स्वास्थ्य विभाग ने प्रदेश में 337 आईसोलेशन बेड की व्यवस्था की

उत्तराखंड में कोरोना वायरस फस्र्ट स्टेज में है। सरकार कोशिश कर रही है कि वायरस को तीसरे व चैथे स्टेज तक पहुंचने से रोका जाए। इसके लिए सरकार हरसंभव कदम उठा रही है। स्वास्थ्य विभाग ने वायरस से बचने के लिए लोगों को सामाजिक दूरी बनाने की सलाह दी है। चीन सहित अन्य प्रभावित देशों से आए 712 लोगों को निगरानी में रखा गया है।
स्वास्थ्य निदेशालय में अपर सचिव एवं राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) के मिशन निदेशक और स्वास्थ्य महानिदेशक डॉ. अमिता उप्रेती ने प्रेसवार्ता कर कोरोना वायरस को रोकने के लिए की गई व्यवस्थाओं के बारे में जानकारी दी। उन्होंने कहा कि वायरस फैलने के चार स्टेज है। इसमें पहला प्रभावित देशों की यात्रा कर लौटे व्यक्ति में संक्रमण, दूसरा संक्रमित व्यक्ति से स्थानीय स्तर पर एक से दूसरे में फैलना, तीसरा कम्युनिटी में फैलना और चैथा एपिडेमिक (महामारी) की स्थिति है। स्वास्थ्य विभाग का दावा है कि उत्तराखंड में अभी वायरस का संक्रमण फर्स्ट स्टेज में है।
प्रदेश में अब तक वायरस की जांच के लिए 78 सैंपल लिए भेजे गए। जिसमें 28 सैंपल निगेटिव और एक मामला पॉजिटिव पाया गया है। स्वास्थ्य विभाग ने सतर्क किया कि कोई भी व्यक्ति आईसोलेशन वार्ड में न जाएं। इससे वायरस फैलने का खतरा हो सकता है। इस मौके पर नोडल अधिकारी डॉ. पंकज सिंह, जनसंपर्क अधिकारी जेसी पांडेय भी मौजूद रहे।
वायरस को रोकने के लिए सरकार ने स्वास्थ्य विभाग को 60 करोड़ की राशि जारी कर दी है। इस धनराशि से दवाइयां, उपकरण के साथ ही प्रदेश भर में आईसोलेशन वार्डों की व्यवस्था की जाएगी। वहीं, राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन ने भी मास्क, दवाइयों व अन्य चिकित्सा सुविधा के लिए बजट खुला रखा है।
स्वास्थ्य महानिदेशक डॉ. उप्रेती ने कहा कि वायरस को लेकर सोशल मीडिया पर भ्रांति न फैलाएं। प्रदेश में एक पॉजिटिव केस के अलावा कोई भी दूसरा मामला सामने नहीं आया है। विभाग की ओर से पूरी सतर्कता बरती जा रही है।
कोरोना वायरस से निपटने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने प्रदेश में 337 आईसोलेशन बेड की व्यवस्था की है। दून और गांधी अस्पताल में आईसीयू बेड की संख्या बढ़ाई जा रही है। प्रदेश के अन्य क्षेत्रों में भी वेंटीलेटर और आईसीयू बेड बढ़ाए जाएंगे।

सरकार की कार्रवाई, आम लोगों को राहत देने और हड़ताल रोकने के लिए एस्मा लागू

आम जनता को राहत देने के लिए सरकार ने कड़ा कदम उठाया है। उत्तराखंड में प्रमोशन में आरक्षण के खिलाफ डॉक्टरों व स्वास्थ्य कर्मचारियों की हड़ताल रोकने के लिए शासन ने एस्मा लागू कर दिया है। शासन ने इसकी अधिसूचना जारी कर छह माह के लिए स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारियों की हड़ताल पर रोक लगा दी है। राज्यपाल की स्वीकृति के बाद शासन ने उत्तर प्रदेश अति आवश्यक सेवाओं का अनुरक्षण अधिनियम 1966 के तहत स्वास्थ्य विभाग के डॉक्टरों, पैरामेडिकल व अन्य कर्मचारियों की हड़ताल पर रोक लगा दी है।
अपर सचिव युगल किशोर पंत की ओर से जारी अधिसूचना के अनुसार स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग में तैनात डॉक्टरों व कर्मचारियों की सभी सेवाओं को आवश्यक सेवाएं घोषित कर हड़ताल पर रोक लगाई गई है। कोरोना संक्रमण को रोकने के लिए जहां सरकार प्रदेश भर में हाई अलर्ट जारी कर चुकी है, वहीं प्रमोशन में आरक्षण के लिए खिलाफ चल रहे आंदोलन के समर्थन में डॉक्टर, डिप्लोमा फार्मासिस्ट एसोसिएशन, लैब टेक्नीशियन, नर्सिंग स्टाफ संघ की ओर से दो घंटे का कार्य बहिष्कार किया जा रहा था।
स्वास्थ्य कर्मचारी संगठनों की ओर से पूर्ण कार्य बहिष्कार करने के लिए सरकार पर दबाव बनाया जा रहा था। इसे देखते हुए शासन ने एस्मा लागू कर स्वास्थ्य कर्मचारियों की हड़ताल पर रोक लगा दी है।

सराहनीय फैसलाः रेट लिस्ट लगाकर उचित मूल्य पर सेनेटाइजर और मास्क की बिक्री करने के निर्देश

उत्तराखंड में किसी भी मेडिकल स्टोर पर डॉक्टर के परामर्श के बिना खांसी जुकाम, बुखार व दर्द की दवाईयां नहीं दी जाएंगी। फूड सेफ्टी एंड ड्रग्स कमिश्नर डॉ.पंकज कुमार पांडेय ने इस संबंध में आदेश जारी कर दिए हैं। कैमिस्ट की दुकानों पर रेट लिस्ट लगाकर उचित मूल्य पर सेनेटाइजर व मास्क की बिक्री करने के निर्देश दिए गए।
फूड सेफ्टी ड्रग्स प्रशासन की ओर से जारी आदेश के अनुसार कोरोना वायरस पूरे विश्व में गंभीर खतरा बना हुआ है। प्रदेश सरकार ने वायरस को माहमारी रोग घोषित किया है। आदेश में कहा गया कि कोई भी कैमिस्ट बिना डॉक्टर के परामर्श के बिना किसी भी व्यक्ति को खांसी, जुकाम, बुखार व दर्द की दवाईयां न दें।
इसके लिए खांसी जुकाम से पीड़ित व्यक्ति को डॉक्टर की सलाह लेने की सलाह दी गई। प्रदेश के सभी ड्रग्स इंस्पेक्टरों को आदेशों का पालन करने के निर्देश दिए गए हैं। आम लोगों को कोरोना वायरस के प्रति जागरूक करने के लिए मेडिकल स्टोर में भी सेनेटाइजर व मास्क के रेट की लिस्ट लगाई जाए।
कोरोना के वायरस से बचने के लिए फिलहाल ठंडे खाद्य पदार्थों से परहेज करना फायदेमंद साबित हो सकता है। डॉक्टरों के अनुसार ठंडे खाद्य पदार्थों पर वायरस तेजी से पनपते और बढ़ते हैं। इसके अलावा इम्युनिटी पावर भी कमजोर होती है।
डॉक्टरों के अनुसार इन दिनों गर्म पानी पीना ज्यादा फायदेमंद रहता है। आइसक्रीम जैसे ठंडे खाद्य पदार्थ नुकसान पहुंचा सकते हैं। दरअसल इनसे सीधा नुकसान तो नहीं है, लेकिन ये शरीर को कमजोर कर सकते हैं। इम्युनिटी कम होने से वायरस बहुत तेजी से हमला करते हैं, जिससे रोग तेजी से फैलता है। ठंडा और बासी खाना तेजी से वायरस को बढ़ाता है।
वहीं, कोरोना के खतरे को देखते हुए बैंक कैशियर भी चिंता में हैं। दरअसल उन्हें नोट गिनने होते हैं, जो अनगिनत हाथों से होकर गुजरे होते हैं। ऐसे में उन्हें डर सता रहा है कि इससे वायरस का अटैक न हो जाए। डॉक्टरों के अनुसार नोट गिनते वक्त थूक लगाना नुकसान कर सकता है। नोट गिनने के बाद हाथों को लगातार सैनेटाइज करते रहे और हाथों को चेहरे पर लगाने से बचें।

त्रिवेन्द्र सरकार उठाएगी उपचार का खर्च, देगी मुआवजा

उत्तराखंड में कोरोना संक्रमण को महामारी घोषित कर दिया गया है। इसके साथ ही अब अस्थाई रूप से कोरोना संक्रमण को आपदा में शामिल कर लिया गया है। कोरोना से प्रभावित व्यक्ति के उपचार का खर्च भी राज्य सरकार उठाएगी और मृत्यु होने पर पीड़ित परिवार को मुआवजा भी दिया जाएगा।
प्रदेश में अब अगले तीस दिन के लिए कोरोना संक्रमण के लिए मेडिकल कैंप लगाने, उपकरणों की व्यवस्था करने, पीड़ितों को अलग कैंप बनाकर रखने की व्यवस्था राज्य आपदा प्रबंधन फंड से की जाएगी। इन सब मामलों में राज्य आपदा प्रबंधन कमेटी फैसला करेगी। इसके साथ ही टेस्टिंग लैब स्थापित करने और महामारी को रोकने के लिए सर्वे आदि की व्यवस्था भी एसडीआरएफ के तहत की जाएगी।
आपदा प्रबंधन सचिव अमित नेगी के मुताबिक केंद्र सरकार की ओर से नई गाइडलाइन जारी कर दी गई है। संक्रमण से फैलने को रोकने के लिए प्रदेश के आपदा प्रबंधन तंत्र को भी सक्रिय कर दिया गया है। सभी को सर्जिकल मास्क, सूट आदि की व्यवस्था करने को कहा गया है।
आपदा प्रबंधन तंत्र से जुड़े अधिकारियों और कर्मचारियों की छुट्टियों पर भी रोक लगा दी गई है। कोरोना संक्रमण को आपदा में अस्थाई रूप से शामिल कर लिया गया है। कोरोना संक्रमण के आपदा में शामिल होने से अब पीड़ितों के उपचार पर आए खर्च का भुगतान राज्य सरकार करेगी। पीड़ित की मृत्यु होने पर आपदा के तहत निर्धारित मानकों के तहत मुआवजा दिया जाएगा।

त्रिवेन्द्र सरकार ने स्वास्थ्य सचिव को दिए असीमित अधिकारी
महामारी अधिनियम लागू होने के बाद सचिव स्वास्थ्य को असीमित अधिकार होंगे। सचिव स्वास्थ्य अपनी शक्तियां जिलों में जिलाधिकारी और सीएमओ (मुख्य चिकित्सा अधिकारी) को प्रदान कर सकते हैं।
– धारा 144 के तहत कहीं भी भीड़ एकत्रित करने पर रोक।
– उल्लंघन करने पर धारा 188 के तहत सजा और जुर्माना।
– शिक्षण संस्थान बंद करना या खोलना।
– अनुमति के बिना सार्वजनिक सभा से लेकर कोई भी समारोह नहीं होगा।
– किसी भी संदिग्ध के जांच से मना करने पर जबरन जांच होगी।
– मेडिकल कार्यों के लिए निजी या सार्वजनिक संपत्ति ली जा सकेगी कब्जे में।
– किसी भी वाहन को बतौर टैक्सी या एंबुलेंस इस्तेमाल किया जा सकेगा।
– निजी या सार्वजनिक स्थलों, वाहनों और संपत्तियों को सेनिटाइज करना।

अनुबंध पर सैंकड़ों डाक्टर-नर्सें होंगी नियुक्त
सरकार ने निर्णय लिया है कि प्रदेश में डाक्टरों के रिक्त साढ़े पांच सौ पदों पर वॉक इन इंटरव्यू के माध्यम से नियुक्ति की जाएगी। सरकारी मेडिकल कॉलेजों में डॉक्टरों के मौजूदा पदों के 50 प्रतिशत पद और भरे जाएंगे। नर्सिंग और पैरामेडिकल स्टॉफ के खाली पदों पर 11 माह के अनुबंध पर नियुक्तियां की जाएंगी।

स्वास्थ्य विभाग को पचास करोड़ जारी
सरकार ने कोरोना की रोकथाम के लिए 50 करोड़ रुपये तुरंत महानिदेशक स्वास्थ्य को जारी कर दिए हैं। आइसोलेशन आईसीयू बनाए जाएंगे। सौ बिस्तर के प्री फेब्रिकेटिड अस्पताल बनाने की अनुमति दे दी है। यह अस्पताल जरूरत पड़ने पर कहीं भी बनाया जा सकेगा। चिकित्सा उपकरणों में 125 वेंटिलेटर सहित औषधि आदि की खरीद बिना टेंडर (लेकिन राज्य या केंद्र सरकार की तय दरों अथवा जेम से) हो सकेगी।

रोकथाम को आपदा मद से मिलेगा पैसा
महामारी घोषित होने से कोरोना को आपदा का दर्जा मिला गया है। इसके तहत अब आपदा के मद से महामारी की रोकथाम के लिए पैसा खर्च किया जा सकेगा। इसके तहत राज्य सरकार को केंद्र से भी मदद मिल सकती है। जिलाधिकारी बिना शासन की अनुमति के रोकथाम और उपचार के लिए पैसा खर्च कर सकते हैं।

उत्तराखंड सरकार ने कोरोना को महामारी घोषित किया

उत्तराखंड सरकार ने कोरोना को महामारी घोषित कर दिया है। शहरी विकास मंत्री मदन कौशिक ने कैबिनेट के फैसले की पुष्टि की है। वायरल संक्रमण से बचाव के लिए प्रदेश में उत्तराखंड महामारी रोग अधिनियम (कोविड-19) में लागू कर दिया है। इससे जिलाधिकारियों और मुख्य चिकित्सा अधिकारियों को वायरस की रोकथाम के लिए असीमित अधिकार प्राप्त हो जाएंगे।
मदन कौशिक ने बताया कि इसके तहत अब स्कूल और आंगनबाड़ी के बाद राज्य के सभी कॉलेज, सिनेमाघर और मल्टीप्लेक्स 31 मार्च तब बंद रहेंगे। लेकिन मेडिकल कॉलेज खुले रहेंगे। वहीं राज्य में आइसोलेशन वार्ड के लिए 50 करोड़ की राशि मंजूर की है।
उत्तराखंड सरकार ने मंत्रिपरिषद और मंत्रिमंडल की बैठक में कोरोनो वायरस को लेकर यह फैसला लिया है। सबसे खास बात ये है कि कोरोना को राज्य सरकार ने महामारी घोषित कर दिया है। प्रदेशभर में कोरोना से बचाव के मद्देनजर सावधानी व जागरुकता पर जोर दिया गया है। मॉल पर फिलहाल निर्णय नहीं हुआ है। किसी भी प्रकार के कार्यक्रम से पहले सरकार से अनमुति लेनी जरूरी होगी। कोरोना को देखते हुए नर्सिंग स्टाफ के खाली पद भरे जाएंगे। सरकारी मेडिकल कॉलेजों में अतिरिक्त पद सृजित किए जाएंगे। बसों में सेनिटेशन की व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।
ज्यादा लोगों एक जगह पर एकत्र होने से रोका जाएगा। इस आदेश की अवहेलना करने पर आईपीसी की धारा 188 के तहत 1 माह से 6 माह के कारावास का प्रावधान किया गया है। भविष्य में कोरोना की तीव्रता बढ़ने पर प्रीफेब्रिकेटेड 100 बेड का हॉस्पिटल तैयार किया जाएगा। जरूरत पड़ने पर निजी भवन, चिकित्सा ईकाई भवन को अस्पताल बनाया जाएगा। आपात स्थिति से निपटने के लिए 140 विभागीय एम्बुलेंस को अलर्ट पर रखा गया है।

स्वास्थ्य सचिव को असीमित अधिकार
महामारी अधिनियम लागू होने के बाद सचिव स्वास्थ्य को असीमित अधिकार होंगे। सचिव स्वास्थ्य अपनी शक्तियां जिलों में जिलाधिकारी और सीएमओ (मुख्य चिकित्सा अधिकारी) डेलिगेट करेगा। इसके तहत कई शक्तियां डीएम में निहित होंगी। राज्य सरकार पहले ही तमाम बड़े आयोजनों को रद्द कर चुकी है। 12वीं तक के स्कूलों और विद्यालयों में 31 मार्च तक अवकाश घोषित किया गया है। वहीं सरकारी और प्राइवेट कार्यालयों में बायोमीट्रिक हाजिरी पर भी रोक लगाई जा चुकी है।

दो ट्रेनी आईएफएस सहित छह के सैंपल भेजे
कोरोना की आशंका के चलते दो ट्रेनी आईएफएस समेत छह और मरीजों के सैंपल शनिवार को जांच के लिए वायरोलॉजी लैब हल्द्वानी भेजे गए हैं। इस तरह से जिले से शनिवार तक 20 सैंपल जांच के लिए भेजे जा चुके हैं। जिसमें से अब तक आई सभी 11 मरीजों की रिपोर्ट नेगेटिव आई है। कोरोना वायरस संक्रमण को लेकर सतर्कता बरत रहे प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग की टीमें लगातार विभिन्न अस्पतालों और संस्थानों से संपर्क कर रही हैं। इसी क्रम में शनिवार को छह सैंपल जांच के लिए डॉ. सुशीला तिवारी राजकीय मेडिकल कालेज, हल्द्वानी स्थित वायरोलॉजी लैब भेजे गए। इसमें दो सैंपल इंदिरा गांधी राष्ट्रीय वन अकादमी में प्रशिक्षण ले रहे दो ट्रेनी आईएफएस के भी शामिल हैं।
अकादमी के 62 ट्रेनी आईएफएस के अलग-अलग ग्रुप पिछले दिनों विभिन्न देशों से ट्रेनिंग टूर से लौटे थे। सभी की स्क्रीनिंग करने के बाद शुक्रवार को चार ट्रेनी आईएफएस के सैंपल जांच के लिए भेजे थे। शनिवार को भी दो और ट्रेनी आईएफएस के सैंपल दून अस्पताल से जांच के लिए भेजे। इसके अलावा शनिवार को जो चार और मरीजों के सैंपल जांच के लिए भेजे हैं, उनमें एम्स ऋषिकेश और निजी अस्पतालों में इलाज कराने को पहुंचे थे। ये चारों भी हाल में विदेश से लौटे हैं। सीएमओ डॉ. मीनाक्षी जोशी ने बताया कि कोरोना संक्रमण से बचाव को लेकर लोगों को लगातार जागरूक किया जा रहा है। साथ ही संदिग्ध लक्षणों वाले मरीजों को निगरानी पर रखा जा रहा है।

प्रत्येक तीसरी लोकसभा में एक मेडिकल कॉलेज बनाने का लक्ष्यः अमित शाह

केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने कहा कि देश को स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में नंबर वन बनाने के लिए मोदी सरकार लगातार कार्य कर रही है। केंद्र सरकार ने देश के प्रत्येक राज्य में एम्स खोलने का लक्ष्य रखा है। उन्होंने कहा कि प्रत्येक तीसरी लोकसभा में एक मेडिकल कॉलेज बनाने का लक्ष्य हम वर्ष 2024 तक पूरा करेंगे। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) के द्वितीय दीक्षांत समारोह में बतौर मुख्य अतिथि संबोधित कर रहे थे।
अपने संबोधन में उपाधि प्राप्त करने वाले चिकित्सकों एवं उनके परिजनों को बधाई व शुभकामनाएं देते हुए केंद्रीय गृहमंत्री ने कहा कि ऋषिकेश एम्स ने स्वास्थ्य के क्षेत्र में कम समय में सराहनीय कार्य किया है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्वास्थ्य के क्षेत्र में बहुत से कदम उठाए हैं, जिनमें अटल आयुष्मान योजना एवं प्रधानमंत्री जन औषधि योजना के साथ ही देश में एम्स की संख्या को बढ़ाकर 22 करना जैसे कार्य शामिल हैं।
गृह मंत्री ने कहा कि स्वामी विवेकानंद के अनुसार अपनी जगह दूसरे के सुख का विचार करने वाला ही सच्चा ज्ञानी है। देश के दूरस्थ क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं को पहुंचाना हमारा लक्ष्य होना चाहिए। देश के नागरिक स्वस्थ हों, दूरस्थ क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध हो सकें, इसके लिए आप सभी को अपना महत्वपूर्ण योगदान देना होगा। आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना विश्व की सबसे बड़ी स्वास्थ्य योजना है, जिससे अब तक लगभग एक करोड़ लोग लाभान्वित हुए हैं।

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉ. हर्षवर्धन कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेई के कार्यकाल में एम्स की स्थापना हुई। तत्कालीन स्वास्थ्य मंत्री सुषमा स्वराज ने इस काम को आगे बढ़ाया। ऋषिकेश में एम्स की स्थापना उन्हीं के कार्यकाल में हुई थी, मुझे खुशी है इस बात की कि तेजी के साथ विकास कर रहा है। उन्होंने कहा कि यहां से उपाधि लेने वालों सम्मानित करने का मौका मिल रहा है यह भी हमारे लिए गौरव की बात है। कहा कि यहां स्पेशलिस्ट और सुपर स्पेशलिस्ट चिकित्सक अपनी सेवाएं दे रहे हैं। इसका लाभ सिर्फ उत्तराखंड कोई नहीं मिल रहा है, बल्कि देश के पश्चिम क्षेत्र को भी इसका लाभ मिल रहा है। आने वाले समय में देश को 22 और एम्स मिलने वाले हैं। अटल बिहारी वाजपेई ने छह एम्स से शुरुआत की थी। वर्तमान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस काम को तेजी के साथ आगे बढ़ाया है।
केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री रमेश पोखरियाल निशंक ने कहा कि ऋषिकेश पूरे विश्व में योग की राजधानी है। अध्यात्म के शिखर का यह स्थान है। यहां दीक्षा समारोह का होना गौरव की बात है। उपाधि ग्रहण करने वालों को समाज में जाकर लोगों के जीवन की रक्षा करनी है। देश के विराट व्यक्तित्व गृह मंत्री अमित शाह के हाथों आप सभी को उपाधि मिल रही है, यह बड़े गौरव की बात है।

एम्स ऋषिकेश के निदेशक प्रो. रविकांत ने युवा चिकित्सकों को दुनिया से सीखो और दुनिया को भी सिखाओ की सीख दी। उन्होंने कहा कि युवा चिकित्सकों को सदा स्मरण रखना चाहिए कि चिकित्सा व्यवसाय में रोगियों के लिए हर समय उपलब्ध होना, अपने कार्य में दक्ष होना और मिलनसार होना अनिवार्य है। एक डॉक्टर के कार्य की कुशलता इतनी ही नहीं है कि वह मरीज को कितनी जल्दी ठीक करता है, बल्कि मरीज का ठीक होना बहुत हद तक इस बात पर भी निर्भर करता है कि डॉक्टर का मरीज के साथ कैसा व्यवहार है। उन्होंने युवा चिकित्सकों से कहा कि प्रारंभिक वर्षों में आपका व्यवहार ही आपको आगे बढ़ने में मदद करेगा। उन्होंने कहा कि प्रत्येक रोगी से बातचीत आपकी क्षमताओं का परीक्षण और सीखने का अनुभव प्रदान करेगी। उन्होंने युवा चिकित्सकों से आह्वान किया कि वे वंचित तबके के लोगों पर विशेष ध्यान दें। अपकी डॉक्टरी तभी सभी सफल होगी, जब आपकी उत्कृष्टता का लाभ समाज के निचले तबके तक पहुंचेगा।
इस अवसर पर विधानसभा अध्यक्ष प्रेम चंद अग्रवाल, भाजपा प्रदेश अध्यक्ष बंशीधर भगत, कैबिनेट मंत्री मदन कौशिक, डॉ. हरक सिंह रावत, सुबोध उनियाल, राज्य मंत्री धन सिंह रावत, मुख्य सचिव उत्पल कुमार सिंह, डीजीपी अनिल रतूड़ी, विधायक एवं अध्यक्ष एम्स ऋषिकेश पद्मश्री डॉ. समीरन नंदी भी उपस्थित थे।

दूसरा दीक्षांत समारोह हुआ सम्पन्न
केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह 13 पीएचडी, पीजी, एमबीबीएस 2013, 2014, बीएससी नर्सिंग, एमएससी नर्सिंग के विद्यार्थियों को डिग्री और मेडल देकर सम्मानित करेंगे। उन्होंने बताया कि कुल 252 विद्यार्थियों को डिग्री दी जानी है। साथ ही 132 विद्यार्थियों को प्रशस्ति पत्र भी दिए जाने हैं। एम्स के प्रथम दीक्षांत समारोह में राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने शिरकत की थी।

आयुर्वेद से किया जा सकता है कोरोना का उपचारः बाबा रामदेव

विश्व स्वास्थ्य संगठन ने कोरोना वायरस को महामारी घोषित किया है। इसके बाद से ही देशभर में लगातार कोरोना वायरस के संदिग्ध मरीजों की संख्या में वृद्धि हो रही है। ऐसे में योग गुरू बाबा रामदेव का राहत प्रदान करने वाला बयान सामने आया है। योगगुरू के अनुसार, कोरोना का उपचार आयुर्वेद से भी किया जा सकता है।

उन्होंने कहा कि सेनिटाइजर की कमी हो गई है। साथ ही सेनिटाइजर दोगुने दामों पर भी बेचा जा रहा हैं। योग गुरु स्वामी रामदेव और आयुर्वेदाचार्य बालकृष्ण ने इसका अचूक विकल्प सुझाया है। स्वामी रामदेव ने बताया कि एक लीटर पानी में 100 ग्राम नीम के पत्ते और तुलसी के दस पत्ते मिलाकर उबाल लें। उबालने के बाद पानी को छानकर ठंडा करें। एक बोतल में दस ग्राम फिटकरी और दस ग्राम कपूर बारीक पीसकर घोल लें। इस सारे द्रव्य को छानकर शीशी में भरकर रखें। इस प्रकार यह प्राकृतिक सेनिटाइजर तैयार हो जाएगा। स्वामी रामदेव ने बताया कि प्राकृतिक रूप से बनाया गया सेनिटाइजर बाजार में बिकने वाले महंगे सेनिटाइजर से कई गुणा अधिक लाभकारी होगा।

आचार्य बालकृष्ण नेे बताया कि गिलोय वटी, तुलसी वटी, नीम वटी, अदरक और नींबू का रस एक साथ लेने से शरीर में रोग प्रतिरोधक क्षमता उत्पन्न होती है। गिलोय और तुलसी की वटी रोजाना दो-दो की संख्या में नियम पूर्वक दोनों समय ली जानी चाहिए। उन्होंने बताया कि कोरोना के प्रति सभी को अधिक से अधिक जागरूकता बरतनी चाहिए।

कोरोना वायरसः जिलाधिकारियों को मुख्यमंत्री ने दिए निर्देश

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने सचिवालय में कोरोना वायरस से निपटने हेतु राज्य स्तर पर की गयी तैयारियों के सम्बन्ध में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से जिलाधिकारियों के साथ बैठक की। मुख्यमंत्री ने कोरोना वायरस से निपटने हेतु सभी आवश्यक कदम उठाने के निर्देश दिए। उन्होंने समस्त जिलाधिकारियों को अपने जनपदों में आइसोलेशन वार्ड की स्थापना, प्रशिक्षित चिकित्सकों एवं पैरामेडिक स्टाफ सहित आवश्यक दवाईयों की व्यवस्था करने निर्देश दिए। उन्होंने संदिग्ध मरीजों के स्थानांतरण हेतु डेडिकेटेड एम्बुलेंस और प्रशिक्षित स्टाफ की व्यवस्था करने के भी निर्देश दिए।
अफवाहों को रोकने हेतु लगातार किया जाए सूचनाओं का आदान प्रदान
मुख्यमंत्री ने कहा कि कोरोना वायरस से बचाव एवं जागरूकता हेतु प्रदेशभर में चलायी जा रही वर्चुअल क्लासिस एवं विश्वविद्यालयों का उपयोग किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि कोरोना वायरस से बचाव हेतु जारी एडवायजरी का प्रचार-प्रसार किया जाए। मुख्यमंत्री ने कोरोना वायरस से निपटने हेतु सभी विभागाध्यक्षों को आपस में समन्वय बनाकर कार्य करने के निर्देश दिए। उन्होंने जिलाधिकारियों को यह भी निर्देश दिए कि कोरोना वायरस के सम्बन्ध में किसी भी प्रकार की अफवाहों को रोकने हेतु लगातार मुख्य चिकित्साधिकारियों द्वारा जिला सूचना कार्यालयों के माध्यम से सूचनाओं का आदान प्रदान तेजी से किया जाए। उन्होंने निर्देश दिए कि सैनेटाईजर एवं मास्क आदि की ओवर रेटिंग एवं कालाबाजारी न होने पाए, इसके लिए भी व्यवस्थाएं बनायी जाएं। कालाबाजारी एवं ओवर रेटिंग को रोकने हेतु कड़े कदम उठाए जाएं।
सीमावर्ती क्षेत्रों में यात्रियों की लगातार की जाए स्क्रीनिंगः मुख्यमंत्री
मुख्यमंत्री ने चीन एवं नेपाल से लगे सीमावर्ती क्षेत्रों में यात्रियों की लगातार स्क्रीनिंग किए जाने के निर्देश दिए। उन्होंने निर्देश दिए कि कोरोना वायरस के प्रभावी रोकथाम एवं नियंत्रण हेतु संदिग्ध रोगी या किसी भी प्रकार की असामान्य स्थिति की सूचना मिलने पर राज्य एवं जनपद स्तर पर रेपिड रिस्पान्स टीम द्वारा त्वरित कार्यवाही की जाए। मुख्यमंत्री ने जिलाधिकारियों को सभी आवश्यक व्यवस्थाएं करने के निर्देश देते हुए कहा कि यदि किसी भी प्रकार की समस्या होने पर यथाशीघ्र शासन को अवगत कराया जाए, ताकि समय पर आवश्यक व्यवस्थाएं बनायी जा सकें। उन्होंने अधिकारियों को चम्पावत में पूर्णागिरी के मेले के अवसर पर अतिरिक्त चिकित्सकों एवं स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने के भी निर्देश दिए।

कोरोनावायरस से बचने के लिए इन उपायों को करें

कोरोनावायरस से पूरा विश्व में दहशत है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के मुताबिक, कोरोनावायरस से भी खतरनाक वायरस पहले भी सक्रिय हुए हैं। इनसे बड़ी संख्या में लोग ग्रसित हुए और मौत का शिकार भी हुए जबकि कोरोना में राहत वाली बात यह है कि इसमें मृत्यु दर बहुत कम है। फिर भी कोरोना को लेकर दहशत का माहौल बहुत ज्यादा है। ऐसे में डॉक्टर दहशत में न आने और एहतियात बरतने की सलाह दे रहे हैं।

क्या है कोरोनावायरस
चिकित्सकों ने बताया कि कोरोना (कोविद-19) वायरस विषाणुओं का एक बड़ा समूह है। जो इंसानों में सामान्य जुकाम से लेकर श्वसन तंत्र की गंभीर समस्या तक पैदा कर सकता है। इसके अलावा कोरोनावायरस से सार्स और मर्स जैसी जानलेवा बीमारियां भी हो सकती हैं।

कोरोना इंफेक्शन के लक्षण
कोरोनावायरस की वजह से रेस्पेरेटरी ट्रेक्ट यानी श्वसन तंत्र में हल्का इंफेक्शन हो जाता है। जैसा कि आमतौर पर कॉमन कोल्ड यानी सर्दी, जुकाम में देखने को मिलता है। हालांकि इस बीमारी के लक्षण बेहद कॉमन है और कोई भी कोरोनावायरस से पीड़ित न हो तब भी उसमें ऐसे लक्षण दिख सकते हैं। जिसमें नाक बहना, सिर में तेज दर्द, खांसी और कफ, गला खराब, बुखार, थकान और उल्टी महसूस होना, सांस लेने में तकलीफ होना, निमोनिया और ब्रांकाइटिस।

कैसे फैलता है कोरोना
यह वायरस बीमार रोगी के खांसने, छींकने से स्वस्थ इंसान के शरीर में सांस व मुंह के रास्ते प्रवेश करता है।

कैसे बचे-सुझाव
– जब कोई खांसे या छींके तो आपको उस व्यक्ति से छह फीट से अधिक रखनी चाहिए, ताकि विषाणु आप तक जीवित न पहुंच सके।
– मुंह को मास्क से कवर कर रखें और रोज बदलें
– मास्क न होने पर कुहनी से मुंह ढक कर खांसे
– बचाव के लिए भीड़भाड़ वाले इलाके में प्रवेश न करें। शुरुआती दौर में संक्रमित व्यक्ति में कोई लक्षण नहीं दिखते बल्कि यह रोग को फैलाने मेें सक्षम होता है।
– किसी भी संभावित संक्रमित वस्तु को छूने के बाद हाथों को पानी साबुन से 20 सेकेंड तक धोएं।
– हाथ मिलाने से बचें, अभिवादन के लिए नमस्ते कर सकते हैं।

वहीं, स्वास्थ्य महानिदेशक डॉ. अमिता उप्रेती ने बताया कि कोरोना को लेकर घबराने की नहीं सावधानी बरतने की जरूरत है। अफवाहों पर ध्यान न दें। उत्तराखंड में कोरोना का कोई केस अब तक सामने नहीं आया है। एक कोरोना मरीज के निजी अस्पताल में भर्ती होने का जो पत्र वायरल हुआ है, वह निराधार हैं। देहरादून के किसी निजी अस्पताल में कोरोना का मरीज भर्ती नहीं है। पत्र में गलत तथ्य लिखने वाले संबंधित चिकित्सा अधिकारी से स्पष्टीकरण तलब किया है।

सात दिवसीय अंतरराष्ट्रीय योग महोत्सव का सीएम त्रिवेन्द्र सिंह, यूपी सीएम योगी आदित्यनाथ ने किया शुभारंभ

रविवार को मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्य नाथ ने संयुक्त रूप से अंतरराष्ट्रीय योग महोत्सव का शुभारंभ किया। मुनिकीरेती स्थित गंगा रिसोर्ट में आयोजित 7 दिवसीय महोत्सव में विश्व के 11 देशो एवं देश के 09 राज्यों के योगाचार्यो, शिक्षकों एवं योग प्रेमीं प्रतिभाग कर रहे है।

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह ने कहा कि योग को विश्वव्यापी पहचान दिलाने में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अह्म भूमिका रही है। उत्तराखण्ड को योग के हब एवं ऋषिकेश को विश्व योग के केन्द्र बिन्दु के रुप में स्थापित करने के लिए सरकार ने व्यापक स्तर पर कार्य किया है। योग को पर्यटन से जोड़ने और योग के साथ-साथ पर्यटन हब के रुप में उत्तराखण्ड को विकसित करने के लिए सरकार व्यापक स्तर पर कार्य कर रही है।

उन्होने कहा कि अध्यात्मिक योग के माध्यम से पर्यटकों को आकर्षित करने का कार्य सरकार कर रही है। योग विश्व स्वास्थ्य एवं कल्याण के लिए जरुरी है जिसकी आवश्यकता आज पूरी दुनिया को महसूस होने लगी है जिसका परिणाम है कि आज विश्व में जहां भी योग की शुरुआत हो रही है वहॉ उत्तराखण्ड के योग शिक्षकों को सर्वोच्च प्राथमिकता व सम्मानस्वरुप बुलाया जा रहा है।?

ऋषिकेश विश्व पटल पर योग का केंद्र बिंदुः योगी आदित्यनाथ
इस अवसर पर उत्तर-प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि भारत में ऋषि की परम्परा एव साधना के परिणामस्वरुप योग का उत्थान जीवों के कल्याण के लिए हुआ है। योग जैसी अध्यात्म और पवित्र विद्या को दुनिया के कोने-कोने में पंहुचाने और योग का विश्व गुरु बनने में भारत के प्रधानमंत्री का अथक प्रयास रहा है। इसके साथ ही उत्तरखण्ड का शहर ऋषिकेश विश्व पटल पर योग का केन्द्र बिन्दु के रुप में उभरा है। उन्होने प्रधानमंत्री के स्वच्छ भारत की सराहना करते हुए कहा कि यदि स्वच्छ के बाद योग को अपनाया जाय तो अनेक बीमारियों से निजात मिल सकती है। स्वच्छ काया शरीर में योग के माध्यम से शारीरिक, मानसिक मजबूती एवं प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाया जा सकता है। उन्होने कहा कि विश्व का कोई भी देश जब योग परम्परा से जुड़ता है तो वह भारत की आत्मीयता से जुड़ता है और यह बात देश को गौरवान्वित करती है।

इस अवसर पर उन्होने वर्ष 2021 में हरिद्वार में आयोजित होने वाले कुम्भ में उत्तराखण्ड सरकार को सहयोग दिये जाने की बात भी कही। वहीं पर्यटन के क्षेत्र में उत्तराखण्ड सरकार द्वारा किये जा रहे कार्यो की सराहना की। उन्होंने कहा कि गत विगत माह में उत्तराखण्ड में खूब बर्फबारी हुई जिसमें उत्तरप्रदेश सहित देश के विभिन्न राज्यों एवं विदेशी पर्यटकों का जबरदस्त आवागमन रहा।

इस अवसर पर विधानसभा अध्यक्ष प्रेमचन्द्र अग्रवाल, उच्च शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत, सचिव पर्यटन दिलीप जावलकर, अध्यक्ष जीएमवीएन महावीर सिंह रांगड़, महामण्डलेश्वर जूना अखाडा स्वामी अवदेश्वरानन्द महाराज, जिलाधिकारी टिहरी गढ़वाल डॉ. वी षणमुगम, एसएसपी डॉ. योगेन्द्र सिंह रावत आदि उपस्थित रहे।