ऋ​षिकेश एम्स में 4 साल में बढ़े छह गुना मरीज

बीते 4 वर्षों में अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान ऋषिकेश ने स्वास्थ्य के क्षेत्र में उत्तराखंड व इसके समीपवर्ती प्रदेशों में ही नहीं वरन समूचे देश में अपनी विशिष्ट पहचान बनाई है। हालांकि यहां वर्ष 2013 में वाह्य रोगी विभाग (ओपीडी) सेवाओं की शुरुआत हो चुकी थी, लेकिन वर्ष 2016 के बाद से इस संस्थान में न केवल विश्वस्तरीय स्वास्थ्य सुविधाएं जुटाई जानी शुरू की गई, अपितु यह देश का पहला ऐसा सरकारी स्वास्थ्य संस्थान भी बन गया, जहां हैली एम्बुलैंस के माध्यम से देश के विभिन्न हिस्सों से आपात स्थिति के मरीजों को सीधे अस्पताल परिसर तक पहुंचाया जा सकता है।
एम्स, ऋषिकेश की बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं का ही प्रमाण है कि पिछले 4 वर्षों के दौरान संस्थान की ओपीडी में पहुंचने वाले मरीजों की संख्या में 6 गुना तक वृद्धि हो चुकी है। जबकि इस दौरान उपचार हेतु अस्पताल में भर्ती किए गए मरीजों की संख्या में 30 गुना बढ़ोत्तरी दर्ज की गई है।

गौरतलब है कि ऋषिकेश में एम्स संस्थान की नींव वर्ष 2004 में 1 फरवरी को रखी गई थी। तत्कालीन केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री सुषमा स्वराज ने अस्पताल की नींव रखते हुए कहा था कि उत्तराखंड की इस देवभूमि में ’एम्स ऋषिकेश’ राज्यवासियों के लिए भविष्य में वरदान साबित होगा, और हुआ भी वही। निर्माण के बाद धीरे-धीरे एम्स अपने स्वरूप में आया तो शुरुआत में कुछ चिकित्सकों की तैनाती होने के बाद वह दिन भी आया जब 27 मई 2013 से यहां मरीजों के स्वास्थ्य जांच के लिए ओपीडी की सुविधा शुरू कर दी गई।

इसके ठीक 8 महीने बाद 30 दिसंबर- 2013 से एम्स अस्पताल में आंतरिक रोगी विभाग (आईपीडी) और फिर 2 जून 2014 से शल्य चिकित्सा की शुरुआत की गई, इसके बाद यहां न केवल उत्तराखंड बल्कि देश के लगभग दर्जनभर अन्य राज्यों से भी मरीजों ने एम्स ऋषिकेश पहुंचना शुरू कर दिया। ओपीडी में मरीजों की आमद में सतत बढ़ोत्तरी के मद्देनजर वर्ष 2016-17 तक के शुरुआती 4 वर्षों तक अस्पताल प्रशासन विभिन्न स्वास्थ्य सुविधाओं को विकसित करने के लिए प्रयासरत रहा। मगर संस्थान ने स्वास्थ्य सेवाओं के मामले में रफ्तार वर्ष 2016-17 के बाद ही पकड़ी। संस्थान के निदेशक प्रो. रविकांत के कुशल मार्गदर्शन में यहां न केवल आधुनिक तकनीक आधारित उपचार की सुविधा शुरू हुई अपितु उच्च अनुभवी व विशेषज्ञ चिकित्सकों की नियुक्ति के साथ-साथ गरीब से गरीब मरीज को भी बेहतर उपचार मुहैया कराना एम्स का एकमात्र ध्येय बन गया।

वर्ष 2016 के बाद एम्स ऋषिकेश के खाते में साल दर साल कई उपलब्धियां जुड़ती चली गईं। इनमें 100 से अधिक आफ्टरनून क्लीनिकों का संचालन किया जाना विशेष उपलब्धि में शामिल है। इन क्लीनिकों के शुरू होने पर ओपीडी के अलावा प्रतिदिन सैकड़ों मरीज अलग से देखे जाने लगे। यही नहीं पिछले 4 वर्षों के दौरान एम्स की ओपीडी में मरीजों की 6 गुना बढ़ोत्तरी का आंकड़ा दर्ज होना साबित करता है कि एम्स ऋषिकेश द्वारा उपलब्ध कराई जा रही स्वास्थ्य सुविधाओं और सेवाओं के प्रति आमजन में विश्वास लगातार बढ़ रहा है।

आंकड़ों पर गौर करें तो प्रारंभ से वर्ष 2016-17 तक संस्थान की ओपीडी में 4 लाख 48 हजार 932 मरीजों का पंजीकरण किया गया था। जबकि इसके बाद के चार साल के समयांतराल में 31 दिसंबर- 2020 तक ओपीडी में पंजीकृत मरीजों का आंकड़ा 28 लाख 11 हजार 105 हो चुका है।

एम्स निदेशक प्रो. रविकांत ने बताया कि गरीब से गरीब व्यक्ति का समुचित और बेहतर उपचार करने के लिए एम्स संस्थान संकल्पबद्ध है। उन्होंने बताया कि आमजन और खासकर गरीब पृष्ठभूमि के लोगों की चिकित्सा सुविधा के लिए पिछले 4 वर्षों के समयांतराल में एम्स में 100 से अधिक नए क्लीनिक शुरू किए गए हैं। जिनमें लंग कैंसर, ब्रोनिकल अस्थमा, काॅर्डियक इलैक्ट्रोफिजियोलाॅजी, एआरटी, पीडियाट्रिक डेर्मोटोलाॅजी, सीओपीडी, काॅर्निया, काॅस्मेटिक, फीवर, ग्लूकोमा, हार्ट फेलियर, ज्वाइंट रिप्लेसमेंट, स्पेशियल इमरजेंसी मेडिसिन, स्पोर्ट्स इंजरी, स्लीप डिस्ऑर्डर, सर्जिकल ओंकोलॉजी क्लीनिक जैसे कई अन्य महत्वपूर्ण क्लीनिक शामिल हैं।

निदेशक ने बताया कि वर्ष 2018 सितंबर माह में शुरू हुई ’आयुष्मान भारत’ योजना के तहत 31 जनवरी-2021 तक 35 हजार 350 मरीजों का उपचार किया जा चुका है। उन्होंने बताया कि देश जब कोविड 19 वैश्विक महामारी के दौरान कोरोना संक्रमितों के इलाज के प्रति एम्स ऋषिकेश ने दो कदम आगे बढ़कर अपनी पूरी जिम्मेदारी का निर्वहन किया व इस आपात स्थिति में संस्थान के चिकित्सकों, नर्सिंग ऑफिसरों, टेक्नीशियनों सहित सभी फ्रंटलाइन वर्करों ने कोविड संक्रमण के जोखिम की परवाह किए बिना अपना संपूर्ण समय मरीजों की सेवा व उनकी जीवनरक्षा के प्रयासों में लगाया।

एम्स निदेशक प्रो. रविकांत ने पिछले 4 वर्षों के दौरान संस्थान की तमाम उपलब्धियों पर विस्तृत प्रकाश डाला व बताया कि वर्ष 2016-17 तक एम्स में महज 3 ऑपरेशन थियेटर की सुविधा उपलब्ध थी, यह संख्या वर्तमान में बढ़कर 54 ऑपरेशन थियेटर हो गई है। ऐसे में नए ऑपरेशन थियेटरों के स्थापित होने से एक ही समय में कई मरीजों की एकसाथ सर्जरी की जा सकती हैं। अस्पताल में ज्यादा ऑपरेशन थियेटर होने से अब एक ही दिन में कई मरीजों का जीवन बचाया जा सकता है।

बकौल, एम्स निदेशक अस्पताल में पहले मात्र 300 बेड थे। जिनकी संख्या बढ़कर अब 960 हो गई है। सततरूप से सुविधाओं के विस्तारीकरण के मद्देनजर ऋषिकेश एम्स अस्पताल में समूचे उत्तराखंड ही नहीं वरन हिमाचल प्रदेश, उत्तर प्रदेश, राजस्थान, बिहार, मध्य प्रदेश, मेघालय, पंजाब, छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र, केरला, हरियाणा, जम्मू एंड कश्मीर, झारखंड आदि राज्यों के मरीजों ने स्वास्थ्य सुविधाओं का लाभ उठाया है। लगातार बढ़ रहे मरीजों के दबाव के मद्देनजर भारत सरकार से लगातार संपर्क कर उच्च अनुभवी व विशेषज्ञ फैकल्टी सदस्यों की नियुक्ति बढ़ाई गई। एम्स निदेशक प्रो. रविकांत के अनुसार वर्तमान में संस्थान में 246 फैकल्टी मेंबर मौजूद हैं, जबकि संस्थान में उनकी ज्वाइनिंग के समय यह संख्या महज 94 थी। एम्स के खाते में दर्ज हो रही नित नई-नई उपलब्धियों के लिए निदेशक ने अपने कर्मठ व अनुभवी चिकित्सकों व नर्सिंग स्टाफ की सराहना की, साथ ही उन्होंने संस्थान को उत्तरोत्तर प्रगति के सोपान पर पहुंचाने के लिए सभी कर्मचारियों के सतत योगदान को मुक्तकंठ से सराहा।

त्रिवेन्द्र है तो मुमकिन हैः मुख्यमंत्री ने मौके पर जाकर संभाला मोर्चा तो सरकारी मशीनरी में हुआ ऊर्जा कां संचार

राजेंद्र जोशी (वरिष्ठ पत्रकार)
प्राकृतिक आपदाओं से लड़ा नहीं जा सकता है, लेकिन अगर समय रहते रेसक्यू आॅपरेशन चलाया जाये और जनहानि रोकने की दिशा में कार्य किया जाये तो बड़ी जनहानि को रोका जा सकता है। यह आज मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने साबित किया है। जैसे ही सुबह न्युज फ्लैश हुई कि चमोली जिले में प्राकृतिक आपदा के चलते अलकनन्दा नदी विकराल रुप धारण कर चुकी है, तुरन्त मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत हरकत में आ गये। उन्होंने तुरन्त अलकनन्दा नदी के पड़ाव के नदी किनारों को खाली कराने के आदेश दे दिये। मुख्यमंत्री के आदेश के बाद प्रशासन हरकत में आया और नदी किनारों को खाली कराने का कार्य शुरु हुआ।

मुख्यमंत्री केवल यहीं नहीं रुके। उन्होंने तुरन्त हैलीकाॅपटर से घटना स्थल का जायजा लेने की बात कही। जैसे ही यह न्युज फ्लैश हुई शासन से लेकर प्रशासन में हड़कप मच गया। सरकारी मशीनरी समझ गई कि आपदा के समय मुख्यमंत्री कोताही बर्दाश्त नहीं करेंगे। मुख्यमंत्री ने मुख्य सचिव को स्वयं राज्य आपदा परिचालन केन्द्र में बैठकर माॅनीटिरिंग करने के निर्देश दिये और स्वयं घटना स्थल के लिए रवाना हुए। हैलीकाॅप्टर में ही मुख्यमंत्री ने श्रीनगर बांध को खाली कराने और टिहरी बांध का पानी रोकने के निर्देश दिये। जिससे मैदानी इलाकों में पानी का प्रवाह कम हो जाये। मुख्यमंत्री ने त्वरित कार्यों को अजंाम देने के लिए अधिकारियों को अधिकर देते हुए जनहानि रोकने के लिए हर संभव उपाय करने को कहा। जिसके फलस्वरुप आज उत्तराखंड में बड़ी जनहानि रोकने में मदद मिली।

दूरदर्शी और प्रशासनिक सोच से मिली मदद
अलकनन्दा नदी के प्रवाह को समेटने के लिए टिहरी बांध में पानी रोकना और श्रीनगर बांध के पानी को छोड़ना एक दूरदर्शी सोच औश्र प्रशासनिक क्षमता को दर्शाता है। मुख्यमंत्री लगातार पानी के प्रवाह पर नजर रख रहे थे। ऐसे में उन्होंने यह निर्णय लेकर प्रशासनिक क्षमता को दर्शाया है। जिसकी आज पूरा देश का मीडिया प्रशंसा कर रहा है।

अफवाहों को रोकने में कामयाब रही सरकार
लोगों को पैनिक होने से बचाने के लिए सरकार एक तरफ राहत कार्य में जुटी रही। वहीं, मुख्यमंत्री सोशल मीडिया में लगातार अपने अकाउंट से लोगों को सही जानकारी देते रहे। उन्होंने लोगों से अफवाहों पर ध्यान ना देने की अपील की। लगातार उनके द्वारा संपर्क स्थापित किया जाता रहा। जिससे लोगों को भी पल-पल की सही और सटीक जानकारी मिलती रही।

लगातार 24 से 48 घंटे चलेगा राहत कार्य
मुख्यमंत्री जैसे ही आपदा स्थल का जायजा लेकर देहरादून पहंुचे। उन्होंने राज्य आपदा परिचालन केन्द्र का दौरा किया। वहां उन्होंने राहत कार्यों की जानकारी ली। लगातार अधिकारियों से बात कर रहे मुख्यमंत्री ने अपने अगले आदेशों तक राहत कार्य 24 से 48 घंटे चलाने के निर्देश दिये है। बताया जा रहा है कि मुख्यमंत्री ने रात को भी सेना और एनडीआरफ की मदद से एसडीआरएफ व स्थानीय प्रशासन को राहत कार्य करने को कहा है। उन्होंने कहा कि हमें अंतिम व्यक्ति तक को राहत देने की दिशा में कार्य करना है। ऐसे में हमें रेसक्यू आॅपरेशन में और तेजी लानी होगी।

संसाधनों की कमी नहीं
मुख्यमंत्री ने राहत कार्यों को लेकर साफ निर्देश दिये है कि संसाधनों की कोई कमी नहीं है। ऐसे में संासाधनों की कमी का हवाला देकर राहत कार्य बाधित नही होने चाहिए। उन्होंने बताया कि जरुरत महसूस हुई तो हैली सेवाओं के माध्यम से भी राहत कार्य किये जायेगे। रेसक्यू आॅपरेशन के दौरान मिल रहे लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधा देने के लिए डाॅक्टरों के टीम भी मौके पर तैनात की गई है। गंभीर लोगों को हायर सेन्टर भेजा रहा है।

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत लगातार नजर बनाये हुए है। उनका कहना है कि प्राकृतिक आपदाओं से लड़ा नही जा सकता है। लेकिन हम राहत कार्य में और तेजी लाकर लोगों की जान बचा सकते है। प्रधानमंत्री भी मुख्यमंत्री से लगातार अपडेट ले रहे है। उन्होंने भी मुख्यमंत्री को हर संभव मदद करने का आश्वासन दिया है।

साइंस सिटी को यूकॉस्ट के महानिदेशक और सचिव एनसीएसएम ने किया समझौता

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत की उपस्थित में आज साइंस सिटी देहरादून के लिए उत्तराखण्ड विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद् (यूकॉस्ट) उत्तराखण्ड शासन एवं राष्ट्रीय विज्ञान संग्रहालय परिषद् (एनसीएसएम ) के मध्य समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर हुए। यूकॉस्ट के महानिदेशक डॉ. राजेंद्र डोभाल एवं सचिव एनसीएसएम ने समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किये। एनसीएसएम भारत सरकार के संस्कृत मंत्रालय की एक स्वायत्तशासी संस्था है जो देश में विज्ञान संग्रहालयों का निर्माण तथा संचालन करती है। साइंस सिटी देहरादून में विज्ञान धाम, झाझरा में विकसित होगी। साइंस सिटी लगभग चार वर्षों में बनकर तैयार हो जायेगी। 173 करोड़ रूपये की इस परियोजना के लिए 88 करोड़ रूपये केन्द्र सरकार एवं 85 करोड़ रूपये राज्य सरकार वहन करेगी।

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने कहा कि देहरादून में बनने वाले साइंस सिटी सबके आकर्षण का केन्द्र बने इसके लिए विशेष प्रयासों की जरूरत है। इसे निर्धारित समयावधि से पूर्व पूर्ण करने के प्रयास किये जाए। उन्होंने कहा कि किसी भी बड़े प्रोजक्ट को पूरा करने के लिए दृढ़ इच्छा शक्ति का होना जरूरी है। सबके सामुहिक प्रयासों से यह प्रोजक्ट समय से पहले पूरा करने का प्रयास किया जायेगा। उन्होंने कहा कि भारत की वैज्ञानिक संस्कृति को आगे बढ़ाने की दिशा में यह एक महत्वपूर्ण कदम होगा। राज्य सरकार का प्रयास होगा कि उत्तराखण्ड के वैशिष्ट्य को लोग साइंस सिटी के माध्यम से देख सकें। साइंस सिटी के लिए स्थान का चयन भी छात्र-छात्राओं एवं लोगों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए किया गया है।

साइंस सिटी देहरादून में खगोल एवं अंतरिक्ष विज्ञान ,रोबोटिक्स, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी की विरासत, भूगर्भीय जीवन, जलवायु परिवर्तन, ऊर्जा, जैव प्रौद्योगिकी, वर्चुअल रियलिटी, ऑग्मेंटेड रियलिटी, आर्टिफीसियल इंटेलीजेन्स के साथ स्पेस थियेटर सहतारामंडल, हिमालय की जैवविविधता पर डिजिटल पैनोरमा, सिम्युलेटर, एक्वेरियम, उच्च वोल्टेज व लेजर, आउटडोर साइंस पार्क, थीम पार्क, बायोडोम, बटरफ्लाई पार्क, जीवाश्म पार्क एवं मिनिएचर उत्तराखंड आदि होंगे। साथ ही अन्य सुविधाओं के रूप में कन्वेंशन सेंटर तथा प्रदर्शनी हॉल आदि भी साइंस सिटी का हिस्सा होंगे।

साइंस सिटी प्रदेश में विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के संचार, लोकव्यापीकरण तथा नवप्रवर्तन की दिशा में विद्यार्थियों, शिक्षकों, आम नागरिकों एवं पर्यटकों के लिए महत्वपूर्ण तथा आकर्षण का केन्द्र होगी। केंद्र सरकार की स्पोक्स योजना के तहत क्षेत्र्रीय विज्ञान केंद्र देहरादून के साइंस सिटी देहरादून में उन्नयन के लिए राज्य सरकार के प्रस्ताव को संस्कृति मंत्रालय भारत सरकार की सैद्धांतिक मंजूरी मिली थी। इस सैद्धांतिक मंजूरी के बाद संस्कृति मंत्रालय भारत सरकार के डेलीगेटेड इन्वेस्टमेंट बोर्ड (डीआईबी) की मंजूरी भी साइंस सिटी देहरादून के लिए अप्रैल 2020 में प्राप्त हो गई थी।

इस अवसर पर विधायक सहदेव सिंह पुण्डीर, ग्राम्य विकास एवं पलायन आयोग के उपाध्यक्ष डॉ. एस.एस. नेगी, मुख्यमंत्री के तकनीकि सलाहकार डॉ. नरेन्द्र सिंह, सचिव विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी आर.के सुधांशु, एनसीएसएम के पूर्व महानिदेशक गंगा सिंह रौतेला, निदेशक इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ पेट्रोलियम डॉ. अजंन रे, अपर सचिव विजय यादव, अपर प्रमुख वन संरक्षक डॉ. समीर सिन्हा, डॉ. प्रकाश चैहान आदि उपस्थित थे।

जानिए मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री, केन्द्रीय वित्त मंत्री और रेल मंत्री का आभार जताया

केंद्रीय बजट में ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल परियोजना में वर्ष 2021-22 के लिये 4200 करोङ रूपए का परिव्यय प्रस्तावित किया गया है। मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने इसके लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, केन्द्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण और रेल मंत्री पीयूष गोयल का आभार व्यक्त किया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री के मार्गदर्शन और केन्द्र सरकार के सहयोग से उत्तराखण्ड में इन वर्षों में कनेक्टीवीटी के क्षेत्र में बहुत तेजी से काम हुआ है। पहाड़ में रेल का सपना जल्द ही साकार होने जा रहा है। ऋषिकेश कर्णप्रयाग रेल परियोजना में न्यू ऋषिकेश स्टेशन तैयार हो चुका है और यहां से ट्रेनों का संचालन भी शुरू हो चुका है। बाकी जगहों पर भी तेजी से काम चल रहा है। इस वर्ष के लिये बजट में प्रस्तावित 4200 करोङ रूपए से परियोजना टाईमफ्रेम में पूरा की जा सकेगी।

गौरतलब है कि मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत लगातार ऋषिकेश कर्णप्रयाग रेल परियोजना की सीधी मानिटरिंग कर रहे हैं। राज्य सरकार के स्तर से आवश्यक औपचारिकताओं को समय पर पूरा कराया गया है।

रेल विकास निगम के अधिकारियों के साथ ही रेलवे लाइन निर्माण हेतु विभिन्न पैकेजों में कार्य करने वाली कार्यदायी संस्थाओं की समस्याओं के त्वरित समाधान को सर्वोच्च प्राथमिकता पर लिया गया है। वीरभद्र-न्यू ऋषिकेश ब्लॉक सेक्शन का काम पूर्ण हो चुका है। ऋषिकेश में एक आरओबी तथा एक आरयूवी भी तैयार हो चुका है। परियोजना के तहत 17 टनल के कार्यों को 10 पैकेज में बांटा गया है। लछमोली व श्रीनगर में अलकनंदा नदी पर आर.ओ.बी. का कार्य प्रारम्भ किया जा चुका है। श्रीनगर, गौचर व सिवाइ में रोड ब्रिज का कार्य भी प्रगति पर है। ऋषिकेश-देवप्रयाग ब्लॉक सेक्शन का कार्य 2023-24 और देवप्रयाग-कर्णप्रयाग ब्लॉक सेक्शन का कार्य 2024-25 तक पूर्ण किये जाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। उत्तराखण्ड के चारधाम यमुनोत्री, गंगोत्री, श्री केदारनाथ व श्री बद्रीनाथ को रेलवे सेवा से जोड़ने के लिए लगभग 327 किलोमीटर की कुल लम्बाई की 4 रेलवे लाईन अलाईनमेंट पर भी कार्य किया किया जा रहा है।

नगर क्षेत्र में निकली स्वामी रामानंदाचार्य की जयंती पर शोभायात्रा

जगतगुरु स्वामी रामानंन्दा चार्य महाराज की 721 वी जयंती महोत्सव माघ कृष्ण सप्तमी संवत 2077 कोविड-19 को ध्यान में रखते हुए बड़ी प्रेम और श्रद्धा के साथ मनाई गई। विरक्त श्री वैष्णव मंडल समिति के तत्वाधान में स्वामी रामानंद संत आश्रम मायाकुंड रामानंद घाट से संत बैरागी एवं विरक्त वैष्णव मंडल के सभी संत महात्माओं की अगुवाई में आज जगतगुरु रामानंन्दाचार्य महाराज की शोभायात्रा नगर भ्रमण के लिए सूक्ष्म रूप में निकाली गई। शोभायात्रा में मेयर अनिता मंमगाई में भी सम्मिलित होकर सभी संतों का आशीर्वाद लिया।

मेयर अनिता ने कहा कि संत समागम से ही हम अपने जीवन को बदल सकते हैं जिस प्रकार आज का युवा कल का भविष्य कहा जाता है उसी प्रकार संतों के आशीर्वाद से हम अपने जीवन में अनेकानेक बदलाव ला सकते हैं उन्हीं के आशीर्वाद के फल स्वरुप हम अपने जीवन में आध्यात्मिक एवं सामाजिक चेतना जगाकर जनमानस में वसुधैव कुटुंबकम की भावना के साथ आगे बढ़ कर कार्य कर सकते हैं उन्होंने सभी को जयंती की शुभकामनाएं देते हुए सभी संत महात्माओं का आभार प्रकट करते हुए कहा कि संतों का जन्म नहीं अवतार होता है समाज को एक दिशा दिखा कर वह अपनी दिव्य लोग में चले जाते हैं

शोभा यात्रा नगर भ्रमण करने के पश्चात पुनः रामानंन्द संत आश्रम मायाकुंड में पहुंचकर संत महात्माओं द्वारा संत सम्मेलन मैं सभी आए हुए संत महामंडलेश्वर ने अपने-अपने श्रद्धा सुमन अर्पित किए।

इस अवसर पर कार्याध्यक्ष महामंडलेश्वर दयाराम दास महाराज, महामंत्री महामंडलेश्वर महंत ईश्वर दास महाराज ईश्वर आश्रम, कोषाध्यक्ष महंत डॉ नारायण दास महाराज, महंत जय राम महाराज महंत प्रभु दास महाराज, महंत हरी चरण दास महाराज, मुरारी दास महाराज, संचालन एवं व्यवस्था पुजारी वृन्दावन दास महाराज, रामानुजाचार्य गोपालचार्य महाराज, शंकराचार्य परिषद के प्रदेश अध्यक्ष पंडित रवि शास्त्री, संगठन मंत्री महंत सुरेश दास महाराज, महंत निर्मल दास महाराज, महंत भारत भूषण दास महाराज, महंत सीताराम दास महाराज, महंत कृष्ण मुरारी दास महाराज, महंत ह्रयग्रिवाचार्य महाराज, महंत शांताराम दास, मौनी बाबा, चेतन शर्मा, विनोद शर्मा, पंकज शर्मा, संजय भट्ट, घनश्याम भट्ट, पूर्व राज्य मंत्री संदीप गुप्ता, विवेक गोस्वामी, अभिषेक शर्मा, राम चैबे, रमाकांत भारद्वाज, रामकृपाल गौतम, महंत दीपक दास महाराज, महावीर दास परमानंद महाराज आदि उपस्थित रहे।

मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र ने किया राज्य का प्रथम रेडियो स्टेशन का शुभारंभ

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने बल्लुपुर चैक, देहरादून में उत्तराखण्ड के पहले डिजिटल रेडियो स्टेशन ‘‘ओहो रेडियो उत्तराखण्ड’’ का उद्घाटन किया। इस अवसर पर विधायक गणेश जोशी उपस्थित थे।

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने कहा कि प्रदेश की राजधानी देहरादून से यह एक अच्छी शुरूआत हो रही है। एप्प के माध्यम से ओहो रेडियो उत्तराखण्ड को दुनियाभर में सुना जा सकता है। उन्होंने आशा व्यक्त की कि यह रेडियो स्टेशन अपने कार्यक्रमों के माध्यम से समाज में जागरूकता लायेगा एवं लोगों को दुःख, दर्द एवं समस्याओं को उजागर भी करेगा। इससे सरकार को भी लोगों की समस्याओं के समाधान में और मदद मिलेगी।

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र ने कहा कि आज इंटरनेट के जमाने में जब हर कोई डिजिटल माध्यम से जुड़ रहा है, ऐसे में आर.जे. काव्य द्वारा रेडियो को डिजिटल माध्यम पर लाने की सराहनीय कोशिश की गई है। ‘‘ओहो रेडियो उत्तराखण्ड’’ के माध्यम से उत्तराखण्ड की संस्कृति, परिवेश, बोलियों एवं अन्य गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा।

आर.जे काव्य ने कहा कि सोच लोकल एप्रोच ग्लोबल का विजन लिए संगीत, साहित्य, स्पोर्ट्स, करियर, पलायन, समाज और उत्तराखण्ड की हर बात को ओहो रेडियो उत्तराखण्ड अपनी आवाज देगा।

राष्ट्रपति सांसद नरेश बंसल ने की शिष्टाचार भेंट, कुंभ में उत्तराखंड आने का दिया निमंत्रण

दिल्ली में सांसद राज्य सभा नरेश बंसल ने राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद से शिष्टाचार भेंट की। करीब 1 घंटे चली इस मुलाकात के दौरान राज्यसभा सांसद ने उन्हें कुंभ में हरिद्वार आने का निमंत्रण दिया। मौके पर सांसद ने नवसंवत्सर व हिन्दू नव वर्ष की अग्रिम शुभकामनाएं और बधाई दी गई। साथ ही उत्तराखंड के विकास कार्यों को लेकर भी वार्ता हुई। बंसल ने राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद को उनके संयुक्त संसदीय सत्र के अभिभाषण के लिए बधाई देते हुए उसे भारत की प्रगति का पाथेय बताया। साथ ही कहा कि विषम परिस्थितियों में भारत सरकार द्वारा पेश एतिहासिक बजट भारत की प्रगति मे मील का पत्थर साबित होगा। उससे सभी क्षेत्रों में सर्वागीण विकास होगा।

सांसद नरेश बंसल ने उत्तराखंड में केन्द्र व राज्य सरकार द्वारा चल रहे विकास कार्यो की जानकारी राष्ट्रपति को दी। राष्ट्रपति कोविंद से राज्य से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों पर संवाद किया।दोनों के बीच उत्तराखंड व देश से सम्बंधित विभिन्न विषयों पर सकारात्मक चर्चा हुईं।

सासंद ने राष्ट्रपति को मां भगवती की प्रशाद स्वरुप चुनरी व श्री वाल्मिकी रामायण भेंट की। सासंद बंसल ने कुंभ मेला पर भी एक पुस्तक राष्ट्रपति महोदय को भेंट की व उन्हे सपरिवार देवभूमि उत्तराखंड के पुण्य क्षेत्र हरिद्वार में आयोजित होने वाले महाकुंभ में आने का निमंत्रण दिया।

इस मौके पर राज्य सभा में निर्वाचन पर बधाई और शुभकामनाएं दी। साथ ही सांसद ने राष्ट्रपति का मार्गदर्शन लिया। इस अवसर पर आईटी प्रकोष्ठ युवा मोर्चा उत्तराखंड के सह संयोजक सिद्धार्थ बंसल भी उपस्थित रहे।

पूर्व सांसद व स्वतंत्रता संग्राम सेनानी की पुण्यतिथि पर दी श्रद्धांजलि

स्वतंत्रता संग्राम सेनानी व पूर्व सांसद त्रेपन सिंह नेगी की 25वीं पुण्यतिथि पर आज श्रद्धांजलि सभा का आयोजन तहसील रोड पर किया गया। जिसमें सभी ने उनके चित्र पर पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि दी और उनके कार्यों को याद किया गया।

मौके पर वक्ताओं ने कहा कि स्व. त्रेपन सिंह नेगी सम्पूर्ण समाज के लिए और विशेष कर राजनीतिज्ञों के लिए प्रेरणा स्रोत थे वह ईमानदारी व सरलता की प्रतीक थे। मौके पर शूरवीर सिंह सजवान, वेद प्रकाश शर्मा, स्वतंत्रा सेनानी के वारिसान मदन मोहन शर्मा, संदीप शास्त्री, देवेश्वर प्रसाद रतूड़ी, पार्षद विजयलक्ष्मी शर्मा ने अपने विचार रखे।

श्रद्धांजलि देने वालों में जयेंद्र रमोला, जयपाल जाटव, अरविंद जैन, पार्षद दल नेता मनीष शर्मा, शकुंतला शर्मा, जगत नेगी, देवेंद्र प्रजापति, भगवान पवार, अजीत सिंह, मधु मिश्रा, बृजपाल राणा, श्री प्यारेलाल जुगरान, राजकुमार तलवार, ललित मोहन मिश्रा, सरोजनी थपलियाल, सरोज देवरानी, बीना बहुगुणा, प्रदीप जैन, बैसाख पयाल, भगवती रतूड़ी, शेर सिंह रावत, संजय नेगी, हिम्मत सिंह मियां, विक्रम भंडारी, दिग्विजय कैंतूरा, धीरज डोभाल, राजेंद्र पंत, पंचम सिंह मियां, सुनील नवानी, नरेंद्र कंडारी, राजेंद्र प्रसाद डोभाल, कलम सिंह कैंतूरा, नरेंद्र रागढ़, सोवन सिंह, कपिल शर्मा, अनूप लाठर, प्रमोद शर्मा, मोहन लाल जोशी, वीर विक्रम सिंह पुंडीर, अभिषेक शर्मा, रवि शास्त्री, मनीष मिश्रा, निर्मल बहुगुणा, टीकाराम रतूड़ी, राजेश साहनी, आनंद कैनतुरा, बुद्धि सिंह, सूरत राणा, करिश्मा पांडे, गोपाल बिष्ट, आशीष, रमेश चैहान, नीतू अग्रवाल, गौतम नौटियाल, प्रिंस सक्सेना, पंकज बिष्ट आदि मौजूद थे। कार्यक्रम का आयोजन पार्षद व एडवोकेट राकेश सिंह मियां ने किया।

सत्ताधीन पार्टी और विपक्ष ने दी केंद्रीय बजट पर अपनी प्रतिक्रिया, अधिक पढ़ें…

केंद्रीय बजट 2021-22 स्वास्थ्य और कल्याण, किसानों के कल्याण, अकांक्षी भारत के लिए समावेशी विकास, मानव पूंजी में नवजीवन का संचार करना, नवाचार और अनुसंधान और विकास पर आधारित है। इससे न केवल ग्रामीण क्षेत्रों का विकास होगा, बल्कि इससे किसानों, बेरोजगार युवाओं और आम आदमी का आर्थिक विकास भी सुनिश्चित होगा। उन्होंने कहा कि इस बजट से समग्र विकास सुनिश्चित होगा, जिससे जन साधारण का विश्वास और भी बढ़ेगा। लघु और मध्यम उद्योग, स्टार्ट अप, व्यापार, इन्फ्रास्ट्रक्चर क्षेत्र में सुधार से अर्थव्यवस्था को बल मिलेगा, वहीं छोटे करदाताओं को लाभ मिलेगा। एक देश एक राशन’ योजना, 75 साल से ऊपर के नागरिक को पूर्णरूप से टैक्स में छूट, उज्जवला स्कीम का विस्तार, देश में 15000 आदर्श स्कूल बनाए जाने, 100 सैनिक स्कूल, आदिवासी क्षेत्र में 758 एकलव्य स्कूल, प्रवासी श्रमिकों हेतु खाद्य सुरक्षा योजना, श्रमिकों की न्यूनतम वेतन योजना, मंडियों को इंटरनेट से जोड़ना, एमएसपी को जारी रखना सहित कई महत्वपूर्ण प्रावधान रखे गए हैं।
प्रेमचंद अग्रवाल, स्पीकर व स्थानीय विधायक

देश का आम बजट में कोरोना के वार से उबर रही अर्थव्यवस्था के बीच सरकार ने इस बजट में इकॉनामी को पुश करने पर जोर रखा है। इस बार हेल्थ सेक्टर और इंफ्रा पर खासा जोर दिया गया है। समाज के विभिन्न वर्गों की जरूरतों के हिसाब से यह बजट संवेदनशील है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने के लिए योजनाबद्ध तरीके से एक रूपरेखा प्रस्तुत की है। भविष्य को देखकर बजट तैयार किया गया है। उन्होंने कहा कि बजट में विकास का विश्वास का खूबसूरत समावेश है। कोरोना की विषम परिस्थितियों के बीच आज आया बजट भारत के आत्मविश्वास को उजागर करने वाला है।
अनिता ममगाईं, मेयर नगर निगम ऋषिकेश।

केंद्रीय बजट से बिल्कुल स्पष्ठ है कि कोविड काल के चलते देश की आर्थिक स्तिथि चिंताजनक है और सरकार के पास कोई ठोस दिशा नही है।आम बजट महंगाई बढ़ाने वाला है और इसमें बेरोजगारों, लघु उद्योगो एवं किसानों की स्तिथि में सुधार के लिए कोई भी ब्लू प्रिंट नही है। मध्यम वर्ग की पूर्णतया उपेक्षा की गई है।
राजे नेगी, नेता आम आदमी पार्टी

पूरी दुनिया के साथ-साथ हिंदुस्‍तान भी कोरोना महामारी की चपेट में आने की वजह से आर्थिक बदहाली में फंस गया है। इसलिए जब बजट पेश होने की तारीख आई तो हमें भी उम्‍मीद थी कि असाधारण स्थिति में बजट में असाधारण दिशा सामने रखकर इससे निकलने की कोशिश होगी। कोई असाधारण कदम उठाया जाएगा लेकिन मुझे हताश होना पड़ा। स्थिति तो असाधारण है लेकिन बजट बेहद साधारण है। ये साधारण बजट के साथ-साथ बहुत सारे बोझ हमारे ऊपर डाले गए हैं जो नहीं डाले जाने चाहिए थे। सरकार आज जिस रास्‍ते पर जा रही है, वह सीधा निजीकरण की ओर ले जा रहा है। स्थिति असाधारण, सरकार चाहती है निजीकरण… यही आज के बजट की कैच लाइन है।
विवेक तिवारी, नेता कांग्रेस ऋषिकेश

देशवासियों की आकांक्षाओं का बजट आज हुआ प्रस्तुतः सीएम

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने केंद्रीय बजट 2021-22 पर बोलते हुए कहा है कि विपरीत परिस्थितियों में बहुत ही समावेशी बजट प्रस्तुत किया गया है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण को धन्यवाद देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि बजट में प्रधानमंत्री जी की मजबूत इच्छाशक्ति दिखाई देती है। मुख्यतः 6 स्तम्भों पर आधारित इस बजट में आधारभूत संरचना के विकास, रोजगार सृजन के साथ ही गांवों और किसानों का ख्याल रखा गया है। इस बजट को सभी देशवासियों की आकांक्षाओं का बजट कह सकते हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि बजट से स्वस्थ और सुरक्षित भारत की परिकल्पना पूर्ण होगी। हेल्थ केयर में 137 प्रतिशत की वृद्धि की गई है। यह बजट आत्मनिर्भर भारत के सपने को साकार करेगा। विभिन्न चरणों में आत्मनिर्भर भारत पैकेज कुल मिलाकर 27.1 लाख करोड़ रूपए रहा है जो कि जीडीपी का 13 प्रतिशत है। वर्तमान बजट में इसे और आगे बढ़ाया गया है। पीएम आत्मनिर्भर स्वस्थ भारत योजना लांच की जाएगी जिसके तहत 6 सालों में 64180 करोड़ रूपए खर्च कर स्वास्थ्यगत ढांचे को और मजबूत किया जाएगा। इसी प्रकार पोषण अभियान को भी आगे बढ़ाने की बात कही गई है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि शहरी क्षेत्रों के लिए भी जलजीवन मिशन लांच किया जाएगा। इसमें 2 लाख 87 हजार करोड़ रूपए से पांच वर्षों में 2 करोड़ 86 लाख घरों को पानी का कनेक्शन दिया जाएगा। शहरी स्वच्छ भारत मिशन 2.0 शुरू किया जाएगा जिसके तहत पांच वर्षों में 1 लाख 41 हजार 678 करोड़ रूपए का प्राविधान रखा गया है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि किसानों की आय दोगुनी करने की दिशा में भी अनेक प्राविधान किए गए हैं। रूरल इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट फंड को 30 हजार करोड़ से बढ़ाकर 40 हजार करोड़ रूपए किया गया है। 1 हजार और मंडियों को ई-नाम से जोड़ा जाएगा। माइक्रो इरिगेशन फंड को भी दोगुना किया जाएगा। स्वामित्व योजना को पूरे भारत में लागू करने की बात कही गई है। 100 नए सैनिक स्कूल खोले जाएंगे। मेगा इन्वेस्टमेंट टेक्सटाईल पार्क से बड़ी मात्रा में रोजगार के अवसर सृजित होंगे। किफायती आवास योजना को भी एक वर्ष के लिए बढ़ाया गया है।