आईएएस अधिकारियों को पूरी प्रशासनिक नेतृत्व क्षमता से कार्य करना होगा-मुख्यमंत्री

उत्तराखण्ड को 2025 तक देश का अग्रणी राज्य बनाने के लिए सभी आई.ए.एस. अधिकारियों को पूरी प्रशासनिक नेतृत्व क्षमता से कार्य करना होगा। राज्य के समग्र विकास एवं जन समस्याओं के त्वरित समाधान के लिए सरलीकरण, समाधान एवं निस्तारण के मंत्र के साथ आगे बढ़ना है। यह बात मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने शुक्रवार को सचिवालय में एडमिनिस्ट्रेटिव ऑफिसर्स कांफ्रेंस के शुभारंभ के दौरान कही। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य के समग्र विकास के लिए मसूरी में आयोजित चिंतन शिविर में जो सुझाव सामने आये हैं, उन सभी सुझावों को धरातल पर लाया जाए। जन समस्याओं के समाधान के लिए प्रक्रियाओं के सरलीकरण पर विशेष ध्यान दिया जाए। यह सुनिश्चित किया जाए कि अपने कार्यों के लिए आम जन को अनावश्यक रूप से दफ्तरों में न आना पड़ें। फाईल सिस्टम को ऑनलाईन लाने पर फोकस किया जाए।
मुख्यमंत्री ने कहा कि यह सुनिश्चित किया जाए कि शासन स्तर पर फाइलें अनावश्यक रूप से लम्बित न हों। जो फाइलें रूकी हैं, उनका दुबारा परीक्षण करवाया जाए। अनावश्यक रूप से फाइलें लंबित होने पर संबंधित अधिकारी एवं कर्मचारी की जिम्मेदारी तय की जाए। जनपदों में जिलाधिकारी एवं मुख्य विकास अधिकारी की सरकारी योजनाओं को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका होती है। यह सुनिश्चित किया जाए कि समाज के अंतिम पंक्ति पर खड़े लोगों को केन्द्र एवं राज्य सरकार की योजनाओं का पूरा लाभ मिले। सभी जनपदों के तहसील दिवस और बीडीसी की बैठकें नियमित रूप से की जाए। अधिकारियों का जन सामान्य के साथ अच्छा व्यवहार होना जरूरी है। उन्होंने कहा कि सुशासन दिवस पर ग्राम चौपाल का आयोजन किया जायेगा, इसमें सभी आई.ए.एस अधिकारी अलग-अलग क्षेत्रों में ग्राम चौपालों में प्रतिभाग करें। मुख्यमंत्री ने कहा कि कुछ जनपदों में जिलाधिकारियों द्वारा अपने कार्यों के साथ ही अतिरिक्त समय में जन सेवा के कार्य किये जा रहे हैं, यह सराहनीय प्रयास है। उन्होंने कहा कि अधिकारी अपने प्रशासनिक कार्यों के अलावा जिस क्षेत्र में दक्ष हैं, अगर अपनी दक्षता से जन सेवा कर रहे हैं, तो यह राज्य हित में एक अच्छा प्रयास है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि 2023 में भारत में जी-20 शिखर सम्मेलन होगा। जी-20 से दो दल उत्तराखण्ड भी आयेंगे। इस दौरान हम उत्तराखण्ड के स्थानीय उत्पादों, हस्तशिल्प एवं अन्य क्षेत्रों में क्या कर सकते हैं, इस कांफ्रेंस में इस पर व्यापक चर्चा की जाए। मुख्यमंत्री ने कहा कि आजादी का अमृत काल शुरू हो चुका है, इस अवधि में राज्य में क्या महत्वपूर्ण कार्य हो सकते हैं, इस पर भी मंथन किया जाए। उन्होंने कहा कि समय प्रबंधन पर भी विशेष ध्यान दिया जाए।
मुख्य सचिव डॉ. एस.एस. संधु ने कहा कि आईएएस वीक का मूल मंत्र एक दूसरे को जानना है। इससे एक दूसरे के साथ रहने से जो बॉन्डिंग होती है, यह हमारी कार्यकुशलत बढ़ा देती है। इससे धीरे -धीरे हमारी ऑफिसियल वर्किंग में बहुत सुधार आता है। मुख्य सचिव ने कहा कि अपने कार्यालय में फैमिलियर माहौल बनाने से भी कुशलता बढ़ती है। जिलों में तैनात अधिकारियों से उन्होंने कहा कि जनपद की सड़क, बिजली, पानी की समस्या या आमजन की किसी भी प्रकार की समस्याओं को सुनने के लिए हम कितने संवेदनशील हैं, इससे बहुत फर्क पड़ता है। समस्याओं को दूर करने के लिए समस्याओं को समझना जरूरी है और उसके लिए अधिकारी के मन में आमजन के प्रति संवेदनशील होना जरूरी है। आप उनकी समस्याओं को समझ जाएंगे, और साथ ही यह भी समझ जाएंगे कि इनकी समस्याओं को हल करना आपकी जिम्मेदारी है, तो उस समस्या को हल करने का रास्ता आप निकाल ही लेंगे।
मुख्य सचिव ने कहा कि हमें हमेशा सकारात्मक रहना है। यह हम सभी के लिए, हमारी सर्विस लाईफ और पर्सनल लाईफ दोनों के लिए बेहतर है। उन्होंने कहा कि नियम काम को आसान बनाने के लिए बने हैं। इंटरप्रिटेशन की बात है, कई अधिकारी कर्मचारी नियमों की इस प्रकार व्याख्या करते हैं कि रूल्स में यह नहीं लिखा कि यह हो सकता है, परंतु इसमें व्याख्या इस प्रकार भी तो सकती है कि यह कहां लिखा है कि आप यह नहीं कर सकते हैं। अधिकारी सकारात्मक होगा तो यह कहेगा कि आमजन के लिए लाभप्रद है, और इस काम के लिए रोका नहीं गया है तो किया जा सकता है। हमें सकारात्मक सोच रखनी है। मुख्य सचिव ने कहा कि आपको यदि कोई दिक्कत आती है तो आपके पास वरिष्ठ अधिकारी हैं, आपको लगता है कि इस मामले ने आपको कौन अधिकारी गाइड कर सकता है, उन्हें लेटर लिखने से पहले फोन लगाकर बात कर लें। मैं हमेशा आप लोगों के लिए उपलब्ध हूं।
मुख्य सचिव ने कहा कि हमारे प्रदेश में फूलों, फलों और सब्जी उत्पादन में बहुत अधिक सम्भावनाएं हैं। इससे हजारों लोगों को रोजगार मिल सकता है। उन्होंने कहा कि हमारे प्रदेश में पॉलीहाऊस की बहुत अधिक मांग है, जिला प्लान से हम बहुत कम दे रहे हैं। उन्होंने जिलाधिकारियों को 31 मार्च 2023 तक पॉलीहाऊस 100 प्रतिशत सैचुरेशन करने की बात कही। उन्होंने रिवर्स माईग्रेशन को रोकने के लिए ओल्ड एज लोगों से बात करके उन्हें शामिल करते हुए, उनकी आवश्यकताओं को जानकर उनके लिए सुविधाएं उपलब्ध कराकर रिवर्स माईग्रेशन को रोक सकते हैं।
मुख्य सचिव ने कहा कि हमें अपना दृष्टिकोण सकारात्मक रख कर संवेदनशील रहना है और करियर की शुरूआत में आईएएस ज्वाईन करते समय कुछ कर दिखाने का हम सपना देखते हैं, उसे मरने नहीं देना है। बहुत से ऑफिसर सर्विस ज्वाईन करने के बाद सोचते हैं कि नौकरी में आ गए अब सब खत्म, ये एंड नहीं है, ये बिगिनिंग है।
इस अवसर पर अपर मुख्य सचिव आनन्द बर्द्धन, प्रमुख सचिव आर.के. सुधांशु, एल. फैनई, सचिव आर.मीनाक्षी सुंदरम, शैलेश बगोली एवं अन्य आई.ए.एस अधिकारी उपस्थित रहे।

मुख्य सचिव ने राज्य आपदा मोचन निधि और आपदा न्यूनीकरण निधि के तहत प्रस्तावों को दी स्वीकृति

मुख्य सचिव डॉ. एस. एस. संधु की अध्यक्षता में आपदा प्रबंधन विभाग की राज्य कार्यकारिणी समिति की बैठक संपन्न हुई। बैठक में राज्य आपदा मोचन निधि और राज्य आपदा न्यूनीकरण निधि के अंतर्गत विभिन्न प्रस्तावों को स्वीकृति प्रदान की गई।

बैठक में 208.12 करोड़ की लागत के बलियानाला ट्रीटमेंट कार्य को सहमति प्रदान की गई। मुख्य सचिव ने योजना पूर्ण होने की प्रस्तावित समय 4 साल को घटा कर 2 साल में पूर्ण किए जाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि कार्य 2 अथवा 3 शिफ्ट में युद्ध स्तर पर किया जाए। जो कार्य समानांतर शुरू किए जा सकते हैं, किए जाएं, एवं टेंडर भी तुरंत जारी किए जाएं। मुख्य सचिव ने इस कार्य में पर्यटन को जोड़े जाने की बात कही। बैठक के दौरान 1020.09 लाख की लागत के नैनीताल में डीएसबी कॉलेज बालिका छात्रावास और ठंडी सड़क के भूस्खलन की रोकथाम कार्य को भी सहमति प्रदान की गई।

मुख्य सचिव ने आपदा प्रबंधन विभाग को प्रदेश में मानसून काल के दौरान विभिन्न जनपदों और रेखीय विभागों को दी जाने वाली राशि उपलब्ध कराने में उदारवादी होने की बात कही। साथ ही निर्देश दिए कि विभागों को टारगेट दिए जाएं ताकि तेजी से कार्य पूर्ण किए जा सकें, इससे आमजन की समस्याओं का तेजी से निस्तारण किया जा सकेगा। बैठक में 15.00 करोड़ की लागत से आपदा के त्वरित प्रतिवादन हेतु राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण द्वारा आईआरएस सिस्टम और सॉफ्टवेयर विकास कार्य को भी स्वीकृति प्रदान की गई। उन्होंने इसमें आईटीडीए को भी शामिल किए जाने के निर्देश दिए।

मुख्य सचिव ने 30.00 करोड़ की लागत के प्राकृतिक विपत्तियों के कारण क्षतिग्रस्त पेयजल योजनाओं की तात्कालिक मरम्मत और पुनर्निर्माण कार्यों को सहमति देते हुए उत्तराखण्ड जल संस्थान को प्रदेशभर के अधिक से अधिक कार्यों को शामिल करने के भी निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि प्राकृतिक विपत्तियों के कारण पाइपलाइंस टूटने से बहुत से क्षेत्रों को पानी की समस्या से जूझना पड़ता है, इसके लिए शीघ्र बैठकें आयोजित कर सैचुरेशन प्लान तैयार किया जाए।

समिति की बैठक के दौरान 175.00 लाख की लागत के इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ ट्रॉपिकल मेटियोरोलॉजी (आईआईटीएम) पुणे के माध्यम से देहरादून और श्रीनगर में वज्रपात की चेतावनी हेतु सेंसर लगाए जाने को भी स्वीकृति प्रदान की गई।

इस अवसर पर सचिव डॉ. रंजीत कुमार सिन्हा, आर. राजेश कुमार, हरि चंद्र सेमवाल एवं वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से कमिश्नर कुमाऊं दीपक रावत एवं अपर सचिव आपदा प्रबंधन सविन बंसल आदि उपस्थित रहे।

रूरल इन्फ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट फंड को लेकर मुख्य सचिव ने ली बैठक


मुख्य सचिव डॉ. एस.एस. संधु की अध्यक्षता में सचिवालय में वित्तीय वर्ष 2022-23 के लिए रूरल इन्फ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट फंड के सम्बन्ध में बैठक हुई।

बैठक के दौरान मुख्य सचिव ने सभी सम्बन्धित विभागों को स्वीकृत लक्ष्य के सापेक्ष अगले एक हफ्ते में सभी प्रस्ताव शीघ्र भेजे जाने के निर्देश दिए। मुख्य सचिव ने कहा कि प्रस्ताव वित्त को भेजे जाने के साथ ही डीपीआर नाबार्ड को भी भेज दी जाए, ताकि समय पर नाबार्ड की भी संस्तुति मिल सके।

मुख्य सचिव ने प्रत्येक सप्ताह और पाक्षिक रूप से प्रस्तावों की लगातार मॉनिटरिंग किए जाने के निर्देश दिए। उन्होंने विभागीय सचिवों को आरआईडीएफ के अंतर्गत प्रस्तावों को विभागीय कैलेंडर से जोड़ते हुए स्वीकृति से लेकर डिस्बर्शमेंट तक निर्धारित समयसीमा में पूर्ण कराया जाए। उन्होंने प्रोजेक्ट कम्प्लीशन रिपोर्ट्स भी शीघ्र जमा कराए जाने के भी निर्देश दिए।

इस अवसर पर अपर मुख्य सचिव आनन्द बर्द्धन, सचिव दिलीप जावलकर, वी.वी.आर.सी. पुरूषोत्तम एवं रविनाथ रमन सहित विभिन्न विभागों के विभागाध्यक्ष उपस्थित थे।

मुख्य सचिव ने की परिवहन विभाग की समीक्षा बैठक

मुख्य सचिव डॉ. एस.एस. संधु ने परिवहन विभाग की समीक्षा बैठक के दौरान अधिकारियों को निर्देश दिये कि जन सुविधा, परिवहन सेवाओं एवं सड़क सुरक्षा की दृष्टि से आधुनिकतम तकनीक का इस्तेमाल कर उत्तराखण्ड की भौगोलिक परिस्थितियों के हिसाब से कुछ बेस्ट प्रैक्टिस को राज्य में शुरू किया जाए। आउटकम बेस्ट अप्रोच पर विशेष ध्यान दिया जाए। परिवहन विभाग एवं परिवहन निगम में जो लोग कार्य कर रहे हैं, उन्हें पर्फाेमेंस बेस इन्सेंटिव की व्यवस्था की जाए। अच्छा कार्य करने वालों का मनोबल बढ़ाना जरूरी है। मुख्य सचिव ने कहा कि परिवहन विभाग को राजस्व वृद्धि की ओर भी ध्यान देना होगा। जनता को ऑनलाईन सुविधाएं सुलभता से मिले इस दिशा में अधिक प्रयास किये जाएं।

मुख्य सचिव ने अधिकारियों को निर्देश दिये कि सड़क दुर्घटनाओं को रोकने के लिए विशेष प्रयासों की जरूरत है। जिन कारणों से सड़क दुर्घटनाएं अधिक हो रही हैं, उन्हें रोकने के लिए विभाग स्तर पर क्या कार्यवाही की जा रही है, इसकी पूरी रूपरेखा बनाई जाए। ड्राइविंग लाइसेंस जारी करने से पहले सभी मानकों का भली भांति परीक्षण किया जाए। पर्वतीय क्षेत्रों के हिसाब से भी ड्राइविंग टेस्ट पैरामीटर में कोई व्यवस्था की जाए। कार्यों में बेहतर प्रगति के लिए सिर्फ पिछले एक साल से तुलना न की जाए बल्कि सुधार करने के लिए आदर्श क्या है, इस पर अधिक ध्यान दिया जाए। यह सुनिश्चित किया जाए कि परिवहन विभाग द्वारा जन सुविधा के दृष्टिगत जो भी कार्य किये जा रहे हैं, उनकी उच्चाधिकारियों द्वारा नियमित मॉनिटरिंग की जाए।

मुख्य सचिव ने कहा कि चारधाम यात्रा मार्गों में आवश्यकतानुसार कुछ महत्वपूर्ण स्थान चिन्हित किये जाएं, जहां पर वाहन चालकों के लिए सोने, खाने एवं नहाने की उचित व्यवस्थाएं की जा सके। यह सुनिश्चित किया जाए कि श्रद्धालुओं एवं संवारियों की सुरक्षा के दृष्टिगत परिवहन विभाग की ओर से कोई कमी न रहे। वाहन चालकों को भी इसके लिए नियत स्थानों पर समुचित सुविधाएं मिलनी जरूरी हैं। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिये कि वाहनों की फिटनेस पर भी विशेष ध्यान दिया जाए। जहां पर वाहनों के फिटनेस टेस्ट हो रही है, उन स्थानों पर सी.सी.टी.वी कैमरों की पूरी व्यवस्था हो।

बैठक में सचिव परिवहन अरविन्द सिंह ह्यांकी, एमडी परिवहन निगम रोहित मीणा, अपर सचिव परिवहन नरेन्द्र जोशी, संयुक्त परिवहन आयुक्त सनत कुमार सिंह एवं परिवहन विभाग के अन्य अधिकारी उपस्थित थे।

प्रशिक्षण संस्थानों में आधुनिक उपकरणों से ट्रेनिंग उपलब्ध कराएंः मुख्य सचिव

मुख्य सचिव डॉ. एस.एस. संधु की अध्यक्षता में सचिवालय में कौशल विकास विभाग की समीक्षा बैठक सम्पन्न हुयी। बैठक के दौरान, मुख्य सचिव ने कहा कि गुणवत्तायुक्त कौशल विकास रोजगार की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। इसके लिए बच्चों की रुचि के अनुरूप कौशल विकास किया जाए। उन्होंने इसके लिए कक्षा 6 से ही बच्चों के स्किल डेवेलपमेंट पर फोकस किए जाने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि आईटीआई के प्रशिक्षक शुरुआत में अपने आसपास के स्कूलों में दौरे करें, सप्ताह में एक प्रशिक्षण कक्षा का आयोजन किया जाए। बच्चों की रुचि जानने की कोशिश की जाए ताकि उसके अनुरूप बच्चों को प्रशिक्षण प्रदान किया जा सके।

मुख्य सचिव ने राजकीय प्रौद्योगिकी संस्थानों में वर्तमान एवं भविष्य की आवश्यकता के अनुसार लगातार कोर्स अपडेट किए जाने एवं मॉडर्न तकनीकों के प्रयोग किए जाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि प्रशिक्षकों को भी नई तकनीक से लगातार अपडेट रहने की आवश्यकता है, इसके लिए प्रशिक्षकों का भी प्रशिक्षण कराया जाना चाहिए। साथ ही, नए ट्रेड्स को भी शामिल किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि बच्चे ऑनलाइन किसी भी तकनीक की जानकारी ले सकें इसके लिए एक डिजिटल लाईब्रेरी की व्यवस्था की जाए।

मुख्य सचिव ने कहा कि अपनी योजनाओं में इंडस्ट्रीज को शामिल करते हुए सीधे बच्चों को इंडस्ट्रीज में ही प्रशिक्षण उपलब्ध कराए जाने की व्यवस्था की जाए। इसके लिए औद्योगिक संस्थानों से एग्रीमेंट किया जा सकता है। प्रशिक्षण संस्थानों में नए एवं आधुनिक उपकरणों के माध्यम से ट्रेनिंग उपलब्ध कराई जानी चाहिए। इसके लिए आईटीआई लैब का आधुनिकीकरण किया जाए।

बैठक के दौरान सचिव कौशल विकास श्री विजय कुमार यादव ने बताया कि प्रदेश में गुणवत्तापूर्ण प्रशिक्षण सुनिश्चित किए जाने हेतु 24 आईटीआई का वर्ल्ड बैंक प्रोजेक्ट के माध्यम से अपग्रेडेशन कार्य चल रहा है। इसके अंतर्गत स्मार्ट क्लासरूम/वर्कशॉप, ग्रीन और स्मार्ट कैंपस सहित इंटरनेट सुविधा उपलब्ध करायी जा रही है। उन्होंने कहा कि 8 आईटीआई को STRIVE (CS) स्कीम के तहत उद्योगों के साथ पार्टनरशिप में गुणवत्तापूर्ण प्रशिक्षण प्रदान करने पर फोकस किया जा रहा है। 22 आईटीआई का नाबार्ड के सहयोग से अपग्रेडेशन किया जा रहा है।

इस अवसर पर कौशल विकास विभाग के अन्य उच्चाधिकारी उपस्थित थे।

मसूरी और देहरादून की सड़कों की स्थिति को लेकर मुख्य सचिव ने की बैठक

मुख्य सचिव डॉ. एस. एस. संधु ने मसूरी और देहरादून की सड़कों की स्थिति के सुधारीकरण और गड्ढा मुक्त करने के सम्बन्ध में सभी सम्बन्धित विभागों के साथ बैठक ली।

मुख्य सचिव ने सड़कों की दुर्गति पर नाराजगी जताते हुए सभी विभागों को 2 दिन में (शुक्रवार तक) देहरादून और मसूरी की प्रत्येक सड़क का डेटवाइज कंप्लीशन प्लान तैयार करने के निर्देश दिए। उन्होंने अधिकारियों की जिम्मेदारी तय करते हुए एडवर्स एंट्री भी दिए जाने की बात भी कही।

मुख्य सचिव ने मसूरी में सड़कों के साथ बिछाई गई पेयजल पाइपलाइन में भविष्य में दिए जाने कनेक्शनों के लिए ऐसी व्यवस्था सुनिश्चित किए जाने के निर्देश दिए जिससे दोबारा सड़कें न खोदनी पड़ें। उन्होंने मसूरी मालरोड के सौंदर्यीकरण के कार्य में भी तेजी लाने के निर्देश दिए। साथ ही उन्होंने कहा कि सभी सम्बन्धित विभाग समन्वय बनाकर कार्यों में तेजी लाएं।

मुख्य सचिव ने अधिकारियों को कार्यों का निरीक्षण कर कार्यों में आ रही समस्याओं के समाधान निकाल कर कार्य पूर्ण किए जाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि वह स्वयं सभी कार्यों की प्रत्येक सप्ताह मीटिंग लेंगे। लापरवाही बरते जाने वाले अधिकारियों की जिम्मेदारी तय की जायेगी, साथ ही ऐडवर्स एंट्री दी जाएगी।

इस अवसर पर सचिव अरविंद सिंह ह्यांकी, जिलाधिकारी देहरादून सीईओ स्मार्ट सिटी सोनिका एवं मुख्य नगर अधिकारी श्री मनुज गोयल सहित अन्य सम्बन्धित विभागों के उच्चाधिकारी भी उपस्थित थे।

पीएम आवास में स्वीकृत आवासों के सापेक्ष पूर्ण और आवंटन में लाया जाए सुधारः सीएस

मुख्य सचिव डॉ. एसएस संधु ने सचिवालय में सम्बन्धित अधिकारियों के साथ प्रगति पोर्टल के अन्तर्गत नेशनल ब्रॉडबैंड मिशन, पीएम स्वनिधि और प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) की प्रगति की समीक्षा की।

मुख्य सचिव ने नेशनल ब्रॉडबैंड मिशन के अन्तर्गत टावर लगाने एवं ओएफसी आदि के लिए राइट ऑफ वे आवेदनों के सम्यक् निस्तारण हेतु सभी जिलाधिकारियों तेजी लाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि इसके लिए स्थानीय निकायों को अपने बायलॉज में परिवर्तन करने की आवश्यकता है तो शीघ्रातिशीघ्र किया जाए। उन्होंने सभी जिलाधिकारियों को पेंडेंसी के निस्तारण के लिए उचित प्रणाली विकसित किए जाने के निर्देश दिए। साथ ही प्रतिदिन समीक्षा की जाए और इसके लिए वर्कशॉप भी आयोजित की जाएं। कहा कि समस्याओं का अध्ययन कर प्रक्रिया का सरलीकरण किया जाए, ताकि एप्लीकेशन के रिजेक्शन को कम किया जा सके।

मुख्य सचिव ने पीएम स्वनिधि योजना के अन्तर्गत राज्य के 25 हजार स्ट्रीट वेंडर्स को ऋण उपलब्ध कराने के लक्ष्य को निर्धारित समय सीमा में हासिल करने के भी निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि पेपर वर्क पूरा करने हेतु में एक या दो बार कैंप लगाए जाएं। ई – केवाईसी के लिए सीएससी आदि को भी कैंप में शामिल किया जाए ताकि सभी काम एक साथ हो सकें। मुख्य सचिव ने पीएम स्वनिधि में पर्वतीय जनपदों की प्रगति पर संतोष व्यक्त किया और कहा कि मैदानी जनपदों को तेजी लाने की आवश्यकता है। उन्होंने एसएलबीसी को बैंकों को भी इस सम्बन्ध में अवगत कराए जाने हेतु निर्देशित किया, ताकि बैंक भी एप्लीकेशंस को सरसरी तौर पर निरस्त न करें और ऋण स्वीकृति देने में तेजी लाएं।

मुख्य सचिव ने प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) में भी स्वीकृत आवासों के सापेक्ष पूर्ण और आबंटित की स्थिति में तेजी से सुधार लाने के निर्देश दिए। कहा कि क्रेडिट लिंक्ड सब्सिडी योजना, लाभार्थी के नेतृत्व में व्यक्तिगत घर निर्माण गरीब बेघर लोगों के लिए बहुत ही लाभकारी है। बीएलसी के अन्तर्गत केंद्र सरकार द्वारा तीसरी/अंतिम किश्त प्रोजेक्ट पूर्ण होने के बाद दी जाती है, जिस कारण कई बार लाभार्थी का आवास धन की कमी के कारण पूरा नहीं हो पता या उसमें देरी होती है। इसके लिए एक नया मैकेनिज्म तैयार किया जाए ताकि लाभार्थी को बाकी का पैसा राज्य सरकार की और से मिल जाए और प्रोजेक्ट पूर्ण होने पर यह केंद्र से राज्य सरकार को रिफंड हो जाए।

इस अवसर पर अपर मुख्य सचिव आनन्द वर्द्धन,सचिव शैलेश बगोली, निदेशक आईटीडीए अमित सिन्हा सहित सम्बन्धित विभागों के उच्चाधिकारी भी उपस्थित थे।

मुख्य सचिव ने गोवंश और कांजी हाउस के संबंध में ली अधिकारियों की बैठक

मुख्य सचिव डॉ. एस. एस. संधु ने पशुपालन विभाग के साथ गोवंश और कांजी हाउस के सम्बन्ध में बैठक ली। मुख्य सचिव ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि सभी स्थानीय निकायों विशेषकर नगर निगम और नगर पालिकाओं के आसपास कांजी हाउस बनाए जाएं।

मुख्य सचिव ने कहा कि गोवंश की देखभाल एवं कांजी हाउस हेतु नीति तैयार की जाए। साथ ही, त्यागे गए गोवंशों को इसमें शामिल करते हुए कांजी हाउस तैयार किए जाएं। उन्होंने कहा कि पूर्व से संचालित हो रहे कांजी हाउसों के विस्तारीकरण की संभावनाओं को तलाशा जाए। इसके साथ ही स्वयं सेवकों, एनजीओ एवं व्यक्तिगत रूप से संचालित किए जा रहे कांजी हाउसों को भी विस्तारित किया जा सकता है, जिसके लिए सरकार द्वारा हर संभव सहायता उपलब्ध कराई जाए।

मुख्य सचिव ने कहा कि शहरी विकास विभाग को शामिल कर इसके लिए प्लान तैयार किया जाए। इस प्रकार के कांजी हाउस संचालित करने वालों से मिलकर उनकी समस्याओं को समझने एवं निराकरण करने के प्रयास किए जाएं, साथ ही उनसे सुझाव भी लिए जाएं। मुख्य सचिव ने इस दिशा में कम्युनिटी पार्टिसिपेशन पर फोकस किए जाने पर जोर दिया।
इस अवसर पर अपर मुख्य सचिव आनन्द बर्धन एवं सचिव वी वी आर सी पुरुषोत्तम सहित अन्य सम्बन्धित अधिकारी उपस्थित थे।

रोजगार के लिए उत्तराखंड लोक सेवा आयोग व अन्य एजेंसियां पारदर्शी तरीका अपनाएंः मुख्यमंत्री

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मुख्य सचिव डॉ. एस.एस. सन्धु को निर्देश दिये हैं कि प्रदेश में भविष्य में पारदर्शी एवं सुचिता पूर्ण ढंग से चयन प्रक्रिया सुनिश्चित करने की व्यवस्था की जाए ताकि योग्य युवाओं का चयन हो सके। उन्होंने इस सम्बन्ध में उत्तराखण्ड लोक सेवा आयोग तथा अन्य चयन एजेंसियों को सुदृढ़ एवं पारदर्शी बनाये जाने के भी निर्देश दिये हैं।

मुख्यमंत्री ने उत्तराखण्ड अधीनस्थ सेवा चयन आयोग द्वारा जिन पदों के रिजल्ट घोषित कर दिये हैं किंतु संस्तुति अभी नहीं भेजी गई है उस संबंध में भी केस टू केस निर्णय लेने हेतु मुख्य सचिव एवं सचिव कार्मिक को निर्देश दिये हैं। ऐसी परीक्षायें जिनमें अधीनस्थ सेवा चयन आयोग द्वारा आवेदन आमंत्रित किये जा चुके हैं तथा कोई भी परीक्षा आयोजित नहीं की गई है उनमें लोक सेवा आयोग के स्तर पर नियम संगत कार्यवाही कर चयन प्रक्रिया सुनिश्चित की जाए।

मुख्यमंत्री ने यह भी निर्देश दिये हैं कि उत्तराखण्ड अधीनस्थ सेवा चयन आयोग की जो परीक्षायें लोक सेवा आयोग द्वारा आयोजित की जानी हैं उसके लिये शीघ्र विज्ञापन निर्गत कर चयन प्रक्रिया प्रारम्भ की जाय। मुख्यमंत्री ने परीक्षा परिणाम घोषित पुलिस रैंकर्स भर्ती परीक्षा के संबंध में भी शीघ्र कार्यवाही हेतु सचिव कार्मिक को निर्देश दिये हैं।

केदारनाथ पुनर्निर्माण कार्य और बद्रीनाथ धाम के मास्टर प्लान की समीक्षा कर सीएस ने दिए आवश्यक निर्देश

मुख्य सचिव डॉ. एस. एस. संधु ने केदारनाथ में चल रहे पुनर्निर्माण कार्यों एवं बद्रीनाथ धाम मास्टर प्लान की प्रगति की समीक्षा की। उन्होंने बैठक के दौरान केदारनाथ पुनर्निर्माण कार्यों एवं बद्रीनाथ मास्टर प्लान के तहत कार्यों को निर्धारित समय सीमा में पूर्ण करने हेतु आवश्यक कदम उठाए जाने के निर्देश दिए।
मुख्य सचिव ने कहा कि कार्यों की गुणवत्ता पर विशेष ध्यान देते हुए कार्य पूर्ण किए जाएं। उन्होंने नाइट शिफ्ट करते हुए प्रोडक्टिव आवर्स को बढ़ाए जाने के निर्देश भी दिए। उन्होंने मजदूरों की संख्या भी बढ़ाए जाने की भी बात कही। मुख्य सचिव ने मजदूरों के रहने और खाने की उचित व्यवस्था सुनिश्चित किए जाने के भी निर्देश दिए।
मुख्य सचिव ने कहा कि मानसून सीजन समाप्त होते ही चारधाम यात्रियों की संख्या तेजी से बढ़ने की संभावना है, इसके चलते निर्माण सामग्री केदारनाथ पहुंचाने में थोड़ा दिक्कतें आ सकती हैं, इसको देखते हुए निर्माण सामग्री की समुचित व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। उन्होंने फ्यूचर स्पेसिफिक निर्माण अथवा अन्य सभी प्रकार की सामग्री का स्टॉक पहले से तैयार कर लिया जाए, साथ ही, निर्माण सामग्री की उपलब्धता के लिए लोकल सिस्टम भी विकसित किया जाए, ताकि आवश्यकता पड़ने पर वहां से निर्माण सामग्री की उपलब्धता सुनिश्चित की जा सके।
मुख्य सचिव ने बद्रीनाथ धाम मास्टर प्लान कार्यों पर भी निर्धारित समय सीमा पर पूर्ण करने के निर्देश देते हुए कार्यों की गुणवत्ता बनाए रखने के निर्देश दिए। उन्होंने पर्यटन और तीर्थाटन स्थलों के आसपास पार्किंग स्थलों की व्यवस्था करने के भी निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि खूबसूरत पर्यटन स्थलों में बड़ी – बड़ी पार्किंग बना कर उस क्षेत्र की खूबसूरती को बर्बाद कर देते हैं। उन्होंने पार्किंग स्थलों के लिए अलग – अलग स्थानों पर सड़कों के किनारे छोटी – छोटी पार्किंग स्थल विकसित करने के निर्देश दिए।
इस अवसर पर सचिव श्री सचिन कुर्वे द्वारा केदारनाथ पुनर्निर्माण एवं बद्रीनाथ मास्टर प्लान के सम्बन्ध में विस्तृत प्रस्तुतीकरण दिया गया।