आखिर किसका था दबाव, पुलिस ने 30 घंटे तक जहरीली शराब का मामला दबाए रखा!

जहरीली शराब कांड के सामन के आने के बाद पता चला कि 30 घंटे तक घटना में पर्दा डाले रखने वाली पुलिस ने गुरुवार सुबह से शुक्रवार दोपहर तक हुई चार मौतों को डेंगू का प्रकोप बताकर पिंड छुड़ाना चाहा था। यही नहीं, इन चारों शवों का पोस्टमार्टम कराने की पुलिस ने जहमत भी नहीं उठाई। ऐसे में मृतकों के परिवारजन शवों का अंतिम संस्कार भी कर चुके थे। जब मामला बिगड़ा तो पुलिस को होश आया और आनन-फानन में दो शवों को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया। हैरत की बात है कि राजभवन, मुख्यमंत्री आवास, सचिवालय, जिलाधिकारी आवास व एसएसपी आवास के महज एक किमी के दायरे एवं विधायक आवास से महज 20 मीटर दूर पथरिया पीर इलाके में जहरीली शराब से मौत का कहर बरपा। लेकिन पुलिस शुक्रवार दोपहर तक इस मामले को डेंगू की आड़ में ‘दफन’ करने की कोशिशों में जुटी रही।
यहां तक की जहरीली शराब से चार मौत की सूचना के बाद भी पुलिस ने शवों का पोस्टमार्टम कराना जरूरी नहीं समझा। पीड़ित परिवारों का कहना था कि गुरुवार रात ही तीन मौतों की सूचना विधायक गणेश जोशी और संबंधित पुलिस अधिकारियों को दे दी गई थी, लेकिन पुलिस ने कोई जरूरी कदम नहीं उठाए। आरोप हैं कि जांच करने के बजाय पुलिस पीड़ित परिवारों पर दबाव बनाकर दावा करती रही कि डॉक्टरों ने मौत की वजह डेंगू बताई है। मामले में पुलिस न केवल सवालों में है बल्कि उसकी भूमिका भी संदेह के घेरे में है। पथरिया पीर इलाके में जो कुछ हुआ, वह तंत्र की भूमिका को कठघरे खड़ा कर रहा है। हैरानी यह कि थाने की पुलिस ही नहीं बल्कि जनप्रतिनिधि भी मामले को दबाने की जुगत भिड़ाते रहे।
शहर के बीचों-बीच हुए इस घटनाक्रम के 30 घंटे बाद भी सरकार पूरी तरह अनजान रही। शुक्रवार शाम विधायक के आवास पर हंगामे की सूचना पर सरकार को मामले की भनक लगी और शाम सात बजे अफसरों से रिपोर्ट मांगी गई। छह मौत की जानकारी के बाद सरकार हरकत में आई। पथरिया पीर कांड ने सरकार से लेकर प्रशासनिक तंत्र को हिलाकर रख दिया। इसके गुनाहगार कौन थे, इन्हें पनाह कौन दे रहा था, यह सामने आना अभी बाकी है। इस बीच, सरकार ने फौरी कार्रवाई करते हुए शहर कोतवाल शिशुपाल सिंह नेगी, धारा चैकी इंचार्ज कुलवंत सिंह, आबकारी आयुक्त सुशील कुमार ने दो आबकारी निरीक्षकों शुजात हसन व मनोज फत्र्याल को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया। घटना के बाद आक्रोशित लोगों ने कोतवाली पुलिस पर गंभीर आरोप लगाया था कि इलाके में अवैध तरीके से शराब बेचे जाने की एक नहीं कई बार शिकायत की गई थी,। एसएसपी अरुण मोहन जोशी ने बताया कि इस प्रकरण में सीओ सिटी की तहरीर पर अज्ञात के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया गया है। पुलिस की भूमिका की जांच एसपी देहात प्रमेंद्र डोबाल को सौंपी गई है। यह भी देखा जा रहा है कि शराब कहां से आती थी और कैसे बेची जाती थी? क्या वाकई में इलाकाई पुलिस को इस बात की जानकारी थी। इसके लिए इलाके के सीसीटीवी फुटेज से लेकर कॉल डिटेल रिकार्ड तक चेक किए जाएंगे। जो भी दोषी होगा, वह किसी भी सूरत में बख्शा नहीं जाएगा।
वहीं, मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने देहरादून के नेशविला रोड में जहरीली शराब के सेवन से हुई जनहानि पर दुख प्रकट किया है। उन्होंने घटना की मजिस्ट्रीयल जांच के निर्देश दिए हैं। मुख्यमंत्री ने इस प्रकरण को अत्यंत गंभीर बताते हुए कहा कि सुनिश्चित किया जाएगा कि दोषियों को कड़ी से कड़ी सजा मिले। उन्होंने कहा कि मुख्य सचिव, डीजीपी व आबकारी आयुक्त को इस मामले में दोषी पाए जाने वालों पर शीघ्र कारवाई करने के निर्देश दिए गए हैं। मुख्यमंत्री ने महानिदेशक स्वास्थ्य व सीएमओ देहरादून को चिकित्सालयों में भर्ती लोगों को उचित चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने के लिए भी निर्देशित किया है।

ट्रेंचिंग ग्राउंड हटाने की मांग को लेकर गंगा में लगाई छलांग, जल पुलिस ने बचाया

जागृति एक प्रयास संस्था के पांच सदस्यों को पुलिस ने आज त्रिवेणी घाट से गिरफ्तार कर लिया। यह सभी ट्रेंचिंग ग्राउंड हटाने की मांग पूरी नहीं होने पर जल समाधि लेने का प्रयास कर रहे थे। इस दौरान एक सदस्य ने पुलिस से बचकर गंगा में छलांग भ लगाई लेकिन जल पुलिस के जवानों ने उसे सकुशल बाहर निकाल दिया।
हीरालाल मार्ग पर गंगा से सौ मीटर की परिधि में नगर निगम का कूड़ा डंप किया जाता है। करीब चार दशक से पूर्व में पालिका की ओर से इस ग्राउंड में कूड़ा डंप किया जा रहा है। आबादी के बीच से ट्रेंचिंग ग्राउंड को हटाने की मांग को लेकर जागृति एक प्रयास संस्था ने 59 दिन पूर्व से परशुराम चैक पर धरना दे रही है। वहीं, 26 दिन से संस्था के सदस्यों के द्वारा क्रमिक अनशन किया जा रहा है। इस ओर आंदोलनकारियों ने बुधवार को कूड़ा निस्तारित ना होने पर त्रिवेणी घाट में जल समाधि लेने की घोषणा भी की थी। बुधवार की सुबह से ही कोतवाली की ओर से त्रिवेणी घाट में पुलिस तैनात कर दी गई थी। अपने तय कार्यक्रम के अनुसार, सुबह करीब 11ः30 बजे मायाकुंड की ओर से आंदोलनकारी त्रिवेणी घाट पहुंचे और धरना देकर बैठ गए। पुलिस ने इन लोगों के चारों ओर घेरा बना लिया। इस बीच कुछ लोग जब गंगा की ओर बढ़ने लगे तो पुलिस सतर्क हो गई। गंगा की धारा की ओर तेजी से जा रहे आंदोलनकारियों को पुलिस ने रोक लिया। यहां दोनों पक्षों के बीच धक्का-मुक्की भी हुई। किसी तरह से पुलिस ने आंदोलनकारियों को काबू में किया। इस बीच एक आंदोलनकारी सुरेंद्र सिंह नेगी ने गंगा में छलांग लगा दी।

वहां पहले से अलर्ट जल पुलिस के जवानों ने भी गंगा में छलांग लगा दी। करीब 40 मीटर की दूरी तक बह गए युवक को जल पुलिस के जवानों ने सुरक्षित बाहर निकाल लिया। त्रिवेणी घाट पर ही गुस्साए आंदोलनकारियों ने स्थानीय विधायक और पूर्व पालिकाध्यक्ष के खिलाफ नारेबाजी भी की। उन्होंने शासन और प्रशासन पर इस बड़ी समस्या और आंदोलन की अनदेखी का आरोप लगाया। आंदोलनकारियों का कहना था कि यदि हमारी मांग की सुनवाई हो जाती तो हमें जल समाधि जैसी घोषणा नहीं करनी पड़ती। मौके पर मौजूद वरिष्ठ उप निरीक्षक मनोज नैनवाल के साथ पुलिस की टीम ने मौके से पांच लोगों को गिरफ्तार कर लिया।
कोतवाली के प्रभारी निरीक्षक रितेश शाह ने बताया कि गिरफ्तार किए गए लोगों में अरविंद हटवाल पुत्र अनुसूया प्रसाद हटवाल निवासी गंगा नगर ऋषिकेश, रजत प्रताप सिंह पुत्र अशोक कुमार निवासी लक्कड़ घाट रोड टीचर कॉलोनी श्यामपुर बाईपास ऋषिकेश, रामकुमार संगर पुत्र स्व. सुरेश चंद निवासी आवास विकास कॉलोनी ऋषिकेश,विकास अग्रवाल पुत्र अशोक कुमार अग्रवाल निवासी गली नंबर 14 आशुतोष नगर ऋषिकेश, सुरेंद्र नेगी पुत्र पुराण सिंह नेगी निवासी शिवाजी नगर आइडीपीएल ऋषिकेश शामिल है।

जरुरत मंद को उचित समय में न्याय दिलाना प्राथमिकताः मुख्यमंत्री

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने सचिवालय में सीएम डेशबोर्ड पर केपीआई के आधार पर सूचना प्रौद्योगिकी विभाग की समीक्षा की। उन्होंने कहा कि सेवा के अधिकार में अधिसूचित सेवाएं ऑनलाईन भी उपलब्ध होनी चाहिए। ई-डिस्ट्रिक्ट में वर्तमान की सेवाओं के साथ ही अन्य सेवाओं को भी शामिल किया जाए। जो जिला इसमें बेहतर प्रदर्शन करेगा, उसे पुरस्कृत किया जाएगा। विभागों को डिजी-लॉकर से जोड़ने के लिए सचिव समिति द्वारा विचार किया जाए। एक ही एप्प के अंतर्गत सभी सुविधाएं उपलब्ध हों।
मुख्यमंत्री ने कहा कि सेवा के अधिकार में सेवाएं निर्धारित समय में दी जा रही है या नहीं, इसके लिए सतत मॉनिटरिंग की जाए। सीएम हेल्पलाईन पर वर्तमान में प्रातः 8 बजे से रात्रि 10 बजे तक संचालित की जा रही है। रात्रि 10 बजे से सुबह 8 बजे तक जो भी कॉल आती हैं, उनकी रिकार्डिंग की व्यवस्था की जाए और उन्हें संबंधित अधिकारियों को अग्रसारित किया जाए। सीएम हेल्पलाईन में सभी स्तरों के अधिकारियों की परफोरमेंस वेल्युशन किया जाए। लापरवाह अधिकारियों पर कार्यवाही की जाए। प्रत्येक ब्लॉक में एक-एक डिजीटल विलेज के लिए कार्ययोजना बनाने के निर्देश दिए। ड्रोन एप्लीकेशन सेंटर का व्यापक प्रचार प्रसार किया जाए। ताकि अधिक से अधिक छात्र इसका लाभ उठा सकें।
बैठक में बताया गया कि स्टेट डाटा सेंटर के अंतर्गत वर्तमान में 12 विभाग जुड़े हैं। स्वान से 1474 कार्यालय जुड़ चुके हैं, मार्च 2020 तक 164 कार्यालय और जोड़ दिए जाएंगे। इन्वेस्टर्स समिट के बाद आईटी में 2286 करोड़ रूपए की ग्राउंडिंग हो चुकी है। सीएम डेशबोर्ड से 33 विभाग जुड़े हैं। पीएमजी-दिशा में युवाओं को डिजीटल साक्षरता की ट्रेनिंग दी जा रही है। बैठक में मुख्यमंत्री के तकनीकी सलाहकार नरेंद्र सिंह, सचिव आरके सुधांशु, राधिका झा, निदेशक आईटीडीए अमित सिन्हा, अपर सचिव चंद्रेश यादव, सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

मुख्यमंत्री ने आपदा से हुए नुकसान का आकंलन करने के दिए निर्देश

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने राज्य में घटित प्राकृतिक आपदाओं एवं दुर्घटनाओं से हुए नुकसान आदि के आंकलन, क्षतिपूर्ति, योजनाओं की मरम्मत में हुए वास्तविक व्यय का विवरण 30 सितम्बर तक शासन को उपलब्ध कराने के निर्देश दिये हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि सभी जिलाधिकारियों को आपदा मद में 71 करोड़ धनराशि पूर्व में उपलब्ध करायी जा चुकी है। इसके अतिरिक्त भी जिलाधिकारियों को 30 करोड़ और उपलब्ध कराये गये हैं। उन्होंने कहा कि आपदा राहत एवं इससे हुए नुकसान की भरपाई के लिय धन की कमी आड़े नहीं आने दी जायेगी। मुख्यमंत्री ने आपदा के दौरान त्वरित कार्यवाही के लिये सभी सम्बन्धित आधिकारियों के प्रयासों की सराहना भी की। उन्होंने कहा कि प्रदेश में आपदा से लगभग रू. 300 करोड़ की क्षति होने का अनुमान है। जिलाधिकारियों से इस संबंध में आपदा से हुए नुकसान का पूर्ण विवरण 30 सितम्बर तक प्राप्त होने के बाद इसकी सूचना तद्नुसार केन्द्र सरकार को उपलब्ध कराई जायेगी।
सचिवालय में शासन के उच्चाधिकारियों एवं सभी जिलाधिकारियों के साथ आपदा से हुए नुकसान एवं राहत कार्यों की जनपदवार समीक्षा करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि आपदा राहत एवं इससे हुए नुकसान की भरपाई के लिये धन की कमी नहीं होने दी जायेगी। उन्होंने निर्देश दिये कि आपदा से क्षतिग्रस्त सडकों, पुलों, पेयजल, बिजली, विद्यालय भवनों की मरम्मत का कार्य त्वरित गति से पूर्ण किया जाए। उन्होंने चार धाम यात्रा आरम्भ होने की स्थिति का भी जायजा लिया तथा इसके लिए भी सभी आवश्यक व्यवस्थाएं यथा समय पूर्ण करने को कहा।
मुख्यमंत्री ने यह भी निर्देश दिये हैं कि आपदाग्रस्त योजनाओं की मरम्मत के आंगणनों की स्वीकृति में भी विलम्ब न किया जाये। उन्होंने जिन जनपदों में अपेक्षा से कम वर्षा हुई है वहां उत्पन्न सूखे की स्थिति का भी आंकलन करने को कहा है। मुख्यमंत्री ने सेब की फसल को हुए नुकसान का आंकलन तथा सेब को बाजार तक लाने की भी व्यवस्था सुनिश्चित करने को कहा, इसके लिये यदि अतिरिक्त धनराशि की जरूरत हो तो उसकी भी व्यवस्था की जायेगी। बैठक में सचिव आपदा प्रबन्धन अमित नेगी ने बताया कि प्रदेश में इस वर्ष 15 जून से 14 सितम्बर 2019 तक आपदा से संबंधित 1124 घटनायें हुई हैं, जिसमें 70 लोगों की मृत्यु, 73 घायल तथा 4 लोग लापता हुए हैं। 235 भवन पूर्ण क्षतिगसत तथा इतने ही आंशिक क्षतिग्रस्त हुए हैं। 92 बड़े तथा 356 छोटे पशुओं की हानि तथा 21 गोशालाओं को नुकसान हुआ है, जबकि आपदा से 205 पेयजल योजनाओं तथा 29 विद्युत लाइनों को नुकसान पहुंचा है।

पदोन्नति में आरक्षण पर कर्मचारी संगठन मुखर

जिला पंचायत सभागार में फेडरेशन की अन्य कर्मचारी संघों की प्रांतीय कार्यकारिणी के पदाधिकारियों के साथ बैठक हुई। बैठक में रोस्टर के पुर्ननिर्धारण में एक पक्ष का समर्थन करने पर परिवहन मंत्री यशपाल आर्य की कड़ी निंदा की गई। वक्ताओं ने कहा कि रोस्टर पुर्ननिर्धारण की समस्त कार्रवाई परिवहन मंत्री आर्य की देखरेख में हुई। अब आर्य का जीओ का विरोध करना गलत है। गुस्साए कर्मियों ने सर्वसम्मति से फैसला लिया कि 17 सितंबर को सभी जिलों में आर्य का पुतला फूंका जाएगा। वहीं रोस्टर के पुर्ननिर्धारण के जीओ में छेड़छाड़ हुई तो बिना पूर्व नोटिस के ही कर्मी हड़ताल पर चले जाएंगे। फेडरेशन के प्रांतीय अध्यक्ष दीपक जोशी और महामंत्री वीरेंद्र गुसाईं ने कहा कि पदोन्नति में आरक्षण किसी भी दशा में स्वीकार नहीं है।
पूर्ववर्ती राज्य उप्र की भांति लोकसेवा आयोग की परिधि में आने वाले और आयोग की परिधि के बाहर के पदों की सेवा नियमावली में नियम 5 (क) को तत्काल निरस्त किया जाए। पदोन्नति में रोक लगाकर सभी विभागों में डीपीसी शुरू कराई जाए। वहीं, दूसरे सत्र में फेडरेशन ने जिला कार्यकारिणी के पदाधिकारियों के साथ वार्ता की। इसके बाद तय हुआ कि 16 सितंबर को मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत और मुख्य सचिव उत्पल कुमार सिंह से मुलाकात की जाएगी। बैठक में पर्वतीय कर्मचारी शिक्षक संघ के प्रांतीय अध्यक्ष प्रताप सिंह पंवार और महामंत्री पंचम सिंह बिष्ट, उत्तराखंड मिनिस्ट्रीयल फेडरेशन के महामंत्री पूर्णानंद नौटियाल, कर्मचारी महासंघ अध्यक्ष सूर्य शंकर राणाकोटी, राजकीय वाहन चालक संघ के महामंत्री संदीप मौर्या, मिनिस्ट्रीयल बाल विकास विभाग के मोतीराम खंडूरी, उद्यान तकनीकी कर्मचारी संघ के महामंत्री दीपक पुरोहित, सुपरवाइजर यूनियन बाल विकास की प्रांतीय अध्यक्ष अंजू बडोला एवं महामंत्री रेनू लांबा, डिप्लोमा इंजीनियर्स संघ के अनिल सिंह, वैयक्तिक कर्मचारी संगठन अध्यक्ष मंजू पुंडीर, अखिल भारतीय समानता मंच के डिप्टी सेकेट्री अजीत कुमार, राष्ट्रीय महासचिव विनोद प्रकाश नौटियाल, केंद्रीय सचिव एलपी रतूड़ी, प्रांतीय अध्यक्ष एसएल शर्मा, जेपी कुकरेती, कल्पना बिष्ट, सुभाष देवलियाल आदि मौजूद थे।

13 जिलों से पहुंचे प्रतिनिधि
टिहरी के जिलाध्यक्ष डीपी चमोली, देहरादून जिला संयोजक मुकेश बहुगुणा, नैनीताल जिलाध्यक्ष मनोज तिवारी, कुमाऊं संयोजक पीसी तिवारी, उत्तरकाशी जिलाध्यक्ष नत्थी सिंह रावत, अल्मोड़ा जिलाध्यक्ष धीरेंद्र पाठक, रुद्रप्रयाग जिलाध्यक्ष विक्रम सिंह ङिांक्वाण, ऊधमसिंह नगर संयोजक मोहन सिंह राठौर, चमोली संयोजक महेश सिंह, सचिवालय के जीतराम पैन्यूली, मंडलीय अध्यक्ष राजेंद्र सिंह चैहान, सीएल असवाल, वीके धस्माना आदि मौजूद थे।

नाराजगी जताकर अपना बचाव तो नही कर रहे यशपाल आर्य!

उत्तराखंड में समाज कल्याण और परिवहन विभाग के कैबिनेट मंत्री यशपाल आर्य के इस्तीफे के पेशकश की खबर चर्चा के केंद्र में है। निश्चित तौर पर यह खबर जिस तरह से सामने आई है वह साफ करती है कि यशपाल आर्य की जानकारी और मर्जी के बिना यह जनकरी बाहर आने की संभावना ना के बराबर है। क्योंकि मामला मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत और यशपाल आर्य के बीच का ही था। क्या इसके पीछे वही कारण है जो प्रचारित किया गया है या कुछ और। यह विचारणीय प्रश्न है।
कारण सरकारी सेवाओं में पदोन्नति में रोक लगाने और नया रोस्टर जारी किया गया है। यह फैसला उस कैबिनेट सब कमेटी की सिफारिशों पर किया गया जिसके अध्यक्ष खुद यशपाल आर्य थे और दो अन्य कैबिनेट मंत्री सुबोध उनियाल व अरविंद पाण्डेय उसके सदस्य।
फिलहाल यशपाल आर्य ने अपनी चाल चल दी है। जरा अतीत में जाएं तो ये वही यशपाल आर्य हैं जिनको कांग्रेस से विधान सभा चुनाव के पहले अमित शाह बीजेपी में लेकर आए थे। फिर जब एनएच 74 घोटाले की जांच ने जोर पकड़ा तो उसे ठंडे बस्ते में डाल दिया गया क्योंकि यह उस क्षेत्र का मामला है जहां यशपाल आर्य की राजनीति का गढ़ है। तो क्या यशपाल आर्य ने ये आरक्षित वर्ग को न्यायोचित हक का अस्त्र इसलिए इस्तेमाल किया क्योंकि उनको दिल्ली में पार्टी और सरकार से वह भाव मिलना बंद हो चुका था जो उत्तराखंड विधान सभा चुनाव के दौरान मिला था। जैसे जैसे उनके तमाम किस्से विरोधी दिल्ली पहुंचाते रहे उनकी पकड़ और साख बीजेपी हाई कमान की नजर में कम होती रही।
12 सितंबर को मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने चावल घोटाले का जिक्र कर दिया और बोले कि कुछ लोग अपनी जेब में चावल के कागज लेकर उत्तराखण्ड पहुंचते थे और असली चावल कहीं और चला जाता था। यह भी सीएम का कांग्रेस से बीजेपी में विधान सभा चुनाव के दौरान ही आए दूसरे कबिना मंत्री पर राजनीतिक प्रहार माना गया। कहीं ऐसा तो नहीं कि मुख्यमंत्री अपना दूसरा तीर कमान से छोड़ें उसके पहले ही यशपाल आर्य ने वह दांव लगा दिया जो वोट बैंक को पर असर डालता है इसलिए मुख्यमंत्री सकते में हैं और डैमेज कंट्रोल में जुट गए बताए जा रहे हैं।
अब सरकार एनएच 74 घोटाले पर आगे बढ़ने का साहस नहीं जुटा पाएगी। उधर, उधम सिंह नगर में हुए चावल घोटाले के समय 2012 से 2017 के काल में प्रीतम सिंह खाद्य आपूर्ति मंत्री थे, उनका वर्तमान मुख्यमंत्री के मुंह लगे वरिष्ठ नौकरशाह से 36 का आंकड़ा जग जाहिर है। माना जाता है कि उनके ही उपलब्ध कराए दस्तावेजों के आधार पर अगस्त 17 में त्रिवेंद्र रावत ने जांच शुरू कराई थी। उधर कांग्रेस की अंदरूनी लड़ाई के चलते हरीश रावत भी जांच के लिए मुख्यमंत्री के मददगार अंदरखाने बन रहे थे। अचानक प्रीतम सिंह ने जांच में दो और मुद्दों को शामिल करने की मांग कर डाली। बस मामला कृषि विभाग तक जा पहुंचा और धान पर आ गया। एक वर्तमान काबिना मंत्री तक जांच पहुंचती तो इसे भी एनएच 74 की तर्ज पर ठंडे बस्ते में डाल दिया गया। इसके पहले प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना में हरिद्वार में हुवे घोटाले को भी ये सरकार ठंडे बस्ते में डाल चुकी है। यशपाल आर्य के इस्तीफे की खबर ने इन सभी मुद्दों को गरमा दिया है।
खास तौर पर 2014 से 2019 के दौर में हुवे प्रधान मंत्री कौशल विकास योजना में हुवे घोटाले की जांच को दबाने की जानकारी प्रधानमंत्री तक पहुंचाई जा रही है। इससे लगता है कि आने वाले दिनों में उत्तराखंड की राजनीति में गर्मी बनी रहेगी। इसका असर इन दिनों नजर भी आने लगा है सरकार की उपलब्धियों के इश्तेहारों से अखबारों और चैनलों को उपकृत किया जा रहा है। इस दौर में माध्यमों के लिए यह सकून का संदेश है। तो क्या कांग्रेस से बीजेपी में आया धड़ा सी एम के खिलाफ लाम बंदी कर मंदी के दौर में मोदी सरकार के लिए नया सिरदर्द पैदा करने की कोशिश कर रहा है।
(यह पोस्ट फेसबुक से ली गई है। लेखक निशीथ जोशी पंजाब केसरी उत्तराखंड के संपादक है।)

सरकार के प्रयास से हर वर्ग को मिल रहा सरकारी योजनाओं का लाभ

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने श्यामपुर, ऋषिकेश में विश्व बैंक पोषित अर्द्धनगरीय क्षेत्रों हेतु उत्तराखण्ड पेयजल कार्यक्रम के अन्तर्गत प्रतीत नगर हेतु 25 करोड़ 65 लाख एवं खड़कमाफी हेतु 13 करोड़ 36 लाख रूपये की पेयजल योजनाओं का शिलान्यास किया। मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर श्रीदेव सुमन डिग्री कॉलेज के ऋषिकेश कैंपस हेतु शिक्षा शास्त्र, समाज शास्त्र एवं गृह विज्ञान की कक्षाएं संचालित करने व चार वर्षीय बी.एड के कोर्स के लिए सहमति दी। उन्होंने कहा कि इस कॉलेज की चारदीवारी की जायेगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि विधानसभा अध्यक्ष द्वारा ऋषिकेश क्षेत्र की जिन विभिन्न समस्याओं से अवगत कराया गया हैं उनका परीक्षण कर समाधान करने का हर सम्भव प्रयास किया जायेगा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि इस पेयजल योजना के पूर्ण होने पर ऋषिकेश क्षेत्र की जनता को प्रतिदिन 16 घण्टे पेयजल उपलब्ध होगा। उन्होंने कहा कि सरकार का प्रयास है कि समाज के हर वर्ग को सरकार की विभिन्न योजनाओं का फायदा मिले। राज्य सरकार द्वारा किसानों को बिना ब्याज के एक लाख तक एवं स्वयं सहायता समूहों को 5 लाख रूपये तक का ऋण दिया जा रहा है। पर्वतीय क्षेत्रों में रोजगार के अवसर बढ़ाने के लिए 58 ग्रोथ सेंटर की स्वीकृति दी जा चुकी है, 40 ग्रोथ सेंटरों की जल्द स्वीकृति प्रदान की जायेगी। राज्य के सभी परिवारों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध कराने के लिए अटल आयुष्मान उत्तराखण्ड योजना के तहत प्रत्येक परिवार को 05 लाख रूपये तक की निःशुल्क स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है। अभी तक 70 हजार से अधिक लोग इस योजना का फायदा ले चुके हैं।
मुख्यमंत्री कहा कि अर्द्धनगरीय क्षेत्रों के लिए राज्य में पेयजल की कुल 970 करोड़ रूपये की योजना पर कार्य किया जा रहा है। स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) के तहत राज्य को सात पुरस्कार मिले। उत्तराखण्ड को कुपोषण मुक्त करने के लिए कुपोषित बच्चों को गोद लिया गया है। इन बच्चों की निरन्तर निगरानी की जायेगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि ऋषिकेश में अन्तरराष्ट्रीय कन्वेशन सेंटर खोला जा रहा है। इस सेंटर में राष्ट्रीय एवं अन्तरराष्ट्रीय स्तर की गोष्ठियां आयोजित की जायेगी। इससे स्थानीय लोगों के रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे।
विधानसभा अध्यक्ष प्रेमचन्द अग्रवाल ने कहा कि पिछले दो सालों में ऋषिकेश विधानसभा में सड़क, विद्युत, सीवरेज, घाटों के सौन्दर्यीकरण, नमामि गंगे के तहत अनेक कार्य हुए हैं। उन्होंने कहा कि पिछले दो सालों में ऋषिकेश विधानसभा में लगभग 25 करोड़ रूपये की सड़कों का कार्य हुआ, विद्युत विभाग के अन्तर्गत 65 ट्रांसफार्मर लगे, 175 कि.मी की बंचिंग केबल लगाई जा रही है। नमामि गंगे के अन्तर्गत 158 करोड़ की लागत के सीवरेज का कार्य चल रहा है। त्रिवेणी घाट के सौन्दर्यीकरण का कार्य तेजी से चल रहा है।
उच्च शिक्षा राज्य मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने कहा कि ऋषिकेश में उच्च शिक्षा के लिए श्रीदेव सुमन का कैंपस खुलने से अब यहां के विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा के लिए एडमिशन में दिक्कत नहीं होगी। उन्होंने कहा कि छात्रों के हित को देखते हुए ग्रेजुएशन स्तर पर सेमेस्टर सिस्टम को खत्म किया गया है। ऋषिकेश के डिग्री कॉलेज के लिए मुख्यमंत्री ने 6.5 करोड़ रूपये की स्वीकृति दी है।
इस अवसर पर मेयर अनीता मंमगाई, सचिव पेयजल अरविन्द सिंह ह्यांकी आदि उपस्थित थे।

आंदोलन को धार देने के लिए की थी राजनीति, ऐसे थे रणजीत सिंह वर्मा

जननायक और पूर्व विधायक रहे रणजीत सिंह वर्मा की अंतिम यात्रा में आज सुबह भारी हुजूम उमड़ा। सुबह दस बजे उनके आवास से अंतिम यात्रा निकली और लक्खीबाग देहरादून में उनका अंतिम संस्कार किया। बतातें चले कि सोमवार सुबह सात बजे उनका स्वर्गवास हो गया था।
पूर्व विधायक और राज्य आंदोलनकारी रणजीत सिंह वर्मा का सोमवार सुबह जौलीग्रांट अस्पताल में निधन हो गया। वे 86 वर्ष के थे। अस्पताल में पिछले पांच दिनों से उनका इलाज चल रहा था। वे अविभाजित उत्तरप्रदेश की मसूरी विधानसभा के दो बार विधायक रहे थे। उनके निधन पर उनके निकट सहयोगी रहे क्षेत्र के तमाम लोगों ने दुख जताया है। जौलीग्रांट के पूर्व प्रधान और उनके सहयोगी रहे कुंवर सिंह मनवाल कहते हैं कि उनके निधन की खबर डोईवाला के लिए अपूर्णनीय क्षति है।
मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने भी उनके निधन पर शोक जताया है। उन्होंने दिवंगत आत्मा की शांति एवं दुरूख की इस घड़ी में उनके परिजनों को धैर्य प्रदान करने की कामना की है। मुख्यमंत्री ने कहा कि पृथक उत्तराखंड के निर्माण में रणजीत सिंह के संघर्षों को सदैव याद रखा जाएगा।

शिक्षा के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान
पूर्व विधायक रणजीत सिंह वर्मा के निधन पर डोईवाला क्षेत्र के लोग स्तब्ध हैं। उनका नाम शिक्षा के प्रचार प्रसार और गन्ना राजनीति में बेहद आदर के साथ लिया जाता है। आजीवन मूल्यों और सिद्धांतों पर चलकर उन्होंने गन्ना राजनीति और डोईवाला में शिक्षा को बढ़ावा देने का काम किया। पृथक राज्य निर्माण में अग्रणी भूमिका निभाने वाले पूर्व विधायक रणजीत सिंह वर्मा का कार्य क्षेत्र डोईवाला रहा।
तरली जौलीग्रांट में उनका निवास स्थान है। क्षेत्र में उनके पास काफी खेती बाड़ी होने के कारण प्रगतिशील किसान कहा जाता रहा है। गन्ना राजनीति में करीब तीन दशक से भी अधिक समय तक उनकी पकड़ रही है। गन्ना परिषद डोईवाला में करीब 25 सालों तक लगातार अध्यक्ष का दायित्व निभाया।
डोईवाला शुगर मिल के पुनर्निर्माण में भी उनका बड़ा योगदान रहा। अविभाजित उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री रहे स्व. नारायणदत्त तिवारी से उनका स्नेह होने के कारण डोईवाला चीनी मिल की पेराई क्षमता बढ़ाकर उसको आधुनिक रूप दिलाने में उन्होंने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इसके साथ ही एक शिक्षक के रूप में भी उन्होंने काम किया। क्षेत्र के सबसे पुराने पब्लिक इंटर कॉलेज डोईवाला के प्रबंधक का काम साल 1966 से 2018 तक निभाया। जबकि आर्य कन्या पाठशाला इंटर कॉलेज के वह अभी तक प्रबंधक रहे।

बिना लाइसेंस ठेली नहीं लगा सकेंगे वेंडर्स

शहर में फेरी नीति लागू करने के लिए गठित कमेटी की बैठक नगर निगम में हुई। बैठक में निर्णय लिया गया कि क्षेत्र में नगरीय फेरी नीति लागू होने के बाद परिवार के एक सदस्य को ही लाइसेंस जारी किया जाएगा। साथ ही इनकी जगह, समय और दूूरी भी निश्चित की जाएगी। इन्हें निगम की ओर से पथ प्रकाश, पानी और शौचालय की भी सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी। बैठक में मुख्य नगर आयुक्त चतर सिंह चौहान ने फेरी संगठनों के नामित सदस्यों को 20 दिन के भीतर निगम क्षेत्र के वेंडर्स की सूची उपलब्ध कराने को कहा।

सूची में वेंडर्स का नाम, फोटो, मोबाइल और पता भी उपलब्ध कराना होगा। उन्होंने कहा कि 20 दिनों के बाद किन जगहों पर आपत्ति है, यह समिति के सभी सदस्य निश्चय करेंगे। एनएनए ने बताया कि वेंडर्स को लेकर तीन क्षेत्र चयनित किए जाएंगे। इसमें पहला गैर प्रतिबंधित ठेली क्षेत्र (बिना रोक टोक वेडर्स ठेली लगा सकते है), दूसरा नियंत्रित ठेली क्षेत्र (कुछ ही लोगों को ठेली लगाने की परमिशन दी जाएगी, इसमें दिन, दूरी और समय निश्चित किया जाएगा) और तीसरा ठेली रहित क्षेत्र (इस क्षेत्र में कोई भी ठेली खड़ी नहीं हो पाएगी)। इस दौरान सहायक नगर आयुक्त उत्तम सिंह नेगी, डॉ. संतोष पंत, सब इंस्पेक्टर कुलदीप, ट्रैफिक सब इंस्पेक्टर राजेंद्र, राजू गुप्ता, राहुल पाल, मुसाफिर साहनी, कुसुम गुप्ता, लता देवी आदि उपस्थित रहे।

एक साल के लिए होगा पंजीकरण
एमएनए चतर सिंह चौहान ने बताया कि वेंडर्स के लिए पंजीकरण एक साल के लिए ही मान्य होगा। हर साल पंजीकरण को नवीनीकरण कराना होगा। उन्होंने बताया कि पंजीकरण का शुल्क वेंडर्स की सूची आने के बाद ही तय किया जाएगा। उन्होंने बताया कि जो वेंडर्स इस सूची से वंचित रह जाएगा। उसका नाम अगले पांच साल बाद ही जुड़ सकेगा।

बैठक में यह भी तय हुआ
– जिस स्थान का लाइसेंस वेंडर्स को मिलेगा, वह उसी स्थान पर ठेली लगाएगा।
– एक स्थान पर सीमित संख्या से ज्यादा आवेदन आने पर, लॉटरी से चयन किया जाएगा।
– स्थिर, चलायमान और साइकिल से वस्तु विक्रय करने वालों को भी लाइसेंस दिया जाएगा।
– जिसके नाम लाइसेंस उपलब्ध होगा, वही व्यक्ति कार्य करेगा।
– एक व्यक्ति एक से ज्यादा ठेली नहीं लगा सकेगा।
– ठेली और फड़ के आसपास गंदगी करने पर पेनल्टी लगेगी।
– वेंडर्स को कूड़ा उठान की सुविधा, पथ प्रकाश, शौचालय, पानी आदि की सुविधा निगम उपलब्ध कराएगा।
– शर्तों का उल्लंघन करने पर शुरूआती दो चरणों में चालान वसूला जाएगा, तीसरे चरण में लाइसेंस निरस्त कर दिया जाएगा।