राज्य के 208 लोगों को मुख्यमंत्री ने सौंपे 148.85 मेगावाट की परियोजना के आवंटन पत्र

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने शुक्रवार को मुख्यमंत्री आवास स्थित जनता मिलन हॉल में राज्य के 208 स्थानीय उद्यमियों को 600 करोड़ की 148.85 मेगावाट की सौर ऊर्जा परियोजनाओं के आंवटन पत्र वितरित किये। उन्होंने कहा कि शीघ्र ही 200 करोड़ की 52 मेगावाट की अन्य परियोजनायें भी स्थानीय विकासकर्ताओं को आवंटित की जायेगी। मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र ने सौर ऊर्जा पर्यावरण के अनुकूल है। इस प्रकार वे हरित ऊर्जा को बढ़ावा देने वाले भी बने हैं, उन्होंने कहा कि इन योजनाओं से प्रति उद्यमी को औसतन 66.5 लाख की वार्षिक आय होगी, जबकि लगभग 850 लोगों को रोजगार उपलब्ध होगा।

उन्होंने कहा कि पिछले वर्ष आयोजित इन्वेस्टर्स समिट में सौर ऊर्जा परियोजनाओं के प्रति लोगों में उत्साह देखा गया था। राज्य में निवेश को बढ़ावा देने के लिये इन्वेस्टर्स समिट से पूर्व एक माह में 5 कैबिनेट बैठकें आयोजित कर 5 नीतियों में संशोधन के साथ ही 10 उद्योगों के अनुकूल नीतियाँ बनायी गई, जिसके सार्थक परिणाम आने लगे हैं। इसके तहत अब तक राज्य में लगभग 16,000 करोड़ से अधिक निवेश प्राप्त हुआ है। मुख्यमंत्री ने कहा कि वैकल्पिक ऊर्जा के विकास से हम राज्य की ऊर्जा जरूरतों को पूरा कर सकेंगे। अभी राज्य को 1000 करोड़ की बिजली क्रय करनी पड़ रही है। राज्य में पिरूल से ऊर्जा उत्पादन की दिशा में कार्य शुरू हो गया है। इस दिशा में 21 विकासकर्ताओं को योजनायें आवंटित की जा चुकी हैं।

मुख्यमंत्री ने सौर ऊर्जा की परियोजनाओं के क्रियान्वयन में बड़ी संख्या में महिलाओं की भागीदारी को भी सुखद बताया है। उनका कहना है कि हमारी शिक्षित महिलाओं का आर्थिक रूप से मजबूत होना राज्य व समाज के हित में है। राज्य की महिलाओं की भागीदारी हर क्षेत्र में हो इसके प्रयास किये जा रहे हैं।

आवंटित की गई सौर ऊर्जा परियोजनाओं के सम्बन्ध में सचिव ऊर्जा राधिका झा ने बताया कि राज्य सरकार द्वारा उत्तराखण्ड सौर ऊर्जा नीति को संशोधित कर 05 मेगावॉट क्षमता के सोलर पावर प्लान्ट्स की स्थापना, प्रदेश के पर्वतीय क्षेत्रों में प्रदेश के मूलध्स्थायी निवासियों हेतु ही आरक्षित कर दी गयी थी। साथ ही पारम्परिक एवं नवीकरणीय तरीकों से ऊर्जा उत्पादन को उद्योग की श्रेणी में सम्मिलित करते हुये, इन परियोजनाओं के लिये उत्तराखण्ड सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योग की श्रेणी में सम्मिलित करते हुये इन परियोजनाओं के लिये उत्तराखण्ड सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योग नीति-2015 में प्रदत्त समस्त सुविधाएं भी अनुमन्य की गयी थी। उन्होंने बताया कि इस नीति के तहत आमंत्रित निविदा के सापेक्ष उक्त 208 अभ्यर्थियों को चयनित किया गया है।

इस अवसर पर जिन उद्यमियों को परियोजना आवंटन पत्र वितरित किये गये उनमें सीमा कौशिक पेटवाल, स्वपनिल जोशी, प्रियंका चौहान, पारूल गोयल, नीलम रावत, नीता कुमारी, स्वाति गुप्ता, विक्रम सिंह, महेश चन्द्र काण्डपाल, बसन्त बल्लभ कोठियाल, कैलाश चन्द्र भट्ट, जयराज सिंह परमार, प्रशान्त गंगवार सहित अन्य लोग शामिल रहे।

भारत की तीनों सेंनाएं आज हर मोर्चें पर अग्रिम स्थिति मेंः त्रिवेन्द्र

शौर्य दिवस के अवसर देहरादून के गांधी पार्क में मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने कारगिल शहीद स्मारक पर पुष्प चक्र अर्पित कर कारगिल शहीदों को श्रद्धा सुमन अर्पित किए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि देश की रक्षा के लिए हमारे जवानों ने हमेशा अदम्य साहस का परिचय दिया। उत्तराखण्ड के जवानों ने देश की रक्षा के लिए सभी युद्धों में अपना सर्वोच्च बलिदान दिया। भारत की थल सेना, वायु सेना व नौसेना आज हर मोर्चे पर अग्रिम स्थिति में है। देश को सुरक्षित रखने के लिए शास्त्रों का ज्ञान होना चाहिए वहीं देश की सीमाएं सुरक्षित रखने के लिए शस्त्रों से भी मजबूत होना जरूरी है।

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र ने कहा कि सैनिकों व पूर्व सैनिकों की समस्याओं के समाधान के लिए प्रदेश स्तर पर अपर मुख्य सचिव नोडल आफिसर होंगे। सैनिकों के लिए सचिवालय प्रवेश हेतु उनका सेना का पहचान पत्र मान्य होगा। उन्हें सचिवालय प्रवेश हेतु अलग से लाईन में खड़ा नहीं होना पड़ेगा। प्रत्येक जनपद में सैनिकों व पूर्व सैनिकों की समस्याओं के समाधान के लिए अपर जिलाधिकारी को नोडल अधिकारी बनाया गया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि मुख्यमंत्री हेल्पलाईन नम्बर 1905 पर कोई भी व्यक्ति अपनी शिकायत दर्ज करा सकता है, जब तक शिकायतकर्ता संतुष्ट न हो तब तक शिकायत का निस्तारण नहीं माना जायेगा। सीएम हेल्पलाईन नम्बर की प्रत्येक माह मुख्य सचिव समीक्षा करते हैं। समय-समय पर मुख्यमंत्री स्वयं इसकी समीक्षा करेंगे।

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने उत्तराखण्ड में सैन्य धाम को पांचवें धाम की संज्ञा दी। उन्होंने कहा कि देहरादून में एक विशाल एवं भव्य शौर्य स्थल बनाया जायेगा। इस शौर्य स्थल में देश की रक्षा के लिए अपना बलिदान देने वाले सैनिकों का नाम होगा। यह शौर्य स्थल आधुनिक होगा व यहां पर अनेक प्रकार की सुविधाएं उपलब्ध होंगी। शौर्य स्थल के लिए देहरादून में भूमि चिन्हित कर ली गई है। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार सैनिकों व पूर्व सैनिकों को हर संभव मदद करेगी। इस अवसर पर मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र ने पदक विजेता सैन्य अधिकारियों, सैनिकों, सैनिकों के परिवारजनों व वीरनारियों को सम्मानित भी किया।

वायरल वीडियो के पीछे की कहानी, क्या इसमें सच्चाई है!

सोशल मीडिया में मुख्यमंत्री का एक वीडियो बहुत तेजी से वायरल हुआ। इस वीडियो में मुख्यमंत्री यह कहते दिख रहे हैं कि पीपल का पेड़ प्राणवायु छोड़ता है। ऐसे ही पशुओं में गाय एकमात्र ऐसा पशु है जो ऑक्सीजन छोड़ता है। यह भी कहा जाता है कि यदि किसी को सांस की तकलीफ है तो गाय की मालिश करने से यह तकलीफ दूर हो जाती है। वीडियों में कहा गया कि टीबी जैसी बीमारी भी गाय के संपर्क में आने से दूर हो जाती है। गाय के गोबर और गौमूत्र में काफी ताकत है। शरीर के विभिन्न हिस्सों जैसे स्किन, हार्ट व किडनी आदि के लिए ये काफी फायदेमंद हैं।
सोशल मीडिया में इस वीडियो के वायरल होने के बाद इस पर तरह-तरह की टिप्पणियां की जा रही हैं। वहीं, मुख्यमंत्री कार्यालय का कहना है कि वीडियो को एडिटिंग करके वायरल किया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने राष्ट्रीय चैनल पर प्रसारित हो रहे एक कार्यक्रम को देखकर और पर्वतीय क्षेत्रों में चलने वाली मान्यताओं के आधार पर कहा था, जिस पर विवाद जैसी कोई बात नही है।

चलिए हम मुख्यमंत्री के की बातों की पड़ताल करते है कि क्या ऐसा होता है या नही…

पीपल का पेड़ प्राणवायु छोड़ता है …
पीपल का पेड़ शुष्क वातावरण में पनपता है और इसके लिए उसकी देह में पर्याप्त तैयारियां हैं. पेड़-पौधों की सतह पर स्टोमेटा नामक नन्हे छिद्र होते हैं जिनसे गैसों और जल-वाष्प का लेन-देन होता है. सूखे गर्म माहौल में पेड़ का पानी न निचुड़ जाए, इसलिए पीपल दिन में अपेक्षाकृत अपने स्टोमेटा बन्द करके रखता है। इससे दिन में पानी की कमी से वह लड़ पाता है। बिल्कुल. लेकिन इसका नुकसान यह है कि फिर दिन में प्रकाश-संश्लेषण के लिए कार्बन डाई ऑक्साइड उसकी पत्तियों में कैसे प्रवेश करे? स्टोमेटा तो बन्द हैं. तो फिर प्रकाश-संश्लेषण कैसे हो? ग्लूकोज कैसे बने? तो पीपल व उसके जैसे कई पेड़-पौधे रात को अपने स्टोमेटा खोलते हैं और हवा से कार्बन-डायऑक्साइड बटोरते हैं. उससे मैलेट नामक एक रसायन बनाकर रख लेते हैं. ताकि फिर आगे दिन में जब सूरज चमके और प्रकाश मिले, तो प्रकाश-संश्लेषण में सीधे वायुमण्डलीय कार्बन डाई ऑक्साइड की जगह इस मैलेट का प्रयोग कर सकें। यानी पीपल का पेड़ रात को भी कार्बन डाई ऑक्साइड-शोषक है। इस लिए इसे अधिक आक्सीजन देने वाला पेड़ कहा जाता है।


इस लिंक को पढ़िए …http://dahd.nic.in/related-links/chapter-v-part-2
इस लिंक को पढ़िए …https://www.ncbi.nlm.nih.gov/pmc/articles/PMC4566776/

गाय एकमात्र ऐसा पशु है जो ऑक्सीजन छोड़ता है और गाय से जुड़े अन्य तथ्य…
वैज्ञानिक शोधों से पता चला है कि गाय में जितनी सकारात्मक ऊर्जा होती है उतनी किसी अन्य प्राणी में नहीं। गाय की पीठ पर रीढ़ की हड्डी में स्थित सूर्यकेतु स्नायु हानिकारक विकिरण को रोककर वातावरण को स्वच्छ बनाते हैं। यह पर्यावरण के लिए लाभदायक है। इसी लिए वैज्ञानिक कहते हैं कि गाय एकमात्र ऐसा प्राणी है, जो ऑक्सीजन ग्रहण करता है और ऑक्सीजन ही छोड़ता है, जबकि मनुष्य सहित सभी प्राणी ऑक्सीजन लेते और कार्बन डाई ऑक्साइड छोड़ते हैं। पेड़-पौधे इसका ठीक उल्टा करते हैं।

हमारे देश में धार्मिक मान्यताओं का विशेष महत्व हैं। जिसकी समय-समय पर वैज्ञानिकों और डाॅक्टरों ने भी पड़ताल की है। इस लिए शायद मुख्यमंत्री ने पीपल और गाय के मुद्दें पर सकारात्मक टिप्पणी की। मुख्यमंत्री कार्यालय की मानें तो मुख्यमंत्री की सकारात्मक टिप्पणी का कुछ लोगों ने जानबूझकर मजाक बनाने का कार्य किया है। उनका कहना है कि एक तरफ तो मीडिया उत्तराखंड को देवभूमि कहता है लेकिन जब हिन्दु संस्कृति और सभ्यता की बात की जाती है तो उसका मजाक बनाना शुरु कर दिया जाता है। बरहाल हमारी पड़ताल में मुख्यमंत्री ने वैज्ञानिक और धार्मिक मान्यताओं की ओर से मिले संकेतों पर ही बात कही है। अब आप लोगों को निर्धारण करना है कि धर्म और वैज्ञानिक सोच में किस तरह तालमेल बिठाया जाएं।

सीएम बोले, पर्वतीय क्षेत्रों में पलायन रोकने को आर्थिक स्थिति मजबूत करने के हो रहे प्रयास

मुख्यमंत्री आवास स्थित सभागार में राज्य के विभिन्न विभागों, निगमों व संस्थानों के दायित्वधारियों की बैठक आयोजित की गई। मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र ने कहा कि प्रदेश के समग्र विकास के लिये राज्य सरकार की ओर से की गई पहल को धरातल पर लाने में सभी को सहयोगी बनना होगा। सरकार की ओर से जनहित के लिये जो कार्यक्रम व लक्ष्य तय किये हैं उनका लाभ आम जनता तक पहुंचे इसके लिये हमें समेकित प्रयास करने होंगे।

उन्होंने कहा कि राज्य के पर्वतीय क्षेत्रों से पलायन रोकने के साथ ही आर्थिक स्थिति की मजबूती के लिये कारगर प्रयास किये जा रहे हैं, इसके लिये पर्यटन के क्षेत्र को उद्योग का दर्जा देकर इसे आर्थिकी का मजबूत आधार बनाया जा रहा है। राज्य में सर्विस सेक्टर को बढ़ावा दिया जा रहा है। पर्यटन, वेलनेस योगा व छोटे-छोटे कुटी उद्योगों से राज्य की आय में वृद्धि के प्रयास किये जा रहे हैं। आज हमारी प्रति व्यक्ति आय 1.90 लाख है, जो राष्ट्रीय औसत 1.30 लाख से अधिक है। पर्वतीय क्षेत्रों के पिछडेपन को दूर करने के लिये जिलों में भी प्रति व्यक्ति आये को बढ़ाने के प्रयास किये जा रहे हैं ताकि पूरे राज्य में विकास को गति मिल सके।

– छोटे किसानों को एक लाख तथा समूहों को 5 लाख तक ब्याज मुक्त ऋण उपलब्ध कराया जा रहा है। स्वरोजगार के प्रति अधिक से अधिक लोग प्रेरित हों इसके लिए एग्रोबेस उद्योगों व आजीविका मिशन को बढ़ावा दिया जा रहा है।

– राज्य की महिलायें विभिन्न स्वरोजगार की योजनाओं में भागीदारी निभा रही हैं। इस वर्ष महिलाओं ने केदारनाथ में 2 करोड़ का प्रसाद बिक्री किया। भोजन व्यवसाय में भी वे आगे आ रही हैं। ग्राम लाइट योजना भी महिला समूहों की आर्थिकी को मजबूत कर रही है।

– स्थानीय लोगों को विभिन्न कार्यों के ठेके के साथ ही छोटी ऊर्जा योजनायें आवंटित की गई हैं। कीड़ा जड़ी एवं नशामुक्त हेम्प की खेती के लाइसेंस दिये जा रहे हैं। इससे बंजर भूमि भी उपजाऊ होगी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि पांच बद्री, पांच केदार, पांच प्रयाग यात्रा को भी बढ़ावा दिया जा रहा है। वर्तमान में पर्वतीय क्षेत्रों में 600 करोड़ के सोलर ऊर्जा प्रोजेक्ट स्थानीय लोगों को आवंटित किये गये हैं। पहाड़ों के अनुकूल उद्योगों की भी स्थापना की जा रही है। इससे उन क्षेत्रों में रोजगार सृजन के साथ ही पलायन को रोकने में मदद मिलेगी।

नेगी दा ने कहा, हिलटाॅप से किसानों को मिलेगा रोजगार

सरकार के लिए राहत की खबर है। हिलटाॅप शराब पर राज्य सरकार को अब लोक गायक नरेन्द्र सिंह नेगी का साथ मिल गया है। नरेन्द्र सिंह नेगी ने कहा है कि जब राज्य में शराब की बिक्री और खपत बहुत ज्यादा है तो शराब की फैक्ट्री पर बैन क्यों लगना चाहिए? इस बयान के बाद राजनीतिक अर्थ निकाले जाने लगे है। सरकार के समर्थन में बयान देने के बाद सरकार के फैसले और बुलंद होने का अनुमान लगाए जाने लगे है।
दरअसल, आज मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत लोक गायक नरेन्द्र सिंह नेगी के आवास पर पहंुचे। उन्होंने श्री नेगी को साहित्य अकादमी के द्वारा सर्वोच्च सम्मान दिये जाने के लिए नामित होने पर बधाई दी। इसके बाद कुछ पत्रकारों ने श्री नेगी से सवाल किए। जिसमें उन्होंने हिलटाॅप शराब की फैक्ट्री पर उनकी राय जानी। जिस पर लोक गायक नरेन्द्र सिंह नेगी ने खुलकर अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि क्या आपको पता है कि हमारे यहां शराब की खपत और बिक्री कितनी बढ़ गई है। ऐसे में हम बाहरी राज्यों से शराब मगांकर पी रहे है। या तो सरकार शराब पर पूर्ण पांबदी लगा दे। नही तो शराब फैक्ट्री लगाने का विरोध नही होना चाहिए। उन्होंने कहा कि राज्य में शराब बनेगी तो किसानों और काश्तकारों को भी फायदा पहुंचेगा। माल्टा और अन्य पहाड़ी उत्पादों को अच्छा दाम मिलेगा। सरकार राजस्व भी कमायेगी और राज्य की शराब राज्य में ही बिकेगी। उन्होंने अप्रत्यक्ष कहा कि ऐसे में शराब का गुण कम से कम रोजगार देने के काम तो आयेगा। वरना सभी जानते है कि शराब स्वास्थ के लिए हानिकारक है।
इस बयान के बाद नेगी दा के लिए आम लोगों की सोच कितनी बदलती है। यह तो समय ही बतायेगा। लेकिन अपनी स्पष्ट बात रखकर श्री नेगी ने सरकार को अप्रत्यक्ष रुप से बड़ी राहत दे दी है। कुछ लोग श्री नेगी के बयान को सही भी ठहरा रहे है। लोगों का कहना है कि उत्तराखंड केवल शराब का कंज्यूमर ही बन गया है। ऐसे में शराब से रोजगार और राजस्व बढ़ता है तो दिक्कत कहां है। या तो सरकार शराब राज्य में शराब पर प्रतिबंध लगा दे। नही तो शराब पर राजनीति नही होनी चाहिए।

आप भी सुनिए श्री नरेन्द्र सिंह नेगी ने क्या कहा…

योगी और त्रिवेन्द्र के पैतृक गांव से लागू होगी चकबंदी

उत्तराखंड के मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत के पैतृक गांव खैरासैंण और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के पैतृक गांव पंचूर में सबसे पहले चकबंदी की जाएगी। इसके लिए राजस्व विभाग ने दोनों गांवों में चकबंदी के लिए पड़ताल की प्रक्रिया पूरी कर ली है। वहीं, पौड़ी जनपद के कुछ गांवों में चकबंदी की अनुमति दी गई है।
राजस्व विभाग के अपर सचिव एसएस बल्दिया ने बताया कि चकबंदी एवं भूमि व्यवस्था अधिनियम -2018 की नियमावली में संशोधन की तैयार चल रही है। ताकि 20 किसान भी चकबंदी के लिए तैयार होते हैं तो सरकार उसे कानूनी रूप से मंजूरी देगी। दरअसल, पहाड़ों में क्लस्टर खेती के जरिये किसानों की आय बढ़ाने के लिए सरकार का चकबंदी पर फोकस है। इसकी शुरुआत खैरासैंण और पंचूर गांव से की गई है। राजस्व विभाग की टीम ने दोनों गांवों में किसानों की सहमति से चकबंदी के लिए कृषि भूमि की पड़ताल पूरी कर ली है।
वहीं, पौड़ी के तंगोली और बीरोंखाल में चकबंदी की अनुमति दे दी गई है। प्रदेश सरकार किसानों को भी चकबंदी के प्रति जागरूक करेगी। इसके लिए चकबंदी पर डॉक्यूमेंट्री तैयार कर पंचायतों को दी जाएगी।

पहाड़ों में बिना चकबंदी के संभव नहीं है दोगुनी आय
प्रदेश सरकार ने 2022 तक किसानों की दोगुनी आय करने का संकल्प लिया है, लेकिन पहाड़ों में बिखरी कृषि जोत पर किसानों की आय बढ़ाना संभव नहीं है। इसके लिए सरकार का चकबंदी पर फोकस है। जिससे किसान एक ही जगह पर क्लस्टर खेती अपनाकर फसलों की पैदावार को बढ़ा सकें। चकबंदी से किसान को कृषि कार्य पर कम मेहनत करनी पड़ेगी और फसलों की देखभाल भी अच्छी तरह से हो सकेगी।

प्रतिवर्ष लगभग डेढ़ हजार भर्ती वाला कोस्टगार्ड भर्ती सेंटर का हुआ शिलान्यास

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने शुक्रवार को कुंआवाला (हर्रावाला) में कोस्ट गार्ड भर्ती सेंटर का शिलान्यास व भूमि पूजन किया। इस भर्ती केन्द्र के लिए भारत सरकार से 17 करोड़ रूपये भूमि के लिए व 25 करोड़ रूपये भवन निर्माण के लिए स्वीकृति मिल चुकी है। इस भर्ती केन्द्र के लिए पूरा खर्चा भारत सरकार वहन करेगी। यह भर्ती केन्द्र ड़ेढ़ वर्ष में बनकर तैयार हो जायेगा। यह भर्ती केन्द्र केन्द्र चार राज्यों उत्तराखण्ड, उत्तर प्रदेश, हिमांचल प्रदेश और हरियाणा के लिए बनाया जा रहा है।

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने कहा कि उत्तराखण्ड में कोस्टगार्ड भर्ती केन्द्र खुलने से प्रदेश के युवाओं को कोस्टगार्ड में रोजगार के अच्छे अवसर मिलेंगे। थलसेना, वायुसेना व नौसेना के भर्ती केन्द्र उत्तराखण्ड में पहले से ही हैं। कोस्टगार्ड भर्ती केन्द्र खुलने से राज्य के युवाओं को तटरक्षक बल में करियर बनाने का सुनहरा अवसर मिलेगा। मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र ने कहा कि यह रैबार कार्यक्रम का प्रतिफल है कि उत्तराखण्ड में कोस्टगार्ड का भर्ती सेंटर खुलने जा रहा है, जबकि देहरादून में देश का पहला ड्रोन एप्लिकेशन रिसर्च सेंटर खुल चुका है। उत्तराखण्ड में पांचवे धाम के रूप में सैन्यधाम को विकसित करने के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के संकल्प की दिशा में यह एक बड़ी पहल है।

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र ने कहा कि देहरादून में जल्द ही भव्य शौर्य स्थल (सैन्यधाम) बनाया जायेगा। इसके लिए देहरादून में 70 बीघा जमीन का चयन कर लिया गया है। यह शौर्य स्थल सबके लिए प्रेरणा का केन्द्र बनेगा। मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र ने कहा कि रानीपोखरी में नेशनल लॉ युनिवर्सिटी बन रही है। इससे प्रदेश के युवाओं को विधि की पढ़ाई के साथ-साथ कानून के क्षेत्र में कार्य करने का सुनहरा अवसर मिलेगा। पर्यटन को बढ़ावा देने राज्य सरकार की शीर्ष प्राथमिकताओं में है। राज्य में अधिक से अधिक पर्यटक आयें इसके लिए हवाई सेवाओं को विस्तार दिया जा रहा है। जॉलीग्रांट एयरपोर्ट का विस्तार किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि पर्यटन के क्षेत्र में रोजगार के अनेक अवसर हैं। देश का 23वां सीपैट संस्थान डोईवाला में खोला गया है। सीपैट एक ऐसा संस्थान हैं, जिसमें कोर्स करने से रोजगार की बहुत प्रबल संभावनाएं हैं। इसमें जल्द ही डिप्लोमा व डिग्री कोर्स भी शुरू किये जायेंगे।

महानिदेशक कोस्टगार्ड राजेन्द्र सिंह ने कहा कि गत वर्ष मुख्यमंत्री आवास में रैबार कार्यक्रम में प्रदेश की बड़ी हस्तियों का जो मंथन हुआ। उसके सुखद परिणाम आज हम सबके सामने हैं। डीजी कोस्टगार्ड ने कहा कि देवभूमि उत्तराखण्ड का वासी होने के नाते मेरे मन में उत्तराखण्ड के युवाओं के लिए कुछ करने की तमन्ना थी। उत्तराखण्ड में कोस्टगार्ड का भर्ती सेंटर हो यह मुख्यमंत्री का ख्वाब था और मेरी ख्वाईश थी जिसका परिणाम है कि आज मंजिल हमारे सामने है। उन्होंने कहा कि यह भर्ती केन्द्र लगभग डेढ़ साल में बनकर तैयार हो जायेगा। कोस्टगार्ड द्वारा एसडीआरएफ को आपदा से बचाव राहत कार्यों का प्रशिक्षण भी दिया जायेगा। उन्होंने कहा कि भारत की कोस्टगार्ड विश्व की चौथी सबसे बड़ी कोस्टगार्ड है। काम के मामले में आज भी सबसे आगे है। उन्होंने इस भर्ती केन्द्र के लिए अपेक्षित भूमि आवंटन करने पर मुख्यमंत्री का आभार भी जताया।

2020 तक देहरादून को सीएनजी उपलब्ध कराना लक्ष्यः टीएस रावत

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने मंगलवार मिशन स्थापना दिवस के अवसर पर विभिन्न फर्मों को कई कार्यों के कार्यादेश एवं स्मार्ट कार्ड वितरित किये। उन्होंने कहा कि देहरादून शहर की बढ़ती आबादी के दवाब को कम करने के लिये नये देहरादून की परिकल्पना को साकार किया जायेगा। इसके लिये लगभग 4 हजार हेक्टियर क्षेत्र का लैण्ड बैंक बनाने के प्रयास किये जायेंगे। उन्होंने कहा कि स्मार्ट नागरिकों के बिना स्मार्ट शहर की कल्पना नही की जा सकती है। देहरादून को स्मार्ट शहर बनाने के लिये प्रबुद्धजनो व नागरिको को भी सहयोगी बनना होगा। उन्होंने कहा कि देहरादून स्मार्ट शहर के रूप में शीघ्र ही नये क्लेवर में दिखाई देगा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि देहरादून का नया स्वरूप प्रदान करने के साथ ही यहां के नागरिकों को सभी आवश्यक सुविधाये उपलब्ध कराने का हमारा प्रयास है। 2020 के अन्त तक देहरादून को सीएनजी उपलब्ध हो जायेगा। बरसात के बाद सौंग बांध का कार्य आरम्भ हो जायेगा इससे देहरादून को ग्रेविटी आधारित पेयजल उपलब्ध होगा तथा इससे लगभग 92 करोड़ की बिजली की बजत होगी। उन्होंने कहा कि रिस्पना को ऋषिपर्णा के स्वरूप में लाने के भी प्रयास तेजी से किये जा रहे हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि स्मार्ट सिटी के अन्दर स्थापित होने वाले स्मार्ट डाटा सेन्टर तथा स्मार्ट कमाण्ड कन्ट्रोल सेन्टर से देहरादून के साथ ही हरिद्वार में आयोजित होने वाले महाकुम्भ के आयोजन में भी मदद मिलेगी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री की स्मार्ट सिटी परियोजना को मूर्त रूप देने में राज्य सरकार तथा देहरादून स्मार्ट सिटी द्वारा सभी सम्भव प्रयास किये जायेंगे। देहरादून स्मार्ट सिटी द्वारा अपने 87 प्रतिशत कार्यों को मूर्त रूप देने कि तैयारी शुरू कर दी गई है।

स्मार्ट सिटी प्लान के तहत कार्यों की प्रगति की जानकारी देते हुए मुख्य कार्यकारी अधिकारी डॉ आशीष श्रीवास्तव ने बताया कि स्मार्ट रोड परियोजना के क्रियान्वयन के लिए इस कार्य में दक्ष भारत सरकार की कार्यदायी संस्था ब्रिज एण्ड रूफ लिमिटेड को कार्य आवंटित कर दिया गया है। एकीकृत कमाण्ड एण्ड कण्ट्रोल सेन्टर के क्रियान्वयन के लिए मै0 एच0पी0 लिमिटेड का चयन कर लिया गया है।

उन्होंने कहा कि अभी तक स्मार्ट सिटी मिशन के अन्तर्गत कुल 484.76 करोड़ रूपए लागत की परियोजनाओं के कार्यादेश जारी किये जा चुकें हैं। इनमें स्मार्ट रोड लागत 57.49 करोड रूपए, ड्रेनेज लागत 37.99 करोड़ रूपए, मल्टीयूटीलिटी डक्ट लागत 64.33 करोड रूपए, स्मार्ट रोड़ के किनारे पेयजल पाइप लाईन लागत 9.96 करोड रूपए, स्मार्ट रोड़ के किनारे सीवर लाईन लागत 20.77 करोड रूपए, एकीकृत कमाण्ड एंड कण्ट्रोल सेन्टर लागत 199.78 करोड रूपए, आई०टी०एम०एस लागत 50 करोड रूपए, सिटी साइनेज लागत 18 करोड रूपए, स्मार्ट बिन्स तथा स्मार्ट वैस्ट गाड़ियां लागत 9.34 करोड रूपए, पापीपी मोड पर वाटर एटीएम लागत 1.98 करोड़ रूपए, स्मार्ट टॉयलेट लागत 2.07 करोड रूपए, स्मार्ट स्कूल्स लागत 6.05 करोड़ रूपए, एमडीडीए पार्क का सौन्दर्यकरण लागत 7 करोड रूपए शामिल हैं।

उन्होंने बताया कि इसके अतिरिक्त 331.20 करोड़ रूपए की विभिन्न महत्वपूर्ण परियोजनाओं की डीपीआर की स्वीकृति प्रदान की गई है। इनमें इलेक्ट्रिक बस लागत 41.56 करोड रूपए, इण्टरैक्टिव बस स्टॉप्स लागत 15.72 करोड़ रूपए, परेड ग्राउंड विकास योजना लागत 23.63 करोड़ रूपए,. पल्टन बाजार पैदल मार्ग का विकास लागत 13.82 करोड़ रूपए, एकीकृत ऑफिस ग्रीन बिल्डिंग लागत 204.46 करोड रूपए, सचिवालय में शिशु पालन केंद्र लागत 0.90 करोड रूपए, एबीडी क्षेत्र में पेयजल संवर्धन योजना लागत 24.11 करोड़ रूपए व राजपुर रोड का सौन्दर्यीकरण लागत 7 करोड़ रूपए शामिल हैं। इस प्रकार कुल लागत रू0 484.76 करोड के कार्यादेश दिये जा चुके हैं। जबकि कुल 331.2 करोड की डीपीआर को स्वीकृत किया जा चुका है। इस प्रकार देहरादून स्मार्ट सिटी के अंतर्गत 800 करोड़ से अधिक के कार्य जल्द ही प्रारम्भ कर दिए जाएंगे।

इस शैक्षणिक सत्र से निजी स्कूलों ने अधिक फीस वसूली तो दंड का भी होगा प्रावधान

राज्य के निजी स्कूलों में फीस निर्धारण के लिए सरकार ने उत्तराखंड सेल्फ फाईनेंस्ड इंडिपेंडेंट स्कूल (रेग्युलेशन ऑफ फीस) एक्ट तैयार कर लिया है। इसके तहत राज्य सरकार प्री-प्राइमरी से लेकर सीनियर सेंकेंडरी की कक्षाओं का अधिकतम शुल्क निर्धारित होगा। हर जिले में फीस निर्धारण के लिए जिलाधिकारी की अध्यक्षता में छह सदस्य समिति बनाई जाएगी। यह समिति फीस को लेकर स्कूलों की आपत्तियों का निस्तारण करेगी। इस समिति का कार्यकाल दो वर्ष का रहेगा। इसके निर्णयों के विरुद्ध राज्य स्तरीय अपीलीय प्राधिकरण में जा सकता है। छह सदस्य प्राधिकरण सचिव विद्यालयी शिक्षा की अध्यक्षता में गठित किया जाएगा। इस एक्ट में अधिक फीस वसूलने की शिकायत पर दंड का भी प्रावधान किया गया है। इस एक्ट को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए शिक्षा मंत्री ने सभी से सुझाव आमंत्रित किए हैं। इसके बाद इसे अमली जामा पहनाते हुए कैबिनेट में लाया जाएगा।

सचिवालय में शिक्षा मंत्री अरविंद पांडेय ने बुधवार को शिक्षा विभाग की समीक्षा बैठक में फीस एक्ट के संबंध में अधिकारियों के साथ चर्चा की। फीस एक्ट के संबंध में जानकारी देते हुए शिक्षा मंत्री ने बताया कि फीस एक्ट को अगले शैक्षणिक सत्र से लागू कराने की तैयारी है। इसके लिए खाका तैयार कर लिया गया है। इसके तहत स्कूलों में फीस का निर्धारण सरकार करेगी। जो भी विद्यालय इससे असहमत होंगे वे सत्र प्रारंभ होने से तीन माह पूर्व तक शुल्क निर्धारण के संबंध में अपना प्रत्यावेदन जनपद स्तर पर गठित फीस नियंत्रण समिति को देंगे। यह समिति आवेदन प्राप्त होने के बाद शुल्क का पुनर्निर्धारण करेगी। समिति अनियमितताओं की शिकायत का भी निस्तारण करेगी। जनपद स्तरीय समिति के निर्णय के विरुद्ध राज्य स्तरीय विनियामक प्राधिकरण में अपील दायर की जा सकेगी। यह प्राधिकरण एक सप्ताह के भीतर प्रकरण को निस्तारित करेंगे। सत्र शुरू होने से पहले सभी स्कूल अपनी फीस का विवरण वेबसाइट पर अनिवार्य रूप से प्रकाशित करेंगे।

इन बिंदुओं पर रहेगा फोकस
– कोई भी स्कूल एडवांस के रूप में फीस की वसूली नहीं कर सकेंगे।

– कोई भी स्कूल अपने परिसर में व्यावसायिक गतिविधि नहीं करेंगे यानी ड्रेस और किताब कॉपी नहीं बेच सकेंगे।

– कोई भी स्कूल बिना जिला स्तरीय समिति के अनुमोदन के ड्रेस में कोई बदलाव नहीं कर सकेंगे।

दंड का प्रावधान

एक्ट में अधिक फीस वसूले जाने की स्थिति में दंड का भी प्रावधान किया गया है। इसके तहत पहली बार शिकायत सही पाए जाने पर एक लाख रुपये, दूसरी बार शिकायत सही पाए जाने पर पांच लाख रुपये का जुर्माना लगाया जाएगा। तीसरी बार शिकायत सही पाए जाने पर मान्यता समाप्ति अथवा अनापत्ति वापस लेने की कार्यवाही की जाएगी।

जनपद स्तरीय फीस नियंत्रण समिति
जिलाधिकारी, मुख्य शिक्षा अधिकारी, जिलाधिकारी द्वारा नामित चार्टेड अकाउंटेंट, लोक निर्माण विभाग का अधिशासी अभियंता, जिलाधिकारी द्वारा नामित कोई अभिभावक, जिलाधिकारी द्वारा नामित किसी विद्यालय का प्रबंधक व प्रधानाचार्य

राज्य विनियामक प्राधिकरण
सचिव, विद्यालयी शिक्षा, शिक्षा निदेशक, शिक्षा सचिव द्वारा नामित चार्टेड अकाउंटेंट, लोक निर्माण विभाग का अभियंता, सचिव द्वारा नामित अभिभावक और सचिव द्वारा नामित किसी विद्यालय का प्रबंधक व प्रधानाचार्य।

राज्य सरकार ड्रोन का इस्तेमाल इन कार्यों को करने में लगा सकती है, जानिए

सब कुछ ठीक रहा तो जल्द ही राज्य सरकार प्रदेश में ड्रोन कैमरों का प्रयोग स्वास्थ्य, प्राकृतिक आपदा, कृषि, खनन क्षेत्र में कर सकती हैं। इसके लिए व्यापक स्तर पर रणनीति तैयारियां चल रही है। अभी तक ड्रोन के माध्यम से कम समय में दवाईयां और जांच के लिए सैंपल भेजने का सफल ट्रायल हो चुका है।
प्रदेश में ड्रोन का निर्माण और तकनीक को बढ़ावा देने के लिए सरकार ने फरवरी 2019 में पहली बार ड्रोन फेस्टिवल का आयोजन किया। सरकार का मानना है कि ड्रोन तकनीक से समय और मैनपावर में कमी आएगी।

आपदा प्रबंधन के साथ ही स्वास्थ्य, कृषि, खनन, वन सेक्टर में ड्रोन का इस्तेमाल कर सकते हैं। हाल ही में सूचना एवं प्रौद्योगिक विकास प्राधिकरण (आईटीडीए) की अनुमति से ड्रोन से दवाईयां और सैंपल पहुंचाने का ट्रायल कामयाब रहा। 18 मिनट के भीतर ही ड्रोन से 36 किलोमीटर दूर ब्लड सैंपल पहुंचाया गया।

जबकि वाहन से आमतौर पर एक से डेढ़ घंटे का समय लगता है। आईटीडीए विभिन्न विभागों के साथ मिल कर ड्रोन तकनीक को धरातल पर पहुंचाने के लिए रणनीति बना रहा है। सरकार प्रदेश में ड्रोन मैन्युफैक्चरिंग और तकनीक इस्तेमाल के लिए पॉलिसी बनाने पर विचार कर रही है।
आईटीडीए के वरिष्ठ कार्यक्रम अधिकारी आलोक तोमर का ने बताया कि स्वास्थ्य, खनन, कृषि, आपदा प्रबंधन समेत अन्य क्षेत्रों में ड्रोन तकनीक को धरातल पर उतारने के लिए रणनीति बनाई जा रही है।

आईटीडीए ने प्रदेश के राजकीय पॉलिटेक्नीक में पढ़ रहे 70 छात्रों को ड्रोन को उड़ाने की प्रशिक्षण दिया है, जिसमें 24 छात्राएं हैं। आईटीडीए प्रशिक्षण कार्यक्रम के माध्यम से छात्रों को ड्रोन तकनीक के लिए प्रोत्साहित कर रहा है।

कृषि क्षेत्र में ओलावृष्टि, सूखे या बीमारी लगने से फसलों को नुकसान होता है तो ड्रोन से कम समय में इसका आकलन किया जाएगा। ड्रोन पर लगे कैमरों के जरिये से प्रभावित इलाकों में सर्वे कर स्थिति का जायजा लिया जाएगा। अभी तक लेखपाल व राजस्व कानूनगो के माध्यम से फसलों का आकलन किया जाता है, जिसमें लंबा समय लगता है।

खनन क्षेत्र में प्रदेश के नदी, नालों में अवैध खनन रोकने में ड्रोन का इस्तेमाल किया जाएगा। ड्रोन से यह पता लग सकेगा कि किस क्षेत्र में माफिया खनन कर रहे हैं। ड्रोन काफी ऊंचाई से खनन की तस्वीरें विभाग को उपलब्ध करा देगा, जिससे कार्रवाई में आसानी होगी।

स्वास्थ्य क्षेत्र में आपातकालीन स्थिति में किसी मरीज का ब्लड सैंपल या जरूरत दवाईयां भी ड्रोन के जरिये पहुंचाई जा सकेगी। ड्रोन में पांच किलोग्राम भार तक सामान ले सकते हैं। देहरादून और टिहरी में अभी हाल में स्वास्थ्य सेवाओं में ड्रोन तकनीक का प्रयोग सफल रहा।

आपदा प्रबंधन क्षेत्र में प्राकृतिक आपदा की दृष्टि से उत्तराखंड संवेदनशील है। आपदा घटने पर तत्काल प्रभावित क्षेत्र का सर्वे ड्रोन से किया जा सकेगा। क्योंकि आपदा में सड़क मार्ग, कनेक्टिविटी की सुविधा ठप होने से कई बार बचाव दल को मौके पर पहुंचने पर समय लगता है। ऐसे में प्रभावित क्षेत्रों में हालात का पता ड्रोन से कुछ ही समय में लगेगा।