प्रगति विहार में पार्षद राकेश मियां ने बांटे गीला और सूखा कूड़ादान

ऋषिकेश नगर निगम के वार्ड संख्या 12 प्रगति विहार के पार्षद राकेश सिंह मियां ने स्वच्छता अभियान के तहत 300 कूड़ेदान का वितरण किया और अपने वार्ड के जागरूक जनता से आग्रह भी किया गया की पूर्व की भांति सूखा और गीला कूड़ा अलग दें।

उन्होंने कहा कि इससे निगम गीले कूड़े की खाद व सूखे कूड़े का उपयोग अन्य जगह पर कर सकेंगे। कहा कि मेयर अनिता ममगाईं व निगम प्रशासन के सहयोग से अपने शहर व वार्ड को स्वच्छ बनाना है। उन्होंने वार्ड में प्रगति विहार, शैल विहार, तहसील कॉलोनी, बीएसएनल कॉलोनी, हाइडल कॉलोनी, कोर्ट कंपाउंड, अंकुर गैस एजेंसी क्षेत्र में लगभग 300 कूड़ेदान वितरित किए। इस मौके पर निगम सफाई निरीक्षक प्रशांत कुकरेती, स्वच्छता समिति प्रगति विहार के अध्यक्ष देवेश्वर प्रसाद रतूड़ी, सचिव आरपी नवानी, कोषाध्यक्ष प्रमोद कपूरवान, राजेश नौटियाल, शेर सिंह रावत, धन सिंह बुटोला, अलेल सिंह भंडारी, हिम्मत सिंह मियां, सहदेव राठौर, संजय नेगी, अजय बदानी, सरोजिनी थपलियाल, दीपा कपूरवान, सरिता पैन्यूली, कुंवर सिंह बिष्ट आदि उपस्थित रहे।

सीएम ने डोईवाला के लोगों की सुनी समस्याएं, अधिकारियों को निराकरण के दिए निर्देश

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने लच्छीवाला वन विभाग गृह डोईवाला में क्षेत्र के ग्राम प्रधानों, क्षेत्र पंचायत सदस्यों, पार्षदों के साथ बड़ी संख्या में आये कार्यकताओं से भेंट कर उनकी समस्याये सुनी तथा उनके निराकरण के निर्देश सम्बन्धित अधिकारियों को दिये।

मुख्यमंत्री ने कहा कि सूर्यधार झील का निर्माण शीघ्र पूरा होगा, इससे क्षेत्र की पेयजल व सिंचाई की समस्याओं का समाधान होगा तथा वर्ष भर पानी की उपलब्धता रहेगी इससे बिजली की भी बचत होगी। उन्होंने कहा कि डोईवाला क्षेत्र की सड़को का कार्य शीघ्र पूर्ण किया जायेगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि जलजीवन मिशन के तहत प्रदेश में आम जनता के व्यापक हित में एक रूपये में पानी का कनेक्शन उपलब्ध कराया जायेगा। देहरादून जनपद को दिसम्बर अन्त तक नल से पेयजल उपलब्ध कराया जायेगा। उन्होंने कहा कि मार्च, 21 तक 10 लाख तथा मार्च, 22 तक 14 लाख परिवारों को गुणवत्ता युक्त पेयजल उपलब्ध कराया जायेगा। हर घर नल योजना की प्रतिदिन मॉनिटरिंग की जा रही है। मुख्यमंत्री ने कहा कि रानी पोखरी के 11 गावों की समस्याओं के समाधान तथा अवस्थापना सुविधाओं के विकास पर 01 अरब 3 करोड़ रूपये व्यय किये जा रहे हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि सभी जिलाधिकारियों को जिला योजना धनराशि से 40 प्रतिशत धनराशि पशुपालन, कृषि, मत्स्य, मौन पालन आदि स्वरोजगार योजनाओं में खर्च करने के निर्देश दिए गए हैं। उद्यमियों को ऋण लेने में समस्या न आए इसके लिए बैंकों से लगातार समन्वय किया जा रहा है। ताकि स्वरोजगार की दिशा में अधिक से अधिक उद्यमी अपनी आजीविका को सुदृढ़ कर सकें। पर्यटन के क्षेत्र में दस हजार मोटर बाइक की स्वीकृति दी गई है जिस पर 2 साल तक का ब्याज राज्य सरकार द्वारा वहन किया जाएगा। पर्यटन के क्षेत्र में ही वीर चन्द्र सिंह गढ़वाली पर्यटन स्वरोजगार योजना मे बस क्रय हेतु 50 प्रतिशत का अनुदान दिया जा रहा है।

उन्होंने कहा कि स्वरोजगार की दिशा में ग्रीन एनर्जी क्षेत्र में निवेश कर उद्यम स्थापित करने के लिए राज्य सरकार विभिन्न योजनाओं के तहत सहायता कर रही है। कोई भी व्यक्ति सोलर प्लांट, व पिरूल प्लांट की स्थापना कर सकता है। इसके अन्तर्गत 25 कि0वा0 के प्लान्ट से प्रतिमाह 12 से 15 हजार की आय अर्जित की जा सकती है। एक किलो पिरूल के लिये 3.50 रूपये का भुगतान सरकार द्वारा किया जा रहा है। इसकी 8-10 योजनाओं पर कार्य आरम्भ हो चुका है।

इस अवसर पर दायित्वधारी करन वोरा, घनानन्द, मुख्यमंत्री के विशेष सचिव डॉ. पराग मधुकर धकाते, जिलाधिकारी देहरादून आशीष श्रीवास्तव, अपर सचिव सुरेश चन्द्र जोशी आदि उपस्थित थे।

हाईटेक शौचालय का लाभ ग्रामीणों को मिलेगाः मेयर अनिता

मेयर अनिता ममगाई ने कहा कि प्रधानमंत्री के स्वच्छ भारत मिशन के सपने को साकार कराने के लिए शौचालयों का निर्माण कराया जाना बेहद आवश्यक है। नगर निगम प्रशासन इस पर फोकस बनाकर जगह-जगह अत्याधुनिक शौचालयों का निर्माण करा रहा है। इसी क्रम में मेयर अनिता ममगाईं ने ग्रामीण क्षेत्र अमित ग्राम में हाईटेक शौचालय का शिलान्यास किया।

मौके पर क्षेत्र की जनता ने मेयर अनिता का जोरदार स्वागत और अभिनंदन भी किया। मेयर ने कहा कि नगर निगम के लिए ग्रामीण एवं शहरी वार्ड दोनों आंखों के समान बराबर है इसी को ध्यान में रखकर विकास कार्य भी दोनों जगह समान रूप से करवाए जा रहे हैं। उन्होंने बताया अमित ग्राम का शौचालय पूरी तरह से हाईटेक है। इसमें फाइव स्टार होटल की तर्ज पर एक्सटीरियर और इंटीरियर डिजाइन होंगे। सेंसर बेस्ड यूरिनल सिस्टम होगा। शौचालय 24 घंटे सातों दिन खुला रहेगा और हेल्पर वहां बैठा होगा। महापौर के अनुसार स्वच्छता का संदेश स्क्रीन के माध्यम से शौचालय में चलता रहेगा। जिसमें व्यवसायिक एडवर्टाइजमेंट देने पर निगम की आय में भी बढ़ावा होगा।

बताया कि स्वच्छ भारत मिशन, 14वें वित्त आयोग की मदद व शहरी विकास मंत्रालय के सहयोग से 30 साल की मेंटेनेंस के एग्रीमेंट के साथ अत्याधुनिक शौचालयों का निर्माण कराया जा रहा है जिसमें कार्यदाई संस्था के साथ शौचालयों के रखरखाव का करार किया गया है।

मौके पर सहायक अभियंता आनंद मिश्रवाण, जेई भारत जोशी, स्थानीय पार्षद वीरेंद्र रमोला, विपिन पंत, विजेंद्र मोगा, विजय बड़ोनी, लक्ष्मी रावत, कमलेश जैन, राकेश मियां, ग्रामीण जन संपर्क अधिकारी प्रदीप धस्माना, सतीश कौशिक, अनुसूया प्रसाद बंगवाल, चंद्र सिंह बिष्ट, तारा दत्त सेमवाल, पुष्पा मित्तल, सत्य प्रकाश ममगाई, सुनील उनियाल, मदन कोठारी, अनिकेत गुप्ता, विकास सेमवाल, गौरव केन्थुला, रूप रमोला, रविंद शर्मा, मोर सिंह रावत, अजय आदि मौजूद रहे।

प्रशासन ने पटाखा की कच्ची दुकानें बाजारों में लगाने से किया इंकार

इस वर्ष ऋषिकेश के बाजारों में पटाखा की कच्ची दुकानें नहीं लगेंगी। इसके लिए खाली जगह चिन्हित की जाएगी। स्थानीय प्रशासन ने इसके लिए बकायदा व्यापारियों के साथ बैठक की। मगर, व्यापारी बाजार में ही दुकान लगाने को अड़े रहे। बैठक में प्रशासन ने दुकान लगाने देने के अनुरोध को ना कहा है।

नगर निगम के स्वर्ण जयंती सभागार में आगामी दीपावली के त्यौहार को देखते हुए पटाखों के सिलसिले में नगर निगम, पुलिस प्रशासन और पटाखा व्यापारियों के बीच बैठक हुई। बैठक की अध्यक्षता उप जिलाधिकारी वरुण चैधरी ने की। व्यापारियों ने मांग करते हुए कहा कि पटाखा बेचने की अनुमति शासन-प्रशासन बाजार में दें लेकिन प्रशासन ने गाइडलाइन का हवाला देकर उनको बताया कि इस बार बाजार के अंदर पटाखा बेचने की अनुमति नहीं दे सकते। जिनकी पक्की दुकानें है वही दुकान के अंदर से पटाखा बेच सकेंगे।

मगर, चारपाई में या रेडी, ठेली बेंच लगाकर पटाखा नहीं बेचने दिया जाएगा। प्रशासन ने अपनी तरफ से कुछ जगह चिन्हित कर बताया कि इन जगहों पर व्यापारी पटाखा बेच सकते है। इनमें आईडीपीएल मैदान, भरत मंदिर मैदान है इसके अलावा रायवाला और हरिपुर कला, रानीपोखरी जैसे अन्य जगह है। मगर, व्यापारियों का कहना था कि ग्राहक बाजार से बाहर नहीं जाता है और पटाखा खरीदने के लिए वह बाजार में ही आता है। बैठक के अंत में व्यापारियों ने फैसला लिया कि वे एक बैठक आपस में करेंगे। उसके बाद प्रशासन को अपना फैसला बताएंगे। अगर कोई जगह चिन्हित होगी, तो वह भी बताएंगे।

बैठक में सीओ भूपेंद्र सिंह धौनी और कोतवाल रितेश शाह व सहायक नगर आयुक्त विनोद लाल वह ऋषिकेश के पटाखा व्यापारी मौजूद थे।

सीएम ने कहा-शहरी निकायों के संसाधनों में वृद्धि के प्रयास करने होंगे

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने मुख्यमंत्री आवास में कैबिनेट मंत्री मदन कौशिक की उपस्थिति में शहरी विकास आवास आदि से सम्बन्धित विभागों की गहनता से समीक्षा की। उन्होंने शहरी विकास एवं आवास से सम्बन्धित राज्य एवं केन्द्र पोषित योजनाओं के माध्यम से संचालित विभिन्न योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन के निर्देश दिये। उन्होंने कहा कि योजनाओं का समय पर क्रियान्वयन होने से उसका लाभ लाभार्थी को समय पर उपलब्ध होने के साथ ही योजना की लागत में भी अनावश्यक वृद्धि नहीं होती है।
मुख्यमंत्री ने स्वच्छ भारत मिशन, प्रधानमंत्री आवास योजना, दीनदयाल अंत्योदय योजना, अटल मिशन फॉर रिन्यूनिवेशन (अमृत योजना) के लिये निर्धारित लक्ष्यों की पूर्ति पर विशेष ध्यान देने को कहा। इसके साथ ही मुख्यमंत्री ने विश्व बैंक सहायतित सम्पत्तियों के रिकॉर्ड को डिजिटिलाइजेशन किये जाने, नगरों के जी.आई पम्पिंग व अन्य अवस्थापना विकास से सम्बन्धित योजनाओं को भी समय पर पूर्ण करने के निर्देश दिये।
मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री स्वनिधि योजना को प्रदेश के सभी 91 निकायों में प्रभावी ढंग से क्रियान्वित किये जाने के भी निर्देश दिये। इसके लिये वेडिंग कमीटियों के गठन के साथ ही लाभार्थियों का बैंक से ऋण उपलब्ध कराने में तेजी लाये जाने को कहा। इसके लिये उन्होंने जिलाधिकारियों को भी जिम्मेदारी सौंपे जाने को कहा।
मुख्यमंत्री ने पर्वतीय क्षेत्रों में बस अड्डों एवं पार्किंग निर्माण की योजनाओं में भी तेजी लाने को कहा। पर्वतीय क्षेत्रों के साथ ही पर्यटन स्थल नैनीताल व मसूरी आदि में स्मार्ट पार्किंग की दिशा में भी योजना बनाने के निर्देश मुख्यमंत्री ने दिये। इसके लिये निजी सहभागिता की दिशा में भी पहल करने को कहा। उन्होंने कहा कि इस प्रकार की योजनाओं पर लक्ष्य निर्धारित कर कार्य करने की जरूरत है। इस पर अधिकारी ध्यान दें।

मुख्यमंत्री ने निकायों के मास्टर प्लान तैयार करने पर भी ध्यान देने को कहा। इसके लिये धनराशि उपलब्ध करायी गई है। मास्टर प्लान एवं लोकल एरिया के डिटेल प्लानिंग से निकायों के विकास एवं अवस्थापना सुविधाओं के विकास में मदद मिलेगी। मुख्यमंत्री ने ऑन लाइन मैप एप्रूविंग सिस्टम को प्रभावी बनाये जाने के साथ ही इस सम्बन्ध में जो पोलिसी तैयार की जानी है उसका ड्राफ्ट आगामी कैबिनेट के समक्ष रखा जाय। उन्होंने विभिन्न प्राधिकरणों की समस्याओं के समाधान की दिशा में भी नीति निर्धारण की बात कही।
इस अवसर पर सचिव आवास शैलेश बगोली ने बताया कि उत्तराखण्ड एकीकृत शहरी विकास परियोजना के लिये एशियन विकास बैंक के माध्यम से 1875 करोड़ का वित्त पोषण किया गया है। प्रथम चरण में 900 करोड़ की डीपीआर एडीबी को प्रेषित की जा चुकी है। हल्द्वानी, रूड़की, कोटद्वार, नैनीताल व रामनगर में पेयजल एवं सीवरेज से सम्बन्धित मास्टर प्लानिंग पूर्ण की जा चुकी है। जबकि देहरादून से सम्बन्घित योजना गतिमान है। उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत 44680 ई.डब्लू.यू.एस. आवास में से 13180 आवास स्वीकृत हो चुके है। आवास नीति के अन्तर्गत प्राधिकरणों को निजी निर्माणकर्ताओं के 20330 आवास निर्माण के प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं। जबकि आवास विकास परिषद के स्तर पर 30,000 आवास बनाये जाने का प्रस्ताव है।
उन्होंने बताया कि अमृत योजना के तहत 593 करोड़ के सापेक्ष 360 करोड़ की स्वीकृति भारत सरकार से प्राप्त हो चुकी है तथा 151 कार्य संचालित है। प्रधानमंत्री स्वनिधि योजना के तहत 20939 लाभार्थी चिन्हित है जिसमें से 18324 को आईडेंटी कार्ड जारी किये जा चुके है।
देहरादून स्मार्ट सिटी के मुख्य कार्याधिकारी एवं जिलाधिकारी देहरादून आशीष श्रीवास्तव ने बताया कि स्मार्ट सिटी की कुल लागत 1407 करोड़ है जिसके सापेक्ष विभिन्न कार्यों की निविदा आमंत्रित कर कार्यादेश जारी किये जा चुके हैं। इसके अन्तर्गत स्मार्ट स्कूल, स्मार्ट रोड, पल्टन बाजार पेडस्ट्राइजेशन, वाटर सप्लाई आग्मेंटेशन, परेड ग्राउण्ड रेजुविनेशन, मोर्डन दून लाइब्रेरी, सीवरेज इन एबीडी एरिया आदि योजनाओं पर कार्य गतिमान है।
इस अवसर पर प्रभारी सचिव डॉ. रणजीत सिन्हा, विशेष सचिव मुख्यमंत्री डॉ पराग मधुकर धकाते, उपाध्यक्ष एमडीडीए रणवीर सिंह चैहान, अपर सचिव सुरेश जोशी, सचिव एमडीडीए गिरीश गुणवन्त सहित अन्य अधिकारी उपस्थित थे।

हाईकोर्ट के फैसले पर हैरानी जताई, कहा-समीक्षा करेंगे, फिलहाल अन्य कोई नही की कोई टिप्पणी

-विपक्षी खेमे में फैसला आने के बाद बची खलबली

आखिरकार देश की सर्वोच्च अदालत में सत्य की जीत हुई। उत्तराखंड के मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत के खिलाफ हाईकोर्ट के सीबीआई जांच कराने वाले आदेश ने हैरान जरूर किया था। मगर, सुप्रीम कोर्ट ने इस आदेश को रद्द करते हुए आश्चर्य जताया कि हाईकोर्ट ने ऐसा आदेश कैसे पारित किया? जबकि मुख्यमंत्री इस मामले में पक्षकार ही नहीं थे। उनके खिलाफ जांच की कोई मांग भी नहीं थी। सुप्रीम कोर्ट ने इसी बात को ध्यान में रखते हुए सीबीआई जांच के हाईकोर्ट के आदेश पर रोक लगा दी है, साथ ही सभी पक्षकारों को नोटिस जारी किए हैं। इनका जवाब दाखिल करने का चार सप्ताह का समय भी दिया है।

एससी में सीएम के वकील ने कहा, बेवजह नाम घसीटा गया
सुप्रीम कोर्ट में हाईकोर्ट के आदेश को चुनौती देते हुए मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत के वकील ने कहा कि राज्य की जनता ने उन्हें चुना है, राजनीतिक लाभ के लिए विवाद में उनका नाम बेवजह डाला गया है। उन्होंने कोर्ट में यह भी तर्क दिया कि हाईकोर्ट में उमेश शर्मा ने सीबीआई जांच जैसा कोई मांग नहीं की थी। उमेश शर्मा की याचिका में सिर्फ उसके खिलाफ देहरादून में दर्ज एफआइआर को रद्द करने की मांग की गई थी। इसके विपरीत हाईकोर्ट ने न सिर्फ उमेश के खिलाफ दर्ज एफआइआर रद्द करने का आदेश सुनाया बल्कि मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत के खिलाफ सीबीआई जांच करने का आदेश दे दिया। सीएम ने अपनी याचिका में लगाए गए आरोप को फर्जी और आधारहीन कहा।

मूल मुद्दा तो भटक गया…
दरअसल देहरादून के राजपुर थाने में पत्रकार उमेश शर्मा सहित अन्य के खिलाफ सेवानिवृत प्रोफेसर हरेंद्र सिंह रावत ने ब्लैकमेलिंग, दस्तावेजों की कूट रचना और गलत तरीके से बैंक खातों की जानकारी हासिल करने का मुकदमा दर्ज कराया था। उन्होंने आरोप लगाया था कि उमेश शर्मा ने सोशल मीडिया का दुरूपयोग किया और एक वीडियो डाली। इसमें प्रोफेसर रावत और उनकी पत्नी सविता रावत के खाते में नोटबंदी के दौरान झारखंड के अमृतेश चैहान की ओर से 25 लाख रुपये जमा करने की बात कही गई थी और यह रकम को त्रिवेंद्र सिंह रावत को देने को कहा गया था। इसके अलावा सविता रावत को मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत की सगी बहन बताया गया था। प्रोफेसर हरेंद्र सिंह ने सभी तथ्यों को झूठा बताया था।
बड़ा सवाल तो यह है कि कैसे हम दूसरे अनजान व्यक्ति की बैंक संबंधी डिटेल प्राप्त कर सकते है? आयकर विभाग के अलावा यह जानकारी बैंक भी अन्य किसी को नही देता है। मसलन यदि कोई आपराधिक मामला है तो बैंक जांच के दौरान पुलिस अथवा जांच एजेंसी को जानकारी मुहैया कराता है। इस मामले में देखे तो तथाकथित पत्रकार ना तो जांच एजेंसी है ना ही अधिकृत व्यक्ति। ऐसे में बैंकों की भूमिका भी संदिग्ध हो जाती है। सेवानिवृत प्रोफेसर हरेंद्र सिंह रावत की शिकायत पर तो अभी तक कोर्ट के द्वारा कार्रवाई भी नही की गई है?

व्यक्ति एक दलीलें दो….
देश के जाने माने वकील कपिल सिब्बल भी गजब के आदमी निकले। पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत के स्टिंग मामले में इन्ही वकील साहब ने कोर्ट को उमेश कुमार को ब्लेकमेलर बताया है। जबकि इस मामले में वकील साहब तथाकथित पत्रकार को ईमानदार बता रहे है। अन्य राज्यों में लंबित मुकदमें को लेकर उन्हें झूठा फंसाने की बात कह रहे है। वकील साहब पहले तय कर ले कि आप किस केस में सच बोल रहे है और किस केस में झूठ?

केस को हाईप्रोफाइल बनाने और सुर्खियां बटोरने की कोशिश…
तथाकिथत पत्रकार उमेश जे कुमार की और से इस मामले को हाईप्रोफाइल बनाने और सुर्खियां बटोरने के लिए इस्तेमाल करना प्रतीत हो रहा है। जानकार बताते है कि अपनी गर्दन बचाने के लिए हाईकोर्ट में केस का रुख मोड़ा गया है। वहीं, राज्य सरकार की ओर से पेश हुए वकील जानेमाने वकील कपिल सिब्बल और चालाक पत्रकार की चालो में उलझ गये। जिससे केस ने दूसरा ही रुख मोड़ लिया।

कथित पत्रकार की सीबीआई जांच मांग जोर पकड़ने लगी
सुप्रीम कोर्ट का फैसला आने के बाद सोशल मीडिया में कथित पत्रकार के खिलाफ सीबीआई जांच की मांग जोर पकड़ने लगी है। बेशुमार दौलत के मालिक और कथित तौर पर अन्य राज्यों में कई मुकदमों का सामना कर रहे पत्रकार को लेकर लोगों में नाराजगी दिखाई दे रही है। लोग ईमानदार मुख्यमंत्री पर लांछन लगाने को लेकर इसकी ही सीबीआई जांच कराने की मांग कर रहे है।

बौद्ध मठ में पहुंची बाल आयोग अध्यक्ष, पीड़ित बच्चों से पूछताछ पर प्रबंधन को लगाई फटकार

एक बौद्ध मठ में शिक्षा ले रहे नेपाली मूल के बच्चों को भोजन की शिकायत करना इतना महंगा पड़ गया। वहां के प्रबंधन ने इन बच्चों के साथ न सिर्फ अमानवीय व्यवहार किया बल्कि पांव के नाखून तक उखाड़ दिए। मामला देहरादून के थाना राजपुर क्षेत्र का है। 47 बच्चों के साथ हुई घटना के बाद से सात बच्चे लापता हो गए हैं। वहीं, बाल अधिकार संरक्षण आयोग की अध्यक्ष उषा नेगी ने मठ पहुंचकर पूछताछ की। पूछताछ के आधार पर आयोग की अध्यक्ष उषा नेगी ने मठ प्रबंधन को फटकार लगाई।

उधर, बच्चों के परिचितों ने नेपाल के मानवाधिकार आयोग से मदद की गुहार लगाई है।

निर्धन बच्चों की मदद करने पर हेमलता दीदी को नीरजा देवभूमि ट्रस्ट ने किया पुरस्कृत

टीबी से पीड़ित बच्चों के लिए प्रत्येक बृहस्पतिवार को पोषण आहार उपलब्ध कराने वाली हेमलता दीदी को नीरजा देवभूमि चैरिटेबल ट्रस्ट ने सम्मानित किया। राजकीय अस्पताल में आयोजित कार्यक्रम में हेमलता दीदी को ट्रस्ट की ओर से प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया गया। मौके पर टीबी रोग से ग्रस्त बच्चों को पोषण आहार की किट भी वितरित की गई।

ट्रस्ट की संस्थापक व पैरा ओलंपिक खिलाड़ी नीरजा गोयल ने कहा कि हेमलता दीदी कई वर्षों से ऐसे निर्धन बच्चों के लिए काम कर रही हैं जो टीबी जैसे गंभीर रोग से पीड़ित हैं और परिवार की आर्थिक स्थिति ठीक ना होने के कारण इलाज भी सही से नहीं करा पाते हैं। उन्होंने कहा कि हेमलता दीदी वर्षों से प्रत्येक बृहस्पतिवार राजकीय चिकित्सालय में आ रही है। वह एक एनजीओ से जुड़ी हुई है और वह टीबी से ग्रस्त बच्चों को प्रत्येक सप्ताह पोषण किट उपलब्ध कराती हैं। इसके अलावा अन्य कार्यों में भी मदद करती हैं। वर्तमान में हेमलता दीदी करीब 25 बच्चों के लिए कार्य कर रही है।

नीरजा ने बताया कि हेमलता दीदी के इस पुनीत कार्य को देखते हुए ट्रस्ट ने उन्हें सम्मानित किया है। बताया कि हेमलता दीदी ने लॉक डाउन के दौरान भी इन बच्चों को जरूरत के सामान उपलब्ध कराए थे। इस दौरान 25 बच्चों को पोषण आहार किट वितरित की गई है। इस मौके पर नूपुर गोयल, आशु तथा दिवाकर मिश्रा भी उपस्थित रहे।

मिशन मेरी सहेलीः ट्रेन में महिलाओं को मिल रही सुरक्षा

अब चलती ट्रेन में महिलाओं को सुरक्षा देने में मिशन मेरी सहेली महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। इसके लिए आरपीएफ के हेल्पलाइन नंबर 182 पर सूचना देने के लिए प्रेरित किया जा रहा है।
दून रेलवे स्टेशन के मुख्य वाणिज्यिक निरीक्षक एसके अग्रवाल के अनुसार, महिला यात्रियों की निगरानी के लिए टीम काम कर रही है। इसमें एक महिला सब इंस्पेक्टर और चार सिपाही शामिल है।

दुकानों में ‘‘इस सीट पर न बैठें’’ का स्टीकर लगाया जाएः मुख्य सचिव

मुख्य सचिव ओम प्रकाश ने सचिवालय में कोविड-19 की रोकथाम हेतु किये जा रहे प्रयासों के सम्बन्ध में बैठक की। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के आह्वान ‘‘जब तक दवाई नहीं, तब तक ढिलाई नहीं‘‘ का व्यापक प्रचार प्रसार किए जाने के भी निर्देश दिए। पर्यटन स्थलों में पर्यटकों की आवाजाही बढ़ेगी ऐसे में सोशल डिस्टेंसिंग और सैनेटाईजेशन पर विशेष ध्यान दिया जाए। मास्क, सैनिटाईजर का प्रयोग एवं सोशल डिस्टेंसिंग पर वॉल राईटिंग का व्यापक अभियान चलाया जाए।

कहा कि रेस्टोरेंट एवं होटल्स में डिस्पोजेबल कटलेरी एवं गिलास आदि की व्यवस्था को लागू करवाया जाए। आदेशों की अवहेलना करने वालों पर पुलिस कार्रवाई की जाए। उन्होंने कहा कि पारिवारिक कार्यक्रमों में भी डिस्पोजेबल को बढ़ावा दिए जाने के प्रति आमजन को जागरूक किया जाए। उन्होंने होटल, रेस्टोरेंट व दुकानों में सीटों पर ‘‘इस सीट में न बैठें‘‘ का स्टीकर लगाये जाने को बढ़ावा दिए जाने पर बल दिया। उन्होंने कहा कि एग्जोस्ट फैन (निकास पंखे) के इस्तेमाल को भी बढ़ावा दिया जाए।

मुख्य सचिव ने सभी विभागों के पोर्टल्स पर कोरोना हेतु जागरूकता के लिए स्क्रॉल चलाए जाने हेतु एनआईसी को निर्देश दिए। उन्होंने सभी विभागों से अपने सोशल मीडिया अकाउंट्स पूल करने हेतु सूचना विभाग एवं अन्य विभागों से आपस में समन्वय बनाकर कोरोना के प्रति जागरूकता में प्रोएक्टिव होकर अपना योगदान देने के भी निर्देश दिए।

मुख्य सचिव ने स्वास्थ्य विभाग को सीडीओ एवं सीएमओ के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से जन जागरूकता हेतु संदेश दिए जाने के निर्देश दिए। अगले कुछ दिनों में बारिश होने की संभावना है, जिसके कारण कोरोना का प्रकोप भी बढ़ने की सम्भावना है, इसे देखते हुए विशेष प्रयास किए जाने की आवश्यकता है। उन्होंने अस्पतालों में ओपीडी की संख्या घटने पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने निर्देश दिए कि मरीजों को बेवजह कोरोना टेस्ट किए जाने को मजबूर न किया जाए। इसके लिए स्वास्थ्य विभाग द्वारा शीघ्र निर्देश जारी किए जाएं।

सचिव सूचना दिलीप जावलकर ने बताया कि राज्य में जनजागरूकता अभियान के तहत प्रिंट मीडिया, इलैक्ट्रॉनिक मीडिया, आउटडोर मीडिया, सोशल मीडिया, एफएम एवं कम्यूनिटी रेडियो के माध्यम से कोविड-19 से बचाव हेतु व्यापक स्तर पर प्रचार प्रसार किया गया है। खेल विभाग द्वारा कोरोना विनर्स के लिए वॉकाथन एवं बैडमिन्टन प्रतियोगिता का आयोजन किया गया।