सीएम से मिली भारत सरकार की अन्तर मंत्रालयी टीम

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से राज्य में आपदा से हुए नुकसान का जायजा लेने आई भारत सरकार की अन्तर-मंत्रालयी टीम ने भेंट की।

मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड आपदा की दृष्टि से अत्यंत संवेदनशील राज्य है। मानसून अवधि में राज्य को अतिवृष्टि के कारण भूस्खलन, बाढ और जल भराव की गंभीर समस्याओं से जूझना पड़ता है। उन्होंने कहा कि भूस्खलन से होने वाले नुकसान को कम करने के लिए राष्ट्रीय स्तर के संस्थानों को मिलकर पूर्वानुमान प्रणाली को और अधिक विकसित करने की दिशा कार्य करना होगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि इस वर्ष अत्यधिक वर्षा के कारण राज्य के विभिन्न क्षेत्रों में काफी नुकसान हुआ है। जनहानि के साथ ही परिसंपत्तियों को भी अत्यधिक क्षति पहॅुंची है। उन्होंने कहा कि राज्य के पर्वतीय क्षेत्रों में बादल फटने व भूस्खलन की घटनाओं से जमीन का स्थाई नुकसान होता है, ऐसी जगहों को दोबारा खेती-बाड़ी या निर्माण कार्यों के लिए प्रयुक्त करना संभव नहीं हो पाता है। इसके लिए प्रभावी कार्ययोजना पर भी उन्होंने बल दिया।

भारत सरकार की अंतर मंत्रालयी टीम के सदस्यों ने उत्तरकाशी, रूद्रप्रयाग, पौड़ी गढवाल, चमोली, बागेश्वर एवं नैनीताल जिले के विभिन्न क्षेत्रों में जाकर आपदा से हुए नुकसान का जायजा लेने के बाद सचिवालय में मुख्यमंत्री से भेंट की। गृह मंत्रालय भारत सरकार के संयुक्त सचिव आर. प्रसन्ना के नेतृत्व में आई इस टीम में अनु सचिव शेर बहादुर, अधीक्षण अभियंता सुधीर कुमार, उप निदेशक विकास सचान, मुख्य अभियंता पंकज सिंह, निदेशक डॉ. वीरेन्द्र सिंह शामिल थे। अंतर मंत्रालयी टीम ने आपदा प्रभावितों से बातचीत कर मिले फीड बैक का उल्लेख करते हुए राज्य सरकार द्वारा प्रभावित क्षेत्रों में संचालित राहत कार्यों को सराहनीय बताया। आपदा प्रभावितों के लिए राहत शिविरों में रहने व भोजन की समुचित व्यवस्था, मौके पर ही चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने तथा अन्य मूलभूत सुविधाओं की व्यवस्था को भी केन्द्रीय टीम ने बेहतर बताया।

केन्द्रीय टीम ने कहा कि राज्य सरकार द्वारा आपदा में मृतकों के परिजनों तथा जिनके घर पूर्ण रूप से क्षतिग्रस्त हुए हैं, उनकोे रू. पॉंच लाख की तात्कालिक सहायता राशि दिए जाने से भी प्रभावितों को काफी राहत मिली है। राज्य में सभी गर्भवती महिलाओं का संपूर्ण डाटा जिला प्रशासन के पास उपलब्ध होने एवं उनके स्वास्थ्य व सुरक्षित प्रसव की व्यवस्था हेतु निरंतर संपर्क रखने की पहल की भी केन्द्रीय टीम ने सराहना की। टीम के सदस्यों ने कहा कि इस तरह की महत्वपूर्ण पहल को अन्य राज्यों में भी अपनाने के लिए अपना सुझाव प्रस्तुत करेगी। केन्द्रीय टीम ने कहा कि प्रभावित क्षेत्रों में भूस्खलन व बाढ़ से नदियों में अत्यधिक मात्रा में सिल्ट भर जाने के कारण जल स्तर ऊपर उठने से भविष्य में नुकसान की संभावना को भी भ्रमण के दौरान उनके संज्ञान में लाया गया है।

इस अवसर पर मुख्य सचिव आनन्द बर्द्धन, अपर मुख्य सचिव आरके सुधांशु, सचिव आपदा प्रबंधन विनोद कुमार सुमन, राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के अपर मुख्य कार्यकारी अधिकारी आनन्द स्वरूप उपस्थित थे।

स्वच्छ वायु सर्वेक्षण 2025ः ऋषिकेश ने 31वें स्थान से उछाल मार 14वां स्थान हासिल किया

देहरादून 37वें से छलांग लगाकर 19वां स्थान

ऋषिकेश 31वें से उछलकर 14वां स्थान

काशीपुर 19वें से सुधारकर 18वां स्थान

सफलता के प्रमुख कारण

यांत्रिक सड़क सफाई से धूल नियंत्रण

ठोस अपशिष्ट एवं निर्माण मलबा प्रबंधन

हरित पट्टी विकास

उद्योगों में स्वच्छ ईंधन का उपयोग

स्मार्ट ट्रैफिक प्रबंधन प्रणाली

जन जागरूकता और सामुदायिक भागीदारी

मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी जी ने इस उपलब्धि पर कहा…
“ये उपलब्धि सभी के लिए स्वच्छ वायु के प्रति उत्तराखंड की प्रतिबद्धता को दर्शाती है।”
लक्ष्य आने वाले वर्षों में और रीयल-टाइम मॉनिटरिंग, नवाचार एवं जनसहभागिता से वायु गुणवत्ता में सुधार।

सौरभांचल तीर्थ और जीवन आशा अस्पताल उनके दूरदर्शी नेतृत्व और करुणा के उदाहरणः सीएम

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने श्री दिगम्बर जैन पंचायती मंदिर में आयोजित जैन समाज सम्मेलन में प्रतिभाग किया और जैन धर्म गुरुओं का आशीर्वाद लिया। उन्होंने कहा कि आचार्य सौरभ सागर मुनि महाराज का जीवन संयम, त्याग और अहिंसा के अद्वितीय आदर्शों का प्रतीक है। सौरभांचल तीर्थ और जीवन आशा अस्पताल उनके दूरदर्शी नेतृत्व और करुणा के उदाहरण हैं, जो समाज को धर्म और सेवा के पथ पर अग्रसर कर रहे हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि जैन धर्म ने दुनिया को संदेश दिया है कि अहिंसा ही वीरता का धर्म है। जैन समाज ने केवल अहिंसा का ही नहीं बल्कि संगठन और सामाजिक एकता का भी अद्वितीय उदाहरण प्रस्तुत किया है। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार राज्य के समग्र विकास के लिए संकल्पबद्ध है और इसी क्रम में उत्तराखंड देश का पहला राज्य बना है जिसने ‘‘समान नागरिक संहिता’’ लागू की है। इसके साथ ही नकल विरोधी कानून के बाद से से 25 हजार से अधिक युवाओं को सरकारी नौकरी पाने में सफलता मिली है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि देवभूमि उत्तराखंड की डेमोग्राफी संरक्षित रखना सरकार की प्राथमिकता है। इसी उद्देश्य से धर्मांतरण विरोधी एवं दंगा विरोधी कानून लागू किए गए हैं। प्रदेश में 9 हजार एकड़ से अधिक सरकारी भूमि को अवैध कब्जों से मुक्त कराया गया है। सनातन मुख्यमंत्री ने कहा कि जैन कल्याण बोर्ड के गठन के संबंध में प्राप्त सुझाव पर सरकार गंभीरतापूर्वक विचार करेगी। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि जैन समाज आगे भी उत्तराखंड के समग्र विकास में सहयोग देता रहेगा।

कार्यक्रम में रविंद्र मुनि जी महाराज, राजेश मुनि महाराज, विधायक विनोद चमोली, खजानदास, पदमश्री डॉ. आर.के. जैन एवं अन्य गणमान्य उपस्थित थे।

प्रदेश में नकली दवाइयों के निर्माण और बिक्री को पूरी तरह से समाप्त करने के निर्देश

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मुख्यमंत्री आवास में उच्चस्तरीय बैठक के दौरान निर्देश दिये कि जनस्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ किसी भी परिस्थिति में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने प्रदेश में नकली दवाइयों के निर्माण और बिक्री को पूरी तरह से समाप्त करने के लिए जिलाधिकारियों, पुलिस एवं स्वास्थ्य विभाग को संयुक्त रूप से सघन अभियान चलाने के निर्देश दिए गए। उन्होंने कहा कि नकली दवाओं का कारोबार करने वालों के खिलाफ कठोरतम कार्रवाई की जाए और पूरे नेटवर्क को ध्वस्त किया जाए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि धराली आपदा से प्रभावित परिवारों की समस्याओं के समाधान तथा उनके पुनर्वास, राहत और आजीविका की व्यवस्था सरकार की सर्वाेच्च प्राथमिकता है। उन्होंने निर्देश दिया कि सचिव राजस्व की अध्यक्षता में गठित समिति अपनी रिपोर्ट शीघ्र प्रस्तुत करे। समिति की रिपोर्ट आने के बाद प्रदेश के अन्य आपदा प्रभावित क्षेत्रों में भी व्यापक स्तर पर पुनर्वास और राहत कार्य किए जाएंगे।

मुख्यमंत्री ने प्रदेश में व्यापक स्तर पर स्वदेशी अभियान चलाने के निर्देश दिये। उन्होंने कहा कि यह अभियान आत्मनिर्भर भारत की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम होगा। मुख्यमंत्री ने मंत्रिगण, प्रशासनिक अधिकारियों एवं कर्मचारियों से भी स्वदेशी उत्पादों को बढ़ावा देने का आह्वान किया। उन्होंने निर्देश दिए कि सरकारी खरीद में स्वदेशी उत्पादों और उपकरणों को प्राथमिकता दी जाए। सरकारी कार्यक्रमों और आयोजनों में स्थानीय उत्पादों के अधिकतम उपयोग को सुनिश्चित किया जाए। जीएसटी स्लैब में हाल ही में हुए परिवर्तनों से स्वदेशी उत्पादों को और अधिक बढ़ावा मिलेगा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य के अग्निवीरों के लिए समुचित प्रशिक्षण की व्यवस्था की जाए। इसके लिए पुलिस ट्रेनिंग सेंटर में समय-समय पर विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित करने किये जाएं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि हमने अपने दृष्टि पत्र में प्रदेश की जनता के समक्ष जो वायदे किये थे, उनको पूरा करने के लिए सरकार पूरी प्रतिबद्धता से कार्य कर रही है। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिये कि जनहित में लिये गये सभी संकल्पों को पूरा करने के लिए और तेजी से कार्य किये जाएं। उन्होंने कहा कि जन भावनाओं और और जन आंकांक्षाओं को ध्यान में रखते हुए सरकार दृढ़ संकल्प होकर कार्य कर रही है।

बैठक में प्रमुख सचिव आर.के.सुधांशु, सचिव शैलेश बगोली, अपर पुलिस महानिदेशक ए.पी. अंशुमान, सचिव एवं गढ़वाल कमिश्नर विनय शंकर पाण्डेय, विशेष सचिव डॉ. पराग मधुकर धकाते, अपर सचिव बंशीधर तिवारी मौजूद थे।

सराहनीयः आपदा प्रबंधन प्रणाली को सशक्त बनाने की दिशा में उत्तराखण्ड पुलिस का एक और महत्वपूर्ण कदम

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने थाना डालनवाला, देहरादून परिसर में स्थापित किए गए 13 लॉन्ग रेंज आधुनिक सायरनों का विधिवत लोकार्पण किया। यह पहल राज्य की आपदा प्रबंधन क्षमता को और अधिक सुदृढ़ करने की दिशा में एक अत्यंत महत्वपूर्ण कदम है।

कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि उत्तराखण्ड एक आपदा संभावित राज्य है, जहां समय रहते सतर्कता और सूचना प्रसारण अत्यधिक महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इस दृष्टि से ये अत्याधुनिक सायरन प्रणाली अत्यंत उपयोगी सिद्ध होगी। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार नागरिकों की सुरक्षा को सर्वाेच्च प्राथमिकता दे रही है, और तकनीक के माध्यम से पुलिस एवं आपदा प्रबंधन विभाग को सशक्त बनाया जा रहा है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि एक पहाड़ी राज्य होने के कारण उत्तराखंड में आपदाओं का खतरा हमेशा बना रहता है। भूस्खलन, बादल फटना, बाढ़ और भूकंप जैसी प्राकृतिक आपदाएं हमारे राज्य को समय-समय पर चुनौती देती रहती हैं।

इस वर्ष भी हमें कई भीषण आपदाओं का सामना करना पड़ा। हमारी सरकार इन आपदाओं से होने वाली क्षति को कम करने के लिए निरंतर प्रयासरत है। हम राज्य में आपदा पूर्व चेतावनी प्रणाली को मजबूत करने के लिए निरंतर कार्य कर रहे हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि 8 किलोमीटर और 16 किलोमीटर की रेंज वाले ये सायरन न केवल प्राकृतिक आपदाओं के समय हमें अलर्ट करेंगे, बल्कि नागरिक सुरक्षा की दृष्टि से भी बेहद उपयोगी होंगे। यदि समय रहते लोगों को चेतावनी मिल जाए, तो न केवल जानमाल की हानि को कम किया जा सकता है, बल्कि आपदा की स्थिति में राहत और बचाव कार्य भी अधिक प्रभावी ढंग से संचालित किए जा सकते हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा, “यह लॉन्ग रेंज सायरन केवल किसी संभावित आपदा की चेतावनी देने तक सीमित नहीं रहेंगे, बल्कि आम जनमानस को जागरूक करने तथा समय पर आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करने में भी सहायक होंगे। ये सायरन भीड़-भाड़ वाले क्षेत्रों, संवेदनशील स्थानों और आपदा संभावित इलाकों में स्थापित किए गए हैं।”

मुख्यमंत्री ने सभी अधिकारियों को निर्देश दिए कि इस प्रणाली का नियमित परीक्षण किया जाए तथा आम जनता को इसके बारे में जागरूक किया जाए, ताकि किसी भी आपातकालीन स्थिति में इसकी अधिकतम उपयोगिता सुनिश्चित की जा सके।

मुख्यमंत्री ने आपदा प्रबंधन और उत्तराखण्ड पुलिस द्वारा संयुक्त रूप से किए जा रहे प्रयासों की सराहना की।

इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने डालनवाला थाने में स्थापित बाल थाने का निरीक्षण भी किया।

कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को सेवानिवृत पुलिस कार्मिकों, उत्तराखंड पीसीएस एसोसिएशन तथा उत्तराखंड पुलिस के अधिकारियों तथा कार्मिकों द्वारा मुख्यमंत्री आपदा राहत कोष में सहायता राशि के चेक सौंपे गए।

कार्यक्रम में कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी, सुबोध उनियाल, विधायक खजान दास, पुलिस महानिदेशक, आपदा प्रबंधन विभाग के वरिष्ठ अधिकारी, जिलाधिकारी देहरादून, स्थानीय जनप्रतिनिधि एवं अन्य गणमान्य अतिथि उपस्थित रहे।

अर्द्धकुंभ की तैयारियों के लिए लगभग 54 करोड़ रुपये का अनुमानित बजटः डा. आर राजेश कुमार

उत्तराखंड सरकार ने 2027 के अर्द्धकुंभ मेले को दिव्य और भव्य बनाने की तैयारियाँ शुरू कर दी हैं। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के मार्गदर्शन में स्वास्थ्य विभाग ने तीर्थयात्रियों की सुविधा और सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए विस्तृत कार्ययोजना तैयार कर ली है। विभाग ने अनुमानित 54 करोड़ रुपये का बजट प्रस्तावित किया है। इस बजट में स्थायी व अस्थायी दोनों प्रकृति के कार्य शामिल हैं।
स्वास्थ्य सचिव डॉ. आर. राजेश कुमार ने बताया कि हमारा प्रयास है कि मेले में आने वाले किसी भी श्रद्धालु को चिकित्सा सुविधा में कोई कमी महसूस न हो। इसके लिए 2924 बेड, 40 एम्बुलेंस, नए अस्पताल भवन और आधुनिक मशीनों तक की योजना बनाई गई है।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा है कि वर्ष 2027 का अर्द्धकुंभ ‘दिव्य और भव्य’ स्वरूप में आयोजित किया जाएगा। उन्होंने कहा कि कुंभ केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक ही नहीं, बल्कि उत्तराखंड की संस्कृति, परंपरा और समृद्धि की झलक भी होता है। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि राज्य सरकार तीर्थयात्रियों को सर्वाेत्तम सुविधाएँ उपलब्ध कराने के लिए हर संभव प्रयास कर रही है। शासन-प्रशासन की सभी एजेंसियां मिलकर काम कर रही हैं, ताकि कोई भी श्रद्धालु स्वास्थ्य सेवाओं से वंचित न रहे। धामी ने कहा कि उनकी प्राथमिकता है कि अर्द्धकुंभ में आने वाला हर तीर्थयात्री सुरक्षित, स्वस्थ और संतुष्ट अनुभव लेकर लौटे।
स्वास्थ्य सचिव डॉ. आर. राजेश कुमार ने बताया कि कुंभ की तैयारी के तहत स्वास्थ्य विभाग स्थायी और अस्थायी प्रकृति के कार्य कराएगा। इन कार्यों पर अनुमानित 54 करोड़ रुपये खर्च आने की संभावना है। इसमें से 683 लाख रुपये स्थायी कार्यों पर और 3765 लाख रुपये अस्थायी कार्यों पर खर्च होंगे।

2924 बेड की होगी व्यवस्था
स्वास्थ्य सचिव डॉ. आर राजेश कुमार ने बताया कि कुंभ के दौरान 35 अस्थायी अस्पतालों में 373 बेड की सुविधा होगी। कुम्भ क्षेत्र के 13 सरकारी अस्पतालों में 1101 बेड तीर्थयात्रियों के लिए आरक्षित होंगे जबकि विभिन्न प्राइवेट अस्पतालों में 1450 बेड की व्यवस्था की जाएगी।

40 एम्बुलेंस रहेंगी तैनात,
कुंभ मेले की स्वास्थ्य व्यवस्थाओं को और मज़बूत बनाने के लिए विभाग एम्बुलेंस और फूड सेफ्टी सेवाओं का दायरा भी बढ़ा रहा है। कुल 40 एम्बुलेंस की व्यवस्था में से 16 एम्बुलेंस विभाग के पास पहले से मौजूद हैं, जबकि 24 नई एम्बुलेंस खरीदी जाएंगी। इनमें एडवांस लाइफ सपोर्ट और बेसिक लाइफ सपोर्ट दोनों तरह की एम्बुलेंस शामिल होंगी।

विभाग तीन नई फूड सेफ्टी वैन भी खरीदेगा
इतना ही नहीं, श्रद्धालुओं के खानपान की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए विभाग तीन नई फूड सेफ्टी वैन भी खरीदेगा। इन वैन की मदद से मेला क्षेत्र में बिकने वाले खाने-पीने की वस्तुओं की गुणवत्ता की नियमित जांच की जाएगी, ताकि किसी भी तीर्थयात्री के स्वास्थ्य से समझौता न हो।

रोशनाबाद में बनेगा ड्रग वायर हाउस
स्वास्थ्य सचिव डॉ. आर राजेश कुमार ने जानकारी दी कि कुम्भ के दौरान स्वास्थ्य विभाग हरिद्वार में स्थायी प्रकृति के कार्य भी करेगा। इनमें 54 लाख की लागत से चार वाहन खरीदे जाएंगे। इसके अलावा रोशनाबाद में सीएमओ ऑफिस के निकट 120 लाख की लागत से ड्रग वायर हाउस बनाया जाएगा। रोशनाबाद में ही स्वास्थ्य विभाग का ड्रग वायर हाउस निर्मित किया जाएगा। इसमें 6 कमरे, दो हॉल और एक स्टोर होगा। इस पर 80 लाख रुपये की लागत आने की संभावना है। स्वास्थ्य सचिव ने बताया कि मेले के दौरान विभाग को 60 वाहन चाहिए। इनमें से चार वाहनों को विभाग खरीदेगा जबकि अन्य वाहन किराए पर लिए जाएंगे।

संक्रामक रोगों पर नियंत्रण के लिए योजना
स्वास्थ्य सचिव डा आर राजेश कुमार ने बताया कि मेले के दौरान बड़ी संख्या में तीर्थयात्री हरिद्वार आएंगे। ऐसे मे संक्रामक रोगों की रोकथाम के लिए भी विभाग ने व्यापक योजना तैयार की है। इसके तहत मेला क्षेत्र में छिड़काव के लिए 25 लाख की लागत से पांच माउंटेबल फागिंग मशीनें खरीदी जाएगी। इसके अलावा 35 पोर्टेबल फागिंग मशीनें खरीदी जाएंगी। जिस पर 18 लाख की लागत आने की संभावना है।

भूपतवाला अस्पताल का होगा कायाकल्प
स्वास्थ्य सचिव डॉ. आर राजेश कुमार के मुताबिक भूपतवाला अस्पताल में 15 लाख की लागत से डॉप्लर सुविधायुक्त अल्ट्रासाउंड मशीन भूपतवाला खरीदी जाएगी। इसके अलावा इस अस्पताल में 18 लाख की लागत से एक्सरे सीआर मशीन की सुविधा भी मुहैया होगी।

स्वास्थ्य सचिव डॉ. आर. राजेश कुमार ने बताया कि कुंभ मेले की स्वास्थ्य तैयारियां समन्वित रूप से की जा रही हैं। इसके लिए कुंभ मेला अधिकारी डॉ. मनोज वर्मा के नेतृत्व में पूरी टीम लगातार काम कर रही है। उन्होंने कहा कि सभी विभागों के साथ बेहतर तालमेल स्थापित कर स्वास्थ्य सुविधाओं को व्यवस्थित और सुदृढ़ बनाने की दिशा में कदम उठाए जा रहे हैं। डॉ. राजेश कुमार ने स्पष्ट किया कि विभाग का प्रयास है कि मेले में आने वाले किसी भी श्रद्धालु को इलाज के लिए परेशान न होना पड़े।

13 महिलाओं को तीलू रौतेली और 33 आंगनवाड़ी कार्यकत्रियों को मिला उत्कृष्ट सेवा कार्य सम्मान

सर्वे चौक स्थित आईआरडीटी सभागार में आयोजित राज्य स्त्री शक्ति, तीलू रौतेली एवं आंगनवाड़ी कार्यकर्ता पुरस्कार वितरण समारोह में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय कार्य करने वाली 13 महिलाओं को तीलू रौतेली पुरस्कार और 33 आंगनवाड़ी कार्यकर्तात्रियों को उनके उत्कृष्ट सेवा कार्य के लिए सम्मानित किया।

इस मौके पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने वीरांगना तीलू रौतेली को नमन करते हुए कहा कि, तीलू रौतेली ने महज 15 वर्ष की उम्र में अपने रण कौशल से विरोधियों को परास्त किया। जिस उम्र में बच्चे खेलना, कूदना और पढ़ना सीखतें हैं, उसी उम्र में तीलू रौतेली ने अदम्य साहस और वीरता का परिचय दिया। इसलिए वीरांगना तीलू रौतेली को उत्तराखंड की झांसी की रानी कहना अतिशयोक्ति नहीं होगी। मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी “नारी तू नारायणी“ के मंत्र के साथ मातृशक्ति के कल्याण एवं सशक्तिकरण के लिए कार्य कर रहे है। संसद और विधानसभाओं में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण प्रदान करने की बात हो या बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ अभियान, उज्ज्वला योजना, लखपति दीदी योजना, केंद्र सरकार हर तरह से महिलाओं को सशक्त बना रही है, इसी तरह ट्रिपल तलाक जैसी कुप्रथा को समाप्त करके भी प्रधानमंत्री मोदी ने देश की महिलाओं को सामाजिक तौर पर मजबूत किया है।

मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि प्रधानमंत्री के मार्गदर्शन में राज्य सरकार भी मातृशक्ति के कल्याण के लिए समर्पित होकर कार्य कर रही है। इसी क्रम में राज्य सरकार ने जहां महिलाओं के लिए सरकारी सेवाओं में 30 प्रतिशत आरक्षण लागू किया है। वहीं महिलाओं की सुरक्षा और उनके अधिकारों की रक्षा के लिए देश में सर्वप्रथम “समान नागरिक संहिता” को लागू करने का ऐतिहासिक कार्य किया है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार “मुख्यमंत्री लघु उद्योग प्रोत्साहन योजना“ और “उद्यमिता विकास कार्यक्रम“ जैसी योजनाओं के माध्यम से भी मातृशक्ति को सशक्त बनाने का प्रयास कर रही है। महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने के लिए महिला स्वयं सहायता समूहों को 5 लाख रुपये तक का ब्याज-मुक्त ऋण प्रदान किया जा रहा है। राज्य सरकार ने वर्ष 2023 से तीलू रौतेली पुरस्कार राशि 31 हजार रुपए से बढ़ाकर 51 हजार और आंगनवाड़ी कार्यकर्ता पुरस्कार धनराशि 21 हजार रुपए से बढ़ाकर 51 हजार कर दी है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि बच्चों के शुरुआती चरण के विकास में आंगनवाड़ी केंद्रों की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। ग्रामीण इलाकों में माता-पिता के बाद बच्चों को संस्कार और प्रारंभिक शिक्षा देने की शुरुआत आंगनवाड़ी केंद्रों से ही होती है। उनके दोनों बच्चों ने भी अपनी प्रारंभिक शिक्षा और संस्कार आंगनवाड़ी से ही प्राप्त किए हैं। इसलिए राज्य सरकार ने आंगनवाड़ी, मिनी आंगनवाड़ी बहनों और सहायिकाओं को सशक्त बनाने के लिए उनके मानदेय में वृद्धि की है। पहले जहां आंगनवाड़ी बहनों को 7500 रुपए का मानदेय मिलता था, उन्हें अब 9300 रुपए कर दिया गया है। इसी तरह अब मिनी आंगनवाड़ी को 4500 के बजाय 6250 और सहायिकाओं को 3550 के बजाय 5250 रुपए का मानदेय मिलता है। इसके साथ ही आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं को सुपरवाइज़र के पद पर पदोन्नति दिए जाने का भी प्रावधान किया गया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि आगे भी महिलाओं के अधिकारों और सम्मान की रक्षा के लिए पूरी शक्ति, निष्ठा और समर्पण के साथ कार्य करते रहेंगे।

मुख्यमंत्री ने कहा राज्य की महिलाओं के पास क्षमता और योग्यता की कमी नहीं है। महिला स्वयं सहायता समूहों के बनाए हाउस ऑफ हिमालयाज के उत्पाद, बहुराष्ट्रीय कंपनियों को भी मात दे रहे हैं। इसलिए वो हमेशा महिला समूहों को प्रोत्साहन देने का कार्य करते हैं। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बाबा केदार की धरती से कहा था कि, 21वीं शताब्दी का तीसरा दशक, उत्तराखंड के नाम होने जा रहे हैं, इस क्रांति में महिला समूहों की अहम भूमिका होने जा रही है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि वैसे यह कार्यक्रम पहले आठ अगस्त को आयोजित होना था, लेकिन आपदा के कारण तब आयोजन संभव नहीं हो पाया। उन्होंने कहा कि प्रदेश इस समय आपदाओं से घिरा हुआ है, सरकार आपदा प्रभावितों तक हर संभव तरीके से पहुंचने का प्रयास कर रही है, इस काम में केंद्र सरकार का भी सहयोग मिल रहा है।

इस मौके पर विभागीय मंत्री रेखा आर्य ने कहा कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में राज्य सरकार ने महिलाओं के कल्याण के लिए कई कदम उठाए हैं। आगंनवाड़ी कार्यकत्रियों का मानदेय बढ़ाने का एतिहासिक कार्य भी धामी सरकार ने किया। आयोजन में विधायक खजान दास, सचिव चंद्रेश कुमार, निदेशक बंशीलाल राणा सहित बड़ी संख्या में महिलाएं शामिल हुईं।

इन्हें मिला तीलू रौतेली पुरस्कार
अल्मोडा से मीता उपाध्याय, बागेश्वर से अलिशा मनराल, चमोली से सुरभि, चम्पावत से अनामिका बिष्ट, देहरादून से शिवानी गुप्ता, हरिद्वार से रूमा देवी, नैनीताल से नैना, पौड़ी गढ़वाल से रोशमा देवी, पिथौरागढ से रेखा भट्ट, रूद्रप्रयाग से हेमा नेगी करासी, टिहरी गढवाल से साक्षी चौहान, ऊधमसिंह नगर से रेखा और उत्तरकाशी से विजयलक्ष्मी जोशी।

सीएम धामी ने युवाओं से किया वायदा करा पूरा, अग्निवीर आरक्षण नियमावली जारी

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने अपने एक और वायदे को पूरा करते हुए, सेवामुक्त होने वाले अग्निवीरों को विभिन्न विभागों की वर्दीधारी सेवाओं में दस प्रतिशत क्षैतिज आरक्षण प्रदान कर दिया है। इस संबंध में सोमवार को कार्मिक एवं सतर्कता विभाग की ओर से विधिवत तौर पर उत्तराखंड राज्याधीन सेवाओं में समूह ग के सीधी भर्ती के वर्दीधारी पदों पर सेवायोजन हेतु सेवामुक्त अग्निवीरों को क्षैतिज आरक्षण नियमावली-2025 जारी कर दी है।

सैन्य बहुल प्रदेश होने के कारण उत्तराखंड सरकार के इस निर्णय को मास्टर स्ट्रोक माना जा रहा है। इसी नियमावली के जरिए अब सेवामुक्त हुए अग्निवीरों को विभिन्न विभागों के वर्दीधारी पदों पर 10 प्रतिशत क्षैतिज आरक्षण प्रदान किया जाएगा। इसमें पुलिस आरक्षी (नागरिक/पीएसी), उप निरीक्षक, प्लाटून कमांडर पीएसी, अग्निशामक, अग्निशमन द्वितीय अधिकारी, बंदी रक्षक, उप कारापाल, वन आरक्षी, वन दरोगा, आबकारी सिपाही, प्रवर्तन सिपाही और सचिवालय रक्षक जैसे महत्वपूर्ण वर्दीधारी पद शामिल हैं।

“देश की सेवा कर लौटे पूर्व अग्निवीर प्रदेश का गौरव हैं। उन्हें सम्मान और रोजगार का अवसर देना हमारी जिम्मेदारी है। यह निर्णय सेवामुक्त हुए अग्निवीरों के भविष्य को सुरक्षित करने की दिशा में एक ठोस कदम है। हमारी सरकार पूर्व सैनिकों और अग्निवीरों को हर तरह से सेवायोजन का प्रयास कर रही है”।
– पुष्कर सिंह धामी, मुख्यमंत्री उत्तराखंड

मुख्यमंत्री ने आपदा राहत व बचाव कार्यों की समीक्षा की

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने प्रदेश के आपदा प्रभावित क्षेत्रों में चलाए जा रहे राहत व बचाव कार्यों की समीक्षा की। उन्होंने आपदा की दृष्टि से संवेदनशील क्षेत्रों एवं खतरे की संभावना वाले क्षेत्रों में जान-माल की सुरक्षा के लिए सभी एहतियाती कदम उठाए जाने और आपदा प्रभावितों को तत्परता से हर संभव मदद उपलब्ध कराने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने राज्य में अगले कुछ दिनों के लिए मौसम विभाग के अलर्ट को देखते हुए विशेष सतर्कता बरतने के निर्देश देते हुए कहा कि किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए आपदा प्रबंधन तंत्र निरंतर तैयार रहे।

मुख्यमंत्री ने बैठक में उत्तराखंड आपदा परिचालन केंद्र से जुड़े शासन के उच्चाधिकारियों और सभी जिलों के जिलाधिकारियों से आपदा प्रभावित इलाकों की विस्तृत जानकारी प्राप्त की। उन्होंने कहा कि आपदा पर किसी का जोर नहीं है, लेकिन प्रभावित क्षेत्रों में राहत एवं बचाव टीमें तुरंत ग्राउंड जीरो पर पहुंच कर सराहनीय कार्य कर रही हैं। सभी विभाग निरंतर इसी तरह की तत्परता एवं बेहतर समन्वय के साथ प्रभावितों की मदद में जुटे रहें।

उत्तरकाशी के स्यानाचट्टी क्षेत्र की चर्चा करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि मलवे के कारण वहां नदी के जलस्तर में वृद्धि हुई है। नदी के प्रवाह को बनाए रखने के लिए निकाले गए मलवे को नदी किनारे से हटाकर अन्यत्र कहीं सुरक्षित स्थान में डंप किया जाए। ताकि बारिश होने पर यह मलवा पुनः नदी में जाकर अवरोध न पैदा कर सके।

मुख्यमंत्री ने कहा कि बारिश कम होने के बाद चार धाम यात्रियों की संख्या में वृद्धि होगी। साथ ही त्योहारों का मौसम भी आ रहा है। इसे देखते हुए सड़कों के सुधार एवं अन्य आवश्यक व्यवस्थाओं को दुरस्त किया जाने पर विशेष ध्यान दिया जाय। उन्होंने सचिव लोक निर्माण विभाग को निर्देश दिए की सड़कों की मरम्मत हेतु टेंडर सहित अन्य औपचारिकताएं तुरंत पूरा कर समय से आवश्यक कार्य संपन्न करा लिए जाए।

मुख्यमंत्री ने राज्य के विभिन्न क्षेत्रों ने विगत दिनों में घटित आपदा में क्षति की जानकारी ली। उन्होंने अवरुद्ध सड़कों को जल्द खोलने, पानी तथा विद्युत आपूर्ति बहाल करने के लिए सभी आवश्यक कदम उठाने के निर्देश दिए।

मुख्यमंत्री ने विगत दिवस घटित आपदा में घायल पशुओं के उपचार के लिए पशुपालन विभाग को सभी गांव में डॉक्टरों की टीम भेजने के निर्देश दिए। उन्होंने जिलाधिकारियों से स्पष्ट शब्दों में कहा कि राहत व बचाव कार्यों को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए शासन स्तर से अपेक्षित किसी भी प्रकार के सहयोग की शासन से बेझिझक मांग करें। मुख्यमंत्री ने सचिव आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास को निर्देश दिए कि आपदा राहत एवं बचाव कार्यों के लिए जनपदों से की जाने मांग पर तुरंत कार्रवाई करते हुए आवश्यक धनराशि जारी कर दें।

मुख्यमंत्री ने नदी-नालों के किनारे रहने वाले लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के निर्देश देते हुए कहा कि नदियों के जल स्तर पर लगातार निगरानी रखी जाए। खतरे की आशंका होने पर नदी के आसपास रहने वाले लोगों को तुरंत सुरक्षित स्थानों पर शिफ्ट किया जाए। मुख्यमंत्री ने कहा कि नदी-नालों के किनारों पर किसी भी तरह का अतिक्रमण नहीं होना चाहिए।

मुख्यमंत्री ने राज्य में स्थित बांधों पर हर समय सिंचाई विभाग के अधिकारियों की तैनाती सुनिश्चित किए जाने के देते हुए कहा कि बांध से यदि पानी छोड़े जाने की पूर्व सूचना नियमित तौर पर जिला प्रशासन को दी जाए। अपरिहार्य परिस्थिति में बांध से अधिक पानी छोड़े जाने की दशा में जान-माल की सुरक्षा के लिए समय रहते इंतजाम कर लिए जाएं।

बैठक में मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन, सचिव गृह शैलेश बगौली, डीजीपी दीपम सेठ, सचिव डॉ.पंकज पांडे, सचिव आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास विनोद कुमार सुमन, आयुक्त गढ़वाल विनय शंकर पांडे, आयुक्त कुमाऊं दीपक रावत के साथ ही सभी जिलों के जिलाधिकारी तथा पुलिस अधीक्षकों ने बैठक में प्रतिभाग किया।

जर्मनी में उत्तराखंड के युवाओं को मिलेगा स्टार्टअप क्षेत्रों में मौका, हुआ एमओयू

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की उपस्थिति में मुख्यमंत्री आवास में उत्तराखण्ड सरकार और जर्मन स्थित इनोवेशन हब राइन-माइन, के मध्य लेटर ऑफ इन्टेन्ट (एल.ओ.आई) पर हस्ताक्षर किये गये। इसका उद्देश्य उत्तराखण्ड को कुशल युवाओं को जर्मनी में स्वास्थ्य, ऑटोमोबाइल, व्यावसायिक प्रशिक्षण, हाइड्रोजन एवं नवीकरणीय ऊर्जा प्रौद्योगिकी, नवाचार आधारित स्टार्टप जैसे क्षेत्रों से जोड़ना है।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि उत्तराखण्ड के युवाओं को रोजगार से जोड़ने की दिशा में यह एक अच्छी पहल है। उन्होंने कहा कि उत्तराखण्ड में प्रतिभाओं की कमी नहीं है। राज्य सरकार द्वारा युवाओं के कौशल विकास पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। विभिन्न देशों की मांग के आधार पर भी राज्य के युवाओं को कौशल विकास से जोड़ा जा रहा है। उन्होंने कहा कि राज्य के युवाओं के कौशल विकास के साथ ही विदेशी भाषाओं का प्रशिक्षण की व्यवस्था भी राज्य सरकार द्वारा कराई गई है। युवाओं को रोजगार से जोड़ने की सरकार द्वारा लगातार प्रयास किये जा रहे हैं। कौशल विकास और विदेशी भाषा का प्रशिक्षण दिये जाने के बाद राज्य के कई युवा विदेशों में नौकरी कर रहे हैं।

इस अवसर पर कैबिनेट मंत्री सौरभ बहुगुणा, प्रमुख सचिव आर. मीनाक्षी सुंदरम, सचिव शैलेश बगौली, विनय शंकर पाण्डेय, सी. रविशंकर, जर्मन प्रतिनिधिमंडल में राउनहाइम शहर के मेयर डेविड रेंडल,जर्मनी के विदेशी निवेश प्रकोष्ठ के सलाहकार सौरभ भगत तथा इनोवेशन हब राइन-माइन के सीईओ स्टीफन विट्टेकिंड मौजूद थे।