महिला आरक्षण पर बोले सीएम राज्य की महिलाओं के सर्वागींण विकास के लिए जरुरी है आरक्षण

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि उत्तराखंड सरकार महिलाओं के हितों की रक्षा के लिए कटिबद्ध है। उन्होंने महिला क्षैतिज आरक्षण को लेकर हाईकोर्ट के आदेश पर सुप्रीम कोर्ट से रोक मिलने का स्वागत किया है। राज्य सरकार ने एक साल के भीतर सरकारी विभागों में 19 हजार भर्तियां करने का लक्ष्य रखा है।
शुक्रवार को महिला क्षैतिज आरक्षण पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला आने के बाद सीएम धामी ने त्वरित टिप्पणी की है। सीएम धामी की मंजूरी के बाद ही महिला आरक्षण को यथावत रखने के लिए राज्य सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में एसएलपी दायर की थी। उसी पर सर्वाेच्च न्यायालय ने उच्च न्यायालय के आदेश पर स्टे दिया गया है।
मुख्यमंत्री ने सुप्रीम कोर्ट के प्रदेश की महिलाओं के हित में दिए गए फ़ैसले स्वागत किया। कहा कि हमारी सरकार प्रदेश की महिलाओं के हितों की रक्षा के लिए कटिबद्ध है। राज्य सरकार ने महिला आरक्षण को यथावत् बनाए रखने के लिए अध्यादेश लाने के लिए भी पूरी तैयारी कर ली थी। इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट में भी समय से अपील करके प्रभावी पैरवी सुनिश्चित की।
सीएम धामी पहले ही साफ कर चुके हैं कि एक वर्ष के भीतर सरकार ने विभिन्न सरकारी विभागों में 19 हजार नई भर्तियों का फैसला लिया है। ताजा आदेश के बाद अब इन भर्तियों में तेजी आने की उम्मीद है। दरअसल, पहले उत्तराखंड अधीनस्थ चयन आयोग भर्ती घपला और फिर हाईकोर्ट के 30 फीसदी महिला आरक्षण पर रोक के बाद भर्ती प्रक्रिया थम गई। इससे बेरोजगार अभ्यर्थियों में आक्रोश पनप रहा था, लेकिन अब फिर भर्तियों की राह जोर पकड़ सकती हैं।

एक्ट बनाने से नहीं फंसेगा फेंच
उत्तराखंड में सरकारी नौकरियों में अभी महिलाओं को 30 फीसदी आरक्षण सिर्फ एक जीओ के आधार पर मिल रहा है। 18 जुलाई, 2001 को नित्यानंद स्वामी सरकार ने इसकी शुरूआत की थी। तब 20 फीसदी आरक्षण का प्रावधान था। तब से सरकार ने इसके लिए कोई एक्ट नहीं बनाया है, जिससे भविष्य में भी इस जीओ को चुनौती मिल सकती है।

विशेषज्ञों का कहना है कि राज्य सरकार को यह लाभ यथावत देने के लिए अध्यादेश या फिर विधानसभा के पटल पर विधेयक लाना होगा, ताकि इसे कानूनी तरह से अमली जामा पहनाया जा सके। पिछले माह हुई बैठक में कैबिनेट मुख्यमंत्री को महिला आरक्षण को लेकर अध्यादेश लाने की मंजूरी देने को अधिकृत भी कर चुकी है।

न्याय विभाग से भी इसका परीक्षण कराया जा चुका है। चूंकि, फिलहाल सरकार को राहत मिल चुकी है तो अध्यादेश या फिर विधेयक दोनों में कोई एक विकल्प सरकार चुन सकती है। एक्ट बनने से भविष्य में राज्य में महिला आरक्षण पर पेंच नहीं फंसेगा।

एसएलपी में ये दिए थे तर्क
राज्य सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में दाखिल एसएलपी में आरक्षण यथावत रखने के लिए विभिन्न तर्क दिए थे। इसमें कहा गया था कि उत्तराखंड की भौगोलिक परिस्थितियां बिल्कुल भिन्न हैं और पर्वतीय महिलाओं की विकट जीवन शैली है। चूल्हे से लेकर खेत-खलिहान सभी उन्हीं के जिम्मे है। वहीं, सरकारी नौकरियों में महिलाओं का प्रतिनिधत्व काफी कम है। लिहाजा समाज के मुख्य धारा में महिलाओं को शामिल करने के लिए उनके लिए क्षैतिज आरक्षण जरूरी है।

कई राज्यों में है महिला आरक्षण
विभिन्न राज्यों में सभी महिलाओं को सरकारी नौकरियों में क्षैतिज आरक्षण देने का प्रावधान है। इनमें बिहार में सबसे अधिक 35 फीसदी आरक्षण है, जबकि मध्यप्रदेश और राजस्थान में 30-30 फीसदी आरक्षण है। यूपी ने भी 20 फीसदी आरक्षण का लाभ दिया था, लेकिन वर्ष 2019 में इलाहाबादा हाईकोर्ट में चुनौती मिलने के बाद इस पर रोक लगी है।

कब क्या हुआ
18 जुलाई, 2001 में नौकरियों में मिला था स्थानीय महिलाओं को 20 फीसदी आरक्षण
24 जुलाई, 2006 में एनडी सरकार में इसमें बढ़ोत्तरी कर 30 फीसदी किया
10 अक्तूबर,2022 में हाईकोर्ट ने आरक्षण पर रोक लगाई
24 अगस्त, 2022 को सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में स्पेशल लीव पिटीशन की दायर

वहीं, वित्त, संसदीय, शहरी विकास व आवास, पुनर्गठन व जनगणना मंत्री डा. प्रेमचंद अग्रवाल ने राज्य में 30 प्रतिशत महिला आरक्षण पर सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिए गए आदेश का स्वागत किया है। राज्य सरकार ने इस दिशा में सुप्रीम कोर्ट में ठोस पैरवी की थी। उसी के परिणामस्वरूप सुप्रीम कोर्ट ने आरक्षण को यथावत रखने का आदेश सुनाया है। डा. अग्रवाल ने कहा कि जहां उत्तराखंड राज्य यहां की महिलाओं के संघर्ष के बाद प्राप्त हुआ। महिलाओं के लिए यह राज्य सदैव ऋणी रहेगा। उत्तराखंड में महिलाओं को मां, बहन और बेटी के रूप में पूजा जाता है।
डा. अग्रवाल ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट का आदेश इस वक्त में और भी महत्वपूर्ण हो जाता है, जब पूरा उत्तराखंड अपना लोकपर्व इगास मना रहा है। आज ही के दिन ग्राम्य विकास विभाग द्वारा लखपति दीदी योजना परवान चढ़ी है। डा. अग्रवाल ने कहा कि मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने लखपति दीदी योजना में स्वयं सहायता समूह के माध्यम से एक वर्ष में एक लाख से अधिक की आय अर्जित करने वाली महिलाओं को लखपति दीदी के रूप में सम्मानित किया।
डा. अग्रवाल ने कहा कि राज्य सरकार महिलाओं को सशक्त बनाने की दिशा में कार्यरत है, 2025 तक सरकार ने सवा लाख महिलाओं को लखपति दीदी बनाने का लक्ष्य निश्चित किया है।

अभिनव पहल-आर्थिक रूप से कमजोर 300 छात्र-छात्राओं को निःशुल्क उच्च शिक्षा

उत्तराखंड के देहरादून में स्थित CIMS & UIHMT ग्रुप ऑफ कॉलेज ने बड़ी पहल करते हुए उत्तराखंड के आर्थिक रूप से कमजोर 300 छात्र छात्राओं को निःशुल्क उच्च शिक्षा प्रदान करने का फ़ैसला लिया है। CIMS & UIHMT ग्रुप ऑफ कॉलेज न सिर्फ़ उच्च शिक्षा बल्कि सामाजिक सरोकारों में भी अग्रणी भूमिका निभाता रहा है। ग्रुप के चेयरमैन एडवोकेट ललित मोहन जोशी सजग इंडिया के माध्यम से बीते 15 सालों से नशे के खिलाफ जन जागरूकता अभियान चला रहे हैं। वर्तमान में भी संस्थान द्वारा कोरोना काल में अनाथ हुए 100 बच्चों को निःशुल्क शिक्षा प्रदान की जा रही है। अपनी इस पहल को आगे बढ़ाते हुए अब उन्होंने बड़ा फैसला लेते हुए उत्तराखंड के आर्थिक रूप से कमजोर 300 छात्र-छात्राओं को निःशुल्क उच्च शिक्षा प्रदान करने का निर्णय लिया है।

आज पत्रकार वार्ता को संबोधित करते हुए CIMS & UIHMT ग्रुप ऑफ कॉलेज के चेयरमैन एडवोकेट ललित मोहन जोशी ने कहा कि प्रायः हमारे प्रदेश में यह देखा गया है कि कई छात्र-छात्राओं की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं होने के कारण दसवीं/बारहवीं के बाद वह उच्च शिक्षा से वंचित हो जाते हैं और कई गलत रास्तों में भटक जाते हैं और कई युवा नशे के जंजाल में फंस जाते हैं। उपरोक्त की स्थिति को देखते हुए CIMS & UIHMT Group of Colleges द्वारा यह निर्णय लिया गया है कि हम अपने निजी शिक्षण संस्थान में 300 छात्र-छात्राओं को प्रतिवर्ष निःशुल्क शिक्षा प्रदान करेंगे, ताकि वह आगे बढ़कर अपने परिवार के भरण-पोषण के साथ-साथ प्रदेश एवं देश के काम आ सकें एवं व्यसनमुक्त समाज के निर्माण में भागीदार बन सकें। उन्होंने बताया कि आर्थिक रूप से कमजोर 300 छात्र-छात्राओं को निःशुल्क उच्च शिक्षा, चिकित्सा शिक्षा प्रदान करके उनको शत-प्रतिशत जॉब में लाने का प्रयास किया जाएगा। प्रवेश लेने की अंतिम तिथि 30 नवम्बर, 2022 तक रखी गई है, जिसमें पहले आओ, पहले पाओ के माध्यम से सीटें आवंटित की जाएगी।

CIMS &UIHMT ग्रुप की इस पहल को राज्य के कई गणमान्य व्यक्तियों का भी सहयोग मिला है। प्रेस वार्ता के दौरान राज्य आंदोलनकारी व जनकवि अतुल शर्मा ने अपना आशीर्वाद देते हुए संस्थान की इस मुहिम को सराहा। उन्होंने कहा कि राज्य स्थापना दिवस से पहले यह राज्य के आर्थिक रूप से कमजोर छात्र-छात्राओं के लिए बहुत बड़ा तोहफ़ा है। वहीं प्रेस वार्ता में मौजूद बॉलीवुड कलाकार हेमंत पांडे ने भी संस्थान की इस पहल को सराहा, उन्होंने कहा कि वह संस्थान के इस प्रयास का प्रचार-प्रसार ब्रांड एंबेसेडर के तौर पर निःशुल्क रूप में करेंगे। प्रेस वार्ता को लोकगायिका पद्मश्री डॉ. माधुरी बर्थवाल, सीएमआई अस्पताल के चेयरमैन डॉ. महेश कुड़ियाल ने भी संबोधित किया। उन्होंने CIMS &UIHMT ग्रुप ऑफ कॉलेज के इस प्रयास को सराहते हुए अपना पूर्ण समर्थन देने का ऐलान किया।

कार्यक्रम में कुरमांचल परिषद के अध्यक्ष कमल रजवार, गोरखाली सुधार सभा के अध्यक्ष पदम सिंह थापा, धात संस्था के महामंत्री तन्मय ममगाई, रिटायर्ड कर्नल ठाकुर सिंह, राज्य आंदोलनकारी परिषद के अध्यक्ष प्रदीप कुकरेती, बलूनी स्कूल के प्रबंध निदेशक विपिन बलूनी, राज्य आंदोलनकारी रविंद्र जुगरान, प्रेस क्लब के अध्यक्ष जितेंद्र अन्थवाल महासचिव ओपी बिंजवाल, शिक्षाविद ड़ा0 शुशील राणा, बबिता शाह लोहनी, गिरीश सनवाल सहित अनेक सामाजिक लोगों उपस्थित थे।

सत्र 2022-23 के लिए इन पाठ्यक्रमों में दिया जाएगा प्रवेश-

(B.Sc. Medical Microbiology, B.Sc. Optometry, B.Sc.Pathology, Bachelor in Hospital Administration, BBA, BCA, B.Sc.IT, B.A.(Honour), Mass Communication, B.Com (Hons.), BHM, DHM, BA, B.Com, B.Sc.(PCM/ZBC),Master in Public Health, Master in Hospital Administration, Master in Hostel Management, M.Sc. Biochemistry, M.Sc.Microbiology, M.Sc.MLT, P.G. Diploma-Diploma in Yoga Science, Diploma in Yoga, P.G. Diploma in Fitness & Sports Management, P.G. Diploma in Business Accounting & Taxation, P.G. Diploma in Journalism & Mass Communication, P.G. Diploma in Water Sanitization & Hygiene)

उक्त सीटों को भरने हेतु संस्थान द्वारा उन छात्र-छात्राओं को पहले प्राथमिकता दी जाएगी, जो कि निम्नलिखित श्रेणी में आते हैं –

1. कोरोना महामारी में अनाथ हुए बच्चे जो कि दसवीं या बारहवीं के बाद आगे की पढ़ाई करना चाहते हैं या कारोनाकाल में उनके घर के कमाऊ व्यक्ति माता या पिता की मृत्यु हो चुकी है।

2. देश एवं प्रदेश के किसी भी फोर्स (आर्मी, पुलिस, अर्धसैनिक अथवा अन्य फोर्स) में शहीद हुए उत्तराखण्ड के जवान के बच्चे जिनकी आर्थिक स्थिति ठीक ना हो।

3. उत्तराखण्ड राज्य आन्दोलनकारियों के आश्रित बच्चे, जिनकी आर्थिक स्थित ठीक ना हो, जो उच्च शिक्षा प्राप्त करना चाहते हों।

4. उत्तराखण्ड के लोक-कलाकर एवं लोक संस्कृति एवं साहित्य को जीवित रखने के लिए जो कलाकार निःस्वार्थ भाव से लगे हैं, अगर उनकी आर्थिक स्थिति ठीक नहीं है तो उनके ऐसे बच्चों को संस्थान द्वारा दसवीं/बारहवीं बाद निःशुल्क उच्च शिक्षा प्रदान करके उनको रोजगार मुहैया कराया जाएगा।

5. उत्तराखण्ड के आपदा प्रभावित क्षेत्रों के ऐसे बच्चे जिनकी आपदाओं के कारण आर्थिक स्थिति खराब हो, को भी उच्च शिक्षा एवं रोजगारपरक शिक्षा निःशुल्क प्रदान की जाएगी।

6. मीडिया देश का चौथा स्तम्भ है, जहाँ पर हमारे मीडियाकर्मी भी एक सैनिक की भांति समाज को एक नई दिशा देने का काम करती है और कोरोना महामारी के बाद हमारे प्रदेश के अनेक मीडिया साथियों (प्रिंट एवं इलैक्ट्रानिक मीडिया, सोशल मीडिया, स्वतंत्र पत्रकार एवं अन्य मीडिया के साथी) जिनकी आर्थिक स्थिति ठीक ना हो, के परिवार के बच्चों को भी निःशुल्क उच्च शिक्षा, व्यावसायिक शिक्षा प्रदान की जाएगी।

धामी सरकार परीक्षाओं में नकल रोकने के लिए बनाने जा रही नियम, मिलेगी इतने साल की सजा

भर्तियों में नकल रोकने के लिए बनेगा कानून, मसौदा तैयार, विधानसभा में पास कराने की तैयारी सरकार ने किसी एक आयोग के बजाए प्रदेश में सभी भर्ती कराने वाली संस्थाओं के लिए ‘उत्तराखंड सरकारी सेवाओं में नकल निषेध अधिनियम 2022’ तैयार कर लिया है। शासन स्तर पर हुई बैठक में इस अधिनियम के सभी बिंदुओं पर विस्तार से चर्चा की गई।
उत्तराखंड में सभी आयोग, बोर्ड, परिषद या विश्वविद्यालय की ओर से होने वाली भर्ती परीक्षाओं में नकल रोकने के लिए सख्त कानून का मसौदा तैयार कर लिया गया है। आगामी विधानसभा सत्र के दौरान सरकार इसे पटल पर रखने की तैयारी में है। शासन स्तर पर हुई बैठक में सभी बिंदुओं पर चर्चा के बाद इसे अंतिम रूप दे दिया गया है।
सरकार ने किसी एक आयोग के बजाए प्रदेश में सभी भर्ती कराने वाली संस्थाओं के लिए ‘उत्तराखंड सरकारी सेवाओं में नकल निषेध अधिनियम 2022’ तैयार कर लिया है। शासन स्तर पर हुई बैठक में इस अधिनियम के सभी बिंदुओं पर विस्तार से चर्चा की गई बैठक में तय किया गया कि कानून में उम्मीदवारों, परीक्षा कराने वाली संस्थाओं और नकल माफियाओं के लिए सजा के अलग-अलग प्रावधान होंगे।
अपर सचिव कार्मिक कर्मेन्द्र सिंह ने बताया कि प्रदेशभर में होने वाली सरकारी भर्तियों के लिए अधिनियम को लेकर हुई बैठक में न्याय विभाग सहित तमाम संबधित विभागों ने अपने सुझाव दे दिए हैं। दरअसल, अधीनस्थ सेवा चयन आयोग की स्नातक स्तरीय के साथ ही कई भर्तियों में बड़े पैमाने पर नकल सामने आने के बाद प्रदेश में सख्त नकलरोधी कानून की जरूरत महसूस हुई। आयोग ने बोर्ड बैठक में ऐसे कानून का प्रस्ताव तैयार कर शासन को भेजा था।

प्रदेश में पहली बार ऐसे लागू होगा नकलनिषेध कानून
उत्तराखंड सरकार प्रदेश में पहली बार सख्त नकल निषेध कानून लाने जा रही है। जो मसौदा तैयार हुआ है, उसे कैबिनेट बैठक में लाया जाएगा। यहां से मुहर लगने के बाद विधानसभा सत्र के दौरान पटल पर रखा जाएगा। पास होने के साथ ही यह अधिनियम कानून के रूप में लागू हो जाएगा।

अभी तक यह है प्रावधान
अभी तक पेपर लीक का कोई भी मामला प्रकाश में आने के बाद उत्तराखंड के नकल रोधी कानून के तहत आरोपियों पर आईपीसी की धारा 420, 120 बी या हाईटेक नकल होने पर आईटी एक्ट में ही मुकदमे दर्ज होते हैं। आयोग का मानना है कि इन अपराधियों के लिए कानून के यह प्रावधान कमतर हैं।

अब ये सजा संभव
-उम्मीदवारों पर जुर्माने के साथ ही दो से तीन साल की सजा और परीक्षाओं से दो साल तक डिबार करना।
-संस्था की पेपर लीक में भूमिका होने पर भारी भरकम जुर्माना और पांच से सात साल तक की सजा।
-नकल माफिया या गिरोह की भूमिका पर दस साल तक सजा के अलावा संपत्ति कुर्की व दस लाख तक जुर्माना।
-नकल को संज्ञेय और गैर जमानती अपराध मानकर इसकी जांच एडिशनल एसपी स्तर के अधिकारी ही करेंगे।

कानून न होने पर पेपर लीक के 42 में से 18 आरोपियों की हो चुकी जमानत
प्रदेश में नकल निषेध का कोई सख्त कानून न होने की वजह से अधीनस्थ सेवा चयन आयोग की भर्तियों में पेपर लीक के 42 आरोपियों में से 18 की जमानत हो चुकी है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी पहले से ही भर्तियों का पूर्ण पारदर्शी सिस्टम तैयार करने और नकल-पेपर लीक रोकने के लिए बड़ा फैसला लेने की बात कह चुके हैं।

धामी सरकार में छात्र-छात्राओं के रिपोर्ट कार्ड के साथ बनेगा हेल्थ कार्ड

उत्तराखंड के सभी हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर पर मानसिक स्वास्थ्य से संबंधित काउंसलिंग व स्क्रीनिंग जल्द ही शुरु होने जा रही है। यह बात प्रदेश के प्रभारी सचिव स्वास्थ्य व राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के मिशन निदेशक डॉ. आर. राजेश कुमार द्वारा राज्य स्तरीय पोषण, जीवन शैली व प्रबंधन बैठक में जानकारी देते हुए साझा की गई। देहरादून स्थित स्वास्थ्य महानिदेशालय, राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन सभागार में आयोजित बैठक में विशेषज्ञों द्वारा बदलते जीवनशैली के मद्देनजर स्कूल के छात्र-छात्राओं के रिपोर्ट कार्ड के साथ-साथ हेल्थ कार्ड बनाने पर भी जोर दिया गया।
डॉ. आर. राजेश कुमार की अध्यक्षता में आहूत बैठक में सरकारी-गैर सरकारी संस्थानों में मौजूद विशेषज्ञों द्वारा यह पाया गया कि खानपान के गलत प्रचलन व मानसिक/शारीरिक परामर्श ना होने के कारण ब्रेन स्ट्रोक, हार्ट अटैक, डायबिटीज (गैर संचारी रोगों) जैसी बीमारियों में तेजी आई है। इसीलिए यह आवश्यक है कि रोजमर्रा के जीवन में सही जीवनशैली को अपनाया जाए, ताकि इन गैर संचारी रोगों के प्रभाव को कम किया जा सके।
बैठक में चर्चा की गई कि स्वास्थ्य विभाग, अन्य विभागों के साथ सभी हितधारकों द्वारा ऐसी नीतियों का निर्माण किया जाए जिन नीतियों के अंतर्गत मानसिक रोगों, तनाव, डिप्रेशन, तम्बाकू नियंत्रण, कैंसर, हाइपरटेंशन, डायबिटीज, आदि (गैर-संचारी रोगों) का आकलन करते हुए, जनजागरुकता को बढ़ावा दिया जाए।
जन स्वास्थ्य के क्षेत्र में कार्यरत डॉ. वर्तिका सक्सेना द्वारा बताया गया कि पिछले एक दशक में महिलाओं में मोटापे के मामले लगभग दोगुने हो गए हैं। किशोरियों में शारीरिक गतिविधियों, खेल-खूद को बढाने की आवश्यकता है। उन्होंने बताया कि स्तनपान को बढ़ावा देने की भी जरुरत है जिससे की डायबिटीज, उच्च रक्तचाप, मोटापे को कम किया जा सके।
बैठक के दौरान प्रदेश में गैर-संचारी रोगों की रोकथाम हेतु स्वस्थ जीवनशैली, ईट राइट, मानसिक स्वास्थ्य, हाइपरटेंशन, डायबिटीज, ब्लड प्रेशर, तनाव प्रबंधन, आदि विषयों पर विभन्न विभागों के प्रतिनिधियों द्वारा विचार साझा किए गए। इस बैठक के दौरान बिहेवियर चेंज, सामूहिक आई.ई.सी., इंटरपर्सनल कम्युनिकेशन, आदि को बढ़ावा देने पर जोर दिया गया। साथ ही मानसिक स्वास्थ्य के काउंसलर के रुप में आशा कार्यकत्रियों को तैयार किए जाने पर चर्चा की गई। स्वास्थ्य संबंधित काउंसलिंग व स्क्रीनिंग को विद्यालय स्तर पर प्रारंभ किए जाने पर भी बल दिया गया।
बैठक में स्वास्थ्य महानिदेशक (प्रभारी) डॉ. विनीता शाह, निदेशक राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन डॉ. सरोज नैथानी, राज्य नोडल अधिकारी डॉ. फरीदुज़फ़र, डॉ. सुजाता, ड़ॉ. पंकज सिंह, डॉ. कुलदीप मर्ताेलिया, डॉ. अर्चना ओझा, डॉ. अभय कुमार, डॉ. मंयक बड़ोला, डॉ. तुहीन कुमार, डॉ. अमलेश कुमार सिंह, डॉ. अमित शुक्ला, उपायुक्त खाद्य एवं औषधि प्रशासन जी.सी. कंडवाल, डॉ. नीतू कोचर, आदि मौजूद रहे।

शिक्षा मंत्री ने वर्चुअल माध्यम से किया मातृभाषा उत्सव का उद्घाटन

लोक भाषाओं में बच्चों की अभिव्यक्ति बढ़ाने एवं मातृभाषा के प्रति बच्चों में सम्मान की भावाना विकसित करने के उद्देश्य से राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद उत्तराखंड द्वारा दो दिवसीय उत्तराखंड मातृभाषा उत्सव आयोजित किया गया है। जिसका उद्घाटन प्रदेश के विद्यालयी शिक्षा मंत्री डॉ धन सिंह रावत ने वर्चुअल माध्यम से जुड़कर किया। उन्होंने कहा कि फाउंडेशन लर्निंग के लिये मातृभाषा सबसे उचित माध्यम है क्योंकि छोटे बच्चे अपनी मातृभाषा में कोई भी चीज सबसे तेजी से सीखते और समझते है, इसलिये जहां तक संभव हो बच्चों को मातृभाषा में ही शिक्षा दी जाय। उन्होंने कहा कि इसका प्रावधान बकायदा राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 में भी किया गया है।
एससीईआरटी द्वारा किसान भवन सभागार देहरादून में आयोजित दो दिवसीय उत्तराखंड मातृभाषा उत्सव का आज शिक्षा मंत्री धन सिंह रावत ने वर्चुअल माध्यम से उद्घाटन किया। बतौर मुख्य अतिथि कार्यक्रम को सम्बोधित करते हुये उन्होंने कहा कि मातृभाषा में बच्चों की अभिव्यक्ति बढ़ाने के प्रयास किये जाने चाहिये। जिसमें अभिभावकों एवं शिक्षकों की भूमिका सबसे अहम है। उन्होंने कहा कि फाउंडेशन लर्निंग के लिये मातृभाषा सबसे उचित माध्यम है, इसलिये जहां तक संभव हो बच्चों को मातृभाषा में ही शिक्षा दी जाय। रावत ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 भी मातृभाषा में शिक्षा देने की अनुशंसा करती है, इसीलिये इस नीति में त्रि-भाषा फॉर्मूला का प्रावधान किया गया है ताकि बच्चों को हिन्दी, अंग्रेजी के अलावा स्थानीय भाषा में भी पढ़ाया जा सके। विभागीय मंत्री ने कहा कि राज्य की विभिन्न लोक भाषाओं में बच्चों को लोककथा, नाट्य संवाद एवं लोकगीत के माध्यम से अपने विचारों को व्यक्त करने के अवसर उपलब्ध कराये जा रहे हैं, इससे बच्चों के मन में अपनी मातृभाषा के प्रति सम्मान की भावाना विकसित होगी, साथ ही बच्चे एक-दूसरे की भाषाओं से भी परिचित हो पायेंगे। उन्होंने कहा कि राज्य में लगभग 17 मातृभाषाएं चिन्हित है, जिसमें विशेष रूप से गढ़वाली, कुमांऊनी, जौनसारी, रां, रंवाल्टी, जार, मार्च्छा, राजी आदि शामिल है। इसके अलावा प्रदेश में कई बोलियां भी बोली जाती है, जिन्हें संरक्षित करने के प्रयास किये जा रहे हैं। रावत ने मातृभाषा उत्सव आयोजित करने पर विभागीय अधिकारियों को बधाई दी, उन्होंने कहा कि ऐसे कार्यक्रमों से बच्चों की समझ विकसित होती है। कार्यक्रम में सचिव विद्यालयी शिक्षा रविनाथ रमन, महानिदेशक विद्यालयी शिक्षा बंशीधर तिवारी ने विचार वक्त कर मातृभाषा को बढ़ावा देने पर जोर दिया।
कार्यक्रम में सचिव विद्यालयी शिक्षा रविनाथ रमन, महानिदेशक विद्यालयी शिक्षा बंशीधर तिवारी, निदेशक शोध एव ंप्रशिक्षण संस्थान सीमा जौनसारी, निदेशक माध्यमिक आर0के0 कुंवर, निदेशक बेसिक वंदना गर्ब्याल सहित विभागीय अधिकारी और विभिन्न स्कूलों से आये शिक्षक एवं छात्र-छात्राएं उपस्थित रही।

सीएम ने छात्रों को दी जीवन में आगे बढ़ने का संकल्प लेने की सीख

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से शनिवार को मुख्यमंत्री आवास स्थित कैम्प कार्यालय में देहरादून भ्रमण पर आये बाल शिक्षा सदन स्कूल बड़कोट के छात्रों ने भेंट की। मुख्यमंत्री से मिलने आये छात्र मुख्यमंत्री से मिलकर उत्साहित नजर आये।
मुख्यमंत्री ने छात्रों को जीवन में आगे बढ़ने का संकल्प लेने की सीख देते हुए कहा कि जीवन में जो भी कार्य करें मन से करें, निडर होकर प्रश्न कर उनके उत्तर प्राप्त करने का प्रयास करें। छात्र जिस भी क्षेत्र में भविष्य में जाना चाहें वहां भी सबसे आगे रहने का प्रयास करें।
मुख्यमंत्री ने छात्रों को पूर्व राष्ट्रपति डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम का उदाहरण देते हुए कहा कि रामेश्वरम के समुद्र तट से राष्ट्रपति भवन तक की उनकी यात्रा साधारण से असाधारण तथा आसमान छूने की यात्रा रही है। उन्होंने छात्रों से कहा कि वे हमेशा कुछ नया सीखने तथा पढ़ाई में रूचि पैदा करने की आदत डालें। समय अमूल्य है उसका सदुपयोग करना सीखें। सीखने की कोई उम्र नहीं होती, व्यक्ति जीवन भर शिक्षार्थी रहता है। सकारात्मक सोच के साथ आगे बढ़ने पर सफलता जरूर मिलती है।
इस अवसर पर छात्रों के साथ विद्यालय के प्रबंधक श्री सुनील थपलियाल एवं शिक्षकगण भी उपस्थित रहे।

मासूम चेहरों की मुस्कराहट की वजह बने आईएएस बंशीधर तिवारी

हर असरदार शख्स के घर दिवाली पर तोहफों की बारिश हो जाती है। गिफ्ट, मिठाई, ड्राई फ्रूट, चॉकलेट, जूस औन न जाने क्या क्या लोग लेकर आ जाते हैं। असरदार शख्स यदि आईएएस अफसर हो, तो कहने ही क्या। उस पर यदि डीजी सूचना, डीजी शिक्षा, निदेशक पंचायतीराज, एमडी जीएमवीएन जैसे अहम पदों की जिम्मेदारी हो, तो तोहफों की संख्या का अंदाजा आप लगा सकते हैं। इन तोहफों को समेटने की बजाय बंशीधर तिवारी ने उनका सही उपयोग करते हुए असल जरूरतमंद लोगों तक इसे पहुंचाया। शनिवार को दोपहर बाद एक इनोवा भर कर सामान लेकर वे बनियावाला स्थित नेताजी सुभाष चंद्र बोस आवासीय बालिका छात्रावास पहुंचते हैं। यहां 107 छोटी छोटी बच्चियों के चेहरे इन गिफ्ट, मिठाई, चॉकलेट, फुलझड़ी को देखते ही खिल उठते हैं। ये सिलसिला यहीं नहीं थमता, बल्कि शहर के कई अन्य ऐसे ही स्थानों पर वे कई दिनों से ऐसे ही सामान लेकर पहुंच रहे हैं। इन तमाम चीजों का जिक्र यहां इसीलिए किया जा रहा है, क्योंकि यहीं इस राज्य में कई आईएएस, इंजीनियर और कई अहम पदों पर बैठे ऐसे अफसर भी हैं, जो दिवाली पर मिलने वाले इन उपहारों को दोबारा बाजार में बेचने के लिए भी कुख्यात रहे हैं।
कुछ आईएएस और अन्य अफसर तो ऐसे रहे, जो उनके घर आने वाले मिठाई के डिब्बों को अपने ड्राइवर के जरिए फिर उन्हीं दुकानों तक पहुंचा देते थे। इन मिठाई के डिब्बों को बेचने के बाद जो भी मिलता था, उसे लेने में कोई संकोच नहीं करते थे। ऐसे में बंशीधर तिवारी जी की ये पहल हर उस असरदार शख्स के लिए सीख है, जिसके घरों में तोहफों की बारिश होती है। ऐसा नहीं है कि उनकी ओर से ऐसा पहली बार किया गया हो। बल्कि पीसीएस के रूप में एसडीएम पद से अपनी सेवाएं शुरू करने के समय से ही वे हर दिवाली पर अपने यहां आने वाले सामान को अनाथ आश्रम, सरकारी स्कूलों के छात्रावास में बांटते आए हैं। काश उनकी इस मुहिम को देख कर बाजार में तोहफों को बेचने वाले कुछ सीख ले सकें। उनकी ये मुहिम असल मायनों में दिवाली जैसे महापर्व को बेहद खास बना देती है।
साभार- रवि नेगी, वरिष्ठ पत्रकार

एनईपी में मील का पत्थर साबित होगी बालवाटिकाः डॉ0 धन सिंह रावत

राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के अंतर्गत देशभर के 50 केन्द्रीय विद्यालयों में पायलट प्रोजेक्ट के रूप में बालवाटिका कक्षाओं का शुभारम्भ करने पर शिक्षा मंत्री डॉ0 धन सिंह रावत ने केन्द्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान को बधाई दी। उन्होंने कहा कि एनईपी-2020 के तहत बालवाटिका कक्षाओं की शुरूआत देश की शिक्षा प्रणाली में मील का पत्थर साबित होगी। उन्होंने एनईपी-2020 में विशेष मार्गदर्शन के लिये प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी एवं एनईपी समिति के चेयरमैन डॉ0 के0 कस्तूरीरंगन का भी आभार जताया।

नई दिल्ली में आयोजित एक कार्यक्रम में केन्द्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान ने आज देशभर के 50 केन्द्रीय विद्यालयों में बालवाटिका कक्षाओं का विधिवत शुभारम्भ किया। इस अवसर पर उन्होंने राष्ट्रीय पाठ्यक्रम फ्रेमवर्क समिति के सदस्यों एवं शिक्षाविदों का आभार जताते हुये बालवाटिका कक्षाओं को बुनियादी शिक्षा के लिये सबसे अहम बताया। केन्द्रीय शिक्षा मंत्री ने कहा कि समिति द्वारा तैयार किया गया पाठ्यक्रम बालवाटिका से कक्षा दो तक के बच्चों के लिये उपयोगी साबित होगा। उन्होंने उत्तराखंड के 4000 से अधिक प्राथमिक विद्यालयों में संचालित आंगनबाड़ी केन्द्रों में बालवाटिका कक्षाओं की शुरूआत किये जाने पर प्रदेश के शिक्षा मंत्री एवं विभागीय अधिकारियों की भूरी-भूरी प्रशंसा की।

उन्होंने उम्मीद जताई कि देश के अन्य राज्य भी उत्तराखंड की तर्ज पर प्राथमिक शिक्षा में एनईपी लागू करेंगे। उन्होंने देशभर के विभिन्न क्षेत्रों के विषय विशेषज्ञों, बुद्धिजीवियों एवं शिक्षाविदों से आह्वान किया कि वह नई शिक्षा नीति के अंतर्गत पाठ्यक्रम तैयार करने में अपना योगदान दें। उन्होंने यह भी उम्मीद जताई कि एनसीईआरटी समिति द्वारा तैयार किये गये राष्ट्रीय पाठ्यक्रम फ्रेमवर्क को सर्वाजनिक डोमेन डालें। उन्होंने विश्वास जताया कि पाठ्यक्रम समिति 21वीं सदी के भारत के निर्माण के लिये एक मजबूत नींव रखने में सफल साबित होगी।

प्रदेश के शिक्षा मंत्री डॉ0 धन सिंह रावत ने देशभर के 50 केन्द्रीय विद्यालयों में बालवाटिका कक्षाओं के शुभारम्भ को शिक्षा प्रणाली में एक नई क्रांति का उदय बताया। उन्होंने कहा कि यह शुरूआत मैकाले की शिक्षा नीति की परिपाटी को बदलने तथा क्षेत्रीय बोली भाषाओं के विकास में अहम साबित होगी। डॉ0 रावत ने कहा कि उत्तराखंड में इसी माह उच्च शिक्षा में भी राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 लागू कर दी गई है। इसके लिये उन्होंने कैरिकुलम फ्रेमवर्क समिति सहित इस कार्य में सहयोग प्रदान करने वाले सभी शिक्षाविदों एवं विभगीय अधिकारियों का आभार जताया।

नई शिक्षा नीति को सफल बनाने के लिए केन्द्रीय शिक्षा मंत्री ने समीक्षा की

केन्द्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान की अध्यक्षता में मुख्यमंत्री आवास में शिक्षा विभाग, उच्च शिक्षा विभाग एवं कौशल विकास की समीक्षा की गई। बैठक में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी, शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत, शासन के अधिकारी एवं सबंधित विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे।
केन्द्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान ने कहा कि उत्तराखण्ड में नई शिक्षा नीति के सफल क्रियान्वयन एवं शिक्षा व्यवस्था को और बेहतर बनाने के लिए निपुण भारत मिशन के तहत बच्चों को पढ़ने-लिखने, बोलने, व्याख्या करने एवं संख्यात्मकता ज्ञान बढ़ाने के लिए, डायट को भी इस ओर ध्यान देना होगा। शिक्षकों को इसके लिए बेहतर प्रशिक्षण देना होगा। बच्चों की प्रारंभिक बाल्यवस्था देखभाल और शिक्षा का पाठ्यक्रम को रोचक बनाया जाए। टेक्नोलॉजी के माध्यम से ईसीसीई के पाठ्यक्रम को कैसे और रोचक बनाया जा सकता है, इस पर विशेष ध्यान दिया जाए। उत्तराखण्ड के लिए जो पाठ्यक्रम बनाया जा रहा है, इसमें एससीईआरटी के साथ ही एनसीईआरटी की मदद भी ली जा सकती है।
केन्द्रीय शिक्षा मंत्री ने कहा कि बच्चों को नई-नई स्किल सीखने को मिले, इसके लिए भविष्य की आवश्यकताओं को देखकर स्किल डेवलपमेंट के कोर्स कराए जाएं। उन्होंने कहा कि उत्तराखण्ड में स्किल डेवलपमेंट का हब बनने की क्षमता है। राज्य के पास प्रतिभाओं की कमी नहीं है, इन प्रतिभाओं को आगे लाने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि राज्य में कौशल विकास से संबंधित जो भी विभाग और संस्थान प्रशिक्षण करवा रहे हैं, उन्हें सिंगल विंडो सिस्टम पर लाए जाने की आवश्यकता है।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि उत्तराखण्ड को उत्कृष्ट राज्य बनाने के लिए राज्य सरकार प्रयासरत है। सभी विभागों को अगले 3 साल और आने वाले 10 सालों का रोडमैप बनाने के साथ ही बेस्ट प्रैक्टिस के रूप में अपनी पर्फाेमेन्स देने के निर्देश दिये गये हैं। उन्होंने कहा कि शिक्षा में गुणात्मक सुधार के लिए लगातार प्रयास हो रहे हैं। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिये कि केन्द्रीय शिक्षा मंत्री द्वारा शिक्षा एवं कौशल विकास के लिए जो सुझाव दिये गये हैं, उनका सही तरीके से क्रियान्वयन किया जाए।
विद्यालयी शिक्षा एवं उच्च शिक्षा मंत्री डॉ धन सिंह रावत ने बताया कि एनईपी-2020 के अंतर्गत उच्च शिक्षण संस्थानों में वर्तमान शैक्षणिक सत्र से प्रवेश शुरू कर दिये गये हैं। इसके लिये नई नीति के अनुरूप पाठ्यक्रम तैयार किये गये हैं। विभागीय मंत्री ने बताया कि नई नीति के क्रियान्वयन के लिये राज्य स्तरीय टास्क फोर्स का गठन किया गया साथ ही स्क्रीनिंग कमेटी और कैरिकुलम डिजाइन समिति गठित की गई। जिनकी विभिन्न स्तर पर कई दौर की बैठकों और पब्लिक डोमेन से मिले सुझावों के उपरांत बाद पाठ्यक्रम तैयार किया गया। जिसे सभी विश्वविद्यालयों की बीओएस, एकेडमिक काउंसिल और एग्जेक्युटिव कमेटी द्वारा अप्रूव्ड किया गया।
इस अवसर पर अधिकारियों द्वारा प्रस्तुतीकरण के माध्यम से शिक्षा, उच्च शिक्षा एवं कौशल विकास के क्षेत्र में राज्य में की जा रही विभिन्न गतिविधियों का विस्तृत प्रजेन्टेशन दिया।
बैठक में सचिव उच्च शिक्षा शैलेश बगोली, सचिव शिक्षा रविनाथ रमन, सचिव कौशल विकास विजय कुमार यादव, महानिदेशक शिक्षा बंशीधर तिवारी एवं शासन एवं संबधित विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे।

उत्तराखंड में नए शैक्षणिक सत्र के लिए राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 का शुभारम्भ

केन्द्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान एवं मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने रविवार को मुख्यमंत्री आवास स्थित मुख्य सेवक सदन में उच्च शिक्षा में शैक्षणिक सत्र 2022-23 के लिए राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 का शुभारम्भ किया। इस अवसर पर उच्च शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत भी उपस्थित रहे।
केन्द्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान ने देश में सबसे पहले राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 को लागू करने के लिए उत्तराखण्ड सरकार को बधाई दी। उन्होंने कहा कि आज उत्तराखण्ड में उच्च शिक्षा में इसका शुभारम्भ किया गया है। बाल वाटिका से प्रारम्भिक शिक्षा में उत्तराखण्ड ने ही इसकी सबसे पहले शुरुआत की। इसके लिए उन्होंने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी एवं शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत को बधाई भी दी। उन्होंने कहा कि देवभूमि उत्तराखण्ड विद्वानों की भूमि है। इस देवभूमि से नई शिक्षा नीति के बेहतर क्रियान्वयन के लिए अभी अनेक विचार आयेंगे। अब प्रयास करने होंगे कि आने वाले समय में शत प्रतिशत बच्चे बाल वाटिकाओं में प्रवेश करें। उन्होंने कहा कि किसी भी देश एवं समाज का विकास बेहतर शिक्षा से ही हो सकता है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 मानवीय जीवन के सभी पहलुओं को ध्यान में रखकर बनाई गई है। शिक्षा के साथ ही बच्चों के कौशल विकास, उनके व्यक्तित्व के विकास, भाषाई विकास एवं नैतिक मूल्यों पर विशेष ध्यान दिया गया है। शिक्षा व्यक्ति की आत्मनिर्भरता से जुड़ी हुई है।
केन्द्रीय शिक्षा मंत्री ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तहत बच्चों को 3 साल से फार्मल एजुकेशन से जोड़ा जा रहा है। इसके तहत बाल वाटिका शुरू की गई है, बाल वाटिका में 3 साल सीखने के बाद बच्चा पहली कक्षा में प्रवेश करेगा, तब उसकी उम्र 6 साल होगी। बच्चों को नवजात से उनकी 21-22 साल की उम्र तक बेहतर एवं गुणात्मक शिक्षा के लिए उत्तराखण्ड में 40 लाख बच्चों का टारगेट लेकर आगे बढ़ना होगा। स्कूली शिक्षा, उच्च शिक्षा, तकनीकि शिक्षा,मेडिकल, पेरामेडिकल एवं अन्य को मिलाकर 35 लाख की व्यवस्था उत्तराखण्ड के पास पहले से ही है। उन्होंने कहा कि देश डिजिटल इंडिया की ओर तेजी से बढ़ा है। उच्च शिक्षा की दिशा में उत्तराखण्ड में जो नीति बन रही है, वह इस दिशा में बहुत बड़ा कदम है। प्रदेश के नौजवानों को विश्व की आवश्यकता के लिए तैयार कराना, यह उत्तराखण्ड के पास ताकत है।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि राज्य में राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 को लागू किए जाने के की दिशा में, उच्च शिक्षा विभाग द्वारा प्रभावी एवं चरणबद्ध रूप से सकारात्मक कदम बढ़ाए गए हैं। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व व मार्गदर्शन में तैयार की गई नई शिक्षा नीति 21वीं सदी के नवीन, आधुनिक, सशक्त और आत्मनिर्भर भारत के निर्माण के नए आयाम खोलने वाली नीति है। इसे देश के ख्यातिलब्ध शिक्षाविदों द्वारा तैयार किया गया है और ये नए भारत की, नई उम्मीदों नई आवश्यकताओं की पूर्ति का सशक्त माध्यम है। यदि हम एक समृद्ध भविष्य चाहते हैं तो हमने अपने वर्तमान को सशक्त बनाना होगा, ठीक इसी प्रकार से यदि हम अपनी आने वाली पीढ़ी को और भी अधिक प्रतिभाशाली बनाना चाहते हैं तो हमें उसके बचपन और उसकी शिक्षा पर आज से कार्य करना होगा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि भारत ने सम्पूर्ण विश्व को ज्ञान देने का कार्य किया है। हमारे नालंदा और तक्षशिला जैसे अद्वितीय शिक्षा मंदिर पूरी दुनिया में कहीं नहीं थे और यहां से ज्ञान अर्जित करने वालों ने संपूर्ण मानवजाति को एक नई राह दिखाई। हमारे देश में मेधा की कभी कोई कमी नहीं रही और एक से एक विद्वानों और शिक्षाविदों ने भारत की बौद्धिक संपदा को विस्तार दिया। लेकिन कालांतर में आए विदेशी आक्रांताओं और शासकों ने हमारी शिक्षा व्यवस्था पर ही सबसे अधिक चोट की और इसको तहस-नहस कर दिया। उस दौर में व्यवस्थाएं ऐसी बना दी गईं जिसके बाद से पढ़ाई का अर्थ और लक्ष्य केवल और केवल नौकरी पाने तक सीमित हो कर रह गया। उन्होंने कहा कि 2025 में राज्य स्थापना की रजत जयंती मनाई जायेगी। तब तक हम बेस्ट प्रैक्टिस के तौर पर क्या कर सकते हैं, जो देश के लिए आदर्श बने इस दिशा में सभी विभागों को तेजी से कार्य करने होंगे।
सूबे के विद्यालयी शिक्षा एवं उच्च शिक्षा मंत्री डॉ धन सिंह रावत ने राज्य में एनईपी-2020 लागू किये जाने का श्रेय विद्यालयी शिक्षा एवं उच्च शिक्षा विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों को दिया। उन्होंने कहा कि इन लोगों की मेहनत का नतीजा है कि आज राष्ट्रीय शिक्षा नीति को लागू किया जा सका। डॉ रावत ने बताया कि एनईपी-2020 के अंतर्गत उच्च शिक्षण संस्थानों में वर्तमान शैक्षणिक सत्र से प्रवेश शुरू कर दिये गये हैं। इसके लिये नई नीति के अनुरूप पाठ्यक्रम तैयार किये गये हैं। विभागीय मंत्री ने बताया कि नई नीति के क्रियान्वयन के लिये राज्य स्तरीय टास्क फोर्स का गठन किया गया साथ ही स्क्रीनिंग कमेटी और कैरिकुलम डिजाइन समिति गठित की गई। जिनकी विभिन्न स्तर पर कई दौर की बैठकों और पब्लिक डोमेन से मिले सुझावों के उपरांत बाद पाठ्यक्रम तैयार किया गया। जिसे सभी विश्वविद्यालयों की बीओएस, एकेडमिक काउंसिल और एग्जेक्युटिव कमेटी द्वारा अप्रूव्ड किया गया। उन्होंने बताया कि नई नीति के तहत छात्र-छात्राओं को च्वाइस बेस्ड क्रेडिट सिस्टम का लाभ मिलेगा और अब वह अपने मनपसंद विषय और विश्वविद्यालय चुन सकेंगे। डॉ रावत ने बताया कि नए पाठ्यक्रम रिसर्च, इनोवेशन और इंटरप्रेन्योरशिप बेस्ड होंगे। इसमें रोबोटिक्स जैसे एडवांस कोर्स रखे गये हैं। उन्होंने बताया कि को-कैरिकुलम कोर्स के 6 सेमेस्टरों के प्रत्येक सेमेस्टर में भारतीय ज्ञान परम्परा, कम्युनिकेशन स्किल, इन्वायरमेंट, मैनेजमेंट पैराडाइज ऑफ भागवत गीता, योगा, विवेकानंद स्टडीज, पर्सनली डेवलपमेंट, रामचरितमानस, ट्रेडिशनल नॉलेज, वैदिक साइंस और वैदिक गणित जैसे कोर्स भी रखे गये हैं।
इस अवसर पर विधायक उमेश शर्मा काऊ, विनोद चमोली, विनोद कण्डारी, मेयर सुनील उनियाल गामा, सचिव शैलेश बगोली, विभिन्न विश्वविद्यालयों के कुलपति, शिक्षा एवं उच्च शिक्षा विभाग के अधिकारी उपस्थित रहे।