देहरादून सिटी टॉप-10 में शामिल

अगर आप उत्तराखंड में रहते हैं और खासतौर पर देहरादून में निवास करते हैं, तो आपके लिए खुशी का पल है। हाल ही में जागरन डॉट कॉम, KMPG और फेसबुक पर एक सर्वे किया गया है। इसमें लोगों से पूछा गया था कि सुरक्षा के लिए लिहाज से देश का सबसे सुरक्षित शहर कौन है? कौन सा ऐसा शहर है, जहां लोग खुद को महफूज महसूस करते हैं ? आपको जानकर खुश होगी कि देहरादून इस लिस्ट में पहले नंबर पर है।
सबसे खास बात ये है कि इस लिस्ट में दिल्ली, मुंबई और बेंगलुरू जैसे महानगर टॉप-10 में जगह भी नहीं बना पाए। सुरक्षा के लिहाज से ये ब़ड़े शहर देहरादून के आगे बिल्कुल भी नहीं टिकते। एक वेबसाइट में बताया गया है कि ये सर्वे कुल मिलाकर 14 हजार लोगों पर किया गया है। हालांकि इस लिस्ट में इंदौर पहले नंबर पर है लेकिन वो सिर्फ रहने के लिहाज से पहले नंबर पर है।

जहां तक सुरक्षा की बात करें, तो देहरादून पहले नंबर पर बना हुआ है। देशभर में रहने के लिहाज से देहरादून तीसरे नंबर पर है, जबकि सुरक्षा के लिहाज से पहले नंबर पर है। ये हैं देश के 10 टॉप टेन शहर।
1- इंदौर
2- लखनऊ
3- देहरादून
4- वाराणसी
5- रायपुर
6-रांची
7- मेरठ
8-लुधियाना
9- पटना
10- कानपुर
सुरक्षा के लिहाज से देहरादून देशभर में पहले नंबर पर बना हुआ है। इसलिए अगर आप देहरादून से हैं, तो आपके लिए इससे गर्व का मौका कोई हो नहीं सकता। इससे पहले NCRB यानी नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो का एक सर्वे आया था, जिसमें कहा गया था कि उत्तराखंड में अपराध सबसे कम हैं और ये राज्य देश का सबसे सुरक्षित राज्य है।

कूड़ा निस्तारण पर सरकार का विशेष ध्यानः त्रिवेन्द्र

उत्तराखंड सरकार कूड़ा निस्तारण की दिशा में विशेष ध्यान दे रही है। इसके लिए हरिद्वार में कूड़ा निस्तारण को एक बड़ा प्रोजेक्ट पर काम चल रहा है। इस प्रोजेक्ट में नीदरलैंड के विशेषज्ञ काम कर रहे है। प्रोजेक्ट सफल रहा था तो इससे एविशन फ्यूल, खाद आदि तैयार की जा सकेगी। यह बात मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने कही। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि वीर चंद्र सिंह गढ़वाली योजना के तहत पहले सब्सिडी 30 प्रतिशत मिली थी, जोकि अब बढ़ाकर 50 प्रतिशत की जा रही है।

उन्होने कहा कि डोइवाला के आसपास करीब 25 से 50 एकड़ भूमि पर फिल्म सिटी बनेगी। इसके लिए भूमि तलाशी जाएगी। उत्तराखंड फिल्म जगत के हिसाब से पूरी तरह परिपूर्ण है, यहां की वादियों को कैमरे में कैद किया जाएगा। बड़े पर्दे पर उत्तराखंड की सौंदर्य छवि देखने को मिलेगी। इससे यहां पर्यटन बढ़ेगा।

उन्होने कहा कि अटल आयुष्मान योजना से राज्य में अब तक चार लाख 46 हजार गोल्डन कार्ड लोगों के बनाए जा चुके है। जबकि प्रतिदिन 35 हजार गोल्डन कार्ड विभिन्न क्षेत्रों में बन रहे है। इस योजना के मरीजों के बिल का भुगतान सरकार 15 दिनों के भीतर करेगी। साथ ही सप्ताह भर की निशुल्क दवाइयां भी देने का प्रावधान रखा जा रहा है। उन्होंने कहा कि क्षेत्र में राष्ट्रीय ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज संस्थान (एनआईआरडी) शुरू किए जाने पर काम चल रहा है।

अंतरराज्जीय नकली नोट गिरोह के छह सदस्य पुलिस ने दबोचे

देहरादून पुलिस ने नकली चलाने वाले अंतरराज्यीय गिरोह के छह सदस्यों को धर दबोचा है। पकड़े गए लोगों में एक महिला भी शामिल है। पुलिस ने इनके पास से दो हजार, पांच सौ और सौ रुपये के जाली नोट बरामद किए गए हैं। जिनकी कीमत 96 लाख 96 हजार रुपये है। साथ ही पुलिस ने स्कैनर, प्रिंटर, केमिकल के अलावा एक कार भी जब्त की है।

एसएसपी देहरादून निवेदिता कुकरेती ने बताया कि सहसपुर पुलिस को संदिग्ध वाहनों, व्यक्तियों के चेकिंग के आदेश दिए गए थे। इसी बीच पुलिस को सूचना मिली कि दिल्ली नंबर की एक कार में एक महिला समेत छह लोग बैठे हैं और उनके पास नकली नोट हैं। वह सहसपुर क्षेत्र में ग्राहक की तलाश में घूम रहे हैं। चेकिंग के दौरान ही दिल्ली नंबर की कार को रोककर जांच की गई तो नकली नोटों की खेप बरामद हो गई। इसमें पांच सौ के 93, सौ के नए 182 व पुराने 313 नोट और दो हजार चूरन लेबल के 48 गड्डी नोट बरामद किए गए, जिनकी कुल कीमत 96 लाख 96 हजार थी।

आरोपितों की पहचान सलमान महमूद पुत्र महमूद खान निवासी शास्त्री नगर, थाना नौचंदी, मेरठ हाल निवासी फ्रीडम फायटर कॉलोनी, साकेत, महरौली, दिल्ली, मनदीप शर्मा पुत्र ओमप्रकाश शर्मा निवासी मोहल्ला पतवार, नांगल, हरियाणा हाल निवासी वाल्मीकि बस्ती मैदान गढ़ी महरौली, दिल्ली, मदन शर्मा उर्फ फूफा पुत्र भोपाल निवासी कृष्णा नगर, थाना कोतवाली, गंगनहर हरिद्वार उसके बेटे आकाश और राहुल के अलावा महिला की पहचान भावना कुमार पत्नी राम कुमार निवासी कैलाश कॉलोनी, दिल्ली के रूप में हुई है।

आरोपितों में शामिल मदन शर्मा उर्फ फूफा निवासी कृष्णा नगर, गंगनहर, हरिद्वार अपने बेटे आकाश और राहुल के साथ घर पर ही नकली नोट बनाते थे। अन्य तीन आरोपित सलमान, मनदीप और भावना दिल्ली में रहकर प्रॉपर्टी डीलिंग करते हैं। पूछताछ में उन्होंने बताया कि कारोबार न चलने से वह काफी परेशान थे। उनके किसी परिचित ने उनकी मुलाकात मदन शर्मा से कराई। जिसके बाद से यह मदन और उनके लड़कों के साथ मिलकर नकली नोट का कारोबार करने लगे।

एसओ सहसपुर नरेश राठौर के मुताबिक, पूछताछ में आरोपितों ने बताया कि वह ऐसे ग्राहकों को अपने चंगुल में फंसाते थे जो आसानी से लालच में आ जाएं। वह ग्राहक से असली नोट लेकर उन्हें दोगुने नकली नोट देते थे। सौ और पांच सौ का नोट हूबहू होने के कारण उसे वह ग्राहक के सामने ही किसी दुकान में चलाकर दिखाते थे। जिससे ग्राहक लालच में आ जाता था। आरोपितों ने बताया कि ग्राहकों को विश्वास में लेने के लिए वे अपने पास चूरन लेबल के दो हजार के लाखों नोट रखते थे। इसके साथ ही वह सौ और पांच सौ के नोट भीड़भाड के दौरान दुकानों, पेट्रोल पंपों, शराब की दुकानों में चला देते थे।

स्पर्श गंगा ने स्थापना दिवस पर गंगा में उतारा कूड़ा नियंत्रक उपकरण

स्पर्श गंगा अभियान के 10वें स्थापना दिवस पर ऋषिकेश के त्रिवेणी घाट पर ट्रैश बूम नामक उपकरण लगाया गया है। इस उपकरण की सहायता से गंगा में बहकर आने वाली गंदगी को दूर किया जा सकेगा।

उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और सांसद रमेश पोखरियाल निशंक ने स्पर्श गंगा अभियान की शुरुआत की थी। इस अभियान के स्थापना दिवस पर सोमवार को त्रिवेणी घाट पर एक समारोह का आयोजन किया गया। इस अवसर पर स्पर्श गंगा टीम की ओर से त्रिवेणी घाट पर यह सयंत्र स्थापित किया गया। सयंत्र का शुभारंभ ऋषिकेश की महापौर अनीता ममगाईं ने किया।

स्पर्श गंगा अभियान के गढ़वाल संयोजक एसएस भंडारी ने बताया कि सोमवार को स्पर्श गंगा अभियान का स्थापना दिवस है। इस अवसर पर गंगा की निर्मलता और स्वच्छता को बनाए रखने के लिए योजना तैयार की गई है। इसके तहत ट्रेश बूम सयंत्र स्थापित किया गया है। सयंत्र का निर्माण पश्चिम बंगाल की एक कंपनी ने किया है। उन्होंने कहा कि गंगा में बह कर आने वाला कचरा इसमें एकत्र हो जाएगा।

कंपनी के साइट इंजीनियर शुभम नेगी ने बताया कि ट्रेश बूम उपकरण पांच मीटर प्रति सेकंड की रफ्तार से आने वाले जल के दबाव को सहन कर सकता है। नदी में बहने वाली गंदगी जैसे कपड़े, फूल, पत्थर, पूजन सामग्री कीचड़, लकड़ी इस संयंत्र में फंस जाएगी। उसके बाद इस सामग्री को आसानी से हटाया जा सकेगा।

देश की जनता पीएम की नियत और नीति पर करती है विश्वास

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने राफेल सौदे की सभी याचिकाओं को सुप्रीम कोर्ट द्वारा खारिज करने पर स्वागत किया है। उन्होंने राहुल गांधी पर हमला करते हुए कहा कि इससे पता चलता है कि प्रधानमंत्री मोदी की नीति पर देशवासियों को पूरा भरोसा है।

मुख्यमंत्री आवास पर पत्रकार वार्ता में सीएम त्रिवेंद्र ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने साफ किया है कि राफेल की कीमत पर निर्णय लेना अदालत का काम नहीं है। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट कर दिया कि राफेल विमानों की खरीद की प्रक्रिया में हस्तक्षेप करने का कोई कारण नजर नहीं आता है।

देश की संप्रभुता और सुरक्षा के लिहाज से ऐसे मुद्दे सार्वजनिक नहीं किए जाते हैं। सीएम ने कहा कि जबकि राहुल गांधी तो लगातार उलटा बयान देकर देश की सुरक्षा पर सवाल उठाते रहे। उन्होंने सेना और सैन्य प्रतिष्ठानों के मान सम्मान को भी ठेस पहुंचाई है। कांग्रेस का ये इतिहास रहा है कि वो सेना और देश की रक्षा से संबंधित मसलों पर सवाल उठाते रहे हैं।

सर्जिकल स्ट्राइक पर भी कांग्रेस ने संदेह पैदा कर सेना के मनोबल को गिराने का काम किया था। 2002 से राफेल की खरीद पर बातचीत चल रही थी, इस बीच 10 साल कांग्रेस सत्ता में रही लेकिन तब इन्होंने राफेल खरीद में कोई रुचि नहीं दिखाई। कांग्रेस ने हमेशा से रक्षा सौदों में बिचौलियों को तरजीह दी है। जबकि प्रधानमंत्री मोदी ने पारदर्शी तरीके से राफेल मामले पर दो सरकारों के बीच सौदा किया।

एक राष्ट्र एक चुनाव पर पीएम मोदी कृत संकल्पः सीएम

एक राष्ट्र एक चुनाव एक महत्वपूर्ण विषय है, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी इस विषय को लेकर कृत संकल्प है। इस वर्ष उत्तराखंड के 33 महाविद्यालयों में एक ही दिन छात्रसंघ के चुनाव कराये गये। जो कि पूर्व में अलग-अलग दिन होते थे। यह बात मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने पब्लिक रिलेशन सोसाइटी ऑफ इंडिया के आयोजन के दौरान कही।

देहरादून में आयोजित कार्यक्रम की शुरूआत पीआरएसआई के गीत से हुई, इसके बाद नंदा राज जात यात्रा की सुन्दर प्रस्तुति दी गई। पब्लिक रिलेशन सोसाईटी ऑफ इण्डिया देहरादून चौप्टर के अध्यक्ष विमल डबराल ने सभी अतिथियों का स्वागत किया।

इस दौरान मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने पीआरएसआई के सभी सदस्यों को शुभकामनायें दी। उन्होंने कहा कि पूरे देश में एक ही समय पर चुनाव होने चाहिए। इससे देश व राज्यों के चुनावी खर्चें पर लगाम लगेगी, साथ ही समय भी कम लगेगा।

स्वामी चिदानंद ने दिया डा. बुद्धेन्द्र दुबे को प्रयाग कुुंभ मेले में आने का निमंत्रण

परमार्थ निकेतन के परमाध्यक्ष स्वामी चिदानंद सरस्वती ने कनाडा के प्रसिद्ध हृदय रोग विशेषज्ञ एवं सर्जन डॉ बुद्धेन्द्र दुबे से मुलाकात की। इस दौरान स्वामी चिदानंद ने उन्हें शिवत्व का प्रतीक रूद्राक्ष का पौधा आशीर्वाद स्वरूप भेंट किया। स्वामी चिदानंद ने बताया कि डा. दुबे दिन में रोगियों की सेवा करते है और शाम होते ही भारतीय संस्कृति के प्रचार-प्रसार को जुट जाते है। उन्होंने कनाडा में हिंदू धर्म का म्यूजियम व विष्णु भगवान के मंदिर की भी स्थापना की है।

स्वामी चिदानन्द सरस्वती ने बताया कि वर्ष 1987 में हिन्दु धर्म विश्वकोश की संरचना की अमेरिका में तैयारियां चल रही थी उस समय डॉ दूबे जी ने बढ़-चढ़ कर सहयोग किया। उन्होंने हिन्दु धर्म की संस्कृति, संस्कार, हिन्दु धर्म विश्वकोश के लिये तथा विशेष कर हिन्दुधर्म को एक वैज्ञानिक एवं आधुनिक स्वरूप प्रदान किया। उनके अद्भुत कार्यो लिये स्वामी चिदानंद ने रूद्राक्ष का पौधा और अंगवस्त्र भेंट किया। स्वामी चिदानंद ने कहा कि डा. दुबे लोगों के दिलों की सर्जरी तो करते है साथ ही लोगों के दिमाग की भी सर्जरी करते है।

स्वामी चिदानंद ने दुबे परिवार को प्रयाग कुम्भ मेला में सहभाग हेतु आमंत्रित किया। उन्होंने बताया कि डा. बुद्धेन्द्र दुबे भारतीयता और पर्यावरण संरक्षण के लिये अद्भुत कार्य किये है। विष्णु मन्दिर परिसर की आस-पास की स्वच्छता और हरियाली कनाडा वासियों के लिये एक उदाहरण का केन्द्र है।

वेबसाइट्स पर पोर्न वीडियो दिखाई गयी तो होगी आईटी एक्ट के तहत कानूनी कार्यवाही

केंद्र सरकार पोर्न वेबसाइट्स पर लगातार नजर रख रही है। यदि पोर्न वेबसाइट्स द्वारा वीडियों दिखायी जाएंगी तो आईटी एक्ट के तहत कानूनी कार्यवाही हो पाएगी। केंद्रीय गृह मंत्रालय ने नेशनल क्राइम रिकार्ड ब्यूरो के अधीन (डब्ल्यूडब्ल्यूडब्ल्यू डॉट साइबरक्राइम डॉट जीओवी डॉट इन) नाम से साइबर क्राइम पोर्टल लांच किया है। जिसमें साइबर क्राइम की शिकायत या सूचना दर्ज की जा सकती है। गुरूवार को उच्च न्यायालय नैनीताल में दूरसंचार विभाग की ओर से इस मामले में हलफनामा भी पेश किया गया। विभाग की ओर से 827 पोर्न वेबसाइट्स को बंद करने के आदेश दिए गये है।

हाईकोर्ट नैनीताल के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति राजीव शर्मा व न्यायमूर्ति मनोज कुमार तिवारी की खंडपीठ के समक्ष केंद्रीय दूरसंचार विभाग की ओर से हलफनामा प्रस्तुत किया गया। जिसमें हाई कोर्ट की ओर से पारित आदेश के क्रियान्वयन को लेकर जानकारी दी गई। हलफनामे में बताया गया है कि अश्लीलता परोस रही इन वेबसाइट्स पर लगातार नजर रखने के विभाग को निर्देश दिए गए हैं। शपथ पत्र में यह भी बताया गया है कि 30 अन्य वेबसाइट्स की जांच में अश्लीलता फैलाने की पुष्टि नहीं हुई है। इसके अलावा कुछ विदेशी वेबसाइट भी हैं, जिन पर इंटरपोल व ब्रिटेन इंटरनेट वॉच फाउंडेशन नजर रखता है, जो भारत की केंद्रीय जांच एजेंसी सीबीआइ से सूचनाओं का आदान-प्रदान करते हैं।

कठोरता से अश्लीलता पर रोक लगाएगी सरकार
केंद्र सरकार के हलफनामे के आधार पर खंडपीठ ने उम्मीद जताई कि सरकार अश्लीलता पर कठोरता से रोक लगाएगी, ताकि बच्चों को यौन अपराध से बचाया जा सके। कोर्ट ने साइबर क्राइम पोर्टल का 24 घंटे में प्रिंट व इलेक्ट्रानिक मीडिया में प्रचार-प्रसार करने के निर्देश दिए हैं। ज्ञातव्य है कि पिछले माह दून में अश्लील वीडियो देखकर चार नाबालिग बच्चों ने एक नाबालिग छात्रा के साथ सामूहिक दुष्कर्म किया था। इस घटना के बाद कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने राज्य व केंद्र सरकार को अश्लीलता रोकने के दिशा-निर्देश जारी किए थे। इस मामले में अगली सुनवाई अब 26 नवंबर को होगी।

113 दिन से अनशन कर रहे स्वामी ज्ञान स्वरूप सानंद की हृदयघात से हुयी मौत

गंगा पर बन रहे बांध के विरोध और गंगा रक्षा के लिये प्रभावी कानून बनाने जाने को लेकर बीते 113 दिनों से अनशन कर रहे स्वामी ज्ञान स्वरूप सानंद (प्रोफेसर गुरुदास अग्रवाल) का एम्स ऋषिकेश में निधन हो गया। विदित हो कि स्वामी सानंद को हरिद्वार प्रशासन ने जबरन एम्स में बुधवार को भर्ती कराया था। वहीं मातृसदन के परमाध्यक्ष स्वामी शिवानंद ने जिला प्रशासन पर सानंद की हत्या करने का आरोप लगया है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने उनके निधन पर शोक जताया है।

गुरूवार को स्वामी सानंद की मौत के बाद एम्स के चिकित्सकों ने बताया कि स्वामी सानंद के शरीर में पोटेशियम और ग्लूकोज निचले स्तर पर आ गया था, इसकी वजह से दोपहर उन्हें हृदयघात आया। 86 वर्षीय सानंद अविवाहित थे। चूंकि, स्वामी सानंद ने एम्स ऋषिकेश को अपनी देह दान की हुई थी, लिहाजा पार्थिव शरीर को अभी एम्स में ही रखा गया है। शाम को परिजन भी यहां पहुंच गए।

उधर, मातृसदन के परमाध्यक्ष स्वामी शिवानंद ने जिला प्रशासन पर सानंद की हत्या का आरोप लगाया। घोषणा की है कि नवरात्रों के बाद वह स्वयं इस आंदोलन को आगे बढ़ाएंगे। कहा कि, स्वामी सानंद की हत्या में शामिल अधिकारियों व मंत्रियों को सजा दिलाने की मांग को लेकर कठोर तपस्या (अनशन) करेंगे। उल्लेखनीय है किसात साल पहले मातृसदन के एक अन्य संत निगमानंद ने भी इसी मुद्दे पर 114 दिन के अनशन के बाद दम तोड़ दिया था।

भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान कानपुर से सेवानिवृत प्रोफेसर गुरुदास अग्रवाल (स्वामी ज्ञानस्वरूप सानंद) मूल रूप से उत्तर प्रदेश के कांधला मुजफ्फरनगर के रहने वाले थे। 22 जून, 2018 को उन्होंने गंगा की रक्षा के लिए सख्त कानून बनाने और जल विद्युत परियोजनाओं के विरोध समेत विभिन्न मांगों को लेकर मातृसदन में अनशन शुरू किया था, इसे उन्होंने तप नाम दिया था। इस दौरान वे केवल नींबू, शहद, नमक और पानी ले रहे थे। उन्हें मनाने के लिए केंद्रीय मंत्री उमा भारती दो बार खुद मातृसदन आईं, केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने अपने पत्र के साथ संदेशवाहक भेजकर उनके आंदोलन खत्म करने का अनुरोध किया, लेकिन उन्होंने इसे ठुकरा दिया।

एम्स को दान कर गए अपना शरीर

अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान ऋषिकेश को स्वामी सानंद अपना शरीर दान कर गए हैं। उनकी इस इच्छा का सम्मान करने के लिए एम्स प्रशासन जुट गया है। एम्स में डीन डॉ विजेंद्र सिंह ने बताया कि जब स्वामी सानंद स्वस्थ थे तो उन्होंने अपना शरीर एम्स को दान करने के लिए संकल्प पत्र हमें भिजवाया था। इस संकल्प पत्र का एम्स प्रशासन पालन करेगा और स्वामी सानंद की इस इच्छा का पूरा सम्मान किया जाएगा।

मंगलवार सुबह भी हरिद्वार सांसद रमेश पोखरियाल निशंक फिर से केंद्रीय मंत्री गडकरी का पत्र लेकर उनके पास पहुंचे थे, जल्द उनकी मांगों पर विचार करने आश्वासन पर सानंद ने सहमति जताई थी, लेकिन शाम होते ही उन्होंने यह कहकर सभी को चौंका दिया कि उन्होंने दोपहर से ही जल त्याग दिया है। इस पर बुधवार शाम को जिला प्रशासन ने उन्हें ऋषिकेश स्थित एम्स में भर्ती करा दिया था। जहां, गुरूवार दोपहर एक बजकर बीस मिनट पर उन्होंने शरीर त्याग दिया।

इससे कुछ देर पहले ही डाक्टरों ने उनका स्वास्थ्य परीक्षण किया था, तब उनकी हालत स्थिर थी। जल पुरुष राजेंद्र सिंह के अनुसार सुबह उन्होंने भी एम्स पहुंचकर सानंद से मुलाकात की थी, दिल्ली जाते वक्त मुरादाबाद में उन्हें सानंद के देह त्यागने की सूचना मिली। बता दें कि इससे पहले भी 12 जुलाई से 23 जुलाई तक उनका एम्स में उपचार किया गया था। तब भी वह इन्हीं मांगों को लेकर अनशन पर थे। स्वामी शिवानंद (परमाध्यक्ष मातृसदन) ने कहा कि जिस तरह से सात साल पहले मातृसदन के संत उनके शिष्य ब्रह्मचारी निगमानंद की हत्या की गई थी, ठीक उसी प्रकार अब स्वामी ज्ञानस्वरूप सानंद की भी हत्या की गई है।

अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान में स्वामी ज्ञान स्वरूप सानंद के देहावसान का समाचार पाकर विधानसभा अध्यक्ष प्रेमचंद अग्रवाल एम्स पहुंचे। प्रेमचंद अग्रवाल ने कहा कि स्वामी ज्ञान स्वरूप सानंद ने गंगा की सेवा के लिए अपना जीवन आहूत किया है। उन्होंने स्वामी सानंद को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि गंगा की अविरलता व निर्मलता को लेकर उनकी मांगे जायज थी, जिन पर विचार किया जाना चाहिए था। संभव है कि सरकार की कुछ मजबूरियां रही हैं। उन्होंने कहा कि स्वामी सानंद का देहावसान किन कारणों से हुआ यह पोस्टमॉर्टम के बाद ही पता चल पाएगा। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार ने स्वामी सानंद का व्रत तुड़वाने के लिए हर संभव प्रयास किया, इसलिए यह कहना गलत है कि केंद्र सरकार स्वामी सानंद के स्वास्थ्य को लेकर चिंतित नहीं थी।

सीएम बोले सरकार ने दिखाई पूरी संवेदनशीलता
मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने स्वामी ज्ञानस्वरूप सानंद (प्रो. जीडी अग्रवाल) के निधन पर गहरा दुख व्यक्त किया है। अपने शोक संदेश मे मुख्यमंत्री ने कहा कि गंगा को लेकर विभिन्न मुद्दों के लिए अनशनरत स्वामी ज्ञानस्वरूप सानंद के निधन से उन्हें गहरा दुख पहुंचा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि स्वामी सानंद की मुख्य मांग थी कि गंगा के लिए अलग से एक्ट बनाया जाए और राज्य में तमाम जलविद्युत परियोजनाओं को रद किया जाए। इस कार्य के अध्ययन और उस पर योजना बनाने में थोड़ा समय लगता है। हमारी सरकार और केंद्र सरकार लगातार उनसे संपर्क में थी, बातचीत होती थी। केंद्रीय पेयजल मंत्री उमा भारती ने उनसे मुलाकात की थी। उसके बाद जल संसाधन मंत्री नितिन गडकरी ने भी फोन पर उनसे बातचीत की थी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार की तरफ से भी इस मुद्दे पर पूरी संवेदनशीलता दिखाई गई थी। सरकार के प्रतिनिधि लगातार उनके संपर्क में थे। हरिद्वार के सांसद डॉ. रमेश पोखरियाल निशंक भी उनसे मुलाकात करने पहुंचे थे। हमारी कोशिश थी कि किसी तरह से उनकी जान बचाई जा सके, लेकिन तमाम कोशिशों के बाद भी उन्होंने अनशन तोडने से इन्कार कर दिया। जैसे ही उन्होंने नौ अक्टूबर को जल का त्याग किया, उन्हें तत्काल ऋषिकेश एम्स में भर्ती कराया गया था। एम्स के डाक्टरों ने भी उनकी जान बचाने का भरसक प्रयास किया। भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष अजय भट्ट ने भी स्वामी ज्ञानस्वरूप सानंद के निधन पर गहरा दुख व्यक्त किया।

उत्तराखंड में पहली बार इंवेस्टर्स समिट होना बहुत बड़ी बातः राजनाथ

गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि उत्तराखंड के इतिहास में इंवेस्टर्स समिट का अध्याय भी जुड़ गया है। उत्तराखंड में पहली बार इंवेस्टर्स समिट आयोजित होने पर राजनाथ सिंह ने राज्य सरकार को बधाई दी।

इन्वेस्टर्स समिट के समापन सत्र में गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने अपने संबोधन में उत्तराखंड सरकार की तारीफ की। साथ ही क्रिकेटर पृथ्वी शॉ का भी उदाहरण दिया। इस दौरान केंद्रीय गृहमंत्री ने ये भी कहा कि उत्तराखंड में प्राकृतिक संसाधन और मानव संसाधन की नहीं बल्कि सामंजस्य की कमी। जिसे दूर करने की जरूरत।

कानून व्यवस्था और सुरक्षा में उत्तराखंड आदर्श राज्य

कानून व्यवस्था का जिक्र करते हुए राजनाथ सिंह ने कहा कि कानून व्यवस्था और सुरक्षा के रूप में उत्तराखंड आदर्श राज्य है। निवेश के लिए इससे बेहतर कोई दूसरी स्थिति नहीं है।

सीएम ने किया प्रदर्शनी का अवलोकन
इससे पहले सीएम त्रिवेंद्र रावत ने इन्वेस्टर्स समिट में प्रदर्शनी का अवलोकन किया। उन्होंने प्रत्येक स्टाल का निरीक्षण कर उत्पादों के बारे में जानकारी ली। इस दौरान उन्होंने मंडुवे के बिस्किट का स्वाद भी लिया। इतना ही नहीं सीएम ने हॉर्टिकल्चर से सम्बंधित उत्पादों के बारे भी जानकारी ली।

बाद में पत्रकारों से बातचीत ने सीएम ने कहा कि समिट को लेकर निवेशकों के साथ ही सरकार में भी खास उत्साह है। ये पहल राज्य के लिए वरदान साबित होगा। सीएम ने ये भी कहा कि यह दीर्घकालीन प्रोजेक्ट है और इसे आकार लेने में वक्त लगेगा। आने वाले चार से पांच सालों में अच्छे परिणाम सामने आएंगे।