियों को बचाने के लिए प्राधिकरण बनाए जाने की आवश्यकता है। इसके लिए उन्होंने जनपद स्तरीय और राज्य स्तरीय प्राधिकरण बनाए जाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि वर्षा आधारित नदियों को बचाने के लिए उनके श्रोत से राज्य की सीमा तक कार्य करने की आवश्यकता है। यह काम सुचारू रूप से हो सके इसके लिए सिंचाई, लघु सिंचाई, जलागम और वन विभाग को मिलकर कार्य करना होगा। उन्होंने कहा कि इस कार्य को लगातार मॉनिटर किया जाए। इसके लिए एक डेडिकेटेड सेल का गठन किया जाए।
मुख्य सचिव ने निर्देश दिए कि वन विभाग और सिंचाई विभाग द्वारा अपने अपने क्षेत्रों में अधिक से अधिक चेक डैम बनाएं जाएं। इससे भूजल स्तर में सुधार आएगा। उन्होंने कहा कि चैक डैम और वृक्षारोपण आदि के माध्यम से लगातार इस दिशा में कार्य करने की आवश्यकता है।
इस अवसर पर वन विभाग से डी.एस. मीणा ने टिहरी जनपद में हेंवल नदी के पुनरोद्धार के लिए किए गए प्रयासों पर एक विस्तृत प्रस्तुतीकरण दिया। मुख्य सचिव ने उनके प्रयासों को सराहते हुए कहा कि इस कार्य को पूरे प्रदेश में किस प्रकार से लागू किया जा सकता है, इसके लिए कॉन्सेप्ट पेपर तैयार किया जाए।
इस अवसर पर अपर मुख्य सचिव आनन्द बर्द्धन, सचिव बी.वी.आर.सी. पुरुषोत्तम, हरिचन्द्र सेमवाल सहित अन्य सम्बन्धित विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे।

प्रदेश के युवाओं को विदेश में प्लेसमेंट के ट्रेनिंग के संबंध में हुई बैठक

मुख्य सचिव डॉ. एस. एस. संधु ने प्रदेश के युवाओं को विदेश में प्लेसमेंट के ट्रेनिंग के सम्बन्ध में कौशल विकास विभाग के साथ बैठक की। इस अवसर पर मुख्य सचिव ने कहा कि प्रदेश के युवाओं को विभिन्न प्रकार के ऐसे ट्रेड्स में प्रशिक्षण प्रदान किए जाने की आवश्यकता है, जिसमें निपुण होने के बाद युवा राज्य ही नहीं बल्कि देश – विदेश में नौकरी पाने के काबिल हो सके।

मुख्य सचिव ने कहा कि प्रदेश में योग, नर्सिंग और हॉस्पिटैलिटी के क्षेत्र में प्रशिक्षित युवाओं की बहुत अधिक संख्या है। यह ऐसा क्षेत्र है जहां प्रदेश में पहले से ही प्रशिक्षित युवा हैं। उन्होंने कहा कि अपने युवाओं को सिर्फ प्रदेश ही नहीं बल्कि देश और विदेश में भी प्रशिक्षण के बाद प्लेसमेंट दिलाए जाने हेतु योजना तैयार की जाए। उन्होंने कहा कि जापान और जर्मनी आदि देशों में योग प्रशिक्षकों, हॉस्पिटैलिटी, नर्सिंग केयर, बुजुर्गों की देखभाल आदि के क्षेत्र में प्रशिक्षित लोगों की बहुत अधिक मांग रहती है। उन्होंने कहा कि विदेशों में कार्य करने के इच्छुक युवाओं को इस सम्बन्ध में प्रशिक्षण आदि उपलब्ध कराकर देश विदेश में प्लेसमेंट की दिशा में बहुत तेजी से काम किए जाने की आवश्यकता है।

मुख्य सचिव ने प्रदेश में दून विश्वविद्यालय सहित अन्य विदेशी भाषाओं को सिखाने वाले संस्थानों को इस दिशा में सरकार के साथ कार्य करने बात कही। उन्होंने युवाओं को प्रशिक्षण के लिए होने वाले खर्च पर इंटरेस्ट सब्वेंशन दिए जाने की भी बात कही। उन्होंने कहा कि इसके लिए एक ट्रेनिंग मॉड्यूल तैयार किया जाए। मुख्य सचिव ने सचिव कौशल विकास को विदेशों में रोजगार के अवसर और सुविधा प्रदान किए जाने के लिए राज्य के युवाओं की श्रेष्ठतम वर्कफोर्स तैयार करने की दिशा में कार्य किए जाने निर्देश दिए।

सचिव कौशल विकास विजय कुमार यादव ने बताया कि विदेशों में विशेषकर जापान में योग प्रशिक्षकों, बुजुर्गों की देखभाल, नर्सिंग, हॉस्पिटैलिटी आदि के क्षेत्र में बहुत अधिक मांग है। जापान में इसके तहत स्पेसिफाइड स्किल्ड वर्कर्स की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि इस दिशा में प्रयास किए जा रहे हैं कि उत्तराखंड के युवाओं को विदेशों में रोजगार के अवसर प्राप्त हों। विदेशों में योग प्रशिक्षकों और नर्सिंग केयर की अत्यधिक मांग को देखते हुए इस पर फोकस किया जा रहा है।

इस अवसर पर अपर मुख्य सचिव आनन्द बर्द्धन, सचिव कौशल विकास विजय कुमार यादव, अपर सचिव नियोजन रोहित मीणा सहित अन्य उच्चाधिकारी उपस्थित थे।

मुख्य सचिव ने आयुष विभाग के तहत ली हेल्थ एवं वेलनेस सेंटर की प्रगति की समीक्षा

मुख्य सचिव डॉ. एस.एस. संधु ने आयुष विभाग के अन्तर्गत प्रदेश में हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर के क्षेत्र में प्रगति की समीक्षा की। मुख्य सचिव ने कहा कि प्रदेश में आयुष एक महत्त्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। साथ ही, उत्तराखण्ड प्राकृतिक रूप से अत्यधिक समृद्ध राज्य है, यहां का वातावरण भी आयुष को बढ़ावा दिए जाने के लिए अनुकूल है। उन्होंने कहा कि योग और आयुर्वेद को अपनाकर हम अपने जीवन को स्वस्थ बना सकते हैं।

मुख्य सचिव ने कहा कि प्रदेश के सभी आयुर्वेदिक अस्पतालों में जगह के अनुरूप हर्बल गार्डन विकसित किए जाएं। उन्होंने कहा कि हर्बल गार्डन में औषधीय पौधों के साथ उनके सम्बन्ध में जानकारी भी उपलब्ध करायी जा सकती है। आयुर्वेदिक अस्पतालों का स्वरूप भी इस प्रकार का रखा जाए, जिससे वहां का वातावरण शांत और हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर को परिभाषित करता हो। उन्होंने कहा कि आयुर्वेद के क्षेत्र में प्राईवेट इन्वेस्टर्स को भी बढ़ावा दिए जाने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि आयुर्वेद के माध्यम से कैंसर अन्य विभिन्न रोगों का इलाज कर रहे प्राईवेट संस्थानों को प्रदेश में निवेश एवं अपने अस्पताल खोले जाने हेतु आमंत्रित किया जाए।

मुख्य सचिव ने कहा कि ऐलोपैथी के समान आयुष में टेलीमेडिसिन को अधिक से अधिक प्रयोग किया जाए। उन्होंने कहा कि गांव में आयुर्वेद और होम्योपैथी के फायदे के सम्बन्ध में अधिक से अधिक जागरूक किया जाना चाहिए। इसके लिए अधिक से अधिक स्वास्थ्य जागरूकता शिविरों का आयोजन किया जाए। उन्होंने कहा कि आयुर्वेद के क्षेत्र में अच्छा कर रहे संस्थानों को अपने चिकित्सकों को प्रशिक्षण प्रदान कराते हुए लगातार ट्रेनिंग प्रोग्राम संचालित किए जाने चाहिए। उन्होंने कहा कि वेलनेस सेंटर्स को कॉलेज और विश्वविद्यालयों में भी खोला जाना चाहिए। इससे अधिक से अधिक छात्र-छात्राएं इसका लाभ ले सकेंगे और इसकी उपयोगिता को समझ कर अपनी दिनचर्या में शामिल करेंगे।

मुख्य सचिव ने कहा कि आयुष विभाग को आने वाले वर्षों के लिए अपना प्लान तैयार करना चाहिए। उन्होंने आयुर्वेद की शिक्षा से जुड़े संस्थानों के लिए भी शिक्षा की गुणवत्ता पर ध्यान दिए जाने की बात कही।

इस अवसर पर सचिव डॉ. पंकज कुमार पाण्डेय सहित अन्य विभागीय उच्चाधिकारी उपस्थित थे।

विषयों के विश्व स्तरीय शिक्षकों के व्याख्यान और पाठ्यक्रम बच्चों को पढ़ाएंगे शिक्षक

मुख्य सचिव डॉ एसएस संधु ने शिक्षा विभाग के अधिकारियों के साथ बैठक की। मुख्य सचिव ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि बच्चों को गुणवत्तापरक शिक्षा उपलब्ध कराए जाने हेतु आधुनिक तकनीक की सहायता ली जाए।

मुख्य सचिव ने कहा कि विभिन्न विषयों के विश्व स्तरीय शिक्षकों के व्याख्यान और पाठ्यक्रम ऑनलाइन माध्यम से बच्चों को पढ़ाए जाने हेतु प्रयास किए जाएं। उन्होंने कहा कि इससे छात्र छात्राओं को विश्वस्तरीय ज्ञान भी प्राप्त होगा। उन्होंने कहा कि हमें पूरे प्रदेश में ऐसे स्कूल विकसित किए जाने की आवश्यकता है जहां छात्रों को एकल शिक्षक के भरोसे न रहना पड़े। मॉडल स्कूल की तर्ज पर ऐसे स्कूल विकसित किए जाएंए जहां सभी विषयों के शिक्षक, लैब, लाइब्रेरी आदि उपलब्ध होंए ताकि बच्चों का समग्र विकास हो सके।

मुख्य सचिव ने कहा कि गरीब बच्चों को कई बार पारिवारिक परिस्थितियों के कारण स्कूल छोड़ना पड़ जाता है। इसके लिए गरीब मेधावी छात्र छात्राओं के लिए स्कॉलरशिप स्कीम शुरू की जाए।

इस अवसर पर सचिव रविनाथ रमन और महानिदेशक शिक्षा बंशीधर तिवारी सहित अन्य विभागीय अधिकारी उपस्थित थे।

मुख्य सचिव ने केदारनाथ पुनर्निर्माण कार्यों की प्रगति की समीक्षा की

मुख्य सचिव डॉण् एसण्एसण् संधु ने शुक्रवार को सचिवालय में केदारनाथ पुनर्निर्माण कार्यों की प्रगति की समीक्षा की। मुख्य सचिव ने कहा कि अगले यात्रा सीजन शुरू होने से पहले जिन कार्यों को पूर्ण होना है। उन कार्यों को अभी से कार्य योजना बनाते हुए निर्धारित समय सीमा में पूर्ण किया जाए।

मुख्य सचिव ने कहा कि निर्धारित समय सीमा में कार्य पूर्ण करने हेतु नाइट शिफ्ट की संख्या बढ़ाई जाए। जिन सामग्रियों की आवश्यकता पड़ेगी। उनकी उपलब्धता सुनिश्चित की जाए। उन्होंने कहा कि श्रद्धालुओं की पंक्ति के लिए जो शेल्टर बनाए जाने हैं। यात्रा शुरू होने से पहले तैयार कर लिए जाएं।
मुख्य सचिव ने वीडियो कान्फ्रेंसिंग के माध्यम से जिलाधिकारी रुद्रप्रयाग को अगले यात्रा सीजन की तैयारियां अभी से शुरू किए जाने के भी निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि घोड़े खच्चरों के स्वास्थ्य जांच एवं देखभाल हेतु भी पशुपालन विभाग से लगातार सम्पर्क में रहते हुए उचित व्यवस्थाएं सुनिश्चित किए जाने के निर्देश दिए। उन्होंने पर्यटन विभाग को चारधाम यात्रा कार्यालय के कार्य को समयसीमा के अंतर्गत पूर्ण किए जाने की भी बात कही।
इस अवसर पर सचिव सचिन कुर्वे सहित अन्य विभागीय अधिकारी उपस्थित थे।

मुख्य सचिव ने ली कृषि अवसंरचनात्मक कोष की राज्य स्तरीय निगरानी समिति की बैठक

मुख्य सचिव डॉ. एसएस संधु की अध्यक्षता में कृषि अवसंरचनात्मक कोष की राज्य स्तरीय निगरानी समिति की बैठक संपन्न हुई। मुख्य सचिव ने अधिकारियों को इस योजना को बढ़ावा दिए जाने के निर्देश देते हुए पैक्स के मजबूतीकरण और जीवंत बनाने के लिए योजना तैयार करने के निर्देश दिए।
मुख्य सचिव ने कहा कि दूरस्थ क्षेत्रों को प्राथमिकता पर रखा जाए। अच्छा काम कर रहे पैक्स को कुछ न कुछ इंसेंटिव दिया जाए ताकि वे और अच्छा करने को प्रेरित हों। उन्होंने कहा कि पैक्स के लिए ट्रेनिंग मॉड्यूल भी विकसित किया जाए। इसके लिए पोर्टल तैयार किया जाए। साथ ही ऑफलाइन पेनड्राइव आदि के माध्यम से सभी प्रकार की ट्रेनिंग मैटेरियल उपलब्ध कराया जाए।
मुख्य सचिव ने कहा कि इस वित्तीय वर्ष के लिए नाबार्ड द्वारा पूर्व से स्वीकृत 785 करोड़ रुपए प्रयोग करने हेतु शीघ्र प्रस्ताव तैयार किए जाएं। साथ ही नाबार्ड के माध्यम इस योजना में 2000 करोड़ रुपए तक का 1 प्रतिशत पर लोन लिया जा सकता है। इससे अधिक से अधिक प्रयोग किया जाना चाहिए।
इसके उपरांत मुख्य सचिव ने सहकारिता विभाग के तहत विभिन्न फर्टिलाइजर्स, मिनी बैंक और कृषि गतिविधियों के लिए निरीक्षण की व्यवस्था सुनिश्चित किए जाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि सरकारी ऑडिट की व्यवस्था भी इसके लिए सुनिश्चित की जाए। साथ ही इसमें भ्रष्टाचार को रोकने के लिए कॉपरेटिव सोसायटी और बैंकों में जिला स्तरीय अधिकारियों को भी शामिल किया जाए। सहकारी क्षेत्र में डाटा सेंटर अलग से तैयार करने के बजाय राज्य सरकार के डाटा सेंटर को ही प्रयोग किया जाए।
इस अवसर पर सचिव बी.वी.आर.सी. पुरुषोत्तम सहित अन्य विभागीय अधिकारी उपस्थित थे।