यातायात दबाव कम करने के लिए मेट्रो परियोजना जरुरी

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने देहरादून, हरिद्वार जैसे शहरों में यातायात के बढ़ते दबाव को कम करने के लिये यातायात के सुविधायुक्त वैकल्पिक साधनों पर ध्यान देने पर बल दिया है।
मुख्यमंत्री आवास कार्यालय स्थित सभागार में उत्तराखण्ड मेट्रो रेल परियोजना के सम्बन्ध में मैसर्स डोपलमेयर लि0 तथा अल्ट्रा पी.आर.टी लि. द्वारा एम.आर.टी.एस की रोप वे एवं पर्सनल रेपिड ट्रांसपोर्ट (पी.आर.टी) प्रणालियों से सम्बन्धित प्रस्तुतीकरण का अवलोकन करते हुए यह निर्देश सम्बन्धित अधिकारियों को दिये। इस मौके पर नगर विकास मंत्री मदन कौशिक एवं मुख्य सचिव उत्पल कुमार सिंह भी प्रस्तुतीकरण के दौरान मौजूद रहे।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश के बड़े शहरों की जनसंख्या में निरन्तर वृद्धि हो रही है। इससे शहरों में आबादी का दवाब बढ़ रहा है तथा यातायात की समस्या पैदा हो रही है, इसके समाधान के लिये उन्होंने रोप-वे पी.आर.टी व मैट्रो जैसी योजनाओं पर ध्यान देने को कहा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि शहरों के मध्य घनी आबादी वाले क्षेत्रों में स्थान की कमी के दृष्टिगत अवागमन के ये साधन उपयुक्त हो सकते हैं, उन्होंने इसके लिये शहरों की स्थिति के अनुकूल व्यावहारिक योजना तैयार करने के भी निर्देश दिये।

डोपलमेयर लि. के प्रबन्ध निदेशक विक्रम सिंघल ने अपने प्रस्तुतीकरण में बताया कि उनके द्वारा अमेरिका जापान सहित 95 देशों में रोप-वे व पी.आर.टी योजनायें संचालित की जा रही हैं। उन्होंने बताया कि शहरों में आवागमन के लिये रोप वे पी.आर.टी व मैट्रो जैसी परियोजनायें बेहतर साधन साबित हो रहे हैं। जबकि अल्ट्रा पी.आर.टी लि. यू.के, के अपर मुख्य कार्यकारी अधिकारी नितिन कुमार ने अपने प्रस्तुतीकरण में इससे सम्बन्धित योजनाओं की जानकारी दी। इस अवसर पर सचिव आवास नितेश कुमार झा, उपाध्यक्ष एम.डी.डी.ए डा. आशीष कुमार श्रीवास्तव, प्रबन्ध निदेशक उत्तराखण्ड मैट्रो रेल परियोजना जितेन्द्र त्यागी सहित अन्य अधिकारी उपस्थित थे।

कांवड़ मेले में सभी व्यवस्थाएं दुरस्त होः मुख्यमंत्री

कांवड़ शुरू होने से पूर्व सभी व्यवस्थाएं पूर्ण कर ली जाय। सफल कांवड़ मेला सम्पन्न कराने के लिए पड़ोसी राज्यों के अधिकारियों से भी निरंतर समन्वय बनाये रखें। कांवड़ के दौरान भीड़ प्रबंधन के लिए सुनियोजित प्लानिंग की जाय। कावंड़ के दौरान सुरक्षा की चाक -चैबंद व्यवस्था की जाय। स्वास्थ्य, सफाई, पेयजल, टॉयलेट व अन्य आवश्यक सामग्रियों की समुचित व्यवस्था की जाय। यह निर्देश मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने सचिवालय में कांवड़ मेले की व्यवस्थाओं की बैठक लेते हुए अधिकारियों को दिये।
मुख्यमंत्री ने कहा कि 17 से 30 जुलाई 2019 तक होने वाले कांवड़ मेले को सकुशल सम्पन्न कराने के लिए सभी विभाग समन्वय के साथ कार्य करें। देहरादून, मसूरी व चारधाम यात्रा के लिए आने वाले यात्रियों को रूड़की, हरिद्वार और ऋषिकेश शहरों के बीच से न जाने के बजाय बाईपास से जाने के प्रेरित किया जाय। रूट चार्ट का व्यापक स्तर पर प्रचार प्रसार भी किया जाय। कांवड़ यात्रा मार्गों पर सड़क, मेडिकल, पेयजल आदि की सुदृढ़ व्यवस्था की जाय। डाक कांवड़ के दौरान सुरक्षा व्यवस्था व भीड़ प्रबंधन के लिए पूरी योजना बनाई जाय। व्यापार मंडल व संत समाज के साथ बैठक कर उनसे भी सकुशल कांवड़ सम्पन्न कराने के लिए सहयोग लिया जाय। यह सुनिश्चित किया जाय कि कांवड़ यात्रा मार्गों पर दिशा सूचक, रूट डायवर्जन साइनेज की समुचित व्यवस्था हो। कांवड़ के दौरान विभिन्न क्षेत्रों से आने वाले वाहनों के लिए पार्किंग की उचित व्यवस्था हो। कांवड़ यात्रा वाले मार्गों पर कहीं भी झूलते हुए बिजली के नंगे तार न हों।
मुख्यमंत्री ने कहा कि कांवड़ से पूर्व घाटों की सफाई की समुचित व्यवस्था की जाय। घाटों पर सुरक्षा के दृष्टिगत चैन व जल पुलिस की व्यवस्था की जाय। मुख्यमंत्री ने कहा कि कांवड़ के दौरान स्पेशल ट्रेन की मांग रेलवे से की जाय। इस तरह से योजना बनाई जाय कि कांवड़ के दौरान निर्माण से संबंधित कार्य अवरूद्ध न हों। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने जिलाधिकारी हरिद्वार से कांवड़ की तैयारियों की विस्तार से जानकारी ली।
पुलिस महानिदेशक अनिल कुमार रतूड़ी ने कहा कि कांवड़ के दौरान लगभग 3 करोड़ श्रद्धालुओं के आने की सम्भावना है। शान्तिपूर्ण व सौहार्दपूर्ण कांवड़ सम्पन्न कराने के लिए 10 हजार सुरक्षा कर्मियों की तैनाती की जायेगी। सीमावर्ती प्रदेशों के पुलिस अधिकारियों के साथ कांवड़ के सम्बन्ध में कोर्डिनेशन मीटिंग की जा चुकी है। कांवड़ के लिए सीमावर्ती राज्यों के साथ 6 ज्वाइंट पुलिस चैकपोस्ट बनाये गयो हैं।
बैठक में बताया गया कि कांवड़ मेला क्षेत्र चार जनपदों हरिद्वार, देहरादून, पौड़ी व टिहरी में है। कावंड़ मेला क्षेत्र में कुल 36 जोन व 149 सेक्टर बनाये गये हैं। जिसमें से जनपद हरिद्वार में 04 सुपर जोन, 26 जोन व 100 सेक्टर बनाये गये हैं।
बैठक में मुख्य सचिव उत्पल कुमार सिंह, सचिव नितेश झा, शैलेश बगोली, दिलीप जावलकर, अरविन्द सिंह ह्यांकी, डीजीपी कानून व व्यवस्था अशोक कुमार, मेलाधिकारी हरिद्वार दीपक रावत, जिलाधिकारी हरिद्वार दीपेन्द्र कुमार, जिलाधिकारी देहरादून सी. रविशंकर व सबंधित अधिकारी उपस्थित थे।

शिकयतों पर गंभीर रहे अधिकारी, 7 दिनों में करे समाधानः मुख्यमंत्री

जनता मिलन कार्यक्रम में प्राप्त शिकायतों व समस्याओं पर सात दिन के भीतर आवश्यक कार्यवाही सुनिश्चित की जाए। बिजली के झूलते तारों को अविलम्ब ठीक किया जाए। ऐसे सभी अतिक्रमणों को हटाना सुनिश्चित किया जाए, जिनके कारण जलभराव की समस्या उत्पन्न हो रही हो। मंगलवार को मुख्यमंत्री आवास स्थित जनता दर्शन हॉल में आयोजित जनता मिलन कार्यक्रम में मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने लगभग 170 लोगों की शिकायतों व समस्याओं का मौके पर निस्तारण किया। इनमें 49 आवेदन आर्थिक सहायता से संबंधित थे जिन्हें स्वीकृत करने के निर्देश दिए गए।
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि प्राप्त शिकायतों व समस्याओं पर सात दिन के भीतर आवश्यक कार्यवाही सुनिश्चित की जाए और की गई कार्यवाही से आवेदक व मुख्यमंत्री कार्यालय को अनिवार्य रूप से अवगत कराया जाए। किसी भी स्तर पर जनता द्वारा की जाने वाली शिकायतों को गम्भीरता से लिया जाए और यथासम्भव राहत पहुंचाने की कोशिश की जाए।
मुख्यमंत्री ने कहा कि आवेदकों द्वारा न केवल अपनी शिकायतें व समस्याएं दर्ज कराई गई हैं बल्कि बहुत से लोगों ने सुझाव भी दिए हैं। इन सभी सुझावों पर गम्भीरता से विचार किया जाएगा और राज्यहित में पाए जाने पर इनको क्रियान्वित भी किया जाएगा।
जनता मिलन कार्यक्रम में प्राप्त शिकायतों में अधिकांशतः सड़क निर्माण, पेयजल, सीवर, छात्रवृत्ति, जलभराव, अतिक्रमण आदि से संबंधित थीं। बड़कोट के संजय थपलियाल के क्षतिग्रस्त सड़क की मरम्मत के आवेदन पर लोक निर्माण विभाग को इसके लिए कार्यवाही करने के निर्देश दिए गए। यमकेश्वर में काफी समय से वन संबंधी आपत्तियों के कारण सड़क का निर्माण रूके होने के संबंध में वन विभाग को इसकी स्टेटस रिपोर्ट देने को कहा गया। सुखबीर बुटोला द्वारा चन्द्रबनी, देहरादून में पानी की समस्या बताए जाने पर पेयजल विभाग को जरूरी कार्यवाही करने के निर्देश दिए गए। त्यूनी के समीप अणु में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र बंद होने की शिकायत पर स्वास्थ्य विभाग को इसकी जांच कर रिपोर्ट देने को कहा गया। मुख्यमंत्री ने मदन मोहन नेगी द्वारा आयुष्मान कार्ड नहीं मिलने की शिकायत को गम्भीर बताते हुए स्वास्थ्य विभाग को इस मामले की जांच कर मुख्यमंत्री कार्यालय को अवगत कराने के निर्देश दिए। श्याम सिंह तोमर द्वारा स्कूल बाउंड्री के कारण सम्पर्क मार्ग बंद होने की शिकायत पर शिक्षा विभाग को इसका मौका मुआयना करने को कहा गया। यूनूस द्वारा झगड़े में गलत मेडिकल लगाए जाने की शिकायत पर जांच करने के निर्देश दिए गए। केवल चैहान द्वारा भूटाणु उत्तरकाशी में सड़क की समस्या बताए जाने पर मुख्यमंत्री ने समुचित कार्यवाही के प्रति आश्वस्त किया। विमल द्वारा बताया गया कि वे भूमिहीन हैं परंतु सरकारी कागजों में दिखा दिया गया है कि उन्हें भूमि मिल चुकी है। इस पर मुख्यमंत्री ने जांच के आदेश दिए। बच्चन सिंह नेगी ने शिकायत की कि उनकी जमीन पर किसी ने कब्जा कर लिया है। इस पर एसडीएम को जांच कर तुरंत कार्यवाही करने के निर्देश दिए गए।
इस अवसर पर विधायक गणेश जोशी, मेयर देहरादून सुनील उनियाल गामा, डीएम देहरादून सी.रविशंकर, अपर सचिव मुख्यमंत्री डा. मेहरबान सिंह बिष्ट सहित सभी विभागीय अधिकारी उपस्थित थे।

प्रतिवर्ष लगभग डेढ़ हजार भर्ती वाला कोस्टगार्ड भर्ती सेंटर का हुआ शिलान्यास

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने शुक्रवार को कुंआवाला (हर्रावाला) में कोस्ट गार्ड भर्ती सेंटर का शिलान्यास व भूमि पूजन किया। इस भर्ती केन्द्र के लिए भारत सरकार से 17 करोड़ रूपये भूमि के लिए व 25 करोड़ रूपये भवन निर्माण के लिए स्वीकृति मिल चुकी है। इस भर्ती केन्द्र के लिए पूरा खर्चा भारत सरकार वहन करेगी। यह भर्ती केन्द्र ड़ेढ़ वर्ष में बनकर तैयार हो जायेगा। यह भर्ती केन्द्र केन्द्र चार राज्यों उत्तराखण्ड, उत्तर प्रदेश, हिमांचल प्रदेश और हरियाणा के लिए बनाया जा रहा है।

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने कहा कि उत्तराखण्ड में कोस्टगार्ड भर्ती केन्द्र खुलने से प्रदेश के युवाओं को कोस्टगार्ड में रोजगार के अच्छे अवसर मिलेंगे। थलसेना, वायुसेना व नौसेना के भर्ती केन्द्र उत्तराखण्ड में पहले से ही हैं। कोस्टगार्ड भर्ती केन्द्र खुलने से राज्य के युवाओं को तटरक्षक बल में करियर बनाने का सुनहरा अवसर मिलेगा। मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र ने कहा कि यह रैबार कार्यक्रम का प्रतिफल है कि उत्तराखण्ड में कोस्टगार्ड का भर्ती सेंटर खुलने जा रहा है, जबकि देहरादून में देश का पहला ड्रोन एप्लिकेशन रिसर्च सेंटर खुल चुका है। उत्तराखण्ड में पांचवे धाम के रूप में सैन्यधाम को विकसित करने के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के संकल्प की दिशा में यह एक बड़ी पहल है।

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र ने कहा कि देहरादून में जल्द ही भव्य शौर्य स्थल (सैन्यधाम) बनाया जायेगा। इसके लिए देहरादून में 70 बीघा जमीन का चयन कर लिया गया है। यह शौर्य स्थल सबके लिए प्रेरणा का केन्द्र बनेगा। मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र ने कहा कि रानीपोखरी में नेशनल लॉ युनिवर्सिटी बन रही है। इससे प्रदेश के युवाओं को विधि की पढ़ाई के साथ-साथ कानून के क्षेत्र में कार्य करने का सुनहरा अवसर मिलेगा। पर्यटन को बढ़ावा देने राज्य सरकार की शीर्ष प्राथमिकताओं में है। राज्य में अधिक से अधिक पर्यटक आयें इसके लिए हवाई सेवाओं को विस्तार दिया जा रहा है। जॉलीग्रांट एयरपोर्ट का विस्तार किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि पर्यटन के क्षेत्र में रोजगार के अनेक अवसर हैं। देश का 23वां सीपैट संस्थान डोईवाला में खोला गया है। सीपैट एक ऐसा संस्थान हैं, जिसमें कोर्स करने से रोजगार की बहुत प्रबल संभावनाएं हैं। इसमें जल्द ही डिप्लोमा व डिग्री कोर्स भी शुरू किये जायेंगे।

महानिदेशक कोस्टगार्ड राजेन्द्र सिंह ने कहा कि गत वर्ष मुख्यमंत्री आवास में रैबार कार्यक्रम में प्रदेश की बड़ी हस्तियों का जो मंथन हुआ। उसके सुखद परिणाम आज हम सबके सामने हैं। डीजी कोस्टगार्ड ने कहा कि देवभूमि उत्तराखण्ड का वासी होने के नाते मेरे मन में उत्तराखण्ड के युवाओं के लिए कुछ करने की तमन्ना थी। उत्तराखण्ड में कोस्टगार्ड का भर्ती सेंटर हो यह मुख्यमंत्री का ख्वाब था और मेरी ख्वाईश थी जिसका परिणाम है कि आज मंजिल हमारे सामने है। उन्होंने कहा कि यह भर्ती केन्द्र लगभग डेढ़ साल में बनकर तैयार हो जायेगा। कोस्टगार्ड द्वारा एसडीआरएफ को आपदा से बचाव राहत कार्यों का प्रशिक्षण भी दिया जायेगा। उन्होंने कहा कि भारत की कोस्टगार्ड विश्व की चौथी सबसे बड़ी कोस्टगार्ड है। काम के मामले में आज भी सबसे आगे है। उन्होंने इस भर्ती केन्द्र के लिए अपेक्षित भूमि आवंटन करने पर मुख्यमंत्री का आभार भी जताया।

2020 तक देहरादून को सीएनजी उपलब्ध कराना लक्ष्यः टीएस रावत

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने मंगलवार मिशन स्थापना दिवस के अवसर पर विभिन्न फर्मों को कई कार्यों के कार्यादेश एवं स्मार्ट कार्ड वितरित किये। उन्होंने कहा कि देहरादून शहर की बढ़ती आबादी के दवाब को कम करने के लिये नये देहरादून की परिकल्पना को साकार किया जायेगा। इसके लिये लगभग 4 हजार हेक्टियर क्षेत्र का लैण्ड बैंक बनाने के प्रयास किये जायेंगे। उन्होंने कहा कि स्मार्ट नागरिकों के बिना स्मार्ट शहर की कल्पना नही की जा सकती है। देहरादून को स्मार्ट शहर बनाने के लिये प्रबुद्धजनो व नागरिको को भी सहयोगी बनना होगा। उन्होंने कहा कि देहरादून स्मार्ट शहर के रूप में शीघ्र ही नये क्लेवर में दिखाई देगा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि देहरादून का नया स्वरूप प्रदान करने के साथ ही यहां के नागरिकों को सभी आवश्यक सुविधाये उपलब्ध कराने का हमारा प्रयास है। 2020 के अन्त तक देहरादून को सीएनजी उपलब्ध हो जायेगा। बरसात के बाद सौंग बांध का कार्य आरम्भ हो जायेगा इससे देहरादून को ग्रेविटी आधारित पेयजल उपलब्ध होगा तथा इससे लगभग 92 करोड़ की बिजली की बजत होगी। उन्होंने कहा कि रिस्पना को ऋषिपर्णा के स्वरूप में लाने के भी प्रयास तेजी से किये जा रहे हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि स्मार्ट सिटी के अन्दर स्थापित होने वाले स्मार्ट डाटा सेन्टर तथा स्मार्ट कमाण्ड कन्ट्रोल सेन्टर से देहरादून के साथ ही हरिद्वार में आयोजित होने वाले महाकुम्भ के आयोजन में भी मदद मिलेगी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री की स्मार्ट सिटी परियोजना को मूर्त रूप देने में राज्य सरकार तथा देहरादून स्मार्ट सिटी द्वारा सभी सम्भव प्रयास किये जायेंगे। देहरादून स्मार्ट सिटी द्वारा अपने 87 प्रतिशत कार्यों को मूर्त रूप देने कि तैयारी शुरू कर दी गई है।

स्मार्ट सिटी प्लान के तहत कार्यों की प्रगति की जानकारी देते हुए मुख्य कार्यकारी अधिकारी डॉ आशीष श्रीवास्तव ने बताया कि स्मार्ट रोड परियोजना के क्रियान्वयन के लिए इस कार्य में दक्ष भारत सरकार की कार्यदायी संस्था ब्रिज एण्ड रूफ लिमिटेड को कार्य आवंटित कर दिया गया है। एकीकृत कमाण्ड एण्ड कण्ट्रोल सेन्टर के क्रियान्वयन के लिए मै0 एच0पी0 लिमिटेड का चयन कर लिया गया है।

उन्होंने कहा कि अभी तक स्मार्ट सिटी मिशन के अन्तर्गत कुल 484.76 करोड़ रूपए लागत की परियोजनाओं के कार्यादेश जारी किये जा चुकें हैं। इनमें स्मार्ट रोड लागत 57.49 करोड रूपए, ड्रेनेज लागत 37.99 करोड़ रूपए, मल्टीयूटीलिटी डक्ट लागत 64.33 करोड रूपए, स्मार्ट रोड़ के किनारे पेयजल पाइप लाईन लागत 9.96 करोड रूपए, स्मार्ट रोड़ के किनारे सीवर लाईन लागत 20.77 करोड रूपए, एकीकृत कमाण्ड एंड कण्ट्रोल सेन्टर लागत 199.78 करोड रूपए, आई०टी०एम०एस लागत 50 करोड रूपए, सिटी साइनेज लागत 18 करोड रूपए, स्मार्ट बिन्स तथा स्मार्ट वैस्ट गाड़ियां लागत 9.34 करोड रूपए, पापीपी मोड पर वाटर एटीएम लागत 1.98 करोड़ रूपए, स्मार्ट टॉयलेट लागत 2.07 करोड रूपए, स्मार्ट स्कूल्स लागत 6.05 करोड़ रूपए, एमडीडीए पार्क का सौन्दर्यकरण लागत 7 करोड रूपए शामिल हैं।

उन्होंने बताया कि इसके अतिरिक्त 331.20 करोड़ रूपए की विभिन्न महत्वपूर्ण परियोजनाओं की डीपीआर की स्वीकृति प्रदान की गई है। इनमें इलेक्ट्रिक बस लागत 41.56 करोड रूपए, इण्टरैक्टिव बस स्टॉप्स लागत 15.72 करोड़ रूपए, परेड ग्राउंड विकास योजना लागत 23.63 करोड़ रूपए,. पल्टन बाजार पैदल मार्ग का विकास लागत 13.82 करोड़ रूपए, एकीकृत ऑफिस ग्रीन बिल्डिंग लागत 204.46 करोड रूपए, सचिवालय में शिशु पालन केंद्र लागत 0.90 करोड रूपए, एबीडी क्षेत्र में पेयजल संवर्धन योजना लागत 24.11 करोड़ रूपए व राजपुर रोड का सौन्दर्यीकरण लागत 7 करोड़ रूपए शामिल हैं। इस प्रकार कुल लागत रू0 484.76 करोड के कार्यादेश दिये जा चुके हैं। जबकि कुल 331.2 करोड की डीपीआर को स्वीकृत किया जा चुका है। इस प्रकार देहरादून स्मार्ट सिटी के अंतर्गत 800 करोड़ से अधिक के कार्य जल्द ही प्रारम्भ कर दिए जाएंगे।

कार्य मंत्रणा समिति की बैठक में विस सत्र को सफल बनाने पर दिया जोर

उत्तराखंड विधानसभा के कल 24 जून से आरंभ हो रहे सत्र के सिलसिले में आज विधानसभा अध्यक्ष प्रेमचंद अग्रवाल की अध्यक्षता में कार्य मंत्रणा समिति की बैठक आयोजित की गई। इसमें तय किया गया कि संसदीय कार्य मंत्री रहे दिवंगत प्रकाश पंत को सत्र के पहले दिन सोमवार को श्रद्धांजलि दी जाएगी। 25 जून को होने वाले विधायी कार्यों के लिए 24 जून को दुबारा कार्य समिति की बैठक करके एजेंडा तय किया जाएगा। विधानभवन में आयोजित बैठक में मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत, विधान सभा उपाध्यक्ष रघुनाथ सिंह चैहान, कार्यकारी संसदीय कार्य मंत्री मदन कौशिक, नेता प्रतिपक्ष इन्दिरा हृदयेश, गोविंद सिंह कुंजवाल, प्रीतम सिंह आदि मौजूद रहे।
वहीं, कल से आरंभ हो रहे विधानसभा सत्र की अवधि को लेकर विपक्ष ने सवाल खड़े किए हैं। विपक्ष का कहना है कि महज दो दिन का सत्र सरकार ने खानापूर्ति के लिए ही आहूत किया है, क्योंकि छह माह के भीतर सत्र बुलाने की बाध्यता है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व विधानसभा अध्यक्ष गोविंद सिंह कुंजवाल का कहना है कि सरकार के मंत्री सदन में जबाब देने से बचना चाहते हैं वहीं, दूसरी ओर मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने विपक्ष की आपत्ति को खारिज किया है। उनका कहना है कि फिलहाल कोई बिजनेस नहीं है। जो विधेयक हैं, वे अभी पाइप लाइन में हैं। लिहाजा, सदन को अनावश्यक नहीं बढ़ाया जा सकता। यह बात विपक्ष भी जानता है। हालांकि, मुख्यमंत्री ने सदन के सुचारू संचालन में विपक्ष का सहयोग मिलने की उम्मीद भी जताई।

कोस्टगार्ड भर्ती सेंटर से युवाओं का संवरेगा भविष्य

उत्तराखड में कोस्टगार्ड का भर्ती सेंटर खोला जायेगा। यह भारत का पाँचवा कोस्टगार्ड भर्ती सेंटर होगा। 28 जून को मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत इस भर्ती सेंटर के लिए भूमि का शिलान्यास करेंगे। यह भर्ती सेंटर कुंआवाला (हर्रावाला) देहरादून में बनाया जायेगा। मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत से रविवार को मुख्यमंत्री आवास में डीजी कोस्टगार्ड राजेन्द्र सिंह ने मुलाकात कर इस सम्बन्ध में उत्तराखण्ड में कोस्टगार्ड भर्ती केन्द्र खोलने के लिए भारत सरकार का अनुमति पत्र मुख्यमंत्री को सौंपा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखण्ड में कोस्टगार्ड भर्ती सेंटर खुलने से उत्तराखण्ड के युवाओं को कोस्टगार्ड में रोजगार के अच्छे अवसर मिलेंगे। उत्तराखण्ड आपदा की दृष्टि से संवेदनशील राज्य है। कोस्टगार्ड एस.डी.आर.एफ को आपदा से राहत व बचाव के तरीकों के लिए प्रशिक्षण भी देगा। युवाओं को भी कोस्टगार्ड द्वारा आपदा से राहत व बचाव कार्य का प्रशिक्षण दिया जायेगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखण्ड सैन्य प्रदेश है। सेना के विभिन्न अंगों मे उत्तराखण्ड के जवान है। प्रधानमंत्री ने उत्तराखण्ड को पांचवे सैन्य धाम के रूप में विकसित करने का संकल्प लिया है। यह उत्तराखण्ड का सौभाग्य है कि देश का पांचवा कोस्टगार्ड भर्ती केन्द्र उत्तराखण्ड में बन रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि रैबार कार्यक्रम में डीजी कोस्टगार्ड राजेन्द्र सिंह ने उत्तराखण्ड में कोस्टगार्ड भर्ती केन्द्र खोलने का प्रस्ताव दिया था। उसी का परिणाम है कि भारत सरकार से इसे स्वीकृति भी मिल चुकी है। उन्होंने डीजी कोस्टगार्ड के इन प्रयासों की सराहना करते हुए उनका आभार जताया।
डीजी कोस्टगार्ड राजेन्द्र सिंह ने कहा कि देहरादून में कोस्टगार्ड भर्ती सेंटर के लिए भारत सरकार से स्वीकृति मिल चुकी है। इसके लिए 17 करोड़ रूपये भूमि के लिए व 25 करोड़ रूपये भवन निर्माण के लिए स्वीकृति मिली है। इस भर्ती केन्द्र का पूरा खर्च भारत सरकार वहन करेगी। नोएडा, मुम्बई, चेन्नई व कोलकत्ता के बाद यह उत्तराखण्ड में 5वां कोस्टगार्ड भर्ती केन्द्र होगा। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी ने उत्तराखण्ड को सैन्य धाम के रूप में 5वां सैन्य धाम विकसित करने की बात कही है। यह कोस्टगार्ड भर्ती केन्द्र उत्तराखण्ड के जवानों को समर्पित होगा। इस भर्ती केन्द्र का लाभ उत्तराखण्ड के साथ ही उत्तर प्रदेश, हिमांचल प्रदेश व हरियाणा के युवाओं को भी मिलेगा। उन्होंने कहा कि लगभग डेढ़ साल में यह भर्ती केन्द्र बनकर तैयार हो जायेगा।

सतपाल महाराज ने उत्तराखंड के विकास में केन्द्र का सहयोग मांगा

विज्ञान भवन नई दिल्ली में केन्द्रीय वित्तमंत्री निर्मला सीतारमन की अध्यक्षता में आयोजित “प्री-बजट कंसल्टेशन” संबंधी बैठक में उत्तराखण्ड के पर्यटन, तीर्थाटन एवं संस्कृति मंत्री सतपाल महाराज ने प्रतिभाग किया। बैठक में केबिनेट मंत्री सतपाल महाराज ने प्रदेश की वित्तीय स्थिति एवं अर्थव्यवस्था से संबंधित विषयों पर चर्चा करते हुए कहा कि हरिद्वार में 2021 में आयोजित होने वाले महाकुम्भ के लिए अब लगभग 1 वर्ष 7 माह का ही समय शेष है, जिसके दृष्टिगत कुम्भ मेले के आयोजन से संबंधित स्थायी प्रकृति के कार्यों की स्वीकृतियां प्राथमिकता के आधार पर निर्गत की जानी आवश्यक होगी, ताकि कुम्भ मेले के आयोजन से पूर्व ही माह अक्टूबर/नवम्बर 2020 तक समस्त कार्य पूर्ण कराया जाना सम्भव हो सके। हरिद्वार में आगामी महाकुम्भ मेला का अयोजन माह जनवरी 2021 के प्रथम सप्ताह से प्रारम्भ हो जायेगा। इस महत्वपूर्ण आयोजन के लिये उन्होंने रूपये 5000 करोड़ की वित्तीय सहायता उपलब्ध कराये जाने का अनुरोध किया।
केबिनेट मंत्री ने कहा कि उत्तराखण्ड को 38वें राष्ट्रीय खेल के आयोजन का अवसर प्रदान किया गया है। जिसे वर्ष 2021 में आयोजित किया जाना है। राष्ट्रीय खेलों में 38वें संस्करण के 39 खेल विधाओं में खेल प्रतियोगितायें आयोजित की जायेंगी। खेलों के आयोजन हेतु परिसम्पतियों के निर्माण में समय लगेगा। इसलिए राष्ट्रीय खेलों को राज्य में सफलतापूर्वक आयोजित किये जाने एवं अवस्थापना विकास हेतु रूपये 682 करोड़ की धनराशि वर्ष 2019-20 में उपलब्ध कराई जाये।

सतपाल महाराज ने बताया कि राज्य की दुर्गम भौगोलिक स्थिति के दृष्टिगत निर्माण सामग्री को निर्माण स्थल तक पहुचाने में ढुलान आदि पर अत्याधिक व्यय होने के कारण हिमालयी राज्यों हेतु प्रधानमंत्री आवास योजनान्तर्गत आवास निर्माण हेतु प्रति लाभार्थी रूपये 1.30 लाख को बढ़ाकर प्रति लाभार्थी रूपये 2 लाख की सहायता राशि का प्रावधान किया जाय। साथ ही प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण के लाभार्थी परिवार हेतु 30 अतिरिक्त मानव दिवस स्वीकृत कर युगपतिकरण के अन्तर्गत मनरेगा के तहत अकुशल श्रमांश के दिवसों को 95 दिन से बढ़ाकर 125 दिन किया जाये। उन्होंने कहा कि महात्मा गांधी नरेगा में पर्वतीय क्षेत्र होने के कारण उत्तराखण्ड में सामग्री ढुलान अत्यन्त मंहगा होता है, जिससे दूरस्थ क्षेत्रों में पहुचने पर सामग्री की वास्तविक लागत में काफी बढ़ोत्तरी हो जाती है। इस कारण महात्मा गांधी नरेगा अन्तर्गत टिकाऊ प्रवृत्ति के कार्य कराने में कठिनाई होती है। इसलिऐ पर्वतीय राज्यों हेतु श्रम सामग्री अनुपात 60ः40 के बजाय 50ः50 किया जाना गुणवत्तापूर्ण स्थायी परिसम्पत्तियों के निर्माण में सहायक सिद्व होगा।
सतपाल महाराज ने कहा कि प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के अन्तर्गत वर्तमान में योजना के दिशा-निर्देशों के अनुसार पर्वतीय राज्यों में 250 से अधिक आबादी की पात्र बसावटों को ही संयोजित किये जाने का लक्ष्य है, जबकि पर्वतीय राज्य की भौगोलिक परिस्थितियों एवं जनसख्यां के विरल घनत्व को दृष्टिगत रखते हुए योजनान्तर्गत 250 के स्थान पर 150 किया जाय।
सतपाल महाराज ने यह भी सुझाव दिया कि प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना का नाम प्रधानमंत्री सम्पर्क सड़क योजना रखा जाये जिससे रोपवे सेक्टर में भी इसका लाभ उठाया जा सके क्योंकि गर्मी के दौरान सभी पहाड़ी राज्यों में पर्यटकों की भारी आवाजाही होती है इससे लंबे टै्रफिक जाम और भारी प्रदूषण का खतरा पैदा होता है। इसके अलावा, पहाड़ियों में रोपवे लोगां को माल ढोने तथा परिवहन का बहुत अच्छा साधन हो सकता है जो यात्रा के समय को कम कर सकता है और साथ ही दुर्घटनाओं में भी कमी ला सकता है, उन्होंने भारत सरकार से रोपवे सैक्टर में गौरीकुण्ड से केदारनाथ, नैनीताल रोपवे, गोविन्दघाट से हेमकुण्ड के लिए एक अलग केन्द्र सहायतित योजना शुरू करने का अनुरोध किया।

कैबिनेट मंत्री ने कहा कि उत्तराखण्ड राज्य में वर्तमान में कुल 7797 ग्राम पंचायतें है जिसमें 1599 ग्राम पंचायतों ऐसी हैं जिनके पास अपना कोई भी भवन नहीं है। पंचायत भवन ग्रामीण क्रियाकलापों का महत्वपूर्ण केन्द्र है। भविष्य में ग्राम पंचायतों को ई-पंचायत के रूप में भी विकसित किया जाना है तथा सभी पंचायतों का डिजिटलाईजेशन भी किया जाना है। पंचायतीराज मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा एक पंचायत भवन की लागत रूपये 20 लाख निर्धारित की गयी है। इस प्रकार 1449 पंचायत भवनों पर रू. 28980 लाख की आवश्यकता होगी, जिसे चरणबद्व रूप से तीन चरणों में निर्मित किये जाने का प्रस्ताव है। प्रथम चरण के रूप में वित्तीय वर्ष 2019-20 में 483 पंचायत भवनों का निर्माण का किया जायेगा, जिस पर एक वर्ष में रूपये 20 लाख प्रति पंचायत भवन की दर से 483 पंचायत भवनों के निर्माण हेतु कुल रूपये 9660 लाख की आवश्कता होगी।
उन्होंने कहा कि पहाड़ी राज्यों में जनसंख्या का घनत्व कम होता है तथा क्षेत्रफल ज्यादा है, जहां तक उत्तराखण्ड का सवाल है राज्य से नेपाल तथा चीन की अर्न्तराष्ट्रीय सीमाऐं जुड़ी हुई है, तथा इन क्षेत्रों में अवस्थापना सुविधाओं का विकास अन्य क्षेत्रों के मुकाबले कम हुआ है जिसके कारण यहां से लोगों का पलायन हो रहा है जो कि सुरक्षा की दृष्टि से अनुकूल नहीं है अतः हिमालयी राज्य हेतु सीमान्त क्षेत्र विकास कार्यक्रम के अर्न्तगत भारत सरकार द्वारा दिये जाने वाले आंवटन को बढ़ाया जाये।
केबिनेट मंत्री सतपाल महाराज ने प्रदेश में समग्र शिक्षा योजना में राष्ट्रीय माध्यमिक शिक्षा के अन्तर्गत संचालित विद्यालयों में कार्यरत शिक्षकों के वेतन की सम्पूर्ण धनराशि का वहन पूर्व की भांति भारत सरकार एवं राज्य सरकार द्वारा 90ः10 के अनुपात में किये जाने के साथ ही भारत सरकार द्वारा वर्तमान में वृद्वावस्था पेंशन प्रति लाभार्थी रूपये 200 की दर से दिया जा रहा है, जिसे बढ़ाकर अधिकतम रूपये 1000 या कम से कम 500 रूपये किये जाने का भी अनुरोध किया है।
बैठक में केन्द्रीय वित्त और कॉरपोरेट कार्य राज्यमंत्री अनुराग सिंह ठाकुर व अन्य राज्यों के मुख्यमंत्री, उपमुख्यमंत्री, वित्तमंत्री एवं केन्द्र व राज्यों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

योग को जन आंदोलन बनाने की जरुरतः मुख्यमंत्री

5वें अन्तरराष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर पैवेलियन ग्राउंड देहरादून में आयोजित मुख्य कार्यक्रम में मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने हजारों योग साधकों के साथ योगाभ्यास किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि नियमित योगाभ्यास हमें मानसिक व शारीरिक रूप से स्वस्थ रखने में मददगार होता है। योगाभ्यास को अपनी दिनचर्या में लाना जरूरी है। योग को जन आन्दोलन बनाने के लिए आम आदमी की सहभागिता को जरूरी बताते हुए कहा कि योग की धारा देवभूमि उत्तराखण्ड से प्रवाहित हुई है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि योग भारतीय सभ्यता, संस्कृति तथा जीवन शैली का अभिन्न अंग रहा है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी के सार्थक प्रयासों से योग को अन्तरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता मिलना भारत के लिए गर्व की बात है। योग की वजह से वैश्विक पटल पर भारत का विशिष्ट स्थान है। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी ने संयुक्त राष्ट्र संघ में 21 जून को अन्तरराष्ट्रीय योग दिवस मनाने की अपील की थी। 193 देशों ने इसका समर्थन किया था। पतंजलि ने लिखा है जिस प्रकार व्याकरण से भाषा की शुद्धता होती है उसी प्रकार योग से चित्त शुद्ध होता है। उन्होंने कहा कि आज दुनिया भर में योग का महत्व बढ़ा है। योग प्रशिक्षकों की मांग तेजी से बढ़ रही है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि स्वास्थ्य व मन की शुद्धता के लिए विश्वभर में करोड़ों लोग योगाभ्यास कर रहे हैं। स्वस्थ शरीर व मन से ही सम्पूर्ण विश्व का कल्याण संभव है। उन्होंने कहा कि गत वर्ष प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की गरिमामयी उपस्थित में देहरादून में 60 हजार से अधिक लोगों ने योगाभ्यास किया। जिससे देवभूमि व योग भूमि उत्तराखण्ड को विश्वभर में अलग पहचान मिली। उन्होंने कहा कि आत्मा व परमात्मा के मिलन का एकमात्र साधन योग है।
आयुष मंत्री डॉ. हरक सिंह रावत ने कहा कि उत्तराखण्ड योग की भूमि रही है। हजारों सालों से ऋषि-मुनियों, महात्माओं ने यहां से देश और दुनिया को योग के माध्यम से स्वस्थ रहने की प्रेरणा दी है। उन्होंने कहा कि उत्तराखण्ड में 250 वैलनेस सेंटर बनाये जायेंगे। एक स्वस्थ जीवन की कल्पना योग से ही जा सकती है। प्रधानमंत्री ने श्री केदारनाथ जी में योग साधना कर बाबा केदार का आशीर्वाद लिया। श्री केदारनाथ जी की यात्रा के लिए आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या में इससे काफी वृद्धि हुई है।
इस अवसर पर उच्च शिक्षा राज्य मंत्री डॉ. धन सिंह रावत, विधायक खजान दास, मुन्ना सिंह चैहान, गोपाल रावत, मुख्य सचिव उत्पल कुमार सिंह, डीजीपी अनिल कुमार रतूड़ी, सचिव आयुष अरविन्द सिंह ह्यांकी आदि उपस्थित थे।

रिवर्स माइग्रेशन की दिशा में पहल होनी चाहिएः मुख्यमंत्री

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत से विज्ञान भारती के अध्यक्ष डॉ. महेश भट्ट, निदेशक यूसर्क प्रो0 दुर्गेश पंत आदि ने भेंट कर उन्हें माह सितम्बर मे देहरादून में प्रस्तावित ‘‘हिमालय महोत्सव‘‘ आयोजित किये जाने की जानकारी दी। मुख्यमंत्री ने हिमालय महोत्सव जैसे आयोजनो को राज्य हित में बताते हुए ऐसे कार्यक्रमों में विश्व विश्वविद्यालयों का भी सहयोग लेने को कहा। मुख्यमंत्री ने कहा कि रिवर्स माइग्रेशन की दिशा में भी पहल होनी चाहिए। शिक्षण संस्थानों को पर्यावरण संरक्षण जल संवर्धन तथा प्राकृतिक जल श्रोतो को पुनर्जीवित करने की भागीदारी सुनिश्चित होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि ऐसे संस्थानों को नर्सरी स्थापित करने के साथ ही छात्रों को पर्यावरण बचाने तथा वृक्षारोपण के प्रति जागरूक किया जाना चाहिए। समाज हित से जुड़े ऐसे कार्यो में बच्चों का जागरूक होना जरूरी है। मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्तमान परिवेष में परम्परागत स्वदेशी विज्ञान के विकास तथा आधुनिक विज्ञान में आपसी समन्वय जरूरी है। उन्होंने प्राकृतिक तथा आध्यात्मिक विज्ञान को आम आदमी से जोड़ने की पहल पर भी बल दिया।
इस अवसर पर वैज्ञानिक डॉ. ओम प्रकाश नोटियाल, कल्याण सिंह रावत ‘‘मैती‘‘ तथा विज्ञान भारती के सी.डी.असवाल आदि उपस्थित थे।