राजनैतिक दल की कार्यप्रणाली के चलते सेना के जवान असुरक्षित

देश में राजनीति इतनी हावी हो गयी हैं। जिसके चलते देश के अंदर सैनिक स्वयं की रक्षा नहीं कर पा रहे है। कश्मीर में आये दिन सेना के जवानों को घेर लिया जाता हैं। मगर, हमारे देश की राजनैतिक दलों की कार्यप्रणाली के चलते सैनिक स्वयं को ठगा महसूस कर रहे है। देश के अंदर पाकिस्तान के जैसे हालात पैदा न हो, इसके लिये सरकार को ठोस नीति अपनानी होगी। यह बात श्री गोवर्धन मठ पुरी पीठाधीश्वर शंकराचार्य स्वामी निश्चलानंद सरस्वती महाराज ने ऋषिकेश में आयोजित कार्यक्रम के दौरान कही।

पुरी पीठाधीश्वर शंकराचार्य स्वामी निश्चलानंद सरस्वती महाराज ने कहा कि देश में आम आदमी की सुरक्षा के लिये शरहद पर सेना के जवान सदैव मुस्तैद रहते है। मगर, इन सैनिकों की सुरक्षा के लिये क्या किसी ने सोचा है। हमारे सैनिक स्वयं सुरक्षित नहीं है। उन्होंने कहा कि जिस दिन सेना का सब्र टूट गया तो देश में पाकिस्तान की जैसी स्थिति उत्पन्न हो जायेगी।

हिंदू जागरण मंच की ओर से आयोजित विचार गोष्ठी और प्रश्नोत्तरी कार्यक्रम में पुंरी शंकराचार्य निश्चलानंद सरस्वती ने कहा कि आज राजनैतिक दल वोटों की राजनीति के कारण पाकिस्तान जैसे गंभीर मुद्दे को हल्के में ले रहे हैं। जम्मू-कश्मीर में जवानों की पाक पोषित आतंकवादी और पाक सैनिक निर्मम हत्या कर रहे हैं। इन दलों की कार्यप्रणाली के कारण अपने देश में ही सैनिक सुरक्षित नहीं हैं।

सेना पर पत्थरबाजी की घटना पर शंकराचार्य ने कहा कि आम आदमी को देश में आत्मरक्षा का अधिकार है तो कश्मीर में सैनिकों को यह अधिकार क्यों नहीं। इन हालातों में अगर हमारी सेना का सब्र टूटा तो देश के हालात पाकिस्तान जैसे हो जाएंगे।

आज तक किसी भी प्रधानमंत्री ने देश की मूल समस्याओं पर ध्यान नहीं दिया। अयोध्या में राम मंदिर का मुद्दा वर्षों से लटका है, जम्मू-कश्मीर में धारा 370 अब तक लागू है। शंकराचार्य ने कहा कि भारत देश ने मुस्लिम समाज के कई लोगों को राष्ट्रपति, उप राष्ट्रपति, राज्यपाल और मंत्री बनाया। मगर बांग्लादेश व पाकिस्तान बताए कि कितने हिंदुओं को उच्च पदों पर बिठाया गया। यह हमारी उदारता है, इसे कमजोरी न समझा जाए।

उन्होंने गो हत्या पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि आज कोई भी राजनैतिक दल ऐसा नहीं है जो गो हत्या रोकने के लिए एक स्वर से प्रस्ताव पारित कर सके। इन कारणों से गोवंश संकट में है। गो हत्या पर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि वह भी गो हत्या रोकने में असफल नजर आ रहे हैं। यूपी में सैकड़ों अवैध बूचडखाने चल रहे हैं।

देश में शंकराचार्यों की बाढ़

शंकराचार्य स्वामी निश्चलानंद सरस्वती महाराज ने कहा कि मान्यता के मुताबिक चार पीठ के चार शंकराचार्य परंपरानुसार हैं। मगर, आज देश में शंकराचार्यों की जो बाढ़ आई है, इन्हें पनपाने वाले देश के राजनैतिक दल हैं। शंकराचार्यों की ओर से विश्व का ध्यान भटकाने के लिए अंग्रेजों ने साधारण लोगों को महात्मा, आचार्य और महर्षि के रूप में स्थापित किया। आजादी के बाद राजनैतिक दलों ने इस तरह के शंकराचार्यों को बढ़ाया। भारत साधु समाज के नाम से यह काम किया गया। कहा कि इन कथित शंकराचायों की पहचान, भाजपायी, कांग्रेसी व सपाई शंकराचार्यों के रूप में होती है।

राज्य में सभी लें सबको शिक्षा, अच्छी शिक्षा योजना का लाभ

उच्च शिक्षा राज्य मंत्री डा. धन सिंह रावत ने कहा कि राज्य में उच्च शिक्षा की गुणवत्तार पर विशेष ध्यान दिया जाये। उन्होंने कहा कि राज्य में सबको शिक्षा, अच्छी शिक्षा योजना मिलनी चाहिए। उन्होंने इस योजना का लाभ उठाने के लिय राज्य के युवाओं को संबोधित भी किया।

उन्होंने कहा कि उन्ही विद्यालयों को रूसा के अन्तर्गत धन का आवंटन किया जायेगा जो नैक के अन्तर्गत आते हैं। नैक के मानक के अनुसार सभी विद्यालय में शत् प्रतिशत् प्राचार्य, बिल्डिंग, अध्यापक स्टॉफ, छात्र अध्यापक का अनुपात, छात्र उपस्थिति, प्रदर्शन, सुविधायें होनी चाहिए। इस मानक के अनुरूप उत्तराखण्ड को समस्त डिग्री कॉलेजों को शामिल किया जायेगा।

रूसा के अन्तर्गत अभी तक कुल 72 करोड़ रू0 मिले हैं। जिसमें से दून विश्वविद्यालय एवं कुमाऊ विश्वविद्यालय के लिए 20-20 करोड़ रू0 के अतिरिक्त कुल 49 कॉलेजों को सुविधायें दी जायेंगी। अभी तक कुल 72 करोड़ रू0 मिले बजट में एस0जी0आर0आर0 पी0जी0कालेज देहरादून 2 करोड़, राजकीय महिला महाविद्यालय हल्द्वानी 2 करोड़, राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय कोटद्वार 2 करोड़, ऋषिकेश, काशीपुर, बागेश्वर, द्वारहाट, डाकपत्थर, रूद्रपुर, रामनगर, लोहाघाट राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालयों को 2-2 करोड़ एम0बी0पी0जी कॉलेज हल्द्वानी को 2 करोड़, राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय डोईवाल 3 करोड़, राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय मुनस्यारी 2 करोड़, रूसा परियोजना निदेशालय 3 करोड़ रूपये आवंटित किये जायेंगे।

इस सम्बन्ध में मंत्री ने कहा उत्तराखण्ड के उच्च शिक्षा से सम्बन्धित कॉलेज और विश्वविद्यालय में सभी विद्यार्थियों के लिए 100 प्रतिशत पुस्तक की व्यवस्था की जायेगी। पहली बार सभी महाविद्यालय में अतिरिक्त सभी विद्यार्थियों को लैब, शौचालय, कम्प्यूटर लाइब्रेरी, ई-लाईब्रेरी, स्मार्ट क्लास, खेल का सामान, प्राचार्य, असिस्टेंट प्रोफेसर की सुविधा दी जायेगी। प्रत्येक कॉलेज में प्राचार्य के साथ कम से कम 2 असिस्टेंट प्रोफेसर और एक क्लर्क होगा।

मदरसों में शामिल हो रहा एनसीईआरटी पाठ्यक्रम

इस सत्र से उत्तराखंड मदरसा शिक्षा बोर्ड में एनसीईआरटी पाठ्यक्रम लागू हो रहा है। इसमें संस्कृत व अन्य विषय भी बच्चों को पढ़ने को मिल सकेंगे।

उत्तराखंड मदरसा शिक्षा बोर्ड के डिप्टी रजिस्ट्रार अहमद अखलाक अंसारी ने बताया कि सत्र 2018-19 से मदरसों में एनसीईआरटी पाठ्यक्रम लागू होने जा रहा है। इस संबंध में केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्रलय को पत्र भी भेजा जा चुका है। बताया कि एनसीईआरटी पाठ्यक्रम में मदरसों में भी राजकीय विद्यालयों की तरह विषय और सिलेबस शामिल होगा।

महत्वपूर्ण ये है कि अब मदरसों में संस्कृत, कंप्यूटर व शारीरिक शिक्षा का विषय भी शामिल किया जा रहा है। ये विषय मदरसा छात्रों के सर्वागीण विकास में मुख्य भूमिका निभाएंगे। उन्होंने कहा कि छात्र स्वेच्छा से किसी भी विषय को चुनने के लिए स्वतंत्र होंगे।

सीडीएस परीक्षा में उत्तराखंड के विवेेक ने किया टॉप

उत्तराखंड कुमाऊ मंडल के पिथौरागढ़ जिले के एक युवा में देश की प्रतिष्ठित सीडीएस की परीक्षा में अव्वलता हासिल की है। पिथौरागढ़ के लेलू गांव निवासी विवेक थरकोटी की कंबाइंड डिफेंस सर्विस परीक्षा में सफलता हासिल करने पर गांव में खुशी का माहौल है। सभी अपने बच्चों को विवेक से प्रेरणा लेने को कह रहे है।

जिला मुख्यालय से लगभग छह किलोमीटर दूर लेलू गांव के रहने वाले विवेक थरकोटी ने इस वर्ष सीडीएस की परीक्षा में देश में अव्वलता हासिल की है। विवेक ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा वड्डा कस्बे के विश्व भारती पब्लिक स्कूल से हासिल की। बचपन से मेधावी विवेक ने एशियन एकेडमी स्कूल से आठवीं कक्षा उत्तीर्ण करने के बाद घोड़ाखाल सैनिक स्कूल में आगे की पढ़ाई की।

इंटरमीडिएट की पढ़ाई घोड़ाखाल से करने के बाद पिथौरागढ़ महाविद्यालय से बीएससी और एमए किया। इसके बाद विवेक थरकोटी ने सीडीएस परीक्षा में सफलता हासिल की। विवेक ने अपनी सफलता का श्रेय बैंक कर्मी पिता श्याम सिंह थरकोटी और शिक्षिका माता निर्मला थरकोटी सहित गुरूओं को दिया है। बता दें कि विवेक साहसिक खेलों में रूचि रखते है। स्कीइंग, रिवर राफ्टिंग, पर्वतारोहण जैसे साहसिक खेलों में रुचि रखने वाले विवेक ने नौवीं कक्षा के बाद ही सेना ज्वाइन करने का लक्ष्य तय कर लिया था और कड़ी मेहनत के बाद उन्होंने देश की प्रतिष्ठित परीक्षा में शानदार सफलता अर्जित की।

राज्य के तीव्र विकास के लिये अनुभवियों के सुझाव जरूरी

सेवानिवृत्त राजकीय पेंशनर्स संगठन उत्तराखंड के चतुर्थ प्रांतीय महाधिवेशन में मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने कहा कि पेंशनर्स भवन की मांग देहरादून में विचारणीय है। उन्होंने संगठन के अधिवेशन के लिये एक लाख रूपये की धनराशि प्रदान करने की घोषणा की।

संगठन के महाधिवेशन में पहुंचे मुख्यमंत्री के सम्मुख संगठन ने 14 सूत्रीय मांग पत्र रखा। जिस पर मुख्यमंत्री ने कहा कि सभी मांगों का परीक्षण किया जायेगा। जो मांग पूरी हो सकती है, उसे पूरा किया जायेगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने सांसदों एवं विधायकों से एक घण्टे के संवाद में उन्होंने कई महत्वपूर्ण सुझाव दिए। प्रधानमंत्री के डिजिटल इंडिया के सपने को पूरा करने के लिए हम सबको आधुनिक तकनीक के अधिक से अधिक प्रयोग पर बल देना होगा। उन्होंने कहा कि सरकार की योजनाओं एवं नीतियों से अपडेट रहना जरूरी है। सरकार के नीतिगत निर्णय, शासनादेश सब वेबसाइट पर अपलोड हो जाती हैं। किसी भी समस्या की शिकायत, उसके समाधान और सुझाव के लिए सीधे मुख्यमंत्री ऐप एवं टोल फ्री नम्बर 1905 पर की जा सकती है। उन्होंने बताया कि शिकायत या सुझाव मिलने पर उसे सीधा सम्बन्धित विभागों को भेजा जाता है। जिस पर सम्बन्धित विभाग द्वारा त्वरित कार्यवाही की जाती है।

उन्होंने बताया कि घेस व हिमनी गांवों को टेलीमेडिसिन के माध्यम से दिल्ली के अपोलो अस्पताल से जोड़ा गया है। चमोली के सुदूर बलाड गांव में कम उम्र में ही महिलाओं के दांत गिरने की समस्या पायी गयी थी, इसकी जांच करने पर यह जानकारी मिली कि प्रसव के दौरान उन्हें ठीक से आहार न मिलने के कारण यह समस्या पैदा हो रही है। इसके लिये गर्भवती महिलाओं को पौष्टिक आहार उपलब्ध कराया जा रहा है। प्रदेश को 2024 तक टीबी मुक्त राज्य बनाने लक्ष्य रखा गया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि स्वास्थ्य के क्षेत्र में पहल करते हुए प्रदेश में 47 ई-अस्पताल स्थापित किये गये है। जबकि पूरे देश में इनकी संख्या 144 है। सरकार का प्रयास है कि तकनीक के माध्यम से लोगों को अधिक से अधिक सेवाएं दी जा सके। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने प्रदेश के विभिन्न जनपदों के वरिष्ठ पेंशनर्स को सम्मानित भी किया।

इस दौरान मसूरी विधायक गणेश जोशी ने कहा कि सेवानिवृत्त अधिकारी, कर्मचारियों को अपने अनुभवों से सरंक्षक की भूमिका निभानी होगी। राज्य के तीव्र विकास के लिए अनुभवी लोगों का सुझाव जरूरी है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार पूरी ईमानदारी एवं कर्तव्यनिष्ठा के साथ कार्य कर रही है। पिछले एक साल में परिवहन एवं ऊर्जा के क्षेत्र में प्रदेश को घाटे से उभारा गया है।

क्षेत्रीय समन्वय समिति के जरिये अनुभवों को करें साझा

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने कहा कि वैश्वीकरण के दौर में अपराध बहुत तेजी से अपने पैर पसार रहा है। सूचना तकनीक के विकास से विश्व में हर गतिविधि पर नजर रखी जा रही है। बढ़ते अपराधों की रोकथाम के लिये विभिन्न राज्यों की पुलिस में आपसी समन्वय और तालमेल की जरूरत बढ़ती जा रही है। यह बात सीएम ने पुलिस विभाग द्वारा अयोजित चतुर्थ उत्तर क्षेत्रीय समन्वय समिति की बैठक के दौरान कही।

मुख्यमंत्री ने बैठक का शुभारंभ कर कहा कि समन्वय समिति की बैठक में जिन आठ राज्यों के प्रतिनिधि प्रतिभाग कर रहे हैं। उनमें से पांच राज्यों की सीमायें अन्तराष्ट्रीय सीमाओं से लगी हैं। यह बैठक हमारे लिए महत्वपूर्ण एवं संवेदनशील है। उन्होंने उम्मीद जताई कि इस सम्मेलन के जरिये अलग-अलग राज्यों से आये पुलिस एवं सतर्कता एवं अभिसूचना विभाग के अधिकारी अपने-अपने अनुभवों को आपस में साझा करेंगे।

उन्होंने कहा कि पुलिस को विभिन्न समस्याओं का समाधान कुशलतापूर्वक करना होगा। समाजिक विविधता के दृष्टिगत पुलिस को व्यवस्थाओं और मर्यादाओं को कायम रखते हुए कार्य करना होगा। अन्तर्राष्ट्रीय सीमाओं पर भारत सरकार से सामंजस्य एवं अनुमति की जरूरत होती है। इसके लिए हमें समन्वय, बेहतर संवाद एवं सामंजस्य स्थापित करने पर भी ध्यान देना होगा। उन्होंने कहा कि सतर्कता एवं अभिसूचना तंत्र को तकनीकि एवं प्रशिक्षण की दृष्टि से सशक्त होना जरूरी है।

प्रमुख सचिव गृह आनन्द वर्द्धन ने कहा कि उत्तर क्षेत्रीय समन्वय समिति के इस सम्मेलन में पुलिस एवं सुरक्षा से संबधित उच्च अधिकारियों को अपने विचारों और अनुभवों को आदान-प्रदान करने का मौका मिलेगा। वर्तमान परिस्थितियों में विभिन्न मुद्दों और उनके समाधान पर चर्चा होगी और आपसी सामंजस्य भी बढ़ेगा। उन्होंने कहा कि इंटरनेट, कम्यूनिकेशन एवं सोशल मीडिया के बढ़ते प्रभावों से साइबर क्राइम बढ़ा है। इन अपराधों को किस तरह नियंत्रित किया जा सकता है, इन विषयों पर अधिकारी अपने अनुभवों को साझा करेंगे।

पुलिस महानिदेशक अनिल कुमार रतूड़ी ने कहा कि वैश्वीकरण एवं संचार क्रांति के वर्तमान दौर में राज्यों को अनैक चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। जिसमें अन्तर्राज्यीय, राष्ट्रीय एवं अन्तर्राष्ट्रीय स्तर की सभी प्रकार की बाहरी एवं आन्तरिक सुरक्षा की समस्याएं शामिल हैं। उन्होंने कहा कि इस प्रकार की चुनौतियों के मुकाबले के लिए राज्यों के संसाधन सीमित हैं। इन चुनौतियों का सामना करने के लिए राज्यों की पुलिस व्यवस्था को उसी के अनुकूल सक्षम बनाने की आवश्यकता है। उन्होंने इसके लिए दिन-प्रतिदिन की सूचनाओं के आदान-प्रदान तथा अपराध की चुनौतियों का सामना करने के लिए समन्वित प्रयासों की जरूरत एवं अभिसूचना तंत्र की मजबूती पर बल दिया। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के अर्न्तराज्यीय सम्मेलन से समस्याओं के समाधान तथा सुधार की दिशा में दूरगामी परिणाम प्राप्त होते हैं।

जंगलों के संरक्षण व संवर्धन में कार्यशाला की महत्वपूर्ण भूमिका

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने 10वीं जापान इंटरनेशनल कोऑपरेशन ऐसोसिएशन (जायका) राष्ट्रीय कार्यशाला का विधिवत शुभारम्भ किया। मुख्यमंत्री ने अखरोट की बागवानी एवं अवनत वनों के सुधारीकरण पर पुस्तिकाओं का विमोचन भी किया।

10वीं जापान इंटरनेशनल कोऑपरेशन ऐसोसिएशन (जायका) राष्ट्रीय कार्यशाला के आयोजन पर 13 राज्यों के प्रतिनिधियों तथा भारत सरकार के अधिकारियों को बधाई व शुभकामनाएं देते हुए मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र ने कहा कि जंगलो के संरक्षण व संर्वद्धन में कार्यशाला व प्रशिक्षण की महत्वपूर्ण भूमिका है। कार्यशाला मंे साझा किए गए अनुभव व ज्ञान से विभागीय प्रगति के लिए काम किए जाते है। कार्यशाला के माध्यम से जंगलों की गतिविधियों के संचालन व संरक्षण में सहायता मिलती है।

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र ने कहा कि राज्य में लगभग 11000 वन पंचायतें है। जायका द्वारा भी वन पंचायतों को वित्तीय सहायता दी जाती है। राज्य में भूमि क्षरण की समस्या अधिक है क्योंकि राज्य का हिमालयी क्षेत्र दलदली है। जापान इंटरनेशनल कोऑपरेशन ऐसोसिएशन (जायका) द्वारा दी जा रही तकनीकी सहयोग से भूक्षरण रोकने में सहायता मिलेगी। जायका की योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन द्वारा वन सरंक्षण, भू-क्षरण रोकने तथा मिटटी की गुणवत्ता में सुधार व मिट्टी में खनिजो की कमी को पूरा किया जा सकेगा।

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र ने कहा कि राज्य में वनाग्नि की समस्या को रोकने के लिए जागरूकता व सामाजिक सहभागिता को बढ़ाना होगा। स्कूली छात्र-छात्राओं में वनों के प्रति अपनत्व व दायित्व बोध पैदा करना होगा। सिविक सेन्स की तरह ही बच्चों में स्कूली जीवन से ही जंगलों के प्रति उत्तरदायित्व की भावना विकसित करनी होगी। वन अधिकारियों को स्कूलों में जाकर बच्चों से वनों के महत्व व सरंक्षण पर चर्चा करनी चाहिए।

नोडल अधिकारी के जरिये इस नदी का होगा पुनरूद्धार

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने अल्मोड़ा में कोसी नदी के पुनरूद्धार के संबंध में बैठक की। उन्होंने कहा कोसी नदी के पुनरूद्धार में आम जन की सहभागिता हो, इस बात का हमें विशेष ध्यान रखना होगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य स्तर पर एक अधिकारी की नियुक्ति की जायेगी जो कोसी नदी पुनरूद्धार के कार्यों में सहयोग प्रदान करेंगे।

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र ने कोसी नदी के पुनरूद्धार के लिए कोसी कैचमेंट एरिया से जुड़े ग्रामीण जिन्हें अभी भी रसोई गैस कनैक्शन उपलब्ध नहीं हुए है, उन्हें रसोई गैस कनैक्शन प्राथमिकता से उपलब्ध कराये जाने को कहा। उन्होंने कहा कि कोसी कैचमेंट एरिया में जहां पर भी चैकडैम बनाये गये हैं, वहां पर देसी गुलाब के पेड़ लगाये जाय। इससे एक ओर जहां चैकडैमो को मजबूती मिलेगी वहीं दूसरी ओर मधुमक्खी पालन मंे भी यह उपयोगी सिद्ध होगा। मुख्यमंत्री ने जिलाधिकारी को कोसी कैचमेंट एरिया में खस घास लगाने के निर्देश दिये। उन्होंने कहा कि कोसी नदी के चारों तरफ चौड़ी पत्ती के पेड़ सहित फलदार पौधरोपण अधिकाधिक हो, इसके लिए विशेष अभियान चलाना होगा।

उन्होंने कहा कि कोसी कैचमेंट एरिया से जुड़े प्रत्येक ग्राम का हर व्यक्ति इस अभियान से जुड़े इसकी हमें विशेष पहल करनी होगी। इस अभियान को आगे बढ़ाने के लिए विभिन्न क्षेत्रों में कार्य कर रहे लोगों द्वारा भी सहयोग प्रदान करने की बात की जा रही है। प्रारंभिक तौर पर हमें मनरेगा के माध्यम से इस कार्य को आगे बढ़ाना होगा। भविष्य में इसके लिए बजट प्राविधानित किया जायेगा ताकि इस अभियान को और अधिक गति मिल सकें। उन्होंने कहा कि कोसी कैचमेंट एरिया के विकास के लिये कार्य योजना बनायी जा रही है।

राज्य के चहुंमुखी विकास के लिये सरकार कृत संकल्पः त्रिवेन्द्र

त्रिवेन्द्र ने सरकारी विद्यालयों की शिक्षा व्यवस्था में जन सहयोग से अच्छी सुविधायें लाकर शिक्षा की गुणवत्ता में बढ़ोत्तरी के लिए ’’रूपान्तरण अभियान’’ का शुभारम्भ किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि कक्षा 06 से 12 तक के गरीब एवं वंचित वर्ग के बच्चों को गुणवत्ता युक्त शिक्षा प्रदान करने के लिये गढ़वाल एवं कुमाऊं मण्डलों में एक-एक विशेष विद्यालय खोले जायेंगे। कुमाऊं मण्डल में यह विद्यालय अल्मोडा में खोला जायेगा। मुख्यमंत्री ने जिलाधिकारी को निर्देश दिये कि विद्यालय के लिये भूमि चयनित कर शीघ्र ही प्रस्ताव शासन को उपलब्ध करायें।

’’रूपान्तरण अभियान’’ का मुख्य उद्देश्य सरकारी विद्यालयों को भौतिक संसाधनों से युक्त बनाना तथा फर्नीचर, स्वच्छ पेयजल, पंखा, हीटर, क्रीड़ा सामग्री व्यवस्था, कम्प्यूटर प्रोजेक्टर के माध्यम से स्मार्ट क्लास का संचालन, सुरक्षित व सुसज्जित भवन, विद्यार्थियों की अन्य मूलभूत आवश्यकताएं, शिक्षकों अभिप्रेरण जिससे वे अपना अधिकतम योगदान शिक्षा की गुणवत्ता बढ़ाने में दे सकें, छात्र-छात्राओं में रचनात्मकता, सृजनशीलता एवं मानवता की भावनाओं का विकास, समाज को सरकारी विद्यालयों के प्रति संवेदनशील एवं सहयोग हेतु प्रेरित करना मुख्य हैं।

मुख्यमंत्री ने जिला प्रशासन व विद्यालयी शिक्षा द्वारा अल्मोड़ा में चलाये गये इस अभियान की प्रशंसा की। संयुक्त मजिस्ट्रेट रानीखेत हिमांशु खुराना व उप शिक्षाधिकारी गीतिका जोशी सहित शिक्षा विभाग के अन्य अधिकारियों द्वारा किये गये इस रूपान्तरण कार्यक्रम के लिए उन्होंने अधिकारियों की भी प्रशंसा की। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश के चहुॅमुखी विकास के लिए सरकार कृत संकल्प है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि कहा कि धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए प्रदेश के चार धामों को टेल-मेडिसन सुविधा से शीघ्र जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है। यही नहीं एचपी कम्प्यूटर कम्पनी द्वारा भी राज्य के चिकित्सालयों में अपनी सुविधाएं देने की बात की गयी है ताकि चिकित्सालय भी तकनीक के क्षेत्र में समृद्ध हो सकें।

फीस वृद्धि वापस होने से होगा छात्रों को फायदा

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने कहा कि प्रदेश के निजी मेडिकल संस्थानों से हुयी वार्ता के बाद उनके द्वारा फीस वृद्धि का निर्णय वापस ले लिया गया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि निजी मेडिकल संस्थानों के प्रतिनिधियों द्वारा पूर्व में उनसे भेंट कर अवगत कराया था कि उन्हें संस्थानों की अवस्थापना सुविधाओं आदि के विकास के लिये बड़ी धनराशि व्यय करनी पडती है। इसके लिये उनके द्वारा मेडिकल छात्रों की फीस में वृद्धि का अनुरोध किया गया था।

मुख्यमंत्री ने कहा कि मेडिकल संस्थानों द्वारा फीस में कई गुना वृद्धि किये जाने तथा कई अभिभावकों द्वारा उन्हें फीस वृद्धि के संबंध में अवगत कराये जाने पर मेडिकल छात्रों के हित में संस्थानों को फीस वृद्धि वापस लेने को निर्देशित किया गया। जिस पर उनके द्वारा फीस वृद्धि वापस लेने का निर्णय लिया गया है। मुख्यमंत्री ने प्रदेश में मेडिकल संस्थानों द्वारा फीस वृद्धि वापस लिया जाना मेडिकल छात्रों के हित में एक महत्वपूर्ण फैसला बताया। उन्होंने कहा कि इससे मेडिकल के छात्रों को फायदा होगा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में किसी को भी मनमानी नही करने दी जायेगी। यदि कोई मनमानी करेगा तो उसके विरूद्ध कड़ी कार्यवाही की जायेगी। मेडिकल कॉलेज के छात्रों की सुविधा का पूरा ध्यान रखा जायेगा।

एनसीईआरटी की पुस्तकों को प्रदेश के विद्यालयों में लागू करने के निर्णय के संबंध में निजी स्कूल प्रबंधकों के असंतोष के संबंध में मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र ने कहा कि इस संबंध में जायज बातों को सुना जायेगा।