प्रत्येक तीसरी लोकसभा में एक मेडिकल कॉलेज बनाने का लक्ष्यः अमित शाह

केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने कहा कि देश को स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में नंबर वन बनाने के लिए मोदी सरकार लगातार कार्य कर रही है। केंद्र सरकार ने देश के प्रत्येक राज्य में एम्स खोलने का लक्ष्य रखा है। उन्होंने कहा कि प्रत्येक तीसरी लोकसभा में एक मेडिकल कॉलेज बनाने का लक्ष्य हम वर्ष 2024 तक पूरा करेंगे। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) के द्वितीय दीक्षांत समारोह में बतौर मुख्य अतिथि संबोधित कर रहे थे।
अपने संबोधन में उपाधि प्राप्त करने वाले चिकित्सकों एवं उनके परिजनों को बधाई व शुभकामनाएं देते हुए केंद्रीय गृहमंत्री ने कहा कि ऋषिकेश एम्स ने स्वास्थ्य के क्षेत्र में कम समय में सराहनीय कार्य किया है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्वास्थ्य के क्षेत्र में बहुत से कदम उठाए हैं, जिनमें अटल आयुष्मान योजना एवं प्रधानमंत्री जन औषधि योजना के साथ ही देश में एम्स की संख्या को बढ़ाकर 22 करना जैसे कार्य शामिल हैं।
गृह मंत्री ने कहा कि स्वामी विवेकानंद के अनुसार अपनी जगह दूसरे के सुख का विचार करने वाला ही सच्चा ज्ञानी है। देश के दूरस्थ क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं को पहुंचाना हमारा लक्ष्य होना चाहिए। देश के नागरिक स्वस्थ हों, दूरस्थ क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध हो सकें, इसके लिए आप सभी को अपना महत्वपूर्ण योगदान देना होगा। आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना विश्व की सबसे बड़ी स्वास्थ्य योजना है, जिससे अब तक लगभग एक करोड़ लोग लाभान्वित हुए हैं।

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉ. हर्षवर्धन कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेई के कार्यकाल में एम्स की स्थापना हुई। तत्कालीन स्वास्थ्य मंत्री सुषमा स्वराज ने इस काम को आगे बढ़ाया। ऋषिकेश में एम्स की स्थापना उन्हीं के कार्यकाल में हुई थी, मुझे खुशी है इस बात की कि तेजी के साथ विकास कर रहा है। उन्होंने कहा कि यहां से उपाधि लेने वालों सम्मानित करने का मौका मिल रहा है यह भी हमारे लिए गौरव की बात है। कहा कि यहां स्पेशलिस्ट और सुपर स्पेशलिस्ट चिकित्सक अपनी सेवाएं दे रहे हैं। इसका लाभ सिर्फ उत्तराखंड कोई नहीं मिल रहा है, बल्कि देश के पश्चिम क्षेत्र को भी इसका लाभ मिल रहा है। आने वाले समय में देश को 22 और एम्स मिलने वाले हैं। अटल बिहारी वाजपेई ने छह एम्स से शुरुआत की थी। वर्तमान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस काम को तेजी के साथ आगे बढ़ाया है।
केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री रमेश पोखरियाल निशंक ने कहा कि ऋषिकेश पूरे विश्व में योग की राजधानी है। अध्यात्म के शिखर का यह स्थान है। यहां दीक्षा समारोह का होना गौरव की बात है। उपाधि ग्रहण करने वालों को समाज में जाकर लोगों के जीवन की रक्षा करनी है। देश के विराट व्यक्तित्व गृह मंत्री अमित शाह के हाथों आप सभी को उपाधि मिल रही है, यह बड़े गौरव की बात है।

एम्स ऋषिकेश के निदेशक प्रो. रविकांत ने युवा चिकित्सकों को दुनिया से सीखो और दुनिया को भी सिखाओ की सीख दी। उन्होंने कहा कि युवा चिकित्सकों को सदा स्मरण रखना चाहिए कि चिकित्सा व्यवसाय में रोगियों के लिए हर समय उपलब्ध होना, अपने कार्य में दक्ष होना और मिलनसार होना अनिवार्य है। एक डॉक्टर के कार्य की कुशलता इतनी ही नहीं है कि वह मरीज को कितनी जल्दी ठीक करता है, बल्कि मरीज का ठीक होना बहुत हद तक इस बात पर भी निर्भर करता है कि डॉक्टर का मरीज के साथ कैसा व्यवहार है। उन्होंने युवा चिकित्सकों से कहा कि प्रारंभिक वर्षों में आपका व्यवहार ही आपको आगे बढ़ने में मदद करेगा। उन्होंने कहा कि प्रत्येक रोगी से बातचीत आपकी क्षमताओं का परीक्षण और सीखने का अनुभव प्रदान करेगी। उन्होंने युवा चिकित्सकों से आह्वान किया कि वे वंचित तबके के लोगों पर विशेष ध्यान दें। अपकी डॉक्टरी तभी सभी सफल होगी, जब आपकी उत्कृष्टता का लाभ समाज के निचले तबके तक पहुंचेगा।
इस अवसर पर विधानसभा अध्यक्ष प्रेम चंद अग्रवाल, भाजपा प्रदेश अध्यक्ष बंशीधर भगत, कैबिनेट मंत्री मदन कौशिक, डॉ. हरक सिंह रावत, सुबोध उनियाल, राज्य मंत्री धन सिंह रावत, मुख्य सचिव उत्पल कुमार सिंह, डीजीपी अनिल रतूड़ी, विधायक एवं अध्यक्ष एम्स ऋषिकेश पद्मश्री डॉ. समीरन नंदी भी उपस्थित थे।

दूसरा दीक्षांत समारोह हुआ सम्पन्न
केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह 13 पीएचडी, पीजी, एमबीबीएस 2013, 2014, बीएससी नर्सिंग, एमएससी नर्सिंग के विद्यार्थियों को डिग्री और मेडल देकर सम्मानित करेंगे। उन्होंने बताया कि कुल 252 विद्यार्थियों को डिग्री दी जानी है। साथ ही 132 विद्यार्थियों को प्रशस्ति पत्र भी दिए जाने हैं। एम्स के प्रथम दीक्षांत समारोह में राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने शिरकत की थी।

आयुर्वेद से किया जा सकता है कोरोना का उपचारः बाबा रामदेव

विश्व स्वास्थ्य संगठन ने कोरोना वायरस को महामारी घोषित किया है। इसके बाद से ही देशभर में लगातार कोरोना वायरस के संदिग्ध मरीजों की संख्या में वृद्धि हो रही है। ऐसे में योग गुरू बाबा रामदेव का राहत प्रदान करने वाला बयान सामने आया है। योगगुरू के अनुसार, कोरोना का उपचार आयुर्वेद से भी किया जा सकता है।

उन्होंने कहा कि सेनिटाइजर की कमी हो गई है। साथ ही सेनिटाइजर दोगुने दामों पर भी बेचा जा रहा हैं। योग गुरु स्वामी रामदेव और आयुर्वेदाचार्य बालकृष्ण ने इसका अचूक विकल्प सुझाया है। स्वामी रामदेव ने बताया कि एक लीटर पानी में 100 ग्राम नीम के पत्ते और तुलसी के दस पत्ते मिलाकर उबाल लें। उबालने के बाद पानी को छानकर ठंडा करें। एक बोतल में दस ग्राम फिटकरी और दस ग्राम कपूर बारीक पीसकर घोल लें। इस सारे द्रव्य को छानकर शीशी में भरकर रखें। इस प्रकार यह प्राकृतिक सेनिटाइजर तैयार हो जाएगा। स्वामी रामदेव ने बताया कि प्राकृतिक रूप से बनाया गया सेनिटाइजर बाजार में बिकने वाले महंगे सेनिटाइजर से कई गुणा अधिक लाभकारी होगा।

आचार्य बालकृष्ण नेे बताया कि गिलोय वटी, तुलसी वटी, नीम वटी, अदरक और नींबू का रस एक साथ लेने से शरीर में रोग प्रतिरोधक क्षमता उत्पन्न होती है। गिलोय और तुलसी की वटी रोजाना दो-दो की संख्या में नियम पूर्वक दोनों समय ली जानी चाहिए। उन्होंने बताया कि कोरोना के प्रति सभी को अधिक से अधिक जागरूकता बरतनी चाहिए।

कोरोना वायरसः जिलाधिकारियों को मुख्यमंत्री ने दिए निर्देश

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने सचिवालय में कोरोना वायरस से निपटने हेतु राज्य स्तर पर की गयी तैयारियों के सम्बन्ध में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से जिलाधिकारियों के साथ बैठक की। मुख्यमंत्री ने कोरोना वायरस से निपटने हेतु सभी आवश्यक कदम उठाने के निर्देश दिए। उन्होंने समस्त जिलाधिकारियों को अपने जनपदों में आइसोलेशन वार्ड की स्थापना, प्रशिक्षित चिकित्सकों एवं पैरामेडिक स्टाफ सहित आवश्यक दवाईयों की व्यवस्था करने निर्देश दिए। उन्होंने संदिग्ध मरीजों के स्थानांतरण हेतु डेडिकेटेड एम्बुलेंस और प्रशिक्षित स्टाफ की व्यवस्था करने के भी निर्देश दिए।
अफवाहों को रोकने हेतु लगातार किया जाए सूचनाओं का आदान प्रदान
मुख्यमंत्री ने कहा कि कोरोना वायरस से बचाव एवं जागरूकता हेतु प्रदेशभर में चलायी जा रही वर्चुअल क्लासिस एवं विश्वविद्यालयों का उपयोग किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि कोरोना वायरस से बचाव हेतु जारी एडवायजरी का प्रचार-प्रसार किया जाए। मुख्यमंत्री ने कोरोना वायरस से निपटने हेतु सभी विभागाध्यक्षों को आपस में समन्वय बनाकर कार्य करने के निर्देश दिए। उन्होंने जिलाधिकारियों को यह भी निर्देश दिए कि कोरोना वायरस के सम्बन्ध में किसी भी प्रकार की अफवाहों को रोकने हेतु लगातार मुख्य चिकित्साधिकारियों द्वारा जिला सूचना कार्यालयों के माध्यम से सूचनाओं का आदान प्रदान तेजी से किया जाए। उन्होंने निर्देश दिए कि सैनेटाईजर एवं मास्क आदि की ओवर रेटिंग एवं कालाबाजारी न होने पाए, इसके लिए भी व्यवस्थाएं बनायी जाएं। कालाबाजारी एवं ओवर रेटिंग को रोकने हेतु कड़े कदम उठाए जाएं।
सीमावर्ती क्षेत्रों में यात्रियों की लगातार की जाए स्क्रीनिंगः मुख्यमंत्री
मुख्यमंत्री ने चीन एवं नेपाल से लगे सीमावर्ती क्षेत्रों में यात्रियों की लगातार स्क्रीनिंग किए जाने के निर्देश दिए। उन्होंने निर्देश दिए कि कोरोना वायरस के प्रभावी रोकथाम एवं नियंत्रण हेतु संदिग्ध रोगी या किसी भी प्रकार की असामान्य स्थिति की सूचना मिलने पर राज्य एवं जनपद स्तर पर रेपिड रिस्पान्स टीम द्वारा त्वरित कार्यवाही की जाए। मुख्यमंत्री ने जिलाधिकारियों को सभी आवश्यक व्यवस्थाएं करने के निर्देश देते हुए कहा कि यदि किसी भी प्रकार की समस्या होने पर यथाशीघ्र शासन को अवगत कराया जाए, ताकि समय पर आवश्यक व्यवस्थाएं बनायी जा सकें। उन्होंने अधिकारियों को चम्पावत में पूर्णागिरी के मेले के अवसर पर अतिरिक्त चिकित्सकों एवं स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने के भी निर्देश दिए।

कोरोनावायरस से बचने के लिए इन उपायों को करें

कोरोनावायरस से पूरा विश्व में दहशत है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के मुताबिक, कोरोनावायरस से भी खतरनाक वायरस पहले भी सक्रिय हुए हैं। इनसे बड़ी संख्या में लोग ग्रसित हुए और मौत का शिकार भी हुए जबकि कोरोना में राहत वाली बात यह है कि इसमें मृत्यु दर बहुत कम है। फिर भी कोरोना को लेकर दहशत का माहौल बहुत ज्यादा है। ऐसे में डॉक्टर दहशत में न आने और एहतियात बरतने की सलाह दे रहे हैं।

क्या है कोरोनावायरस
चिकित्सकों ने बताया कि कोरोना (कोविद-19) वायरस विषाणुओं का एक बड़ा समूह है। जो इंसानों में सामान्य जुकाम से लेकर श्वसन तंत्र की गंभीर समस्या तक पैदा कर सकता है। इसके अलावा कोरोनावायरस से सार्स और मर्स जैसी जानलेवा बीमारियां भी हो सकती हैं।

कोरोना इंफेक्शन के लक्षण
कोरोनावायरस की वजह से रेस्पेरेटरी ट्रेक्ट यानी श्वसन तंत्र में हल्का इंफेक्शन हो जाता है। जैसा कि आमतौर पर कॉमन कोल्ड यानी सर्दी, जुकाम में देखने को मिलता है। हालांकि इस बीमारी के लक्षण बेहद कॉमन है और कोई भी कोरोनावायरस से पीड़ित न हो तब भी उसमें ऐसे लक्षण दिख सकते हैं। जिसमें नाक बहना, सिर में तेज दर्द, खांसी और कफ, गला खराब, बुखार, थकान और उल्टी महसूस होना, सांस लेने में तकलीफ होना, निमोनिया और ब्रांकाइटिस।

कैसे फैलता है कोरोना
यह वायरस बीमार रोगी के खांसने, छींकने से स्वस्थ इंसान के शरीर में सांस व मुंह के रास्ते प्रवेश करता है।

कैसे बचे-सुझाव
– जब कोई खांसे या छींके तो आपको उस व्यक्ति से छह फीट से अधिक रखनी चाहिए, ताकि विषाणु आप तक जीवित न पहुंच सके।
– मुंह को मास्क से कवर कर रखें और रोज बदलें
– मास्क न होने पर कुहनी से मुंह ढक कर खांसे
– बचाव के लिए भीड़भाड़ वाले इलाके में प्रवेश न करें। शुरुआती दौर में संक्रमित व्यक्ति में कोई लक्षण नहीं दिखते बल्कि यह रोग को फैलाने मेें सक्षम होता है।
– किसी भी संभावित संक्रमित वस्तु को छूने के बाद हाथों को पानी साबुन से 20 सेकेंड तक धोएं।
– हाथ मिलाने से बचें, अभिवादन के लिए नमस्ते कर सकते हैं।

वहीं, स्वास्थ्य महानिदेशक डॉ. अमिता उप्रेती ने बताया कि कोरोना को लेकर घबराने की नहीं सावधानी बरतने की जरूरत है। अफवाहों पर ध्यान न दें। उत्तराखंड में कोरोना का कोई केस अब तक सामने नहीं आया है। एक कोरोना मरीज के निजी अस्पताल में भर्ती होने का जो पत्र वायरल हुआ है, वह निराधार हैं। देहरादून के किसी निजी अस्पताल में कोरोना का मरीज भर्ती नहीं है। पत्र में गलत तथ्य लिखने वाले संबंधित चिकित्सा अधिकारी से स्पष्टीकरण तलब किया है।

सात दिवसीय अंतरराष्ट्रीय योग महोत्सव का सीएम त्रिवेन्द्र सिंह, यूपी सीएम योगी आदित्यनाथ ने किया शुभारंभ

रविवार को मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्य नाथ ने संयुक्त रूप से अंतरराष्ट्रीय योग महोत्सव का शुभारंभ किया। मुनिकीरेती स्थित गंगा रिसोर्ट में आयोजित 7 दिवसीय महोत्सव में विश्व के 11 देशो एवं देश के 09 राज्यों के योगाचार्यो, शिक्षकों एवं योग प्रेमीं प्रतिभाग कर रहे है।

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह ने कहा कि योग को विश्वव्यापी पहचान दिलाने में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अह्म भूमिका रही है। उत्तराखण्ड को योग के हब एवं ऋषिकेश को विश्व योग के केन्द्र बिन्दु के रुप में स्थापित करने के लिए सरकार ने व्यापक स्तर पर कार्य किया है। योग को पर्यटन से जोड़ने और योग के साथ-साथ पर्यटन हब के रुप में उत्तराखण्ड को विकसित करने के लिए सरकार व्यापक स्तर पर कार्य कर रही है।

उन्होने कहा कि अध्यात्मिक योग के माध्यम से पर्यटकों को आकर्षित करने का कार्य सरकार कर रही है। योग विश्व स्वास्थ्य एवं कल्याण के लिए जरुरी है जिसकी आवश्यकता आज पूरी दुनिया को महसूस होने लगी है जिसका परिणाम है कि आज विश्व में जहां भी योग की शुरुआत हो रही है वहॉ उत्तराखण्ड के योग शिक्षकों को सर्वोच्च प्राथमिकता व सम्मानस्वरुप बुलाया जा रहा है।?

ऋषिकेश विश्व पटल पर योग का केंद्र बिंदुः योगी आदित्यनाथ
इस अवसर पर उत्तर-प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि भारत में ऋषि की परम्परा एव साधना के परिणामस्वरुप योग का उत्थान जीवों के कल्याण के लिए हुआ है। योग जैसी अध्यात्म और पवित्र विद्या को दुनिया के कोने-कोने में पंहुचाने और योग का विश्व गुरु बनने में भारत के प्रधानमंत्री का अथक प्रयास रहा है। इसके साथ ही उत्तरखण्ड का शहर ऋषिकेश विश्व पटल पर योग का केन्द्र बिन्दु के रुप में उभरा है। उन्होने प्रधानमंत्री के स्वच्छ भारत की सराहना करते हुए कहा कि यदि स्वच्छ के बाद योग को अपनाया जाय तो अनेक बीमारियों से निजात मिल सकती है। स्वच्छ काया शरीर में योग के माध्यम से शारीरिक, मानसिक मजबूती एवं प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाया जा सकता है। उन्होने कहा कि विश्व का कोई भी देश जब योग परम्परा से जुड़ता है तो वह भारत की आत्मीयता से जुड़ता है और यह बात देश को गौरवान्वित करती है।

इस अवसर पर उन्होने वर्ष 2021 में हरिद्वार में आयोजित होने वाले कुम्भ में उत्तराखण्ड सरकार को सहयोग दिये जाने की बात भी कही। वहीं पर्यटन के क्षेत्र में उत्तराखण्ड सरकार द्वारा किये जा रहे कार्यो की सराहना की। उन्होंने कहा कि गत विगत माह में उत्तराखण्ड में खूब बर्फबारी हुई जिसमें उत्तरप्रदेश सहित देश के विभिन्न राज्यों एवं विदेशी पर्यटकों का जबरदस्त आवागमन रहा।

इस अवसर पर विधानसभा अध्यक्ष प्रेमचन्द्र अग्रवाल, उच्च शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत, सचिव पर्यटन दिलीप जावलकर, अध्यक्ष जीएमवीएन महावीर सिंह रांगड़, महामण्डलेश्वर जूना अखाडा स्वामी अवदेश्वरानन्द महाराज, जिलाधिकारी टिहरी गढ़वाल डॉ. वी षणमुगम, एसएसपी डॉ. योगेन्द्र सिंह रावत आदि उपस्थित रहे।

त्रिवेन्द्र सरकार ने दी राहत, अब सीधे करा सकेंगे प्राइवेट अस्पताल में इलाज

उत्तराखंड सरकार ने राज्य अटल आयुष्मान योजना का दायरा बढ़ा दिया है। प्रदेश के चार लाख सरकारी कर्मचारियों को इस योजना के अधीन लाया गया है। मामूली शुल्क देकर सरकार कर्मचारी, पेंशनर और उनके परिजन असीमित धनराशि के मेडिकल कवर के दायरे में आएंगे। यही नहीं, अन्य गोल्डन कार्ड धारक भी देश में कहीं भी पांच लाख रुपये तक का निशुल्क कैशलेस इलाज करा सकेंगे।
मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत की अध्यक्षता में शुक्रवार को मंत्रिमंडल की बैठक में 14 प्रस्तावों को मंजूरी मिली। सूत्रों के अनुसार आयुष्मान योजना के तहत सरकारी अस्पताल से रेफर करवाने की व्यवस्था में व्यापक बदलाव किया गया है। अब मरीज सरकारी और गैर सरकारी मेडिकल कॉलेजों के साथ एनएबीएच (नेशनल एक्रिडेशन बोर्ड फॉर हास्पिटल्स एंड हेल्थ केयर) से मान्य अस्पतालों में सीधे जाकर इलाज करवा सकेगा। अटल आयुष्मान उत्तराखंड योजना के लिए कर्मचारियों के अंश को एक समान कर दिया गया है।
ओपीडी का नकद भुगतान, आईपीडी कैशलेस
त्रिवेंद्र सरकार ने प्रदेश के तीन लाख कर्मचारियों, पेंशनरों और उनके आश्रितों को अटल आयुष्मान योजना अनलिमिटेड कैशलेस इलाज की सुविधा दे दी है। ओपीडी इलाज के खर्च का कर्मचारियों को नकद भुगतान किया जाएगा। वहीं आईपीडी इलाज में कैशलेस की सुविधा मिलेगी। एक अप्रैल से कर्मचारियों के लिए यह स्कीम शुरू होगी। कर्मचारियों, पेंशनरों व उनके आश्रितों के लिए 15 लाख गोल्डन कार्ड बनाए जाएंगे।
अटल आयुष्मान योजना में अनलिमिटेड कैशलेस इलाज के लिए कर्मचारियों व पेंशनरों को प्रतिमाह के हिसाब से प्रीमियम देना होगा। इसके लिए सरकार ने पे स्केल के आधार पर केंद्रीय हेल्थ स्कीम (सीजीएचएस) की तरह प्रीमियम की दरें निर्धारित की है। पेंशनरों के लिए वन टाइम प्रीमियम जमा करने का विकल्प भी दिया है।
कर्मचारियों व पेंशनरों के गोल्डन कार्ड आल इंडिया पोर्टेबिलिटी होने से देश के किसी भी पंजीकृत अस्पताल में इलाज की सुविधा मिलेगी। इसके लिए रेफर की शर्त नहीं रहेगी। ओपीडी में इलाज कराने के लिए कर्मचारियों को पैसा देना पड़ेगा। मेडिकल बिल विभाग से मंजूर कराने के बाद राज्य स्वास्थ्य प्राधिकरण की ओर से कर्मचारियों को भुगतान किया जाएगा।
निगम और बोर्ड कर्मचारियों को भी मिलेगा लाभ
सरकारी क्षेत्र के निगम व बोर्डों में कार्यरत 40 हजार से अधिक कर्मचारियों को भी कैशलेस इलाज की सुविधा मिलेगी। पहले निगम व बोर्ड को प्रस्ताव पारित कर सरकार को भेजना होगा। लंबे समय से निगम के कर्मचारी राजकीय सेवा के कर्मचारियों की तर्ज पर कैशलेस की सुविधा देने की मांग कर रहे थे।
मेडिकल कालेज और एनएएचबी मान्य प्राप्त अस्पतालों में रेफर व्यवस्था खत्म
केंद्र व राज्य सरकार की अटल आयुष्मान योजना को मर्ज किया है। प्रदेश के सरकारी व प्राइवेट मेडिकल कालेजों के साथ राष्ट्रीय हेल्थ एवं केयर बोर्ड से मान्यता प्राप्त अस्पतालों में गोल्डन कार्ड मरीज सीधे इलाज करा सकते हैं। इसके लिए उन्हें रेफर होने की शर्त नहीं रहेगी। प्रदेश के गोल्डन कार्ड केंद्र योजना से जुड़ जाने से देश के किसी भी पंजीकृत अस्पताल में पांच लाख तक सीमा तक इलाज करा सकेंगे।

श्रेणी के अनुसार कर्मचारियों और पेंशनरों का प्रतिमाह अशंदान
स्तर अंशदान रुपये में
1 से 5 स्तर (चतुर्थ श्रेणी) 250
6 स्तर (तृतीय श्रेणी) 450
6 से 11 श्रेणी(द्वितीय श्रेणी) 650
12 से श्रेणी से ऊपर (अधिकारी) 1000

नगर निगम की टीम ने मांस विक्रेताओं को नोटिस जारी किये

स्वास्थ्य अधिकारियों से जांच करवाए बिना मांस बेचने वालों पर नगर निगम का डंडा चला। इस दौरान निगम की टीम ने यहां दो मांस विक्रेताओं का चालान काटकर दस हजार रुपये जुर्माना वसूला है। साथ ही छह लोगों को स्वास्थ्य विभाग ने नोटिस भी जारी किया गया है।
नगर निगम और खाद्य सुरक्षा विभाग की संयुक्त टीम इंद्रा नगर स्थित मीट मार्केट पहुंची। इस दौरान सफाई निरीक्षक सचिन रावत ने मांस विक्रेताओं के लाइसेंस और नालियों का निरीक्षण लिया। इसमें अधिकांश के लाइसेंस की वैधता समाप्त पाई गई। इस पर सफाई निरीक्षक ने शीघ्र ही ऑनलाइन लाइसेंस नवीनीकरण कराने का निर्देश दिया। इस दौरान उन्होंने दो मांस विक्रेताओं का चालान कर दस हजार रुपये का जुर्माना वसूला। खाद्य सुरक्षा अधिकारी संजय तिवारी ने यहां बिक रहे मांस का परीक्षण किया। इसमें उन्होंने छह मीट विक्रेताओं को बिना मांस की जांच कराए बिक्री करने पर नोटिस जारी किया है। उन्होंने कहा कि स्लाटर हाउस में मांस कटना चाहिए। साथ ही वहीं डॉक्टरों को मांस का निरीक्षण करवाना चाहिए। उनकी लिखित सहमति के बाद ही मांस को बेचा जा सकता है। इस अवसर पर सहायक नगर आयुक्त विनोद लाल भी उपस्थित थे।

एम्स ऋषिकेश में उत्तरकाशी की महिला ने दिया चार बच्चों को जन्म

ऋषिकेश के गाइनी डिपार्टमेंट में भर्ती उत्तरकाशी निवासी महिला ने चार बच्चों को जन्म दिया है। महिला को उत्तरकाशी जिला अस्पताल से दून अस्पताल रेफर किया गया था, हाई रिस्क केस होने की वजह से महिला को बीते रविवार को दून अस्पताल से एम्स ऋषिकेश में रेफर किया गया था।

गाइनी विभाग की डा. अनुपमा बहादुर के अनुसार महिला का हिमोग्लोबिन काफी कम था, टीएसएच 13 था, लिहाजा ऐसी स्थिति में डिलीवरी में नवजात शिशु आईसीयू नीकु की आवश्यकता पड़ सकती थी, लिहाजा दून में यह सुविधा उपलब्ध नहीं होने के कारण उसे एम्स भेजा गया था। जहां अल्ट्रासाउंड के जरिए पता चला कि महिला के पेट में चार बच्चे हैं। लिहाजा महिला को तीन यूनिट रक्त चढ़ाया गया। साथ ही बच्चों के फेफड़ों की मैच्योरटी के लिए महिला को इंजेक्शन लगाया गया। इसके बाद ऑपरेशन से शनिवार को दोपहर में महिला ने चार बच्चों को जन्म दिया। जिनमें दो लड़के व दो लड़कियां हैं। चिकित्सकों के अनुसार सभी बच्चे स्वस्थ हैं। जिनका वजन क्रमशरू 1.6 किग्रा, 1.5 किग्रा., 1.35 किग्रा. तथा 1.1 किलोग्राम है।

खासबात यह है कि उन्हें वेंटीलेटर की आवश्यकता नहीं पड़ी। हाईरिस्क केस होने की वजह से चिकित्सकों के दल में नवजात शिशु विभाग की विभागाध्यक्ष डा. श्रीपर्णा बासू व डा. पूनम व गाइनी विभाग की प्रमुख डा. जया चतुर्वेदी, डा. अनुपमा बहादुर व डा. राजलक्ष्मी मुंदरा शामिल थे। एम्स निदेशक पद्मश्री प्रोफेसर रवि कांत जी ने बताया कि एम्स ऋघ्षिकेश उत्तराखंड में नवजात शिशु मृत्युदर कम करने को लेकर गंभीर है, लिहाजा हम हाईरिस्क प्रेग्नेंसी के मामलों को प्राथमिकता देते हैं। एम्स निदेशक प्रो. रवि कांत ने बताया कि इसके लिए संस्थान में सभी विश्वस्तरीय वार्ड, संसाधन, उपकरण एवं विशेषज्ञ चिकित्सक उपलब्ध हैं।

मुख्यमंत्री की पहल से कुपोषण से मुक्त हुए बच्चें, बेहतर परिणाम से सरकार खुश

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत की पहल पर अतिकुपोषित बच्चों को गोद लेने की योजना के अच्छे परिणाम मिलने लगे हैं। प्रदेश के जनप्रतिनिधियों, अधिकारियों और सामाजिक संस्थाओं द्वारा गोद लिए गए कुपोषित बच्चों के स्वास्थ्य में लगातार सुधार हो रहा है। विगत वर्ष सितम्बर माह में ‘‘कुपोषण मुक्ति हेतु गोद अभियान’’ की शुरूआत की गई थी। मुख्यमंत्री सहित मंत्रीगणों, जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों ने चिन्हित अति कुपोषित बच्चों को गोद लिया था। कुपोषित बच्चों को न केवल गोद लिया गया बल्कि संबंधित जनप्रतिनिधि व अधिकारी, इन बच्चों के अभिभावकों के लगातार सम्पर्क में रहे। इसके सार्थक परिणाम भी मिल रहे हैं। 6 बच्चे कुपोषण से मुक्त हो चुके हैं, जबकि 11 बच्चों की ग्रेड में सुधार हुआ है और 207 बच्चों के वजन में वृद्धि हुई है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि, ‘‘कुपोषित बच्चों को गोद लेकर उनकी जिम्मेवारी लेने की पहल की गई थी। इसके सुखद परिणाम मिलने लगे हैं। बच्चे हमारे देश का भविष्य हैं। हमारा उद्देश्य प्रदेश को कुपोषण से पूरी तरह से मुक्त करना है। लगभग सभी गोद लिए गए बच्चों के वजन में संतोषजनक वृद्धि हुई है। मुझे पूरा विश्वास है कि सभी गोद लिए बच्चे कुपोषण से मुक्त होंगे।’’

राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन के तहत राज्य को मिली कामयाबी, वार्षिक बजट बढ़कर मिलेगा

राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन के तत्वाधान में वार्षिक बजट अनुमोदन हेतु नई दिल्ली में आयोजित बैठक में उत्तराखण्ड राज्य को गत वित्तीय वर्ष के कुल परिव्यय रूपये 510 करोड़ के सापेक्ष वित्तीय वर्ष 2020-21 में कुल रूपये 590 करोड़ की स्वीकृति प्राप्त हुई जिससे राज्य की स्वास्थ्य सेवाओं के संवर्धन में बल मिलेगा। बैठक में रूद्रपुर मेडिकल कॉलेज के लिये 325 करोड़ की स्वीकृति प्रदान की गई जबकि नगरीय स्वास्थ्य के संवर्धन हेतु राज्य द्वारा प्रस्तावित, जनपद हरिद्वार के भूपतवाला में अर्बन सीएचसी (नगरीय चिकित्सालय), की अनुमति प्राप्त हुई जिससे क्षेत्र में नगरीय तथा निकटवर्ती आबादी में बेहतर स्वास्थ्य सुविधा प्राप्त होगी। राज्य को 367 नई आशाओं के पद स्वीकृत कराये गए जिससे राज्य के दूरस्थ स्थानों पर ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य संवर्धन में सहायता प्राप्त होगी। हल्द्वानी, जनपद नैनीताल में पूर्व से संचालित 30 शैय्या युक्त महिला अस्पताल के विस्तारीकरण हेतु प्राप्त अनुमोदन से अब उक्त चिकित्सालय की क्षमता बढ़कर 100 शैय्याओं की हो जाएगी जिससे क्षेत्र में महिला एवं शिशु स्वास्थ्य की बेहतर सुविधाएं मिलेंगी।
हल्द्वानी, जनपद नैनीताल में 150 शैय्या युक्त नवीन मल्टी स्पेशलिटी अस्पताल, जिसमें हृदय, किडनी तथा न्यूरो आदि विशेषज्ञ सेवाएं प्राप्त हो जाएँगी। जनपद देहरादून में उच्च गुणवत्ता परक रक्त सुविधाओं हेतु एक सेंटर ऑफ एक्सीलेंस केंद्र रक्त कोष की स्थापना की अनुमति प्राप्त की गयी जिससे किसी भी आपातकालीन स्थिति में रक्त एवं रक्त उत्पादों की सुलभता होगी। राज्य को 20 नई एम्बुलेंस की अनुमति प्राप्त हुई है, जिससे रोगियों के परिवहन में सुलभता प्राप्त होगी। राज्य के दूरस्थ, यात्रा मार्गों पर दो नई पी.एच.सी. जनपद पिथौरागढ़ में पीएच सी गूंजी तथा जनपद उत्तरकाशी में पी.एच.सी जानकी चट्टी की संस्तुती प्राप्त हुई जिससे इन दूरस्थ स्थानों में चिकित्सा सेवाएं स्थानीय जन के साथ-साथ यात्रियों को भी प्राप्त होंगी।
बैठक में राज्य में राजकीय सेवा में कार्यरत स्नातक चिकित्सकों को एम्स ऋषिकेश से चिन्हित छः परास्नातक विधाओं में कोर्स कराए जाने के प्रस्ताव की वित्तीय स्वीकृति प्राप्त होने से न केवल क्षेत्र में विशेषज्ञों की सेवाएं प्राप्त होंगी अपितु चिकित्सकों में भी कौशल विकास होगा। आगामी वित्तीय वर्ष में राज्य में 500 उपकेंद्रां को हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर के रूप में विकसित किया जायेगा जिससे क्षेत्र में महिला एवं शिशु स्वास्थ्य कार्यक्रम के साथ साथ समस्त आबादी को गैर संचारी रोगों की पहचान तथा निदान में सुलभता होगी जिससे न केवल स्वास्थ्य सुधार होगा बल्कि इन रोगों पे होने वाले व्यक्तिगत व्यय में भी कमी आयेगी। राज्य के पांच जनपदों में जन स्वास्थ्य जांच केंद्र का अनुमोदन प्राप्त हुआ, जिससे संक्रामक रोगों की जाँच सुलभ होगी।
स्वास्थ्य मंत्रालय, भारत सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ संपन्न हुई उपरोक्त बैठक में उत्तराखण्ड राज्य की ओर से स्वास्थ्य विभाग के दल का नेतृत्व सचिव स्वास्थ्य उत्तराखण्ड सरकार, नितेश कुमार झा द्वारा किया गया। उक्त दल में डॉ पंकज पाण्डेय प्रभारी सचिव स्वास्थ्य उत्तराखण्ड सरकार तथा युगल किशोर पन्त, मिशन निदेशक एन.एच.एम के साथ-साथ महानिदेशक चिकित्सा, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग डॉ अमिता उप्रेती द्वारा प्रतिभाग किया गया। साथ इस अवसर पर चिकित्सा, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग के अन्य अधिकारी भी उपस्थित रहे।