देहरादून होगा देश का ग्रेविटी आधारित पेयजल उपलब्ध कराने वाला पहला स्मार्ट शहर

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने शनिवार को मसूरी में आयोजित उत्तराखण्ड अर्बन ट्रांस्फोरमेशन समिट 2019 का शुभारम्भ किया। उन्होंने समिट में प्रतिभाग कर रहे केन्द्रीय शहरी विकास मंत्रालय के संयुक्त सचिव तथा स्मार्ट सिटी के मिशन डायरेक्टर के साथ ही देश के 12 प्रमुख स्मार्ट सिटी के सी.ई.ओ एवं स्मार्ट सिटी मिशन से जुड़ी कार्यदायी संस्थाओं के प्रमुखों का उत्तराखण्ड में स्वागत करते हुए कहा कि इस समिट में होने वाला मंथन स्मार्ट सिटी मिशन को गति प्रदान करेगा। इससे आपसी अनुभवों एवं ज्ञान का भी आदान प्रदान होगा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि समिट में होने वाले आपसी विचार विमर्श एवं अनुभव स्मार्ट सिटी के कार्यों को नई दिशा प्रदान करने में मददगार रहेगा। देहरादून स्मार्ट सिटी का देश-भर में 99 से 32वें पायदान पर आने पर उन्होंने प्रसन्नता व्यक्त की। देहरादून का स्मार्ट सिटी बनने में उन्होंने समेकित प्रयासों की भी जरूरत बतायी। मुख्यमंत्री ने कहा कि हमें अपनी सोच भी स्मार्ट बनानी होगी। जब हमारी सोच अच्छी होगी तो उनके परिणाम भी अच्छे होंगे।

मुख्यमंत्री ने कहा कि आधुनिक तकनीकी का बेहतर इस्तेमाल कर ही बेहतर परिणाम प्राप्त किये जा सकते हैं। उन्होंने कहा कि कोशी एवं रिस्पना में एक घंटे में लाखों वृक्षों का रोपण जन सहभागिता का अनूठा उदाहरण है। सौग बांध से देहरादून को ग्रेविटी आधारित पेयजल उपलब्ध कराये जाने की योजना भी शीघ्र धरातल पर उतरेगी। इसमें देहरादून को ग्रेविटी आधारित पेयजल उपलब्ध होने के साथ ही करोड़ों के बिजली व्यय की बचत होगी, भूजल स्तर में सुधार होगा तथा रिस्पना नदी को ऋषिपर्णा बनाने की भी राह प्रशस्त होगी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखण्ड को पोलीथीन मुक्त प्रदेश बनाने की दिशा में हमारे प्रयास साकार होते दिखाई दे रहें हैं। देश में इसकी शुरूआत हो रही है तब हम इस दिशा में काफी आगे बढ़ चुके हैं। उन्होंने देहरादून शहर को पोलीथीन मुक्त बनने के लिए नगर निगम को 50 लाख रूपये देने की भी घोषणा की।

उत्तरांचल पंजाबी महिला विंग के बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ अभियान की सीएम ने की प्रशंसा

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने मंगलवार को मुख्यमंत्री आवास में उत्तरांचल पंजाबी महिला विंग क्लब, ऋषिकेश द्वारा कन्या भ्रूण हत्या रोके जाने विषयक पोस्टर को लॉच किया। मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र ने कहा कि उत्तरांचल पंजाबी महिला विंग क्लब द्वारा ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ अभियान में सहभाग किया जा रहा है, यह एक सराहनीय प्रयास है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने हरियाणा के पानीपत जिले से इस अभियान की शुरूआत की, जहां बेटियों की संख्या सबसे कम थी। उत्तराखण्ड में पिछले दो सालों में बाल लिंगानुपात 887 से बढ़कर 934 हुआ है। उन्होंने कहा कि जब कोई प्रयास अभियान का रूप लेता है और उसमें जनसहभागिता होती है, तो वह अभियान अवश्य सफल होता है। उन्होंने कहा कि उत्तराखण्ड में पॉलिथीन मुक्ति के लिए जल्द ही व्यापक स्तर पर अभियान चलाया जायेगा। हरेला पर्व पर एक ही दिन में व्यापक स्तर पर वृक्षारोपण की योजना बनाई जा रही है। नदियों के पुनर्जीवीकरण की दिशा में राज्य सरकार कार्य कर रही है।

उत्तरांचल पंजाबी महिला विंग क्लब द्वारा ‘सेव गर्ल्स चाईल्ड’कार्यक्रम के तहत व्यापक स्तर पर जन जागरूकता अभियान चलाया जायेगा। इसके अलावा क्लब द्वारा समय-समय पर ब्लड डोनेशन शिविर, सिंगल यूज प्लास्टिक का बहिष्कार, अस्पतालों में फल वितरण, व बुजुर्गों से मिलकर उनकी समस्याओं के समाधान के लिए प्रयास किये जा रहे हैं।

इस अवसर पर विधायक हरवंश कपूर, उत्तरांचल पंजाबी महासभा से एसपी कोचर, हरीश नारंग, हरपाल सिंह सेठी, राजीव सच्चर, नीलम खुराना, पूजा नन्दा आदि उपस्थित रहे।

आरोपी चाहे धरती पर हो या आकाश में, हर हाल में गिरफ्तार करें पुलिसः टीएसआर

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने गृह, आबकारी व पुलिस विभाग के अधिकारियों को रविवार को तलब किया। उन्होंने अधिकारियों से पथरिया पीर, देहरादून की घटना व इसके बाद की गई कार्यवाही की विस्तार से जानकारी ली। मुख्यमंत्री ने कहा कि इस पूरे मामले में जिस व्यक्ति का मुख्य आदमी का नाम सामने आ रहा है, उसे जल्द से जल्द गिरफ्तार किया जाए। वह आदमी चाहे धरती पे हो, आसमान में हो या पाताल में हो, हर हाल में पकङा जाना चाहिए।
मुख्यमंत्री ने कहा कि अगर किसी के संरक्षण की बात पाई जाती है, तो इसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। पूरे घटनाक्रम की गहराई से जांच की जाए। उन्होंने सख्त नाराजगी जताते हुए कहा कि शहर के बीचों बीच कुछ चल रहा हो और हमारी एजेंसियों को पता न चले, कैसे हो सकता है। घटना के हर पहलू की बारीकी से जांच की जाए। इसमें जो भी दोषी या जिम्मेदार पाया जाएगा उस पर सख्त कार्यवाही की जाएगी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि पूरे प्रदेश में पुलिस व आबकारी विभाग अवैध शराब की छापेमारी के अभियान चलाए। इसमें जिन लोगों की भी मिलीभगत हो, उन्हें पकड़ा जाए और सख्त से सख्त एक्शन लिया जाए। मुख्यमंत्री ने महकमें के अधिकारियों से कहा कि अगर अवैध शराब का व्यापार करने वालों के खिलाफ कार्यवाही को और सख्त करने के लिए आबकारी एक्ट में किसी प्रकार के संशोधन की जरूरत हो तो उसका प्रस्ताव तैयार करें। अवैध शराब या नशे के व्यापार को रोकने में आम जनता का भी सहयोग लिया जाए। कहीं से भी इस प्रकार की कोई शिकायत आती है तो उसे पूरी गम्भीरता से लिया जाए।
बैठक में मुख्य सचिव उत्पल कुमार सिंह, डीजी लाॅ एंड आर्डर अशोक कुमार, प्रमुख सचिव आनंदबर्द्धन, सचिव नितेश झा, आईजी गढ़वाल रेंज अजय रौतेला, आयुक्त आबकारी सुशील कुमार, जिलाधिकारी देहरादून सी.रविशंकर, एसएसपी अरूण मोहन जोशी मौजूद थे।

सतपाल और पांडेय ने क्यों की योगी सरकार की तारीफ, मानेंगे यूपी सरकार का फैसला!

उत्तर प्रदेश में लंबे समय से मंत्रियों का आयकर सरकार ही भर रही थी। इस पर अब योगी सरकार ने रोक लगाई है। उत्तराखंड चूंकि पहले उत्तर प्रदेश का ही अंग था इस कारण अविभाजित उत्तर प्रदेश से चली आ रही व्यवस्था यहां भी बदस्तूर जारी है। यानी मुख्यमंत्रियों व मंत्रियों का आयकर सरकार ही भर रही है। उत्तराखंड में मंत्रियों को वेतन भत्ते मिलाकर प्रतिमाह 4.40 लाख रुपये दिए जाते हैं। इनमें से 90 हजार रुपये केवल वेतन है। शेष अन्य भत्ते हैं। उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री और मंत्रियों के आयकर स्वयं भरने के निर्णय के बाद अब उत्तराखंड में भी इस दिशा में सकारात्मक पहल होती नजर आ रही है। त्रिवेंद्र सरकार के कैबिनेट मंत्री सतपाल महाराज और अरविंद पांडेय ने इसकी पैरवी की है।
कैबिनेट मंत्री सतपाल महाराज ने कहा कि मंत्रियों को सरकारी खजाने से नहीं, बल्कि अपना आयकर स्वयं भरना चाहिए। वह अपना आयकर स्वयं भरते हैं। वह इसका परीक्षण भी करेंगे। वहीं, कैबिनेट मंत्री अरविंद पांडेय ने कहा कि वह तो विधायक निधि के पक्ष में भी नहीं रहे हैं। इस कारण उनकी भावना को समझा जा सकता है। वहीं, उत्तर प्रदेश के मंत्रियों को 1.64 लाख रुपये प्रतिमाह वेतन भत्तों के रूप में दिए जाते हैं और उनका मूल वेतन 40 हजार रुपये हैं। इस लिहाज से उत्तराखंड के मंत्रियों का वेतन कहीं अधिक है। इसे देखते हुए प्रदेश में भी मुख्यमंत्रियों व मंत्रियों द्वारा आयकर भरने की मांग उठने लगी है। मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत भी इसका परीक्षण करने की बात कर चुके हैं। अब दो मंत्रियों ने मंत्रियों के स्वयं आयकर भरने को लेकर उठ रही मांग के समर्थन में कदम आगे बढ़ाए हैं। कैबिनेट मंत्री सतपाल महाराज ने कहा कि वह अपना टैक्स स्वयं भरते हैं। मंत्रियों को सरकारी खजाने से नहीं बल्कि स्वयं टैक्स भरना चाहिए। बाकि वह मामले का अध्ययन करेंगे।

कूड़ाघर शिफ्टिंग को लेकर मेयर अनिता ने किया वन भूमि का निरीक्षण

नगर निगम की ओर से शहर के बीचोंबीच गोविंद नगर स्थित खाली भूखंड पर बना कूड़ाघर लालपानी ब्लॉक-ए में शिफ्ट करने की योजना बनाई जा रही है। यहां कूड़ा निस्तारण प्लांट भी लगाया जाएगा। मंगलवार को मेयर ने निगम, वन विभाग और पर्यावरण प्रभाव आंकलन (ईआईए) टीम के साथ लाल पानी ब्लॉक-ए में 10 हेक्टेयर भूमि का निरीक्षण किया। उन्होंने कहा कि लालपानी ब्लॉक-ए में शीघ्र ही कूड़ा निस्तारण प्लांट लगाया जाएगा और शहर के बीचोंबीच बना कूड़ाघर भी शिफ्ट किया जाएगा। इस दौरान टीम ने ध्वनि और पानी का सैंपल भी लिया। मेयर ने इसकी रिपोर्ट जल्द बनाकर देने को कहा। उन्होंने बताया कि रिपोर्ट के बाद ही एनवायरमेंट क्लीयरेंस की एनओसी मिल सकेगी।

पर्यावरण प्रभाव आंकलन के विशेषज्ञ रत्नेश कोठियाल ने बताया कि इसकी रिपोर्ट छह से सात माह के भीतर आएगी। उन्होंने मेयर को विश्वास दिलाया कि तीन दिन में टर्म आफ रिफरेंस की रिपोर्ट फाइनल कर दी जाएगी। तीन माह मॉनिटरिंग में लगते हैं और 20 सितंबर से हवा, पानी और जमीन के सैंपल भी लिए जाएंगे। दो माह का समय पब्लिक हेयरिंग में लगेगा। उसके बाद वन विभाग की क्लीयरेंस के बाद कूड़ा निस्तारण प्लांट और कूड़ाघर शिफ्ट कर दिया जाएगा। इस मौके पर वन अधिकारी राजेंद्र पाल नेगी, सहायक अभियंता आनंद सिंह मिश्रवाण आदि उपस्थित रहे।

कूड़ा निस्तारण को निगम में होगा प्रजेंटेशन
मेयर अनिता ममगाईं ने कहा कि निगम का उद्देश्य सिर्फ कूड़े को एक जगह से उठाकर दूसरी जगह रखना नहीं है। कूड़े का निस्तारण भी होगा। पूरे प्लांट की कैपिंग करवाकर वहां से किसी तरीके की कोई बदबू और बीमारी न फैले, इसका ख्याल रखा जाएगा। उन्होंने बताया कि जल्द ही निगम में कूड़ा निस्तारण करने वाली कंपनियों का प्रजेंटेशन करवाया जाएगा।

पर्वतीय क्षेत्रों से पलायन रोकना और जन सुविधाओं के विकास पर ध्यान देना बहुत जरूरी

गुरूवार को ग्राम्य विकास एवं पलायन आयोग की टीम द्वारा राज्य में ग्राम्य विकास के क्षेत्र में योजनाओं का विश्लेषण करने के बाद एक रिपोर्ट मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत को सौंपी गई। आयोग द्वारा तैयार की गयी 5वीं रिपोर्ट में ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए सिफारिशें की गयी हैं ताकि पलायन को कम किया जा सके।

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र ने कहा कि प्रदेश के पर्वतीय क्षेत्रों से पलायन रोकना तथा जन सुविधाओं के विकास पर ध्यान दिया जाना बहुत जरूरी है, यह हमारे लिये एक बड़ी चुनौती भी है। मुख्यमंत्री ने इस दिशा में पलायन आयोग द्वारा अब तक किये गये प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि उनके सुझावों पर राज्य सरकार द्वारा प्रभावी पहल की जायेगी। उन्होंने कहा कि हमारे गांव व खेती आबाद हो, इसके लिये व्यापक जन जागरूकता जरूरी है। मुख्यमंत्री ने न्याय पंचायत स्तर पर कृषि विकास से संबंधित विभागों के अधिकारियों की टीम बनाये जाने की भी जरूरत बतायी।

उपाध्यक्ष, ग्राम्य विकास एवं पलायन आयोग डॉ. एस.एस.नेगी द्वारा दिये गये सुझावों में प्रदेश में एम.ए.एन.आर.ई.जी.ए. के तहत 50 प्रतिशत से अधिक लाभार्थी महिलाएँ हैं, ये महिलायें अतिरिक्त आय सृजित कर सकें, इसके लिए समान अवसर और भागीदारी सुनिश्चित करके सभी जनपदों के लिए महिलाओं का प्रतिनिधित्व 50रू से अधिक बनाए रखने के प्रयास किए जाने चाहिए।

महिलाओं के कौशल विकास को प्राथमिकता दी जानी चाहिए ताकि वे कुशल श्रमिकों के रूप में लाभ उठा सकें। उन्होंने बताया कि फसलों को बंदर और जंगली सूअर जैसे जानवरों द्वारा नुकसान होने की समस्या है। कुछ ब्लॉक में जंगली सूअरों से सुरक्षा के लिए दीवारें बनाई जा रही हैं, सभी जनपदों में ऐसा किया जाना आवश्यक है। बंदरों से फसलों की सुरक्षा के लिए संपत्तियां बनाने के लिए एक योजना वन विभाग की सहायता से तैयार की जानी चाहिए।

स्वयं सहायता समूहों द्वारा बनाए गए उत्पादों के लिए गुणवत्ता निगरानी और प्रमाणन किया जाना चाहिए। इससे मानकीकरण होगा और सार्वभौमिक बाजार खुलेगा। उत्पादों के विपणन और खुदरा के लिए गतिशील ऑनलाइन प्लेटफॉम विकसित किए जाने चाहिए। एक सोशल मीडिया रणनीति विकसित की जानी चाहिए। सैनिटरी पैड बनाने के लिए स्वयं सहायता समूह विकसित किए जा सकते हैं। प्रत्येक जनपद में एक इकाई की स्थापना की जा सकती है।

उन्होंने पर्वतीय क्षेत्र की महिलाओं को ऋण सुविधा उपलब्ध कराने के लिये जमीनी कागजों में पति-पत्नी का नाम सामान्य किये जाने पर भी बल दिया है। उन्होंने कहा कि उनके स्तर पर किये गये सर्वेक्षण 36 ब्लॉकों के 152 गाँवों की आय में लगभग 25 प्रतिशत का अन्तर महसूस किया गया है।

जो काम पिछली सरकार ने नहीं किए, वह टीएसआर सरकार ने कर दिखाया

उत्तराखण्ड में कुपोषण से मुक्ति के लिए मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत की पहल पर बड़ी पहल की गई है। मंगलवार को पोषण अभियान 2019 के अंतर्गत ‘‘कुपोषण मुक्ति हेतु गोद अभियान’’ की शुरूआत हुई। इसमें प्रदेश में चिन्हित 1600 अति कुपोषित बच्चों को मुख्यमंत्री, मंत्रिगणों, विधायकों, अधिकारियों, उद्योगपतियों व अन्य समाजसेवियों द्वारा गोद लिया जाएगा।

शुभारम्भ कार्यक्रम में 20 अति कुपोषित बच्चों को गोद लिया गया
सीएम आवास में अभियान के शुभारम्भ के अवसर पर 20 बच्चों को गोद लिया गया। सीएम ने स्वयं योगिता पुत्री रेखा, विधानसभा अध्यक्ष प्रेमचंद्र अग्रवाल ने अनिषा पुत्री गुड़िया, महिला सशक्तिकरण एवं बाल विकास मंत्री रेखा आर्या ने निहारिका पुत्री सीमा, विधायक गणेश जोशी ने भूमिका, मेयर सुनील उनियाल गामा ने निहारिका पुत्री प्रियंका, अपर मुख्य सचिव राधा रतूड़ी ने नैंसी पुत्री अतर सिंह, प्रमुख सचिव मनीषा पंवार ने विनायक पुत्र शीतल, प्रमुख सचिव आनंदबर्द्धन ने आयुष पुत्र राजेश्वरी, सचिव डॉ. भूपिंदर कौर औलख ने आन्या, आरके सुधांशु ने अरहम, नीतेश झा ने नैना, शैलेश बगोली ने उमर, सौजन्या ने अभिषेक, हरबंस सिंह चुघ ने राज, अरविंद सिंह ह्यांकि ने हमजा, पंकज पाण्डे ने शुभान, विनोद प्रसाद रतूड़ी ने जोया, बीएस मनराल ने प्रियांशु, बीके संत ने शौर्य व एचसी सेमवाल ने दिव्यांशी को गोद लेकर उन्हें कुपोषण से मुक्त करने की जिम्मेदारी ली है। समाजसेवी व उद्योगपति राकेश ऑबेराय ने अपनी संस्थाओं के माध्यम से 100 कुपोषित बच्चों को गोद लेने की बात कही।

समाज की शक्ति को पहचाना होगाः टीएसआर
मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने कहा कि हमें समाज की शक्ति को पहचानना चाहिए। किसी भी समस्या का हल समाज की भागीदारी से हो सकता है। हमारे पूर्वजों ने समाज की ताकत को पहचाना था। हमें भी यह देखना होगा कि कैसे समाज की शक्ति का उपयोग किया जा सकता है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि पिछले वर्ष बड़े पैमाने पर सफलतापूर्वक पौधरोपण अभियान चलाए गए थे। इसमें समाज के सभी लोगों ने बढ़-चढ़कर योगदान दिया। कोई भी समस्या दूर की जा सकती है अगर सही तरीके से नियोजन किया जाए, समाज को इसमें जोड़ा जाए और उसे पर्सनल टच दिया जाए। मुख्यमंत्री ने पिथौरागढ़ का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां भी स्थानीय जनप्रतिनिधियों व समाज का सहयोग लेकर बालिका लिंगानुपात में काफी सुधार आया है।

प्रदेश में कक्षा 9 से 12 तक की बालिकाओं का हिमोग्लोबिन टेस्ट कराया जाएगा
उन्होंने कहा कि सरकार प्रदेश में कक्षा 9 से 12 तक की बालिकाओं का हिमोग्लोबिन टेस्ट कराया जाएगा। वर्ष 2022 तक प्रदेश की सभी आंगनबाड़ी केंद्रों को पक्का भवन युक्त किया जाएगा। प्रत्येक राशनकार्ड पर 2 किग्रा दाल उपलब्ध कराई जाएगी।

मां स्वस्थ तो बच्चा भी स्वस्थ
मुख्यमंत्री ने कहा कि जिन बच्चों को गोद लिया जा रहा है, उनका नियमित रूप से पूरा ध्यान रखना जरूरी है। उनके माता पिता के सम्पर्क रहना होगा। बच्चे क्या खा रहे हैं, कैसे खा रहे हैं, हर छोटी से छोटी बात पर ध्यान देना होगा। पहला सहयोग बच्चे की मां का चाहिए। अगर मां को पोषण मिले, मां का स्वास्थ्य ठीक हो तो बच्चे का पोषण और स्वास्थ्य भी ठीक रहेगा। इस दौरान मुख्यमंत्री ने कार्यक्रम में उपस्थित लोगों को कुपोषण से मुक्ति की शपथ भी दिलाई।

आंदोलन को धार देने के लिए की थी राजनीति, ऐसे थे रणजीत सिंह वर्मा

जननायक और पूर्व विधायक रहे रणजीत सिंह वर्मा की अंतिम यात्रा में आज सुबह भारी हुजूम उमड़ा। सुबह दस बजे उनके आवास से अंतिम यात्रा निकली और लक्खीबाग देहरादून में उनका अंतिम संस्कार किया। बतातें चले कि सोमवार सुबह सात बजे उनका स्वर्गवास हो गया था।
पूर्व विधायक और राज्य आंदोलनकारी रणजीत सिंह वर्मा का सोमवार सुबह जौलीग्रांट अस्पताल में निधन हो गया। वे 86 वर्ष के थे। अस्पताल में पिछले पांच दिनों से उनका इलाज चल रहा था। वे अविभाजित उत्तरप्रदेश की मसूरी विधानसभा के दो बार विधायक रहे थे। उनके निधन पर उनके निकट सहयोगी रहे क्षेत्र के तमाम लोगों ने दुख जताया है। जौलीग्रांट के पूर्व प्रधान और उनके सहयोगी रहे कुंवर सिंह मनवाल कहते हैं कि उनके निधन की खबर डोईवाला के लिए अपूर्णनीय क्षति है।
मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने भी उनके निधन पर शोक जताया है। उन्होंने दिवंगत आत्मा की शांति एवं दुरूख की इस घड़ी में उनके परिजनों को धैर्य प्रदान करने की कामना की है। मुख्यमंत्री ने कहा कि पृथक उत्तराखंड के निर्माण में रणजीत सिंह के संघर्षों को सदैव याद रखा जाएगा।

शिक्षा के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान
पूर्व विधायक रणजीत सिंह वर्मा के निधन पर डोईवाला क्षेत्र के लोग स्तब्ध हैं। उनका नाम शिक्षा के प्रचार प्रसार और गन्ना राजनीति में बेहद आदर के साथ लिया जाता है। आजीवन मूल्यों और सिद्धांतों पर चलकर उन्होंने गन्ना राजनीति और डोईवाला में शिक्षा को बढ़ावा देने का काम किया। पृथक राज्य निर्माण में अग्रणी भूमिका निभाने वाले पूर्व विधायक रणजीत सिंह वर्मा का कार्य क्षेत्र डोईवाला रहा।
तरली जौलीग्रांट में उनका निवास स्थान है। क्षेत्र में उनके पास काफी खेती बाड़ी होने के कारण प्रगतिशील किसान कहा जाता रहा है। गन्ना राजनीति में करीब तीन दशक से भी अधिक समय तक उनकी पकड़ रही है। गन्ना परिषद डोईवाला में करीब 25 सालों तक लगातार अध्यक्ष का दायित्व निभाया।
डोईवाला शुगर मिल के पुनर्निर्माण में भी उनका बड़ा योगदान रहा। अविभाजित उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री रहे स्व. नारायणदत्त तिवारी से उनका स्नेह होने के कारण डोईवाला चीनी मिल की पेराई क्षमता बढ़ाकर उसको आधुनिक रूप दिलाने में उन्होंने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इसके साथ ही एक शिक्षक के रूप में भी उन्होंने काम किया। क्षेत्र के सबसे पुराने पब्लिक इंटर कॉलेज डोईवाला के प्रबंधक का काम साल 1966 से 2018 तक निभाया। जबकि आर्य कन्या पाठशाला इंटर कॉलेज के वह अभी तक प्रबंधक रहे।

अपाचे अटैक हेलीकॉप्टर आज वायुसेना के बेड़े में हुए शामिल

दुनिया के सबसे घातक हथियारों में शुमार आठ अपाचे अटैक हेलीकॉप्टर आज भारतीय वायुसेना में आधिकारिक रूप से शामिल हो गए हैं। इन्हें पंजाब के पठानकोट एयरबेस पर भारतीय वायुसेना में औपचारिक रूप से शामिल किया गया है। भविष्य में ऐसे कुल 22 हेलीकॉप्टर भारतीय वायुसेना में शामिल होंगे। अमेरिकी एयरोस्पेस कंपनी बोइंग ने इस एएच-64ई अपाचे हेलीकॉप्टर को बनाया है। चार साल पहले भारत ने अमेरिका के साथ 22 अपाचे हेलीकॉप्टर का करार किया था। 2022 तक सभी 22 अपाचे हेलीकॉप्टर वायुसेना के बेड़े में शामिल हो जाएंगे। भारत ने अमेरिका की कंपनी बोइंग के साथ सितंबर 2015 में 22 अपाचे अटैक हेलीकॉप्टर के खरीद का सौदा किया था। इस सौदे की कुल राशि 9600 करोड़ है।
एएच-64ई अपाचे विश्व के सबसे उन्नत लड़ाकू हेलीकॉप्टरों में से एक हैं, जिसे अमेरिका सेना इस्तेमाल करती है। यह बेहद कम ऊंचाई से हवाई और जमीनी हमले में सक्षम है। भारतीय वायुसेना के वरिष्ठ अधिकारियों ने बताया कि अपाचे के बेड़े में शामिल होने से उसकी लड़ाकू क्षमताओं में काफी बढ़ोतरी होगी, क्योंकि इनमें भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखकर बदलाव किया गया है।
शुरुआत में इन हेलीकॉप्टरों को हिंडन एयरबेस पर तैनात किया गया था। जहां से आज यानी मंगलवार को कुछ जरूरी उपकरण लगाने के बाद इन्हें पठानकोट एयरबेस पर आधिकारिक तौर पर वायुसेना में शामिल कर लिया गया है। अपाचे रूस निर्मित एमआई-35 हेलीकॉप्टर की जगह लेंगे। अपाचे अटैक हेलीकॉप्टर में 16 एंटी टैंक एजीएम-114 हेलफायर और स्ट्रिंगर मिसाइल लगी होती है। हेलफायर मिसाइल किसी भी आर्मर्ड व्हीकल जैसे टैंक, तोप, बीएमपी वाहनों को पल भर में उड़ा सकती है। वहीं स्ट्रिंगर मिसाइल हवा से आने वाले किसी भी खतरे का सामना करने में सक्षम है। इसके साथ ही इसमें हाइड्रा-70 अनगाइडेड मिसाइल भी लगा होता है जो जमीन पर किसी भी निशाने को तबाह कर सकता है।

इस हेलीकॉप्टर को दुश्मनों का रडार भी आसानी से पकड़ नहीं पाता है। जिसका प्रमुख कारण हेलीकॉप्टर की सेमी स्टेल्थ टेक्नोलॉजी और कम ऊंचाई पर उड़ान भरने की क्षमता है। इसमें अत्याधुनिक लांगबो रडार लगा हुआ है जिससे यह नौसेना के लिए भी मददगार साबित होगा।अपाचे मल्टी रोल फाइटर हेलीकॉप्टर है। इसे लेजर, इंफ्रारेड व नाइट विजन सिस्टम से लैस किया गया है, जिससे यह अंधेरे में भी दुश्मनों का काम तमाम कर सकता है। वायुसेना ने सितंबर 2015 में अमेरिकी सरकार और बोइंग के साथ अपाचे हेलीकॉप्टरों के लिए करोड़ों डॉलर के अनुबंध पर हस्ताक्षर किए थे। इसके अतिरिक्त रक्षा मंत्रालय ने बोइंग से 2017 में 4168 करोड़ रुपये के हथियारों के साथ छह हेलीकॉप्टरों की खरीद को मंजूरी दी थी। बोइंग ने पूरी दुनिया में 2200 से अधिक अपाचे हेलीकॉप्टरों की आपूर्ति की है और भारत 16वां देश है, जिसने इसे अपनी वायुसेना के लिए चुना है। अमेरिका के अलावा ब्रिटेन, इस्राइल, नीदरलैंड्स, सऊदी अरब, जापान और मिस्र की वायुसेना भी इनका इस्तेमाल करती है। एएच-64ई अपाचे ने भारतीय वायुसेना के लिए अपनी पहली सफल उड़ान जुलाई, 2018 में की थी। वायुसेना के पहले दल ने हेलीकॉप्टर उड़ाने का प्रशिक्षण 2018 में अमेरिका में शुरू किया था।

अपाचे पर एक नजर …
– 280 किमी प्रतिघंटे की अधिकतम रफ्तार से भर सकता है उड़ान
– 16 एंटी टैंक एजीएम-114 हेलफायर मिसाइल छोड़ने की क्षमता
– 30 मिलीमीटर की दो गन से लैस
– 1,200 गोलियां भरी जाती है एक बार में

राज्य वन्य जीव बोर्ड की 13वीं बैठक में वन संरक्षण और ग्रामीणों की आजीविका पर हुई चर्चा

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत की अध्यक्षता में मुख्यमंत्री आवास में उत्तराखण्ड राज्य वन्य जीव बोर्ड की 13वीं बैठक आयोजित हुई। बैठक में कई महत्वपूर्ण निर्णय लिये गये। इस अवसर पर वन मंत्री डॉ. हरक सिंह रावत भी उपस्थित थे। बैठक में मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र ने वनों के प्रबन्धन में स्थानीय लोगों की भागीदारी सुनिश्चित किये जाने पर बल देते हुए कहा कि वनों के संरक्षण के साथ ही ग्रामीणों की आजीविका भी प्रभावित न हो इसके लिये प्रभावी पहल होनी चाहिए।

बैठक में मानव वन्य जीव संघर्ष से ग्रसित गांवों में वालेण्टरी विलेज प्रोटेक्शन फोर्स के गठन, संरक्षित क्षेत्रों के अन्दर व निकटस्थ गांवों में इको डेवलपमेंट कार्यक्रम को पंचायतों के माध्यम से संचालित कराये जाने, राज्य मे कस्तुरी मृग व राज्य पक्षी मोनाल के संरक्षण, मत्स्य संरक्षण एवं पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए एंगलिंग की अनुमति प्रदान करने के साथ ही कार्बेट टाइगर रिजर्व व राजाजी टाइगर रिजर्व में मानव वन्य जीव संघर्ष को कम करने के लिए बाघो व जंगली हाथियों की जनसंख्या प्रबन्धन व धारण क्षमता के आकलन के लिये दीर्घ कालीन शोध व नीति निर्धारण पर सहमति प्रदान की गई।

बैठक में नन्दौर एवं सुरई को क्षेत्रीय जनता की मांग के दृष्टिगत बफर जोन न बनाये जाने का भी निर्णय लिया गया। लालढ़ांग-चिल्लरखाल सड़क के प्रस्ताव को भी स्वीकृति दी गई। अब यह प्रस्ताव नेशनल वाईल्ड लाईफ बोर्ड को भेजा जाएगा। नेशनल पार्क व बफर जोन में वर्षों पूर्व स्थापित स्कूलों आदि में सौर उर्जा एवं शौचालयों के निर्माण के लिए कंजरवेटर को निर्णय लेने के लिए अधिकृत किया गया। इसके अतिरिक्त बैठक में विभिन्न सड़को के 16 प्रस्तावों को भी मंजूरी दी गई।

बैठक में कंडी मार्ग के सम्बन्ध में इसके सभी पहुलओं पर विस्तृत प्रस्तुतिकरण के माध्यम से व्यापक चर्चा की गई। इस सम्बन्ध में व्यापक विचार विमर्श के पश्चात् शासन द्वारा इस पर व्यवहारिकता के दृष्टिगत नीतिगत निर्णय किए जाने की भी सहमति बनी।