शराब के नशे में दो प्रवासियों ने केन्द्र व्यवस्थापक को पीटा

(एनएन सर्विस)
मुनिकीरेती थाना क्षेत्र के एक संस्थागत क्वारंटीन सेंटर में प्रवासियों की दबंगई के चलते यहां केंद्र व्यवस्थापक को पीट दिया गया। पीड़ित की तहरीर पर पुलिस ने आरोपियों को गिरफ्तार कर संबंधित धाराओं में मुकदमा कायम किया है। वहीं, रविवार को आरोपियों को न्यायालय के समक्ष पेश किया गया। यहां से न्यायिक हिरासत में दोनों आरोपियों को जेल भेज दिया गया।
जानकारी के अनुसार, तपोवन स्थित एक संस्थागत क्वारंटीन सेंटर में दीवान सिंह रावत सहायक अध्यापक ब्लॉक नरेन्द्र नगर केंद्र व्यवस्थापक के रूप में तैनात है। बीते शनिवार की शाम करीब छह बजे यहां आंध्र प्रदेश से पहुंचे 16 दिन से क्वारंटीन दो युवकों ने शराब के नशे में मारपीट कर दी। मामले को लेकर पीड़ित अध्यापक ने मुनिकीरेती थाने में तहरीर दी। पुलिस ने तहरीर पाकर दोनों आरोपियों कुलदीप जोशी पुत्र डा. व्योम जोशी निवासी जी ब्लॉक, नई टिहरी और जगमोहन पुत्र राजेन्द्र रमोला निवासी रामोल गांव प्रतापनगर को गिरफ्तार किया। पुलिस ने आरोपियों पर आईपीसी की धारा 186,188,323,332,353,504,506 और 51 आपदा प्रबंधन अधिनियम में मुकदमा दर्ज किया है। रविवार को दोनों आरोपियों को न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किया गया। यहां से न्यायिक हिरासत में उन्हें जेल भेज दिया गया है।

टिकटॉक को आ गया बाय-बाय करने का समय, स्वदेशी एप मित्रों हो रहा पॉपुलर

भारत में टिकटॉक का बाय-बाय करने का वक्त आ गया है। भारत के युवाओं की जुबां पर अब टिकटॉक नहीं बल्कि स्वदेशी निर्मित एप मित्रों का नाम है। अभी तक इस एप को 50 लाख से ज्यादा युवा गूगल प्ले स्टोर से डाउनलोड कर चुके है। इसे आईआईटी रूड़की के पूर्व छात्रों ने बनाया है। इसे टिकटॉक का क्लोन भी कहा जा रहा है।

आईआईटी के पूर्व छात्रों का कहना है कि एप लांच करते समय हमें ऐसे ट्रैफिक की उम्मीद नहीं थी। इसे बनाने के पीछे लोगों को सिर्फ भारतीय विकल्प देना था। आईआईटी रुड़की में वर्ष 2011 में कंप्यूटर साइंस इंजीनियरिंग ब्रांच से पासआउट छात्र शिवांक अग्रवाल ने अपने चार साथियों के साथ मित्रों एप बनाया है।

11 अप्रैल को हुआ था मित्रों एप लांच
पेटीएम के पूर्व सीनियर वाइस प्रेजिडेंट दीपक के ट्वीट के बाद इसकी चर्चा हर किसी की जुबान पर है। अचानक बड़ी संख्या में लोगों के एप डाउनलोड करने से नेटवर्क ट्रैफिक भी प्रभावित होने लगा। टीम मेंबर ने बताया कि वास्तव में 11 अप्रैल को एप लांच करते समय यह नहीं सोचा था कि इसे इतनी सफलता मिलेगी। टिकटॉक को पीछे छोड़ना जैसी कोई बात नहीं है। हमारा उद्देश्य लोगों को सिर्फ एक भारतीय विकल्प देना था। लोग इसका इस्तेमाल करना चाहेंगे या नहीं यह हमारे हाथ में नहीं है, लेकिन हमें लोगों से जो आशीर्वाद मिला, उससे हम बहुत खुश हैं। उन्होंने बताया कि हमें किसी ने फंड नहीं दिया है, उनका फंड लोगों का प्यार ही है।

मित्रों स्वदेशी नाम, इसलिए देना उचित
टीम मेंबर ने बताया कि मित्रों का अर्थ मित्र ही है। एक तो यह भारतीय उपभोक्ताओं को भारतीय मंच के जरिए सेवा देने के लिए है। हम स्वदेशी नाम देकर भारतीय नामों के खिलाफ पूर्वाग्रहों को भी दूर करना चाहते हैं।

ऋषिकेश पुलिस ने कोरोना से मृत महिला का कराया दाह संस्कार

राज्य में कोरोना से शुक्रवार की देर रात हुई दूसरी मौत के बाद शनिवार शाम मृतका का अंतिम संस्कार पुलिस ने कराया। मृतका की चिता को मुखाग्नि उनके पति ने दी। कोरोना वायरस (पॉजिटिव) एवं कैंसर से पीड़ित महिला की मृत्यु के पश्चात, पुलिस व प्रशासन द्वारा सुरक्षा के समस्त उपाय व पीपीई किट पहनकर अंतिम संस्कार कराया गया।

शनिवार को कोतवाली पुलिस व प्रशासन के द्वारा करोना संक्रमण से बचाव करते हुए उत्त मृतक महिला का अंतिम संस्कार चंद्रेश्वर नगर स्थित मुक्तिधाम में कराया गया। इसके बाद अंतिम संस्कार के पूरे स्थान को सैनिटाइज करवाया गया।

कागज की बोतल में मिलेगी बीयर और सॉफ्टड्रिंक

कोका-कोला और कार्लसबर्ग जैसी कंपनी ने प्लास्टिक को लेकर एक बड़ा कदम उठाया है। पर्यावरण के हित में फैसला लेते हुए दोनों कंपनियों ने प्लास्टिक की बोतल उपयोग न करने का निर्णय लिया है. यानि दोनों ही कंपनियां ड्रिंक्स के लिये प्लास्टिक की बोतल की जगह प्लांट से बनाई गई बोतलों का उपयोग करेंगी

रिपोर्ट के अनुसार, ये योजना रिनेवेबिल कैमिकल्स कंपनी अवंतियम द्वारा तैयार की गई है। कंपनी बियर को स्टोर करने के लिये प्लास्टिक लेयरिंग के साथ अनोखा कार्डबोर्ड तैयार कर रही है. टेंशन लेने वाली बात नहीं है कंपनी का दावा है कि ये प्लास्टिक सिंथेटिक प्लास्टिक नहीं है, ताकि पर्यावरण को नुकसान न पहुंचे।

कंपनी का कहना है कि यूज होने के बाद इन बोतलों को आसानी से रिसाइकल कर लिया जाएगा। इसके साथ ही अगर इन्हें जमीन पर फेंका जाता है, तो ये कुछ टाइम में सड़ कर खाद में बदल जाएंगी। कंपनी का कहना है कि कांच की बोतल, प्लास्टिक जितनी खतरनाक नहीं होती हैं, पर इन्हें रिसाइकल करना भी आसान नहीं होता है। इतनी ही नहीं, जंगल में सूर्य की रौशनी से टकराने पर कांच की बोतल से आग लगने की संभावना होती है। इसके साथ ही प्लास्टिक और कांच की बोतल जंगल से लेकर समुद्री जानवरों के लिये बड़ी परेशानी हैं।

आंकड़ों के अनुसार, 300 मिलियन टन प्लास्टिक को जीवाश्म ईंधन से बनाया जाता है, जिसे सड़ने में सैकड़ों साल लग जाते हैं। खुशी हुई जानकर की बड़ी-बड़ी कंपनियां भी अब पर्यावरण को लेकर सजग हो रही हैं। छोटी सी पहल जिंदगी में बड़ा बदलाव ला सकती है।
– डॉ मोहन पहाड़ी की फेसबुक वॉल से

डिस्ट्रिक गंगा कमेटी के तहत उत्तराखंड में हुए सराहनीय कार्य

मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने सोमवार को वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से केन्द्रीय जल शक्ति मंत्री गजेन्द्र सिंह शेखावत से उत्तराखंड से संबंधित विभिन्न विषयों पर चर्चा की। इस अवसर पर नमामि गंगे, 2021 में हरिद्वार में होने वाले कुंभ मेले पर चर्चा की गई। केंद्रीय जल शक्ति मंत्री गजेन्द्र शेखावत ने कहा कि हरिद्वार में होने वाले कुंभ मेले के लिए जल शक्ति मंत्रालय के तहत होने वाले कार्यों के लिए राज्य सरकार को हर संभव मदद दी जाएगी। उन्होंने कहा कि नमामि गंगे के तहत उत्तराखंड में अच्छा कार्य हुआ है। उन्होंने कहा कि डिस्ट्रिक गंगा कमेटी के तहत भी उत्तराखंड में सराहनीय कार्य हुए हैं।

मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने कहा कि कुंभ मेले के लिए हरिद्वार में अनेक निर्माण कार्य होने हैं। जिसके लिए राज्य सरकार को जल शक्ति मंत्रालय से मदद की जरूरत होगी। केन्द्रीय जल शक्ति मंत्री ने कहा कि नेशनल मिशन फॉर क्लीन गंगा एवं जल शक्ति मंत्रालय की ओर से पूरा सहयोग दिया जाएगा। इस अवसर पर अपर मुख्य सचिव ओम प्रकाश एवं अपर सचिव मुख्यमंत्री मेहरबान सिंह बिष्ट उपस्थित थे।

नगर निगम में मेयर अनिता देशभक्ति के रंग से रंगी नजर आईं, ध्वजारोहण के बाद किया पौधारोपण

नगर निगम ऋषिकेश में मेयर अनिता ममगाईं देशभक्ति के रंग से रंगी नजर आईं। तिरंगा रंग के परिधान पहने मेयर अनिता ममगाईं ने ध्वजारोहण को सभी को गणतंत्र दिवस की शुभकामनाएं दी। इसके बाद पौधारोपण कर शहीदों को नमन भी किया।

नगर निगम ऋषिकेश में मेयर अनिता ममगाईं ने आन, बान और शान के साथ तिरंगा लहराया। उन्होंने राष्ट्रीय ध्वज को नमन करते हुए परेड की सलामी ली। कार्यक्रम में स्कूली बच्चों ने देशभक्ति पर आधारित अपनी नृत्य कला का मनोहारी प्रदर्शन किया। रविवार की सुबह साढे नौ बजे ’नगर निगम प्रांगण में मेयर अनिता ने ’ध्वजारोहण’ किया। इससे पूर्व उन्होंने निगम के स्वर्णजयंती सभागार’ के समीप स्थित ’शहीद भगत सिंह की प्रतिमा पर माल्यार्पण’ कर आजादी के महानायक को अपने श्रद्वा सुमन अर्पित किए।

इस अवसर पर शहरवासियों को ’गणतंत्र दिवस की बधाई देते हुए मेयर ममगाई ने कहा’ कि आज के दिन ही हमारा गौरवशाली संविधान अस्तित्व में आया। संविधान ने हमें मौलिक अधिकार देने के साथ ही कर्तव्य भी निर्धारित किए हैं। ये हमारी जिम्मेदारी हैं कि हम केवल अधिकारों की बात न कर अपनी क्षमता और योग्यता के मुताबिक राष्ट्र निर्माण और समाज की उन्नति के लिए कर्तव्यों का गंभीरता से निर्वहन करें।

इस मौके पर महापौर’ ने शहर के विकास के लिए किए जा रहे विकास कार्यों सहित विभिन्न योजनाओं की भी जानकारी दी। समारोह के प्रश्चात निगम प्रांगण में पौधरोपण भी किया गया। नगर आयुक्त नरेंद्र सिंह क्वीरियाल के संचालन में चले कार्यक्रम में तमाम पार्षद एवं नगर के गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।

तीर्थ पुरोहितों के हकहकूकों के साथ नहीं होगी छेड़छाड़ः सीएम

चारधाम देवस्थानम प्रबंधन बोर्ड राज्य के धार्मिक स्थलों को बुनियादी सुविधाएं देगा। इससे किसी भी तीर्थ पुरोहित, हकहकूकधारी के अधिकारों के साथ छेड़छाड़ नहीं होगी। यह बात मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने प्रेसवार्ता के दौरान कही।

उन्होंने कहा कि बद्रीनाथ, केदारनाथ, गंगोत्री, यमुनोत्री और इनके आसपास के मंदिरों का प्रबंधन चारधाम देवस्थानम प्रबंधन बोर्ड के नियंत्रण में रहेगा। लेकिन, इनसे जुड़े पुजारी, न्यासी, तीर्थ, पुरोहितों, पंडों और हकहकूकधारियों को वर्तमान में प्रचलित देव दस्तूरात और अधिकार यथावत रहेंगे।

उन्होंने कहा कि कहा कि जब हम कोई भी सुधार करते हैं तो उसकी प्रतिक्रिया होती ही है। सीएम ने साफ अल्फाज में कहा कि तीर्थ पुरोहितों के हितों को पूरी तरह सुरक्षित रखा जायेगा। प्रदेश के चार धाम सहित अन्य धार्मिक स्थलों पर देश-विदेश से के श्रद्धालु आना चाहते हैं। उत्तराखंड को अच्छे आतिथ्य के रूप में जाना जाता है। देश-विदेश के श्रद्धालुओं को उत्तराखंड के धार्मिक स्थलों पर आने का मौका मिले और उन्हें अच्छी सुविधाएं उपलब्ध हों इसके लिए यह विधेयक लाया गया है। मालूम हो कि चारधाम देवस्थानम प्रबंधन बोर्ड विधेयक को राजभवन ने मंजूरी दे दी है।

छह मिनट के वीडियो गीत में दिखेगी उत्तराखंड की सौंदर्यता, सीएम ने किया लोकार्पण

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने सोमवार को मुख्यमंत्री आवास में रमेश भट्ट द्वारा गाए उत्तराखंडी वीडियो गीत ‘जै जै हो देवभूमि’ को रिलीज किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि सिर्फ छह मिनट में देवभूमि उत्तराखण्ड की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत एवं नैसर्गिक प्राकृतिक सौन्दर्य को प्रस्तुत करने का प्रयास रमेश भट्ट ने अपने इस वीडियो गीत में किया है। उनका यह प्रयास उत्तराखण्ड को नई पहचान दिलाने में मददगार होगा। उन्होंने कहा कि इस वीडियो गीत के माध्यम हम समूचे उत्तराखण्ड का सिंहावलोकन कर सकते हैं।

यह गीत प्राकृतिक सौन्दर्य एवं सांस्कृतिक विरासत व लोक संस्कृति को भी बढ़ावा देने में सहायक होगा। उनकी भावनायें उत्तराखण्ड से जुड़ी हैं, उनके इस गीत में गीत संगीत अभिनय की व्यापक झलक मिलती है।

रमेश भट्ट बहुमुखी प्रतिभा के धनीः त्रिवेन्द्र
सीएम ने रमेश भट्ट को बहुमुखी प्रतिभा का धनी बताते हुए राज्य के प्रति उनके लगाव एवं समर्पण की भी सराहना की। उन्होंनें कहा कि समाज में छिपी प्रतिभाओं को निखारने तथा उन्हें अपनी प्रतिभा को प्रदर्शित करने का अवसर प्रदान किये जाने के प्रयास किये जाने चाहिए। इस अवसर पर मुख्यमंत्री द्वारा जागर गायिका पद्म बसंती बिष्ट, शिक्षक प्रोफेसर के.डी. सिंह आदि को सम्मानित भी किया गया।

विस अध्यक्ष और सांसद ने की सराहना
विधानसभा अध्यक्ष प्रेमचन्द अग्रवाल तथा सांसद अजय भट्ट ने भी रमेश भट्ट के इस प्रयास की सराहना की। उन्होंने कहा कि हमारी लोक संस्कृति हमारी पहचान है। यह वीडियो देश व दुनिया के लोगों को उत्तराखण्ड आने का भी आमन्त्रण देता है। रमेश भट्ट के गुरू श्री के.डी.सिंह ने कहा कि इस अवसर पर उन्हें सम्मान देकर श्री भट्ट ने गुरू शिष्य परम्परा को जीवन्तता प्रदान की है। उन्होंने इस प्रयास को मिट्टी के ऋण से उऋण होने जैसा प्रयास बताया।

गीत से राज्य की अदभुत संुदरता के होंगे दर्शनः रमेश भट्ट
मुख्यमंत्री के मीडिया सलाहकार रमेश भट्ट ने कहा कि इस गीत में उत्तराखंड की सुंदरता के अद्भुत दृश्य दिखाने के प्रयास किये गये हैं। इसमें उत्तराखंड के उच्च हिमालयी चोटियों, आध्यात्मिक- धार्मिक स्थलों, सांस्कृतिक मेलों, पहाड़ की संस्कृति और जैव विविधता के दर्शन होंगे। इस गीत के बोल स्व. गोपाल बाबू गोस्वामी ने लिखे हैं। इस गीत को नए कलेवर में पेश करने का उन्होंने प्रयास किया है।

वृद्धावस्था पेंशन में चयन प्रक्रिया गलत होने से साढ़े दस लाख की वित्तीय हानि

भारत के नियंत्रक एवं महालेखापरीक्षक (कैग) ने समाज कल्याण विभाग की करोड़ों रूपए की वित्तीय गड़बड़ी का खुलासा किया है। कैग के अनुसार विभाग ने वृद्धावस्था पेंशन योजना की चयन प्रक्रिया में कई गलतियां की है। इससे साढ़े 10 लाख रूपए की वित्तीय हानि हुई है।

कैग ने राष्ट्रीय सामाजिक सहायता कार्यक्रम (एनएसएपी) के डेटा बेस की जांच में पाया कि 1,17,454 लाभार्थियों में से केवल 49,924 के मामलों में ही बीपीएल पहचान संख्या अंकित थी। शेष 67,530 लाभार्थियों ने बीपीएल पहचान संख्या नहीं दी। इनमें से 8,134 लाभार्थियों के अभिलेखों की जांच में 76 प्रतिशत यानी 6184 ऐसे लोगों को भी पेंशन बांट दी गई, जो बीपीएल की श्रेणी में नहीं थे। इससे विभाग को 7.25 करोड़ की चपत लगी। 614 प्रकरणों में विभाग ने 17 लाख रुपये अधिक भुगतान किया, जबिक 85 लाभार्थियों को डबल पेंशन देकर 21 लाख रुपये की वित्तीय हानि की।

लाभार्थियों के गलत आकलन से विभाग पर 87.89 करोड़ का अतिरिक्त बोझ पड़ा। वर्ष 2015-16 से 2017-18 के दौरान सरकार ने 7,65,599 लाभार्थियों के लिए 235.08 करोड़ की मांग की। इसके सापेक्ष उसे 180.48 करोड़ रुपये मिले। लेकिन विभाग ने 6,46,687 लाभार्थियों को 268.37 करोड़ वितरित किए। इसके चलते राज्य सरकार पर 87.89 करोड़ रुपये का अतिरिक्त बोझ पड़ा। ऐसा 33.29 करोड़ रुपये केंद्र से कम मांग के कारण हुआ।

विभाग में पेंशन भुगतान के लिए 12.36 करोड़ रुपये की धनराशि दी गई थी। ये धनराशि न तो बांटी गई न सरकार को समर्पित की गई। इसमें राज्यांश 11.08 करोड़ रुपये और केंद्राश 1.28 रुपये था। कैग को विभाग ने जवाब नहीं दिया कि पांच जिला कोषागारों में यह धनराशि क्यों पड़ी रही।

कैग ने पाया कि वर्ष 2017-18 में चमोली, रुद्रप्रयाग, देहरादून, हरिद्वार, नैनीताल, अल्मोड़ा, बागेश्वर, चंपावत और यूएस नगर में 34,551 लाभार्थियों को धन की कमी के चलते 15.25 करोड़ रुपये की बकाया पेंशन का भुगतान नहीं किया गया। वर्ष 2016 में 6,703 बुजुर्गों की पेंशन रोक दी गई। आधार कार्ड की अवधि बढ़ाए जाने के बावजूद बकाया पेंशन 7.79 करोड़ का भुगतान नहीं किया गया।

ये कमियां भी आईं सामने
1. पेंशन मामलों के अनुश्रवण व मूल्यांकन के लिए राज्य और जिलास्तर पर समितियां नहीं बनाई गई। राज्य स्तरीय समिति मुख्य अधिकारी की अध्यक्षता में गठित होनी है, जबकि जिला पंचायत अध्यक्ष की अध्यक्षता में जिलास्तरीय समिति का गठन होना था। लेकिन लेखा अवधि में ये दोनों समितियां नहीं बनीं।
2. कैग ने पाया कि विकास खंड, जनपद, नगर पालिका स्तर पर शिकायत निवारण प्रणाली का गठन नहीं किया गया। जबकि एनएसएपी के इसे लेकर दिशा-निर्देश हैं।
3. एनएसएपी की गाइडलाइन के हिसाब से विभाग में सोशल ऑडिट की भी व्यवस्था नहीं थी। कैग ने भौतिक सत्यापन की भी कमी पकड़ी।

हाईकोर्ट के निर्देश पर प्रशासन की टीम ने किया परमार्थ निकेतन का निरीक्षण, हुआ चौकाने वाला खुलासा

51 वर्षों से बिना लीज अनुबंध के परमार्थ निकेतन चल रहा है। इसका खुलासा शनिवार को हुई पैमाइश के बाद हुआ है। हाईकोर्ट के आदेश पर जिलाधिकारी पौड़ी धीरज गर्ब्याल ने प्रशासन की एक टीम को पैमाइश करने के लिए परमार्थ निकेतन भेजा। इस दौरान राजस्व, सिंचाई और वन विभाग के अधिकारियों ने परमार्थ निकेतन स्थित गंगा घाट की पैमाइश की। इस दौरान सामने 51 वर्ष पहले ही परमार्थ निकेतन की वन विभाग से हुई लीज डीड की अवधि समाप्ति वाली बात निकलकर आई।

हाईकोर्ट ने पौड़ी डीएम को सरकारी भूमि पर अवैध कब्जे के मामले में 16 दिसंबर को रिपोर्ट पेश करने का आदेश दिया है। हाईकोर्ट ने यह आदेश एक याचिका के बाद दिया है। याचिका में यह आरोप है कि परमार्थ निकेतन ने सरकारी भूमि पर अवैध निर्माण किया है। पैमाइश के दौरान खुलासा हुआ कि वन विभाग ने परमार्थ निकेतन को 2.3912 एकड़ भूमि लीज पर दी थी। लीज की अवधि वर्ष 1968 में ही समाप्त हो चुकी है। इस तथ्य की पुष्टि राजाजी टाइगर रिजर्व के निदेशक पीके पात्रो ने की है। उन्होंने बताया कि परमार्थ निकेतन का वन विभाग के साथ केवल 15 वर्षों का अनुबंध हुआ था, लेकिन लीज अनुबंध खत्म होने के बाद अफसरों ने इस ओर ध्यान नहीं दिया। पैमाइश करने वाली टीम में एसडीएम श्याम सिंह राणा, सिंचाई विभाग के सहायक अभियंता सुबोध मैठाणी, रेंज अधिकारी धीर सिंह, पटवारी कपिल बमराड़ा शामिल थे।

परमार्थ निकेतन का भूमि संबंधी विवाद वीरपुर खुर्द में भी जोर पकड़ रहा है। दरअसल यहां परमार्थ की ओर से संचालित गुरुकुल भी वन विभाग की भूमि पर संचालित है। आरोप है कि निकेतन ने यहां 27 एकड़ भूमि पर अवैध कब्जा कर रखा है। इस संदर्भ में पशुपालन विभाग ने भी कोर्ट में काउंटर दाखिल कर स्पष्ट किया है कि उक्त भूमि वन विभाग की है। इस मामले में डीएफओ देहरादून राजीव धीमान का कहना है कि परमार्थ निकेतन की ओर से वीरपुर खुर्द में संचालित गुरुकुल का लीज अनुबंध 1978 में समाप्त हो चुका है। फिलहाल यहां हुए अवैध कब्जे को खाली करवाने के मामले में अफसर अभी चुप्पी साधे हुए हैं। परमार्थ निकेतन के प्रभाव को देखते हुए अफसरों में भी कार्रवाई को लेकर संशय बना हुआ है।

उधर, टाईगर रिजर्व के निदेशक पीके पात्रों ने अनुसार केवल 15 वर्षों के लिए परमार्थ को लीज पर भूमि दी गई थी। वर्ष 1968 में परमार्थ निकेतन के साथ वन विभाग का लीज अनुबंध समाप्त हो गया था। वर्ष 2003 तक परमार्थ निकेतन टाईगर रिजर्व को कर शुल्क जमा करता रहा। लीज के नवीनीकरण के लिए आश्रम की ओर से कई बार कहा गया। वर्ष 1980 में वन अधिनियम के तहत लीज पर देने का प्रावधान खत्म कर दिया गया है। इस कारण लीज के नवीनीकरण का मामला रुक गया।