पौधरोपण के लिये सीएम ने चलाया फावड़ा

मिशन ऋषिपर्णा के अंतर्गत मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने पौधरोपण के गड्ढे खोदे। उन्होंने कहा कि रिस्पना व कोसी के पुनर्जीवीकरण के लिये हरेला पर्व के दौरान एक दिन निर्धारित कर लाखों पौधे लगाये जायेंगे। पौध रोपण का यह कार्य सभी के सार्थक प्रयासों से सफल होगा।

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र ने कहा कि रिस्पना से ऋषिपर्णा सरकार का दीर्घकालिक एवं महत्वाकांक्षी अभियान है। इस मिशन में स्थानीय लोगों के अलावा विभिन्न सरकारी तथा गैरसरकारी संगठनों, संस्थाओं एवं अन्य प्रदेशों के लोगों का सहयोग भी मिल रहा है। रिस्पना एवं कोसी के पुनर्जीवीकरण के लिए हरेला पर्व के दौरान एक दिन निर्धारित कर 3.5 लाख पौधे लगाये जायेंगे। पौधरोपण का यह कार्य पूर्ण रूप से जन सहयोग से किया जायेगा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रारम्भिक चरण में रिस्पना एवं कोसी नदी को पुनर्जीवित करने का लक्ष्य रखा गया है। इसके बाद अन्य जल स्रोतो को भी पुनर्जीवित किया जायेगा। मुख्यमंत्री ने प्रदेशवासियों को विश्व पर्यावरण दिवस की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि पर्यावरण का संरक्षण, हम सब की सामूहिक जिम्मेदारी है। वर्ष-2018 में विश्व पर्यावरण दिवस की मेजबानी भारत कर रहा है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी ने प्लास्टिक मुक्त भारत का जो आह्वाहन किया है, उसमें सबका सहयोग जरूरी है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि 31 जुलाई से उत्तराखण्ड में पॉलीथीन पूर्ण रूप से प्रतिबन्धित की जायेगी। सभी पॉलीथीन के थोक विक्रेताओं को इससे पूर्व पॉलीथीन का स्टॉक समाप्त करने के लिए कहा गया है। उन्होंने कहा कि इससे एक सप्ताह पूर्व पूरे प्रदेश में पॉलीथीन से होने वाले पर्यावरणीय नुकसान पर व्यापक स्तर पर जन जागरूकता अभियान चलाया जायेगा। उत्तराखण्ड को पॉलीथीन मुक्त राज्य बनाने के लिए सामाजिक संगठनों के अलावा जन सहयोग आवश्यक है।

जिलाधिकारी एसए मुरूगेशन ने बताया कि लण्ढ़ौर शिखर फॉल से मोथरोवाला-दौड़वाला तक तक वृक्षारोपण के लिए 39 ब्लॉक बनाये गये हैं। सम्पूर्ण क्षेत्र में अनेक प्रजाति के पौध लगाये जायेंगे। इसमें 30 प्रतिशत फलदार वृक्ष लगाये जायेंगे। उन्होंने कहा कि इस मिशन में सबका अच्छा सहयोग मिल रहा है।

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने इसके उपरान्त मुख्यमंत्री आवास में भी वृक्षारोपण किया। उन्होंने विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर लीची, अनार, अमरूद, आडू, प्लम, नाशपाती आदि फलदार पौधे रोपे।

जानिए एम्स ऋषिकेश में आखिर यह सुविधा क्यों नहीं

ऋषिकेश स्थित एम्स संस्थान वैसे तो सारी सुविधाओं से लैस हैं। मगर, इतने बड़े संस्थान में शव विच्छेदन गृह की सुविधा का अभाव है। अगर, यहां शव विच्छेदन गृह खुल जाता तो पांच जनपदों की पुलिस को दूर जाकर शव का पोस्टमार्टम नहीं करना पड़ता।

विदित हो कि जनपद पौड़ी के थाना लक्ष्मणझूला पुलिस को शव का पोस्टमार्टम कराने के लिये हरिद्वार जाना पड़ता है। इसी तरह टिहरी के थाना मुनिकीरेती पुलिस को भी नरेन्द्रनगर की शरण लेनी पड़ती है।

ऋषिकेश में हालांकि बाईपास मार्ग पर शव विच्छेदन गृह है, लेकिन 72 घंटे शिनाख्त के लिये अज्ञात शवों को रखने की पर्याप्त व्यवस्था यहां भी नहीं है। यहां अखिल भारतीय आयर्विज्ञान संस्थान के खुल जाने के बाद यह उम्मीद बन गयी थी कि अब यहां पोस्टमार्टम हाउस खुल जायेगा। मगर, अब तक नहीं खुला है। एम्स प्रशासन द्वारा वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक के जरिये शासन से एम्स में शव विच्छेदन गृह के लिये अधिसूचना आदेश जारी करने की मांग की गयी थी। इस मामले में नोटिफिकेशन गृह विभाग द्वारा किया जाना है। मगर, संबंधित फाइल कभी एसएसपी कार्यालय, कभी पुलिस मुख्यालय तो कभी शासन के विभिन्न विभागों में घूम कर रह गयी है।

अगर आपके पास कोई समस्या है तो कीजिए इस टोल फ्री नंबर पर कॉल

भारत सरकार के सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय की राष्ट्रीय वयोश्री योजना के अंतर्गत हरिद्वार क्षेत्र के 450 वृद्ध दिव्यांगों को मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत व केंद्रीय मंत्री थावर चंद गहलौत ने जीवन सहायक उपकरण बांटे। इस मौके पर सीएम ने कहा कि केंद्र सरकार की योजनाओं का लाभ अधिक से अधिक लोगों को उठाना चाहिए। मुख्यमंत्री ने कहा कि कोई भी व्यक्ति अपनी शिकायत टोल फ्री नंबर 1905 पर कर सकता है।

मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री व केन्द्रीय मंत्री गहलोत का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि केंद्र की हर योजना में उत्तराखण्ड को विशेष रूप से शामिल किये जाने के प्रयास किये जा रहे हैं। पिछले चार वर्षों में 50 गुना अधिक शिविरों का आयोजन कर पात्र लोगों को लाभान्वित किया गया है। मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र ने कहा कि यह सुनिश्चित किया जाए कि केन्द्र सरकार की योजनाओं का लाभ लाभार्थियों को अधिक से अधिक मिल सके।

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र ने जिला प्रशासन को दिव्यांगों के कल्याण के लिये केन्द्र एवं राज्य सरकार द्वारा चलाई जा रही विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं के बारे में जानकारी देने एवं योजना से लाभान्वित करने के निर्देश भी दिये। मुख्यमंत्री ने कहा कि कोई भी व्यक्ति अपनी शिकायत या समस्या को टोल फ्री नम्बर 1905 पर दर्ज करा सकते है।

केन्द्रीय सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री थावरचंद गहलोत ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में केन्द्र सरकार द्वारा 100 से अधिक विभिन्न कल्याणकारी योजनाएं बनाई गई है, जिनके माध्यम से लोगों को लाभान्वित करने का कार्य किया जा रहा है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने वृद्ध दिव्यांगों के सशक्तिकरण के लिए कई कदम उठाये है। केन्द्रीय मंत्री गहलोत ने कहा पिछले चार वर्षों में देशभर में 11 लाख दिव्यांगों को 600 करोड़ रूपये से अधिक की सामग्री वितरित की जा चुकी है और सात हजार कैम्प आयोजित किये गये हैं।

राष्ट्रीय वयोश्री योजना पिछले वर्ष प्रारम्भ की गयी, जिसमें देश के 260 जनपदों का चयन किया गया है। इस योजना के अन्तर्गत अभी तक 43 हजार वृद्धजनों को उनकी आवश्यकतानुसार उपकरण उपलब्ध कराये गये हैं। 80 प्रतिशत से ज्यादा दिव्यांगों को मोटराईज ट्राई साइकिल उपलब्ध करायी जा रही है। अब तक साढ़े पांच हजार पात्र लोगों को मोटराईज ट्राईसिकल दी जा चुकी है।

सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय द्वारा दिव्यांगों को व्हील चेयर, ट्राईसाईकिल, बैसाखी, सुनने की मशीन, चश्मा एवं पढ़ने वाले बच्चों को लेपटॉप, स्मार्टफोन आदि वितरित किये जा रहे हैं।

सरकार द्वारा प्रत्येक पात्र व्यक्ति को 7500 रूपये तक की सामग्री देने का निर्णय लिया गया है। ऐसे बच्चे जो बोल व सुन नहीं सकते है, उनके उपचार के लिये सरकार अनुदान दे रही है।

युवाओं को नदियों के पुनर्जीवीकरण को आगे आना होगाः त्रिवेन्द्र

मुख्यमंत्री ने मैराथन दौड़ को हरी झंडी दिखाते हुये कहा कि युवाओं को नदियों के पुनर्जीवीकरण के लिये आगे आना होगा। मैड संस्था इस संबंध में बच्चों की ऊर्जा को सही दिशा देने का रचनात्मक कार्य किया है।

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र ने कहा कि रिस्पना एवं कोसी नदी को पुनर्जीवित कर हमें देश के समक्ष रोल मॉडल बनाना होगा। यह कार्य जन सहयोग से ही पूरा किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि इन नदियों के पुनर्जीवन के लिए सरकार को समाजिक संस्थाओं, विभिन्न संगठनों एवं स्थानीय जनता का पूरा सहयोग मिल रहा है।

त्रिवेन्द्र रावत ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के स्वच्छ गंगा मिशन को सफल बनाने के लिए हमें पूरा सहयोग करना होगा। नमामि गंगे के तहत 25 हजार करोड़ रूपये इस प्रोजेक्ट में रखे गये हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि देहरादून को पूर्ण ग्रेविटि का पानी उपलब्ध कराने के लिए अगले वर्ष तक सौंग बांध की नीव रखी जायेगी।

राज्य सरकार द्वारा ईको सिस्टम, पर्यावरण सरंक्षण, जल संरक्षण, नदियों के पुनर्जीवीकरण व स्थानीय उत्पादों पर आधारित स्वरोजगार के अवसर विकसित करने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।

राज्य में सभी लें सबको शिक्षा, अच्छी शिक्षा योजना का लाभ

उच्च शिक्षा राज्य मंत्री डा. धन सिंह रावत ने कहा कि राज्य में उच्च शिक्षा की गुणवत्तार पर विशेष ध्यान दिया जाये। उन्होंने कहा कि राज्य में सबको शिक्षा, अच्छी शिक्षा योजना मिलनी चाहिए। उन्होंने इस योजना का लाभ उठाने के लिय राज्य के युवाओं को संबोधित भी किया।

उन्होंने कहा कि उन्ही विद्यालयों को रूसा के अन्तर्गत धन का आवंटन किया जायेगा जो नैक के अन्तर्गत आते हैं। नैक के मानक के अनुसार सभी विद्यालय में शत् प्रतिशत् प्राचार्य, बिल्डिंग, अध्यापक स्टॉफ, छात्र अध्यापक का अनुपात, छात्र उपस्थिति, प्रदर्शन, सुविधायें होनी चाहिए। इस मानक के अनुरूप उत्तराखण्ड को समस्त डिग्री कॉलेजों को शामिल किया जायेगा।

रूसा के अन्तर्गत अभी तक कुल 72 करोड़ रू0 मिले हैं। जिसमें से दून विश्वविद्यालय एवं कुमाऊ विश्वविद्यालय के लिए 20-20 करोड़ रू0 के अतिरिक्त कुल 49 कॉलेजों को सुविधायें दी जायेंगी। अभी तक कुल 72 करोड़ रू0 मिले बजट में एस0जी0आर0आर0 पी0जी0कालेज देहरादून 2 करोड़, राजकीय महिला महाविद्यालय हल्द्वानी 2 करोड़, राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय कोटद्वार 2 करोड़, ऋषिकेश, काशीपुर, बागेश्वर, द्वारहाट, डाकपत्थर, रूद्रपुर, रामनगर, लोहाघाट राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालयों को 2-2 करोड़ एम0बी0पी0जी कॉलेज हल्द्वानी को 2 करोड़, राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय डोईवाल 3 करोड़, राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय मुनस्यारी 2 करोड़, रूसा परियोजना निदेशालय 3 करोड़ रूपये आवंटित किये जायेंगे।

इस सम्बन्ध में मंत्री ने कहा उत्तराखण्ड के उच्च शिक्षा से सम्बन्धित कॉलेज और विश्वविद्यालय में सभी विद्यार्थियों के लिए 100 प्रतिशत पुस्तक की व्यवस्था की जायेगी। पहली बार सभी महाविद्यालय में अतिरिक्त सभी विद्यार्थियों को लैब, शौचालय, कम्प्यूटर लाइब्रेरी, ई-लाईब्रेरी, स्मार्ट क्लास, खेल का सामान, प्राचार्य, असिस्टेंट प्रोफेसर की सुविधा दी जायेगी। प्रत्येक कॉलेज में प्राचार्य के साथ कम से कम 2 असिस्टेंट प्रोफेसर और एक क्लर्क होगा।

डीएम आपदा के दौरान तुरंत एक्शन लेः त्रिवेन्द्र

राज्य में अतिवृष्टि व ऑधी तूफान से हुयी क्षति के जानकारी मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावन ने ली। उन्होंने राज्य आपदा परिचालन केंद्र में डयूटी पर तैनात कर्मचारियों को फोन के माध्यम से जिलों की आपदा की जानकारी लेने के निर्देश दिए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि अगले तीन माह वर्षाकाल के दौरान विशेष सतर्कता की जरूरत है। उन्होंने सभी जिलाधिकारियों को किसी भी प्रकार के आपदा के लिए सतर्क रहने एवं शीघ्र रिस्पांस देने के निर्देश दिये हैं। उन्होंने सभी जिलाधिकारियों को निर्देश दिये कि जिला आपदा कंट्रोल रूम का भी लगातार निरीक्षण करते रहें। ड्यूटी के प्रति लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों एवं कर्मचारियों को चिन्हित कर कार्यवाही करें।

जिलाधिकारियों को आपदा के दृष्टिगत निरन्तर जनप्रतिनिधियों के सम्पर्क में रहने के भी निर्देश दिये हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि सभी ग्राम पंचायतों के ग्राम प्रधानों की फोन नम्बर की लिस्ट भी अपडेट रखी जाए। ताकि किसी भी प्रकार की घटना होने पर शीघ्र सम्पर्क किया जा सके।

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र ने कहा कि उत्तरकाशी एवं पौड़ी में 28 मीमी की बारिश हुई है। जबकि देहरादून में 40 मीमी बारिश हुई। उत्तरकाशी जनपद के बड़कोट तहसील के गंगटाड़ी में एक बच्ची के बहने की सूचना मिली है। जबकि पौड़ी जनपद के चाकीसैंण तहसील के बुमोच में अतिवृष्टि से चार पशुओं की हानि हुई है। उन्होंने राज्य में बादल फटने संबंधी जानकारी होने से साफ इंकार किया। सीएम बोले राज्य में कोई बादल नहीं फटा है। इस तरह की सूचना का कोई औचित्य नहीं है।

केंद्र सरकार ने चार वर्षों में दी जीरों टॉलरेंस की सरकारः त्रिवेन्द्र

केंद्र सरकार के चार वर्षों को सफल बताते हुये मुख्यमं़त्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने कहा कि नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार ने इन चार वर्षों को जनता के प्रति समर्पित रहा। प्रधानमंत्री की ठोस पहल से आज देशवासी अनेकों जन कल्याणकारी योजनाओं का लाभ उठा रहे है।

शुक्रवार को बातचीत में मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का न्यू इण्डिया का विजन देश को खुशहाली और तरक्की के रास्ते पर ले जाने के लिये एक बड़ा कदम है। देश ने आर्थिक, सामाजिक समृद्धि एवं विकास की नई ऊँचाइयों को छुआ है। स्वच्छ भारत मिशन के अंतर्गत देश का स्वच्छता कवरेज 38 प्रतिशत से बढ़कर 83 प्रतिशत हो गया है। गत चार वर्षों में सड़क परिवहन में उल्लेखनीय तेजी से कार्य हो रहा है।

राष्ट्रीय स्वास्थ्य सुरक्षा मिशन के तहत गरीब परिवारों को पांच लाख रूपये तक का बीमा कवरेज दिया जा रहा है। मात्र दो वर्षों के भीतर ही उज्ज्वला योजना के अंतर्गत चार करोड़ महिलाओं को निःशुल्क रसोई गैस कनेक्शन देकर धुॅआ मुक्त जीवन दिया गया। प्रधानमंत्री आवास योजना के अंतर्गत वर्ष 2022 तक सबको आवास दिए जाने का लक्ष्य रखा गया है। केन्द्र सरकार द्वारा 1200 अप्रासंगिक कानूनों को खत्म किया जा चुका है। प्रधानमंत्री द्वारा बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ कार्यक्रम को प्रभावी तरीके से बढ़ाया गया है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री के भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस की नीति के तहत चार वर्षों में केंद्र सरकार के किसी भी मंत्री पर भ्रष्टाचार संबंधी कोई आरोप नहीं है। जीएसटी से कर प्रणाली एवं व्यापार आसान हो रहा है।

फूलों की घाटी के दीदार को पहुंचे पर्यटक

फूलों की घाटी को पर्यटकों के लिये खोल दिया गया है। विश्व प्रसिद्ध यह घाटी में पर्यटकों की आमद हमेशा बनी रहती है। इस वर्ष फूलों की घाटी में जाने वाले पर्यटकों को रास्ते व घाटी में हिमखंड के दीदार कर रहे है। विदित है कि फूलों की घाटी में 500 से अधिक प्रजाति के फूल खिलते है।

फूलों की घाटी में 500 से अधिक प्रजाति के फूल खिलते है। 87.5 वर्ग किमी क्षेत्रफल में फैली फूलों की घाटी में जैव विविधता का खजाना है। फूलों की घाटी में हर 15 दिनों में अलग रंग के फूल खिलते हैं। इसलिए इसलिए फूलों की घाटी में पर्यटक बार-बार आने आवाजाही करते हैं। फूलों की घाटी को दो अक्टूबर 2005 को यूनेस्को ने विश्व धरोहर घोषित किया था।

फूलों की घाटी की खोज 1931 में कॉमेट पर्वतारोहण के बाद ब्रिटिश पर्वतारोही फ्रेक स्मिथ ने की थी। वे घाटी की सौन्दर्य से बहुत प्रभावित हुए। उन्होंने ही इस पर वैली ऑफ फ्लावर किताब लिख कर फूलों की घाटी का नामकरण किया। फूलों की घाटी नेशनल पार्क के वन क्षेत्राधिकारी वृजमोहन भारती ने बताया कि फूलों की घाटी पयर्टकों के लिए खोल दी गई है।

फूलों की घाटी के लिए घाघरिया से तीन किमी पैदल चलकर पहुंचा जा सकता है। फूलों की घाटी यात्रा का बेस केंप घाघरिया है। गोविंदघाट से 14 किमी पैदल चलकर घांघरिया पहुंचा जा सकता है। इसके बाद भी लोगों को फूलों की घाटी से उम्मीदें हैं। आपदा में फूलों की घाटी का पैदल रास्ता क्षतिग्रस्त हो गया था। वर्ष 2017 में फूलो की घाटी मे रिकार्ड तोड़ पर्यटक आए थे। वन विभाग को पर्यटको की अच्छी खासी आमद बढ़ने से आय में इजाफा हुआ था।

दून अंतराष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम को आईसीसी ने उपयुक्त पाया

आईसीसी के विशेषज्ञों ने देहरादून के अंतराष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम को क्रिकेट के तीनों प्रारूपों के लिये उपयुक्त पाया है। जिसके बाद यहां तीन जून से अंतराष्ट्रीय क्रिकेट मैच का आयोजन किया जायेगा। यह मुकाबला बांग्लादेश व अफगानिस्तान की क्रिकेट टीम के बीच खेला जायेगा। अफगानिस्तान की टीम पूर्व में यहां पहुंच चुकी हैं और दून के खिलाड़ियों के साथ अभ्यास मैच में हिस्सा भी ले चुकी है। मगर, बांग्लादेश की टीम मंगलवार को यहां पहुंच गयी है।

उत्तराखंड के मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने हाल ही में विशेषज्ञों के दल के साथ स्टेडियम का दौरा किया था। इस दल में आइसीसी के विशेषज्ञ भी शामिल थे जिन्होंने स्टेडियम का जायजा लिया था। विशेषज्ञों ने सभी सुविधाओं का जायजा लेने के बाद खिलाड़ियों के लिए सुविधाओं के स्तर, मीडिया और प्रसारण जरूरतों को अंतरराष्ट्रीय मैचों के तीनों प्रारूपों के आयोजन के लिए उपयुक्त पाया था और इसे हाल के समय में सर्वश्रेष्ठ स्थलों में से एक करार दिया गया। उत्तराखंड की राजधानी में स्थित यह स्टेडियम पहाड़ियों के बीच स्थित है और इसके आस-पास की खूबसूरती देखते ही बनती है। इस स्टेडियम में 25 हजार दर्शकों की क्षमता है।

विदित हो कि आइसीसी की ओर से राजीव गांधी अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम का मुआयना करने के लिये टीम इंडिया के पूर्व दिग्गज गेंदबाज जवागल श्रीनाथ 21 मई को दून आए थे। 21 मई की शाम को ही उन्होंने फ्लड लाइट में स्टेडियम का निरीक्षण किया था जबकि उसके अगले दिन वे दोपहर में एक बार फिर स्टेडियम पहुंचे। स्टेडियम में उपलब्ध सुविधाओं की बरीकी से जांच करने के बाद श्रीनाथ ने बकायदा फोटो खींचकर भी आइसीसी के अधिकारियों को भेजी थी। वे स्टेडियम में उपलब्ध सभी उपकरणों और खूबसूरती के कायल हुए थे। उसी दिन यह तय हो चुका था कि स्टेडियम को जल्द ही आइसीसी की हरी झंडी मिल जाएगी। 237 करोड़ रुपऐ की लागत से बने इस स्टेडियम में अब शहरवासियों को हर प्रारूप की क्रिकेट देखने को मिलेगी।

इतना सस्ता प्लान किसी अन्य नेटवर्क का भी नहीं

पतंजलि स्वदेशी समृद्ध कार्डधारकों को बीएसएनएल कम मूल्य पर एक प्लान उपलब्ध करायेगी। इसके लिये पतंजलि बीएसएनएल कंपनी के पांच लाख काउंटर पर पतंजलि स्वदेशी समृद्ध कार्ड उपलब्ध करायेगी।

इस प्लान पर 144 रुपये के न्यून शुल्क पर सभी नेटवर्क पर असीमित कॉल, प्रतिदिन 2 जीबी डाटा मिलेगा। साथ ही इसमें कोई रोमिंग चार्ज नहीं होगा और 100 एसएमएस प्रतिदिन करने की सुविधा मिलेगी।

प्लान को जारी करने के मौके पर आयोजित कार्यक्रम में योगगुरु बाबा रामदेव ने बीएसएनएल का सिम लांच किया। इस मौके पर बाबा रामदेव ने कहा कि बीएसएनएल देश की पूर्ण स्वदेशी टेलीकॉम कंपनी है। कंपनी के पांच लाख काउंटर पर पतंजलि स्वदेशी समृद्ध कार्ड उपलब्ध कराए जाएंगे।

बीएसएनएल मुबई, महाराष्ट्र के डीजीएम गोपाल पाटिल ने कहा कि पतंजलि व बीएसएनएल का संबंध 2010 से है। बीएसएनएल महाराष्ट्र के पीजीएमइबी सुनील कुमार गर्ग ने कहा कि पतंजलि जैसी राष्ट्र-निर्माण के कार्य में संलग्न संस्था से जुड़ना गर्व की बात है। बीएसएनएल उत्तराखंड के मुख्य महाप्रबंधक महक सिंह ने कहा कि पतंजलि ने स्वदेशी अभियान में महत्वपूर्ण कार्य किया है।