गैस वितरण परियोजना से दूनवासियों को नई सौगात मिलेगीः त्रिवेन्द्र

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने गुरूवार को विज्ञान भवन नई दिल्ली से 9वें नगर गैस वितरण बोली चक्र के अन्तर्गत देश के 19 राज्यों के 129 जिलो में स्थित 65 भौगोलिक क्षेत्रों में गैस वितरण की परियोजनाओं का शिलान्यास किया। इसमें जनपद देहरादून भी शामिल है। इसके साथ ही प्रधानमंत्री ने 14 राज्यों में फैले 124 जिलो के 50 भौगोलिक क्षेत्रों के लिये 10वें गैस वितरण बोली चक्र का भी शुभारंभ किया। जबकि मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने देहरादून जनपद की गैस वितरण परियोजना का शुभारंभ किया।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा कि कोयले और अन्य तरल ईंधनों की तुलना में प्राकृतिक गैस पर्यावरण अनुकूल, सुरक्षित, सस्ता, उत्कृष्ट ईंधन है। प्रधानमंत्री ने कहा कि विश्व के 23.4 प्रतिशत प्राकृतिक गैस उपयोग की तुलना में भारत का ऊर्जा क्षेत्र में प्राकृतिक गैस का प्रतिशत 6.2 है। इसे 15 प्रतिशत तक किये जाने की दिशा में हम अग्रसर है। प्रधानमंत्री ने कहा कि 10वें नगर गैस वितरण बोली चक्र के पश्चात् देश के 27 राज्यों के 52 प्रतिशत क्षेत्रफल के 402 जनपदो की 70 प्रतिशत आबादी को यह सुविधा उपलब्ध हो जायेगी। इससे आम आदमी का जीवन आसान होगा। 2014 तक सीएनजी स्टेशनों की संख्या 947 थी, वह आज 1470 हो गयी है। इस दशक के अन्त तक इसकी संख्या 10 हजार के पार किये जाने की व्यवस्था की जा रही है। सिटी गैस वितरण का कार्य तेजी से बढ़ रहा है। इसमें वितरण की परेशानियों का भी समाधान किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि यह रिफार्म, ट्रांसफार्म व परफार्म का अच्छा उदाहरण है। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि पहले गैस कनेक्शन के लिये लाईन में लगना होता था, जिससे अब निजात मिल गई है। एलपीजी कनेक्शन व्यवस्था जहां 1955 में आरम्भ हुई थी तथा 2014 तक 13 करोड़ कनेक्शन वितरित हुए, जबकि पिछले चार वर्षों में ही 12 करोड़ गैस कनेक्शन वितरित किये गये है। उन्होंने कहा कि हमारा प्रयास देश की 40 प्रतिशत ऊर्जा की जरूरत गैस व अन्य पारम्परिक ऊर्जा स्रोतों से पूरा करने का है।

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने देहरादून जनपद को नगर गैस वितरण परियोजना से जोडने के लिये प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का आभार व्यक्त किया। उन्होंने अपेक्षा की कि गेल इस परियोजना को एक से डेढ़ वर्ष में पूर्ण कर लेगा। उन्होंने इसे देहरादूनवासियों के लिये नई सौगात बताते हुए इसे दून वैली के पर्यावरण को भी मजबूती प्रदान करने वाला बताया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि गैस पाइप लाईन से जहां लोगों को तमाम तरह की कठिनाईयों से निजात मिलेगी वहीं सीएनजी स्टेशनों की स्थापना से सीएनजी वाहनों की संख्या भी बढ़ेगी तथा इससे वाहनों से होने वाले प्रदूषण से भी दूनवासियों का छुटकारा मिल सकेगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि आज देहरादून में वाहनों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। राज्य के मैदानी क्षेत्रों में आबादी का दबाव निरन्तर बढ़ रहा है। उसी क्रम में आगे भी वाहनों का दबाव बना रहेगा, इसका बेहतर रास्ता सीएनजी ही है। इस अवसर पर मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र ने आईआईपी, देहरादून में स्थापित बायोगैस संयत्र का अवलोकन कर संयत्र के संबंध में भी वैज्ञानिकों से जानकारी प्राप्त की।

मुख्यमंत्री ने कहा कि हरिद्वार, ऊधमसिंहनगर तथा देहरादून के बाद नैनीताल के साथ ही अन्य स्थानों में भी गैस पाइप लाइन का कार्य आरम्भ होगा। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री ने देश को गैस ईंधन के रूप में इस्तेमाल करने पर जोर दिया है। बिजली के संकट से जूझ रहे अनेक कारखानों को गैस ईंधन नई ऊर्जा मिल रही है। उन्होंने कहा कि गैस ईंधन कम खर्चीला तथा इको फ्रेन्डली है। इससे दूनवासियों के जीवन में निश्चित रूप में बदलाव आयेगा तथा आम जिंदगी खुशहाल होगी।

हाईकोर्ट का उपनल कर्मियों को बड़ा तोहफा

नैनीताल हाईकोर्ट ने उपनल कर्मियों के पक्ष में सरकार को आदेश दिए है। जिसके अनुसार सरकार को कोर्ट ने कहा कि वह एक वर्ष के भीतर उपनल कर्मियों को नियमावली के अनुसार नियमित करे। साथ ही उन्हें न्यूनतम वेतनमान भी दे।

कोर्ट के फैसले से राज्य के विभिन्न विभागों, संस्थानों, निगमों में कार्यरत 20 हजार से अधिक उपनल कर्मियों को बड़ी सौगात मिली है। साथ ही उपनल कर्मचारियों की यूनियन को सरकार पर नियमित करने के लिए दबाव बनाने का हथियार भी मिल गया है।

पिछले दिनों हाई कोर्ट के वरिष्ठ न्यायाधीश न्यायमूर्ति राजीव शर्मा व न्यायमूर्ति शरद कुमार शर्मा की खंडपीठ ने सरकार से पूछा था कि उपनल कर्मचारियों के नियमितीकरण के लिए क्या नीति बनाई है? सरकार की ओर से जवाब में कोर्ट को बताया गया कि इस प्रकरण पर विचार किया जा रहा है।

मामले के अनुसार कुंदन सिंह नेगी ने मुख्य न्यायाधीश को पत्र भेजकर उत्तराखंड पूर्व सैनिक कल्याण निगम उपनल द्वारा की जा रही नियुक्तियों पर रोक लगाने की मांग की थी। हाई कोर्ट ने इस पत्र का स्वतः संज्ञान लेते हुए जनहित याचिका के रूप में स्वीकार किया था।

याचिका में कहा गया था कि उपनल का संविदा लेबर एक्ट मेें पंजीकरण नहीं है, इसलिए यह असंवैधानिक संस्था है। उपनल का गठन पूर्व सैनिकों व उनके आश्रितों के लिए हुआ था मगर राज्य सरकार ने इस संस्था को आउटसोर्सिंग कर्मचारियों की नियुक्ति का माध्यम बना दिया। जिस पर पूर्ण नियंत्रण राज्य सरकार का है। याचिका में उपनल कर्मियों के सामाजिक व आर्थिक स्थिति को देखते हुए भविष्य के लिए नीति बनाने की मांग की थी।

कोर्ट ने इस मामले में हाई कोर्ट बार एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष एमसी पंत को न्यायमित्र नियुक्त किया था। अधिवक्ता पंत ने कोर्ट को बताया कि कर्मचारियों ने जब याचिका दायर की तो सरकार की ओर से बताया गया कि उन्हें साल में फिक्सनल ब्रेेक दिया जाता है। कोर्ट ने इस ब्रेक को ना देने तथा इसे सर्वोच्च न्यायालय के आदेश के विरुद्ध माना था। सोमवार को हाई कोर्ट की ओर से उपनल कर्मियों को नियमावली के अनुसार नियमित करने तथा उन्हें न्यूनतम वेतनमान देने के आदेश पारित किए।

राज्य के विभिन्न विभागों, निगमों व संस्थानों में 20 हजार से अधिक उपनल कर्मचारी कार्यरत हैं। इसमें ऊर्जा के तीनों निगमों में ही 1200 कर्मी हैं। उपनल कर्मचारी को प्रतिमाह सरकार द्वारा करीब 12 हजार मासिक मानदेय दिया जाता है। इस आधार सरकार करीब 25 करोड़ मासिक व सालाना करीब तीन सौ करोड़ मानदेय दे रही है। नियमित होने अथवा न्यूनतम वेतनमान के बाद सरकार पर सालाना करीब एक हजार करोड़ वित्तीय बोझ पड़ेगा।

भविष्य में यूजेवीएन लिमिटेड की स्थिति में और सुधार होगाः त्रिवेन्द्र

यूजेवीएन लिमिटेड द्वारा राज्य सरकार को लाभांश के रूप में 18.69 करोड़ रूपये का चैक सौंपा। इस मौके पर मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने कहा कि यूजेवीएन लिमिटेड अच्छा कार्य कर रहा है। भविष्य में निगम की स्थिति में और भी अधिक सुधार होगा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखण्ड में विद्युत उत्पादन की काफी क्षमता है, लेकिन कतिपय कारणों से उसका दोहन नहीं हो पा रहा है। जो परियोजनाएं जल्द संचालित हो सकती हैं, उनको शीघ्र संचालित करने का हमारा प्रयास है। जल विद्युत परियोजनाओं के साथ ही सोलर प्रोजक्ट पर भी राज्य में कार्य किये जा रहे हैं। मुख्यमंत्री ने इस दौरान निगम के सेवानिवृत्त अधिकारियों को सम्मानित किया। वहीं, कृषि मंत्री सुबोध उनियाल ने कहा कि उत्तराखण्ड में पर्यटन, पॉवर व कृषि तीन ऐसे क्षेत्र हैं, जिनका राज्य की आर्थिकी में महत्वपूर्ण योगदान है। स्वरोजगार, पर्वतीय क्षेत्रों से पलायन को रोकने लिए इन क्षेत्रों में विशेष ध्यान देने की जरूरत है।

यूपी और उत्तराखंड की बसों के अस्थाई परमिट की व्यवस्था हुई खत्म, दोनों सरकारों ने लिया फैसला

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पारस्परिक परिवहन समझौते पर हस्ताक्षर किये। इस मौके पर सीएम त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने कहा कि इस समझौते के बाद अब यूपी और उत्तराखंड की जनता को परिवहन में बेहतर सुविधा मिलेगी। पिछले 18 सालों से चला आ रहा इंतजार अब खत्म हो गया है।

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने कहा कि दोनों राज्यों की सरकारें समाधान में विश्वास करती हैं। दोनों ही सरकारें राज्य के विकास के लिये निरंतर कार्यरत है। इस दौरान उन्होंने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की प्रशंसा भी की। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के बीच परिवहन समझौता होने से दोनों राज्यों के बीच बसों का आवागमन बढ़ जाएगा। उन्होंने कहा कि हम सब साझी विरासत का हिस्सा है। इसलिए आने वाले दिनों में हमारे संबंध और अधिक प्रगाढ़ होंगे।

इस समझौते से अब यूपी परिवहन निगम की बसें उत्तराखंड में 216 मार्गों पर एक लाख 39 हजार किलोमीटर चलेंगी। वहीं उत्तराखंड की बसें यूपी में 335 मार्गों पर दो लाख 52 हजार किलोमीटर हर रोज चलेंगी।

उल्लेखनीय है कि मौजूदा समय में यूपी से उत्तराखंड जा रहीं और वहां से यूपी आ रहीं बसों का संचालन अस्थाई परमिट के आधार पर हो रहा है। परमिट की अवधि खत्म हो जाने के बाद दोनों राज्य एक-दूसरे की सीमा में प्रवेश करने वाली बसों को रोक दिया जाता है। इसके चलते बस यात्रियों को अत्यंत परेशानियों का सामना करना पड़ता था। इस समझौते के होने के बाद दोनों राज्यों को अपनी बस चलाने के लिए किसी परमिट की जरूरत नहीं पड़ेगी। इसके साथ ही अस्थाई परमिट की व्यवस्था खत्म हो जाएगी। इस अवसर पर उत्तर प्रदेश के परिवहन मंत्री स्वतंत्र देव सिंह व उत्तराखण्ड के परिवहन मंत्री यशपाल आर्य भी उपस्थित थे।

वेबसाइट्स पर पोर्न वीडियो दिखाई गयी तो होगी आईटी एक्ट के तहत कानूनी कार्यवाही

केंद्र सरकार पोर्न वेबसाइट्स पर लगातार नजर रख रही है। यदि पोर्न वेबसाइट्स द्वारा वीडियों दिखायी जाएंगी तो आईटी एक्ट के तहत कानूनी कार्यवाही हो पाएगी। केंद्रीय गृह मंत्रालय ने नेशनल क्राइम रिकार्ड ब्यूरो के अधीन (डब्ल्यूडब्ल्यूडब्ल्यू डॉट साइबरक्राइम डॉट जीओवी डॉट इन) नाम से साइबर क्राइम पोर्टल लांच किया है। जिसमें साइबर क्राइम की शिकायत या सूचना दर्ज की जा सकती है। गुरूवार को उच्च न्यायालय नैनीताल में दूरसंचार विभाग की ओर से इस मामले में हलफनामा भी पेश किया गया। विभाग की ओर से 827 पोर्न वेबसाइट्स को बंद करने के आदेश दिए गये है।

हाईकोर्ट नैनीताल के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति राजीव शर्मा व न्यायमूर्ति मनोज कुमार तिवारी की खंडपीठ के समक्ष केंद्रीय दूरसंचार विभाग की ओर से हलफनामा प्रस्तुत किया गया। जिसमें हाई कोर्ट की ओर से पारित आदेश के क्रियान्वयन को लेकर जानकारी दी गई। हलफनामे में बताया गया है कि अश्लीलता परोस रही इन वेबसाइट्स पर लगातार नजर रखने के विभाग को निर्देश दिए गए हैं। शपथ पत्र में यह भी बताया गया है कि 30 अन्य वेबसाइट्स की जांच में अश्लीलता फैलाने की पुष्टि नहीं हुई है। इसके अलावा कुछ विदेशी वेबसाइट भी हैं, जिन पर इंटरपोल व ब्रिटेन इंटरनेट वॉच फाउंडेशन नजर रखता है, जो भारत की केंद्रीय जांच एजेंसी सीबीआइ से सूचनाओं का आदान-प्रदान करते हैं।

कठोरता से अश्लीलता पर रोक लगाएगी सरकार
केंद्र सरकार के हलफनामे के आधार पर खंडपीठ ने उम्मीद जताई कि सरकार अश्लीलता पर कठोरता से रोक लगाएगी, ताकि बच्चों को यौन अपराध से बचाया जा सके। कोर्ट ने साइबर क्राइम पोर्टल का 24 घंटे में प्रिंट व इलेक्ट्रानिक मीडिया में प्रचार-प्रसार करने के निर्देश दिए हैं। ज्ञातव्य है कि पिछले माह दून में अश्लील वीडियो देखकर चार नाबालिग बच्चों ने एक नाबालिग छात्रा के साथ सामूहिक दुष्कर्म किया था। इस घटना के बाद कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने राज्य व केंद्र सरकार को अश्लीलता रोकने के दिशा-निर्देश जारी किए थे। इस मामले में अगली सुनवाई अब 26 नवंबर को होगी।

प्रबंध समिति की स्कूल ड्रेस वितरण में भूमिका होगी समाप्त

अब विद्यालय प्रबंध समितियों का स्कूल ड्रेस वितरण में भूमिका समाप्त हो जाएगी। इसका कारण है कि राज्य के प्राथमिक और उच्च प्राथमिक कक्षाओं में पढ़ने वाले बच्चों को निशुल्क दी जाने वाली स्कूल ड्रेस के स्थान पर धनराशि मिलेगी और यह धनराशि सीधे उनके बैंक खातों में की जायेगी।

राज्य में सरकारी व सहायताप्राप्त प्राथमिक और उच्च प्राथमिक विद्यालयों में अध्ययनरत समस्त छात्रओं, अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्य पिछड़ा वर्ग के छात्रों को मुफ्त स्कूल ड्रेस मुहैया कराई जाती है। इस योजना से राज्य के करीब ढाई लाख छात्र-छात्रएं लाभान्वित होते हैं।

अब सरकार ने मुफ्त किताबों की तर्ज पर स्कूल ड्रेस का पैसा भी डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (डीबीटी) योजना के तहत छात्र-छात्राओं के बैंक खातों में देने का निर्णय लिया है। कक्षा एक से आठवीं तक समस्त छात्र-छात्रओं को दी जाने वाली निशुल्क पाठ्यपुस्तकों के स्थान पर पुस्तकों की मूल्य राशि डीबीटी के तहत उपलब्ध कराई जा रही है। अब इस योजना को स्कूल ड्रेस के लिए भी लागू किया जा रहा है। इस योजना में प्रति लाभार्थी छात्र-छात्र को दो स्कूल ड्रेस के लिए 600 रुपये दिए जाएंगे। इस मद में तकरीबन 14 करोड़ रुपये खर्च होंगे।

इस संबंध में फैसला लेने में देरी के चलते स्कूल ड्रेस के लिए दी जाने वाली धनराशि निदेशालय स्तर से जिलों को भेजी जा चुकी है। केंद्र सरकार डीबीटी योजना को प्रोत्साहित कर रही है। इसमें धनराशि सीधे लाभार्थी के बैंक खाते में मुहैया कराई जा रही है। केंद्र के रुख को भांपकर राज्य सरकार भी डीबीटी योजना को प्रोत्साहित कर रही है। इस कड़ी में अब स्कूल ड्रेस के लिए भी इसे लागू किया जा रहा है। हालांकि इस योजना को क्रियान्वित करने के लिए सर्व शिक्षा अभियान कार्यकारिणी परिषद में भी डीबीटी के प्रस्ताव पर मुहर लगानी होगी। लिहाजा शासन स्तर पर कार्यकारिणी परिषद की बैठक 30 अक्टूबर को बुलाई गई है।

स्कूली अनुबंधित बसों का टैक्स आधा होने से मिलेगी राहत

अब स्कूलों में अनुबंध पर लगने वाली बसों का टैक्स भी आधा होने की उम्मीद है। परिवहन विभाग ने इसके लिये प्रस्ताव बनाया हैं। अभी तक टैक्स में छूट स्कूलों की स्वयं की बसों और वैन को ही है।

परिवहन दफ्तरों में पंजीकृत होने वाली स्कूल बस का टैक्स निजी बसों की अपेक्षा कम होता है। टैक्स व्यवस्था के हिसाब से स्कूल बस से तीन महीने के लिए 90 रुपये प्रति सीट के हिसाब से टैक्स वसूला जाता है, जबकि निजी बसों से 300 रुपये टैक्स लिया जाता है। निजी बस को अनुबंध पर स्कूली बच्चों के परिवहन के लिए चलाया जाता है तब भी उसे 300 रुपये प्रति सीट के हिसाब से ही टैक्स देना होता है। ऐसे में निजी ट्रांसपोर्टर स्कूल में बसें लगाने से बचते हैं। ट्रांसपोर्टर अनुबंधित स्कूल बसों के लिए भी स्कूल वैन की तर्ज पर टैक्स में छूट की मांग कर रहे हैं। दरअसल, स्कूल का टैक्स मैक्सी-कैब की अपेक्षा आधा है। मैक्सी कैब का तीन महीने का टैक्स 415 रुपये प्रति सीट है, जबकि स्कूल वैन का टैक्स 207.50 रुपये प्रति सीट है।

वैन भी अनुबंध या निजी करार पर स्कूलों के लिए संचालित होती हैं। अनुबंधित स्कूल बसों को टैक्स में छूट देने के लिए परिवहन आयुक्त ने एक टैक्स निर्धारण कमेटी का गठन किया था। जिसमें आरटीओ देहरादून दिनेश चंद्र पठोई कमेटी के अध्यक्ष हैं। इस कमेटी ने स्कूली बच्चों की सुविधाओं को देखते हुए अनुबंध पर संचालित स्कूल बसों का टैक्स आधा कर देने की सिफारिश की है। इसमें शर्त होगी कि बस का संचालन निजी बुकिंग पर नहीं किया जाएगा।

कमेटी ने रिपोर्ट में बताया है कि स्कूलों संग अनुबंध करने वाले वाहन स्वामी प्रदेशस्तर का कांट्रेक्ट कैरिज परमिट लेते हैं और स्कूल बंद हो तो ये बसें निजी मार्गो पर संचालित की जाती हैं। टैक्स की छूट उन्हीं निजी बसों को मिलेगी, जो सभी नियम पूरे करती हों, रंग पीला हो और बसें केवल स्कूल के लिए संचालित हों।

रेल मंत्री पीयूष गोयल से मिले राज्यमंत्री अजय टम्टा और सांसद कोश्यारी, की इस रेल लाइन के शीघ्र निर्माण की मांग

केन्द्रीय वस्त्र राज्यमंत्री अजय टम्टा व सांसद भगत सिंह कोश्यारी ने बुधवार को नई दिल्ली में रेल मंत्री पीयूष गोयल से मुलाकात कर टनकपुर-बागेश्वर रेल लाइन के शीघ्र निर्माण का अनुरोध किया।

रेल मंत्री को लिखे पत्र में टम्टा ने कहा है कि उनके संसदीय क्षेत्र अल्मोड़ा की जनता कई दशकों से टनकपुर-बागेश्वर रेल मार्ग के निर्माण की मांग को लेकर संघर्षरत है। इस रेल मार्ग के निर्माण हेतु 1912 में ब्रिटिश शासनकाल से वर्ष 2010-11 तक अनेक बार सर्वे का कार्य किया गया है। उन्होंने इस विषय को लोकसभा में रेल बजट पर अपने भाषण में भी उठाया था और इसका निर्माण शीघ्र प्रारम्भ करने का अनुरोध किया था।

उन्होंने कहा कि राज्यसभा की याचिका समिति के समक्ष रक्षा मंत्रालय द्वारा टनकपुर-बागेश्वर रेलमार्ग को भारत की सुरक्षा की दृष्टि से सामरिक महत्व की परियोजना के रूप में चिन्ह्ति किया था। समिति द्वारा अपनी 141वीं रिपोर्ट में इसके शीघ्र निर्माण का प्रस्ताव किया गया था। इस रेल मार्ग के निर्माण में विलम्ब से क्षेत्रवासियों में अत्यंत रोष है।

उन्होंने इस संबंध में बागेश्वर-टनकपुर रेलमार्ग निर्माण संघर्ष समिति के साथ सांसद भगत सिंह कोश्यारी के पत्र का भी उल्लेख किया है, जिसमें भी उल्लेख किया गया है कि सामरिक सुरक्षा की दृष्टि से संसद की याचिका समिति के सम्मुख हिमालयी राज्यों में 14 नये रेल लाईनों की आवश्यकता बताई गयी। इन 14 रेल लाईनों में तीन उत्तराखण्ड से है, जिनमें ऋषिकेश-कर्णप्रयाग-चमोली, टनकपुर-बागेश्वर व टनकपुर-जौलजीवी है। इनमें टनकपुर बागेश्वर रेल लाईन के बीच में लगभग 80 किमी के बाद जौलजीवी 35 किमी के आसपास रेल लाईन बनेगी।

उक्त रेल लाईनों में टनकपुर-बागेश्वर-जौलजीवी छोडकर ऋषिकेश कर्णप्रयाग सहित सभी रेल लाईनों को केन्द्र ने राष्ट्रीय प्रोजेक्ट के रूप में ले लिया है। उन्होंने पत्र के माध्यम से राष्ट्रीय सुरक्षा व सीमान्त क्षेत्र की जनता के हित में टनकपुर-बागेश्वर रेल लाईन को शीघ्र बनवाने का आग्रह किया। सामरिक महत्व के कारण इसे नेशनल प्रोजेक्ट के रूप में लिया जा सकता है। इस रेल लाईन के बनने से भारत के साथ-साथ नेपाल के नागरिकों को भी बहुत सुविधा होगी।

मेडिकल कॉलेजों में फीस संबंधी मामले पर हाईकोर्ट ने छात्रों को दी राहत

उच्च न्यायालय नैनीताल ने प्राइवेट मेडिकल कॉलेजों में पढ़ने वाले छात्र-छात्राओं को राहत दी है। कोर्ट ने कॉलेजों के फीस संबंधित हिमालयन मेडिकल कॉलेज व कम्बाइंड इंट्रेंस एक्जाम एसोसिएशन की विशेष अपील को खारिज कर एकलपीठ के आदेश को बरकरार रखा है। उक्त मामले की सुनवाई कार्यवाहक मुख्य न्यायधीश राजीव शर्मा व न्यायमूर्ति मनोज कुमार तिवारी खंडपीठ ने की।

पूर्व में एकलपीठ ने सरकार के प्राइवेट मेडिकल कॉलेजों के फीस बढ़ाने वाले शासनादेश को निरस्त कर दिया था। साथ ही कोर्ट ने आदेश दिया था कि जिन छात्रों ने नये शासनादेश के हिसाब से फीस भर दी है। उनको 15 दिनों के भीतर फीस वापस दी जाए।राज्य सरकार ने आयुर्वेदिक मेडिकल कालेजो की फीस बढाने को लेकर 14 अक्टूबर 2015 को एक शासनादेश जारी किया था। इस साशनादेश को छात्र ललित तिवारी समेत अन्य ने याचिका के माध्यम से हाई कोर्ट में चुनौती दी थी, याचिका में कहा गया था कि सरकार ने गलत तरीके से फीस बढाने का जीओ जारी किया है ।

याचिका में कहा गया था कि मेडिकल कॉलेजों ने अपने प्रॉस्पेक्ट्स के आधार पर एडमिशन फीस को 80 हजार रुपये ली थी। परन्तु सरकार ने नया जीओ जारी कर इस फीस को बढ़ाकर दो लाख 15 हजार कर दिया। जो एक्ट के विरुद्ध व अवैध है। पूर्व में एकलपीठ ने छात्रो से अधिक ली गयी फीस को वापस करने के आदेश दिए थे। इस आदेश को कालेज व अन्य ने खण्डपीठ में चुनोती दी थी जिसपर आज सुनवाई करते हुए खण्डपीठ ने एकलपीठ के आदेश को सही मानते हुए कालेज व अन्य की विशेष अपील निरस्त कर दी है।

उत्तराखंड में गुरुवार मध्य रात्रि से पेट्रोल-डीजल के दामों में होंगे पांच रूपये कम

केंद्रीय वित्त मंत्री अरूण जेटली की पेट्रोल-डीजल पांच रूपया सस्ता करने की घोषणा के बाद उत्तराखंड सरकार ने भी राज्य में पेट्रोल-डीजल पांच रूपया सस्ता करने की घोषणा कर दी। जिससे राज्य के नागरिकों को कुछ राहत अवश्य मिलेगी।

केंद्रीय वित्त मंत्री की घोषणा के बाद गुजरात, महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़, त्रिपुरा, उत्तर प्रदेश, मध्यप्रदेश, हरियाणा, असम, उत्तराखंड, जम्मू कश्मीर, झारखंड और हिमाचल प्रदेश ने भी 2.50 रुपये प्रति लीटर पेट्रोल-डीजल सस्ता किए जाने की घोषणा की। इसके बाद इन राज्यों में गुरुवार आधी रात से पेट्रोल और डीजल पांच रुपये प्रति लीटर सस्ता हो जाएगा।

पेट्रोल-डीजल के दामों में कटौती का स्वागत करते हुए भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने कहा कि केंद्र की मोदी सरकार के साथ-साथ सभी भाजपा शासित राज्यों ने भी पेट्रोल और डीजल पर ढाई रूपये कम करने का निर्णय लिया है। जिससे पेट्रोल और डीजल के दाम पांच रुपये कम होंगे। जनता को राहत देने वाले इस संवेदनशील निर्णय के लिए मैं सभी भाजपा शासित राज्यों के मुख्यमंत्रियों को बधाई देता हूँ।

उधर, बिहार के उप मुख्घ्यमंत्री सुशील मोदी ने कहा कि हमें जेटली की तरफ से कोई चिट्ठी नहीं मिली। पहले हम इस आदेश को देखेंगे फिर पेट्रोल-डीजल की कीमत पर फैसला लेंगे। हर राज्य की अलग-अलग स्थिति होती है इसलिए पहले लेटर आने दीजिए।

कर्नाटक के मुख्घ्यमंत्री कुमार स्वामी ने कहा कि हमने पहले दो रुपये प्रति लीटर पेट्रोल-डीजल के दाम कम करके दो महीने पहले ही लोगों को राहत दे दी है।

उधर, केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री धर्मेद्र प्रधान ने उड़ीसा के मुख्यमंत्री नवीन पटनायक से अपील की है कि वह भी अन्य राज्यों की तरह 2.50 रुपये की कटौती करें, जिससे आम लोगों को राहत मिल सके।

गौरतलब है कि पेट्रोल और डीजल पर लगने वाला वैट राज्य सरकारों के अधिकार क्षेत्र में आता है, जबकि एक्साइज ड्यूटी केंद्र सरकार के क्षेत्राधिकार में आने वाला कर है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी की वजह से देश में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में इजाफा हो रहा है। गुरुवार को कच्चे तेल की कीमत अंतरराष्ट्रीय बाजार में 86 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई, जो पिछले चार सालों के दौरान कीमतों में आई सबसे बड़ी उछाल है।