राज्य सरकार ने सृजित किये रोजगार के नये मौके

उत्तराखंड को पर्यटन राज्य बनाने की दिशा में मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत मंत्रिमंडल ने महत्वपूर्ण कदम उठाये है। उन्होंने सैकड़ो रोजगार देने के लिये वीर चंद्र सिंह गंढ़वाली योजना का दायरा बढ़ाकर क्याकिंग, टेरेनबाइकिंग, कैरावेन, एग्लिंग, स्टार गेसिंग, बर्ड वॉचिंग, आदि गतिविधियों को जोड़ा है।

मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत की अध्यक्षता में मंत्रिमंडल की बुधवार को कोटी कॉलोनी क्षेत्र में टिहरी झील में तैरती बोट पर बैठक हुई। बैठक में 13 बिंदु रखे गए। लेकिन थराली उपचुनाव की आचार संहिता लागू होने के चलते जोशीमठ क्षेत्र से जुड़े एक बिंदु को स्थगित कर दिया गया। सरकार के प्रवक्ता व काबीना मंत्री मदन कौशिक ने बताया कि एमएसएमई (सूक्ष्म, लघु, मध्यम उद्योग) पॉलिसी में संशोधन कर पर्यटन से जुड़ी कई गतिविधियों को उद्योग का दर्जा दिया गया। अब कायाकल्प रिजॉर्ट, आयुर्वेद, योग, पंचकर्मा, बंजी जंपिंग, जॉय राइडिंग, सर्फिंग, कैंपिंग, राफ्टिंग जैसे उद्यम एमएसएमई नीति के तहत आएंगे। इस क्षेत्र में आने वाले उद्यमियों को उक्त नीति के तहत तमाम सुविधाएं मिलेंगी।

मेगा इन्वेस्टमेंट इंडस्टियल पॉलिसी के तहत आयुष और वेलनेस को लाया गया है। इससे होटल, रिजॉर्ट, क्याकिंग, सी प्लेन उद्योग, आयुर्वेद, योग जैसी 22 गतिविधियां को शामिल किया गया है। इन गतिविधियों के लिए आने वाले उद्यमों को सरकार की ओर से कई लाभ मिलेंगे।

वीर चंद्र सिंह गढ़वाली योजना में 11 नई गतिविधियों के लिए उपकरणों की खरीद के लिए सहायता दी जाएगी। काबीना मंत्री कौशिक ने बताया कि चालू वर्ष को रोजगार वर्ष के रूप में घोषित किया गया है। सरकार का उद्देश्य पर्यटन और रोजगार को आपस में जोड़कर राज्य के युवाओं को रोजगार से जोड़ना है।

गिरफ्तारी देकर एम्स में भ्रष्टाचार व मनमानी के खिलाफ की जांच की मांग

पिछले कई माह से एम्स प्रशासन ऋषिकेश के विरोध में उत्तराखंड जन विकास मंच का धरना व क्रमिक अनशन चल रहा है। मंच ने एम्स में भ्रष्टाचार व नौकरियों में बाहरी लोगों को वरियता के साथ अनियमितता का आरोप लगाया है और इन्हीं मांगों को लेकर वह कई माह से धरना व क्रमिक अनशन कर रहे है। बुधवार को मंच के कार्यकर्ताओं ने बहुल्य संख्या में तहसील पहुंच कर उप जिलाधिकारी के समक्ष अपनी-अपनी गिरफ्तारी दी। हालांकि बाद में उन्हें निजी मुचलके भरने के बाद रिहा कर दिया गया।

उत्तराखंड जन विकास मंच के कार्यकर्ता उप जिलाधिकारी कार्यालय पहुंचे। जहां उन्होंने एम्स प्रशासन के खिलाफ प्रदर्शन किया। मंच के अध्यक्ष आशुतोष शर्मा ने उप जिलाधिकारी के माध्यम से प्रधानमंत्री को प्रेषित ज्ञापन कर कहा कि एम्स में संविदा व आउटसोर्सिग के माध्यम से की जा रही ग्रुप सी व डी की नियुक्तियों में 70 प्रतिशत प्राथमिकता स्थानीय बेरोजगारों को दी जानी चाहिए। मगर, एम्स में नियुक्तियों की आड़ में खुलेआम भ्रष्टाचार हो रहा है।

उन्होंने कहा कि वर्ष 2014 में नियुक्ति को लेकर निकाली गई विज्ञप्ति रद्द कर दी गयी और अभ्यर्थियों का पैसा नहीं लौटाया गया। उत्तराखंड वासियों से फार्म फीस के नाम पर ज्यादा वसूली हो रही है। ज्ञापन में कहा गया कि बीते वर्ष बीएससी नर्सिंग के पदों पर विज्ञप्ति जारी हुई। भारत की यह पहली ऐसी परीक्षा रही, जिसमें कोई भी सफल नहीं हुआ। इस वर्ष फिर विज्ञप्ति जारी की गयी। जिसके भीतर कोई परीक्षा नहीं हुई है। मंच ने निदेशक की भूमिका पर भी सवाल उठाते हुये जांच की मांग की है।

गिरफ्तारी और प्रदर्शन में पूर्व विधायक ओमगोपाल रावत, राजेश व्यास, जयेन्द्र रमोला, हिमांशु बिजल्वाण, सरोज डिमरी, राधा रमोला, देवेन्द्र बैलवाल, जनार्दन तिवारी, भगतराम कोठारी, सत्यवीर तोमर, सुभाष जखमोला, नीरज सहरावत आदि शामिल हुए।

अब सरकार हर तीन माह में पुलिस कर्मियों का करायेगी मेडिकल चेकअप

सरकार को हर तीन माह में पुलिस कर्मियों का मेडिकल चेकअप कराना होगा। हाईकोर्ट ने सरकार को इस बात का आदेश जारी किया है। इसके अलावा आवासीय स्थिति में सुधार के लिये पुलिस कर्मियों के लिये हाउसिंग स्कीम बनेगी।

नैनीताल स्थिति हाईकोर्ट में हरिद्वार के अधिवक्ता अरुण भदौरिया ने एक जनहित याचिका दायर की थी। जिसमें उन्होंने राज्य में पुलिस कर्मियों की रोजाना 10 से 15 घंटे ड्यूटी को कम करने संबंधी बात कही थी।

वरिष्ठ न्यायाधीश न्यायमूर्ति राजीव शर्मा व न्यायमूर्ति शरद कुमार शर्मा की खंडपीठ ने मामले को सुनने के बाद राज्य सरकार को अहम दिशा-निर्देश जारी किए। कोर्ट ने तीन माह के भीतर पुलिस कर्मियों के कल्याण के लिए कॉरपस फंड बनाने, सर्विस कॅरियर में तीन प्रमोशन प्रदान करने, अवकाश के मामलों में उदारता बरतने, ड्यूटी के दौरान जख्मी या मृत्यु होने पर परिजनों को मुआवजा देने, हर तीन माह में पुलिस कर्मियों का मेडिकल चेकअप अनिवार्य रूप से करने व हर जिले में पुलिस कर्मियों की जांच के लिए मनोचिकित्सक की नियुक्ति करने का फरमान दिया हैं।

देश के आठवें सीजीडी का निर्माण कार्य 2020 तक होगा पूरा

देश के आठवें और उत्तराखंड के पहले सीजीडी (सिटी गैस डिस्ट्रीब्यूशन) का शुभारंभ हो गया। 500 किलोमीटर की इस पाइप लाइन का निर्माण कार्य वर्ष 2020 तक पूरी होने की उम्मीद है।

इस पाइप लाइन के अर्न्तगत जसपुर में एक, काशीपुर में दो, बाजपुर में एक, रूद्रपुर में तीन, किच्छा में एक, खटीमा में एक तथा कुल मिलाकर 10 स्थानों को सीएनजी स्टेशन के लिए चिहनित किया गया है। लगभग 250 करोड़ रूपये की इस परियोजना से उत्तराखण्ड में काशीपुर से रूद्रपुर/पन्तनगर तक क्षेत्र आच्छादित करेगा। इसके साथ ही मुख्यमंत्री श्री त्रिवेन्द्र ने पेट्रोलियम एवं नेचुरल रेग्यूलेट्री बोर्ड द्वारा आयोजित 9वें सीजीडी बिडिंग राउन्ड रोड शो में प्रतिभाग किया।

पिरूल बनेगा कमाई का जरिया
मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने रूद्रपुर वासियों को बधाई एवं शुभकामनाएं देते हुए कहा कि पेट्रोलियम एवं नेचुरल रेग्यूलेट्री बोर्ड तथा अदानी गु्रप के संयुक्त प्रयासो से रूद्रपुर में घरेलू गैस की आपूर्ति गैस पाइप लाइन द्वारा आरम्भ हो गई है। राज्य सरकार द्वारा पिरूल से बिजली बनाने का निर्णय लिया है। हमारे जंगलों में लगभग लाख मीट्रिक टन है। पिरूल को आय का जरिया बनाया जाएगा। तारपीन बायोफयूल आदि का उत्पादन किया जाएगा। इस योजना से 60000 लोगो को रोजगार मिलेगा तथा 150 मेगावॉट बिजली पैदा होगी। बायोफयूल उत्पादन के लिए देहरादून के भूमि आवंटित की जा रही है। राज्य सरकार का प्रयास है कि पर्यावरण संरक्षण के साथ ही पलायन पर प्रभावी अकुंश लगाया जा सके।

मुख्यमंत्री ने निवेशकों से अपील की कि किसी भी परियोजना या योजना पर काम करते हुए हमें इस बात का ध्यान रखना होगा कि इसके माध्यम से कितने लोगो को रोजगार मिलेगा। उन्होंने कहा कि पर्यावरण सरंक्षण के साथ ही पलायन राज्य की गम्भीर समस्या है। शासन के अधिकारियों को निर्देश दिए गए है कि योजनाओं के निमार्ण समय इस बात का विशेष ध्यान रखे कि योजनाओं के माध्यम से अधिकाधिक रोजगार के अवसर पैदा हो। रोजगार का मतलब स्वरोजगार है ना कि सरकारी नौकरी।

पेट्रोलियम एवं नेचुरल रेग्यूलेट्री बोर्ड के अध्यक्ष जीके श्राफ ने कहा कि राज्य सरकार द्वारा सीजीडी के लिए अच्छा सहयोग दिया जा रहा है। उत्तराखण्ड में हरिद्वार तथा उधम सिंह नगर इस पर कार्य किया जा रहा है। देहरादून के लिए निवेशकों को आमत्रिंत किया जा रहा है। गेल द्वारा 2019 तक हरिद्वार में गैस पाइप लाइन पर कार्य पूरा कर लिया जाएगा। राज्य सरकार द्वारा हर संभव सहयोग दिया जा रहा है। इस सम्बन्ध में सभी प्रकार के अनुमोदन शीघ््रा प्राप्त हो रहे है। देहरादून के सेलाकुई क्षेत्र, ऋषिकेश के औद्योगिक क्षेत्र में शीघ््रा ही सिटी गैस डिस्ट्रीब्यूशन आरम्भ किया जाएगा।

वन पंचायतों की क्षमता विकास पर देंगे विशेष बलः सीएम

सचिवालय में वन विभाग की समीक्षा बैठक लेते वक्त सीएम त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने कहा कि जो वन पंचायतें अच्छा कार्य कर रही है। उन्हें जिला व प्रदेश स्तर पर सम्मानित किया जायेगा। साथ ही वन पंचायतों की क्षमता विकास पर विशेष बल दिया जाये।

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र ने कहा कि उत्तराखण्ड वन संसाधन प्रबन्धन परियोजना के तहत जिन 750 वन पंचायतों का चयन किया गया है, इनमें जल संरक्षण, उन्नत किस्म के पौध रोपण एवं आर्गनिक उत्पादों को अधिक बढ़ावा दिया जाए। वन पंचायतों के लिए जो पौधे उपलब्ध कराए जा रहे हैं, उनमें फलदार वृक्ष, चारा प्रजाति, औषधीय वृक्ष उपलब्ध कराये जाएं। वृक्षों को पानी की उपलब्धता के लिए वर्षा जल संचय की व्यवस्था भी की जाए। परम्परागत तरीको से जल संरक्षण के लिए चाल-खाल, तालाब एवं चैक डेम बनाये जाएं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखण्ड के विभिन्न क्षेत्रों में वहां की पारिस्थितिकी के अनुसार वृक्षारोपण, मसालों की खेती, एरोमैटिक खेती आदि पर कार्य किया जाए। जिससे वन पंचायतों को आर्थिक लाभ हो सके एवं लोगों की आजीविका में वृद्धि हो सके। वन पंचायतों के अन्तर्गत पेयजल स्रोतों के पुनर्जीवीकरण का कार्य भी किया जाए। उन्होंने कहा कि जितने भी कार्य किये जा रहे हैं, उनकी जियो टैगिंग की जाए। इस प्रोजेक्ट को सफल बनाने के लिए सभी सम्बन्धित विभाग आपसी समन्वय से कार्य करें।

 मुख्यमंत्री ने कहा कि क्षतिपूरक वनीकरण निधि प्रबंधन एवं नियोजन प्राधिकरण (उत्तराखण्ड कैम्पा) के तहत वनों के संरक्षण, संवर्द्धन, मृदा एवं जल के संग्रहण तथा सूख रहे जल स्रोतों के पुनरोद्धार के लिए विशेष कार्ययोजना बनाई जाये। उन्होंने कहा कि कैम्पा के अन्तर्गत स्थानीय लोगों को रोजगार से जोड़ने के लिए वृक्षारोपण एवं उनका अनुरक्षण, जल संरक्षण से सम्बन्धित कार्यों पर अधिक बल दिया जाए।

दून स्थित क्रिकेट स्टेडियम आईसीसी पैनल में होगा शामिल

जल्द ही देहरादून स्थित नवनिर्मित राजीव गांधी अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम का निरीक्षण आईसीसी का पैनल करेगा। यह जानकारी राज्य के खेल मंत्री अरविंद पांडेय ने दी है।

पांडेय ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय मैचों के लिए सरकार की ओर से हरसंभव सहयोग दिया जाएगा। उत्तराखंड के पहले अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम को अफगानिस्तान अपना होम ग्राउंड बनाने की इच्छा पूर्व में ही जता चुका है। बकायदा अफगानिस्तान क्रिकेट बोर्ड के सीईओ शाकिब स्टेडियम का दौरा भी कर चुके हैं और उन्होंने इस संबंध में बीसीसीआइ को पत्र भी लिखा है।

खेल मंत्री अरविंद पांडेय का कहना है कि अफगानिस्तान क्रिकेट बोर्ड ने उन्हें पत्र लिखकर तीन टी-20 क्रिकेट मैच की सीरीज के लिए सहयोग मांगा है। तीन मैचों की सीरीज अफगानिस्तान और बांग्लादेश के बीच तीन जून से प्रस्तावित है।

उन्होंने दावा किया है कि आइसीसी की टीम जल्द ही दून पहुंचकर स्टेडियम का निरीक्षण कर इसे अपने पैनल में शामिल कर लेगी। जबकि, बीसीसीआइ की टीम कई बार स्टेडियम का दौरा कर चुकी है। उन्होंने कहा कि आइसीसी ने तीन मैचों की सीरीज के लिए अपनी वेबसाइट पर भी दून स्टेडियम को शामिल किया है। इससे तय है कि तीन जून को यहां पहला अंतरराष्ट्रीय मैच देखने को मिल सकेगा।

साहसिक खेल को बढ़ावा देने ट्रेकिंग दल हुआ रवाना

पर्यावरण मंत्री डा हरक सिंह रावत ने नाग टिब्बा में ट्रेकिंग के लिये 60 सदस्यीय दल को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। इस दल का उद्देश्य साहसिक खेलों को बढ़ावा देना है।

पर्यावरण मंत्री डॉ. हरक सिंह रावत ने कहा उत्तराखण्ड का नैसर्गिक सौन्दर्य पर्यटकों को यहाँ आने के लिए आकर्षित करता है। उन्होंने कहा कि चारधाम ऑलवेदर रोड, रेल और एयर कनेक्टिविटी के सुदृढ़ होने से उत्तराखण्ड में पर्यटन को और अधिक बढ़ावा मिलेगा। उत्तराखण्ड ने पर्यावरण के क्षेत्र में विष्व में अपनी अलग पहचान बनाई है।

हम पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में लगातार कार्य कर रहे हैं। प्रदेश में वैलनेस एंड योग टूरिज्म, एडवेंचर टूरिज्म, इको टूरिज्म, विलेज टूरिज्म की अपार संभावनाएं है। उन्होंने कहा कि राज्य निर्माण में देश के अन्य राज्यों में रह रहे उत्तराखण्डवासियों की भी महत्वपूर्ण भूमिका रही है।

वारदातः जनपद हरिद्वार में तीन लोगों पर हुयी फायरिंग

हरिद्वार जिले में एक सनसनी वारदात सामने आई है। जिसमें एक ही परिवार के तीन सदस्यों को गोली मार दी गयी। पीड़ित परिवार को कसूर बस इतना था कि वह खेत में पानी डाल रहा था। जो कि हमलावरों को नागवार गुजरा।

गुरूवार को हरिद्वार के झबरेडा के हतश्यामपुर गांव में शाम छह बजे वेदपाल नाम व्यक्ति रजवाहे के पास ट्रैक्टर में पंप लगाकर खेत में पानी दे रहा था। इसी दौरान गांव का ही एक अन्य व्यक्ति महकार अपने कुछ साथियों के साथ वहां आ पहुंचा। वे खेत में पानी देने का विरोध करने लगे, इसी को लेकर उनका विवाद हो गया।

आरोप है कि महकार और उसके साथ आए लोगों ने वेदपाल से मारपीट शुरू कर दी। उसके 20 वर्षीय बेटे विकास ने विरोध किया तो उन्होंने तमंचे पर फायर झोंक दिए। इनमें से एक गोली विकास के सिर पर लगी, वह वहीं पर ढेर हो गया। दूसरी गोली वेदपाल के सिर में और एक अन्य उसके भतीजे अनित के हाथ में लगी। वेदपाल की हालत चिंताजनक बताई जा रही है।

वारदात के बाद हमलावर फरार हो गए। घटना का पता चलने पर गांव में सनसनी फैल गई। सूचना पर एसपी देहात मणिकांत मिश्रा, एसपी सिटी ममता बोहरा और सीओ स्वप्न किशोर सिंह मौके पर पहुंचे। तनाव को देखते हुए गांव में पुलिस बल तैनात किया गया है। घायल वेदपाल और अनित को जौलीग्रांट स्थित एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया है। एसपी देहात मणिकांत मिश्रा ने बताया कि हत्या के बाद आरोपित गांव से फरार हो गए। चार लोग हिरासत में लिए गए है। फिलहाल घटना के संबंध में तहरीर नहीं मिल पायी है।

नमामि गंगे की बेवसाईट का सीएम ने किया शुभारंभ

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने पेयजल योजनाओं और नमामि गंगे की बेवसाईट का शुभारंभ किया। इस दौरान उन्होंने विद्यालयों में बच्चों के लिये स्वच्छता पर आधारित पाठय सामग्री का भी विमोचन किया।

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र ने कहा कि जल संकट की चुनौती से लड़ने के लिए विशेष प्रयासों की जरूरत है। आने वाले समय में जल संकट विश्व के समक्ष एक गम्भीर समस्या होगी। जल के संरक्षण एवं संवर्द्धन के लिए हमें अल्पकालिक एवं दीर्घकालिक सोच के साथ कार्य करना जरूरी है। उन्होंने कहा कि जल संरक्षण के लिए राज्यों को आपस में मिलकर विचार करना होगा। मुख्यमंत्री ने हिमाचल, हरियाणा, उत्तरप्रदेश के मुख्यमंत्रियों से बात की है। टिहरी के जलाशय के कारण गंगा का जल स्तर सही बना हुआ है। जल संरक्षण के लिए वॉटर कॉपर्स बनना चाहिए। विभिन्न माध्यमों से वर्षा जल का संग्रहण करना आवश्यक है, ताकी पीने के पानी एवं सिंचाई के लिए पानी की पूर्ति हो सके।

मुख्यमंत्री ने कहा कि जल संरक्षण राज्य सरकार की शीर्ष प्राथमिकताओं में है पिछले एक साल में देहरादून में तीन झील बनाने का निर्णय लिया गया। जिसमें सूर्यधार का टेंडर हो गया है, सौंग के लिए बजट का प्रावधान कर लिया गया है, जबकि मलढ़ूंग की डीपीआर तैयार हो रही है। पिथौरागढ़, अल्मोड़ा एवं पौड़ी में भी झील बनाने का निर्णय लिया है। इन झीलों के माध्यम से जल संरक्षण भी होगा और ईको सिस्टम भी ठीक होगा।

उन्होंने कहा कि किसी भी कार्य को पूरा करने के लिए लक्ष्य पहले से निर्धारित होना चाहिए। पिछले वर्ष 25 मई से जल संरक्षण को जो अभियान चलाया गया, उससे 40 करोड़ लीटर पानी का संरक्षण हुआ है। इस वर्ष 70 करोड़ लीटर जल संरक्षण का लक्ष्य रखा गया है। राज्य सरकार ने रिस्पना नदी एवं कुमांऊ की लाइफ लाइन कोसी को पुनर्जीवित करने का लक्ष्य रखा है। इनके पुनर्जीवीकरण का कार्य मिशन मोड पर किया जायेगा। उन्होंने कहा कि इस वर्ष लगभग 200 करोड़ रूपये जल संग्रहण एवं उससे सम्बन्धित योजनाओं पर खर्च किये जायेंगे। सरकारी आवासों से रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम की शुरूआत की जा रही है।

पेयजल मंत्री प्रकाश पंत ने कहा कि वैश्विक स्तर पर लगातार पेयजल की कमी की समस्या बढ़ती जा रही है। पेयजल की समस्या के निदान को विश्व बैंक पोषित अर्द्धनगरीय क्षेत्र के रूप में प्रदेश के 07 जनपदों के चिन्ह्ति 35 अर्द्धनगरीय क्षेत्रों के लिए मानक के अनुरूप पेयजल उपलब्ध कराने के लिए कार्यक्रम का शुभारम्भ किया गया है। वर्ष 2022 तक हर घर में शुद्ध पानी पहुंचाने के लिए शहरी एवं ग्रामीण क्षेत्रों के लिये योजनायें बनाई जा रही हैं। उन्होंने कहा कि विकास की दौड़ के कारण पर्यावरण को जो क्षति पहुंच रही इससे भविष्य में गहरे जल संकट की समस्याएं उत्पन्न हो सकती है। जल संरक्षण के लिए हमें सुनियोजित तरीके से उपाय तलाशने होंगे।

उन्होंने बताया कि उत्तराखण्ड में जल संरक्षण के लिए इस वर्ष 15 प्रोजेक्ट लिये गये हैं। वर्षा जल संरक्षण व संवर्द्धन का कार्य विभिन्न बड़े सरकारी आवासों से किये जा रहे हैं। नमामि गंगे योजना के तहत गंगा को गंगोत्री से उतराखण्ड की अन्तिम सीमा तक स्वच्छ रखने का राज्य सरकार का लक्ष्य है। गंगा किनारे उत्तराखण्ड में जो 132 गांव आते हैं, उन्हें गंगा गांव की श्रेणी दी गई है। गंगा की स्वच्छता एवं निर्मलता के लिए हम सबको मिलकर प्रयास करने होंगे।

राज्य आंदोलनकारियों की याचिका हुयी खारिज

हाईकोर्ट ने राज्य आंदोलनकारियों की उस याचिका को खारिज किया है। जिसमें उन्हें सरकारी सेवाओं में दस फीसदी आरक्षण की मांग की थी।

राज्य आंदोलनकारियों को दस फीसद क्षैतिज आरक्षण के मामले में हाई कोर्ट के दो न्यायाधीश द्वारा अलग-अलग राय दी गई। जस्टिस सुधांशु धूलिया द्वारा आरक्षण को असंवैधानिक करार दिया गया तो जस्टिस यूसी ध्यानी द्वारा संवैधानिक करार दिया गया। इसके बाद मामला मुख्य न्यायाधीश तक पहुंचा तो उन्होंने निर्णय के लिए तीसरी बैंच को मामला रेफर कर दिया।

न्यायमूर्ति लोकपाल सिंह की एकलपीठ ने मामले को सुनने के बाद आरक्षण को असंवैधानिक करार दिया था। आरक्षण असंवैधानिक करार देने के फैसले को चुनौती देते हुए अधिवक्ता रमन कुमार साह द्वारा पुनर्विचार याचिका दायर की गई। मंगलवार को न्यायमूर्ति सुधांशु धूलिया व न्यायमूर्ति लोकपाल सिंह की खंडपीठ ने मामले को सुनने के बाद पुनर्विचार याचिका खारिज कर दी। अधिवक्ता साह ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट में एसएलपी दायर करने के लिए पुनर्विचार याचिका दायर करना जरूरी था। अब आरक्षण मामले को लेकर जल्द एसएलपी दायर की जाएगी।