सीएनजी स्टेशनों की स्थापना से सीएनजी वाहनों की संख्या में होगी बढ़ोतरी

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने शुक्रवार को गेल इंडिया लिमिटेड के अधिकारियों के साथ नेचुरल गैस पाइप लाईन व सिटी गैस डिस्ट्रीब्यूशन प्रोजक्ट की जानकारी ली। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि नेचुरल गैस पाइप लाईन के विस्तार में यह ध्यान रखा जाए कि इससे देहरादून, हरिद्वार व ऋषिकेश के शहर व उसके आस पास के गांव भी पूर्ण रूप से कवर हो जाए। उन्होंने कहा कि इससे लोगों को रोजगार सृजन हो सकता इसका भी पूरा आकलन किया जाए। मुख्यमंत्री ने कहा कि इस परियोजना की प्रत्येक तीन माह में समीक्षा की जायेगी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि गैस पाइप लाईन से लोगों को काफी सुविधा होगी जबकि सीएनजी स्टेशनों की स्थापना से सीएनजी वाहनों की संख्या भी बढ़ेगी तथा इससे वाहनों से होने वाले प्रदूषण से भी दूनवासियों का छुटकारा मिल सकेगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि देहरादून में वाहनों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। राज्य के मैदानी क्षेत्रों में आबादी का दबाव निरन्तर बढ़ रहा है। उसी क्रम में आगे भी वाहनों एवं आबादी का दबाव बना रहेगा, इसका बेहतर रास्ता सीएनजी ही है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में हरिद्वार, ऊधम सिंह नगर तथा देहरादून के बाद नैनीताल के साथ ही अन्य स्थानों में भी गैस पाइप लाइन का कार्य आरम्भ किया जाए। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री ने देश को गैस ईंधन के रूप में इस्तेमाल करने पर जोर दिया है। उन्होंने कहा कि गैस ईंधन कम खर्चीला तथा इको फ्रेन्डली है।

बैठक में अधिकारियों द्वारा मुख्यमंत्री को अवगत कराया गया कि हरिद्वार-ऋषिकेश-देहरादून पाइपलाईन प्रोजेक्ट (एचआरडीपीएल) के तहत 1500 करोड़ रूपये की लागत से 3 लाख पीएनजी कनेकक्शन दिये जायेंगे व 50 सीएनजी स्टेशन बनाये जायेंगे। इससे मुख्यतः ऋषिकेश, डोईवाला, विकासनगर, देहरादून, चकराता कालसी व त्यूनी क्षेत्र लाभान्वित होंगे। एचआरडीपीएल प्रोजेक्ट के तहत टेंडर व जियोटेक्निकल, टोपोग्राफिकल एवं हाइड्रोलॉजिकल का कार्य गतिमान है।

देहरादून सिटी गैस डिस्ट्रीब्यूशन गैस प्रोजक्ट के तहत चकराता, देहरादून, डोईवाला, कालसी, ऋषिकेश, त्यूनी व विकासनगर का लगभग 3088 वर्ग किमी क्षेत्र आच्छादित किया जायेगा, जिसकी लागत 1696 करोड़ रूपये है। इसकी डीपीआर स्वीकृत की जा चुकी है। इसके लिये अधिकारियों की नियुक्ति भी की गई है। शीघ्र ही इस योजना का कार्य आरम्भ कर दिया जाएगा।

जानिए कैसा था पंत का जीवन, क्यों हर किसी की यादों में जिंदा है प्रकाश पंत

प्रकाश पंत के बारे में अंदाजा इसी से लगा सकते हैं कि फार्मासिस्ट होने के बावजूद उन्होंने वित्त, संसदीय व विधायी कार्यों में महारथ हासिल की। वित्त विशेषज्ञ के तौर पर जीएसटी काउंसिल में उन्हें और उनके सुझावों को भरपूर तवज्जो दी गई। कहते हैं पूत के पांव पालने में ही दिख जाते हैं। ये पंक्तियां कैबिनेट मंत्री प्रकाश पंत पर सटीक बैठती हैं।
1977 में छात्र राजनीति में वह सक्रिय हुए और सैन्य विज्ञान परिषद में महासचिव चुने गए। पेशे से फार्मासिस्ट पंत ने 1984 में सरकारी सेवा को त्याग कर समाजसेवा के लिए सियासत का रास्ता चुना। 1988 में नगर पालिका परिषद पिथौरागढ़ के सदस्य चुने जाने के बाद उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा। अविभाजित उत्तर प्रदेश में 1998 में वह विधान परिषद के सदस्य चुने गए और वहां भी अपने सवालों के जरिये छाप छोड़ी।
9 नवंबर 2000 को उत्तराखंड राज्य का जन्म हुआ तो उन्हें अंतरिम विधानसभा के स्पीकर की जिम्मेदारी सौंपी गई। इस दौरान उन्होंने अपने संसदीय ज्ञान और विधायी कौशल का बखूबी परिचय दिया। 2007 में भाजपा की सरकार में पंत संसदीय कार्य, विधायी, पेयजल, श्रम, निर्वाचन, पुनर्गठन व बाह्य सहायतित परियोजनाएं मंत्री के तौर पर अपनी जिम्मेदारी को बखूबी निभाया।
इस दौरान भी उनके संसदीय ज्ञान और विधायी कौशल को हर किसी ने सराहा। भाजपा की मौजूदा सरकार में भी वह कैबिनेट मंत्री के रूप में संसदीय कार्य, विधायी, भाषा वित्त, आबकारी, पेयजल एवं स्वच्छता, गन्ना विकास एवं चीनी उद्योग का दायित्व देख रहे थे। इस कार्यकाल में तो वह वित्त के विशेषज्ञ के तौर पर उभरे, तो हर मोर्चे पर सरकार को संभालते भी आए। वित्त में उनकी महारथ को जीएसटी काउंसिल ने भी सराहा। काउंसिल में पंत को भरपूर तवज्जो दी गई और वित्त मंत्रियों के समूह में उन्हें भी शामिल किया गया। वित्त पर अपनी मजबूत पकड़ के साथ ही जीएसटी की बारीकियों की जानकारी के बूते उन्होंने कई सुझाव काउंसिल को दिए।
जीएसटी रिटर्न दाखिल करने के मद्देनजर वार्षिक टर्नओवर की सीमा से संबंधित मसले को सुलझाने में उनकी अहम भूमिका रही। यही नहीं, जीएसटी के फायदों के बारे में व्यापारियों व कारोबारियों को समझाने और उनकी दिक्कतों को हल करने के चलते वह व्यापार व कारोबारी जगत से जुड़े लोगों में खासे लोकप्रिय थे। उनके संसदीय ज्ञान और विधायी कौशल का हर कोई मुरीद था। सत्ता पक्ष भी और विपक्ष भी। जब कभी सरकार किसी विषय पर कहीं भी उलझी तो उसे निकालने में वह संकटमोचक बनकर उभरे। प्रदेश हित को उन्होंने सर्वोपरि रखा और इसके लिए सदन और सदन के बाहर संघर्ष किया। मौजूदा विधानसभा के अध्यक्ष प्रेमचंद अग्रवाल कहते हैं कि उन्हें व्यक्तिगत रूप से कैबिनेट मंत्री पंत का सहयोग मिलता रहा। उनके संसदीय ज्ञान को हमेशा याद रखा जाएगा।

चला गया उत्तराखंड की सियासत का महारथी

काबीना मंत्री प्रकाश पंत यानी मृदु व्यवहार, बेहद सरल, सौम्य और मुस्कराता चेहरा। पक्ष हो या विपक्ष समेत तमाम सियासी दलों के विधायक हों या अन्य नेता सभी को दलगत राजनीति से ऊपर उठकर सहयोग करने को हमेशा प्रकाश पंत तत्पर रहे। महज 59 साल की आयु में उत्तराखंड की सियासत का ये अजातशत्रु एकाएक गंभीर बीमारी के चंगुल में फंसकर सभी को छोड़कर चला गया। सत्तारूढ़ दल भाजपा के साथ ही विपक्षी दलों ने भी उनके निधन को राज्य के लिए सदमा बताया है। पंत की शख्सियत को बयां करते हुए कांग्रेस विधायक काजी निजामुद्दीन कहते हैं कि वह मेरे गुरु रहे हैं। मेरे पिता काजी मोईनुद्दीन भी उनका बहुत आदर करते थे। अलग उत्तराखंड राज्य बनने के बाद से ही प्रकाश पंत राज्य में भाजपा की सियासत का अहम हिस्सा रहे।

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प्रदेश भाजपा के दिग्गजों में शुमार होने के बावजूद प्रकाश पंत ने पार्टी के भीतर भी और बाहर विपक्षी दलों के साथ भी राजनीतिक द्वेष-विदेश से दूरी बनाए रखी। भाजपा की वर्ष 2007 में बगैर बहुमत के सत्ता में वापसी के दौरान राजनीतिक अनिश्चितता के दौर रहा हो या वर्ष 2017 में भाजपा को प्रचंड बहुमत मिलने के दौरान मुख्यमंत्री पद के लिए भी उनका नाम उछला, लेकिन पंत ने खुद को पद के विवाद से भी दूर रखा।
उनके इस व्यवहार को भी पार्टी के भीतर सम्मान की नजर से देखा जाता रहा है। पंत की खासियत ये भी रही कि उन्होंने मेहनत से जुटाए ज्ञान को बांटने में दलीय आग्रह को दूर रखा। इस वजह से विपक्षी दलों के विधायक भी उनके प्रशंसक रहे। पहले स्पीकर और फिर विधायी व संसदीय कार्यमंत्री रहते हुए विधायी ज्ञान में जो महारत हासिल की, उसे सत्तापक्ष और विपक्ष दोनों के विधायकों से भी उन्होंने साझा किया। इसी वजह से कांग्रेस के विधायक काजी निजामुद्दीन उनके निधन को संसदीय लोकतंत्र के लिए गहरा आघात करार दिया। उन्होंने कहा कि पंत के सानिध्य में घंटों बैठकर उन्होंने विधायी ज्ञान हासिल किया। उनके पिता व अंतरिम सरकार में विधायक रहे काजी मोईनुद्दीन ने पंत को खास इज्जत दी। उनके कहने पर ही उन्होंने प्रकाश पंत से बतौर गुरु संसदीय ज्ञान हासिल किया।
पूर्व प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष किशोर उपाध्याय ने भावुक टिप्पणी की कि प्रकाश पंत के निधन की खबर ने तन-मन दोनों को तोड़कर रख दिया। उत्तराखंड की राजनीति का अजातशत्रु चला गया। परिजनों व तुम्हारे चाहने वालों के लिए सांत्वना के शब्द ढूंढकर भी नहीं मिल पा रहे हैं।

उत्कृष्ट विधायक चुने गए थे प्रकाश पंत
काबीना मंत्री प्रकाश पंत को वर्ष 2008 में उत्कृष्ट विधायक के पुरस्कार से भी नवाजा गया था। उत्कृष्ट विधायक पुरस्कार की शुरुआत उक्त वर्ष से हुई थी। गंभीर बीमारी के चलते काबीना मंत्री प्रकाश पंत के असामयिक निधन से उत्तराखंड की सियासत में लंबे समय तक रिक्तता महसूस की जाएगी। उत्तराखंड राज्य बनने के बाद अंतरिम सरकार के पहले स्पीकर रहने के बाद उन्हें भाजपा की सरकारों में सात वर्ष तक विधायी एवं संसदीय कार्यमंत्री रहने का मौका मिला। वर्ष 2007 में प्रदेश की भाजपा सरकार और फिर 2017 में वर्तमान भाजपा सरकार में वह विधायी एवं संसदीय कार्यमंत्री की जिम्मेदारी संभाले हुए थे। उत्तराखंड में अभी तक यह जिम्मेदारी सबसे ज्यादा संभालने का रिकार्ड उन्हीं के नाम है। उन्होंने लगातार दूसरी बार वित्त मंत्री का प्रभार भी संभाला।

राष्ट्रीय खिलाड़ी के रूप में याद रहेंगे पंत
कैबिनेट में वित्त मंत्री प्रकाश पंत राष्ट्रीय स्तर के निशानेबाज भी थे। पंत ने कई राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं में प्रतिभाग कर मेडल प्राप्त किए हैं। निशानेबाजी के शौकीन पंत अपने व्यस्त कार्यक्रम में से भी शूटिंग के लिए समय निकाल ही लेते थे। उत्तराखंड के लोकप्रिय नेता प्रकाश पंत का बुधवार को गंभीर बीमारी के चलते निधन हो गया। राजनीति में अपनी अलग पहचान बनाने वाले प्रकाश पंत राष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ी भी थे। पंत ने वर्ष 2004 में कोयम्बटूर में हुई जीबी मावलंकर शूटिंग प्रतियोगिता में लक्ष्य को सटीक भेदते हुए रजत पदक पर निशाना लगाया था।
इस प्रतियोगिता में प्रकाश पंत ने वेटरन वर्ग में एमपी-एमएलए कोटे से प्रतिभाग किया था। इसके अलावा 2004 में ही देहरादून में हुई राज्य स्तरीय प्रतियोगिता में पंत ने स्वर्ण पदक पर निशाना साधा था। उत्तरांचल राज्य रायफल संघ के महासचिव शूटर सुभाष राणा ने बताया कि संघ द्वारा आयोजित प्रतियोगिताओं में वह लगातार हिस्सा लेते रहते थे। इसके अलावा जब भी वह फ्री रहते थे, ऐकेडमी में निशानेबाजी करने आते थे। उन्होंने उत्तरांचल राज्य रायफल संघ की ओर से प्रकाश पंत को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए परिजनों के प्रति संवेदना व्यक्त की।

पंत को याद कर जब भावुक हो गए सीएम त्रिवेंद्र
प्रकाश पंत के असामयिक निधन से मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत उस समय भावुक हो गए, जब उन्होंने पंत के साथ बिताए 30 साल की स्मृतियों का जिक्र किया। एक वीडियो में मुख्यमंत्री ने पंत की स्मृतियों को मीडिया से साझा किया। उन्होंने बताया कि किस तरह महज 40 साल की छोटी उम्र में अपनी काबिलियत के बूते वे पहली अंतरिम विधानसभा के अध्यक्ष बने। फरवरी में बजट सत्र के दौरान बजट भाषण पढ़ते हुए जब पंत बेसुध हुए, उस वक्त का जिक्र करते हुए मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र रावत ने कहा कि उन्हें इसके बाद दिल्ली में संजय गांधी कैंसर इंस्टीट्यूट में भर्ती कराया गया।
टेस्ट के नतीजे आने के बाद केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री ने मुझे बताया कि प्रकाश पंत को एडवांस स्टेज का कैंसर है, जो बहुत रेयर किस्म का है। बहुत चिंता हुई। जब उन्हें उपचार के लिए अमेरिका ले जाया जा रहा था तो एक रात पहले मैंने उनसे रात 11 बजे अस्पताल में मुलाकात की। तब प्रकाश पंत ने मुझे कहा, मैं अमेरिका से स्वस्थ होकर लौटूंगा। आज उनके निधन की सूचना मिली। ये बयां करते करते मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत का गला रुंध गया और आंखों से आंसू छलक आए।

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वनों को ग्रामीण आर्थिकी से जोङने की बङी पहल

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने बुधवार को मुख्यमंत्री आवास में पिरूल (चीड़ की पत्तियों) तथा अन्य प्रकार के बायोमास से विद्युत उत्पादन तथा ब्रिकेट इकाइयों की स्थापना हेतु 21 चयनित विकासकर्ताओं को परियोजना आवंटन पत्र प्रदान किये। उन्होंने नवोन्मेषी उद्यमियों का स्वागत करते हुए इसे पर्यावरण संरक्षण के लिये भी नई शुरूआत बताया। उन्होंने कहा कि पर्वतीय क्षेत्रों से पलायन रोकना हमारी सबसे बड़ी चिन्ता है। राज्य निर्माण के बाद भी गांवों से हो रहा पलायन चिन्ता का विषय है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि पिरूल प्रकृति की देन है इसे व्यवस्थित कर ग्रीन एनर्जी में परिवर्तित करना हमारा उदेश्य है। पिरूल से ऊर्जा उत्पादन हेतु आज 21 उद्यमी आगे आए है। उन्हें भरोसा है कि इनकी संख्या शीघ्र ही 121 होगी। उन्होंने कहा कि इसमें राज्य को एनर्जी इंधन के साथ ही वनाग्नि को रोकने में मदद मिलेगी, जगंलों में हरियाली होगी तथा जैव विविधता की सुरक्षा होगी। उन्होंने कहा कि चीड़ से निकलने वाले लीसा से भी 43 प्रकार के उत्पाद बनाये जा सकते है। इसके लिए इंडोनेशिया से तकनीकि की जानकारी प्राप्त की जाएगी। इसका एक प्रोजेक्ट बैजनाथ में लगाया गया है। इससे भी वनाग्नि को रोकने में मदद मिलने के साथ ही हजारों लोगों को रोजगार उपलब्ध हो सकेगा।

उन्होंने कहा कि उत्तराखंड के वनों से हर साल 6 लाख मीट्रिक टन पिरूल निकलता है। इसके अतिरिक्त अन्य बायोमास भी निकलता है। इस तरह पिरूल व अन्य बायोमास से बिजली उत्पादन का जो लक्ष्य हमने रखा है उसकी शुभ शुरुआत होने जा रही है। पिरूल से बिजली उत्पादन के लिए उरेडा एवं वन विभाग को नोडल एजेंसी बनाया गया है। राज्य में विक्रिटिंग और बायो ऑयल संयंत्र स्थापित किए जाने हैं। इन संयंत्रों के स्थापित होने से पिरूल को प्रोसेस किया जाएगा व बिजली उत्पादन किया जा सकेगा। उरेडा द्वारा इसके लिए प्रस्ताव आमन्त्रित किए गए थे। अभी तक 21 प्रस्ताव जिसमें प्राप्त हुए जिनमें 20 प्रस्ताव पिरूल से विद्युत उत्पादन एवं एक प्रस्ताव पिरूल से ब्रिकेट बनाने के लिए शामिल है।

एक रूपया प्रति किलो से होगा भुगतान
पिरूल के जो सेंटर स्थापित किए जा रहे हैं उन तक पिरूल की सप्लाई सुनिश्चित करने के लिए महिला समूहों को रोजगार से जोड़ा जा रहा है। जंगलों से पिरूल कलेक्शन करने के लिए महिला समूहों को एक रूपया प्रति किलो की दर से भुगतान किया जाएगा।

बिना महक, सूखे फूलों से भगवान की हो रही पूजा अर्चना

क्या वेस्ट हो चुके फूलों से कोई भगवान को प्रसन्न कर सकता है, क्या ऐसे फूल जिसकी महक चली गई हो, भगवान को चढ़ाए जा सकते है। आप सभी का जवाब न में होगा। मगर, यह सच है। ऋषिकेश में वेस्ट हो चुके फूलों से अगरबत्तीयां बनाने के काम आ रही हैं। फिर यही अगरबत्तीयां भगवान की पूजा अर्चना में प्रयोग हो रही है।

फरीदाबाद हरियाणा के रहने वाले रोहित प्रताप ने बताया कि उन्होंने करीब साढ़े तीन लाख रुपये की लागत से अगरबत्ती बनाने का काम शुरू किया था। यह पूरी तरह से हस्तनिर्मित है। शाम के समय नगर निगम की गाड़ी से ऋषिकेश के प्रत्येक मंदिर से बासी फूलों को उठाया जाता है। जिन्हें सुखाकर उसका पाउडर बनाया जाता है। इसके बाद इसकी अगरबत्ती तैयार की जाती है। नभ अगरबत्ती के नाम से अगरबत्ती को मार्केट में उतारा गया है। पूरे निर्माण कार्य में कहीं भी कोयला और चारकोल का प्रयोग नहीं होता है। फिलहाल चारधाम यात्रा जाने वाले यात्रियों के लिए बीटीसी में अगरबत्ती का स्टॉल लगाया गया है।

महिलाओं को भी मिला रोजगार
अगरबत्ती बनाने के लिए वर्तमान में करीब 10 महिलाएं काम करती हैं। शाम के समय शिवाजी नगर क्षेत्र में करीब 20 महिलाओं को अगरबत्ती बनाने की ट्रेनिंग दी जा रही है।

प्रत्येक मंदिर में लगाए हैं फूल डालने के लिए डस्टबीन
बेकार फूलों को डालने के लिए उनकी ओर से ऋषिकेश के सभी मंदिरों में कूड़ेदान लगाए हुए हैं। सभी कूड़ेदानों पर आकर्षक ढंग से लिखा है कि रास्ते में पड़े फूलों को कूड़ेदान में डालें।

कंपनी जीडीसीएल के निर्माण कार्य पर नमामि गंगे असंतुष्ट, ठोका जुर्माना

लक्कड़घाट में सीवर ट्रीटमेंट प्लांट के लिए नगर के मार्गों पर नमामि गंगे का सीवर लाइन बिछाने का काम चल रहा हैं। इस कार्य को दिल्ली की जीडीसीएल कंपनी कर रही है। कंपनी को दिए समय के मुताबिक काम अभी तक 60 फीसदी हो जाना चाहिए था मगर, अभी तक 42 प्रतिशत ही कार्य पूरा हो सका हैं। वहीं कंपनी के कार्य में कई बार शिकायतें तथा दुर्घटना भी हो रही है। इसी को देखते हुए नमामि गंगे ने कंपनी को एक लाख रूपए का जुर्माना लगाया हैं। वहीं अन्य जुर्माने के लिए उच्चाधिकारियों को पत्राचार किया है।

नमामि गंगे के प्रोजेक्ट मैनेजर संदीप कश्यप ने बताया कि नमामि गंगे परियोजना के तहत कुल 72 करोड़ रुपये की लागत से लक्कड़घाट पर एक 26 एमएलडी का सीवर ट्रीटमेंट प्लांट, तीन पंपिंग स्टेशन (मायाकुंड, बापूग्राम, सर्वहारानगर) तथा करीब 15 किलोमीटर मार्ग पर भूमिगत सीवर लाइन बिछाने का काम चल रहा है। इस पूरे कार्य का जिम्मा दिल्ली की कंपनी जीडीसीएल को सौंपा गया है। उन्होंने बताया कि कंपनी की ओर से निर्माण कार्य में आए दिन लापरवाही के मामले सामने आ रहे है। इसी के चलते 24 अप्रैल को कंपनी पर एक लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया है। इसके अलावा उच्चाधिकारियों को और जुर्माना लगाने के लिए पत्राचार किया गया है।

लोनिवि, निगम, एनएच को दिया मुआवजा
प्रोजेक्ट मैनेजर (नमामि गंगे) संदीप कश्यप ने बताया कि भूमिगत सीवर लाइन बिछाने के कार्य के लिए जिस विभाग की सड़क को उखाड़ा जा रहा है, उसे पिछले वर्ष ही धनराशि उपलब्ध करा दी गई है। इसमें लोक निर्माण विभाग को दो करोड़ 31 लाख, नेशनल हाईवे को 94 लाख, नगर निगम को 87 लाख रुपये दिए गए हैं। उन्होंने बताया कि भूमिगत लाइन बिछाने का कार्य पूर्ण होने पर इसका टेस्टिंग कराया जाएगा। इस दौरान कहीं से भी लीकेज की समस्या आती है, तो दोबारा उसे दुरुस्त किया जाएगा। इसके बाद ही सड़क निर्माण हो सकेगा।

105 किमी सफर तय कर लिया गंगा स्वच्छता का संकल्प

ऑस्ट्रिया के डांस टीचर राइन हार्ड कोप उर्फ रियो ने गंगा की स्वच्छता के लिए एक साहसिक पहल की है। उन्होंने श्रीनगर गढ़वाल से ऋषिकेश तक गंगा में 105 किलोमीटर का सफर तैराक बनकर पूरा किया। उन्होंने दावा करते हुए कहा कि ऐसा करने वाले वह पहले व्यक्ति हैं। जिसे वह गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड के लिए भेजेंगे।

46 वर्षीय राइन हार्ड कोप उर्फ रियो ने इसी महीने की 14 तारीख को श्रीनगर गढ़वाल से अपने अभियान की शुरुआत की। 105 किलोमीटर की यात्रा उन्होंने सात पड़ावों में पूरी की। पहला पड़ाव बागवान, दूसरा देवप्रयाग, तीसरा व्यास घाट, चौथा कौड़ियाला, पांचवां पाथो कैंप व्यासी, छठा गूलर और सातवां ऋषिकेश रहा। सोमवार को आखिरी पड़ाव ऋषिकेश पहुंचने पर रियो ने मीडिया से अपने अभियान का मकसद और अपना अनुभव साझा किया। उन्होंने कहा, गंगा स्वच्छता का संदेश देने के लिए उन्होंने ऐसा किया। यह अभियान उनके लिए यादगार रहा।

अब हरिद्वार से इलाहाबाद
रियो के इस अभियान को आयोजित करने वाले व्हाइटर वर्ल्ड एक्सपीडीशन के संचालक भीम सिंह चौहान ने बताया कि रियो ने बड़ी कुशलता के साथ इस चुनौती को पूरा किया। आने वाले समय में रियो ने हरिद्वार से इलाहबाद तक गंगा में तैरकर जाने की योजना बनाई है। रियो के अभियान को उनके मित्र ऑस्ट्रिया निवासी मार्क्स ने शूट किया है।

पालिकाध्यक्ष ने किया स्वागत
सोमवार को ऋषिकेश में अभियान के समापन अवसर पर नगर पालिका अध्यक्ष मुनिकीरेती रोशन रतूड़ी ने रियो का स्वागत किया। कहा, साहसिक पर्यटन उत्तराखंड की पहचान है। रियो ने जिस तरह से इस अभियान को पूरा कर गंगा की निर्मलता और स्वास्थ्य का संदेश दिया वह सराहनीय है।

पहलः पुराने कूड़े को रिसाइकिल कर खाद बना रही नगर पालिका मुनिकीरेती

नगर पालिका मुनिकीरेती पुराने कचरे को रिसाइकिल कर जैविक खाद बनाने में जुट गई है। शुक्रवार से पालिका ने इस पर काम करना भी शुरू कर दिया है। विगत कई वर्षों से नगर पालिका मुनिकीरेती क्षेत्र का कूड़ा खारास्रोत बाईपास पुल के समीप डंप किया जा रहा है। यहां अभी तक लगभग 8500 मिट्रिक टन कूड़ा जमा हो चुका है, जोकि वर्तमान में सड़ी गली अवस्था में है। अब पालिका इस कूड़े को रिसाइकिल करने में जुट गई है। इसके लिए शुक्रवार से यहां दो ट्रॉमेल और दो कन्वेयर मशीन लगाई गई हैं।

ट्रॉमेल में पुराने कूड़े को छाना जा रहा है, जबकि कन्वेयर के जरिये जैविक खाद तैयार की जा रही है। इस जैविक खाद को दो रुपये प्रति किलो के हिसाब से बेचा जाएगा। इसके अलावा पुराने कचरे से मिली प्लास्टिक की बोतलों का इस्तेमाल हैंगिंग गार्डन के रूप में किया जाएगा। मशीन से कूड़ा छनने के बाद ऐसा कूड़ा जिसे रिसाइकिल नहीं किया जा सकता है, उसे हरिद्वार भेजा जाएगा। अधिशासी अधिकारी बद्री प्रसाद भट्ट ने बताया कि अभी तक नए कूड़े को ही रिसाइकिल किया जा रहा था, लेकिन शुक्रवार से पुराने कूड़े को भी रिसाइकिल करना शुरू कर दिया गया है।

कूड़ा रिसाइकिल के लिए नगर पालिका मुनिकीरेती ने जो दो ट्रॉमेल और दो कन्वेयर मशीन लगाई हैं, उनकी कुल कीमत 6 लाख 68 हजार रुपये है। ईओ बद्री प्रसाद भट्ट ने बताया कि 1 लाख 78 हजार रुपये से दो ट्रॉमेल जबकि चार लाख 90 हजार से दो कन्वेयर मशीनें खरीदी गई हैं। उन्होंने बताया कि सभी मशीनों को मंत्री सुबोध उनियाल ने विधायक निधि से उपलब्ध कराया है।

हेमकुंड साहिब यात्रा को पॉलिथीन मुक्त बनाने की गुरूद्वारा ट्रस्ट ने की पहल

माता वैष्णो देवी की तरह ही श्रीहेमकुंड साहिब में भी श्रद्धालुओं को डिग्रेडेबल थैले में प्रसाद दिया जाएगा। यात्रा को पॉलिथीन मुक्त बनाने के लिए गुरुद्वारा श्रीहेमकुंड मैनेजमेंट ट्रस्ट इस साल से यह पहल करने जा रहा है। इसके लिए उसने पूरी तैयारी भी कर ली है। यह थैला दिखने में प्लास्टिक की तरह ही होगा, लेकिन जमीन पर पड़ा रहने पर यह 180 दिन यानी छह माह में खाद में बदल जाएगा।

यह पूरी तरह सल्फर और गंध मुक्त होगा। अभी तक होता यह है कि रोक के बावजूद यात्रा पर पहुंचने वाले श्रद्धालु पॉलिथीन का उपयोग धड़ल्ले से करते हैं। इस पर रोक के लिए यह पहल की जा रही है। ट्रस्ट के उपाध्यक्ष सरदार नरेंद्रजीत सिंह बिंद्रा के मुताबिक यात्रियों से पॉलिथीन का कोई भी सामान यात्रा मार्ग पर उपयोग न करने की विशेष अपील की गई है। ट्रस्ट का मानना है कि उसकी पहल से श्रद्धालु यहां की सकारात्मक छवि लेकर अपने यहां लौटेंगे। पिछले वर्ष श्री हेमकुंड साहिब के लिए करीब ढाई लाख श्रद्धालु दर्शन को पहुंचे थे।

पहला जत्था 30 मई को होगा रवाना
चारधाम यात्रा की तरह श्रीहेमकुंड यात्रा को भी संयुक्त रोटेशन यात्रा व्यवस्था समिति की संचालित करती है। इस वर्ष काफी बर्फवारी होने के चलते एक जून से श्री हेमकुंड साहिब के कपाट खुलेंगे। इसके लिए पहला जत्था 30 मई को रवाना होगा। रोटेशन के वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी बृज भानु प्रकाश गिरी ने बताया कि इस वर्ष एक जून से हर रोज गुरुद्वारा श्री हेमकुंड साहिब मैनेजमेंट ट्रस्ट को चार बसें प्रदान की जाएंगी। डिमांड बढ़ने पर यह संख्या बढ़ाई भी जा सकती है।

इन देेशों से पहुंचेंगे श्रद्धालु
श्री हेमकुंड साहिब के दर्शन के लिए भारत के सभी प्रांतों के श्रद्धालुओं के अलावा अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया, मलेशिया, कनाडा, बैंककॉक, न्यूजीलैंड, इटली, बेल्जियम, पाकिस्तान सहित कई देशों के श्रद्धालु दर्शन को हर वर्ष पहुंचते हैं।

कैंसर पीड़ितों के लिए कटा डाले बाल, विग बनाने के आएंगे काम

रामनगर (रुड़की) की सोनम भटेजा ने कैंसर पीड़ितों के लिए अपने बाल कटवा डाले। यह वहीं बाल है जिनसे उन्हें बेपनां प्यार था। इतना ही नहीं बचपन से अभी तक कैंची तक चलने नहीं दी। अब उनके यह बाल कैंसर पीड़ितों की विग बनाने के काम आएंगे।

वैसे तो सोनम भटेजा गृहणी हैं, उन्होंने अंग्रेजी में एमए किया है। ऐसे बच्चें जो फीस देने में अक्षम है, वह उन्हें निशुल्क ट्यूशन पढ़ाती हैं, उनके पति कारोबारी हैं। सोनम के अनुसार उन्हें अपने बालों से बेहद प्यार है और लंबे रखने का शौक भी। इसलिए उन्होंने बचपन में कभी बालों पर कैंची नहीं लगने दी। उनके बाल कमर से भी नीचे थे। लेकिन, एक दिन तब उनकी धारणा बदल गई, जब उन्होंने इंटरनेट पर कैंसर पीड़ितों के बारे में पढ़ा। उसमें मुंबई के मदद ट्रस्ट का भी उल्लेख था। साइड में बताया गया था कि कैंसर पीड़ितों का उपचार शुरू होने पर उनके बाल झड़ जाते हैं। यह कीमोथेरेपी का साइड इफेक्ट है। कैंसर पीड़ित महिलाएं बाल झड़ जाने से बेहद कुंठित महसूस करती हैं। क्योंकि उनका सिर पूरी तरह गंजा हो जाता है।

साइट पर यह भी बताया गया था कि इन कैंसर पीड़ित महिलाओं के लिए मदद ट्रस्ट विग तैयार करता है। जो कि केवल असली बालों से ही बनता है। इसके लिए 12-13 इंच लंबे बाल होना जरूरी है। एक विग बनाने में तीन से चार महिलाओं के बालों की जरूरत होती है। सोनम बताती हैं कि इसे पढ़कर उन्होंने फैसला किया कि वह अपने बाल दान करेंगी। इसके बाद उन्होंने उन्होंने ट्रस्ट के बारे में जानकारी जुटाई। पता चला कि ट्रस्ट वास्तव में कैंसर पीड़ित महिलाओं के लिए निशुल्क विग तैयार करता है। जब उन्हें भरोसा हो गया तो उन्होंने ट्रस्ट से संपर्क साधा। ट्रस्ट ने बाल कैसे कटवाने है, इसके बारे में जानकारी दी।

ट्रस्ट के निर्देशों के अनुसार उन्होंने पहले बालों को धोया और जब वह सूख गए तो ब्यूटी पार्लर जाकर उन्हें 13 इंच मेजर करवाया। इसके बाद दोनों ओर से रबड़ लगवाकर उन्हें कटवा दिया। फिर बालों को उनके एक परिचित मुंबई जाकर ट्रस्ट को दे आए। यह इसी साल जनवरी की बात है। सोनम के अनुसार, वह बेहद खुश हैं कि उन्होंने अपने प्यारे बाल उन लोगों के लिए दान किए हैं, जिन्हें उनकी सबसे ज्यादा जरूरत है। बाल बढ़ जाने पर वह दोबारा उन्हें दान करेंगी। उन्होंने बताया कि संबंधित ट्रस्ट की ओर से एक प्रमाण-पत्र उन्हें भेजा गया है।

अक्षय तृतीया पर भगवान भरत की परिक्रमा कर मांगा आशीर्वाद

अक्षय तृतीया के मौके पर मंगलवार को तीर्थ नगरी के पौराणिक श्री भरत मंदिर में ऋषिकेश नारायण भरत भगवान के दर्शनों को श्रद्धालुओं की भीड़ छाई रही।

श्रद्धालुओं ने श्रीभरत भगवान के मंदिर में दर्शन और 108 परिक्रमा की। श्रद्धालु भगवान भरत के जयकारे भी लगाते दिखाई दिए। उन्होंने परिक्रमा के बाद भगवान भरत के दर्शन कर आशीर्वाद प्राप्त किया। साथ ही मनोकामना भी मांगी। कई श्रद्धालुओं ने मनोकामना पूरी होने पर मंदिर में माथा टेककर परिक्रमा की। इस अवसर पर श्रद्धालुओं के लिए मीठा शर्बत की भी व्यवस्था स्थानीय लोगों की ओर से हुई थी। दूसरी ओर अक्षय तृतीया के अवसर पर नगर के ज्वैलर्स की दुकानों में भीड़ छाई रही। लोग सोने व चांदी के बर्तन, सिक्के आदि सामानों की खरीदारी करते दिखाई दिए

ऐसी मान्यता है कि पौराणिक भगवान भरत जी के मंदिर की 108 परिक्रमा करने से भगवान बदरीनाथ के दर्शनों का जितना पुण्य प्राप्त होता है। खास बात यह है कि भरत भगवान की मूर्ति भी उसी शालीग्राम पत्थर से बनी है, जिससे बद्रीनाथ भगवान की मूर्ति बनाई गई है। इसके अलावा अक्षय तृतीया के दिन ही भरत भगवान के चरणों के दर्शन करने का सौभाग्य श्रद्धालुओं को प्राप्त होता है। अक्षय तृतीया के दिन से ही चार धाम यात्रा का विधिवत शुभारंभ हो जाता है। आज के दिन ही यमुनोत्री और गंगोत्री धाम के कपाट भी खोले जाते हैं। इस मौके पर सोना खरीदना भी लाभकारी बताया गया है।