श्री भरत मंदिर में आयोजित भागवत कथा का सप्तम, लीला पुरूषोत्तम का हुआ वर्णन

ब्रह्मलीन पूज्य महंत अशोक प्रपन्नाचार्य जी महाराज की पुण्य स्मृति मे आयोजित नौ दिवसीय श्रीमद् भागवत कथा के सप्तम दिवस गोपियों के वियोग की मार्मिक कथा का वर्णन किया।

कथा व्यास डा. राम कमल दास वेदांती ने कहा कि श्रीमद्भागवत में दशम स्कंध में गोपी गीत आता है। ये गोपी गीत भगवान कृष्ण को साक्षात् पाने का मन्त्र है। भगवान कृष्ण को पाने के जितने भी तरीके हैं या होंगे उनमे से एक गोपी गीत है। इस गोपी गीत में उन्नीस श्लोक हैं। जब भगवान शरद पूर्णिमा की रात में रास लीला का प्रारम्भ करते है तो कुछ समय बाद गोपियों को मान हो जाता है कि इस जगत में हमारा भाग्य ही सबसे श्रेष्ठ है भगवान उनके मन की बात समझकर बीच रास से अंतर्ध्यान हो जाते है,व्यक्ति केवल दो ही जगह जा सकता है, एक है संसार और दूसरा है आध्यात्म या भगवान।

उन्होंने कहा कि जैसे ही भगवान से हटकर गोपियों का मन अपने ही भाग्य पर चला गया यहाँ भगवान बता रहे है कि जैसे ही भक्त मुझसे मन हटाता है वैसे ही मै चला जाता हूँ।

सप्तम दिवस की पावन पवित्र कथा मे उत्तराखंड सरकार मे कैबिनेट मंत्री सुबोध उनियाल, पूज्य गुरु मां आनंदमई, श्री भरत मंदिर के महंत वत्सल प्रपन्नाचार्य, हर्ष वर्धन शर्मा, वरुण शर्मा, ओंकारानंद आश्रम के परमाध्यक्ष स्वामी विशेश्वरनंद महाराज, पूर्व कैबिनेट मंत्री शूरवीर सिंह सजवान, मधुसूधन शर्मा, रवि शास्त्री आदि उपस्थित थे।

श्री भरत मंदिर में श्रीमद् भागवत कथा के षष्ठ दिवस पर बाल लीलाओं का हुआ वर्णन

ब्रह्मलीन पूज्य महंत अशोक प्रपन्नाचार्य जी महाराज की पुण्य स्मृति मे आयोजित नौ दिवसीय श्रीमद् भागवत कथा के पष्ठ दिवस श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं का वर्णन हुआ।

कथा व्यास डा. राम कमल दास वेदांती ने कहा कि भगवान कृष्ण ने सबसे पहले पूतना का उद्धार किया था। कृष्ण जन्म पर नंदबाबा के घर खुशी मे जब उत्सव मनाया जाने लगा और नंद बाबा को कंस राजा के पास कर देने जाने मे देरी हो गई। उन्होंने राजा के पास पहुंच कर निवेदन किया की महाराज मेरे घर पुत्र ने जन्म लिया है। इसलिए आने मे देरी हो गई। राजा कंस ने पुत्र जन्म की खबर पर पुत्र को चिरंजीव होने का वचन बोला। उसे पता नहीं था जिसे तू चिरंजीव बोल रहा है वो ही तेरा काल है। उधर भगवान मन ही मन मुस्करा रहे है और सोच रहे है की राम जन्म मे ताड़का कृष्ण जन्म मे पूतना से पाला पड़ा है। माता यशोदा का दुलारा अपनी बाल लीलाओं से आनन्द विभोर होते है और अपनी लीलाओं के माध्यम से ही पूतना का वध करते है। कृष्णजी की बाल लीलाओं का वर्णन किया। उन्होंने कहा कि व्यक्ति को हमेशा धर्म के मार्ग पर चलकर समाज सेवा में लोगों को आगे आना चाहिए। मानव जब इस संसार में पैदा लेता है तो चार व्याधि उत्पन्न होते हैं। रोग, शोक, वृद्धापन और मौत मानव इन्हीं चार व्याधियों से धीर कर इस मायारूपी संसार से विदा लेता है।

सांसारिक बंधन में जितना बंधोगे उतना ही पाप के नजदीक पहुंचेगा। इसलिए सांसारिक बंधन से मुक्त होकर परमात्मा की शरण में जाओ तभी जीवन रूपी नैय्या पार होगी। आज के दौर में परेशानी और अविश्वास बढ़ता जा रहा है। इससे समाज में खींचतान, स्वार्थ, लोभ, दुख. पतन, विकृतियों का अम्बार लगा हुआ है। ऐसे में समाज को युग के अनुरूप दिशा चिंतन, व्यवहार, परमार्थ के लिए हृदय में परिवर्तन के लिए श्रीमद भागवत कथा पुराण का आयोजन किया जा रहा है।

षष्ठ दिवस की पावन पवित्र कथा मे श्री भरत मंदिर के महंत वत्सल प्रपन्नाचार्य, हर्ष वर्धन शर्मा, वरुण शर्मा, रोशन धस्माना, मधुसूधन शर्मा, रवि शास्त्री आदि उपस्थित रहे।

श्री भरत मंदिर में भागवत कथा का पंचम दिन

ब्रह्मलीन पूज्य महंत अशोक प्रपन्नाचार्य जी महाराज की पुण्य स्मृति मे आयोजित नौ दिवसीय श्रीमद् भागवत कथा के पंचम दिवस पर कथा व्यास डा. राम कमल दास वेदांती ने कृष्ण जन्म की कथा सुनाई।

श्रीमद्भागवत कथा के पंचम दिवस के प्रसंग का वृतांत सुनाते हुए बताया कि वामन अवतार में जहां भक्त के धैर्य का परिचय का संदेश है वहीं समर्पण भाव की पवित्रता भी है। कथा व्यास पूज्य वेदांती महाराज ने कथा का वाचन करते हुए कहा कि भगवान भक्तों के वश में हैं। भगवान हमेशा अपने भक्तों का ध्यान रखते हैं। उन्होंने कहा कि जब जब धरती पर पाप अनाचार बढ़ता है, तब.तब भगवान श्रीहरि धरा पर किसी न किसी रूप में अवतार लेकर भक्तों के संकट को हरते हैं। उन्होंने कहा कि जब कंस के पापों का घड़ा भर गया तब भगवान श्री कृष्ण ने जन्म लेकर कंस का अंत किया और लोगों को पापी राजा से मुक्ति दिलाई। कथा के दौरान कथा व्यास ने अनेक भक्तिपूर्ण भजन प्रस्तुत किए। जिनमें नंद घर जन्में कन्हैया कान्हा अब तो ले लो अवतार बृज में में तो नंद भवन में जाऊंगी, यशोदा जायो ललना, श्याम तेरी वंशी पुकारे राधा राम भजनों को सुन श्रोता मंत्रमुग्ध हो हो गए। पूज्य महाराज ने कहा आज व्यक्ति मोह माया के चक्कर में फंसकर अनीति पूर्ण तरीके से पैसा कमाने में जुटा है। जिसका परिणाम अंतत उसे भोगना पड़ता है।

मानव मानव की तरह नहीं जी रहा है। श्रीमद् भागवत जीवन जीने और मरने की कलां सिखाती है। उन्होंने बताया कि कलयुग में दुख के तीन कारण हैं, समय, कर्म और स्वभाव। उन्होंने कहा कि स्वभाव से जो दुखी है वो कभी सुखी नहीं हो सकता। जिस घर में अनीति से धन कमाया जाता है उस परिवार में कभी एकता नहीं रहती। वहां हमेशा बैर बना रहता है।

पंचम दिवस की पावन पवित्र कथा मे श्री भरत मंदिर के महंत वत्सल प्रपन्नाचार्य, हर्ष वर्धन शर्मा, वरुण शर्मा, पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत, विनय उनियाल, कथा का मुख्य आकर्षण कृष्ण जन्म रहा जिसमें वासुदेव की भूमिका महंत रवि शास्त्री ने निभाई।

सरस्वती विद्या मंदिर में धूमधाम से मनाया गया वार्षिकोत्सव

आवास विकास विद्या मंदिर इंटर कॉलेज पार्क में आज वार्षिकोत्सव एवम प्रतिभा सम्मान समारोह कार्यक्रम का आयोजन बड़े हर्षाेल्लास के साथ मनाया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ सांसद डॉ. रमेश पोखरियाल निशंक अपर निदेशक एससीईआरटी डॉ. आर डी शर्मा, कैबिनेट मंत्री डॉ. प्रेमचन्द अग्रवाल और संभाग निरीक्षक गढ़वाल क्षेत्र नत्थीलाल बंगवाल तथा प्रधानाचार्य राजेंद्र प्रसाद पांडे ने मां सरस्वती के चित्र के समक्ष दीप प्रज्वलित कर किया।
वार्षिकोत्सव कार्यक्रम में छात्र छात्राओं द्वारा रंगारंग कार्यक्रम की प्रस्तुति दी गई। जिसमे सरस्वती वन्दना, स्वागत गीत, गुजराती, पंजाबी, हिमाचली, कुमावनी, राजस्थानी, गढ़वाली, गढ़वाली जागर, योग, आसामी, अंग्रेजी देशभक्ति गीत, नेपाली नृत्य, कवाली, नाटक छात्र-छात्राओं द्वारा कार्यक्रम प्रस्तुत कर सभी दर्शकों का मनमोह लिया।
वहीं, कार्यक्रम में विद्यालय की ओर से प्रतिभा सम्मान समारोह के अंतर्गत 2021- 22 की वरीयता सूची में आने वाले छात्र छात्राओ को स्मृति चिह्न व हाईस्कूल में 13 वे स्थान पर हरीश बिजल्वान को 10,000 रुपए व हर्षित बर्थवाल को 15वा स्थान इण्टर में लाने पर 9,000 रुपए एवम मुस्कान टंडन को हाईस्कूल में 24 वे स्थान में आने पर 8,000 रुपए के चौक दिए गए।
साथ ही स्व. रामचंद्र स्मृति पुरस्कार अशोक पांडे द्वारा 551 की नकद धनराशि हरीश बिजल्वान को दी गई। जो प्रत्येक वर्ष विद्यालय में हाईस्कूल में प्रथम आने पर दी जाती है।
कार्यक्रम में विद्यालय परिवार की ओर से सभी अतिथियों को बेच अलंकृत कर व स्मृति चिह्न देकर उनको सम्मनानित किया। कार्यक्रम में रमेश पोखरियाल निशंक ने पांच लाख शिशु मंदिर तथा पांच लाख विद्या मंदिर को देने की घोषणा की।
वहीं कार्यक्रम मे प्रेमचंद अग्रवाल ने पांच लाख विद्या मंदिर को अपनी विधायक निधि से देने की घोषणा की।
कार्यक्रम में रमेश पोखरियाल निशंक ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में राष्ट्रीय शिक्षा नीति हमारे द्वारा लाई गई है उसके आधार पर हम राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 का मुख्य उद्देश्य एक ऐसी शिक्षा प्रणाली को तैयार करना है जो भारत के सभी बच्चों को लाभान्वित करे। इस का लक्ष्य भारत को एक वैश्विक ज्ञान महाशक्ति बनाना है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 का उद्देश्य उच्च शिक्षण संस्थानों की नई गुणवत्ता को स्थापित करना आसान बनाना है जो वैश्विक मानकों के अनुरूप होगा।
कार्यक्रम में प्रेमचंद अग्रवाल ने कहा कि आवास विकास का विद्या मंदिर अनेकों संस्कारों से युक्त है यहां की शिक्षा प्रणाली सदैव प्रशंसनीय रही है जिसके कारण प्रत्येक वर्ष हाईस्कूल व इंटरमीडिएट में छात्र-छात्राएं वरीयता सूची में अपना स्थान बनाते हैं, यहां के प्रधानाचार्य विद्यालय परिवार व प्रबंध समिति सदस्य बधाई के पात्र हैं।
इस अवसर पर विद्यालय अध्यक्ष अनिल कुमार मित्तल, व्यवस्थापक सुशील अग्रवाल, नवल कपूर, रविन्द्र राणा, अशोक पासवान, पार्षद गुरविंद्र, पार्षद विपिन पंत, सतीश चौहान, कर्णपाल बिष्ट, रामगोपाल रतूड़ी, नरेंद्र खुराना, रीना पाटिल, सुहानी सेमवाल, पूनम अनेजा, नन्द किशोर भट्ट, हरिचरण, रजनी रावत, गुरुप्रसाद उनियाल, अनिता रयाल, दिनेश सती आदि उपस्थित रहे।

श्री भरत मंदिर में आयोजित भागवत कथा का चतुर्थ दिन, वामन अवतार की कथा का हुआ वर्णन

ब्रह्मलीन पूज्य महंत अशोक प्रपन्नाचार्य जी महाराज की पुण्य स्मृति मे आयोजित नौ दिवसीय श्रीमद् भागवत कथा के चतुर्थ दिवस पर भगवान के वामन अवतार की कथा का श्रवण कराया गया।

कथा व्यास डा. राम कमल दास वेदांती जी ने बताया कि वामन अवतार भगवान विष्णु के दशावतारो में पांचवा अवतार और मानव रूप में अवतार था। जिसमें भगवान विष्णु ने एक वामन के रूप में इंद्र की रक्षा के लिए धरती पर अवतार लिया। वामन अवतार की कहानी असुर राजा महाबली से प्रारम्भ होती है। महाबली प्रहलाद का पौत्र और विरोचना का पुत्र था। महाबली एक महान शासक था जिसे उसकी प्रजा बहुत स्नेह करती थी। उसके राज्य में प्रजा बहुत खुश और समृद्ध थी। उसको उसके पितामह प्रहलाद और गुरु शुक्राचार्य ने वेदों का ज्ञान दिया था।

उन्होंने बताया कि समुद्रमंथन के दौरान जब देवता अमृत ले जा रहे थे। तब इंद्रदेव ने बली को मार दिया था जिसको शुक्राचार्य ने पुनः अपन मन्त्रो से जीवित कर दिया था। महाबली ने भगवान ब्रह्मा को प्रसन्न करने के लिए तपस्या की थी। जिसके फलस्वरूप भगवान ब्रह्मा ने प्रकट होकर वरदान मांगने को कहा। बली भगवान ब्रह्मा के आगे नतमस्तक होकर बोला “प्रभु, मै इस संसार को दिखाना चाहता हूँ कि असुर अच्छे भी होते हैं। मुझे इंद्र के बराबर शक्ति चाहिए और मुझे युद्ध में कोई पराजित ना कर सके।ष् भगवान ब्रह्मा ने इन शक्तियों के लिए उसे उपयुक्त मानकर बिना प्रश्न किये उसे वरदान दे दिया।
उन्होंने बताया कि शुक्राचार्य एक अच्छे गुरु और रणनीतिकार थे जिनकी मदद से बली ने तीनो लोकों पर विजय प्राप्त कर ली। बली ने इंद्रदेव को पराजित कर इंद्रलोक पर कब्जा कर लिया। एक दिन गुरु शुक्राचार्य ने बली से कहा अगर तुम सदैव के लिए तीनो लोकों के स्वामी रहना चाहते हो तो तुम्हारे जैसे राजा को अश्वमेध यज्ञ अवश्य करना चाहिए।
उन्होंने बताया कि बली अपने गुरु की आज्ञा मानते हुए यज्ञ की तैयारी में लग गया। बली एक उदार राजा था जिसे सारी प्रजा पसंद करती थी। इंद्र को ऐसा महसूस होने लगा कि बली अगर ऐसे ही प्रजापालक रहेगा तो शीघ्र सारे देवता भी बली की तरफ हो जायेंगे। इंद्रदेव देवमाता अदिति के पास सहायता के लिए गए और उन्हें सारी बात बताई। देवमाता ने बिष्णु भगवान से वरदान माँगा कि वे उनके पुत्र के रूप में धरती पर जन्म लेकर बली का विनाश करें। जल्द ही अदिति और ऋषि कश्यप के यहाँ एक सुंदर बौने पुत्र ने जन्म लिया। पांच वर्ष का होते ही वामन का जनेऊ समारोह आयोजित कर उसे गुरुकुल भेज दिया। इस दौरान महाबली ने 100 में से 99 अश्वमेध यज्ञ पुरे कर लिए थे। अंतिम अश्वमेध यज्ञ समाप्त होने ही वाला था कि तभी दरबार में दिव्य बालक वामन पहुँच गया। महाबली ने कहा कि आज वो किसी भी व्यक्ति को कोई भी दक्षिणा दे सकता है। तभी गुरु शुक्राचार्य महाबली को महल के भीतर ले गये और उसे बताया कि ये बालक ओर कोई नहीं स्वयं भगवान विष्णु हैं वो इंद्रदेव के कहने पर यहाँ आए हैं और अगर तुमने इन्हें जो भी मांगने को कहा तो तुम सब कुछ खो दोगे।
उन्होंने बताया कि महाबली अपनी बात पर अटल रहे और कहा मुझे वैभव खोने का भय नहीं है बल्कि अपने प्रभु को खोने का है इसलिए मै उनकी इच्छा पूरी करूंगा। महाबली उस बालक के पास गया और स्नेह से कहा “आप अपनी इच्छा बताइये”। उस बालक ने महाबली की और शांत स्वभाव से देखा और कहा “मुझे केवल तीन पग जमीन चाहिए जिसे मैं अपने पैरों से नाप सकूं”। महाबली ने हँसते हुए कहा “केवल तीन पग जमीन चाहिए, मैं तुमको दूँगा। जैसे ही महाबली ने अपने मुँह से ये शब्द निकाले वामन का आकार धीरे धीरे बढ़ता गया। वो बालक इतना बढ़ा हो गया कि बाली केवल उसके पैरों को देख सकता था। वामन आकार में इतना बढ़ा था कि धरती को उसने अपने एक पग में माप लिया।
दुसरे पग में उस दिव्य बालक ने पूरा आकाश नाप लिया। अब उस बालक ने महाबली को बुलाया और कहा मैंने अपने दो पगों में धरती और आकाश को नाप लिया है। अब मुझे अपना तीसरा कदम रखने के लिए कोई जगह नहीं बची, तुम बताओ मैं अपना तीसरा कदम कहाँ रखूँ।
महाबली ने उस बालक से कहा “प्रभु, मैं वचन तोड़ने वालों में से नहीं हूँ आप तीसरा कदम मेरे शीश पर रखिये। भगवान विष्णु ने भी मुस्कुराते हुए अपना तीसरा कदम महाबली के सिर पर रख दिया। वामन के तीसरे कदम की शक्ति से महाबली पाताल लोक में चला गया। अब महाबली का तीनो लोकों से वैभव समाप्त हो गया और सदैव पाताल लोक में रह गया। इंद्रदेव और अन्य देवताओं ने भगवान विष्णु के इस अवतार की प्रशंशा की और अपना साम्राज्य दिलाने के लिए धन्यवाद दिया।
चतुर्थ दिवस की पावन पवित्र कथा मे श्री भरत मंदिर में पूर्व मुख्यमंत्री माननीय हरीश रावत जी ने व्यास जी महाराज का आशीर्वाद लिया श्री भरत मंदिर के महंत वत्सल प्रपन्नाचार्य जी महाराज ने उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत जी को प्रसाद और तुलसी का पौधा भेंट किया और इस अवसर पर श्री भरत मंदिर के महंत वत्सल प्रपन्नाचाय, हर्ष वर्धन शर्मा, वरुण शर्मा, मधु सूदन शर्मा, शेखर शर्मा, दीप शर्मा , राजीव मोहन अग्रवाल, राजपाल खरोला, दीप शर्मा, महन्त रवि शास्त्री, मेजर गोविंद सिंह रावत आदि उपस्थित थे।

श्री भरत में भागवत कथा का तृतीय दिन, प्रह्लाद की कथा का हुआ श्रवण

ब्रह्मलीन पूज्य महंत अशोक प्रपन्नाचार्य जी महाराज की पुण्य स्मृति में आयोजित नौ दिवसीय श्रीमदभागवत कथा के तृतीय दिन भक्त प्रह्लाद की कथा का वर्णन किया गया। कथा व्यास डा रामकमल दास वेदांती जी महाराज ने कहा कि हिरणकश्यप नामक दैत्य ने घोर तप किया, तप से प्रसन्न होकर ब्रह्माजी प्रकट हुए व कहा कि मांगों जो मांगना है। यह सुनकर हिरनयाक्ष ने अपनी आंखें खोली और ब्रह्माजी को अपने समक्ष खड़ा देखकर कहा-प्रभु मुझे केवल यही वर चाहिए कि मैं न दिन में मरूं, न रात को, न अंदर, न बाहर, न कोई हथियार काट सके, न आग जला सके, न ही मैं पानी में डूबकर मरूं, सदैव जीवित रहूं। उन्होंने उसे वरदान दिया।

उन्होंने बताया कि हिरणकश्यप के पुत्र प्रह्लाद भगवान विष्णु के परम भक्त थे। हिरणकश्यप भगवान विष्णु को शत्रु मानते थे। उन्होंने अपने पुत्र को मारने के लिए अनेक छल किए लेकिन कामयाब नहीं हुआ, जब प्रहलाद की हट के सामने हिरण्यकश्यपु हार गया तो उसने प्रहलाद को मारने के लिए जैसे ही तलवार उठाया थी कि खंभा फट गया उस खंभे में से विष्णु भगवान नरसिंह अवतार का रूप धारण करके जिसका मुख शेर का व धड़ मनुष्य का था। प्रगट हुए भगवान नरसिंह अत्याचारी दैत्य हिरनयाक्ष को पकड़ कर उदर चीरकर बध कर दिया ।

पूज्य महाराज ने ध्रुव चरित्र पर अपने व्याख्यान में कहा कि विष्णु पुराण में भक्त ध्रुव की कथा आती है, जिसने इस बात को सिद्ध किया कि कैसे एक छोटा बालक भी दृढ़ निश्चय और कठोर तपस्या के बल पर भगवान को धरती पर आने को विवश कर सकता है।

राजा उत्तानपाद की दो पत्नी थी सुनीति पहली पत्नी थी जिसका पुत्र ध्रुव था। सुनीति बड़ी रानी थी लेकिन राजा सुनीति के बजाय सुरुचि और उसके पुत्र को ज्यादा प्रेम करता था। एक बार राजा अपने पुत्र ध्रुव को गोद में लेकर बैठे थे तभी वहां सुरुचि आ गई। अपनी सौत के पुत्र ध्रुव को गोद में बैठा देखकर उसके मन में जलन होने लगी। तब उसने ध्रुव को गोद में से उतारकर अपने पुत्र को गोद में बैठाते हुए कहा, राजा की गोद में वही बालक बैठ सकता है और राजसिंहासन का भी अधिकारी हो सकता है जो मेरे गर्भ से जन्मा हो। तू मेरे गर्भ से नहीं जन्मा है। यदि तेरी इच्छा राज सिंहासन प्राप्त करने की है तो भगवान नारायण का भजन कर। उनकी कृपा से जब तू मेरे गर्भ से उत्पन्न होगा तभी सिंहासन प्राप्त कर पाएगा।

पांच साल का अबोध बालक ध्रुव सहमकर रोते हुए अपनी मां सु‍नीति के पास गया और उसने अपनी मां से उसके साथ हुए व्यवहार के बारे में कहा। मां ने कहा, बेटा ध्रुव तेरी सौतेली से तेरे पिता अधिक प्रेम करते हैं। इसी कारण वे हम दोनों से दूर हो गए हैं। अब हमें उनका सहरा नहीं रह गया। हमारे सहारा तो जगतपति नारायण ही है। नारायण के अतिरिक्त अब हमारे दुख को दूर करने वाला कोई दूसरा नहीं बचा।

मां की बातों से प्रभावित होकर 5 वर्ष का बालक वन गमन की तरफ चल पड़ा अनेक कष्टों को सहते हुए भूखे प्यासे तप करते हुए भगवान नारायण का ध्यान करते हुए उनके दर्शन कर पाया और संसार में प्रतिष्ठित हुआ जो आज भी आकाश मंडल के उत्तर दिशा में अपना महत्वपूर्ण स्थान रखता है।
इस मौके पर श्री भरत मंदिर के महंत वत्सल प्रपन्नाचार्य जी महाराज, हर्षवर्धन शर्मा, वरुण शर्मा, हाईकोर्ट के सेवा निवृत्त न्यायाधीश वर्तमान में मानवाधिकार आयोग के अध्यक्ष वीएस बिष्ट, मधुसुधन शर्मा, रविशास्त्री, दीप शर्मा, मेजर गोविन्द सिंह रावत आदि भक्तगण उपस्थित रहे।

श्री भरत में आयोजित भागवत कथा का दूसरा दिन, सीएम ने की शिरकत

ब्रह्मलीन पूज्य महंत अशोक प्रपन्नाचार्य जी महाराज की पुण्य स्मृति में आयोजित श्रीमदभागवत कथा के द्वितीय दिवस ध्रुव चरित्र का मार्मिक वर्णन प्रस्तुत हुआ। इस मौके पर कथा मर्मज्ञ अंतर्राष्ट्रीय संत पूज्य डा रामकमल दास वेदांती जी महाराज ने श्रोताओं को बताया कि नारद शिष्य ध्रुव ने अटल तपस्या से भगवान का मनमोह लिया। जिससे अपना और अपने परिवार का नाम अक्षय कर लिया। इस मौके पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी जी पहुंचे और भागवत कथा का श्रवण किया।

मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि भागवत ही भगवान है। भागवत भगवान का अक्षरावतार है। वक्ता का चरित्र स्वच्छ होना चाहिए, वहीं श्रोता भगवान के प्रति समर्पित होना चाहिए। वक्ता प्रेरणा का पुंज होना चाहिए। उन्होंने कहा कि भगवान जीव का उद्धार करते हैं।

सीएम धामी ने कहा कि उत्तराखंड की देवभूमि सदैव देवत्व के भाव की है जहां धर्म, संस्कृति और संस्कारों की गंगा निरंतर प्रवाहमान रहती है। उन्होंने कहा कि देश के यशस्वी प्रधानमंत्री आदरणीय नरेंद्र दामोदर दास मोदी जी का धर्म स्थानों के प्रति श्रेष्ठता का भाव है सम्पूर्ण देश और उत्तराखंड मे धर्म पीठों और मंदिरों के पुनर्निर्माण सौंदर्य के लिए प्रधानमंत्री कृत संकल्प लेकर उद्धार कर रहे हैं।
उन्होंने कहा कि इस प्रकार के पावन पुनीत धर्म कार्यों में कोई बुलाया नहीं जाता बल्कि जिस पर भगवान की कृपा होती है वही ऐसे पावन पवित्र अनुष्ठानों में आते हैं उन्हीं लोगों को यह सौभाग्य मिलता है जिनके पुण्य श्रेष्ठ होते है। इस मौके पर व्यास पीठ पर पूज्य संत डॉ राम कमल दास वेदांती जी का आशीर्वाद प्राप्त किया।

इस अवसर पर परमार्थ निकेतन के परमाध्यक्ष स्वामी चिदानंद सरस्वती, श्री भरत मंदिर के महंत वत्सल प्रपन्नाचार्य जी महाराज, श्री हर्षवर्धन शर्मा, वरुण शर्मा, विजय बड़थ्वाल, विनय उनियाल, मधुसुधन शर्मा, महामंडलेश्वर रामेश्वर दास जी महाराज, महन्त रवि प्रपन्नाचार्य, महामंडलेश्वर विष्णु दास जी महाराज, परमानंद दास जी महाराज आदि उपस्थित थे।

श्री भरत मंदिर में श्रीमद् भागवत कथा का हुआ शुभारंभ

श्री भरत मंदिर में ब्रह्मलीन महंत अशोक प्रपन्नाचार्य जी की पुण्य स्मृति मे नौ दिवसीय श्रीमद् भागवत कथा का शुभारंभ कलश यात्रा के साथ प्रारंभ हुआ। व्यास पीठ पर काशी विश्वनाथ की पावन धरती से आए पूज्य संत डा रामकमलदास वेदांती जी महाराज के ने कथा का श्रवण कराया।

उन्होंने श्रीमद् भागवत कथा के महत्व बताते हुए कहा कि कथा की सार्थकता जब ही सिध्द होती है, जब इसे हम अपने जीवन में व्यवहार में धारण कर निरंतर हरि स्मरण करते हुए अपने जीवन को आनंदमय, मंगलमय बनाकर अपना आत्म कल्याण करें। अन्यथा यह कथा केवल मनोरंजन कानों के रस तक ही सीमित रह जाएगी। भागवत कथा से मन का शुद्धिकरण होता है। इससे संशय दूर होता है और शंाति व मुक्ति मिलती है। इसलिए सद्गुरु की पहचान कर उनका अनुकरण एवं निरंतर हरि स्मरण, भागवत कथा श्रवण करने की जरूरत है।

श्रीमद भागवत कथा श्रवण से जन्म जन्मांतर के विकार नष्ट होकर प्राणी मात्र का लौकिक व आध्यात्मिक विकास होता है। जहां अन्य युगों में धर्म लाभ एवं मोक्ष प्राप्ति के लिए कड़े प्रयास करने पड़ते हैं, कलियुग में कथा सुनने मात्र से व्यक्ति भवसागर से पार हो जाता है। सोया हुआ ज्ञान वैराग्य कथा श्रवण से जाग्रत हो जाता है। कथा कल्पवृक्ष के समान है, जिससे सभी इच्छाओं की पूर्ति की जा सकती है।

भागवत पुराण हिन्दुओं के अट्ठारह पुराणों में से एक है। इसे श्रीमद् भागवत या केवल भागवतम् भी कहते हैं। इसका मुख्य विषय भक्ति योग है, जिसमें श्रीकृष्ण को सभी देवों का देव या स्वयं भगवान के रूप में चित्रित किया गया है। इस पुराण में रस भाव की भक्ति का निरूपण भी किया गया है। भगवान की विभिन्न कथाओं का सार श्रीमद्भागवत मोक्ष दायिनी है। इसके श्रवण से परीक्षित को मोक्ष की प्राप्ति हुई और कलियुग में आज भी इसका प्रत्यक्ष प्रमाण देखने को मिलते हैं। श्रीमदभागवत कथा सुनने से प्राणी को मुक्ति प्राप्त होती है

सत्संग व कथा के माध्यम से मनुष्य भगवान की शरण में पहुंचता है, वरना वह इस संसार में आकर मोहमाया के चक्कर में पड़ जाता है, इसीलिए मनुष्य को समय निकालकर श्रीमद्भागवत कथा का श्रवण करना चाहिए। बच्चों को संस्कारवान बनाकर सत्संग कथा के लिए प्रेरित करें। भगवान श्रीकृष्ण की रासलीला के दर्शन करने के लिए भगवान शिवजी को गोपी का रूप धारण करना पड़ा। आज हमारे यहां भागवत रूपी रास चलता है, परंतु मनुष्य दर्शन करने को नहीं आते। वास्तव में भगवान की कथा के दर्शन हर किसी को प्राप्त नहीं होते। कलियुग में भागवत साक्षात श्रीहरि का रूप है। पावन हृदय से श्रीमद्भागवत कथा के श्रवण मात्र से ही प्राणी मात्र का कल्याण संभव है।

कथा के प्रथम दिवस पर श्री भरत मंदिर के महंत वत्सल प्रपन्नाचार्य जी महाराज, श्री हर्षवर्धन शर्मा, वरुण शर्मा जी, कैबिनेट मंत्री प्रेमचंद अग्रवाल, जयराम आश्रम के परमाध्यक्ष ब्रह्मस्वरूप ब्रह्मचारीजी महामंडलेश्वर स्वामी ललिता नंद जी महाराज, हरी चेतनानंद जी महाराज, महामंडलेश्वर ईश्वर दास जी महाराज, महामंडलेश्वर स्वामी दयाराम दास जी महाराज, महामंडलेश्वर अरुण दास जी, सतपाल ब्रह्मचारी जी आदि संत महात्मा की उपस्थिति में श्रीमद् भागवत कथा का शुभारंभ हुआ।

अभाविप उम्मीदवारों ने मंत्री डा. अग्रवाल से की भेंट, लिया आशीर्वाद

श्री देव सुमन विवि के ऋषिकेश कैंपस में होने वाले छात्रसंघ चुनाव के अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के उम्मीदवारो ने क्षेत्रीय विधायक व मंत्री डॉ प्रेमचन्द अग्रवाल से मुलाकात कर आशीर्वाद प्राप्त किया।

ऋषिकेश आवास में हुई मुलाकात में मंत्री डॉ अग्रवाल ने कहा कि अभाविप ऐसा संगठन है जिसमें राष्ट्रभाव, राष्ट्र के प्रति समर्पण की भावना निहित है। उन्होंने कहा कि यह संगठन ज्ञान, चरित्र और एकता का परिचय देता है।

डॉ अग्रवाल ने कहा कि अभाविप के प्रेरणास्रोत स्वामी विवेकानंद जी रहे हैं। उन्होंने अभाविप के उम्मीदवारों को छात्रसंघ चुनाव के लिए अग्रिम शुभकामनाएं दी।

इस मौके पर अध्यक्ष पर के उम्मीदवार ऋतिक पाठक, उपाध्यक्ष पद के उम्मीदवार केशव पोरवाल, कोषाध्यक्ष सिमरन अरोड़ा, विवि प्रतिनिधि आकाश उनियाल, जिला प्रमुख अभविप विवेक शर्मा, जिला संयोजक शुभम शर्मा, पूर्व अध्यक्ष संदीप शर्मा, सुमित पंवार आदि उपस्थित रहे।

क्षेत्र के विकास में धन की कमी नही आयेगी-अग्रवाल

ग्रामसभा चकजोगीवाला में क्षेत्रीय विधायक व कैबिनेट मंत्री डॉ प्रेमचंद अग्रवाल ने विकास कार्यों को गति देते हुए 10 लाख रुपए विधायक निधि से देने की घोषणा की। इस मौके पर मंत्री डॉ अग्रवाल ने राज्य सरकार की योजनाओं को जनता के सामने रखा।
मंत्री डॉ अग्रवाल ने कहा कि पिछले 15 वर्षों के कार्यकाल के दौरान अनेक विकास कार्य किये गए। उन्होंने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों की आज परिभाषा बदली है, अब ग्रामीण क्षेत्रों की स्थिति शहर जैसी है।
डॉ अग्रवाल ने कहा कि उन्हें चौथी बार जनता ने अपना भरपूर आशीर्वाद दिया। विकास कार्याे पर जनता ने मोहर लगाई है। कहा कि ऋषिकेश के विकास के लिए वचनबद्ध हैं।
डॉ अग्रवाल ने कहा कि वह जनता के ऋणी है और अंतिम छोर तक बैठे हर व्यक्ति की जनसमस्या का निदान करना उनका कर्तव्य है। उन्होंने कहा कि जनता के लिए उन्होंने अपनी रिश्तेदारी त्याग दी है, यही कारण है कि मैं पहली प्राथमिकता अपनी विधानसभा को देता हूं। उन्होंने कहा कि हमारी सरकार में महिलाओं का सम्मान होता है, महिलाओं ने राज्य आंदोलन में अहम भूमिका निभाई, इसके चलते सरकार ने 30 प्रतिशत क्षेतिज महिला आरक्षण दिया है।
डॉ अग्रवाल ने कहा कि राज्य सरकार ने 2025 तक उत्तराखंड को अग्रणी राज्य बनाने का लक्ष्य रखा है, इसके लिए जनता को भी अपना सहयोग देना होगा। कहा कि सरकार सबका साथ, सबका विकास के सिद्धांत पर कार्य कर रही है।
डॉ अग्रवाल ने इस मौके पर 10 लाख रूपए विधायक निधि से ग्रामसभा चकजोगीवाला को देने की घोषणा की। उन्होंने कहा कि विकास का पहिया ऋषिकेश विधानसभा में सदैव अग्रसर रहा है और आगे भी रहेगा।
इस मौके पर पूर्व जिपंस देवेंद्र सिंह नेगी, बलविंदर सिंह, प्रधान भगवान सिंह मेहर, प्रधान सोबन सिंह कैंतुरा, बैसाख सिंह कैंतुरा, हुकुम रांगड़, निवर्तमान मण्डल अध्यक्ष गणेश रावत, महिला मोर्चा मण्डल अध्यक्ष समा पंवार, महामंत्री सुशीला नेगी, राहुल अग्रवाल, अनिता राणा, शैलेन्द्र रांगड़, कुलवीर बिष्ट, बीडीसी अमर खत्री, कैलाश रतूड़ी, उत्तम सिंह, राकेश पोखरियाल, भरत सिंह नेगी, मनोहर लाल सेमवाल, शांति प्रसाद जोशी, चंद्र सिंह, सोबन सिंह रावत, राजेन्द्र प्रसाद जोशी, सूरज मणि उनियाल, सुरेंद्र सिंह मेवाड़ी, रामेश्वर प्रसाद उनियाल, उत्तम सिंह जेठूरी, भरत सिंह नेगी, प्यार सिंह रावत, खुशहाल सिंह, लखन सिंह कैंतुरा, जसपाल सिंह रावत, कृपाल सिंह पंवार आदि सेकड़ो की संख्या में लोग उपस्थित रहे।