मुख्यमंत्री ने खेल पुरस्कारों से सम्मानित किया, कहा-आगे बढ़ो सरकार देगी सहायता

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने सर्वे चैक स्थित आईआरडीटी सभागार में आयोजित कार्यक्रम में विभिन्न खिलाड़ियों को देवभूमि उत्तराखण्ड खेलरत्न, देवभूमि उत्तराखण्ड द्रोणाचार्य एवं लाईफ टाईम अचीवमेंट पुरस्कार से सम्मानित किया।
खिलाड़ियों को बधाई देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार की कोशिश है कि खेलों इंडिया में अधिक से अधिक खिलाड़ियों की भागीदारी हो सके। उन्होंने कहा कि ऑलम्पिक 2024 को लक्ष्य बना कर हमें अपनी तैयारियां करनी होंगी। इसके लिए सरकार द्वारा हर सम्भव सहायता की जाएगी। उन्होंने कहा कि हमें खेलने और खिलाने के साथ-साथ कबड्डी और खो-खो जैसे खेलों को भी फोकस करना होगा। मुख्यमंत्री ने घोषणा की कि रूद्रपुर में महिला स्पोर्ट्स कॉलेज की स्थापना की जाएगी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि खेलो इंडिया के तहत अधिक से अधिक लोगों की भागीदारी प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी का संकल्प है। इस वर्ष राज्य के दो लाख से अधिक बच्चों ने इसमें प्रतिभाग किया है। उन्होंने कहा कि हमें राज्य में 2-4 खेलों पर विशेष ध्यान देना होगा। उनके लिए लक्ष्य निर्धारित करने होंगे।
खेल मंत्री श्री अरविन्द पाण्डेय ने कहा कि खेल महाकुम्भ और खेलो इंडिया के माध्यम से योग्य बच्चों को एक प्लेटफार्म मिला है। न्यायपंचायत, ब्लॉक स्तर और राज्य स्तर पर लगभग दो लाख से अधिक खिलाड़ियों द्वारा प्रतिभाग किया गया है। उन्होंने कहा कि सम्मानित किये जाने से मनोबल बढ़ता है परन्तु खेल मात्र पुरस्कार पाने तक ही सीमित नहीं है, यह स्वास्थ्य के लिए भी आवश्यक है।
इस अवसर पर मनीष सिंह रावत एवं एशियन पैरागेम्स बैडमिन्टन खिलाड़ी मनोज सरकार को देवभूमि उत्तराखण्ड खेल रत्न पुरस्कार, अनूप बिष्ट को देवभूमि उत्तराखण्ड द्रोणाचार्य पुरस्कार एवं अरूण कुमार सूद को लाईफ टाईम अचीवमेंट पुरस्कार से सम्मानित किया गया।

राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन के तहत राज्य को मिली कामयाबी, वार्षिक बजट बढ़कर मिलेगा

राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन के तत्वाधान में वार्षिक बजट अनुमोदन हेतु नई दिल्ली में आयोजित बैठक में उत्तराखण्ड राज्य को गत वित्तीय वर्ष के कुल परिव्यय रूपये 510 करोड़ के सापेक्ष वित्तीय वर्ष 2020-21 में कुल रूपये 590 करोड़ की स्वीकृति प्राप्त हुई जिससे राज्य की स्वास्थ्य सेवाओं के संवर्धन में बल मिलेगा। बैठक में रूद्रपुर मेडिकल कॉलेज के लिये 325 करोड़ की स्वीकृति प्रदान की गई जबकि नगरीय स्वास्थ्य के संवर्धन हेतु राज्य द्वारा प्रस्तावित, जनपद हरिद्वार के भूपतवाला में अर्बन सीएचसी (नगरीय चिकित्सालय), की अनुमति प्राप्त हुई जिससे क्षेत्र में नगरीय तथा निकटवर्ती आबादी में बेहतर स्वास्थ्य सुविधा प्राप्त होगी। राज्य को 367 नई आशाओं के पद स्वीकृत कराये गए जिससे राज्य के दूरस्थ स्थानों पर ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य संवर्धन में सहायता प्राप्त होगी। हल्द्वानी, जनपद नैनीताल में पूर्व से संचालित 30 शैय्या युक्त महिला अस्पताल के विस्तारीकरण हेतु प्राप्त अनुमोदन से अब उक्त चिकित्सालय की क्षमता बढ़कर 100 शैय्याओं की हो जाएगी जिससे क्षेत्र में महिला एवं शिशु स्वास्थ्य की बेहतर सुविधाएं मिलेंगी।
हल्द्वानी, जनपद नैनीताल में 150 शैय्या युक्त नवीन मल्टी स्पेशलिटी अस्पताल, जिसमें हृदय, किडनी तथा न्यूरो आदि विशेषज्ञ सेवाएं प्राप्त हो जाएँगी। जनपद देहरादून में उच्च गुणवत्ता परक रक्त सुविधाओं हेतु एक सेंटर ऑफ एक्सीलेंस केंद्र रक्त कोष की स्थापना की अनुमति प्राप्त की गयी जिससे किसी भी आपातकालीन स्थिति में रक्त एवं रक्त उत्पादों की सुलभता होगी। राज्य को 20 नई एम्बुलेंस की अनुमति प्राप्त हुई है, जिससे रोगियों के परिवहन में सुलभता प्राप्त होगी। राज्य के दूरस्थ, यात्रा मार्गों पर दो नई पी.एच.सी. जनपद पिथौरागढ़ में पीएच सी गूंजी तथा जनपद उत्तरकाशी में पी.एच.सी जानकी चट्टी की संस्तुती प्राप्त हुई जिससे इन दूरस्थ स्थानों में चिकित्सा सेवाएं स्थानीय जन के साथ-साथ यात्रियों को भी प्राप्त होंगी।
बैठक में राज्य में राजकीय सेवा में कार्यरत स्नातक चिकित्सकों को एम्स ऋषिकेश से चिन्हित छः परास्नातक विधाओं में कोर्स कराए जाने के प्रस्ताव की वित्तीय स्वीकृति प्राप्त होने से न केवल क्षेत्र में विशेषज्ञों की सेवाएं प्राप्त होंगी अपितु चिकित्सकों में भी कौशल विकास होगा। आगामी वित्तीय वर्ष में राज्य में 500 उपकेंद्रां को हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर के रूप में विकसित किया जायेगा जिससे क्षेत्र में महिला एवं शिशु स्वास्थ्य कार्यक्रम के साथ साथ समस्त आबादी को गैर संचारी रोगों की पहचान तथा निदान में सुलभता होगी जिससे न केवल स्वास्थ्य सुधार होगा बल्कि इन रोगों पे होने वाले व्यक्तिगत व्यय में भी कमी आयेगी। राज्य के पांच जनपदों में जन स्वास्थ्य जांच केंद्र का अनुमोदन प्राप्त हुआ, जिससे संक्रामक रोगों की जाँच सुलभ होगी।
स्वास्थ्य मंत्रालय, भारत सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ संपन्न हुई उपरोक्त बैठक में उत्तराखण्ड राज्य की ओर से स्वास्थ्य विभाग के दल का नेतृत्व सचिव स्वास्थ्य उत्तराखण्ड सरकार, नितेश कुमार झा द्वारा किया गया। उक्त दल में डॉ पंकज पाण्डेय प्रभारी सचिव स्वास्थ्य उत्तराखण्ड सरकार तथा युगल किशोर पन्त, मिशन निदेशक एन.एच.एम के साथ-साथ महानिदेशक चिकित्सा, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग डॉ अमिता उप्रेती द्वारा प्रतिभाग किया गया। साथ इस अवसर पर चिकित्सा, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग के अन्य अधिकारी भी उपस्थित रहे।

मुख्यमंत्री ने एक माह में सभी विभागों को पलायन रोकने के लिए कार्ययोजना बनाने के दिए निर्देश

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने राज्य के चयनित ब्लॉकों में पलायन पर केंद्रित विशेष योजना संचालित करने के निर्देश दिए हैं। सीएम ने माइग्रेशन मिटीगेशन फंड स्थापित करने और एक माह में सभी विभागों को पलायन को रोकने के लिए कार्ययोजना प्रस्तुत करने को भी कहा। मुख्यमंत्री ने कहा कि भू-अभिलेखों में महिलाओं का नाम प्राथमिकता के आधार पर दर्ज किया जाये। इको-टूरिज्म पॉलसी को शीघ्र अमलीजामा देने के भी निर्देश दिये। विश्वकर्मा भवन, सचिवालय में राज्य के ग्रामीण क्षेत्रों में पलायन को लेकर आयोजित बैठक में मुख्यमंत्री ने यह बातें कही।
सीमावर्ती क्षेत्रों के लिए बनें फ्लेक्सीबल योजनाएं
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य के सीमावर्ती क्षेत्रों पर खास फोकस किया जाए। वहां पलायन को रोकने बनाई जाने वाली योजनाएं फ्लेक्सीबल हों। कोशिश की जाए कि सीमावर्ती क्षेत्रों में रहने वाले अधिक से अधिक स्थानीय लोग वहां रहने के लिए प्रेरित हों। सामरिक संवेदनशीलता को देखते हुए यह बहुत जरूरी है।
भू-अभिलेखों में महिलाओं का नाम भी दर्ज किए जाने की व्यवस्था हो
मुख्यमंत्री ने कहा कि पर्वतीय क्षेत्रों के गांवों में महिलाओं का अनुपात अधिक है। गांवों में संचालित योजनाओं को महिला केंद्रित हों। जरूरी है भू-अभिलेखों में उनका नाम भी दर्ज हो। इससे उन्हें कृषि, पशुपालन, स्वरोजगार आदि के लिए ऋण मिलने में आसानी रहेगी। राजस्व विभाग इसके लिए आवश्यक प्रावधान करे।
इको टूरिज्म पॉलिसी जल्द से जल्द बनाने के निर्देश
मुख्यमंत्री ने पर्यटन विभाग को इको टूरिज्म पॉलिसी जल्द से जल्द बनाने के लिए निर्देशित किया। इको टूरिज्म के लिए वन विभाग व पर्यटन विभाग आपसी समन्वय से काम करें। उन्होंने कहा कि होम स्टे को दूसरी पर्यटन गतिविधियों व मार्केट से लिंक किया जाए। होम स्टे करने वालों को हॉस्पिटेलिटी के प्रशिक्षण की व्यवस्था हो। एडवेंचर स्पोर्ट्स को प्राथमिकता दी जाए। पर्यटन विभाग एक मोबाईल एप बनाए जिसमें जिलावार वहां के वन्य जीवन, वनस्पति, पर्यटन स्थलों, ट्रेकिंग स्थलों, होटल, होम स्टे आदि की जानकारी मौजूद हो।
ग्रामीण क्षेत्रों में फील्ड स्टाफ की कमी को दूर करने की आवश्यकता
मुख्यमंत्री ने कहा कि पर्वतीय ग्रामीण क्षेत्रों में फील्ड स्टाफ की कमी को दूर करने की आवश्यकता है। पेयजल की उपलब्धता पर भी विशेष ध्यान देना होगा। किसानों की आय दुगुनी करने के लिए ऑफ सीजन सब्जियों के उत्पादन, मत्स्य पालन, बकरी पालन, फ्लोरीकल्चर महत्वपूर्ण हो सकते हैं। क्लस्टर बेस्ड एप्रोच अपनानी होगी। एमएसएमई के तहत पर्वतीय क्षेत्रों के युवाओं को स्वरोजगार के लिए लघु ऋणों की उपलब्धता सुनिश्चित की जाए।
रेखीय विभाग करें गैप एनालिसिस
मुख्यमंत्री ने कहा कि पलायन से सर्वाधिक प्रभावित गांवों में शिक्षा, स्वास्थ्य, ऊर्जा आदि रेखीय विभाग गैप एनालिसिस करें। और जहां कमी नजर आती है, उसे प्राथमिकता से दूर किया जाए। एक माईग्रेशन मिटिगेशन फंड स्थापित किया जाए। राज्य के चिन्हित ब्लॉकों में पलायन पर केंद्रित विशेष योजना संचालित की जाए। मुख्यमंत्री सीमावर्ती क्षेत्र विकास योजना को फ्लेक्सीबल बनाया जाए। सभी विभाग पलायन को लेकर एक माह में कार्ययोजना बनाकर प्रस्तुत करें।
उत्तराखण्ड ग्रामीण विकास व पलायन आयोग के उपाध्यक्ष एसएस नेगी ने बताया कि राज्य के 36 विकासखण्ड चिन्हित किए गए हैं जहां ग्रामीण क्षेत्रों में पलायन की अधिक समस्या रही है। इनमें अल्मोड़ा के 7, बागेश्वर के 1, चमोली के 5, पौड़ी के 12, पिथौरागढ़ के 5, रूद्रप्रयाग का 1 और टिहरी के 5 ब्लॉक शामिल हैं। गांवों से निकटवर्ती छोटे कस्बों में बसने की प्रवृत्ति देखने को मिली है। योजनाओं को महिला केंद्रित किए जाने की जरूरत है। ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए मार्केट से लिंक करना होगा। कई क्षेत्रों में बकरी पालन आय का बड़ा जरिया बना है।

प्रधानमंत्री से मिले मुख्यमंत्री, राज्य के विकास कार्यों की दी जानकारी

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने नई दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से भेंट कर वर्ष 2021 में हरिद्वार में होने वाले महाकुम्भ की तैयारियों की जानकारी दी। कुम्भ मेले के कुशल प्रबन्धन के लिए जनवरी 2021 से अप्रैल 2021 के मध्य चलने वाले महाकुम्भ के सफल संचालन हेतु लगभग एक हजार करोड़ रूपए से अधिक के कार्य किये जायेंगे। मुख्यमंत्री ने राज्य के सीमित संसाधनों को देखते हुए केन्द्र सरकार से आर्थिक सहयोग का अनुरोध किया। उन्होंने कहा कि वर्ष 2010 में हरिद्वार में आयोजित कुम्भ मेले में देश-विदेश से 8 करोड़ श्रद्धालु आए थे। 2021 में होने जा रहे कुम्भ मेले में 15 करोड़ से अधिक श्रद्धालुओं के आने की सम्भावना है। इतनी बड़ी संख्या में आने वाले श्रद्धालुओं के लिए वृहद स्तर पर स्थाई व अस्थाई सुविधाएं विकसित की जा रही हैं। कुम्भ क्षेत्र का विस्तार किया जा रहा है। अवस्थापना संबंधी कार्यों जैसे सडक, विद्युत, पेयजल आपूर्ति, कानून व्यवस्था सुनिश्चित करने, चिकित्सा सुविधा, स्वच्छता व कूड़ा निस्तारण, आवासीय व पार्किंग व्यवस्था व कुम्भ मेला क्षेत्र के विस्तार का काम किया जा रहा है।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी के साथ भेंट के दौरान मुख्यमंत्री ने केदारनाथ पुनर्निर्माण के कार्यों की जानकारी दी। प्रधानमंत्री ने कहा कि केदारनाथ का निर्माण कार्य मिशन मोड पर किया जाए। मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री को जानकारी दी कि बद्रीनाथ, केदारनाथ, गंगोत्री, यमुनोत्री एवं उनके निकटवर्ती प्रमुख मंदिरों के लिए राज्य में देवस्थानम बोर्ड बनाया गया है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश के सीमांत क्षेत्र के गांवों में आजीविका एवं बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए मुख्यमंत्री सीमांत क्षेत्र विकास योजना शुरू की जा रही है। इसके लिए उन्होंने केन्द्र सरकार से विशेष पैकेज दिए जाने का अनुरोध किया। प्रदेश के सीमान्त क्षेत्रों से पलायन रोकने के लिए राज्य सरकार हर सम्भव प्रयास कर रही है। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री को अप्रेल 2020 में होने वाले ‘वैलनेस समिट’ के शुभारम्भ के लिए अनुरोध किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में 305 वैलनेस सेंटर का कार्य पूर्ण हो चुका है। सभी 462 वैलनेस सेंटर मार्च 2020 तक पूर्ण कर लिये जायेंगे। मुख्यमंत्री ने कहा कि देश का सबसे बड़ा मोटर केबल पुल डोबरा चांटी का कार्य पूर्ण हो चुका है। इस पुल के लोकार्पण के लिए उन्होंने प्रधानमंत्री को आमंत्रित किया।
राज्य सरकार द्वारा किये जा रहे प्रयासों पर संतोष व्यक्त करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि प्रदेश में वित्तीय संसाधन बढ़ाने के लिए जीएसटी कलेक्शन की दिशा में विशेष प्रयास किये जायें। मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री को जानकारी दी कि उत्तराखण्ड में इंवेस्टर्स समिट 2018 के बाद अभी तक 19 हजार करोड़ रूपए के निवेश की ग्राउडिंग हो चुकी है। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने 300 मेगावाट की लखवाड़ विद्युत परियोजना की भारत सरकार से मंजूरी हेतु अनुरोध किया, साथ ही यमुना की अविरलता एवं प्रवाह के सम्बन्ध में भी चर्चा हुई।
मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री को बताया कि नीति आयोग द्वारा वर्ष 2019 में दी गयी गवर्नेंस इंडेक्स में उत्तराखण्ड को अच्छी रैंकिंग मिली है। कामर्स एवं इंडस्ट्री के क्षेत्र में उत्तराखण्ड को हिमालयी राज्यों में प्रथम व देश में 9 वीं रैंक मिली है, मानव संसाधन विकास में हिमालयी राज्यों में द्वितीय एवं देश में 6वीं रैंक मिली है। पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर में हिमालयी राज्यों में प्रथम एवं देश में 10वीं रैंक मिली है, ईकॉनामिक गवर्नेंस में हिमालयी राज्यों में प्रथम एवं देश में द्वितीय रैंक मिली है, जबकि नीति आयोग की समग्र रैंकिंग में उत्तराखण्ड को हिमालयी राज्यों में द्वितीय एवं देश में 10वां स्थान मिला है। मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री श्री मोदी को ऑल वेदर रोड एवं ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल लाइन की कार्य प्रगति की जानकारी भी दी, जिस पर प्रधानमंत्री ने संतोष व्यक्त किया।

कोल्ड रिकाॅर्ड बनने के आसार, लगातार बारिश जारी

राज्य मौसम विज्ञान केंद्र ने नैनीताल, ऊधमसिंह नगर, हरिद्वार, देहरादून और पौड़ी में बारिश के साथ ओलावृष्टि की संभावना जताई है। वहीं राजधानी देहरादून सहित कई इलाकों में रुक-रुक कर बारिश जारी है। रुद्रप्रयाग में रातभर से हो रही रुकरुक कर बारिश हो रही है। केदारनाथ में लगभग 6 फीट तक नई बर्फ गिर चुकी है। यहां पहले से पांच फीट बर्फ मौजूद है। तुंगनाथ में 6 फीट और चोपता में 5 फीट तक बर्फ गिर चुकी है। जनपद के गौंडार, तोषी, चैमासी, चिलौण्ड, जालमल्ला, ब्युखी, त्रियुगीनारायण और गौरीकुंड गांव बर्फ से लकदक हैं।
टिहरी जिले में रात भर से बारिश का सिलसिला बुधवार की सुबह भी जारी रहा। यहां ऊंचाई वाले क्षेत्रों में बर्फबारी होने से कड़ाके की ठंड बढ़ गई है। उत्तरकाशी जिले के राष्ट्रीय राज्य मार्ग गंगोत्री गंगनानी से ऊपर बर्फबारी के कारण बाधित है तथा मार्ग खोलने का कार्य जारी है। यमुनोत्री राष्ट्रीय राजमार्ग राड़ी टॉप, सुवाखोली और फूलचट्टी के पास बर्फबारी के कारण बाधित है। बागेश्वर जिले में कपकोट के अन्तर्गत बदियाकोट क्षेत्र में वाछम, तीख, खाती, सोराग, कालू, किलपारा, कुंवारी, डौला, बोरबलड़ा में लगभग 2 फीट बर्फबारी हो चुकी है।
मौसम विभाग के निदेशक बिक्रम सिंह ने बताया कि बुधवार को दिनभर ऐसा ही मौसम रहेगा। बृहस्पतिवार को हल्की राहत के आसार हैं। उन्होंने बताया कि फिलहाल पहाड़ों में बर्फबारी और रात को पाला पड़ने से हाड़ कंपाने वाली ठंड होगी। जबकि मैदानी इलाकों में शीतलहर चलेगी। मौसम विभाग के अनुसार नौ जनवरी को भी कुछ स्थानों पर शीत से तीक्षण दिवस हो सकता है। 10 और 11 जनवरी को हरिद्वार और ऊधमसिंह नगर में घना कोहरा छाया रहेगा।
केंद्र की ओर से राज्य सरकार को सलाह दी गई है कि आठ जनवरी को अधिक बर्फबारी के कारण दो हजार मीटर या इससे अधिक ऊंचाई वाले क्षेत्रों में सड़कों के अवरुद्ध होने की आशंका है। बर्फबारी से पर्वतीय क्षेत्र की सड़कों पर फिसलन की स्थिति हो सकती है। यात्रियों और पर्यटकों को सतर्क रहने और राज्य सरकार के अधिकारियों के साथ समन्वय बनाने की सलाह दी गई है।मंगलवार को मसूरी में भी दिनभर बारिश होती रही। पर्यटन स्थल धनोल्टी में बारिश के बीच हल्की बर्फबारी हुई।
वहीं, उत्तरकाशी जिले में यमुनोत्री और गंगोत्री सहित समुद्र तट से दो हजार मीटर की ऊंचाई पर स्थित करीब 100 गांव बर्फ से ढक गए हैं। यमुनोत्री और गंगोत्री हाईवे समेत करीब आधा दर्जन सड़कें बर्फ से बंद हो गई है। चमोली जिले में करीब 80 गांवों में बर्फ की सफेद चादर बिछ गई है। पैदल रास्ते और पानी के स्रोत भी जम गए हैं। मौसम के बदले मिजाज के बीच जौनसार बावर की ऊंची चोटियां बर्फ की सफेद चादर से ढक गईं। लोखंडी, देववन, खंडबा, व्यास शिखर, मुंडाली, मोयला टॉप समेत कई ऊंची चोटियों पर छह इंच से एक फिट तक बर्फबारी हुई।
मौसम लगातार नया रिकॉर्ड बना रहा है। पिछले 12 वर्षों में पहली बार जनवरी 2020 में छह और सात जनवरी को बदरा बरसे। बारिश के चलते अधिकतम तापमान भी दो डिग्री सेल्सियस गिर गया। मंगलवार की सुबह से ही बादलों ने आसमान में डेरा डाल रखा था। सुबह से बूंदाबांदी हो रही थी। शाम को भी बारिश हुई।
मौसम की खराबी के कारण नैनीसैनी एयरपोर्ट से मंगलवार को सभी उड़ानें रद्द कर दी गईं। विजिबिलिटी नहीं होने से देहरादून से विमान पिथौरागढ़ नहीं आ सका। यात्रियों को घंटों इंतजार के बाद वापस लौटना पड़ा। नैनीसैनी के लिए पहली फ्लाइट देहरादून से आती है।

सर्वे ऑफ़ इंडिया के सहयोग से चकबंदी में मिलेगी मदद

उत्तराखंड के पर्वतीय जिलों में कृषि भूमि की चकबंदी के लिए सरकार थ्री डी मैपिंग कराने जा रही है। इससे कृषि भूमि के खसरा नंबर की वास्तविक स्थिति का पता लग सकेगा। राजस्व विभाग सर्वे ऑफ इंडिया के माध्यम से थ्री डी मैप तैयार करवा रहा है। पहाड़ों में चकबंदी न होने के कारण सरकार की अनुबंध खेती की योजना परवान नही चढ़ पा रही है। पौड़ी जनपद के पांच गांवों में भी अभी तक चकबंदी नहीं हो पाई है। अब निर्णय लिया गया है कि इन गांवों में ड्रोन के जरिये एरियल सर्वे कराया जाएगा।
पर्वतीय क्षेत्रों में बिखरी कृषि जोत होने से किसानों को मेहनत ज्यादा करनी पड़ती है और खेती से मुनाफा कम होने के चलते लोगों का कृषि से रुझान कम हो रहा है। गौरतलब है कि सरकार ने पहाड़ों के लिए आंशिक और स्वैच्छिक चकबंदी को कानूनी रूप से मान्य किया है। लेकिन अभी तक पर्वतीय क्षेत्रों में एक भी गांव में चकबंदी नहीं हो पाई है। सरकार ने पौड़ी जनपद के पांच गांवों से आंशिक व स्वैच्छिक चकबंदी की शुरुआत की है।
इनमें मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत के गांव खैरासैंण, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का गांव पंचूर, कृषि मंत्री सुबोध उनियाल का गांव औणी समेत दो अन्य गांव शामिल हैं। इन गांवों में कृषि भूमि अभिलेखों का डाटा तैयार कर लिया है। अब ड्रोन से एरियल सर्वे किया जाएगा। प्रदेश में भूमि बंदोबस्त न होने के कारण चकबंदी करने में सबसे बड़ी समस्या आ रही है। एक ही जमीन के गोल खाते में कई हिस्सेदार हैं, लेकिन उन्हें यह पता नहीं है कि उनकी जमीन कहां पर है। अब सरकार चकबंदी को बढ़ावा देने के लिए सर्वे ऑफ इंडिया के माध्यम से पर्वतीय क्षेत्रों में थ्री डी मैपिंग करेगी।
वहीं, हरिद्वार और ऊधमसिंह नगर जनपद में अनिवार्य चकबंदी की प्रक्रिया चल रही है। जिसमें हरिद्वार में 108 और ऊधमसिंह नगर में 50 गांव शामिल हैं। जबकि पर्वतीय जनपद पौड़ी के मात्र पांच गांवों में चकबंदी हो रही है। मैदानी जनपदों की तुलना में पहाड़ों में चकबंदी करना मुश्किल है।
अपर सचिव एवं आयुक्त, चकबंदी, बीएम मिश्र ने बताया कि पर्वतीय क्षेत्रों में चकबंदी के लिए सर्वे ऑफ इंडिया के माध्यम से थ्री डी मैप तैयार किया जाएगा। इससे पहाड़ों में गोल खातों व बिखरी कृषि जोत की वास्तविक स्थिति सामने आने से चकबंदी में आसानी होगी।

कई विस अध्यक्षों ने सदस्यों के दल बदल पर जताई चिंता

सदस्यों के दल बदल पर विधानसभा अध्यक्षों के फैसले को न्यायालयों से मिल रही चुनौती से विधायिका चिंतित है। सवाल साख पर खड़ा होने लगा है, लेकिन इसका हल जल्द निकलता नहीं दिख रहा है। देहरादून में चल रहे दो दिवसीय सम्मेलन में कई पीठासीन अधिकारी इसका फैसला राजनीतिक दल पर छोड़ देने के पक्ष में नहीं दिखे। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला द्वारा गठित समिति इस पर अगले वर्ष लखनऊ की बैठक में अपने सुझाव देगी।
संविधान की दसवीं अनुसूची और अध्यक्ष की भूमिका विषयक परिचर्चा में लोकसभा अध्यक्ष ने आग्रह करते हुए कहा कि दल बदल पर अध्यक्ष ऐसा निर्णायक और निष्पक्ष फैसला लें, जिस पर कोई सवाल नहीं उठे। अगर न्यायपालिका निष्पक्षता पर सवाल करने लगे, तो यह हम सब के लिए चिंता की बात है। बिहार विधानसभा के अध्यक्ष विजय चैधरी ने इस पर प्रस्ताव रखा, जिस पर व्यापक चर्चा हुई। विजय चैधरी ने कहा कि संविधान की 10 वीं अनुसूची में एक बार फिर सुधार की जरूरत है। इसमें अभी तक यह स्पष्ट नहीं है कि अध्यक्ष को कितने दिनों में इस पर फैसला लेना है।
ऐसे में इसके दुरुपयोग के मामले सामने आते हैं। इसी तरह इसे भी स्पष्ट करने की जरूरत है कि पार्टी के व्हिप के खिलाफ पड़े मत का क्या होगा, जिसे अभी तक मान्य किया जाता है। इसे अमान्य करने से इस समस्या का समाधान हो जाएगा। वैसे, कई विधानसभा अध्यक्ष सदस्यों द्वारा इस्तीफा देकर दूसरी पार्टी को समर्थन देने के नए तरीके पर चिंतित दिखे। कर्नाटक के हाल के मामले का जिक्र करते हुए राजस्थान के विधानसभा अध्यक्ष सीपी जोशी ने दल बदल का निर्णय उसी राजनीतिक दल पर डालने की पैरोकारी की, जिसके टिकट पर वह जीत कर आए हैं। उन्होंने तर्क दिया कि पार्टी के चिह्न, विचारधारा और घोषणापत्र पर जनप्रतिनिधियों का चुनाव होता है। मूलतः देश दल आधारित लोकतंत्र है। ऐसे में पार्टी के सुझाव पर चुनाव आयोग को इस पर फैसला लेना चाहिए। अध्यक्ष को विधायिका के सकुशल संचालन तक की ही भूमिका होनी चाहिए। वहीं दिल्ली विधानसभा के अध्यक्ष रामनिवास गोयल ने दल बदल को भी अपराध श्रेणी में डालने की वकालत करते हुए कहा कि ऐसे प्रविधान होने चाहिए, जिसमें पार्टी बदलने वाले को एक निश्चित अवधि तक चुनाव लडने पर पाबंदी लगा दी जाए। इसके साथ उन्होंने सभी विधानसभाओं के रूलबुक को एक समान रखने की जरूरत बताई।

शीतलहर की चपेट में उत्तर भारत, कई जिलों में ठंड से मौत की खबर

पहाड़ों में लगातार हो रही बर्फबारी के चलते उत्तरी भारत शीतलहर की चपेट में है। ठंड से अब तक देशभर के विभिन्न जिलों में 25 लोगों की जान चली गई।
इनमें चंदौली में 6, हमीरपुर में 4, बांदा, बलिया व गाजीपुर में 2-2, वाराणसी, भदोही, जौनपुर, आजमगढ़, मऊ, चित्रकूट, महोबा, फतेहपुर व हाथरस में एक-एक की मौत हुई है। प्रदेश में बागपत में न्यूनतम तापमान 4.9, मुजफ्फनरगर में 5 और सहारनपुर 6 व वाराणसी में 8.4 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया।
फिलहाल ठंड से राहत के कोई आसार नहीं नजर आ रहे हैं। पूर्वांचल में बीते 24 घंटे में 15 लोगों की जान चली गई। चंदौली जिले में मजनू (5), इंद्रनाथ सिंह चैहान (62), लक्ष्मण यादव (65), रज्जन मौर्या (60), रामवृक्ष मौर्य (60) और वीरेंद्र माली (55) की ठंड से मौत हो गई।
गाजीपुर में चमेला देवी (68) व रेखा (6) और बलिया में शिव शंकर यादव उर्फ पेटू (70), उपेंद्र यादव (48) की मौत हुई है। इसके अलावा वाराणसी में सिताबुन (75), भदोही में राजनारायण गुप्ता उर्फ नबी (53), जौनपुर में सालिक राम (50) और आजमगढ़ में बालचंद (58) तथा मऊ में एक अज्ञात वृद्ध की भी मौत हो गई।
बुंदेलखंड के महोबा में रूपरानी (70), हमीरपुर में समर (7), गजराज यादव (75), फूलमती (85) व सुखदेई सिंह (90) की भी ठंड से जान चली गई। चित्रकूट में जगदीश प्रसाद, बांदा में दुर्गेश लोध (38) और झंडू (90) की मौत हुई है। उधर, फतेहपुर जिले के असोथर क्षेत्र के बेसढ़ी गांव निवासी सेवानिवृत्त शिक्षक राजविभीषण राजपूत व हाथरस में अलीगढ़ रोड स्थित गांव तमनागढ़ी में एक बुजुर्ग की ठंड से मौत हो गई।
पश्चिमी विक्षोभ के सक्रिय होते ही बृहस्पतिवार को पहाड़ों पर फिर बर्फबारी का दौर शुरू हो गया जिससे उत्तर भारत में ठंड का प्रकोप बढ़ गया। उत्तराखंड के केदारनाथ, बदरीनाथ, तुंगनाथ, हेमकुंड साहिब, मद्महेश्वर समेत ऊंचाई वाले स्थानों व हिमाचल के रोहतांग और किन्नौर में हिमपात हुआ है। वहीं जम्मू लगातार तीसरे दिन धुंध की चपेट में रहा, शुक्रवार को जम्मू-कश्मीर में कई जगहों पर हल्की बर्फबारी या बारिश होने की संभावना है।
उत्तराखंड के केदारनाथ धाम में बृहस्पतिवार दोपहर 12 बजे के बाद से हल्की बर्फबारी शुरू हो गई थी, जो शाम तक जारी रही। यहां पहले से छह फुट से अधिक बर्फ मौजूद है। उधर, चमोली जिले में 12-13 दिसंबर को हुई बर्फबारी के चलते अभी भी करीब 90 गांवों में विद्युत आपूर्ति ठप पड़ी है। वहीं सीमा सड़क संगठन (बीआरओ) ने बृहस्पतिवार को नीती और माणा घाटियों को जोड़ने वाली सड़कों को वाहनों की आवाजाही के लिए सुचारु कर दिया है।
हिमाचल में ताजा बर्फबारी के चलते प्रशासन ने सैलानियों को सोलंगनाला जाने से रोक दिया है। रोहतांग दर्रा के साथ कुल्लू, लाहौल और किन्नौर की ऊंची पहाड़ियों में बृहस्पतिवार को रुक-रुककर बर्फबारी का दौर जारी रहा। खराब मौसम की वजह से गगल हवाई अड्डे में जहाज भी नहीं उतर पाए। वहीं हिमाचल में इस बार भी व्हाइट क्रिसमस की उम्मीद टूट गई है। मौसम विज्ञान केंद्र शिमला ने 22 से 25 दिसंबर तक पूरे प्रदेश में मौसम साफ रहने का पूर्वानुमान जताया है।
रिलकोट में बर्फबारी में फंसे जवान-पोर्टर सुरक्षित निकाले जाएंगेरू मुनस्यारी के रिलकोट में बर्फबारी के बीच फंसे आईटीबीपी के आठ जवानों और सात पोर्टरों को सुरक्षित निकालने की कोशिश शुरू हो गई हैं। आईटीबीपी ने रेलकोट में हैलीपेड तैयार कर लिया है। साथ ही एयरफोर्स अधिकारियों से फंसे जवानों और पोर्टरों को निकालने के लिए पत्र लिखा गया है।

सीएए को लेकर राज्य पुलिस भी सतर्क, सीएम ने दिए निर्देश

नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) को लेकर देश भर में चल रहे विरोध प्रदर्शन को देखते हुए राज्य में भी अलर्ट जारी किया गया है। मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने स्वयं हालात की जानकारी लेने के लिए पुलिस व गृह विभाग के आला अधिकारियों के साथ बैठक की। इस दौरान उन्होंने प्रदेश में अराजकता फैलाने का प्रयास करने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई के निर्देश दिए।
इस समय देश के विभिन्न शहरों में सीएए को लेकर विरोध प्रदर्शन चल रहे हैं। कई स्थानों पर हिंसक झड़पें भी हुई हैं। इसे देखते हुए केंद्र सरकार ने सभी राज्यों को एडवाइजरी जारी कर अपने यहां कानून-व्यवस्था पर नजर रखने को कहा है। इसी कड़ी में सोमवार को मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने पुलिस व गृह विभाग के अधिकारियों के साथ बैठक की। बैठक में उन्होंने पुलिस व खुफिया विभाग को पूरी स्थिति पर नजर रखने के साथ ही गड़बड़ी के लिहाज से संवेदनशील क्षेत्रों में गश्त बढ़ाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि कॉलेजों में शांति व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।
मीडिया से अनौपचारिक बातचीत में मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में लगातार नजर रखी जा रही है। अधिकारियों से कहा गया है कि शांति व्यवस्था बनी रहनी चाहिए। जो अराजकता फैलाना चाहते हैं उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने को कहा गया है। पुलिस महानिदेशक अशोक कुमार ने कहा कि प्रदेश को अलर्ट पर रखा गया है। उन्होंने सभी प्रदेशवासियों से शांति और सौहार्द बनाए रखने की भी अपील की। बैठक में महानिदेशक अनिल कुमार रतूड़ी और सचिव गृह नितेश झा भी मौजूद थे।
वहीं, मानव संसाधन विकास मंत्री व सांसद हरिद्वार डॉ. रमेश पोखरियाल निशंक ने ट्वीट कर सभी विद्यार्थियों से ङ्क्षहसा से दूर रहने और अपने परिसर में शांति बनाए रखने के अपील की है। इसके साथ ही अफवाहों पर ध्यान न देने और शांति व भाईचारे को आगे बढ़ाने को कहा है। उन्होंने लिखा है कि कोई भी ऐसा कार्य न करें जो राष्ट्र हित के विरुद्ध हो।

बिना मिलीभगत के संभव नही ई-वे बिल का 8500 करोड़ का फर्जीवाड़ा

जीएसटी में पंजीयन और ई-वे बिल की आसान प्रक्रिया का फायदा उठाकर उत्तराखंड में 8500 करोड़ रुपये मूल्य के फर्जी ई-वे बिल बनाने का मामला सोमवार को सामने आया। मात्र दो माह के अंतराल में यह बिल बनाए गए और इसके लिए प्रदेश में 70 फर्जी फर्मों को कागजों में उत्तराखंड में संचालित दिखाया गया। दो माह की मशक्कत के बाद पकड़ में आए इस मामले का खुलासा राज्य कर विभाग ने सोमवार को किया।
सोमवार को सचिवालय में आयोजित प्रेस वार्ता में राज्य कर आयुक्त सौजन्या ने बताया कि विभाग को इस बड़े फर्जीवाड़े की भनक करीब दो माह पूर्व लगी। जीएसटी में पंजीयन और ई-वे बिल के सरल तरीका का फायदा उठाकर 70 फर्जी फर्मों को उत्तराखंड के भिन्न हिस्सों में किराए पर लिए भवनों में दिखाया गया।
इन फर्मों में से 26 ने चप्पल की बिक्री अन्य राज्यों आंध्र प्रदेश, राजस्थान, तमिलनाडु और महाराष्ट्र में दिखाई। इसी के आधार पर 34 फर्मों ने 8500 करोड़ रुपये मूल्य के 12204 ई-वे बिल ऑनलाइन जनरेट किए। इसके जरिए करीब 1200 करोड़ रुपये से लेकर 8500 करोड़ रुपये तक का मूल्य वर्धन उत्पादों में दिखाया।
बड़ी संख्या में भारी मूल्य के ई-वे बिल सामने आने पर राज्य कर विभाग के अधिकारियों को शक हुआ और इसकी जांच की गई। राज्य कर विभाग की 55 टीमों ने ऊधम सिंह नगर और देहरादून में 70 फर्मों के ठिकानों पर दबिश दी। इन फर्मों ने उत्तराखंड में किराए के स्थानों से कारोबार किया जाना दिखाया था। छापेमारी में एक भी किरायानामा सही नहीं पाया गया और न ही कहीं उत्पादन होता मिला। साफ था कि सिर्फ कागजों में ही यह व्यापार किया जा रहा था।
सौजन्या के मुताबिक 80 लोगों ने 21 मोबाइल नंबर और ई मेल आईडी का उपयोग कर दो-दो की साझेदारी में 70 फर्म पंजीकृत कीं। पंजीयन लेते समय सभी साझीदारों ने स्वयं को हरियाणा या दिल्ली का रहने वाला बताया और उत्तराखंड में किराए पर व्यापार स्थल को दिखाते हुए पंजीयन हासिल किया। पंजीयन लेते समय बिजली के बिलों और किराएनामे का उपयोग किया गया और यह सब फर्जी पाया गया। इसमें करीब 1455 करोड़ रुपये के कर अपवंचन का मामला बन रहा है।
12 उपायुक्त, 55 अपर आयुक्त, 55 स्टेट टैक्स अधिकारी और 55 स्टेट टैक्स अधिकारी इस मुहिम में शामिल हैं। इसके अलावा मुख्यालय के दस अधिकारियों की कोर टीम भी इसमें शामिल रही। ये सभी अधिकारी पिछले 15 दिन से जांच में जुटे हुए थे। राज्य कर आयुक्त सौजन्या के मुताबिक जांच अभी जारी है। इन अधिकारियों ने सोमवार को करीब 55 स्थानों पर अलग-अलग छापेमारी की। राज्य कर आयुक्त, सौजन्या ने बताया कि इस तरह के फर्जी मामलों के लिए उत्तराखंड को किसी भी तरह से सेफ हेवन नहीं बनने दिया जाएगा। इस तरह के फर्जीवाड़ों की रोकथाम के लिए राज्य कर विभाग लगातार काम करता रहेगा।