रेलवे और प्रदेश के उच्चाधिकारियों को सकारात्मक रुख अपनाने के निर्देश

मुख्य सचिव डॉ. एस.एस. संधु की अध्यक्षता में गुरुवार को सचिवालय में रेलवे से संबंधित मुद्दों के निस्तारण के लिए डिवीज़नल रेलवे मैनेजर मुरादाबाद राजकुमार सिंह के साथ बैठक की। मुख्य सचिव ने रेलवे एवं उत्तराखंड सरकार के अधिकारियों को सकारात्मक रुख़ अपनाते हुए दोनों ओर आ रही समस्याओं को लगातार बैठकें आयोजित कर निस्तारित करने के निर्देश दिये।
मुख्य सचिव ने रेलवे को हर्रावाला रेलवे स्टेशन को 24 कोच टर्मिनल बनाए जाने को लेकर कार्यों में तेज़ी लाने के निर्देश दिये। उन्होंने इसके लिए भूमि अधिग्रहण और हस्तांतरण की प्रक्रिया शीघ्र शुरू किए जाने हेतु रेलवे और शासन की ओर से कार्रवाई में तेज़ी लाए जाने के निर्देश दिये। उन्होंने भंडारीबाग़ आरओबी की रेलवे बोर्ड स्तर पर अटकी स्वीकृति शीघ्र करवाये जाने के भी निर्देश दिये। डीआरएम मुरादाबाद ने इस पर एक हफ़्ते में स्वीकृति दिलवाए जाने का आश्वासन दिया।
मुख्य सचिव ने देहरादून मोहंड सहारनपुर नई रेलवे लाइन की प्रगति की जानकारी ली। बैठक में बताया गया कि फ़रवरी माह तक इस नई रेलवे लाइन का सर्वे का कार्य पूर्ण हो जाएगा। डीपीआर कार्य को स्वीकृति मिल गई है शीघ्र ही डीपीआर तैयार हो जाएगी। उन्होंने रेलवे भूमि में अतिक्रमण को रेलवे और सम्बन्धित ज़िलाधिकारियों को नये अतिक्रमण रोकने के लिए लगातार आपसी सामंजस्य के साथ कार्य करने के निर्देश दिये।
मुख्य सचिव ने रेलवे और वन विभाग के बीच मुद्दों को भी आपसी तालमेल के साथ निस्तारित किए जाने के निर्देश दिये। उन्होंने निर्देश दिये कि वन विभाग, लोक निर्माण विभाग और अन्य सभी सम्बन्धित विभाग एक दूसरे के साथ आ रही समस्याओं से संबंधित विभागों से तत्काल अवगत कराएँगे, संबंधित विभाग 15 दिन के अंदर बैठक आयोजित करा कर समस्या के निस्तारण के लिए सहयोग करेगा।
इस अवसर पर प्रमुख सचिव आर के सुधांशु, वन प्रमुख (हॉफ) अनूप मलिक, सचिव अरविंद सिंह ह्याँकी, सचिन कुर्वे एवं वीडियो कॉन्फ़्रेंसिंग के माध्यम से हरिद्वार एवं देहरादून जनपदों के ज़िलाधिकारी उपस्थित रहे।

ग्राफिक एरा में शुरू हुआ चार दिवसीय आपदा प्रबंधन पर विश्व सम्मेलन

आपदा प्रबंधन पर विश्व स्तर के सबसे बड़े सम्मेलनों में से एक ६वाँ विश्व आपदा प्रबंधन आज से देहरादून के ग्राफिक एरा (डीम्ड यूनिवर्सिटी) में शुरू हो चुका है । इस चार दिवसीय सम्मेलन का शुभारंभ उत्तराखंड के माननीय मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी द्वारा दीप प्रज्वलन के साथ किया गया।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने “आपदा प्रबंधन पर विश्व सम्मेलन“ में भाग ले रहे सभी अतिथियों, रिसर्च स्कॉलर, प्रैक्टिशनर एवं वैज्ञानिकों का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि दुनिया भर के 50 से अधिक देशों से आए हुए मेहमानों का उत्तराखंड में स्वागत है। उन्होंने कहा इस सम्मेलन में आपदा प्रबंधन विषय पर विस्तृत चिंतन- मंथन होगा और देहरादून डिक्लेरेशन भी जारी किया जाएगा जिससे उम्मीद है की आपदा प्रबंधन पर बहुत सारी चीजें निकल कर सामने आएँगी और हम उस पर भविष्य में अमल भी करेंगे एवं यह एक महत्वपूर्ण दस्तावेज भी होगा।

मुख्यमंत्री ने उत्तरकाशी के टनल में फंसे लोगों को बचाने के लिए किया जा रहा प्रयास के बारे में भी लोगों को अवगत कराया और उन्होंने कहा राज्य सरकार और केंद्र सरकार के सहयोग से लोगों को जल्द से जल्द बाहर निकलने का हर संभव प्रयास किया जा रहा है। टनल के अंदर फंसे हुए लोगों तक समय-समय पर ऑक्सीजन, दवाई, खाना एवं उनके जरूरत के सभी सामानों को मुहैया करा जा रहा है ताकि वे अंदर स्वस्थ और सुरक्षित रहें।

सम्मेलन के संदर्भ में बात करते हुए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि मानव जाति एवं प्रकृति का संबंध हमेशा से रहा है और यह देवभूमि साक्षी है कि हमारे यहां पहाड़ों पर आपदाओं का भीषण सामना होता रहा है! इस पृष्ठभूमि को देखते हुए उत्तराखंड इस सम्मेलन के लिए बहुत ही महत्वपूर्ण स्थान है। हमारे यहां पर समय-समय पर लैंडस्लाइड, अतिवृष्टि, अधिक बर्फ गिरना इस तरह की आपदा होती रही हैं। हम प्रोएक्टिव अप्रोच के साथ आपदा को पहले से पहचान कर उसके प्रभावों को कम करने में सफल रहे हैं एवं मोदी जी के मार्गदर्शन में हमने पहाड़ों में हेल्थ, हेली सेवा एवं अन्य आवश्यक सुविधाओं का निर्माण किया है ताकि कम से कम लोग आपदाओं में प्रभावित हो। उन्होंने कहा आपदा को हम रोक नहीं सकते परंतु टेक्नोलॉजी और सिस्टम के माध्यम से इसके प्रभाव को पहले पहचान कर कम जरुर कर सकते हैं। माननीय मुख्यमंत्री जी ने कहा की हम आपदा प्रबंधन को उत्तराखंड के पाठ्यक्रम में भी शामिल करने के लिए प्रयासरत हैं ताकि उत्तराखंड के छात्र-छात्राओं को आपदा के बारे में अधिक से अधिक जानकारी मिल सके और भविष्य के लिए चिंतन मंथन कर सचेत और सावधान रहें।

मुख्यमंत्री ने जी20 सम्मेलन का उल्लेख करते हुए कहा कि उत्तराखंड को ळ20 सम्मेलन के तीन सम्मेलनों को आयोजित करने का अवसर मिला था और इसके माध्यम से हमने राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर के मेहमानों के समक्ष उत्तराखंड को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाई है। उन्होंने 8 से 9 दिसंबर 2023 को देहरादून में आयोजित होने वाले ग्लोबल इन्वेस्टर समिट के बारे में भी बात की और उन्होंने कहा कि सम्मेलन से पहले ही हम 2 लाख करोड़ का करार कर चुके हैं और जब यह सम्मेलन संपन्न होगा तब तक हम और आगे बढ़ चुके होंगे।

इस कार्यक्रम में मुख्यमंत्री के द्वारा, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के अनुभवों पर आधारित पुस्तक “रेजिलिएंट इंडियाः कैसे भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत का आपदा प्रबंधन मॉडल बदला“ का विमोचन भी किया गया।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए रंजीत कुमार सिन्हा, सेक्रेट्री, उत्तराखंड डिजास्टर मैनेजमेंट ने आए हुए सभी अतिथियों का स्वागत किया, उन्होंने कहा कि पृथ्वी को बचाने के लिए हम सबको एक साथ मिलकर आगे आना होगा। उन्होंने कहा हमारे युवा मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में हम आज आपदा प्रबंधन पर चिंतन मंथन कर रहे हैं जिसका निष्कर्ष हमें बहुत ही अच्छा मिलने वाला है।

आनंद बाबू , प्रेसिडेंट क्डप्ब्ै ने अपने संबोधन में कहा की इस वर्ल्ड इवेंट में अभी तक अनेकों साइंटिस्टों ने प्रतिभाग किया है एवं अपने विचार रखे हैं परंतु इस बार इस आयोजन को उत्तराखंड के देहरादून में क्यों किया जा रहा है? के सवाल पर उन्होंने कहा कि हम हिमालय के बेहद करीब है और हमने आपदाओं को बहुत ही करीब से देखा है जिससे हमारे यहां पर साइंटिस्ट और रिसर्च स्कॉलर्स को काम करना आसान है इसलिए यह आयोजन हमारे उत्तराखंड के देहरादून में हो रहा है।

प्रो. दुर्गेश पंत, डीजी यू कास्ट ने अपने संबोधन में कहा कि इस आयोजन में 51 देशों का प्रतिनिधित्व शामिल है एवं इससे आपदा प्रबंधन के गंभीरता को समझा जा सकता है, उन्होंने कहा कि हम जी-20 का सफलतापूर्वक आयोजन कर चुके हैं और इसमें विश्व स्तर पर हमारे भारत के योगदान को समझा जा सकता है। उन्होंने कहा कि हमारे मुख्यमंत्री डिजास्टर मैनेजमेंट को लेकर बहुत गंभीर हैं और चिंतन मंथन करते हैं और समय अनुसार एक्शन भी लेते रहते हैं। उन्होंने मुख्यमंत्री जी के कार्य शैलियों की सराहना करते हुए कहा कि उत्तरकाशी के टनल में फंसे हुए लोगों को मुख्यमंत्री जी प्राथमिकता से ले रहे हैं एवं उसका समय-समय पर निरीक्षण करते रहते हैं।

उन्होंने कहा कि “अर्थ इज माय मदर एंड आई एम हर चाइल्ड“ के कांसेप्ट को हमें समझना होगा और उस पर अमल करना होगा। उन्होंने अपने संबोधन के दौरान प्रधानमंत्री से मिले हुए पत्र, (जो ॅब्क्ड को अप्रिशिएसन लेटर के रूप में मिला है) को लोगों को दिखाया एवं उन्होंने विजुअल के माध्यम से सदी के महानायक श्री अमिताभ बच्चन जी द्वारा ६ वें विश्व आपदा प्रबंधन सम्मेलन के अवसर पर इस सम्मेलन की सफलता के लिए माननीय मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और उत्तराखंड राज्य को बधाई और शुभकामनाएं भी लोगों को दिखाई।

पर्यावरणविद् पद्म भूषण अनिल प्रकाश जोशी, ने अपने संबोधन में कहा कि यह एक महत्वपूर्ण कांग्रेस है जो यहां आयोजित किया जा रहा है, हम सिटी को और स्मार्ट से स्मार्ट बनने जा रहे हैं परंतु हमारा देश डिजास्टर के मामले में भी आगे बढ़ते जा रहा है, हम चाहते हैं कि डिजास्टर फ्री डेवलपमेंट की बात की जाए जहां पर डेवलपमेंट तो हो परंतु डिजास्टर के जो संभावना है वह बिल्कुल न्यूनतम हो। उन्होंने उत्तरकाशी टनल हादसे की बात करते हुए कहा कि आज के इस दौड़ में हमारे पास इतनी सारी टेक्नोलॉजी और सिस्टम उपस्थित है परंतु हम बिल्कुल हेल्पलेस महसूस कर रहे हैं। हमारे साइंटिस्ट और सिस्टम को रिव्यू करने की जरूरत है कि इस तरह के हादसे को कैसे कम किया जा सके!

डॉक्टर डी महंतेश, फाउंडर समर्थनम इंटरनेशनल बेंगलुरु, ने अपने संबोधन में कहा कि आपदा सबसे अधिक लोगों में डिसेबिलिटी लाती है और इसका प्रभाव ज्यादातर महिलाओं एवं बच्चों के ऊपर पड़ता है। उन्होंने कहा डिसएबल लोगों के लिए हमारी संस्था समर्थन इंटरनेशनल काम करती है, हमने उत्तराखंड में भी कोरोना महामारी के दौरान काम किया है और आपदाओं के समय पर हम उत्तराखंड के लोगों के लिए हमेशा साथ खड़े रहते हैं।

राजेंद्र रतनू , प्।ै एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर नेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ़ डिजास्टर मैनेजमेंट, ने अपने संबोधन में कहा कि जलवायु परिवर्तन एक गंभीर मुद्दा है और यह पूरी दुनिया के लिए चर्चा का विषय बना हुआ है। उन्होंने कहा हमें डिजास्टर रिस्क रिडक्शन पर काम करना चाहिए।

राधा रतूड़ी, एडिशनल चीफ सेक्रेट्री उत्तराखंड सरकार, ने अपने संबोधन में कहा कि आपदा के समय सबसे ज्यादा प्रभावित होने वाले महिलाएं एवं बच्चे होते हैं। हमें उम्मीद है कि हम इस सम्मेलन के माध्यम से इस पर विचार विमर्श करेंगे एवं इसके लिए ठोस निष्कर्ष निकलेंगे।

एस एस संधू, चीफ सेक्रेटरी, उत्तराखंड सरकार, ने अपने संबोधन के माध्यम से विभिन्न देशों से आए हुए लोगों का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि हर वक्त डेवलपमेंट प्रोजेक्ट डिजास्टर नहीं लाता है परंतु हमें कुछ ऐसे ट्रीटमेंट की व्यवस्था करनी चाहिए जो की डिजास्टर को नियंत्रित कर सके। उन्होंने कहा हमें डेवलपमेंट को नेचुरल बैलेंस के साथ सम्मिलित कर आगे बढ़ना चाहिए।

शोम्बी शार्प, यू एन, रेजिडेंट कोऑर्डिनेटर, ने अपने संबोधन में कहा कि उत्तराखंड सरकार के तरफ से डिजास्टर मैनेजमेंट को लेकर बहुत ही गंभीर कदम उठाए जा रहे हैं! आपदा “मैन मेड और नेचुरल” दोनों तरह से होती है जैसे प्राकृतिक आपदा बाढ़, भूकंप, लैंडस्लाइड, सुनामी के रूप में आती है वही मैन मेड दो देशों के बीच में हुए युद्ध के रूप में आती है। उन्होंने कहा यूनाइटेड नेशन आर्गेनाईजेशन भारत को हर संभव मदद करने के लिए तत्पर रहता है। उन्होंने कहा कि आपदा से लोगों के साथ-साथ कृषि भूमि एवं अन्य आवश्यक संसाधनों पर भी असर पड़ता है, हम देख सकते हैं कि दुनिया भर के 125 देश के पास डिजास्टर पॉलिसी सिस्टम है परंतु यह पर्याप्त नहीं है। उन्होंने कहा भारत अर्ली वार्निंग सिस्टम में काफी कुछ कर चुका है और अब भारत में कोई भी डिजास्टर आने वाला होता है तो उसे 24 घंटे पहले ही सूचना मिल जाती है जिसे जान माल का नुकसान कम करने और लोगों को संभलने के लिए वक्त मिल जाता है।

एडमिरल डीके जोशी, लेफ्टिनेंट गवर्नर, अंडमान एंड निकोबार आइलैंड, ने अपने संबोधन में कहा कि उत्तराखंड और अंडमान एंड निकोबार दोनों डिजास्टर के मामले में काफी करीब है, हमारे अंडमान एंड निकोबार में सुनामी और स्टॉर्म आता है तो उत्तराखंड में लैंडस्लाइड, अतिवृष्टि जैसे आपदा आती रहती है। उन्होंने कहा है कि आज के समय में हमारे पास बहुत से ऐसी टेक्नोलॉजी और नए सिस्टम आ चुके हैं जो हमें डिजास्टर से पहले अलर्ट जारी कर देते हैं। हमारे यहां पर एनडीआरएफ और एसडीआरएफ जैसे संस्था बनाई गए हैं जिससे कम्युनिटी को हो रहे नुकसानों को उनकी मदद से कम किया जा सकता है और हर वक्त उनकी तैयारी रहती है जिससे लोगों को मदद मिलती रहती है। उन्होंने कहा कि टेक्नोलॉजी और एप्स के माध्यम से भी हम इवेक्युएशन को जल्दी लागू कर सकते हैं और जान माल का नुकसान भी कम कर सकते हैं, हमारे पास ळप्ै सिस्टम, सेंसर और ड्रोन जैसे महत्वपूर्ण टेक्नोलॉजी है जिससे हम लोगों को अब मदद कर सकते हैं और डिजास्टर में होने वाले नुकसान की संभावनाओं को भी कम कर सकते हैं।

उद्घाटन समारोह के अंत में ग्राफ़िक एरा विश्वविद्यालय समूह के अध्यक्ष प्रो. डॉक्टर कमल घनशाला जी द्वारा उपस्थित सभी मेहमानों को धन्यवाद ज्ञापन दिया गया उन्होंने कहा कि यह ग्राफिक एरा विश्वविद्यालय के लिए गर्व की बात है कि आज हम मोदी जी के अनुभव पर आधारित पुस्तक का विमोचन कर रहे हैं। यह चार दिवसीय सम्मेलन हमारे आपदा प्रबंधन सिस्टम को समझने के लिए काफी महत्वपूर्ण है और इसके निष्कर्ष से हमें काफी कुछ सीखने को मिलेगा।

एसीएस उवाच, मुख्यमंत्री के निर्देशानुसार अंतरराष्ट्रीय कांग्रेस की सभी तैयारियों को समय रहते किया जाए पूरा

28 नवंबर से 1 दिसंबर 2023 तक देहरादून में होने वाली श्आपदा प्रबंधन पर 6 वीं अंतरराष्ट्रीय कांग्रेस को लेकर सोमवार को सचिवालय में अपर मुख्य सचिव श्रीमती राधा रतूड़ी की अध्यक्षता में एक बैठक का आयोजन किया गया। बैठक में अपर मुख्य सचिव ने कहा कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देशानुसार इस अंतरराष्ट्रीय आयोजन हेतु सभी तैयारियों को समय रहते पूर्ण कर लिया जाए। सभी विभागों को ओनरशिप लेकर इस आयोजन को सफल बनाना है। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड के लिहाज से इस आयोजन का बहुत महत्व है, इस लिहाज से तैयारियों में कोई कमी नहीं रहनी चाहिए।

बैठक में बताया गया कि 28 नवंबर से होने वाली कांग्रेस के सभी कार्यक्रम ग्राफिक एरा यूनिवर्सिटी में आयोजित होंगे। चार दिन के इस सेमिनार में कुल 70 सेशन होंगे जिसमें अंतरराष्ट्रीय व राष्ट्रीय स्तर के वक्ता अपनी बात रखेंगे। अपर मुख्य सचिव ने कहा कि सभी विभागों को चाहिए कि वे बेहतर तालमेल के साथ कार्य करें। उन्होंने कहा कि इसके ठीक बाद दिसंबर माह में ही ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट भी देहरादून में होने जा रही है। ऐसे में यह आयोजन उसकी रिहर्सल के तौर पर भी बेहद अहम है।

अपर मुख्य सचिव ने बैठक में अधिकारियों को निर्देश दिए कि बैठक में राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय स्तर के गणमान्य व्यक्ति आ रहे हैं सभी आवश्यक व्यवस्थाएं समय पर पूर्ण कर ली जाए। बैठक में बताया गया कि लगभग 600 डेलिगेट्स इस कांग्रेस में भाग लेंगे इस हेतु उनके ठहरने व अन्य व्यवस्थाओं का इंतजाम कर लिया गया है।

अपर मुख्य सचिव ने बैठक में निर्देश दिए कि ग्राफ़िक एरा से लेकर जिन किसी भी होटल में डेलिगेट्स रुकेंगे वहां पर फायर सेफ्टी ऑडिट करा लिया जाए। स्वास्थ्य विभाग को निर्देशित किया गया कि आयोजन के दिवस पर एम्बुलेंस व मेडिकल टीम की व्यवस्था पूरी कर ली जाए। बैठक में बताया गया कि चार दिवसीय आयोजन में शुरुआत के दो दिनों में शाम के वक्त सांस्कृतिक कार्यक्रम भी आयोजित होंगे। इसके अतिरिक्त एक दिन विदेशी मेहमानों को गंगा आरती हेतु ऋषिकेश भी ले जाया जाएगा।

बैठक में सचिव शैलेश बगोली, आपदा प्रबंधन सचिव रंजीत सिन्हा, अपर पुलिस महानिदेशक कानून एवं व्यवस्था एपी अंशुमन, यू-कॉस्ट के महानिदेशक प्रो. दुर्गेश पंत, डीआईजी राजकुमार नेगी, ग्राफिक एरा विश्विद्यालय के कुलपति डॉ नरपिंदर सिंह आदि अधिकारीगण उपस्थित रहे।

मुख्यमंत्री धामी ने मिट्टी के दिये खरीदे, किया डिजिटल माध्यम से भुगतान

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने शनिवार को कुम्हार मंडी क्षेत्र का भ्रमण कर दीपावली के अवसर पर मिट्टी के दिये व अन्य सामान तैयार करने वाले कुम्हारों से मिले तथा उन्हें दीपावली की शुभकामनाएं दी। मुख्यमंत्री ने स्वयं भी मिट्टी के दिये क्रय कर सभी से मिट्टी के दिये क्रय करने तथा दीपावली पर मिट्टी के दिये जलाने की अपील की। उन्होंने कहा कि मिट्टी के दिये दीपावली के पर्व को पावनता प्रदान करते हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि लोगों के घरों में दीपावली पर जलने वाले दिये कुम्हारों की खुशहाली तथा आर्थिक समृद्धि का भी माध्यम बनते हैं।
मुख्यमंत्री ने क्रय किये गये दियों का डिजिटल माध्यम से भुगतान करते हुए, उन्होंने कहा कि डिजिटल ट्रांजेक्शन देश में तेजी से बढ़ा है। भारत दुनिया में सबसे अधिक डिजिटल ट्रांजेक्शन करने वाला देश है। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में देश ने डिजिटलाईजेशन के क्षेत्र में तेजी से प्रगति की है। कुछ वर्षों में यूपीआई तेजी से हमारी अर्थव्यवस्था और आदतों का हिस्सा बन गया है। यह डिजिटल भारत की नींव है, यह अंतिम छोर पर खड़े व्यक्ति तक डिजिटल सेवाएं पहुंचाने का माध्यम है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि इस दीपावली पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘वोकल फॉर लोकल’ के मंत्र को आत्मसात करते हुए स्थानीय उत्पादों के प्रचार एवं प्रसार को हम सभी अधिक से अधिक बढ़ावा देकर आत्मनिर्भर भारत के संकल्प की पूर्ति में भी अपना योगदान दे सकते हैं इससे हमारे पारम्परिक उत्पादों को भी पहचान मिलेगी। उन्होंने कहा कि पूरे देश में लोग यदि स्थानीय उत्पादों के क्रय पर ध्यान दे तो हमारा देश भी आर्थिक रूप से मजबूत बनेगा तथा स्थानीय उत्पादकों का बनोबल भी बढ़ेगा।
मुख्यमंत्री ने सुख, समृद्धि और संपन्नता के प्रतीक दीपावली के पावन पर्व की हार्दिक शुभकामनाएं देते हुये कहा कि माँ लक्ष्मी और भगवान श्री गणेश जी के आशीर्वाद से सभी के जीवन में सुख समृद्धि, शांति एवं आरोग्य का संचार हो। मुख्यमंत्री ने कहा कि दीपावली का पर्व मर्यादा एवं सद्भावना का भी संदेश देता है। दीपों का यह त्योहार भगवान राम के 14 वर्ष के वनवास के पश्चात वापस अयोध्या आने से भी जुड़ा है। दीपावली का पर्व बुराई पर अच्छाई और अंधकार पर प्रकाश की विजय का प्रतीक है। दीपावली का यह पर्व हम सबके जीवन को प्रकाशमय करने के साथ हम सबके जीवन में धन, ऐश्वर्य और संपन्नता लेकर आये, इसकी भी उन्होंने कामना की है।

ज्वैलरी शोरूम में हुई लूट की घटना पर पुलिस के आला अधिकारियों की लगी क्लास

देहरादून में कल एक ज्वैलरी शोरूम में हुई लूट की वारदात को लेकर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने आज पुलिस महानिदेशक और एसएसपी देहरादून को तलब कर स्थिति की समीक्षा की और मामले के शीघ्र खुलासे के निर्देश दिये हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि वारदात में जिन भी लोगों का हाथ है उन्हें जल्द से जल्द पकड़ा जाए। उन्होंने कहा कि कानून व्यवस्था में किसी भी तरह की कोताही बर्दाश्त नहीं कि जाएगी। हमारा प्रदेश एक शांति प्रिय प्रदेश है और क़ानून व्यवस्था की स्थिति को यहाँ किसी भी दशा में बिगड़ने नहीं दिया जाएगा। उन्होने यह भी कहा कि इस बात की भी तह तक जाना चाहिए कि घटना कैसे घटित हुई? कहां कमी रह गई तथा इसके लिए कौन ज़िम्मेदार है? भविष्य में इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो यह भी सुनिश्चित किया जाये।

केदारखण्ड से मानसखण्ड झांकी का स्थापना दिवस पर किया गया प्रदर्शन

राज्य स्थापना दिवस के अवसर पर पुलिस लाईन देहरादून में आयोजित कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में भारत के राष्ट्रपति द्रोपदी मुर्मु ने प्रतिभाग किया। इस अवसर पर राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (से नि), मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी, मुख्य सचिव डॉ. एस.एस. संधु सहित जनप्रतिनिधि एवं अधिकारीगण मौजूद रहे। विभागों द्वारा प्रदर्शित झांकियों के माध्यम से राज्य के समग्र विकास एवं नैसर्गिक प्राकृतिक सौंदर्य, जैवविविधता, धार्मिक, अध्यात्म के साथ साहसिक पर्यटन गतिविधियों की जानकारी उपलब्ध कराई गई।
इस अवसर पर सूचना एवं लोक सम्पर्क विभाग द्वारा प्रदर्शित ‘‘केदारखण्ड से मानसखण्ड’’ झांकी के माध्यम से राज्य के प्रमुख धार्मिक स्थलों, समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, जैव विविधता, हिमाच्छादित उच्च पर्वत श्रृंखलाओं की समग्रता से परिचित कराने का प्रयास किया गया।
महानिदेशक सूचना बंशीधर तिवारी ने बताया कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के मार्गदर्शन के उपरान्त मानसखण्ड पर आधारित झांकी इस वर्ष गणतंत्र दिवस के अवसर पर प्रदर्शित की गई जिसे प्रथम स्थान प्राप्त हुआ। श्री केदारनाथ व श्री बदरीनाथ की तर्ज पर कुमाऊ के पौराणिक मंदिरों के लिए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देश पर मानसखण्ड मंदिर माला मिशन योजना पर काम किया जा रहा है। जिसमें इन प्रमुख मंदिरों का विकास होना है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री धामी के विजन के अनुसार पहले चरण में जागेश्वर महादेव के साथ करीब 2 दर्जन से अधिक मंदिरों को इसमें शामिल किया गया है।
महानिदेशक सूचना ने कहा कि सदियों से उत्तराखण्ड की देश-दुनिया में देवभूमि के रूप में अपनी विशिष्ट पहचान रही है। गढ़वाल क्षेत्र के बदरीनाथ, केदारनाथ, गंगोत्री यमुनोत्री के साथ अन्य मंदिरों का वर्णन जहां केदारखण्ड में वर्णित है वहीं मानसखण्ड के अंतर्गत कुमाऊं क्षेत्र के जागेश्वर बागेश्वर सहित अन्य मंदिर समूह राज्य को देवभूमि बनाते है। इसके साथ ही हिमालय की चोटियों में स्थित ऊं पर्वत आदि कैलाश पार्वती कुण्ड इसकी दिव्यता को विशिष्ट पहचान दिलाते है। इसके अतिरिक्त कॉर्बेट नेशनल पार्क, राजाजी नेशनल पार्क सहित अन्य अभयारण्य समृद्ध जैव विविधता से भी परिचित कराते है। इन विषयों को झांकी में शामिल किये जाने का प्रयास किया गया है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार द्वारा विश्व प्रसिद्ध चारधाम की तर्ज पर कुमाऊं में मानसखण्ड मंदिर माला परियोजना प्रारंभ की गयी है। इसके तहत जागेश्वर धाम का मास्टर प्लान तैयार किया गया है। इस परियोजना के तहत कुँमाऊ मण्डल के महत्वपूर्ण पौराणिक/ऐतिहासिक स्थलों को सर्किट से परस्पर जोड़कर लोकप्रियता प्रदान की जायेगी ताकि देश-विदेश से तीर्थयात्री/पर्यटकों को यहाँ आने हेतु आकर्षित किया जा सके और उनकी यात्रा सुगम बनायी जा सके।
विभाग द्वारा प्रस्तुत झांकी ‘‘केदारखण्ड से मानसखण्ड’’ की परिकल्पना एवं प्रस्तुतीकरण संयुक्त निदेशक कलम सिंह चौहान के नेतृत्व में किया गया। प्रस्तुत की गई झांकी को काफी सराहना भी मिली।

राज्य स्थापना दिवस पर शहीदों को सीएम ने किया नमन

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने गुरुवार को राज्य स्थापना दिवस के अवसर पर शहीद स्थल कचहरी परिसर देहरादून में उत्तराखंड राज्य आन्दोलनकारी शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित की।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि राज्य आंदोलनकारियों के कठिन परिश्रम, प्रयासों, दृढ़ इच्छाशक्ति, संकल्प से ही उत्तराखण्ड राज्य का निर्माण हुआ। उन्होंने कहा राज्य सरकार शहीद आंदोलनकारियों के सपनों के अनुरूप उत्तराखंड के विकास हेतु प्रतिबद्ध है।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में राज्य सरकार निरंतर विकास के पथ पर अग्रसर है। उन्होंने कहा उत्तराखंड को विकल्प रहित संकल्प के मूल उद्देश्य के साथ सर्वश्रेष्ठ राज्य बनाने के लिए राज्य सरकार संकल्पबद्ध है।
इस दौरान भाजपा प्रदेश अध्यक्ष महेन्द्र भट्ट, विधायक खजान दास, राज्य आंदोलनकारी एवं अन्य लोग मौजूद रहे।

राजधानी में अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे की नितांत आवश्यकता-मुख्य सचिव

मुख्य सचिव डॉ. एस. एस. संधु ने बुधवार को सचिवालय में प्रदेश में एयर कनेक्टिविटी को बढ़ाये जाने के साथ ही हैलीपैड्स और हेलीपोर्ट्स के निर्माण की प्रगति की समीक्षा की। मुख्य सचिव ने अधिकारियों को पूरे प्रदेश में अधिक से अधिक हेलीपैड बनाए जाने के निर्देश देते हुए कहा कि इनसे प्रदेश के दूरस्थ क्षेत्रों को आपातकालीन परिस्थितियों में बहुत मदद मिलेगी।
मुख्य सचिव ने कहा कि प्रदेश में अंतरराष्ट्रीय निवेश को बढ़ाने के लिए राजधानी में अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे की नितांत आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि जौलीग्रांट एयरपोर्ट को अंतरराष्ट्रीय बनाए जाने हेतु तेज़ी से प्रयास किए जाएं। एयरपोर्ट अथॉरिटी द्वारा यदि दिलचस्पी नहीं दिखाई जाती है तो राज्य सरकार को अपने स्तर से भी जौलीग्रांट एयरपोर्ट को अंतरराष्ट्रीय बनाया जाएगा।
मुख्य सचिव ने कहा कि इन सभी हेलीपैड्स और हेलीपोर्ट्स को बनाये जाने हेतु डेडिकेटेड टीम लगाई जाए ताकि इन प्रोजैक्ट्स पर प्रतिदिन कार्य हो साथ ही मॉनिटरिंग भी हो सके। उन्होंने कहा कि मसूरी, ऋषिकेश, हरिद्वार और पर्यटन स्थलों पर तेजी से कार्य किया जाए। उन्होंने आईडीपीएल भूमि पर भी एक हैलीपैड तैयार किए जाने के निर्देश दिये।
इस अवसर पर सचिव ी सचिन कुर्वे एवं अपर सचिव सी. रविशंकर सहित अन्य उच्चाधिकारी उपस्थित थे।

सेतु फाउंडेशन ने वैदिक गणित से प्रयोग से भारत की सनातनी संस्कृति को किया पुनर्जीवित

सेतु फाउंडेशन के द्वारा भारत की सनातनी धरोहर वेदों में उल्लेखित वैदिक गणित का वर्तमान पीढी के मध्य प्रचार एवं संरक्षण के उद्देश्य से शैक्षिक सत्रों का शुभारंभ किया गया। इस कार्यक्रम का शुभारंभ पंख स्कूल ऋषिकेश में सात दिवसीय कार्यक्रम के प्रथम सत्र के आयोजन से किया गया।
संस्था से संबंधित स्वैच्छिक सेवी वैदिक गणित के विशेषज्ञ पी. राजगोपालन अय्यर, सेवानिवृत्त आई टी. एस. अधिकारी, भारत सरकार का कहना है कि इस विधा का प्रयोग आज भी विज्ञान से संबंधित कई प्रयोगों में किया जा रहा है। इसके माध्यम से विधार्थियों बोर्ड की परीक्षाओं में एवं अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं में ससमय प्रश्नों को हल कर अच्छा परिणाम हासिल कर सकते हैं किंतु प्रचार के अभाव में वैदिक गणित सामान्य विधार्थियों तक अपनी पहुँच नहीं बना पाई हैं।
संस्था सचिव सरिता भट्ट ने कार्यक्रम की जानकारी देते हुए कहा के प्रतिभागियों के मध्य वैदिक गणित की प्रारंभिक ज्ञान के विस्तार हेतु 7 दिवसीय कार्यक्रम रखा गया हैं जिसमें भिन्न-2 सत्रों में अथर्व वेद में उल्लेखित वैदिक गणित के विभिन्न सूत्रों का परिचय व अभ्यास कराया जायेगा। अय्यर ने बताया कि प्रतिभागियों संग गणितीय ध्यान योग के अभ्यास सत्रों के माध्यम से प्रतिभागियों के परीक्षाओं एवं अध्ययन के दौरान ध्यान केंद्रीकरण में सुधार हेतु अभ्यास भी करवाया जायेगा जायेगा।
प्रथम दिवसीय कार्यक्रम में संस्था के संस्थापक श्याम प्रकाश रतूड़ी, संस्था संस्थापक एवं सचिव सरिता भट्ट, पंख स्कूल की फाउंडर अलंकृता बनर्जी, प्राधानाध्यपिका स्वाति माही, स्कूल अध्यापिका तानिया शर्मा एवं स्वेता ओबराय संग स्कूल के 80 बच्चों ने प्रतिभाग किया।

5265 किलोवॉट के पांच प्लांट को मंजूरी मिली, हरित ऊर्जा की ओर बढ़ते राज्य के कदम

राज्य में हरित ऊर्जा को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से प्रारंभ की गई मुख्यमंत्री सौर स्वरोजगार योजना में 5265 किलोवॉट क्षमता के पांच सोलर पॉवर प्लांट को मंजूरी प्रदान की गई है। राज्य में हरित ऊर्जा को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से ये योजना चलाई जा रही है।
राज्य में सौर ऊर्जा को बढ़ावा देने के लिए राज्य सरकार निरंतर प्रयासरत है। मुख्यमंत्री सौर स्वरोजगार योजना का इसके अंतर्गत संचालन किया जा रहा है। इसी क्रम में शासन द्वारा अधिसूचित उत्तराखंड राज्य सौर नीति-2023 के अंतर्गत टाइप-टू श्रेणी में उरेडा द्वारा आवेदन के लिए 20 जुलाई 2023 को प्रस्ताव आमंत्रित किये गए थे। ऊर्जा एवं वैकल्पिक ऊर्जा सचिव आर मीनाक्षी सुंदरम ने जानकारी दी है कि शासन स्तर पर उनकी अध्यक्षता में गठित राज्य स्तरीय अनुवीक्षण समिति द्वारा पांच प्रस्तावों को मंजूरी दी गई है। इनकी कुल क्षमता 5265 किलोवॉट है। उन्होंने बताया कि इन परियोजनाओं से राज्य में सौर ऊर्जा के क्षेत्र में लगभग 24 करोड़ का निवेश होगा, साथ ही हरित ऊर्जा को प्रोत्साहन मिलेगा। उन्होंने बताया कि राज्य में हरित ऊर्जा को बढ़ावा देने के लिए मुख्यमंत्री सौर स्वरोजगार योजना के साथ ही उत्तराखंड पॉवर कॉर्पाेरेशन लिमिटेड के घरेलू उपभोक्ताओं के लिए रूफटॉप सोलर पावर प्लांट की स्थापना की जाती है जिस पर केंद्र के अलावा राज्य सरकार द्वारा भी अतिरिक्त सब्सिडी प्रदान की जाती है।