अब यूपी भी गुजरात मॉडल की राह पर

सीएम योगी के सत्ता संभाले एक साल पूरा होने जा रहा है, योगी सरकार ने गुजरात मॉडल की तर्ज पर यूपी में इंवेस्टर समिट आयोजित करते हुये देश और उससे बाहर के कारोबारिेयों को यूपी में निवेश करने का आमंत्रण दिया है।

दुनिया की सबसे बड़ी आर्थिक शक्ति चीन सुस्ती के दौर से गुजर रहा है। लगातार 30 साल तक 10 फीसदी की विकास दर दर्ज करने वाले चीन को आर्थिक शक्ति बनाने में उसके कुछ प्रोविंसेस की अहम भूमिका रही है। देश की जीडीपी में इन राज्यों का सर्वाधिक योगदान भी है। खास बात यह है कि आर्थिक आंकड़ों को देखकर साफ है कि ये प्रोविंस चीन की सबसे घनी आबादी वाले क्षेत्र हैं और इस घनी आबादी के सहारे ही चीन दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने में सफल हुआ है।

गुजरात मॉडल से उम्मीद

उत्तर प्रदेश में इवेस्टर समिट के लिए सजे मंच से एक के बाद एक शख्सियत और संभावित निवेशकों ने 2003 का वह मंजर याद दिलाया जब गुजरात की कमान संभालने के बाद तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेन्द्र मोदी ने वाइब्रेंट गुजरात की नींव रखी। लखनऊ के मंच पर दावा किया गया कि वायब्रेंट गुजरात समिट ने गुजरात में बड़े निवेश का रास्ता खोलते हुए गुजरात को कारोबार में देश का अग्रणी राज्य बना दिया। लिहाजा इसी तर्ज पर चलते हुए अब उत्तर प्रदेश को देश का अहम वाणिज्यिक क्षेत्र बनाया जाएगा। भारत में जनसंख्या के हिसाब से सर्वाधिक आबादी वाला राज्य उत्तर प्रदेश है। लिहाजा भारत के लिए चीन जैसी अर्थव्यवस्था को पकड़ने और उसे पछाड़ने के लिए जरूरी है कि भारत में भी आर्थिक विकास के केन्द्र में उत्तर प्रदेश को रखा जाए।

ये कंपनियां देंगी योगदान

यूपी इंवेस्टर्स समिट के मंच से बोलते हुए देश के बड़े उद्योगपतियों ने अगले कुछ वर्षों में हजारों करोड़ के निवेश के साथ-साथ राज्य में लाखों नए रोजगार पैदा करने का दावा किया है। इनमें यदि राज्य के सबसे बड़े निवेशक आदित्य बिड़ला ग्रुप के चेयरमैन कुमार मंगलम बिड़ला ने राज्य की आर्थिक गतिविधियों में 25,000 करोड़ रुपये का निवेश का दावा किया तो देश के सबसे बड़े कारोबारी मुकेश अंबानी ने तीन साल में 10,000 करोड़ रुपये के निवेश के साथ एक लाख से अधिक नौकरियां देने का दावा किया। वहीं समिट में शिरकत कर रहे अडानी समूह के प्रमुख गौतम अडानी ने अगले कुछ वर्षों के दौरान राज्य में अपनी कंपनियों के विस्तार के लिए कुल 45,000 करोड़ रुपये के निवेश का दावा किया है।

इनके अलावा कई क्षेत्रों में विदेशी कंपनियों ने उत्तर प्रदेश के इवेस्टर समिट के दौरान राज्य में बड़े निवेश का ऐलान किया है। उल्लेखनीय है कि महज डेयरी सेक्टर में नीदरलैंड समेत यूरोप की कंपनियों ने लगभग 500 समझौते करते हुए हजारों करोड़ के निवेश का खाका पेश किया है।

भारत और कनाडा आंतक के विरूद्ध एक साथ

भारत और कनाडा आतंकवाद और अलगाववादी ताकतों से साथ मिलकर लड़ेंगे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो की बातचीत के बाद दोनों देशों की ओर से जारी साझा बयान में ये प्रतिबद्धता जताई गई।

साझा बयान में कहा गया है कि आतंकवाद पर काबू पाने के लिए जरूरी है कि आतंकी संगठन में भर्ती रोकी जाए, उनके पास पैसा पहुंचने के रास्ते बंद किए जाए। उनके ठिकानों को ध्वस्त किया जाए और उन्हें कहीं पनाह न मिले, इसका इंतजाम किया जाए।

साझा बयान में भारत और कनाडा ने जिन आतंकवादी संगठनों से लड़ने की बात कही है उनमें अलकायदा, आईएसआईएस, हक्कानी नेटवर्क, एलईटी, जैश-ए-मोहम्मद, बब्बर खालसा इंटरनेशनल और इंटरनेशनल सिख यूथ फेडरेशन शामिल है। कनाडा के प्रधानमंत्री ट्रुडो की मुंबई यात्रा के दौरान जिस जसपाल अटवाल की तस्वीर ने तूल पकड़ा था वो इंटरनेशनल सिख यूथ फेडरेशन से ही जुड़ा रहा है।

कनाडा में खालिस्तान समर्थकों को लेकर वहां की सरकार के नरम रवैये की वजह से जस्टिन ट्रूडो की यात्रा को लेकर भारत सरकार ने पहले से ही कोई ज्यादा जोश नहीं दिखाया था। बात तब और बिगड़ गई जब पता चला कि ट्रुडो की यात्रा के दौरान खालिस्तानी आतंकवादी जसपाल अटवाल न सिर्फ भारत आ गया है बल्कि मुंबई के एक कार्यक्रम में ट्रूडो की पत्नी के साथ फोटो भी खिंचवा चुका है। उसे कनाडा के उच्चायुक्त के घर डिनर में आने का निमंत्रण भी मिल चुका था जिसमें ट्रूडो को शामिल होना था, लेकिन जब भारत ने इसका जोरदार विरोध कराया तब जाकर उसका निमंत्रण रद्द किया गया।

अपनी भारत यात्रा के छठे दिन शुक्रवार को ट्रुडो की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात हुई। इस मौके पर मोदी और ट्रुडो गले भी मिले, लेकिन हैदराबाद हाउस में जब दोनों नेता द्विपक्षीय बातचीत का नतीजा बताने के लिए प्रेस से मुखातिब हुए तो साफ दिखा कि उनकी मुलाकात में गर्मजोशी नहीं है।

कनाडा के प्रधानमंत्री की बातों से ऐसा लग रहा था कि वो बोल तो दिल्ली में रहे हैं लेकिन उनका ध्यान कनाडा के लोगों पर ही है और वो उन्हीं को खुश करने में लगे हैं। प्रधानमंत्री मोदी ने अपने बयान में मजबूती से आतंकवाद और कनाडा में खालिस्तान समर्थकों पर लगाम लगाने का मामला उठाया।

मोदी ने कहा, आतंकवाद और उग्रवाद भारत और कनाडा जैसे लोकतांत्रिक, बहुलवादी समाजों के लिए खतरा हैं। इन ताकतों का मुकाबला करने के लिए हमारा साथ आना महत्वपूर्ण है। संप्रदाय का राजनीतिक उद्देश्य के लिए दुरूपयोग करने वालों और बंटवारे की खाई खोदने वालें के लिए कोई जगह नहीं होनी चाहिए। हमारे देशों की संप्रभुता, एकता और अखंडता को चुनौती देने वालों को भी बर्दाश्त नहीं किया जा सकता।

ट्रूडो ने मोदी को कनाडा आने का न्यौता भी दिया जिसे उन्होंने स्वीकार कर लिया। कनाडा के प्रधानमंत्री ट्रुडो सपरिवार भारत की एक हफ्ते लंबी यात्रा के दौरान कई मौकों पर भारतीय परिधान पहने ही दिखे।

अब घर बुक करने पर बिल्डर नहीं दे पाएगा इनकम की गांरटी

अब रिएल एस्टेट और ज्वेलरी कारोबार में पॉंजी स्कीमों जैसे चलने वाले कारोबार को भी पॉंजी स्कीम माना जाएगा। साथ ही इन्हें रेगुलेट भी किया जायेगा। इसके लिये केंद्र सरकार ने कानून में बदलाव करने को मंजूरी दे दी है। जल्द ही इसे संसद में पेश किया जाएगा।

धोखाधड़ी को रोकने के लिए केन्द्र सरकार ने पॉन्जी स्कीम के दायरे में रिएल एस्टेट और ज्वेलर्स को भी शामिल किया है। पिछले दिनों देश के विभिन्न भागों में ऐसी घटनाएं सामने आई जिनमें गैर-कानूनी तरीके से जमा राशि लेने की योजनाओं के जरिए लोगों के साथ धोखाधड़ी की गई। इस तरह की योजनाओं के सबसे अधिक शिकार गरीब और ऐसे लोग हुए जिनको वित्तीय मामलों की जानकारी नहीं थी और ऐसी योजनाएं अनेक राज्यों में चल रही थीं।

केन्द्र सरकार का मानना है कि यदि कोई बिल्डर कुछ वर्षों में निश्चित रिटर्न के नाम पर लोगों को घर या प्रॉपर्टी बेचता है तो ऐसे ऑफर्स को पॉन्जी स्कीम की श्रेणी में रखा जाएगा। वहीं देश में कई ज्वेलर्स ग्राहकों को निवेश के लिए यह ऑफर के साथ उकसाते हैं कि यदि कोई ज्वेलरी खरीदने के लिए वह 11 इन्सटॉलमेंट भरते हैं तो 12 इन्सटॉलमेंट कंपनी की तरफ से भरा जाएगा। ऐसी स्थिति में भी ज्वेलर्स के ये ऑफर्स पॉन्जी स्कीम के दायरे में रहेंगे और केन्द्र सरकार का प्रस्तावित कानून इन्हें रेगुलेट करने के लिए सक्षम होगा।

गौरतलब है कि इस विधेयक पर फैसले से पहले अपने वित्त वर्ष 2017-18 के बजट भाषण में वित्त मंत्री अरुण जेटली ने घोषणा की थी कि गैर-कानूनी जमा योजनाओं की बुराइयों को कम करने के लिए एक विधेयक का मसौदा सार्वजनिक किया जाएगा और उसे अंतिम रूप देने के बाद जल्द ही पेश किया जाएगा। इसी बजट भाषण को पूरा करने के लिए केन्द्र सरकार ने पॉन्जी स्कीमों के खिलाफ नए कानून का ऐलान किया है।

संशोधन के बाद इस तरह बदल जाएगी जमा योजना

पहला विधेयक में तीन अलग-अलग प्रकार के अपराध निर्धारित किए गए हैं, जिनमें अनियमित जमा योजनाओं को चलाना, नियमित जमा योजनाओं में धांधली और अनियमित जमा योजनाओं को गलत तरीके से प्रोत्साहन।

दूसरा, विधेयक में बचाव कार्य करने के लिए कड़ी सजा और भारी जुर्माने की व्यवस्था की गई है।

तीसराविधेयक में ऐसे मामलों में जमाराशि को निकालने अथवा उसकी अदायगी के लिए पर्याप्त प्रावधान किए गए है, जहां ऐसी योजनाओं के लिए अवैध तरीके से जमा राशि जुटाने में सफलता मिल जाती है।

चौथा, विधेयक में सक्षम प्राधिकार द्वारा संपत्तियों व परिसंपत्तियों को कुर्क करने और जमाकर्ताओं को अदायगी के लिए सम्परत्ति की अनुवर्ती वसूली का प्रावधान किया गया है।

पांचवा, संपत्ति की कुर्की और जमाकर्ताओं को धनराशि लौटाने के लिए स्पष्ट समय निर्धारित किया गया है।

छठां, विधेयक में एक ऑनलाइन केन्द्रीय डेटाबेस तैयार करने की व्यवस्था है जिससे देश में जमा करने की धनराशि लेने की गतिविधियों के बारे में सूचनाएं एकत्र करने और उन्हें साझा करने की व्यवस्था होगी।

सातवां, विधेयक में “जमाराशि लेने वाले” और “जमाराशि” को विस्तार से परिभाषित किया गया है।

आठवां, “जमाराशि लेने वालों” में धनराशि लेने वाली अथवा मांगने वाली सभी संभावित कंपनियां (व्यक्तियों सहित) शामिल होंगी। इनमें केवल उन विशिष्ट कंपनियों को शामिल नहीं किया जाएगा, जिन्हें कानून द्वारा शामिल किया गया है।

नवां, “जमाराशि” को इस तरीके से परिभाषित किया गया है कि जमा राशि लेने वालों पर प्राप्तियों के रूप में जनता की जमा राशि को छिपाने से रोक होगी और साथ ही अपने सामान्य व्यवसाय के दौरान किसी प्रतिष्ठान द्वारा धनराशि स्वीकार करने से रोक होगी।

दसवां, एक विस्तृत केन्द्रीय कानून होने के कारण विधेयक में कानून की सर्वश्रेष्ठ प्रक्रियाओं को अपनाया गया है साथ ही कानून के प्रावधानों को लागू करने की प्रमुख जिम्मेदारी राज्य सरकारों को सौंपी गई है।

सीएम ने राज्य की स्वास्थ्य सेवाओं का दर्द किया बयां

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने प्रदेश की स्वास्थ्य सेवाओं का दर्द बयां करते हुये कहा कि राज्य कीं स्वास्थ्य सेवाओं में अभी बहुत कमियां है। जिस कारण दूरस्त क्षेत्रों में समय पर उपचार न मिल पाने के कारण जच्चा-बच्चा दम तोड़ देते है। हमें इनके प्रति अपनी संवेदना जगानी होगी।

एचएनबी उत्तराखंड चिकित्सा शिक्षा विश्वविद्यालय के प्रथम दीक्षांत समारोह में मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाएं संतोषजनक नहीं। उन्होंने कहा कि दून या किसी अन्य बड़े शहर को देख आपको लगेगा कि सब अच्छा है, लेकिन दूरस्थ क्षेत्रों के लिये भी सरकार उतनी ही जवाबदेह है।

उत्तरकाशी के जखोल गांव और नैनीताल के ओखलखंडा का उदाहरण देते सीएम बोले वहां अब भी महिलाएं सुरक्षित प्रसव की अवधारणा से कोसो दूर हैं। समय से उपचार न मिलने के कारण जच्चा-बच्चा दम तोड़ देते हैं। दुरुह क्षेत्र में रहने वाले इन लोगों के प्रति हमारी संवेदना जागनी चाहिए। हमें दूरस्थ क्षेत्रों में जाकर इनकी पीड़ा हरनी है।

त्रिवेन्द्र ने कहा कि स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार का सरकार प्रयास कर रही है और इसमें आप सबका सहयोग चाहिये। उन्होंने चिकित्सा क्षेत्र के व्यवसायिक पक्ष पर बोलते कहा कि डाक्टर जब कमाई के पीछे भागता है तो वह कसाई के समान हो जाता है।

बीएसएनएल के नंबर 10 से 13 डिजिट के होंगे

अब भारत संचार निगम लिमिटेड (बीएसएनएल) के नई सीरीज के नंबर दस के बजाए 13 डिजिट के होंगे। केंद्रीय सूचना मंत्रालय के निर्देश पर बीएसएनएल ने इस पर अपना काम भी शुरू कर दिया है।

पिछले दिनों दिल्ली में संपन्न हुयी बैठक में इस व्यवस्था को लागू करने का निर्णय लिया गया। चर्चा यह है कि 10 अंकों के लेवल में अब नए मोबाइल नंबरों की गुंजाइश पूरी हो चुकी है, इसी वजह से नई सीरीज शुरू की जा रही है। इस वर्ष के अंत तक पुराने दस अंकों के मोबाइल नंबरों को भी 13 अंकों में तब्दील कर दिया जाएगा।

हालांकि, वर्तमान नंबर कैसे बदले जाएंगे, यह प्रक्रिया अभी तय नहीं हो पाई है। नंबर तो वही रहेगा, लेकिन डिजिट आगे जुड़ेंगे या पीछे, इसके बारे में अभी कोई जानकारी नहीं मिल सकी है। बीएसएनएल के जीएम (मोबाइल) एसके सिंह के अनुसार इस संबंध में हमें अभी तक कोई निर्देश नहीं मिले हैं। सोशल मीडिया के माध्यम से ही ऐसी खबर सुनने में आ रही हैं। डिपार्टमेंट ऑफ टेलीकम्यूनिकेशन की ओर से निर्देश मिलने के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो पाएगी।

सेना प्रमुख को क्यों होनी लगी चिंता, कौन है बदरूद्दीन अजमल

सेना प्रमुख बिपिन रावत के बांग्लादेशी नागरिकों की असम में घुसपैठ और ऑल इंडिया यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट पर दिए गए बयान से राजनीतिक बवाल मच गया है। सेना प्रमुख ने कहा कि जितनी तेजी से देश में बीजेपी का विस्तार नहीं हुआ उतनी तेजी से असम में बदरुद्दीन अजमल की पार्टी एआईयूडीएफ बढ़ी है, जो चिंता की बात है।

बता दें कि अजमल के जबरदस्त उभार के पीछे उनकी अपनी सियासी सूझबूझ के अलावा हालात का भी अच्छा-खासा योगदान है। एआइयूडीएफ 2005 में गठित की गई थी, उसी साल सुप्रीम कोर्ट ने विवादास्पद अवैध आप्रवासी (ट्रिब्यूनल द्वारा निर्धारण) कानून (आइएमडीटी) को रद्द कर दिया था।

इसके लिए सर्बानंद सोनोवाल(असम के सीएम) ने उस वक्त ऑल असम स्टुडेंट्स यूनियन के नेता के तौर पर लंबी कानूनी लड़ाई लड़ी थी, जिसके बाद अदालत का यह फैसला आया था। आइएमडीटी कानून ने अवैध आप्रवासियों की पहचान की जिम्मेदारी न्यायाधिकरणों पर डाल दी थी और संदिग्ध लोगों की नागरिकता को साबित करने का भार शिकायत करने वालों पर डाल दिया था। अप्रवासी मुसलमान मानते हैं कि केंद्र की तत्कालीन कांग्रेस सरकार का बनाया गया यह कानून उन्हें उत्पीड़न से बचाने वाला था।

असम में पैदा हुए और मुंबई में कपड़ों, रियल एस्टेट, चमड़ा, हेल्थकेयर, शिक्षा और इत्र का विशाल कारोबार चलाने वाले अजमल का कारोबार भारत के अलावा यूपीई, बांग्लादेश, सिंगापुर आदि देशों में फैला है। अजमल पर वंशवादी सियासत के भी आरोप लगते आए हैं। उनके दो बेटे अब्दुल रहमान अजमल और अब्दुल रहीम अजमल व भाई सिराजुद्दीन राजनीति से जुड़े हैं।

काठगोदाम में युवती ने किया दो महिला का यौन उत्पीड़न, सेक्स टॉय से बनाये संबंध

युवक ने युवतियों का यौन उत्पीड़न किया, यह आपने अक्सर सुना होगा। मगर, एक युवती पुरूष का वेष धर महिलाओं से शादी कर उनका यौन शोषण करे। यह शायद ही आपने सुना हो। ताजा मामला उत्तराखंड के काठगोदाम का है, जहां एक युवती ने पुरुष बनकर दो महिलाओं से शादी रचा ली। दोनों महिलाओं के साथ तीन साल तक मियां-बीवी की तरह रही। हैरानी की बात यह है कि इन दोनों महिलाओं को भनक तक नहीं लगी कि उनके साथ पति के रूप में कोई महिला रह रही है। आखिर सच सामने आ ही जाता है, पुरुष बनी महिला का भंडाफोड़ हो गया।

जानकारी के मुताबिक, यूपी के बिजनौर के धामपुर की रहने वाली स्वीटी ऊर्फ कृष्णा सेन ने साल 2013 में फेसबुक के जरिए एक लड़की से दोस्ती कर ली। कुछ दिनों बाद काठगोदाम की रहने वाली उस लड़की को प्रेम जाल में फांसकर उसने शादी कर ली। दोनों हल्द्वानी में किराये के एक मकान में रहने लगे, लेकिन शादी के बाद से ही दोनों के बीच झगड़ा होने लगा।

पहली शादी के करीब तीन साल बाद कृष्णा सेन ने एक दूसरी लड़की से शादी कर ली। दोनों बीवीओं को एक ही घर में साथ रखने लगा। इसके कुछ दिन बाद पहली पत्नी ने पति के खिलाफ दहेज प्रताड़ना का आरोप लगाकर केस दर्ज करा दिया। पुलिस ने तलाशी के बाद आरोपी पति को हिरासत में लिया। जेल में पूछताछ के दौरान जो राज खुला, सभी भौंचक्के रह गए।

आरोप कृष्णा सेन ने पुलिस को बताया कि वह महिला है। ऐसे में वह किसी महिला से ही कैसे शादी कर सकता है। इसके बाद पुलिस ने उसकी मेडिकल जांच कराई, तो इस बात की पुष्टि हो गई कि वह महिला ही है, लेकिन पुलिस भी इस बात से हैरान थी कि तीन साल तक दो महिलाओं के साथ वह कैसे रही और किस तरह उनसे शारीरिक संबंध बनाए।

पुलिस पूछताछ में स्वीटी ऊर्फ कृष्णा सेन ने बताया कि उसने ऑनलाइन साइट से सेक्स टॉय मंगाए थे। रात को कमरे में अंधेरा करने के बाद सेक्स टॉयज के जरिए वह महिलाओं के साथ शारीरिक संबंध बनाती थी। वह कभी उनके सामने न तो कपड़े बदलती, न ही नहाने के बाद बिना कपड़े के बाहर आती थी। पुरुषों के सारे व्यवहार करती थी।

पुलिस ने बताया कि आरोपी स्वीटी ऊर्फ कृष्णा सेन के खिलाफ केस दर्ज करके जेल भेज दिया गया है। युवती ने जालसाली के साथ ही दोनों महिलाओं के साथ ठगी भी की है। उनका यौन उत्पीड़न किया है। यहां तक की उसने सारे दस्तावेज भी पुरुष के तौर पर फर्जी बनाए हुए हैं। इन दस्तावेजों को जब्त करके उसके खिलाफ जांच की जा रही है।

आग लगने से 40 परिवार हुये बेघर

उत्तरकाशी जिले के मोरी विकासखंड के सावनी गांव में रात्रि समय पर अचानक आग लग गयी। आग ने इतना भयंकर रूप धारण कर लिया कि अपनी चपेट में करीब दो सौ मवेशियों व करीब 40 मकानों को भस्म कर दिया। मकानों के जल जाने से करीब 40 परिवारों के समक्ष छत चली गयी।

बताया जा रहा है कि गांव में सिर्फ चार भवन ही सुरक्षित बचे। अधिकांश मकान लकड़ी के थे। ऐसे में आग पर काबू पाना भी मुश्किल हो गया। इस दुर्गम इलाके में प्रशासन की टीम भी मौके पर सुबह तक नहीं पहुंच सकी। घटना आधी रात के बाद करीब एक बजे की है।

उत्तरकाशी जिला मुख्यालय से 200 किलोमीटर दूर सावणी गांव हिमाचल की सीमा से लगा है। निकटतम सड़क स्टेशन जखोल गांव से सावणी पहुंचने के लिए सात किलोमीटर की पैदल दूरी तय करनी पड़ती है। यहां एक घर में लगी आग ने विकराल रूप लेना शुरू किया कि उसकी जद में एक-एक करते दूसरे मकान भी आने लगे।

देखते ही देखते पूरा गांव आग के गोले में तब्दील हो गया। ग्रामीण घरों से बाहर निकले और मवेशियों को भी बचाने का प्रयास किया, लेकिन तब तक करीब दौ सो मवेशी जल कर मर गए। आग बुझाने के ग्रामीणों के प्रयास भी सफल नहीं हो सके। जैसे-जैसे आग बढ़ती गई तो ग्रामीण अपने बच्चों सहित खेतों की ओर भागे। पूरे गांव में चीख-पुकार मचने लगी।

करीब रात ढाई बजे जिला प्रशासन को आग की सूचना मिली। प्रशासन और पुलिस की टीम सावणी गांव के लिए रवाना हुई। जिलाधिकारी डॉ आशीष चौहान ने बताया कि राहत और बचाव टीम तथा प्रशासन की टीम को मौके पर भेजा गया।

कला धार्मिक कट्टरपंथ के खिलाफ मजबूत हथियारः विजयन

प्रिया प्रकाश वारियर के वायरल गाने पर विवाद बढ़ता ही जा रहा है। इस मामले पर केरल के सीएम पी विजयन ने फिल्म के गाने के समर्थन में बोलते हुए कहा कि इसी गाने के खिलाफ मजहबी भावनाओं को आहत करने को लेकर पुलिस में शिकायत दर्ज कराई गई है। सीएम ने कहा कि किसी भी प्रकार की असहिष्णुता को स्वीकार नहीं किया जा सकता है।

विजयन ने फेसबुक पर एक पोस्ट में कहा कि कला और विचार की स्वतंत्र अभिव्यक्ति के खिलाफ असहिष्णुता को स्वीकार नहीं किया जा सकता है। ‘मणिक्या मालारया पूवी’ गाने को लेकर हैदराबाद में फिल्म निर्देशक उमर लुलु के खिलाफ पुलिस में शिकायत दर्ज कराई गई है।

केरल के सीएम ने कहा कि इस मामले में अगर किसी को शक है कि हिन्दू और मुस्लिम कट्टरपंथियों ने हाथ मिला लिया है तो उन्हें दोष नहीं दिया जा सकता। विजयन ने कहा कि यह गाना पारंपरिक मुस्लिम गीत का रीमिक्स है। साल 1978 में इसे आकाशवाणी ने भी प्रसारित किया था।

विजयन ने कहा कि कला और साहित्य धार्मिक कट्टरपंथ और सांप्रदायिकता के खिलाफ मजबूत हथियार है।

पहले भी फिल्म को लेकर धार्मिक भावनाएं आहत करने के आरोप में एफआईआर दर्ज हुई थी और मुंबई में राजा फाउंडेशन ने सेंसर बोर्ड को चिट्ठी लिखकर गाने पर तत्काल बैन लगाने की मांग की थी।

उत्तर प्रदेश में बदमाश बोले, अब हम सुधर गये है, हमें जीने दो।

उत्तर प्रदेश में बदमाश अपनी जान के लिये भीख मांगने पर मजबूर है। यहां बदमाश मेहनत व मजदूरी करके घर चलाने की कसम खा रहे है। इन दिनों यहां बदमाशों को अपने हाथ में तख्ती पकड़ पुलिस थानों के चक्कर लगाते हुये देखा जा रहा है।

यूपी में अब गुंडे कहते है, अब हम सुधर गए हैं, हमें जीने दो। योगी राज में दनादन पुलिस मुठभेड़ों से अपराधियों की बोलती बंद हो गयी है। साल भर में 40 बदमाश मारे जा चुके हैं। इसीलिए तो अब अपराधी बेल लेने के बदले जेल में ही रहना चाहते हैं।

इरशाद और सालिम बाबा, दोनों सगे भाई हैं। सालिम बाबा पर सहारनपुर के एक दारोगा की हत्या का आरोप है, जबकि इरशाद पर मर्डर समेत आठ मुकदमे चल रहे हैं। पिछले साल ही पुलिस ने इन्हें मुठभेड़ में पकड़ा था। अब जेल से जमानत पर पिछले ही हफ्ते छूटे हैं। दोनों भाई अपने जान की गुहार लगाते हुए शामली के एसपी के ऑफिस पहुँच गए। दोनों के हाथ में तख्ती थी, जिस पर लिखा था मैं भविष्य में कोई अपराध नहीं करूंगा और मेहनत-मजदूरी कर अपने और परिवार का भरण पोषण करूंगा।

इरशाद और सलमान ने एसपी को एक हलफनामा भी दिया कि वे अब आगे कोई अपराध नहीं करेंगे। सालिम ने बताया, अब वह एक अच्छे आदमी की तरह अपने परिवार के लिए जीना चाहता है। शामली के एसपी अजयपाल शर्मा अब एनकाउंटर मैन के नाम से जाने जाते हैं। वे यूपी में सबसे अधिक पुलिस मुठभेड़ करनेवाले एसपी बन गए है।

सीएम योगी आदित्यनाथ भी उनकी पीठ थपथपा चुके हैं। शर्मा ने कहा कि अगर अपराध करनेवालों का मन बदल जाए तो फिर ये एक नई शुरुआत होगी। उत्तर प्रदेश में हर 24 घंटों में तीन एनकाउंटर होते हैं। योगी आदित्यनाथ के राज में अब तक 1152 पुलिस मुठभेड़ हो चुकी हैं। जिसमें 39 ईनामी बदमाश मारे जा चुके हैं। शामली, मुजफ्फरनगर, आजमगढ़, मेरठ और लखनऊ में सबसे अधिक मुठभेड़ हुई हैं। लखनऊ के एसएसपी दीपक कुमार बताते हैं कि हम लगातार ईनामी अपराधियों का पीछा करते रहते हैं।

यूपी में बीजेपी की सरकार में अब तक 1991 गुंडे पुलिस मुठभेड़ में पकडे जा चुके हैं। एनकाऊंटर में चार पुलिस वाले भी शहीद हुए हैं। सीएम बनते ही योगी आदित्यनाथ ने गुंडों को राज्य छोड़ कर चले जाने की चेतावनी दी थी। उन्होंने कहा था जो ऐसा नहीं करेंगे उन्हें दुनिया ही छोड़नी पड़ेगी। यूपी पुलिस अब लुटेरों की लिस्ट बना रही है। उनकी कुंडली खंगाली जा रही है। लुटेरे राह चलते लोगों के मोबाईल, पर्स और गहने छीन लेते हैं, अब उनकी खैर नहीं है।

पुलिस एनकाउंटर के डर से कुछ अपराधियों को तो खुली हवा से अब जेल ही अच्छी लगने लगी है। लखनऊ में एक दारोगा पर गोली चलाने वाला और कई हत्यायों का आरोपी अंशु दीक्षित अब जेल में ही रहना चाहता है। यही हाल सलीम और सोहराब का है। जिसके नाम से ही कभी लखनऊ कांपने लगता था। वे अब जेल से बाहर नहीं आना चाहते हैं। ऐसे बदमाशों को लगता है कि अगर बाहर निकले तो शायद पुलिस हमें ठोंक देगी। इसीलिए यूपी की जेलों में अब नारे लगते है – हमें बेल नहीं जेल चाहिए।

कुछ गुंडे तो अपनी जमानत रद्द करवा कर फिर से जेल पहुँच गए हैं, लेकिन यूपी में कुछ पुलिस मुठभेड़ को लेकर सवाल भी उठने लगे हैं। आरोप है कि कुछ पुलिस अफसर फर्जी एनकाउंटर कर रहे हैं। ऐसे ही दो मामलों में मानवाधिकार आयोग ने यूपी सरकार को नोटिस भी भेजा है, लेकिन सीएम योगी आदित्यनाथ अपराधियों पर सख्ती के अपने फैसले से टस से मस होने को तैयार नहीं हैं।