400 साल तक चल सकता है मानव शरीर

योगगुरू बाबा रामदेव अपने बयानों को लेकर हमेशा सुर्खियों में रहते है। इस बार भी उन्होंने मानव जीवन को लेकर एक बड़ा बयान तक दे डाला है। बाबा के अनुसार मानव का जीवन कुछ इस तरह बना हुआ है कि वह 400 साल तक जीवित रह सकता है, परंतु वर्तमान में मनुष्य की जीवनशैली ठीक प्रकार से न होने के कारण वह रोगग्रस्त हो जाता है। जिस कारण वह अपना जीवन छोटा कर बैठता है और ऊपर से नशीली चीजों के सेवन आदि से भी वह अपनी आयु कम कर लेता है।
योगगुरु रामदेव ने मानव जीवन को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा है कि मानव शरीर इस तरह बना है कि 400 साल तक चल सकता है, लेकिन खराब जीवनशैली के चलते यह बीमारी का शिकार हो जाता है और इसका समय से पहले ही अंत हो जाता है। उन्होंने लोगों से कहा कि वे स्वस्थ भोजन और व्यायाम अपनाकर खुद को बीमारियों और दवाओं से मुक्त रखें।
रामदेव ने 12वें नेशनल क्वालिटी कान्क्लेव में कहा, ‘मानव शरीर ऐसे बना है कि वह 400 वर्ष चले, लेकिन हम अधिक भोजन और बदतर जीवनशैली से अपने ही शरीर पर अत्याचार करते हैं। हम उच्च रक्तचाप, दिल की बीमारी समेत अन्य बीमारियों को निमंत्रण देते हैं। ये हमारी जिंदगी को कम कर देते हैं और चिकित्सकों व दवाओं पर निर्भर बना देता है।’
योगगुरु रामदेव ने यह भी बताया कि एक व्यक्ति स्वस्थ रहने के लिए किस तरह से अपनी दिनचर्या और खाने की आदतों पर नियंत्रण रख सकता है। उन्होंने दावा किया कि भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने ऐसा करके अपना वजन 38 किलोग्राम कम किया। उन्होंने कहा कि पौष्टिक आहार और योग करके 400 साल तक जीवित रहा जा सकता है।

हिन्दुत्व की रक्षा में स्वामी दयानंद का अहम योगदान

स्वामी दयानंद आश्रम, ऋषिकेश में आयोजित कार्यक्रम में राज्यपाल डॉ.कृष्ण कांत पाल व मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने ब्रह्मलीन पूज्य स्वामी दयानंद सरस्वती जी को श्रद्धांजलि अर्पित की। राज्यपाल ने स्वामी जी की पुण्य स्मृति में नमन करते हुए कहा कि पूज्य स्वामी दयानंद सरस्वती जी ज्ञान, दर्शन व आध्यात्मिकता की अद्भुत मिसाल थे। अध्यात्म के साथ ही मानव जाति की सेवा में भी उनका अविस्मरणीय योगदान रहा है। स्वामीजी ने ज्ञानदर्शन व सेवा भाव का जो रास्ता हमें दिखाया है, उस पर चलकर ही मानव कल्याण सम्भव है। मेरा परम सौभाग्य है कि सितम्बर 2015 में प्रधानमंत्री के साथ आश्रम में आने पर मुझे स्वामीजी का आर्शीवाद मिला था। राज्यपाल व मुख्यमंत्री ने पूज्य स्वामी जी द्वारा समयसमय पर विभिन्न अवसरों पर दिए गए व्याख्यानों व व्यक्त किए गए विचारों के संकलन पर आधारित ग्रन्थ का विमोचन भी किया। राज्यपाल ने इसे पुनित कार्य बताते हुए कहा कि ये ग्रन्थ समाज का दिशा निर्देश करने के साथ ही मानव उत्थान में महत्वपूर्ण योगदान करेगा। राज्यपाल ने कहा कि भारतीय सभ्यता विश्व की प्राचीनतम सभ्यता है। अन्य समकालीन सभ्यताओं में से बहुत सी सभ्यताएं पूरी तरह समाप्त हो चुकी हैं। यह भारतीय सभ्यता ही है जो कि 5 हजार वर्षों से अपना मौलिक स्वरूप बनाए हुए है। धर्म, अध्यात्म व मूल्य आधारित व्यवस्था ही वे ताकतें हैं जिनके कारण भारतीय सभ्यता सदियों से कभी न रूकने वाली धारा की तरह लगातार प्रवाहित हो रही है। राज्यपाल ने कहा कि हमारे ऋषिमुनियों व विद्वानों के हजारों वर्षों के गहन चिंतन से रचित वेद, उपनिषद, महाकाव्य, पुराण आदि महान मार्गदर्शी रचनाएं, मानव कल्याण का मार्ग प्रशस्त कर रही हैं। हमारा दायित्व है कि हम अपने अध्यात्म, ज्ञान व दर्शन की विरासत को आने वाली पीढ़ियों के लिए संजो कर रखें। विश्व शांति, विश्व कल्याण और विश्वबंधुत्व की भारतीय दर्शन की अवधारणा वर्तमान परिप्रेक्ष्य में पूरी दुनिया के लिए और भी अधिक प्रासंगिक हो गई है। वेदांतों में वर्णित ज्ञान से सम्पूर्ण मानवता का कल्याण सम्भव है। स्वामी दयानंद सरस्वती जी को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए त्रिवेंद्र सिंह रावत ने कहा कि भारत, भारतीयता एवं हिन्दुत्व की रक्षा में स्वामी जी का योगदान भारत ही नहीं बल्कि विश्वभर में स्वीकार्य है। जब भारत एवं भारत की संस्कृति की बात होती है तो उनका स्मरण स्वाभाविक है। मुख्यमंत्री ने कहा कि इसकी परम्परा आदि शंकराचार्य से प्रारंभ हुई, जिसे अग्रदूत के रूप में आगे बढ़ाने का कार्य स्वामी जी ने किया। आज उनके लाखों भक्त इस परंपरा को आगे बढ़ा रहे हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि आज भारत की संस्कृति में प्रहार हो रहे हैं। स्वामी जी के अनुयायी निश्चित रूप से ऐसा नहीं होने देंगे। मैं इस अवसर पर स्वामी जी को श्रद्धांजलि अर्पित करता हूं। उनके द्वारा दिया गया ज्ञान हम सब का आगे भी मार्गदर्शन करता रहेगा।

हाईकोर्ट ने की याचिका खारिज, की उर्दू मोअल्लिम डिग्री अघोषित

उत्तराखंड में अब शिक्षक पद पर नियुक्ति के लिए उर्दू मोअल्लिम डिग्री अयोग्य घोषित हो गई है। राज्य में समकक्ष परीक्षा पास और उर्दू विषय में डिग्री के बिना प्राथमिक सहायक अध्यापक नहीं बन सकते। शिक्षक बनने के टीईटी जरूरी है।
आपको बता दें कि उधमसिंहनगर जिले के मो हफीज व अन्य ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर सहायक अध्यापक के पदों पर आवेदन निरस्त करने को चुनौती दी। इनका कहना था कि वह उर्दू मोअल्लिम पास हैं जो बीटीसी के समकक्ष मानी जाती है। उत्तर प्रदेश में भी यही नियम लागू है तो एकलपीठ ने याचिका स्वीकार कर इन अभ्यर्थियों को भर्ती प्रक्रिया में शामिल करने का आदेश पारित कर दिया। फैसले के खिलाफ सरकार ने विशेष अपील दायर की। सरकार की ओर से मुख्य स्थाई अधिवक्ता परेश त्रिपाठी ने बताया कि 2012 की निवमावली के अनुसार यह डिग्री पद के योग्य नहीं है। उत्तराखंड में उर्दू मुख्य विषय के साथ स्नातक, दो साल का बीटीसी व टीईटी के बाद ही शिक्षक बन सकते हैं। उर्दू मोअल्लिम एक साल का है और राज्य में समकक्ष डिग्री को नौकरी के लिए अयोग्य घोषित किया जा चुका है, ऐसे में आवेदक पात्र नही है।
मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति केएम जोसफ व न्यायमूर्ति आलोक सिंह की खंडपीठ ने सरकार की दलीलें स्वीकार कर अभ्यर्थियों की याचिका को खारिज कर दिया।

गौरक्षकों की गुंडागर्दी रोके राज्य सरकार

गौ रक्षकों की गुंडागर्दी को रोकने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने सीधे तौर पर राज्यों को जिम्मेदार ठहराया है और कहा कि राज्य सरकारें इसे रोके। कोर्ट ने कहा कि कानून और व्यवस्था का मामला पूरी तरह राज्य का विषय है। कोर्ट को केंद्र सरकार से इस बारे में नीति बनाने के लिए नहीं कहना चाहिए।
शीर्ष कोर्ट ने कहा कि इस बारे में सीधे तौर पर राज्यों के लिए आदेश पारित किए जाएंगे। कोर्ट का कहना है कि हमारे आदेश प्राथमिकता के आधार पर होंगे। गौ रक्षकों की गुंडागर्दी के शिकार लोगों को मुआवजा देने के मामले को अलग से डील किया जाना चाहिए।
कोर्ट ने सभी राज्यों को टास्क फोर्स के गठन पर अपनी रिपोर्ट सबमिट करने को कहा है। मामले पर अगली सुनवाई 30 अक्टूबर को होगी।
कोर्ट मे दिया था नोडल ऑफिसर नियुक्त करने का आदेश
बता दें कि पिछली सुनवाई पर सुप्रीम कोर्ट ने देशभर में बढ़ते कथित गौरक्षकों के तांडव पर रोक लगाने के लिए हर जिले में सीनियर पुलिस ऑफिसर तैनात करने का आदेश दिया था। ताकि इस तरह की हिंसा की घटनाओं को रोकने और इसे अंजाम देने वालों के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए कदम उठाएं।
शीर्ष अदालत ने राज्यों को एक सप्ताह में अपना टास्क फोर्स बनाने के लिए कहा था, जिसमें वरिष्ठ पुलिसकर्मियों को नोडल अधिकारी के रूप में रखा जाएगा।

एनआरआई ही भारत की असली रीढ़

अमेरिका दौरे पर गए कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने बुधवार को न्यूयॉर्क के ऐतिहासिक टाइम्स स्क्वायर में भारतीय समुदाय को संबोधित किया। मैरियट मारक्विस होटल में आयोजित कार्यक्रम में राहुल ने एक बार फिर रोजगार के मुद्दे पर मोदी सरकार को घेरा। साथ ही हिंसक घटनाओं और असहिष्णुता को लेकर दुनिया में भारत की छवि बिगड़ने की बात कही।
भारत की छवि बिगड़ी
कांग्रेस उपाध्यक्ष ने विदेशों में भारत की छवि बिगड़ने की बात कहते हुए कहा, भारत हजारों साल से एकता और शांति के साथ रहने के लिए दुनियाभर में जाना जाता है, लेकिन अब इस छवि को बिगाड़ा जा रहा है। देश में कुछ ऐसी ताकते हैं, जो भारत को बांट रही हैं।
इतना ही नहीं, राहुल गांधी ने इससे आगे ये भी कहा कि अमेरिका के नेताओं ने उनसे इस संबंध में सवाल किए। राहुल ने कहा, अमेरिका में कई डेमोक्रेटिक और रिपब्लिक नेताओं ने मुझसे पूछा कि आपके देश में आजकल ये क्या चल रहा है। आपका देश तो शांति के लिए जाना जाता था। राहुल ने कहा, लोग पूछ रहे हैं कि भारत की सहिष्णुता को क्या हुआ?
रोजगार है रियल चौलेंज
राहुल गांधी ने कहा, भारत में 30 हजार युवा हर दिन जॉब मार्केट में आते हैं, मगर उनमें से सिर्फ 450 को ही रोजगार मिल पाता है। यही आज भारत के लिए सबसे बड़ा चैलेंज है।
इस समस्या के बाद राहुल ने इसकी वजह बताते हुए भी मोदी सरकार को निशाने पर लिया। राहुल ने कहा, रोजगार की समस्या इसलिए पनप रही है, क्योंकि आजकल सिर्फ 50-60 कंपनियों पर ही फोकस किया जा रहा है। अगर, रोजगार बढ़ाने हैं तो छोटी और मझोली कंपनियों को भी बढ़ावा देना होगा। इससे पहले राहुल ने एनआरआई समुदाय की जमकर तारीफ की और उन्हें भारत की रीढ़ बताया। राहुल ने बताया कि कांग्रेस का असली आंदोलन एनआरआई मूवमेंट ही था। राहुल ने कहा, गांधी, नेहरू, पटेल सभी एनआरआई थे। ये सभी लोग विदेशों में रहे और इन्होंने भारत लौटकर देश के लिए काम किया। कुर्रियन भी एक एनआरआई थे, जो भारत में दुग्ध क्रांति लाए।
कांग्रेस का आइडिया हजारों साल पुराना
राहुल गांधी ने इस दौरान कांग्रेस के विचारों का भी बखान किया। राहुल ने कहा कि कांग्रेस का विचार उसके संगठन की स्थापना से नहीं है, बल्कि ये विचार हजारों साल पुराना है। उन्होंने कहा कि ये विचार सच के साथ खड़े होना है, जो भारत की विरासत रहा है और महात्मा गांधी भी उसी विचार के साथ खड़े रहे।
ये है जनसभा का मकसद
दरअसल, राहुल गांधी की यह जनसभा कांग्रेस की विदेश शाखा की ओर से प्रवासी भारतीयों (एनआरआई) को पार्टी में शामिल करने की योजना के तहत आयोजित की गई है। कांग्रेस के प्रवासी विभाग के अध्यक्ष सैम पित्रोदा हैं। इससे पहले राहुल गांधी ने अमेरिका की प्रिंस्टन यूनिवर्सिटी में छात्रों से संवाद किया। इस दौरान राहुल ने नरेंद्र मोदी सरकार पर जमकर वार किया। राहुल ने यहां कहा कि मोदी सरकार रोजगार पैदा करने में फेल हो रही है। हालांकि, यहां कांग्रेस उपाध्यक्ष ने ये भी स्वीकार किया कि मोदी के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार को भारत में इसलिए समर्थन मिला, क्योंकि लोग कांग्रेस पार्टी से बेरोजगारी के मुद्दे पर नाराज थे।

2022 तक देश के हर परिवार के पास अपनी छत

रोहिंग्या मसले पर गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने कहा है कि म्यांमार से आए ये रोहिंग्या रिफ्यूजी नहीं हैं। रोहिंग्या रिफ्यूजी के तौर पर भारत नहीं आए हैं। दिल्ली में एनएचआरसी के कार्यक्रम में गृहमंत्री बोले कि रोहिंग्या समुदाय के लोगों से भारत की सुरक्षा को खतरा है।
राजनाथ ने कहा कि यदि भारत रोहिंग्या को डिपोर्ट करता है तो उसपर लोगों को आपत्ति क्यों है। जबकि बर्मा उन्हें लेने के लिए तैयार है। उन्होंने कहा कि भारत ने यूएन रिफ्यूजी कन्वेंशन साइन नहीं किया है। राजनाथ ने कहा कि भारत के अंदर जो भी रिसोर्स है उस पर हर भारतीय का अधिकार है। दूसरों के मानवाधिकार की चिंता करने से पहले अपने मानवाधिकारों की बात करनी चाहिए।
गृहमंत्री ने कार्यक्रम में कहा कि मोदी सरकार ने गुड गवर्नेंस की नीति अपनाई है, हम उस पर डटे हुए हैं। उन्होंने कहा कि पहले कोयला खदानों को लेकर पारदर्शिता नहीं थी, हमारी सरकार इसको लेकर पूरी तरह पारदर्शी है।
राजनाथ ने कहा कि आज जो लोग ह्यूमन राईट की बात करते हैं, वो एनिमल राइट की बात करते हैं, भारत युगों-युगों से इन सभी राईट को बात करता है। गृहमंत्री ने कहा कि भारत में ह्यूमन राईट शांति और कल्याण से निकले है, वही वेस्टर्न ह्यूमन राईट संघर्ष से निकले हैं।
जीएसटी पर राजनाथ बोले कि जीएसटी से कुछ समय के लिए लोगों को परेशानी हो सकती है, पर आने वाले समय मे इसका फायदा सबको होगा। 2022 तक देश के हर परिवार के पास अपना एक मकान हो जो गुड़ गवर्नेंस का ही पार्ट है।

डेरे की जमीन में 600 कंकाल

डेरा सच्चा सौदा की चेयरपर्सन विपश्यना इंसा और वाइस प्रेसिडेंट डॉ. पीआर नैन से हरियाणा पुलिस की एसआईटी लगातार पूछताछ कर रही है। पुलिस जांच में पता लगा है कि डेरा सच्चा सौदा के सिरसा मुख्यालय की जमीन और खेतों में करीब 600 लोगों की हड्डियां और कंकाल मौजूद हैं। पीआर नैन ने भी पूछताछ के दौरान ये बात स्वीकार की है।
पीआर नैन ने पुलिस को दलील दी है कि डेरा अनुयायियों का ऐसा विश्वास है कि मौत के बाद यदि उनकी अस्थियां डेरे की जमीन में दबा दी जाएंगी, तो उन्हें मोक्ष मिलेगा। इसी वजह से डेरे की जमीन में करीब 600 लोगों की अस्थियां और कंकाल हैं। हालांकि, पुलिस इस एंगल पर भी जांच कर रही है कि लोगों को मारकर खेतों में उनकी लाशें दबा दी गई हैं।
डेरे के कुछ पूर्व सेवादारों ने आरोप लगाया था कि डेरा या राम रहीम के खिलाफ बोलने वाले लोगों की हत्या करके उनकी लाश खेतों में दफना दी जाती थीं। उसके उपर पेड़ लगा दिए जाते थे, ताकि किसी को इसके बारे में पता न चल सके। उनका कहना था कि राज फाश होने के डर से डेरे में इन जगहों पर खुदाई करने या पेड़ काटने तक की मनाही थी।
इससे पहले एसआईटी ने विपश्यना इंसा से करीब सवा तीन घंटे तक गहन पूछताछ की थी। डीएसपी कुलदीप बैनीवाल ने उससे 100 से ज्यादा सवाल किए, लेकिन वह उसके जवाब से संतुष्ट नहीं हुए हैं। इसलिए उससे दोबारा पूछताछ की तैयारी की जा रही है। वहीं डेरा के वाइस प्रेसिडेंट डॉ. पीआर नैन और विपश्यना के जवाब में विरोधाभास देखने को मिल रहा है।
पुलिस का कहना है कि यदि इन दोनों ने संतोषजनक जवाब नहीं दिया, तो इनको गिरफ्तार भी किया जा सकता है। दोनों ने पंचकूला में हुई हिंसा को लेकर अलग-अलग बातें कही है। पीआर नैन पर हिंसा कराने के लिए 5 करोड़ की फंडिंग का आरोप है। इन पैसों से पंचकूला डेरा प्रभारी चामकुमार सिंह ने गुंडों को हिंसा के लिए तैयार किया था। चामकुमार हिरासत में है।

रिहायशी इलाकों में घुसा टुटे बांध का पानी

बिहार में भागलपुर के कहलगांव में 40 साल पहले शुरू हुए बटेश्वर स्थान गंगा पंप नहर परियोजना के ऊपर एक बार फिर ग्रहण लग गया। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार बुधवार को इस परियोजना का उद्घाटन करने वाले थे, लेकिन उससे पहले ही मंगलवार की दोपहर को गंगा पंप नहर का बांध टूट गया, जिसकी वजह से कहलगांव में कई रिहायशी इलाकों में नहर का पानी घुस गया।
इस बांध के टूटने की वजह से इसके उद्घाटन को फिलहाल टाल दिया गया है। घटना की जानकारी मिलने के बाद भागलपुर के डीएम और एसएसपी तुरंत घटनास्थल पर पहुंचे। नहर का बांध टूटने की वजह से कहलगांव इलाके में अफरा-तफरी का माहौल है और लोग डरे-सहमे है। नहर का बांध टूटने की वजह से एनटीपीसी परियोजना जो कि कहलगांव में चल रही है, उसके रिहायशी इलाकों में पानी घुस गया है।
सूत्रों के मुताबिक, दो दिन पूर्व भी ट्रायल के लिए जब नहर में पानी छोड़ा गया था तो कई जगह पर बांध में लीकेज देखने को मिला। जिसकी वजह से परियोजना से जुड़े लोग और अभियंताओं में हाहाकार मच गया था। इस परियोजना में काम कर रहे अभियंताओं ने बांध में लीकेज की समस्या को ठीक करने की कोशिश की मगर ऐसा लगता है। इससे कोई सफलता हासिल नहीं हुई और इसकी वजह से मंगलवार को दोपहर को उद्घाटन से पहले ही नहर का यह बांध टूट गया।
गौरतलब है कि इस परियोजना से बिहार समय से झारखंड को भी इसका पूरा फायदा मिलने वाला था। मगर नहर का बांध टूट जाने की वजह से एक बार फिर से इस परियोजना की शुरुआत में देरी हो गई है। वहीं सीएम नीतीश कुमार ने भी अब अपना दौरा टाल दिया है।

कम उम्र में शादी को पहुंचे प्रेमी जोड़े

हम नाबालिग है तो क्या हुआ? बालिग होते ही पति इसी को बनाऊंगी। सुनने में बड़ा ही अजीब लग रहा होगा, लेकिन यह वाकया देखने में आया है। जहां एक नाबालिग लड़का व लड़की में पढ़ाई के दौरान ही आपस में प्रेस पनपा। प्रेम के जाल ने दोनों को ऐसा फांसा कि दोनों शादी के लिये कानूनन उम्र न होने पर भी शादी को मंदिर जा पहुंचे। फिर क्या था, पीछे-पीछे माता-पिता भी पहुंचे। उधर घटना की जानकारी मिलते ही पुलिस भी मंदिर पहुंची। पुलिस से लड़की ने जो कहा, वह वाकई हिम्मत भरा जवाब था। बिहार पटना के कटिहार जिले में एक नबालिग प्रेमी जोड़ा घर से भागकर शादी के लिए मंदिर पहुंचा ही की, इतने में लड़के के घरवाले भी मंदिर पहुंच लड़के की जमकर पिटाई कर दी। वहीं पुलिस भी मंदिर पहुंच गई और प्रेमी जोड़े को पकड़कर थाने ले आई।
घटना कटिहार नगर थाना क्षेत्र के कालीबाड़ी मंदिर की है। जहां कुरेठा गांव के रहने वाले एक युवक को मैट्रिक के कोचिंग के दौरान वहीं पढ़ने वाली युवती से प्यार हो गया। फिर दोनों शादी के लिए गांव छोड़ शहर पहुंच गए। मंदिर में जैसे ही दोनों शादी के लिए पहुंचे उनके परिजन पहले से ही वहां मौजूद थे। उनलोगों ने वहीं पर पिटाई शुरू कर दी।
वहीं, पुलिस के सामने थाने में भी दोनों ने एक-दूसरे के साथ रहने की इच्छा जताई। लड़की का कहना था कि लड़के के घरवाले शादी के लिए तैयार नहीं है। कटिहार नगर थाना के पुलिस इंस्पेक्टर ने विद्यानंद पांडेय ने बताया कि बरामद प्रेमी जोड़ा नाबालिग है और मेडिकल टेस्ट के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।

यूपी में नहीं थम रहे रेल हादसे

देश में होते रेल हादसों के बाद केंद्र सरकार ने रेल मंत्री जरूर बदल दिया है लेकिन रेल पटरी पर आने का नाम नहीं ले रही है। ताजा मामले में मंगलवार को यूपी के सीतापुर में 54322 बालामऊ-बुढवल पैसेंजर ट्रेन पटरी से उतरने का मामला सामने आया है। यह ट्रेन बुढवल से चलकर बालामऊ जा रही थी। ट्रेन डिरेल की घटना शहर के बस स्टॉप के करीब पुलिस लाइन रेलवे क्रासिंग पर हुई।
यह ट्रेन सीतापुर कैंट स्टेशन से चलकर कुछ ही दूर पर पहुंची थी। तभी पुलिस लाइन रेलवे क्रासिंग पार करते समय ट्रेन के इंजन के दो पहिये पटरी से उतर गये। इंजन के पहिये पटरी से उतरते ही उसमें सवार यात्रियों में हड़कंप मच गया। हालांकि गनीमत यह रही कि हादसे में सभी यात्री सुरक्षित हैं। ट्रेन डिरेल होने की सूचना मिलते ही रेलवे के आला अधिकारियों ने मौके पर पहुंच कर जांच पड़ताल शुरू कर दी। ट्रेन डिरेल की घटना रेलवे क्रासिंग पर होने के चलते लखीमपुर-सीतापुर सड़क यातायात बाधित हो गया और रेलवे क्रासिंग पर लम्बा जाम लग गया। रेलवे और पुलिस के अधिकारियों ने मौके पर स्थिति को नियंत्रण में लिया और यातायात फिर से बहाल किया गया।
रेलवे अधिकारियों के मुलाबित ट्रैक की क्लिप और तकनीकी मरम्मत करने के बाद रूट पर फिर से संचालन शुरू कराया गया। सीतापुर में कचहरी हॉल्ट पर ट्रैक के परीक्षण के दौरान एक मालगाड़ी के भी 2 डिब्बे पटरी से उतर गए।
बीते दिनों खतौली में हुए बड़े रेल हादसे के बाद भी ट्रेनों का पटरियों से उतरना जारी है। मुजफ्फरनगर के खतौती में ट्रेन हादसे में 23 लोगों की जान चली गए थी। औरेया में भी कैफियत एक्सप्रेस भी कुछ दिन पहले डिरेल हो गई थी, जिसमें करीब 21 यात्री घायल हुए थे।