दून मेडिकल कॉलेज का मंत्री ने किया औचक निरीक्षण

चिकित्सा शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने आज दून मेडिकल कॉलेज का औचक निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने छात्र-छात्राओं से मुलाकात कर उनकी समस्याओं को सुना। रावत ने विभागीय अधिकारियों को कहा कि मेडिकल छात्र-छात्राएं भविष्य के चिकित्सक हैं उन्हें गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के साथ-साथ बेहत्तर सुविधाएं भी उपलब्ध कराई जाय। मेडिकल कॉलेज में व्याप्त अव्यवस्था पर विभागीय मंत्री ने कॉलेज प्रशासन को जमकर फटकार लगाई और व्यवस्थाएं दुरूस्त करने के निर्देश दिए।
चिकित्सा स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत गुरुवार अचानक राजकीय दून मेडिकल कॉलेज पहुंचे, जहां उन्होंने कॉलेज की व्यवस्थाओं का निरीक्षण किया। इसके अलावा उन्होंने मेडिकल कॉलेज में अध्ययनरत छात्र-छात्राओं से मुलाकात कर उनकी समस्याओं को सुना। इस दौरान उन्होंने छात्रावास एवं मैस का निरीक्षण करते हुए वहां उपलब्ध सुविधाओं के बारे में भी मेडिकल छात्र-छात्राओं से जानकारी ली। जिस पर छात्र-छात्राओं ने उन्हें तमाम असुविधाओं से अवगत कराया। बताया कि दून मेडिकल कॉलेज के औचक निरीक्षण के दौरान उन्होंने कॉलेज की गतिविधियों, शैक्षणिक कार्यक्रमों सहित तमाम व्यवस्थाओं का जायजा लिया। उन्होंने कहा कि मेडिकल कॉलेज में पढ़ने वाली मेडिकल छात्र-छात्राएं भविष्य की डॉक्टर हैं लिहाजा उन्हें गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के साथ-साथ बेहत्तर सुविधाएं उपलब्ध कराने के निर्देश विभागीय अधिकारियों एवं कॉलेज प्रशासन को दे दिये गये हैं।
विभागीय मंत्री ने कहा कि कॉलेज परिसर एवं छात्रावासों में साफ-सफाई, मैस में ताजा एवं पौष्ठिक भोजन उपलब्ध कराने सहित शैक्षणिक एवं अन्य गतिविधियों को दुरूस्त करने के निर्देश अधिकारियों को दिये। उन्होंने कहा कि मेडिकल कॉलेज में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं होगी। इससे पहले रावत ने श्रीनगर एवं हल्द्वानी मेडिकल कॉलेज के छात्रावासों की व्यवस्थाओं को भी परखा चुके हैं। इस दौरान उन्होंने कॉलेज प्रशासन को सभी व्यवस्थाएं दुरुस्त करने निर्देश दिये।

नारी स्वास्थ्य जन आंदोलन कार्यक्रम को सीएम ने बताया महाअभियान

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मंगलवार को राजपुर रोड़ देहरादून स्थित होटल में देहरादून ऑब्सेटेट्रिक्स एवं गाईन सोसाइटी द्वारा आयोजित ’नारी स्वास्थ्य जन आंदोलन यात्रा-एनीमिया नेशनल राइड’ कार्यक्रम में प्रतिभाग किया।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि समाज में चिकित्सा एवं स्वास्थ्य के क्षेत्र में निस्वार्थ भाव से कार्य करने वाले लोग हमेशा ही जन सेवा का कार्य करते हैं। बिना आशा एवं अपेक्षा के स्वास्थ्य के प्रति जनजागरूकता के संचालन का कार्य निश्चित रूप से पुण्य का कार्य है। उन्होंने राष्ट्रीय स्तर पर नारी स्वास्थ्य जन आंदोलन कार्यक्रम की सराहना करते हुए इसे सामाजिक क्षेत्र का महाअभियान बताया। उन्होंने चम्पावत स्थित मायावती अद्वैत आश्रम में अपने प्रवास के अनुभव को साझा करते हुए बताया कि वहां वे मायावती अस्पताल में सूरत के एक चिकित्सक से मिले। वह साल में अपनी दो माह की सेवा, निस्वार्थ भाव से निशुल्क मायावती आश्रम के अस्पताल में देने आते हैं। उन्होंने कहा ऐसे तमाम लोग जो निस्वार्थ भाव से जनसेवा के कार्य करते हैं वह मानवता की सेवा करने वाले होते हैं। उन्होंने कहा सफल जीवन वही है जो दूसरों की सेवा में समर्पित रहता है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि सच्चे और अच्छे मन से लोगों की सेवा से बड़ी कोई सेवा नहीं होती, उससे आपको आत्मिक संतुष्टि होती है। उन्होंने कहा प्रधानमंत्री के नेतृत्व में आज संपूर्ण दुनिया की सबसे बड़ी स्वास्थ्य के क्षेत्र की योजना आयुष्मान भारत योजना भारत में चलाई जा रही है, जिसमे सालाना 5 लाख रुपये के इलाज की गारंटी मिलती है। उन्होंने कहा कि एनीमिया के प्रति भी लोगों को जागरूक करना वास्तव में मातृशक्ति की बड़ी सेवा है। उत्तराखण्ड में मातृशक्ति के कल्याण के लिये विभिन्न योजनाओं का क्रियान्वयन किया जा रहा है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि डबल इंजन की सरकार ने सदैव ही राष्ट्रहित एवं मातृ शक्ति के हित में बढ़ते कदमों को मजबूती प्रदान करने हेतु प्रतिबद्धता से प्रयास किये हैं। यह अभिनव पहल अपने उद्देश्य को चरितार्थ कर देवभूमि उत्तराखण्ड सहित भारत के अन्य क्षेत्रों में स्त्री रोग उपचार की दिशा में एक क्रांतिकारी कदम सिद्ध होगा। उन्होंने आशा व्यक्त की कि देवभूमि की मातृशक्ति को सशक्त एवं सुरक्षित बनाने की दिशा में इसी प्रकार के प्रयास निश्चित रूप से सार्थक सिद्ध होंगे।
कार्यक्रम में स्वास्थ्य मंत्री डॉ धन सिंह रावत ने कहा कि उत्तराखंड राज्य स्वास्थ्य के क्षेत्र में कई योजनाओं का संचालन किया जा रहा है। उन्होंने कहा हमारा राज्य का पूरे देश में ब्लड डोनेशन में तीसरा स्थान है, टीवी मुक्त भारत में पहले स्थान एवं एनीमिया से लड़ाई के क्षेत्र में टॉप 10 राज्यों में शामिल हैं, उन्होंने बताया कि उत्तराखंड राज्य में अभी तक 50 लाख लोगों के आयुष्मान कार्ड बनाए जा चुके हैं, जिसमें से 6 लाख लोगों को मुफ्त में इलाज मिला है। साथ ही पूरे राज्य में जल्द ही डिजिटल हेल्थ आईडी बनाने का कार्य भी शुरू किया जाएगा। उन्होंने कहा पर्वतीय क्षेत्र में मेडिकल कॉलेज में फैकेल्टी स्टॉप को बढ़ाए जाने के संबंध में राज्य सरकार द्वारा पर्वतीय क्षेत्रों में मेडिकल कॉलेज के फैकल्टी को 50 प्रतिशत अधिक वेतन दिए जाने पर सहमति बनी है, जिससे फैकल्टी डॉक्टर की कमी पूरी होगी।
इस अवसर पर मेयर सुनील उनियाल गामा, अपर मुख्य सचिव राधा रतूड़ी, पूर्व डीजीपी अनिल रतूड़ी, सोसाइटी के राष्ट्रीय अध्यक्ष डा ऋषिकेश पई, देहरादून की अध्यक्ष डॉ. आरती लूथरा डॉ. माधुरी पटेल, डॉ. ज्योति शर्मा, डॉ राधिका रतूड़ी, डॉ अजय खन्ना एवं अन्य चिकित्सक, शिक्षक आदि मौजूद रहे।

धामी सरकार में पर्वतीय क्षेत्रों में स्वास्थ्य सुविधाओं का बढ़ाने की दिशा में एक और बड़ा कदम

राज्य के पर्वतीय क्षेत्रों में स्थापित राजकीय मेडिकल कॉलेजों में अब नियमित एवं संविदा पर तैनात फैकल्टी को वेतन के अतिरिक्त 50 प्रतिशत भत्ता दिया जायेगा। धामी सरकार के इस निर्णय से जहां एक ओर पर्वतीय जनपदों के मेडिकल कॉलेजों को पर्याप्त फैकल्टी मिल पायेगी वहीं विशेषज्ञ चिकित्सक भी मेडिकल कॉलेजों में अपनी सेवाएं देने के लिए आसानी से उपलब्ध हो पायेंगे।
धामी सरकार के चिकित्सा स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा मंत्री डॉ धन सिंह रावत ने बताया कि काफी प्रयासों के बावजूद पर्वतीय क्षेत्रों में स्थित मेडिकल कॉलेजों में प्रोफेसर, एसोसिएट प्रोफेसर व असिस्टेन्ट प्रोफेसर अपनी सेवाएं देने के लिए उपलब्ध नहीं हो पा रहे थे जिसका एक कारण कम वेतनमान एवं पर्याप्त सुविधाएं न मिल पाना सामने आया था जिसको देखते हुए राज्य सरकार ने पर्वतीय क्षेत्रों में तैनात नियमित एवं संविदा दोनों ही श्रेणी के फैकल्टी को मेडिकल टीचर्स डेफिसेन्सी कम्पनसेटरी स्कीम के अंतर्गत 50 प्रतिशत अतिरिक्त भत्ता देने का निर्णय लिया।
डॉ रावत ने बताया कि वर्तमान में यह अतिरिक्त भत्ता पर्वतीय क्षेत्रों में स्थापित राजकीय मेडिकल कॉलेज, श्रीनगर तथा राजकीय मेडिकल कॉलेज, अल्मोड़ा में लागू होगा तथा भविष्य में पर्वतीय क्षेत्रों में स्थापित किये जाने वाले सभी राजकीय मेडिकल कॉलेजों में तैनात संकाय सदस्यों, प्रोफेसर, एसोसिएट प्रोफेसर तथा असिस्टेन्ट प्रोफेसर को भी उक्त भत्ता देय होगा। उन्होंने बताया कि इस अतिरिक्त भत्ते के भुगतान हेतु एक कॉरपस फण्ड बनाया जायेगा जिसका संचालन संबंधित कॉलेज के प्राचार्य द्वारा किया जायेगा। संकाय सदस्यों को मिलने वाला 50 प्रतिशत अतिरिक्त भत्ता फैकल्टी के पे स्लिप पर अंकित नहीं होगा।
स्वास्थ्य मंत्री डॉ रावत ने कहा कि काफी प्रयासों के बावजूद राजकीय मेडिकल कॉलेज, श्रीनगर तथा अल्मोड़ा में पर्याप्त फैकल्टी नहीं मिल पा रही थी लेकिन राज्य सरकार द्वारा 50 प्रतिशत अतिरिक्त भत्ते की स्वीकृति के बाद इस प्रकार की समस्या का सामना नहीं करना पड़ेगा।

राज्य में प्रथम चरण में छह जनपदों में सरकार टीबी रोगियों की करेगी पहचान

प्रधानमंत्री टीबी उन्मूलन अभियान के अन्तर्गत प्रदेश में अब घर-घर जाकर टी0बी0 मरीज खोज कर उनका उपचार किया जायेगा। इसके लिए सभी जनपदों के मुख्य चिकित्साधिकारियों को निर्देश दे दिये गये हैं। प्रथम चरण में सूबे के 6 जनपदों में एक्टिव टी0बी0 केस फाइन्डिग कैम्पेन चलाई जायेगी।

चिकित्सा स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा मंत्री डा0धन सिंह रावत ने मीडिया को जारी एक बयान में बताया कि उत्तराखण्ड को वर्ष 2024 तक टी0बी0 मुक्त प्रदेश बनाने के लिए स्वास्थ्य विभाग द्वारा भरसक प्रयास किये जा रहे हैं। इसी अभियान के तहत 21 नवम्बर 2022 से 20 दिसम्बर 2022 तक प्रदेश के 6 जनपदों में घर-घर जाकर टी0बी0 रोगियों की पहचान की जायेगी तथा इस अभियान के दौरान सामने आये एक्टिव टी0बी0 मरीजों का सम्बन्धित क्षेत्र के अस्पतालों के जरिये उपचार किया जायेगा। उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री के आवाह्न पर पूरे देश में टी0बी0 उन्मूलन अभियान चलाया जा रहा है जिसके तहत भारत में वर्ष 2025 तक टी0बी0 उन्मूलन का लक्ष्य रखा गया है। इस सम्बन्ध में स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों को एन0एच0एम0 के माध्यम से दिशा-निर्देश जारी कर दिये गये हैं। अभियान के प्रथम चरण में जनपद अल्मोड़ा, बागेश्वर, नैनीताल, पिथौरागढ, ऊधमसिंहनगऱ तथा उत्तरकाशी में घर-घर जाकर टी0बी0 मरीजों की खोज की जायेगी। स्वास्थ्य मंत्री ने बताया कि इस अभियान के तहत शहरी एवं ग्रामीण मलिन बस्तियों, संवेदनशील जनसंख्या वाले क्षेत्रों यथा एच0आई0बी0 एवं मधुमेह से ग्रसित रोगी, सब्जी एवं फल मण्डी निर्माणाधीन प्रोजेक्ट, ईट भट्टे, स्टोन क्रेशर, नदियों में चुगान करते मजदूरों, साप्ताहिक बाजार, अनाथालय, वृद्धाश्रम, नारी निकेतन, बाल संरक्षण गृह, मदरसा एवं कारागार में व्यापक जन-जागरूकता अभियान के साथ ही एक रणनीति के तहत टी0बी0 लक्षणों से ग्रसित व्यक्तियों को चिन्हिंत कर उनकी जांच करायी जायेगी।

डॉ रावत ने बताया कि राज्य ने इस वर्ष टी0बी0 उन्मूलन कार्यक्रम के अन्तर्गत अनेक उपलब्धियां प्राप्त की हैं। प्रधानमंत्री टी0बी0 मुक्त भारत अभियान में उत्तराखण्ड ने उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुये राष्ट्रीय स्तर पर नि-क्षय मित्र पंजीकरण में लगातार द्वितीय स्थान पर बना हुआ है जो कि राज्य में टी0बी0 उन्मूलन के लिए आमजन भागीदारी एवं विभागीय प्रयासों का प्रतिफल है कि टी0बी0 उन्मूलन की दिशा में राज्य अग्रणीय भूमिका में नजर आ रहा है। उन्होंने बताया कि भारत सरकार द्वारा वर्ष 2022 में उत्तराखण्ड राज्य को 28 हजार टी0बी0 को खोजे जाने का लक्ष्य दिया है जिसके सापेक्ष माह अक्टूबर तक लक्ष्य की शतप्रतिशत प्राप्ति की गयी है जिसमें प्रदेश के जागरूक समाज के साथ ही स्वास्थ्य विभाग के कार्मिकों, अधिकारियों एवं रेखीय विभागों का विशेष सहयोग प्राप्त हो रहा है। इसके लिए उन्होंने सभी का आभार व्यक्त करते हुये उत्तराखण्ड में वर्ष 2024 तक टी0बी0 उन्मूलन हेतु अपना सहयोग बनाये रखने की अपेक्षा की है।

मुख्यमंत्री ने काफिला रुकवाकर घायल युवकों को पहुंचाया अस्पताल

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की फ्लीट वाडिया हिमालयन भू विज्ञान संस्थान से सचिवालय आ रही थी, इस दौरान मुख्यमंत्री ने ओएनजीसी चौक के समीप स्कूटी पर सवार दो युवकों को स्कूटी से गिरते देखा। मुख्यमंत्री ने काफिला रुकवाकर दोनों युवकों का हालचाल जाना, युवकों को मामूली चोट आई थी। मुख्यमंत्री ने मौके पर तैनात पुलिस अधिकारियों को निर्देश दिये कि युवकों को शीघ्र आवश्यक उपचार उपलब्ध कराया जाए। मुख्यमंत्री ने सभी प्रदेशवासियों से अपील की है कि दो पहिया वाहनों में यात्रा करते समय हेलमेट का प्रयोग अवश्य करें।

नई ओटी और इमरजेंसी बिल्डिंग का सीएम ने किया लोकार्पण

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने शुक्रवार को दून चिकित्सालय देहरादून के अंतर्गत ओ.टी. एवं इमरजेंसी के नवनिर्मित भवन का लोकार्पण किया। उन्होंने अस्पताल में भर्ती मरीजों का हालचाल भी जाना। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने ‘‘आशा संगिनी’’ पोर्टल का भी शुभारंभ किया एवं आशा कार्यकत्रियों की हस्त पुस्तिका का विमोचन भी किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने जनपदों में कार्यरत आशा कार्यकत्रियों से वीडियो कांफ्रेंस के माध्यम से वार्ता भी की। आशा संगिनी के माध्यम से राज्य की समस्त 12018 आशा कार्यकत्री प्रोत्साहित होंगी। आशा कार्यकत्रियों को नियत समय पर भुगतान दिलवाने तथा उनके द्वारा सम्पादित किए गए कार्यों के मूल्यांकन व अनुश्रवण हेतु “आशा संगिनी“ पोर्टल को सभी जनपदों में संचालित कर दिया गया है। राज्य में कार्यरत सभी आशा कार्यकत्रियों को प्रति माह उनके द्वारा किये गये कार्यों के सापेक्ष निर्धारित देय प्रोत्साहन धनराशि का भुगतान “आशा संगिनी“ के माध्यम से ऑनलाईन सीधे उनके बैंक खाते में विकासखण्ड स्तर से सत्यापन पश्चात् जनपद स्तर से किया जाएगा। सॉफ्टवेयर में ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्रों में कार्यरत समस्त आशा कार्यकत्रियों को ऑनलाईन भुगतान की सुविधा उपलब्ध है।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि आशा संगिनी सेवा के माध्यम से हमारी आशा कार्यकत्रियों को स्वास्थ्य विभाग की सेवाएं सरलता और प्रभावी रूप में प्राप्त होंगी। इसके माध्यम से राज्य की 12 हजार से अधिक आशा बहनों को समय पर भुगतान दिलाने तथा उनके द्वारा किए जा रहे कार्यों का प्रभावी मूल्यांकन सरलता के साथ हो जाएगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखण्ड विषम भौगोलिक परिस्थितियों वाला राज्य है, आशा कार्यकत्रियां राज्य की स्वास्थ्य सेवाओं की रीढ़ है। हमारी आशा बहनें राज्य के दुर्गम क्षेत्रों में प्रतिकूल परिस्थितियों में जिस प्रकार से अपनी सेवाएं जरूरतमंदों तक पहुंचा रही है, वह अत्यन्त सराहनीय है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार की सर्वाेच्च प्राथमिकता है कि उत्तराखण्ड के दूरस्थ पर्वतीय इलाकों तक सभी लोगों को गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा एवं स्वास्थ्य सेवाएं आसानी से प्राप्त हो सकें, इसके लिए ठोस प्रयास किए जा रहे हैं। राज्य सरकार उत्तराखण्ड को 2025 तक सभी क्षेत्रों में अग्रणी राज्य बनाने के साथ ही स्वास्थ्य क्षेत्र में भी उत्तराखण्ड को देश का प्रथम राज्य बनाने के लिए प्रतिबद्ध है। इसके लिए हम सभी को एकजुट होकर कार्य करना होगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में देश हर क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ रहा है। विज्ञान और प्रौद्योगिकी का बेहतर तरीके से इस्तेमाल हो इस पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने विशेष जोर दिया। इसके परिणामस्वरूप ज्ञान, विज्ञान के क्षेत्र में देश तेजी से आगे बढ़ रहा है।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि आशा संगिनी सेवा के माध्यम से हमारी आशा कार्यकत्रियों को स्वास्थ्य विभाग की सेवाएं सरलता और प्रभावी रूप में प्राप्त होंगी। इसके माध्यम से राज्य की 12 हजार से अधिक आशा बहनों को समय पर भुगतान दिलाने तथा उनके द्वारा किए जा रहे कार्यों का प्रभावी मूल्यांकन सरलता के साथ हो जाएगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि आशा कार्यकत्रियां राज्य की स्वास्थ्य सेवाओं की रीढ़ है। हमारी आशा बहनें राज्य के दुर्गम क्षेत्रों में प्रतिकूल परिस्थितियों में जिस प्रकार से अपनी सेवाएं जरूरतमंदों तक पहुंचा रही है, वह अत्यन्त सराहनीय है।
स्वास्थ्य मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने कहा कि आशा कार्यकत्रियों की सुविधा के लिए आशा संगिनी पोर्टल का शुभारंभ किया। उन्होंने कहा कि 6 हजार आशा कार्यकत्रियों को कार्य को सुविधाजनक बनाने के लिए टैब दिये, शेष 6 हजार आशा कार्यकत्रियों को भी जल्द ही टैब दिये जायेंगे। उन्होंने कहा कि हर ब्लॉक पर आशा संवाद के नाम से कार्यक्रम आयोजित किया जायेगा। 2024 तक उत्तराखण्ड को क्षय रोग मुक्त करना है। 2025 तक स्वास्थ्य के क्षेत्र में 10 महत्वपूर्ण टारगेट रखे गये हैं। दून अस्पताल में अब प्रतिदिन 3 हजार लोग इलाज करा सकते हैं।
इस अवसर पर मेयर सुनील उनियाल गामा, विधायक खजान दास, दिलीप सिंह रावत, सचिव स्वास्थ्य डॉ. आर. राजेश कुमार, प्रधानाचार्य दून मेडिकल कॉलेज डॉ. आशुतोष सयाना, स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी एवं आशा कार्यकत्रियां मौजूद रहे।

धामी सरकार में छात्र-छात्राओं के रिपोर्ट कार्ड के साथ बनेगा हेल्थ कार्ड

उत्तराखंड के सभी हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर पर मानसिक स्वास्थ्य से संबंधित काउंसलिंग व स्क्रीनिंग जल्द ही शुरु होने जा रही है। यह बात प्रदेश के प्रभारी सचिव स्वास्थ्य व राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के मिशन निदेशक डॉ. आर. राजेश कुमार द्वारा राज्य स्तरीय पोषण, जीवन शैली व प्रबंधन बैठक में जानकारी देते हुए साझा की गई। देहरादून स्थित स्वास्थ्य महानिदेशालय, राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन सभागार में आयोजित बैठक में विशेषज्ञों द्वारा बदलते जीवनशैली के मद्देनजर स्कूल के छात्र-छात्राओं के रिपोर्ट कार्ड के साथ-साथ हेल्थ कार्ड बनाने पर भी जोर दिया गया।
डॉ. आर. राजेश कुमार की अध्यक्षता में आहूत बैठक में सरकारी-गैर सरकारी संस्थानों में मौजूद विशेषज्ञों द्वारा यह पाया गया कि खानपान के गलत प्रचलन व मानसिक/शारीरिक परामर्श ना होने के कारण ब्रेन स्ट्रोक, हार्ट अटैक, डायबिटीज (गैर संचारी रोगों) जैसी बीमारियों में तेजी आई है। इसीलिए यह आवश्यक है कि रोजमर्रा के जीवन में सही जीवनशैली को अपनाया जाए, ताकि इन गैर संचारी रोगों के प्रभाव को कम किया जा सके।
बैठक में चर्चा की गई कि स्वास्थ्य विभाग, अन्य विभागों के साथ सभी हितधारकों द्वारा ऐसी नीतियों का निर्माण किया जाए जिन नीतियों के अंतर्गत मानसिक रोगों, तनाव, डिप्रेशन, तम्बाकू नियंत्रण, कैंसर, हाइपरटेंशन, डायबिटीज, आदि (गैर-संचारी रोगों) का आकलन करते हुए, जनजागरुकता को बढ़ावा दिया जाए।
जन स्वास्थ्य के क्षेत्र में कार्यरत डॉ. वर्तिका सक्सेना द्वारा बताया गया कि पिछले एक दशक में महिलाओं में मोटापे के मामले लगभग दोगुने हो गए हैं। किशोरियों में शारीरिक गतिविधियों, खेल-खूद को बढाने की आवश्यकता है। उन्होंने बताया कि स्तनपान को बढ़ावा देने की भी जरुरत है जिससे की डायबिटीज, उच्च रक्तचाप, मोटापे को कम किया जा सके।
बैठक के दौरान प्रदेश में गैर-संचारी रोगों की रोकथाम हेतु स्वस्थ जीवनशैली, ईट राइट, मानसिक स्वास्थ्य, हाइपरटेंशन, डायबिटीज, ब्लड प्रेशर, तनाव प्रबंधन, आदि विषयों पर विभन्न विभागों के प्रतिनिधियों द्वारा विचार साझा किए गए। इस बैठक के दौरान बिहेवियर चेंज, सामूहिक आई.ई.सी., इंटरपर्सनल कम्युनिकेशन, आदि को बढ़ावा देने पर जोर दिया गया। साथ ही मानसिक स्वास्थ्य के काउंसलर के रुप में आशा कार्यकत्रियों को तैयार किए जाने पर चर्चा की गई। स्वास्थ्य संबंधित काउंसलिंग व स्क्रीनिंग को विद्यालय स्तर पर प्रारंभ किए जाने पर भी बल दिया गया।
बैठक में स्वास्थ्य महानिदेशक (प्रभारी) डॉ. विनीता शाह, निदेशक राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन डॉ. सरोज नैथानी, राज्य नोडल अधिकारी डॉ. फरीदुज़फ़र, डॉ. सुजाता, ड़ॉ. पंकज सिंह, डॉ. कुलदीप मर्ताेलिया, डॉ. अर्चना ओझा, डॉ. अभय कुमार, डॉ. मंयक बड़ोला, डॉ. तुहीन कुमार, डॉ. अमलेश कुमार सिंह, डॉ. अमित शुक्ला, उपायुक्त खाद्य एवं औषधि प्रशासन जी.सी. कंडवाल, डॉ. नीतू कोचर, आदि मौजूद रहे।

हर जरुरतमंद को सुलभ ईलाज पहुंचे सरकार कर रही प्रयास-धामी

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने बुधवार को जौलीग्रांट स्थित स्वामी राम हिमालयन विश्वविद्यालय में चिकित्सा शिक्षा पर 13 वें राष्ट्रीय सम्मेलन में प्रतिभाग किया। इस अवसर पर उन्होंने कौशल व अनुरूपण उत्कृष्टता केंद्र का लोकार्पण भी किया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि हिमालयन इन्स्टीट्यूट हॉस्पिटल ट्रस्ट के संस्थापक स्वामी राम एक महान मानवतावादी, दार्शनिक, शिक्षक एवं श्रेष्ठ योगी थे। स्वास्थ्य देखभाल और आजीविका कौशल प्रदान करके इस पहाड़ी राज्य में अवसरों की कमी को दूर करने के उद्देश्य से उन्होंने हिमालयन इंस्टीट्यूट हॉस्पिटल ट्रस्ट की स्थापना की थी। उनका मत था कि मानव शरीर भगवान का मंदिर है और अपने साथी प्राणियों की निस्वार्थ सेवा करना ही प्रार्थना का सर्वाेच्च रूप है। उनकी प्रेरणा से ही यह संस्थान देश को कई वर्षों से अपनी उत्कृष्ट सेवाएं प्रदान करता रहा है। आज हिमालयन आयुर्विज्ञान संस्थान प्रदेश में चिकित्सा के क्षेत्र में अपना उत्कृष्ट योगदान दे रहा है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार राज्य में चिकित्सा सुविधाओं में सुधार के लिए पूर्ण रूप से प्रतिबद्ध है और चिकित्सा के क्षेत्र में सुधार के लिए हरसंभव प्रयास कर रही है। राज्य में निःशुल्क जांच योजना प्रारम्भ की है। जिसके तहत मरीजों को 207 प्रकार की पैथोलॉजिकल जांचों की निःशुल्क सुविधा दी जा रही है। आज प्रदेश में हेल्थ इंफ्रास्ट्रक्चर में कई गुना बढ़ोतरी हुई है। प्रत्येक जिले में ऑक्सीजन प्लांट स्थापित किए गए हैं। उत्तराखंड में आयुष्मान योजना के अन्तर्गंत 42 लाख 90 हजार से अधिक लोगों के आयुष्मान कार्ड बनाए जा चुके हैं। आयुष्मान योजना के अंतर्गत अब तक 5 लाख 83 हजार से अधिक मरीज मुफ्त में उपचार करा चुके हैं। इस कल्याणकारी योजना के अंतर्गत लाभार्थियों के उपचार पर अब तक 1020 करोड़ खर्च किये जा चुके हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार ने कोविड महामारी के दौरान आशा वर्कर, आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों व पर्यावरण मित्रों को पांच माह तक 2-2 हजार रूपए की प्रोत्साहन राशि प्रदान की। हाल ही में भारत सरकार के स्वास्थ्य मंत्रालय से उत्तराखंड रक्तदान में देश भर में द्वितीय स्थान प्राप्त हुआ। उन्होंने कहा कि योग्यता आधारित चिकित्सा पाठ्यक्रम प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी का सपना रहा है। अगर हमें आगे बढ़ना है तो अपने छात्रों को सही ज्ञान, कौशल और दृष्टिकोण से सज्जित करना होगा। यह आज के समय की मांग भी है। कोविड महामारी ने सिखाया है कि हम सभी को किसी भी परिस्थिति के लिए तैयार रहना चाहिए। हमारे मेडिकल कॉलेज को नियमित शिक्षण के साथ-साथ ई-शिक्षण के लिए तैयार रहना चाहिए तथा ई-मॉड्यूल और टेलीमेडिसिन से सुसज्जित रहना चाहिए। ताकि आने वाले समय में हम हर प्रकार से चिकित्सा के क्षेत्र में उत्कृष्ट बनें रहें और भविष्य की समस्याओं का सफलतापूर्वक सामना कर सकें।
मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारे मेडिकल छात्र ही भविष्य के भारत में उत्तम स्वास्थ्य सेवाओं का निर्धारण करेंगें। इसलिए चिकित्सा शिक्षा की गुणवत्ता पर हमें विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है। रोगियों के कल्याण के लिए चिकित्सा शिक्षा से जुड़े छात्रों के कौशल और व्यवहार को परिष्कृत करने पर लगातार ध्यान केंद्रित करना चाहिए। उन्होंने कहा कि राज्य के सभी मेडिकल कॉलेजों से को चिकित्सा शिक्षा, ई-लर्निंग और सिमुलेशन लैब के लिए मजबूत मॉड्यूल विकसित करने हेतु आपस में सहयोग और समन्वय से कार्य करना होगा। उत्तराखंड चिकित्सा शिक्षा के क्षेत्र में देश और दुनिया का नाम रोशन करें। इसके लिये सरकार हरसंभव सहयोग और सहायता प्रदान करेगी।
इस अवसर पर नीति आयोग दिल्ली के सदस्य डॉ. विनोद कुमार पॉल, स्वामी राम हिमालयन विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. विजय धस्माना, प्रतिकुलपति डॉ. विजेन्द्र चौहान, हिमालयन आयुर्विज्ञान संस्थान के प्रधानाचार्य डॉ. अशोक देवराड़ी, एसोसिएशन ऑफ हैल्थ प्रोफेशन एजुकेशन की अध्यक्ष डॉ. अंशु मौजूद रहे।

उत्तराखंड के सभी वेलनेस सेंटरों पर नियुक्त किये जायेंगे सीएचओ

प्रदेशभर में संचालित सभी वैलनेस सेंटरों पर आम लोगों को और बेहतर स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी। इसके लिये शीघ्र ही वेलनेस सेंटरों पर 664 सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारियों की तैनाती की जायेगी। जिसके निर्देश विभागीय अधिकारियों को दे दिये गये हैं।

चिकित्सा स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा मंत्री डॉ0 धन सिंह रावत ने मीडिया को जारी एक बयान में बताया कि प्रदेश भर के सभी वैलनेस सेंटरों पर और बेहतर स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध कराई जायेगी। इसके लिये शीघ्र ही 664 सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारियों (सीएचओ) की विभिन्न वैलनेस सेंटरों पर नियुक्ति की जायेगी। जिसके निर्देश विभागीय अधिकारियों को दे दिये गये हैं। डॉ0 रावत ने बताया कि वर्तमान में प्रदेश भर में सीएचओ के 1604 पद स्वीकृत हैं, जिसमें से 940 पदों पर सीएचओ कार्यरत हैं, जबकि 664 पद रिक्त हैं। जिसमें अल्मोड़ा जनपद में 88 पद, बागेश्वर में 23, चमोली में 26, चंपावत में 21, देहरादून में 26, हरिद्वार में 10, नैनीताल में 29, पौड़ी गढ़वाल में 125, पिथौरागढ़ में 104, रुद्रप्रयाग में 19, टिहरी गढ़वाल में 145, ऊधमसिंह नगर में 7 और उत्तरकाशी में 41 पद रिक्त हैं।

विभागीय मंत्री ने कहा कि शासन ने सीएचओ के रिक्त 664 पदों पर भर्ती की जिम्मेदारी हेमवती नंदन बहुगुणा उत्तराखंड चिकित्सा शिक्षा विश्वविद्यालय को दी है, विश्वविद्यालय ने रिक्त पदों पर भर्ती के लिये विज्ञप्ति जारी कर दी है। शीघ्र ही विश्वविद्यालय चयनित अभ्यर्थियों की सूची विभाग को उपलब्ध करा देगा। डॉ0 रावत ने बताया कि राज्य सरकार का मकसद सूबे में मजबूत स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराना है जिसके लिये सरकार निरंतर प्रयासरत है।

अज्ञात वाहन की टक्कर से दुर्घटना का शिकार हुआ व्यक्ति, मंत्री ने पहुंचाया अस्पताल

कैबिनेट मंत्री सुबोध उनियाल अपने काफिले के संग बल्लीवाला फ्लाई ओवर से गुजर रहे थे। इस दौरान सड़क किनारे लहूलुहान हालत में पड़ा हुआ एक व्यक्ति उन्हें दिखाई दिया, जिसकी बाईक को अज्ञात वाहन ने टक्कर मार दी थी। दुर्घटनाग्रस्त व्यक्ति के आसपास काफी संख्या भीड़ एकत्र हो गई, मगर किसी ने भी उसे अस्पताल पहुंचाने की जहमत तक नहीं उठाई। इस दौरान बल्लीवाला फ्लाईओवर से गुजर रहे कैबिनेट मंत्री सुबोध उनियाल की दुर्घटनाग्रस्त व्यक्ति पर नजर पड़ी, जिसके बाद उन्होंने तत्काल अपने काफिले को रूकवाया एवं दुर्घटनाग्रस्त व्यक्ति को अपने वाहन में बिठाकर देहरादून स्थित सिनर्जी अस्पताल में भर्ती करवाया। यहां कैबिनेट मंत्री ने चिकित्सकों को दुर्घटनाग्रस्त व्यक्ति के शीघ्र उपचार हेतु निर्देशित किया। जिसके बाद शुक्रवार को कैबिनेट मंत्री दुर्घटनाग्रस्त व्यक्ति का हाल जानने अस्पताल पहुंचे। इस दौरान मंत्री ने यहां चिकित्सकों को दुर्घटनाग्रस्त व्यक्ति की बेहतर ढंग देखरेख करने हेतु निर्देश दिए, जिस पर दुर्घटनाग्रस्त व्यक्ति के परिजनों ने मंत्री का आभार जताया।