उत्तराखंड में खाद्य एवं रसद व्यवस्था की सतत निगरानी को अधिकारियों की हुई तैनाती

वैश्विक परिदृश्य में उत्पन्न वर्तमान परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए राज्य सरकार ने खाद्य एवं रसद आपूर्ति की स्थिति पर कड़ी निगरानी रखने के लिए महत्वपूर्ण कदम उठाया है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देश पर उत्तराखण्ड राज्य आपातकालीन परिचालन केन्द्र (SEOC), देहरादून में विभिन्न अधिकारियों एवं विशेषज्ञों की तैनाती तत्काल प्रभाव से अग्रिम आदेशों तक की गई है।

राज्य सरकार द्वारा जारी आदेश के अनुसार इन अधिकारियों और विशेषज्ञों की तैनाती का उद्देश्य प्रदेश में खाद्य एवं आवश्यक वस्तुओं की उपलब्धता, आपूर्ति व्यवस्था तथा वितरण प्रणाली की निरंतर निगरानी सुनिश्चित करना है। इसके साथ ही खाद्य एवं रसद से संबंधित सूचनाओं का नियमित संकलन, उनका विश्लेषण तथा विभिन्न विभागों के मध्य बेहतर समन्वय स्थापित करने पर भी विशेष ध्यान दिया जाएगा।

निर्धारित रोस्टर के अनुसार तैनात अधिकारी एवं विशेषज्ञ उत्तराखण्ड राज्य आपातकालीन परिचालन केन्द्र में नियमित रूप से उपस्थित रहेंगे। वे प्रतिदिन खाद्य एवं रसद की स्थिति की समीक्षा करेंगे, आवश्यक सूचनाओं का संकलन एवं विश्लेषण करेंगे तथा आवश्यकता पड़ने पर खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग के साथ समन्वय स्थापित करते हुए आवश्यक कार्यवाही सुनिश्चित करेंगे।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि राज्य सरकार प्रदेशवासियों को आवश्यक वस्तुओं की निर्बाध उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए पूरी तरह सतर्क है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि किसी भी परिस्थिति में खाद्यान्न, एलपीजी और अन्य आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति प्रभावित नहीं होनी चाहिए तथा स्थिति पर निरंतर निगरानी रखी जाए।

मुख्यमंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि प्रदेश में खाद्य एवं आवश्यक वस्तुओं की उपलब्धता पर्याप्त है और किसी भी प्रकार की अफवाहों पर ध्यान देने की आवश्यकता नहीं है। राज्य सरकार सभी व्यवस्थाओं पर लगातार नजर बनाए हुए है ताकि आम जनता को किसी प्रकार की असुविधा न हो।

राज्य सरकार द्वारा उठाए गए इस कदम से प्रदेश में खाद्य एवं रसद आपूर्ति व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ करने में मदद मिलेगी तथा किसी भी संभावित आपात स्थिति से प्रभावी ढंग से निपटने में सहूलियत मिलेगी।

राज्यपाल के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव के दौरान सीएम धामी ने रखा विकास कार्यों का लेखा जोखा

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने ग्रीष्मकालीन राजधानी गैरसैंण (भराडीसैंण) में स्थित विधानसभा में राज्यपाल के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा का जवाब देते हुए सरकार की उपलब्धियों, नीतियों और भविष्य की योजनाओं का विस्तृत खाका प्रस्तुत किया। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार “विकल्प रहित संकल्प” के साथ उत्तराखंड को समृद्ध, सशक्त और आत्मनिर्भर राज्य बनाने की दिशा में लगातार कार्य कर रही है।

मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन की शुरुआत देवभूमि के देवी-देवताओं, देश के लिए बलिदान देने वाले शहीदों और उत्तराखंड राज्य आंदोलनकारियों को नमन करते हुए की। उन्होंने कहा कि राज्य निर्माण के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर करने वाले आंदोलनकारियों के त्याग और संघर्ष के कारण ही आज उत्तराखंड विकास की नई ऊंचाइयों की ओर अग्रसर है।

*गैरसैंण उम्मीदों का प्रतीक*
मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार के लिए गैरसैंण केवल भौगोलिक स्थान नहीं बल्कि ये पहाड़ की आकांक्षाओं, उम्मीदों और स्वाभिमान का प्रतीक है। गैरसैंण उस संकल्प का प्रतीक है जिसके लिए उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलन चला था। इसलिए सरकार ने अपने कार्यकाल में न केवल गैरसैंण को अपने हृदय में बसाए रखा, बल्कि ये भी सुनिश्चित करने का प्रयास किया कि हमारी सरकार की प्रत्येक रीति और नीति में गैरसैंण की छाप हो।

*अटल जी के सपने को साकार करने का संकल्प*
मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड राज्य के गठन का श्रेय पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी जी को जाता है, जिन्होंने इस राज्य की नींव रखी। उन्होंने कहा कि आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के मार्गदर्शन में राज्य को नई दिशा और गति मिल रही है। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने 2021 में बाबा केदार की पावन धरा से कहा था कि “21वीं सदी का तीसरा दशक उत्तराखंड का दशक होगा।” उन्होंने कहा कि राज्य सरकार इस संकल्प को साकार करने के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है और विकास की योजनाओं को धरातल पर उतारने में जुटी है।

*ऐतिहासिक बजट: विकास का रोडमैप*
मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि इस बार प्रस्तुत बजट कई मायनों में ऐतिहासिक है। यह वर्तमान विधानसभा का अंतिम पूर्णकालिक बजट होने के साथ-साथ राज्य के आगामी विकास की दिशा तय करने वाला दस्तावेज भी है। उन्होंने बताया कि वर्ष 2026-27 के लिए प्रस्तुत बजट का आकार 1 लाख 11 हजार करोड़ रुपये है, जो पिछले वर्ष की तुलना में लगभग 10 प्रतिशत अधिक है। उन्होंने कहा कि यह बजट केवल आय-व्यय का दस्तावेज नहीं है, बल्कि राज्य के सवा करोड़ लोगों की आकांक्षाओं और उम्मीदों का प्रतिबिंब है। मुख्यमंत्री ने कहा कि बजट में मातृशक्ति के सम्मान, युवाओं के उत्थान, किसानों के कल्याण, विज्ञान एवं नवाचार के विकास, सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण और पर्यटन के विस्तार जैसे सभी क्षेत्रों में संतुलित विकास का प्रयास किया गया है।

*विकास योजनाओं को धरातल पर उतारने की प्रतिबद्धता*
मुख्यमंत्री ने विपक्ष के आरोपों का जवाब देते हुए कहा कि उनकी सरकार केवल घोषणाएं नहीं करती बल्कि उन्हें समयबद्ध तरीके से पूरा भी करती है। उन्होंने बताया कि मुख्यसेवक के रूप में की गई 3885 घोषणाओं में से 2408 घोषणाओं को धरातल पर उतारा जा चुका है और शेष पर तेजी से काम चल रहा है। उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य केवल योजनाएं बनाना नहीं बल्कि उन्हें परिणामों में बदलना है, ताकि विकास का लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंच सके।

*आर्थिक प्रगति में तेजी*
मुख्यमंत्री ने कहा कि पिछले चार वर्षों में राज्य की अर्थव्यवस्था में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। राज्य की जीएसडीपी में तेजी से बढ़ोतरी हुई है और प्रति व्यक्ति आय में लगभग 41 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है। उन्होंने कहा कि राज्य बजट का आकार भी 60 हजार करोड़ रुपये से बढ़कर 1 लाख 11 हजार करोड़ रुपये से अधिक हो गया है। इसके साथ ही निवेश, उद्योग और पर्यटन के क्षेत्र में भी उल्लेखनीय प्रगति हुई है।

*रोजगार और उद्योगों को बढ़ावा*
मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि सरकार ने रोजगार और स्वरोजगार के अवसर बढ़ाने के लिए 30 से अधिक नई नीतियां लागू की हैं। इसके परिणामस्वरूप राज्य में 20 हजार से अधिक नए उद्योग स्थापित हुए हैं और स्टार्टअप की संख्या 700 से बढ़कर लगभग 1750 हो गई है। उन्होंने कहा कि पर्यटन, होटल और होमस्टे क्षेत्र में भी तेजी से वृद्धि हुई है, जिससे स्थानीय युवाओं को रोजगार के नए अवसर मिल रहे हैं। हेली सेवाओं और हेलीपोर्ट की संख्या बढ़ने से भी पर्यटन और कनेक्टिविटी को नई गति मिली है।

*नकल माफिया और भ्रष्टाचार पर सख्ती*
मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार ने राज्य में नकल माफिया और भ्रष्टाचार के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की है। उन्होंने बताया कि उत्तराखंड में देश का सबसे सख्त नकल विरोधी कानून लागू किया गया है, जिसके बाद भर्ती परीक्षाओं में पारदर्शिता सुनिश्चित हुई है। उन्होंने कहा कि पिछले साढ़े चार वर्षों में 30 हजार से अधिक युवाओं को सरकारी नौकरियां दी गई हैं। इसके अलावा भ्रष्टाचार के मामलों में आईएएस और पीसीएस स्तर के अधिकारियों सहित 200 से अधिक लोगों के खिलाफ कार्रवाई की गई है।

*समान नागरिक संहिता और ऐतिहासिक निर्णय*
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार ने कई ऐतिहासिक और दूरगामी निर्णय लिए हैं। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड देश का पहला राज्य है जहां समान नागरिक संहिता (यूसीसी) लागू की गई है। उन्होंने कहा कि इस कानून के माध्यम से महिलाओं को समान अधिकार मिले हैं और समाज में समानता तथा न्याय की भावना को मजबूती मिली है। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार ने राज्य की सांस्कृतिक पहचान को सुरक्षित रखने के लिए सख्त भू-कानून और धर्मांतरण विरोधी कानून जैसे कदम भी उठाए हैं।

*इन्फ्रास्ट्रक्चर और कनेक्टिविटी में बड़ा निवेश*
मुख्यमंत्री ने कहा कि केंद्र और राज्य सरकार के सहयोग से उत्तराखंड में लगभग दो लाख करोड़ रुपये से अधिक की लागत से विभिन्न विकास परियोजनाओं पर कार्य किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि सड़क, रेल, रोपवे और हवाई कनेक्टिविटी को मजबूत बनाने के लिए कई परियोजनाएं तेजी से आगे बढ़ रही हैं। ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल परियोजना, चारधाम ऑल वेदर रोड परियोजना और कई रोपवे परियोजनाएं राज्य के विकास को नई गति देंगी।

*किसानों, महिलाओं और युवाओं के लिए योजनाएं*
मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार किसानों की आय बढ़ाने के लिए कई योजनाएं चला रही है। किसानों को तीन लाख रुपये तक का ब्याज मुक्त ऋण उपलब्ध कराया जा रहा है और कृषि उपकरणों पर 80 प्रतिशत तक सब्सिडी दी जा रही है। उन्होंने कहा कि महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए कई योजनाएं संचालित की जा रही हैं और प्रदेश की करीब 1 लाख 70 हजार महिलाएं “लखपति दीदी” बन चुकी हैं। युवाओं के लिए रोजगार, कौशल विकास और स्टार्टअप को बढ़ावा देने के लिए भी कई योजनाएं लागू की गई हैं।

*पर्यटन और सांस्कृतिक विरासत को बढ़ावा*
मुख्यमंत्री ने कहा कि पर्यटन राज्य की अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण आधार है। इसलिए धार्मिक, साहसिक, ईको-टूरिज्म और वेलनेस टूरिज्म को बढ़ावा देने के लिए विशेष योजनाएं चलाई जा रही हैं। उन्होंने कहा कि केदारखंड और मानसखंड मंदिरों के विकास, शीतकालीन यात्रा, फिल्म पर्यटन और अंतरराष्ट्रीय आयोजनों से राज्य की पहचान वैश्विक स्तर पर मजबूत हो रही है।

*विकसित उत्तराखंड का लक्ष्य*
मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन के अंत में कहा कि राज्य सरकार का लक्ष्य पर्यावरण और अर्थव्यवस्था के बीच संतुलन स्थापित करते हुए उत्तराखंड का समग्र और सतत विकास सुनिश्चित करना है। उन्होंने कहा कि सरकार का “विकल्प रहित संकल्प” है कि अंतिम व्यक्ति तक विकास का लाभ पहुंचे, युवाओं को रोजगार मिले, किसानों की आय बढ़े और उत्तराखंड देश के अग्रणी राज्यों में शामिल हो। मुख्यमंत्री ने विश्वास व्यक्त किया कि जनता के सहयोग और सरकार की प्रतिबद्धता के बल पर उत्तराखंड आने वाले वर्षों में विकास के नए कीर्तिमान स्थापित करेगा।

मुख्य सचिव ने अधिकारियों के साथ की घरेलू गैस को लेकर समीक्षा बैठक

मध्यपूर्व के देशों में उत्पन्न परिस्थितियों के मद्देनज़र प्रदेश में एलपीजी एवं ईंधन आपूर्ति की स्थिति की समीक्षा के लिए मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन ने भराडीसैंण में उच्चस्तरीय बैठक की। बैठक में सभी जिलों के जिलाधिकारी तथा वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक/पुलिस अधीक्षक वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से जुड़े। साथ ही इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन के स्टेट लेवल कोऑर्डिनेटर और अन्य संबंधित अधिकारी भी बैठक में उपस्थित रहे।

मुख्य सचिव ने स्पष्ट किया कि प्रदेश में घरेलू गैस सिलेंडरों की पर्याप्त उपलब्धता है और किसी भी प्रकार की कमी नहीं है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि अफवाहों पर कड़ी नजर रखी जाए और किसी भी स्थिति में कानून-व्यवस्था को प्रभावित न होने दिया जाए।

*जिलों में सतर्कता बढ़ाने के निर्देश*

मुख्य सचिव ने सभी जिलाधिकारियों और पुलिस अधिकारियों को निर्देश दिए कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में स्थिति पर लगातार निगरानी बनाए रखें। उन्होंने कहा कि किसी भी असामाजिक तत्व द्वारा अफवाह फैलाने या माहौल खराब करने की कोशिश की जाती है तो उसके खिलाफ तत्काल और सख्त कार्रवाई की जाए।

*गैस सिलेंडरों की कालाबाजारी पर सख्ती*

बैठक में गैस सिलेंडरों की कालाबाजारी, अवैध भंडारण और डायवर्जन पर सख्ती से रोक लगाने के निर्देश दिए गए। इसके लिए जिलों में नियमित रूप से छापेमारी अभियान चलाने को कहा गया है।
मुख्य सचिव ने निर्देश दिए कि तहसील स्तर पर एसडीएम की अध्यक्षता में क्विक रिस्पॉन्स टीम (QRT) गठित की जाए। यह टीम गैस सिलेंडरों की कालाबाजारी या अवैध स्टॉकिंग करने वालों के खिलाफ तत्काल कार्रवाई करेगी।

*ऑयल कंपनियों से निरंतर समन्वय बनाए रखने को कहा*

मुख्य सचिव ने जिलों में कार्यरत ऑयल कंपनियों और गैस एजेंसियों के साथ लगातार संपर्क बनाए रखने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि किसी भी संभावित समस्या की जानकारी तुरंत राज्य स्तर पर साझा की जाए ताकि समय रहते समाधान किया जा सके।

*घरेलू गैस की पर्याप्त उपलब्धता*

बैठक में इंडियन ऑयल के स्टेट लेवल कोऑर्डिनेटर कृष्ण कुमार गुप्ता और स्वर्ण सिंह ने जानकारी दी कि राज्य में घरेलू गैस सिलेंडरों की पर्याप्त उपलब्धता है। उन्होंने बताया कि प्रदेश में गैस आपूर्ति पूरी तरह सामान्य है और किसी भी प्रकार की कमी नहीं है।
अधिकारियों ने कहा कि सोशल मीडिया या अन्य माध्यमों से फैल रही अफवाहों पर नियंत्रण रखना आवश्यक है।

*अस्पतालों और शैक्षणिक संस्थानों को प्राथमिकता*

बैठक में निर्णय लिया गया कि वाणिज्यिक गैस सिलेंडरों की आपूर्ति प्राथमिकता के आधार पर अस्पतालों और शैक्षणिक संस्थानों को की जाएगी। फिलहाल होटल, ढाबों और अन्य व्यावसायिक प्रतिष्ठानों को व्यवसायिक सिलेंडरों की आपूर्ति सीमित रखी जाएगी ताकि आवश्यक सेवाओं में किसी प्रकार की बाधा न आए।

*कंट्रोल रूम सक्रिय रखने के निर्देश*

मुख्य सचिव ने राज्य स्तरीय आपदा कंट्रोल रूम और जनपद स्तरीय कंट्रोल रूम को सक्रिय रखने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि अधिकारी स्थिति पर लगातार नजर रखें और किसी भी आपात स्थिति में तुरंत कार्रवाई सुनिश्चित करें।
इसके साथ ही जिलाधिकारी और खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग के आयुक्त को निर्देश दिए गए कि वे प्रतिदिन प्रेस ब्रीफिंग के माध्यम से गैस सिलेंडरों की उपलब्धता और आपूर्ति की जानकारी जनता तक पहुंचाएं।

*अफवाह फैलाने वालों पर होगी सख्त कार्रवाई*

मुख्य सचिव ने कहा कि कुछ असामाजिक तत्व गैस सिलेंडरों की कमी को लेकर अफवाह फैलाने की कोशिश कर सकते हैं। ऐसे में सोशल मीडिया और अन्य माध्यमों पर फैलाए जा रहे भ्रामक प्रचार पर तुरंत रोक लगाई जाए और दोषियों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाए।

*बैठक में ये अधिकारी रहे मौजूद*

बैठक में पुलिस महानिदेशक दीपम सेठ, प्रमुख सचिव खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति एल. फैनई, सचिव गृह शैलेश बगौली, सचिव/आयुक्त खाद्य आनंद स्वरूप तथा महानिदेशक सूचना बंशीधर तिवारी उपस्थित रहे।
इसके अलावा इंडियन ऑयल के स्टेट लेवल कोऑर्डिनेटर कृष्ण कुमार गुप्ता सहित सभी जिलों के जिलाधिकारी और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक/पुलिस अधीक्षक वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से बैठक में शामिल हुए।

खेलभूमि उत्तराखंड में जमीनी स्तर पर सुविधाओं के विस्तार के लिए ठोस कदम

38 वें राष्ट्रीय खेलों के भव्य आयोजन के बाद प्रदेश की धामी सरकार जमीनी स्तर पर खेल सुविधाओं के और विस्तार में जुट गई है। इस क्रम में प्रदेश के हर ब्लाक में अब मिनी स्टेडियमों का निर्माण किया जाएगा। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने बुधवार को बजट सत्र के तीसरे दिन सदन को यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि हर ब्लाक में मिनी स्टेडियम के निर्माण के लिए वित्तीय वर्ष 2026-27 के बजट में प्रावधान किया गया है।
वर्ष 2025 में उत्तराखंड ने न सिर्फ 38 वें राष्ट्रीय खेलों की सफल मेजबानी की थी, बल्कि 103 पदक जीतकर इस स्तर के आयोजन में अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन भी किया था। इस आयोजन ने उत्तराखंड को खेलभूमि के रूप में भी पहचान दी।

इस आयोजन के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर का आधारभूत खेल ढांचा विकसित किया गया। लेगेसी पॉलिसी बनाकर सरकार ने इस खेल ढांचे का इस्तेमाल एकेडमी के तौर पर करने का निर्णय लिया है। ताकि खेल प्रतिभाओं को उचित प्रशिक्षण प्राप्त हो सके। इस संबंध में शासन स्तर पर कार्यवाही चल रही है।

अब वित्तीय वर्ष 2026-27 के बजट में हर ब्लाक में मिनी स्टेडियम के निर्माण के लिए प्रावधान कर दिए जाने को भी अहम माना जा रहा है। बुधवार को प्रश्नकाल में जब खेल मंत्री रेखा आर्या पर्वतीय क्षेत्रों में खेल मैदान और मिनी स्टेडियम से संबंधित सवाल का जवाब दे रही थीं, तब मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सदन को यह अहम जानकारी दी। खेल मंत्री रेखा आर्या के अनुसार-पर्वतीय क्षेत्र में मिनी स्टेडियम के लिए 1.18 एकड़ भूमि की आवश्यकता होती है। इसके निर्माण के लिए एक करोड़ 70 लाख रूपये दिए जाने का प्रावधान है।

उत्तराखंड को केंद्र से मिलेगी 264.50 करोड़ रुपये की विशेष सहायता

केंद्र सरकार द्वारा उत्तराखंड राज्य को शहरी भूमि एवं नियोजन सुधारों को बढ़ावा देने के लिए महत्वपूर्ण वित्तीय सहायता प्रदान की गई है। पूंजीगत निवेश के लिए राज्यों को विशेष सहायता योजना (SASCI) 2025–26 के अंतर्गत भाग–XA (Urban Land and Planning Reforms) के तहत उत्तराखंड को 264.50 करोड़ रुपये की विशेष सहायता (ऋण) स्वीकृत की गई है।

आवास एवं शहरी कार्य मंत्रालय की अनुशंसा के आधार पर यह राशि राज्य सरकार को प्रदान की गई है। उत्तराखंड सरकार ने इस प्रोत्साहन राशि के लिए PFMS पोर्टल के माध्यम से प्रस्ताव प्रस्तुत किया था, जिसे स्वीकार करते हुए सक्षम प्राधिकारी ने राज्य को यह सहायता उपलब्ध कराने की स्वीकृति दी है। यह राशि राज्य में प्रस्तावित विभिन्न पूंजीगत परियोजनाओं के लिए प्रदान की गई है, जिससे शहरी विकास, भूमि प्रबंधन और नियोजन सुधारों को गति मिलेगी। केंद्र सरकार द्वारा यह पूरी राशि एकमुश्त किस्त में राज्य को जारी कर दी गई है।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने केंद्र सरकार का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व में राज्यों के बुनियादी ढांचे के विकास को निरंतर प्रोत्साहन मिल रहा है। उन्होंने कहा कि यह वित्तीय सहायता उत्तराखंड में योजनाबद्ध शहरी विकास, आधुनिक भूमि प्रबंधन प्रणाली और मजबूत आधारभूत ढांचे के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार शहरी क्षेत्रों में बेहतर नियोजन, सुव्यवस्थित विकास और जनसुविधाओं के विस्तार के लिए निरंतर कार्य कर रही है। इस सहायता से प्रदेश के शहरों में संतुलित और टिकाऊ विकास को गति मिलेगी तथा आम नागरिकों को बेहतर शहरी सुविधाएं उपलब्ध कराई जा सकेंगी।

वर्दीधारी पदों में अग्निवीरों के लिए 10 प्रतिशत क्षैतिज आरक्षण की व्यवस्था: धामी

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मंगलवार को भराड़ीसैंण में अग्निवीर सैनिकों के रूप में भर्ती होने वाले कैडेट्स के साथ संवाद किया। संवाद के दौरान कैडेट्स ने मुख्यमंत्री से विभिन्न विषयों पर प्रश्न पूछे, जिनका मुख्यमंत्री ने सहजता से उत्तर दिया।

संवाद के दौरान शंकर सिंह राणा ने मुख्यमंत्री से पूछा कि सैनिक पुत्र होने के कारण आपने सैनिकों के जीवन और गतिविधियों को नजदीक से देखा है, क्या आपका मन सेना में जाने का नहीं हुआ? इस पर मुख्यमंत्री ने कहा कि सेना में जाना अन्य सेवाओं की अपेक्षा अत्यंत सम्माननीय माना जाता है। उन्होंने कहा कि वे अपने जीवन को भी एक सैनिक के जीवन की तरह अनुशासित और समर्पित मानकर कार्य करते हैं। उन्होंने कहा कि अपने पिताजी के साथ रहते हुए उन्होंने सेना के अनुशासन और कर्तव्यनिष्ठा को करीब से देखा है। जिस प्रतिबद्धता और समर्पण के साथ हमारे सैनिक अपने कर्तव्यों का निर्वहन करते हैं, उसी भावना से वे प्रदेश के मुख्य सेवक के रूप में उत्तराखण्ड की देवतुल्य जनता की सेवा करने का प्रयास करते हैं।

हिमांशु रौतेला ने प्रश्न किया कि प्रदेश के मुखिया होने के नाते आप अपने परिवार को कैसे समय दे पाते हैं? इस पर मुख्यमंत्री ने कहा कि जब कोई व्यक्ति राजनीतिक और सामाजिक जीवन में सक्रिय होता है तो उसकी जिम्मेदारियां बहुत बढ़ जाती हैं। उन्होंने कहा कि प्रदेश के मुख्य सेवक के रूप में प्रदेश के सभी लोग उनका परिवार हैं और सभी गांव उनके अपने गांव हैं।

ओ.पी. कण्डारी ने पूछा कि जब हम अग्निवीर के रूप में अपनी सेवा पूरी कर वापस आएंगे, उसके बाद सरकार हमारे रोजगार के लिए क्या व्यवस्था कर रही है? मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार ने वर्दीधारी पदों पर अग्निवीरों के लिए 10 प्रतिशत क्षैतिज आरक्षण की व्यवस्था की है। इसके अतिरिक्त केन्द्र सरकार द्वारा भी अनेक क्षेत्रों में अग्निवीरों को अवसर प्रदान किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि हर अग्निवीर के भविष्य की सुरक्षा सुनिश्चित करना सरकार की जिम्मेदारी है।

रितेश पंवार ने मुख्यमंत्री से पूछा कि आपकी पहचान “धाकड़ धामी” के रूप में क्यों बनी? मुख्यमंत्री ने कहा कि एक जनप्रतिनिधि का व्यवहार जनता के साथ सदैव सौम्य होना चाहिए। हालांकि राज्यहित और जनहित में कई बार कठोर और साहसिक निर्णय लेने पड़ते हैं। उन्होंने कहा कि उत्तराखण्ड समान नागरिक संहिता लागू करने वाला देश का पहला राज्य बना है। प्रदेश में सख्त नकल विरोधी कानून लागू किया गया है तथा दंगा रोधी कानून भी लागू किया गया है। पिछले चार वर्षों में राज्य सरकार ने जन अपेक्षाओं और प्रदेशहित में अनेक ऐतिहासिक निर्णय लिए हैं।

अमन सेमवाल ने पूछा कि आपके चेहरे पर हमेशा मुस्कान का क्या राज है? मुख्यमंत्री ने कहा कि उन्हें कार्य करने की ऊर्जा और प्रेरणा प्रदेश की जनता के आशीर्वाद से मिलती है। उन्होंने कहा कि सरकार जन अपेक्षाओं के अनुरूप प्रदेश के समग्र विकास के लिए निरंतर कार्य कर रही है और आज अनेक क्षेत्रों में उत्तराखण्ड देश में अग्रणी स्थान पर है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार जनभावनाओं के अनुरूप राज्य के विकास को नई गति देने के लिए पूरे संकल्प और प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है।

इस अवसर पर अग्निवीरों और पूर्व सैनिकों को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारे सैनिक सीमांत और उच्च हिमालयी क्षेत्रों में कठिन परिस्थितियों में देश की सेवा करते हैं। देवभूमि उत्तराखण्ड की विशेषता है कि यहां लगभग हर परिवार से कोई न कोई सदस्य सेना या अर्द्धसैन्य बलों में सेवाएं दे रहा है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में भारतीय सेना तेजी से आत्मनिर्भर बन रही है। रक्षा क्षेत्र में भारत का निर्यात भी लगातार बढ़ रहा है और भारतीय सेना वैश्विक स्तर पर एक मजबूत और सक्षम सेना के रूप में स्थापित हुई है। सेना में निरंतर आधुनिकीकरण किया जा रहा है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार द्वारा सैनिकों और पूर्व सैनिकों के हित में अनेक महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए हैं। देहरादून में भव्य सैन्यधाम का निर्माण किया जा रहा है, जिसमें राज्य के वीर बलिदानियों की गौरवगाथाएं और स्मृतियां संजोई जाएंगी। उन्होंने कहा कि वे पूर्व सैनिकों को अपने अभिभावक के रूप में देखते हैं।

इस अवसर पर यूथ फाउंडेशन के संस्थापक कर्नल अजय कोठियाल (सेनि.), पूर्व सैनिकगण तथा अग्निवीर उपस्थित थे।

प्रदेश में सात हजार किमी से अधिक सड़कें हुईं गड्डा मुक्त

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के दूसरे कार्यकाल के बीते चार साल में प्रदेश में 819 पंचायत भवनों का निर्माण पुननिर्माण किया गया है।
प्रदेश में पंचायत भवनों की संख्या 5867 है। इसमें से 1134 पंचायत भवन लंबे समय से जीर्णशीर्ण चल रहे थे। इसी क्रम में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने पंचायतीराज विभाग को अभियान चलाकर जीर्ण- शीर्ण भवनों का पुनर्निमाण करने के निर्देश दिए थे। इसके बाद गत चार वर्ष में विभाग ने 819 पंचायत भवनों का निर्माण- पुननिर्माण कर लिया है। शेष भवनों पर भी कार्य किया जा रहा है। मंगलवार को विभागीय मंत्री सतपाल महाराज ने विधानसभा में प्रश्नकाल के दौरान यह जानकारी सदन के सामने रखी।

*7 हजार किमी से अधिक सड़कें गड्डा मुक्त*
प्रदेश में लोकनिर्माण विभाग नवंबर के प्रथम सप्ताह तक सात हजार से अधिक किमी सडकों को गड्डा मुक्त कर चुका है। सदन में विभाग की ओर से प्रस्तुत जानकारी के अनुसार प्रदेश की सड़कों को गड्डा मुक्त करने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के सख्त निर्देशों के क्रम में विभाग ने वर्ष 2025-26 में मानसून काल से पूर्व 3134 किमी लंबी सड़कों को गड्डा मुक्त किया। जबकि मानसून के बाद 10 नवंबर 2025 तक 4149.17 किमी लंबी सड़कों को गड्डा मुक्त किया। इस दौरान अकेले हरिद्वार जनपद में 313 किमी से अधिक लंबी सड़कों को गड्डामुक्त किया गया।

*रोपवे परियोजनाओं पर काम तेज*

प्रदेश में विभिन्न तीर्थ स्थलों को रोपवे से जोड़ने की प्रक्रिया गतिमान है। पर्यटन मंत्री ने मंगलवार को विधानसभा में बताया कि विभाग ने कद्दूखाल से सुरकंडा देवी मंदिर के लिए पीपीपी मोड़ में रोपवे का संचालन शुरु कर दिया है। इसके अलावा जनपद चम्पावत में ठुलीगाड़ से पूर्णागिरी रोपवे भी पीपीपी मोड में निर्माणाधीन है। साथ ही जनपद उत्तरकाशी में जानकी चट्टी से यमुनोत्री मंदिर तक के लिए भी रोपवे पीपीपी मोड में विकसित किया जा रहा है। साथ ही साथ गौरीकुंड से केदारनाथ धाम, गोविंदघाट से हेमकुंड साहिब के लिए भी रोपवे निर्माण की प्रक्रिया गतिमान है।

असहाय सरिता को रायफल फंड से डीएम ने दी आर्थिक सहायता

जिलाधिकारी सविन बंसल की अध्यक्षता में आज कलेक्ट्रेट स्थित ऋषिपर्णा सभागार में जनता दर्शन कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में जनपद के विभिन्न क्षेत्रों से आए फरियादियों ने अपनी समस्याएं जिलाधिकारी के समक्ष रखीं। आज आयोजित जनता दर्शन में कुल 170 शिकायतें प्राप्त हुईं।
जिलाधिकारी ने उपस्थित सभी अधिकारियों को निर्देशित किया कि जनता दर्शन में आने वाले व्यथित, असहाय, बुजुर्ग, महिलाओं तथा जरूरतमंद लोगों की शिकायतों का समयबद्ध और संवेदनशीलता के साथ निस्तारण किया जाए। उन्होंने कहा कि प्रत्येक प्रकरण में की गई कार्रवाई की जानकारी जिलाधिकारी कार्यालय के साथ-साथ संबंधित शिकायतकर्ता को भी उपलब्ध कराई जाए, जिससे समस्याओं का प्रभावी समाधान सुनिश्चित हो सके।
जनता दर्शन में बंजारावाला निवासी कल्पना ने जिलाधिकारी से गुहार लगाई कि उनकी पुत्री विदुषी, जो फाईलफोर्ट पब्लिक स्कूल में कक्षा 6 की छात्रा है, आर्थिक तंगी के कारण स्कूल की फीस जमा नहीं कर पाई है, जिसके चलते विद्यालय प्रबंधन उसे परीक्षा में बैठने से रोक रहा है। इस पर जिलाधिकारी ने मुख्य शिक्षा अधिकारी को विद्यालय प्रबंधन से समन्वय स्थापित कर छात्रा को परीक्षा में सम्मिलित कराने तथा जिला कार्यक्रम अधिकारी को प्रोजेक्ट नंदा-सुनंदा योजना के अंतर्गत उसकी स्कूल फीस जमा कराने की कार्यवाही करने के निर्देश दिए।
जवाहर कॉलोनी, बल्लूपुर निवासी शमशाद ने बताया कि वर्ष 2023 में एक दुर्घटना में उनका पैर गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त हो गया था और उनका उपचार चल रहा है। आय का कोई साधन न होने के कारण उन्होंने आर्थिक सहायता की मांग की। जिलाधिकारी ने समाज कल्याण अधिकारी को वृद्धावस्था पेंशन स्वीकृत करने तथा प्रभारी अधिकारी शस्त्र को रायफल फंड से आर्थिक सहायता प्रदान करने के निर्देश दिए।
तहसील चकराता के ग्राम कांडोई निवासी अनिल कुमार ने अवगत कराया कि वर्ष 2017 में पीएमजीएसवाई कालसी द्वारा लाखामण्डल से नाडा मोटर मार्ग का निर्माण किया गया था, जिससे उनकी कृषि भूमि और नहर को नुकसान पहुंचा। उन्होंने बताया कि नहर निर्माण हेतु शेष रू0 5.04 लाख रुपये की धनराशि का भुगतान अब तक नहीं किया गया है। इस पर जिलाधिकारी ने मौके पर ही पीएमजीएसवाई के अधिकारियों से प्रकरण का संज्ञान लेते हुए समाधान प्रस्तुत करने को कहा। अधिकारियों द्वारा 12 मार्च तक समस्या के निस्तारण का लिखित आश्वासन जिलाधिकारी के समक्ष प्रस्तुत किया गया।
खुड़बुड़ा निवासी सरिता गोयल ने भी अपनी आर्थिक स्थिति से अवगत कराते हुए बताया कि उनका परिवार आर्थिक तंगी से गुजर रहा है। उनका पुत्र दिव्यांग है, जिसका उपचार कराने में वे असमर्थ हैं तथा उनके पति भी बीमार हैं। इस पर जिलाधिकारी ने प्रभारी अधिकारी शस्त्र को रायफल फंड से आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने तथा जिला प्रोबेशन अधिकारी को सरिता के दिव्यांग पुत्र को स्पॉन्सरशिप योजना के अंतर्गत रू0 4000 प्रतिमाह की सहायता उपलब्ध कराने के निर्देश दिए, ताकि परिवार को आर्थिक संबल मिल सके और बच्चे का उपचार सुचारू रूप से हो सके।
जनता दर्शन में गढ़ीकैंट डाकरा निवासी 67 वर्षीय बुजुर्ग ने भी अपनी समस्या रखते हुए बताया कि वे हृदय रोग से पीड़ित हैं और हाल ही में उनका ऑपरेशन हुआ है। उन्होंने शिकायत की कि उनका पुत्र नशे की लत के कारण आए दिन घर में हुड़दंग करता है और उन्हें परेशान करता है। इस पर जिलाधिकारी ने संबंधित प्रकरण में गुंडा एक्ट के अंतर्गत वाद दर्ज कर त्वरित कार्रवाई करने के निर्देश दिए।
इसी प्रकार धर्मपुर निवासी एक बुजुर्ग दंपति ने अपनी बहू द्वारा प्रताड़ित किए जाने की शिकायत दर्ज कराई। मामले में उनके भरण-पोषण के लिए वाद दर्ज किया गया है, जिस पर जिलाधिकारी ने संबंधित अधिकारियों को त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
जिलाधिकारी ने कहा कि प्रशासन का उद्देश्य प्रत्येक जरूरतमंद व्यक्ति तक समय पर सहायता पहुंचाना है तथा जनता की समस्याओं का समाधान प्राथमिकता के आधार पर किया जाएगा। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि जनता दर्शन में प्राप्त शिकायतों का निष्पक्ष, संवेदनशील और समयबद्ध निस्तारण सुनिश्चित किया जाए।
कार्यक्रम में जनपद के विभिन्न विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे।
राजीव नगर निवासी व्यथित विधवा अरूणा ने जिलाधिकारी ने गुहार लगाई कि उनके पति की वर्ष 2008 में मृत्यु हो गई तथा मजदूरी करके अपने परिवार का जीवन यापन करती है। उनका पेयजल का बिल रू0 34395 प्राप्त हुआ है जिसका भुगतान करने में असमर्थ है, जिस पर जिलाधिकारी ने जल संस्थान को बिल सटलमेंट करने के निर्देश दिए तथा सटलमेंट धनराशि का भुगतान जिला प्रशासन के रायफल फंड से करने के निर्देश दिए।
जनता दर्शन में मुख्य विकास अधिकारी अभिनव शाह, नगर मजिस्टेट प्रत्युष सिंह, विशेष भूमि अध्याप्ति अधिकारी स्मृता परमार, उप जिलाधिकारी मुख्यालय अपूर्वा सिंह, उप जिलाधिकारी न्याय कुमकुम जोशी सहित सम्बन्धित विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे।

उत्तराखंड में तीन ‘ग्रोथ डाइवर्स’ करेंगे तीन बड़े लक्ष्यों की पूर्ति

आत्मनिर्भर उत्तराखंड की जिस यात्रा पर राज्य सरकार आगे बढ़ रही है, उसमें तीन क्षेत्रों से उसे सर्वाधिक आस है। यह क्षेत्र हैं-कृषि, उद्योग और पर्यटन। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इन तीन क्षेत्रों को आत्मनिर्भरता की यात्रा के ‘डाइवर्स’ की संज्ञा दे दी है। मुख्यमंत्री ने बजट में इसी अनुरूप इन क्षेत्रों का विशेष ध्यान रखा है। सरकार की मंशा ये ही है कि इन तीनों क्षेत्रों को एक साथ आगे बढ़ाते हुए ऐसा परिवेश बनाए, जो एक साथ तीन उद्देश्यों की पूर्ति कर सके। ये उद्देश्य हैं-उत्पादकता बढे़, निवेश आकर्षित हो और सम्मानजनक आजीविका के अवसर मिले।

*तीन क्षेत्रों को बजट की डोज*

01-कृषि व संबंधित क्षेत्र
उद्यान बीमा योजना-40 करोड़
मुख्यमंत्री राज्य कृषि विकास योजना-20 करोड़
कीवि, ड्रेटेन फ्रूट प्रोत्साहन-30 .70 करोड़
मिशन एप्पल-42 करोड़
फसलों की सुरक्षा, घेर बाड़-20 करोड़
चाय विकास योजना-25 .93 करोड़
संगंध पौधा विकास व अन्य-24 .75 लाख
महक क्रांति हेतु-10 करोड़

02-उद्योग
सूक्ष्म, लघु, मध्यम उद्यमों को सहायता योजना-75 करोड़
मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना-60 करोड़
मेगा इंडस्ट्रियल एवं मेगा टेक्सटाइल नीति अनुदान-25 करोड़
प्रमोशन ऑफ इंवेस्टमेंट, स्टार्टअप, एंटरप्रीनियोरशिप-30 करोड़
स्टार्ट अप वेंचर फंड-25 करोड़

03-पर्यटन
पर्यटन विभाग के अंतर्गत राजस्व मद में बजट-210 .59 करोड़
पर्यटन विभाग के अंतर्गत पूंजीगत मद में बजट-296 .45 करोड़
वैश्विक पर्यटक स्थलों का विकास-दस करोड़
इको टूरिज्म गतिविधियों के लिए-18 .50 करोड़
योग दिवस आयोजन-दो करोड़

1.11 लाख करोड़ रुपए का संतुलित बजट, विकसित उत्तराखंड की दिशा में मजबूत कदम: सीएम

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के बजट को उत्तराखंड के भविष्य का रोडमैप बताते हुए कहा कि यह केवल आंकड़ों का दस्तावेज नहीं बल्कि राज्य के समग्र विकास की दिशा तय करने वाला बजट है। उन्होंने प्रेस वार्ता में कहा कि लगभग 1.11 लाख करोड़ रुपये का यह बजट विकास, विरासत, संस्कृति और आधुनिकता के संतुलन को दर्शाता है और “विकसित भारत के लिए विकसित उत्तराखंड” की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

मुख्यमंत्री ने बताया कि राज्य गठन के समय उत्तराखंड की अर्थव्यवस्था का आकार लगभग 14,500 करोड़ रुपये था, जो अब बढ़कर लगभग 3.81 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। यानी राज्य की आर्थिकी में 26 गुना से अधिक वृद्धि हुई है। इसी प्रकार प्रति व्यक्ति आय वर्ष 2000-01 में 15,285 रुपये थी, जो वित्तीय वर्ष 2025-26 में बढ़कर 2,73,921 रुपये होने का अनुमान है। उन्होंने कहा कि पिछले वर्ष की तुलना में राज्य की वास्तविक विकास दर 7.23 प्रतिशत अनुमानित है, जो राष्ट्रीय औसत के आसपास है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार ने FRBM अधिनियम के सभी मानकों का पालन करते हुए बेहतर वित्तीय अनुशासन बनाए रखा है। सरकार ने राजस्व अधिशेष बनाए रखा है और राजकोषीय घाटे को जीएसडीपी के 3 प्रतिशत के भीतर रखा है। उन्होंने कहा कि यह राज्य के कुशल वित्तीय प्रबंधन को दर्शाता है।

बजट में कुल 1,11,703 करोड़ रुपये का व्यय प्रस्तावित है, जिसमें 64,989 करोड़ रुपये राजस्व व्यय और 18,153 करोड़ रुपये पूंजीगत व्यय शामिल हैं। वहीं कुल प्राप्तियां 1,10,143 करोड़ रुपये अनुमानित हैं। मुख्यमंत्री ने बताया कि केंद्र सरकार से मिलने वाले करों में राज्य के हिस्से के रूप में लगभग 17,415 करोड़ रुपये तथा विभिन्न केंद्रीय योजनाओं के तहत लगभग 18,491 करोड़ रुपये की सहायता प्राप्त होगी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि यह बजट गरीब, किसान, युवा और मातृशक्ति को केंद्र में रखकर तैयार किया गया है। सामाजिक सुरक्षा पेंशन योजनाओं के लिए 1,327 करोड़ रुपये, अन्नपूर्ति योजना के लिए 1,300 करोड़ रुपये, प्रधानमंत्री आवास योजना ग्रामीण के लिए 298 करोड़ रुपये तथा शहरी आवास योजना के लिए 56 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।

युवाओं के लिए शिक्षा और खेल के क्षेत्र में 11,871 करोड़ रुपये तथा कौशल विकास कार्यक्रमों के लिए 586 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। कृषि और बागवानी क्षेत्र में 1,113 करोड़ रुपये, जबकि पशुपालन, डेयरी और मत्स्य क्षेत्र के लिए 815 करोड़ रुपये का बजट रखा गया है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए इस वर्ष 19,692 करोड़ रुपये का जेंडर बजट रखा गया है। इसके अंतर्गत सक्षम आंगनबाड़ी एवं पोषण 2.0, ईजा-बोई शगुन योजना, मुख्यमंत्री महालक्ष्मी किट और नन्दा गौरा योजना जैसी योजनाओं को आगे बढ़ाया जाएगा।

उन्होंने बताया कि राज्य में आधारभूत ढांचे को मजबूत करने के लिए लोक निर्माण विभाग के लिए 2,501 करोड़ रुपये, ऊर्जा क्षेत्र के लिए 1,609 करोड़ रुपये तथा लघु सिंचाई के लिए 1,642 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि बजट में कई नई योजनाओं की शुरुआत भी की जा रही है। इनमें कुंभ मेला तैयारियों के लिए लगभग 1,027 करोड़ रुपये, साइबर सुरक्षा के लिए 15 करोड़ रुपये, इको-टूरिज्म इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए 18.5 करोड़ रुपये, स्पिरिचुअल इकोनॉमिक जोन के विकास के लिए 10 करोड़ रुपये और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस व उभरती तकनीकों के लिए 13 करोड़ रुपये शामिल हैं।

उन्होंने कहा कि सरकार नवाचार को भी बढ़ावा दे रही है। इसके तहत कीवी और ड्रैगन फ्रूट उत्पादन, ट्राउट मछली पालन, सेब नर्सरी विकास, मुख्यमंत्री युवा भविष्य निर्माण योजना और महक क्रांति जैसी योजनाएं शुरू की जा रही हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि इस बजट का मूल मंत्र SANTULAN है, जिसका अर्थ है – समावेशी, आत्मनिर्भर, नई सोच, तीव्र विकास, उन्नत गांव और शहर, लोक सहभागिता, आर्थिक शक्ति और न्यायपूर्ण व्यवस्था। उन्होंने कहा कि सरकार का लक्ष्य विकास और पर्यावरण के संतुलन के साथ उत्तराखंड को देश के अग्रणी राज्यों में स्थापित करना है।

उन्होंने कहा कि यह बजट वास्तव में “विकल्प रहित संकल्प से विकसित उत्तराखंड तक की यात्रा का दस्तावेज” है।