राष्ट्रीय वीरता पुरस्कार के लिए बाल कल्याण परिषद ने भेजा राखी और आयुष का नाम

पौड़ी जिले की ग्राम देव कुंडई निवासी राखी ने गुलदार के हमले से अपने छोटे भाई की जान बचाई। राखी के इस साहस के लिए उत्तराखंड राज्य बाल कल्याण परिषद ने उसका नाम राष्ट्रीय वीरता पुरस्कार के लिए भेजा है। राखी सहित प्रदेश से दो बच्चों के नाम इस पुरस्कार के लिए भेजे गए हैं। जिसमें एक बच्चा देहरादून के डोईवाला विकासखंड का हैं।

केंद्र सरकार हर वर्ष बच्चों को राष्ट्रीय वीरता पुरस्कार देती है। इसके तहत इस वर्ष भी प्रदेश से बच्चों के नाम मांगे थे, लेकिन प्रदेश से 30 सितंबर तक एक भी नाम भारतीय बाल कल्याण परिषद नई दिल्ली को नहीं भेजा गया। पौड़ी गढ़वाल जनपद की राखी एवं दूसरा देहरादून जनपद के डोईवाला विकासखंड के आयुष कोठारी का है।

11 वर्षीय राखी ने दिखाया था अदम्य साहस
पौड़ी गढ़वाल जिले की देव कुंडई गांव निवासी राखी अपने चार साल के भाई राघव व मां के साथ 4 अक्तूबर 2019 को खेत पर गई थी। जहां से दोपहर करीब ढाई बजे भाई राघव को कंधे में बैठा कर वह घर लौट रही थी। रास्ते में अचानक गुलदार ने राघव पर हमला कर दिया, यह देख राखी अपने अदम्य साहस का परिचय देते हुए गुलदार से भिड़ गई।

गुलदार ने राखी पर अपने पंजों और दांतो से कई घाव किए, लेकिन लहूलुहान राखी ने गंभीर हालत के बावजूद हिम्मत दिखाई और अपने भाई को नहीं छोड़ा। इस बीच राखी की मां पीछे से आ गई। उसके शोर मचाने पर गुलदार जंगल की ओर भाग गया।

आयुष ने दिया सूझबूझ का परिचय
देहरादून जिले के डोईवाला विकासखंड के मिस्सरवाला निवासी आयुष कोठारी ने 24 जून 2019 को अपने परिवार से बिछड़े तीन वर्षीय बच्चे को सूझबूझ का परिचय देते हुए पुलिस के सुपुर्द कर उसे उसके परिजनों से मिलाया। लईक अहमद निवासी ग्राम धनोरा थाना शहजाद नगर जिला रामपुर उत्तर प्रदेश अपने रिश्तेदारों के यहां तेलीवाला डोईवाला आए थे।

जहां उनका पुत्र समद (3) अचानक लापता हो गया था। वह घर से आठ किलोमीटर दूर मिस्सरवाला पहुंच गया था। आयुष कोठारी की नजर बच्चे पर पड़ी, तो उसने अपने चचेरे भाई सूरज के सहयोग से उसे पुलिस स्टेशन तक पहुंचाया। आयुष व सूरज की बुद्धिमत्ता एवं सूझबूझ से समद अपने परिजनों के पास पहुंच गया।

कुभ क्षेत्र को केबल लैस बनाने के लिए बिजली व गैस पाइप लाइन के निर्माण में तेजी लाएंः त्रिवेन्द्र

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने शनिवार को मेला नियन्त्रण भवन हरिद्वार में कुम्भ मेला 2021 की आयोजन व्यवस्थाओं की शासन के उच्चाधिकारियों एवं सभी अखाड़ो के प्रतिनिधियों के साथ व्यापक समीक्षा की। इस अवसर पर नगर विकास मंत्री मदन कौशिक, मुख्य सचिव उत्पल कुमार सिंह, सचिव नगर विकास शैलेश बगोली, गढ़वाल आयुक्त रविनाथ रमन, मेलाधिकारी दीपक रावत, आईजी मेला संजय गुंज्याल, अखाड़ा परिषद् के अध्यक्ष महंत नरेन्द्र गिरि, महामंत्री मंहत हरिगिरी सहित सभी अखाड़ो के प्रतिनिधि तथा सभी सम्बन्धित अधिकारी मौजूद थे। इस अवसर मुख्यमंत्री ने संत महात्माओं को सम्मानित भी किया।

मुख्यमंत्री श्री त्रिवेन्द्र ने कहा कि आगामी कुम्भ मेला दिव्य एवं भव्यता के साथ आयोजित हो, इसके लिये समेकित प्रयासों पर ध्यान दिया जाय, सभी विभागों को अपनी जिम्मेदारी भी समझनी होगी। आगामी कुम्भ मेले में लगभग 12 करोड़ श्रद्धालुओं के आने की सम्भावना के दृष्टिगत व्यवस्थाये सुनिश्चित की जाय। मुख्यमंत्री ने कहा कि आगामी कुम्भ मेले की ऐसी व्यवस्थायें होनी चाहिए ताकि यह आयोजन भविष्य के आयोजनों के लिये मिसाल बने। मुख्यमंत्री ने कहा कि कुम्भ मेले में बेहतर स्वास्थ्य सुविधायें उपलब्ध कराने के साथ ही नेत्र चिकित्सा के लिए नेत्र कुम्भ भी आयोजित किया जाय। उन्होंने कुम्भ क्षेत्र को केबल लैस बनाने के लिये बिजली व गैस पाइप लाइन को अण्डर ग्राउंड किये जाने में भी तेजी लाने को कहा। मुख्यमंत्री ने कहा कि हरिद्वार को जोड़ने वाली सभी सड़को एवं पुलों के निर्माण मंे तेजी लाई जाय। इसके लिये दो या तीन शिफ्ट में कार्य करने की प्रक्रिया अपनायी जाय।

मुख्यमंत्री ने कहा है कि स्थाई प्रकृति के काम अक्टूबर 2020 तक पूरे कर लिए जाएं। समयबद्धता और गुणवत्ता सुनिश्चित की जाए। इस वैश्विक मेले में बड़ी संख्या में आने वाले श्रद्धालु, राज्य के दूसरे पर्यटन स्थलों में भी जा सकते हैं। तमाम तरह की सुविधाएं विकसित करने मे आधुनिकतम तकनीक का प्रयोग करने पर भी उन्होंने बल दिया।

नगर विकास मंत्री मदन कौशिक ने कहा कि कुम्भ मेला की सफलता सभी के सामुहिक प्रयासों से जुड़ी है। इस कुम्भ में बेहतर व्यवस्थायें कर देश व दुनिया के श्रद्वालुओं को आवश्यक व्यवस्थायें करानी होगी। उन्होंने कहा कि सभी अधिकारी अपनी जिम्मेदारी समझे। उन्होंने संत महात्माओं के सुझावों पर भी ध्यान देने को कहा। अखाड़ा परिषद् के अध्यक्ष महंत नरेन्द्र गिरि तथा महामंत्री महंत हरिगिरि ने कुम्भ क्षेत्र से अतिक्रमण हटाने, आन्तरिक सड़को के निर्माण साफ सफाई पेयजल पेशवाई मार्गो के निर्माण मेला क्षेत्र की भूमि को अतिक्रमण से मुक्त करने अखाड़ो को भूमि उपलब्ध कराने, अखाड़ो के निर्माण के लिये आवश्यक धनराशि की उपलब्धता की बात कही। उन्होंने मेले के सफल आयोजन के लिये पूरा सहयोग का भी आश्वासन दिया।

महाकुंभ में भीड़ प्रबंधन की जो प्लानिंग हो, उसे कई बार परखा जाए

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने वर्ष 2021 में हरिद्वार में होने वाले महाकुम्भ की तैयारियों में तेजी लाने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा है कि महाकुम्भ की व्यवस्थाएं, इसकी दिव्यता और भव्यता के अनुरूप हों। महाकुम्भ में देश-विदेश से आने वाले करोड़ों श्रद्धालुओं के लिए हर आवश्यक सुविधा जुटाई जाए। सुरक्षा में किसी तरह की चूक की गुंजाईश नहीं रहनी चाहिए। इसके लिए भीड़ प्रबंधन की जो भी प्लानिंग की जाए, उसे बार-बार परख भी लिया जाए। मुख्यमंत्री ने कहा कि वे स्वयं महाकुम्भ की तैयारियों पर नजर रख रहे हैं। समय-समय पर तैयारियों के स्थलीय निरीक्षण के साथ इसकी समीक्षा भी करते रहेंगे।

हरिद्वार महाकुम्भ 2021, दुनिया का सबसे बड़ा धार्मिक व आध्यात्मिक मेला होगा। वैश्विक स्तर के इस मेले में दुनिया भर के देशों से करोड़ों श्रद्धालु आएंगे। इसमें किसी भी स्तर पर कोई लापरवाही क्षम्य नहीं हो सकती है। मुख्यमंत्री ने शासन स्तर पर भी महाकुम्भ की तैयारियों की नियमित मॉनिटरिंग करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने, कुम्भ मेलाधिकारी को दैनिक तौर पर तैयारियों का स्थलीय निरीक्षण करने को कहा है। शासन स्तर से किसी भी तरह की आवश्यकता होने पर तत्काल अवगत कराया जाए। महाकुम्भ की तैयारियों में संत महात्माओं का मार्गदर्शन लेना सुनिश्चित किया जाए।

मुख्यमंत्री ने कहा है कि स्थाई प्रकृति के काम अक्टूबर 2020 तक पूरे कर लिए जाएं। समयबद्धता और गुणवत्ता सुनिश्चित की जाए। इस वैश्विक मेले में बड़ी संख्या में आने वाले श्रद्धालु, राज्य के दूसरे पर्यटन स्थलों में भी जा सकते हैं, इसलिए कुम्भ मेले के दौरान लोगों को प्रदेश के पर्यटन स्थलों की जानकारी देने के लिए पर्यटन सूचना केंद्र स्थापित किए जाएं। तमाम तरह की सुविधाएं विकसित करने मे आधुनिकतम तकनीक का प्रयोग किया जाए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि सुरक्षा व भीड़ प्रबंधन मे तैनात किए जाने वाले पुलिसकर्मियों का व्यवहार कुशल होना जरूरी है। सुरक्षा के लिए हर आवश्यक व्यवस्था समय से कर ली जाए। रेलवे व निकटवर्ती दूसरे राज्यों के अधिकारियों से समन्वय रखा जाए। स्नान घाटों सहित पूरे कुम्भ क्षेत्र में सफाई की पूरी व्यवस्था रहे। श्रद्धालुओं के लिए स्वास्थ्य, पेयजल, पार्किंग, आवास व शौचालय की सम्पूर्ण सुविधा रहनी चाहिए।

मुनिकीरेती पुलिस ने बिना वीजा और पासपोर्ट 18 साल से रह रहे विदेशी को पकड़ा

बिना पासपोर्ट और वीजा के पिछले 18 वर्षों से एक विदेशी नागरिक साधुवेश में तीर्थनगरी में डेरा डाले हुए है। कई साल से अवैध निवास कर रहे विदेशी नागरिक के बारे में पुलिस और एलआईयू को शुक्रवार को पता चल पाया। पुलिस सूचना मिलने के बाद मुनिकीरेती क्षेत्र स्थित नावघाट पहुंची। जब नागरिक से उसके वैध दस्तावेज मांगे गए तो उसने काफी देर तक एलआईयू टीम को प्रवचन के झांसे में उलझाए रखा। आखिरकार स्वीकार किया कि उसके पास कोई पासपोर्ट, वीजा या निवास का कोई वैध दस्तावेज नहीं है।
अवैध रूप से निवास कर रहा जर्मन नागरिक जर्गेन रुडोल्फ 1981 में भारत आया था। इस दौरान पिछले 38 साल से वह महाराष्ट्र सहित दक्षिण भारत के विभिन्न शहरों में रहा। पिछले 18 साल से वह ऋषिकेश क्षेत्र में स्थान बदल-बदल कर रह रहा है। फिलहाल उसका मौजूदा ठिकाना मुनिकीरेती स्थित नावघाट बना हुआ है। वह गंगा किनारे बने सीढ़ी पर टेंट डालकर रह रहा है। अवैध तरीके से रहने की सूचना मिलने के बाद करीब 12 बजे मुनिकीरेती पुलिस और एलआईयू की सब इंस्पेक्टर उमा चैहान अपनी टीम के साथ पूछताछ को पहुंचे। पूछताछ के दौरान जर्गेन रुडोल्फ ने पहले तो आनाकानी की। बाद में अपना मूल निवास भी बताने से इनकार कर दिया।
बाद में उसने कुछ दस्तावेज दिखाए जिसके मुताबिक वह जर्मन नागरिक है, और 1981 में भारत आ गया था। तब से वह गेरुआ वस्त्र पहने पिछले 18 सालों से तीर्थनगरी में अलग-अलग स्थानों पर रह रहा है। एलआईयू एसआई उमा चैहान के मुताबिक अवैध निवास कर रहे जर्मन नागरिक की सूचना संबंधित एंबेसी को दी जाएगी। फिलहाल अभी मामले की पड़ताल की जा रही है। वहीं थाना अध्यक्ष मुनिकीरेती आरके सकलानी का कहना है कि विदेशी नागरिक के अवैध प्रवास संबंधी मामले की गहन छानबीन हो रही है। दस्तावेजों की पड़ताल के बाद कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
वहीं, विदेशी जर्गन रुडोल्फ का कहना है कि उसके पास वीजा, पासपोर्ट सहित सभी वैध दस्तावेज थे। कई साल पहले कुछ बदमाशों ने रुपयों के लालच में सारे दस्तावेज फाड़कर फेंक दिए। उनके पास पैसे भी नहीं हैं। जर्मन एंबेसी में एक बार मदद की गुहार लगाई थी। इसके बावजूद एंबेसी के लोग सहयोग नहीं कर रहे हैं। रुडोल्फ का कहना है कि अब उसने भारतीय संस्कृति को आत्मसात कर लिया है। उसका नया नाम आशाराम गिरि है। पूरा विश्व मेरा कुटुंब है। परिवार में कोई नहीं है। मां गंगा ही मेरी सबसे बड़ी शुभचिंतक है।

वित्त मंत्री के प्रबंधन से बाजार में आई तेजी, राहत मिलने की उम्मीद

सुस्ती की शिकार अर्थव्यवस्था में नई जान फूंकने के लिए केन्द्र सरकार ने एक महीने के भीतर पांच बड़े कदम उठाए। सुधार के इन कदमों की शुरुआत बीती 23 अगस्त को हुई थी, जबकि देशी-विदेशी निवेशकों को राहत देते हुए कर उपकर में बढ़ोतरी का फैसला वापस लिया था। बीती 23 अगस्त को वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने विदेशी और घरेलू निवेशकों पर उपकर में बढ़ोतरी का फैसला वापस लेने की घोषणा की थी। उसी दिन बैंकों में 70,000 करोड़ रुपये की नई पूंजी देने, रिजर्व बैंक द्वारा रेपो दरों में कटौती का फायदा ग्राहकों को तुरंत देने जैसी घोषणा की गई थी।
28 अगस्त को वित्त मंत्रालय ने अर्थव्यवस्था से जुड़ी दूसरी बड़ी घोषणा की थी। सीतारमण ने कोयला खदान और कॉन्ट्रैक्ट मैन्यूफैक्चरिंग क्षेत्र में 100 फीसदी प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) को मंजूरी दी थी। यही नहीं, गन्ना किसानों और चीनी मिलों को राहत देने के लिए चीनी के निर्यात पर 6,268 करोड़ की सब्सिडी का ऐलान भी किया। डिजिटल मीडिया में भी प्रिंट मीडिया की तरह 26 फीसदी एफडीआई को मंजूरी मिली थी। 30 अगस्त को ही सरकार ने सार्वजनिक क्षेत्र के 10 बैंकों को मिला कर चार बैंक बनाने की घोषणा की थी। उस समय कहा गया था कि विलय के बाद ये बैंक न सिर्फ आकार में बड़े होंगे बल्कि इनका कुल कारोबार भी बढ़ कर 55.81 लाख रुपए करोड़ का हो जाएगा। बड़े बैंक अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर विदेशी बैंकों से मजबूती से प्रतिस्पर्धा कर सकेंगे।
बीते 19 सितंबर को वित्त मंत्री ने कहा कि सरकारी बैंक अभी से अक्टूबर तक 400 जिलों में लोन बांटने के लिए शामियाना बैठक का आयोजन करेंगे। इन बैंठकों में खुदरा ग्राहक के साथ साथ नॉन बैंकिंग फाइनेंस कंपनियों (एनबीएफसी) की भी उपस्थिति होगी। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने शुक्रवार को घरेलू कंपनियों और नई मैन्युफैक्चरिंग कंपनियों के लिए अध्यादेश के जरिए कॉरपोरेट कर घटाने की घोषणा की।

फिर उभरा केदारनाथ धाम, सितम्बर मध्य तक 13 करोड़ की अधिकत्तम आय

वर्ष 2013 की केदारनाथ आपदा के बाद यात्रियों की संख्या में आई भारी गिरावट के कारण मंदिर की आय लगभग नगण्य हो गई थी। इससे केदारपुरी की आर्थिकी भी पूरी तरह चरमरा गई थी। यहां तक कि मंदिर के कर्मचारी-अधिकारियों का वेतन निकालना भी मुश्किल हो गया था। ऐसे में बदरीनाथ धाम की आय से केदारनाथ धाम से जुड़े कर्मचारियों को वेतन दिया गया।
इसके बाद वर्ष 2017 में मंदिर की आय में काफी बढ़ोत्तरी हुई है। उस वर्ष बाबा के खजाने में नौ करोड़ की रकम जमा हुई। वहीं, वर्ष 2018 में आय का आंकड़ा 11.5 करोड़ रुपये पहुंच गया। इसमें हेली कंपनियों ने भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इस वर्ष अब तक केवल हेली सेवाओं से ही मंदिर को छह करोड़ रुपये की आय हो चुकी है। विदित हो कि हेली सेवाओं से आने वाले यात्रियों को श्री बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति वीआइपी दर्शन करवाती है। इसकी एवज में प्रति यात्री 2100 रुपये की रकम मंदिर समिति के पास जमा कराता है।
केदारनाथ धाम में यात्रियों की आमद बढ़ने से इस वर्ष मंदिर की आय में भी जबरदस्त उछाल आया है। अब तक बाबा के खजाने में 13 करोड़ से अधिक की रकम पहुंच चुकी है, जो कि वर्ष 2018 में हुई आय की तुलना में दो करोड़ रुपये अधिक है। अभी मंदिर के कपाट बंद होने में लगभग डेढ़ माह का समय शेष है। अच्छी कमाई होने से मंदिर समिति के कर्मचारी काफी खुश है और अब मंदिर के सौंदर्यकरण व नए अतिथिगृह के निर्माण के साथ ही कर्मचारियों के वेतन-भत्तों की निकासी में भी कोई दिक्कत नहीं आएगी।
वहीं, केदारनाथ धाम की आय बढ़ने से मंदिर समिति अब तृतीय केदार भगवान तुंगनाथ और भगवान के शीतकाल पड़ाव स्थल मक्कूमठ में यात्रियों के लिए विश्राम गृह का निर्माण करने जा रही है। इसके अलावा मंदिर समिति के अधीन आने वाले आयुर्वेदिक विद्यालय और संस्कृत विद्यालयों के संचालन भी अब किसी प्रकार की दिक्कत नहीं आएगी।

आय वर्षवार
वर्ष———————–आय
2019——————-13.40 करोड़ (सितंबर मध्य तक)
2018——————-11.50 करोड़
2017———————9.05 करोड़
2016———————5.30 करोड़

कैबिनेट में प्रस्ताव लाकर, हरिद्वार, यूएसनगर और देहरादून में बांग्लादेशियों की पहचान करवाएंगे सीएम

राष्ट्रीय नागरिकता रजिस्टर (एनआरसी) को उत्तराखंड में लागू करने के मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने संकेत दिए है। सीएम ने हरिद्वार, यूएसनगर और देहरादून को इस मामले में ज्यादा संवेदनशील माना है। उन्होंने कहा कि चूंकि उत्तराखंड सीमांत प्रदेश है, इसकी सीमा पर शुरू से ही घुसपैठ का अंदेशा रहा है। इसके अलावा मैदानी जिलों में गैर उत्तराखंडी आबादी का फैलाव हुआ है।

यह सवाल तब और भी अधिक ध्वनित हुआ जब हरिद्वार जिले के पिरान कलियर में नासिर नामक संदिग्ध व्यक्ति को पकड़ा गया। इस व्यक्ति ने पुलिस को बताया कि वो बांग्लादेश के ढाका का नागरिक है। इस खुलासे के बाद से हरिद्वार में रोहिंग्या मुसलमानों और बांग्लादेशियों की घुसपैठ एक बड़ी पहेली है। जिसे हल करने के लिए भाजपा विधायक संजय गुप्ता मुख्यमंत्री से लेकर जिलाधिकारी तक से बार-बार मांग उठा चुके हैं।

मिली कायमाबी, भारी विमानों की आवाजाही को मिली हरी झंडी

पंतनगर सहित नैनी सैनी एयरपोर्ट के डायरेक्टर एसके सिंह ने बताया कि वर्तमान में नैनी सैनी हवाई पट्टी कंट्रोल्ड (लाइसेंस्ड) एयरपोर्ट में परिवर्तित हो चुकी है। अभी यहां एटीआर-228 टाइप के विमान ही उतर व उड़ान भर सकते थे। यहां मौजूदा 1382 मीटर के रन-वे पर हाई प्रीसिंजिंग लाइट्स, वीएचएस इक्वीपमेंट व पॉपिंग लगाने का कार्य पूर्ण कर लिया गया है। जिससे यह एटीआर-42 टाइप के विमानों की आवाजाही के उपयुक्त हो गया है। एक सप्ताह पूर्व एक टीम द्वारा सर्वे करने के उपरांत गुरूवार को मान्ट्रियल (कनाडा) से पंतनगर, फिर पिथौरागढ़ पहुंची अंतर्राष्ट्रीय नागरिक उड्डयन संगठन की 6 सदस्यीय टीम ने जॉन एमाइन के नेतृत्व में एयरोनॉटिकल सर्वे (नैनी सैनी के 20 नॉटिकल मील दायरे में मौजूद पहाड़ियों, आवासों, एयर कंडीशन आदि) किया। टीम की सकारात्मक रिपोर्ट पर शनिवार को पंतनगर पहुंची एएआई के विशेषज्ञों की टीम (इक्वीपमेंट सहित) ने डायरेक्टर से विचार विमर्श कर पिथौरागढ़ के लिए रवाना हुई। यह टीम वहां फाइनल सर्वे (वैमानिक अध्ययन) कर अपनी रिपोर्ट एएआई को सौंपेगी। जिसके सकारात्मक होने पर यहां से भारी विमानों की आवाजाही का मार्ग प्रशस्त हो सकेगा।
नैनी सैनी एयरपोर्ट से भारी विमानों की आवाजाही शुरू होने से जहां सीमांत के लोगों को देश के अन्य हिस्सों से कनेक्ट होने का लाभ मिलेगा, वहीं सीमांत में पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा और लोग सीमांत के नैसर्गिक सौंदर्य से रूबरू हो सकेंगे। 13 सितंबर को देहरादून-पिथौरागढ़ के बीच हवाई सेवा शुरू होने के बाद कल (16 सितंबर) से पिथौरागढ़-पंतनगर के बीच भी हवाई सेवा बहाल होने की संभावना है। फ्लाइट शेड्यूल हमें प्राप्त हो चुका है, लेकिन इस संबंध में हवाई सेवा प्रदाता कंपनी एयर हेरिटेज एविएशन द्वारा फ्लाइट शुरू करने का अधिकृत पत्र प्राप्त होने के बाद ही कुछ कहा जा सकता है। एसके सिंह, डायरेक्टर-नैनी सैनी एयरपोर्ट ने बताया कि नैनी सैनी एयरपोर्ट में मौजूद 1382 मीटर के रन-वे को अपग्रेड कर दिया गया है। जिससे यह एटीआर-42 टाइप के विमानों की आवाजाही के उपयुक्त है। विमान के टेक ऑफ करते ही वह किस एंगल में बढ़ेगा इसका सर्वे किया जा रहा है, जल्द ही यहां से बड़े विमानों की आवाजाही शुरू होगी।

आकर्षण केन्द्र बन रहा डोबरा-चांटी पुल का डिजाईन

टिहरी झील में बन रहे देश के सबसे लंबे सस्पेंशन डोबरा-चांटी पुल के दोनों सिरे जुड़ चुके हैं और अब आसानी से डोबरा और चांटी के बीच जाया जा सकता है। इसी आकर्षण की वजह से डोबरा पुल पर इन दिनों स्थानीय और बाहर से आने वाले लोगों का जमावडा लगा है। ऐसे में लोनिवि को भी काम के दौरान परेशानी हो रही है। शनिवार को डीएम डॉ. वी षणमुगम ने पुल का दौरा किया और सुरक्षा प्रबंध के निर्देश दिए। डीएम ने चीफ प्रोजेक्टर मैनेजर एसके राय को निर्देश दिये कि जनपद के विभिन्न विभागों में तैनात इंजीनियरों की क्षमता विकसित करने के लिए उन्हें डोबरा-चांटी पुल का स्थलीय निरीक्षण करवाते हुए पुल निर्माण में आयी तकनीकि दिक्कतों एवं तकनीकि कमियों को दूर करने के लिए हुए प्रयासों से अवगत कराया जाए। साथ ही आइआइटी रूड़की व अन्य इंजीनियरिग कॉलेज के छात्र-छात्राओं व प्रोफेसरों को भी क्षमता विकसित करने के मकसद से डोबरा-चांठी पुल निर्माण की तकनीकि का अवलोकन कराया जाय। निर्माणाधीन डोबरा-चांटी पुल की कुल लंबाई 725 मीटर है। जिसमें 440 मीटर सस्पेंशन ब्रिज हैं तथा 260 मीटर आरसीसी डोबरा साइड एवं 25 मीटर स्टील गार्डर चांटी साइड है। पुल की कुल चैड़ाई सात मीटर है, जिसमें मोटर मार्ग की चैड़ाई 5.50 (साढ़े पांच) मीटर है, जबकि फुटपाथ की चैड़ाई 0.75 मीटर है। फुटपाथ पुल के दोनों ओर बनाया जा रहा है।

तीन चरणों में होंगे पंचायत चुनाव, 21 अक्टूबर को आयेंगे परिणाम

हरिद्वार को छोड़ राज्य के शेष 12 जिलों में त्रिस्तरीय पंचायत (ग्राम, क्षेत्र और जिला) चुनाव के लिए सरकार से अनुमोदन मिलने के बाद राज्य निर्वाचन आयोग ने देर शाम चुनाव की अधिसूचना जारी कर दी। इसके साथ ही नगरीय क्षेत्रों और हरिद्वार जिले को छोड़कर राज्यभर में पंचायत चुनाव की आदर्श आचार संहिता लागू हो गई है। 89 विकासखंडों में त्रिस्तरीय पंचायतों में 66640 पदों के चुनाव तीन चरणों छह अक्टूबर, 11 अक्टूबर और 16 अक्टूबर को मतदान होगा। चुनाव की प्रक्रिया 20 सितंबर को नामांकन पत्र दाखिल करने के साथ होगी।
हाईकोर्ट के आदेश के बाद त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव के लिए सरकार और राज्य निर्वाचन आयोग की ओर से कसरत चल रही थी। इस बीच पंचायतों में आरक्षण का निर्धारण होने के बाद सरकार की ओर से इस संबंध एक सितंबर को आयोग को सूचना दे दी गई थी। इसके बाद आयोग ने भी चुनाव का प्रस्तावित कार्यक्रम सरकार को भेजा। सरकार की ओर से अनुमोदन होने में हो रहे विलंब के चलते संशय भी बना हुआ था। शुक्रवार को गंगोत्री में आर्ट गैलरी के उद्घाटन और करीब दो दर्जन योजनाओं का शिलान्यास व लोकार्पण करने के बाद देहरादून लौटे मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत से अनुमोदन मिलने के बाद शाम को शासन ने चुनाव के कार्यक्रम को हरी झंडी दे दी। देर शाम राज्य निर्वाचन आयोग ने चुनाव की अधिसूचना भी जारी कर दी।
राज्य निर्वाचन आयुक्त चंद्रशेखर भट्ट की ओर से जारी अधिसूचना के अनुसार 89 विकासखंडों में ग्राम पंचायत सदस्य, ग्राम प्रधान, क्षेत्र पंचायत सदस्य और जिला पंचायत सदस्य पदों के लिए मतदान तीन चरणों छह अक्टूबर, 11 अक्टूबर और 16 अक्टूबर को होगा। अधिसूचना के मुताबिक पंचायत चुनाव की प्रक्रिया 20 सितंबर से नामांकन दाखिल करने के साथ होगी। 20, 21, 23 व 24 सितंबर को सुबह आठ से शाम चार बजे तक नामांकन पत्र दाखिल किए जाएंगे। 25 सितंबर से 27 सितंबर तक नामांकन पत्रों की जांच होगी। 28 सितंबर को सुबह आठ से दोपहर बाद तीन बजे तक नाम वापस लिए जा सकेंगे। तीनों चरण के लिए यह प्रक्रिया इन्हीं दिनों में चलेगी। अलबत्ता, चुनाव चिह्न आवंटन अलग-अलग तिथियों में होगा। छह अक्टूबर को होने वाले प्रथम चरण के चुनाव के लिए 29 सितंबर को चुनाव चिह्न आवंटित किए जाएंगे। 11 अक्टूबर के द्वितीय चरण के चुनाव को चार अक्टूबर और अंतिम चरण में 16 अक्टूबर को होने वाले चुनाव के लिए नौ अक्टूबर को चुनाव चिह्न आवंटित किए जाएंगे। मतगणना 21 अक्टूबर को सुबह आठ बजे से होगी और इसी दिन शाम से परिणाम भी आने लगेंगे।
आयोग की अधिसूचना के बाद संबंधित जिलों में जिलाधिकारी व जिला निर्वाचन अधिकारी 16 सितंबर को अधिसूचना जारी करेंगे। ग्राम प्रधान, ग्राम पंचायत सदस्य व क्षेत्र पंचायत सदस्य पदों के लिए नामांकन दाखिल करने से लेकर मतगणना तक की सभी प्रक्रिया विकासखंड मुख्यालयों में होगी। अलबत्ता, जिला पंचायत सदस्य पदों के लिए नामांकन पत्र दाखिला, जांच, नाम वापसी, चुनाव चिह्न आवंटन संबंधी कार्य जिला पंचायत मुख्यालयों पर होंगे। मतगणना संबंधित विकासखंड मुख्यालय पर होगी और जिला पंचायत सदस्य पदों के निर्वाचन के परिणाम जिला मुख्यालय से घोषित किए जाएंगे।
प्रथम चरण (छह अक्टूबर)-द्वितीय चरण -तृतीय चरण (16 अक्टूबर)
अल्मोड़ा-ताकुला, हवालबाग, लमगड़ा, धौलादेवी- चैखुटिया, द्वाराहाट, ताड़ीखेत, भैंसियाछीना- सल्ट, स्यालदे, भिकियासैंण
ऊधमसिंहनगर-रुद्रपुर, गदरपुर -बाजपुर, काशीपुर, जसपुर -खटीमा, सितारगंज
चंपावत- चंपावत -लोहाघाट, बाराकोट -पाटी
पिथौरागढ़-विण (पिथौरागढ़), मूनाकोट, कनालीछीना-बेरीनाग, गंगोलीहाट – धारचूला, मुनस्यारी, डीडीहाट
नैनीताल- हल्द्वानी, रामनगर, भीमताल – कोटाबाग, धारी, रामगढ़ -बेतालघाट, ओखलकांडा
बागेश्वर-बागेश्वर-गरुड़-कपकोट
उत्तरकाशी-भटवाड़ी, डुंडा-चिन्यालीसौड़, नौगांव -मोरी, पुरोला
चमोली- जोशीमठ, दशोली, घाट- कर्णप्रयाग, पोखरी, गैरसैंण -देवाल, थराली, नारायणबगड़
टिहरी-चंबा, जाखणीधार, भिलंगना-थौलधार, जौनपुर, प्रतापनगर -कीर्तिनगर, देवप्रयाग, नरेंद्रनगर
देहरादून- डोईवाला, रायपुर -सहसपुर, कालसी -विकासनगर, चकराता
पौड़ी- पौड़ी, पाबौ, खिर्सू, कोट, कल्जीखाल -यमकेश्वर, द्वारीखाल, जयहरीखाल, एकेश्वर, दुगड्डा – रिखणीखाल, पोखड़ा, थलीसैंण, नैनीडांडा, बीरोंखाल
रुद्रप्रयाग- ऊखीमठ-जखोली-अगस्त्यमुनि