घटते संक्रमण के बीच भारत में नए मरीज बढ़ रहे

देशभर में करीब ढाई महीने लॉकडाउन के बाद धीरे-धीरे दी जा रही ढील के बीच संक्रमितों की संख्या 2.67 लाख के पार पहुंच चुकी है। प्रतिदिन करीब 10 हजार संक्रमित मिल रहे हैं। ऐसे में पिछले दो सप्ताह के आंकड़ों के हिसाब से देखा जाए तो कोरोना वायरस संक्रमण से सबसे ज्यादा प्रभावित शीर्ष-5 देशों में अमेरिका, रूस और ब्रिटेन में घटते संक्रमण के मुकाबले भारत और ब्राजील में इसकी गति बहुत तेज रही है।
सबसे ज्यादा पीड़ित देशों में अब भी अमेरिका पहले नंबर पर है, जहां 20 लाख से ज्यादा मामले मिल चुके हैं। वहीं करीब 7 लाख मामलों के साथ ब्राजील दूसरे, जबकि करीब 5 लाख मामलों के साथ रूस तीसरे नंबर पर है। भारत फिलहाल 5वें नंबर पर चल रहा है, लेकिन उसके अगले तीन दिन में करीब 2.88 लाख मामलों के साथ चैथे नंबर पर चल रहे ब्रिटेन को पछाड़ देने की संभावना है।
आंकड़ों के हिसाब से देखें तो दो सप्ताह पहले जहां भारत और ब्राजील में नए मामले मिलने की दर 5 फीसदी से ज्यादा थी, वहीं अन्य तीनों देशों यह दर 2 फीसदी के आसपास थी। दो सप्ताह के दौरान भारत और ब्राजील में यह दर घटकर 5 फीसदी से नीचे आई है, लेकिन अब भी 4 फीसदी से ज्यादा गति से नए मामले मिल रहे हैं। इसके उलट अन्य तीनों देशों में यह दर घटकर 2 फीसदी से भी नीचे पहुंच चुकी है। ब्रिटेन में तो संक्रमण के नए मामले मिलने की गति महज 0.6 फीसदी ही बची है। 

भारत में नए संक्रमण की दर बढ़ी
भारत में संक्रमण की दर जहां दो सप्ताह पहले 5.6 फीसदी थी, वहीं ब्राजील उस समय 5.4 फीसदी की गति से आगे बढ़ रहा था। लेकिन अब ब्राजील में यह दर घटकर 4.3 फीसदी रह गई है, वहीं भारत में घटने के बावजूद नए संक्रमण की दर अब ब्राजील से भी ज्यादा 4.4 फीसदी आंकी जा रही है। हालांकि ब्राजील के आंकड़े संदेहास्पद भी हैं, क्योंकि लगातार बढ़ते मामलों से आलोचना के बाद अब वहां की सरकार ने मासिक आंकड़े देने बंद कर दिए हैं और रोजाना नए मिलने वाले मामलों की ही जानकारी अपनी वेबसाइट पर दे रही है। 

कम टेस्ट के बावजूद ज्यादा ग्रोथ रेट
सबसे ज्यादा चिंता की बात यह है कि भारत और ब्राजील में अन्य तीन देशों के मुकाबले कोरोना टेस्ट की संख्या बेहद कम होने के बावजूद नए मामले मिलने की दर उनसे कहीं ज्यादा है। एक तरफ जहां रूस प्रति एक हजार की जनसंख्या पर 87.2 टेस्ट करा रहा है, वहीं भारत का आंकड़ा महज 3.4 टेस्ट का है। भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) के आंकड़ों के हिसाब से देश में इस समय करीब 1.3 लाख टेस्ट रोजाना कराए जा रहे हैं, जबकि रूस में यह आंकड़ा 3 लाख और अमेरिका में 5.1 लाख टेस्ट प्रतिदिन का है। विशेषज्ञ पहले ही कह चुके हैं कि भारत में रोजाना होने वाली टेस्टिंग की क्षमता बढ़ने पर नए मामले मिलने की गति और ज्यादा तेजी से बढ़ती दिखाई देगी। 

समाज कल्याण विभाग के कार्यालयों, स्कूल, हॉस्टलों की दीवारों पर बनेगी कुमांऊ की ऐंपण पेंटिंग

कुमांऊ की प्रसिद्ध ऐंपण कला को अब समाज कल्याण विभाग नशे के खिलाफ ढाल बनाएगा। इस कला के जरिए नशे के खिलाफ अभियान चलाया जाएगा। इसके लिए विभाग अपने कार्यालयों, स्कूल और हॉस्टलों की दीवारों पर ऐंपण पेंटिंग बनाने जा रहा है। बता दें कि केंद्र सरकार ने समाज कल्याण विभाग को नशा मुक्ति कार्यक्रम की जिम्मेदारी सौंपी है। जिला समाज कल्याण अधिकारी हेमलता पांडे ने कार्यक्रम की शुरुआत की है।

सर्वप्रथम इसकी शुरूआत देहरादून से की जाएगी, यहां सर्वे चौक स्थित जिला समाज कल्याण कार्यालय में ऐपण पेंटिंग कराने की योजना है। इसके बाद कंडोली स्थित विभाग के सरकारी हॉस्टल व भगत सिंह कॉलोनी स्थित राजकीय आश्रम पद्धति विद्यालय में होगी।

क्या है ऐपण लोक कला
ऐपण उत्तराखंड के कुमांऊ मंडल की प्रसिद्ध लोककला चित्रकला है, जो विश्व प्रसिद्ध है। कुमाऊं में दीपावली, देवी पूजन, लक्ष्मी पूजन, यज्ञ, हवन, जनेऊ संस्कार, छठ कर्म, शिवपूजन, विवाह, व्रत-त्योहार में घर की चौखट व दीवारों पर ऐपण लोक कला बनाने की परंपरा है। इसमें घर के आंगन से मंदिरों तक के मार्ग में ऐपण कला बनाई जाती है। इसमें सबसे पहले गेरू से पुताई करते हैं। इसके बाद उसके ऊपर बिस्वार (चावल के आटे का घोल बनाकर) से चित्र बनाए जाते हैं। इन चित्रों को शुभ माना जाता है।

प्रशिक्षित शिक्षकों के जरिए स्कूलों के अध्यापकों को आपदा प्रबंधन की ट्रेनिंग दी जाएः त्रिवेन्द्र

मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने शनिवार को आपदा प्रबंधन प्राधिकरण की बैठक ली। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि आपदा प्रबंधन की दृष्टिगत युवाओं को प्रशिक्षण दिया जाय। ग्राम सभा में भी समय-समय पर लोगों को प्रशिक्षित किया जाए। स्कूलों में आपदा प्रबंधन से संबंधित सप्ताह में एक क्लास की व्यवस्था हो। उत्तराखंड की भौगोलिक परिस्थितियों के दृष्टिगत लोगों को आपदा प्रबंधन के लिए जागरूक करना जरूरी है। आगजनी घटनाओं एवं वर्षाकाल के लिए लोगों को प्रशिक्षित करना जरूरी है। आपदा की चुनौतियों का सामना करने के लिए समय-समय पर मॉक ड्रिल भी कराई जाए।

मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र ने कहा कि आपदा प्रबंधन के लिए जो भी प्रशिक्षण दिए जा रहे हैं उनको और प्रभावी बनाने के लिए विशेषज्ञों की राय ली जाए जिन शिक्षकों को प्रशिक्षित किया गया है उनके माध्यम से सभी स्कूलों के अध्यापकों को भी ट्रेनिंग दी जाए आपदा प्रबंधन के दृष्टिगत संचार तंत्र को और अधिक मजबूत किया जाए।
मानसून के दृष्टिगत सभी तैयारियां पूरी कर ली जाय। आपदा की दृष्टि से संवेदनशील स्थानों का चिन्हीकरण किया जाय। आपदा रिस्पांस टाइम को कम से कम करने का प्रयास किया जाय। लोगों को कोविड 19 से बचाव के लिए विभिन्न माध्यमों से जागरूक किया जाय।

बैठक में उत्तराखंड राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण द्वारा बताया गया कि मौसम से संबंधित सटीक जानकारियों के लिए मुक्तेश्वर एवं सुरकंडा में डॉप्लर रडार लगाने का कार्य चल रहा है। इस वर्ष 12321 युवक मंगल दल एवं 10908 युवक-युवतियों को आपदा प्रबंधन का प्रशिक्षण दिया गया। संचार तंत्र को सुदृढ़ करने के लिए तहसील स्तर पर 184 सेटेलाइट फोन उपलब्ध कराए गए हैं। 2012 से अब तक 27 आपदा से संवेदनशील ग्रामों के 699 परिवारों का पुनर्वास किया गया है। गढ़वाल मंडल में 84 एवं कुमाऊं मंडल में 100 भूकंप पूर्व चेतावनी तंत्र उपकरण स्थापित किए गए हैं। गंगा नदी पर कोटेश्वर से लेकर ऋषिकेश तक 8 संवेदनशील स्थानों पर बाढ़ चेतावनी तंत्र स्थापित किए गए हैं।

राज्य एवं जिला स्तर पर कार्मिकों को इंसीडेंट रिस्पांस सिस्टम का प्रशिक्षण दिया गया है। राज्य आपदा मोचन निधि के तहत प्रदेश के सभी जनपदों को कुल 98 करोड़ रुपए, चिकित्सा शिक्षा निदेशालय को 20 करोड़ रुपए, लोक निर्माण विभाग को 30 करोड़ रुपए, पेयजल संस्थान को 20 करोड़ रुपए एवं चिकित्सा स्वास्थ्य परिवार कल्याण विभाग को 16 करोड़ रुपए की धनराशि दी गई है।

हवाई यात्रियों के लिए सरकार ने संस्थागत क्वारंटीन की जगह होम क्वारंटीन की दी मंजूरी

उत्तराखंड सरकार ने हवाई जहाज से सफर करने वाले यात्रियों के लिए कुछ राहत दी है। यदि 75 संवेदनशील शहरों में ऐसे यात्री नहीं आते हैं, तो उन्हें संस्थागत क्वारंटीन की जगह होम क्वारंटीन किया जाएगा। यानी यदि आप संवेदनशील शहरों से उत्तराखंड आ रहे हैं तो आपको संस्थागत क्वारंटीन किया जाएगा। संवेदनशील शहरों से आने वालों को भुगतान कर होटल या फिर सरकार के संस्थागत क्वांरटीन सेंटर में सात दिन के लिए क्वारंटीन रहना होगा।

आपदा प्रबंधन विभाग की ओर से जारी विज्ञप्ति के अनुसार अब घोषित 75 संवेदनशील शहर से नहीं आने वाले यात्री को 14 दिन होम क्वारंटीन में रहना होगा। अगर कोई यात्री कनेक्टिंग फ्लाइट से दिल्ली या किसी अन्य संवेदनशील शहर पर विमान बदलता है तो उसे भी होम क्वारंटीन रहना होगा।

प्रदेश सरकार ने देश के 75 शहरों को कोविड-19 के लिहाज से बेहद संवेदनशील मानते हुए सात दिन का अनिवार्य संस्थागत क्वारंटीन रहने के आदेश दिए हैं। सरकार ने इसमें संशोधन किया है अब गर्भवती महिलाओं, गंभीर रूप से बीमार, बुजुर्गों और परिवार में किसी की मृत्यु पर आने वाले लोगों को सात दिन का अनिवार्य संस्थागत क्वारंटीन नहीं होना होगा।

उत्तराखंड का औषधीय धनिया पौधा गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड में दर्ज

उत्तराखंड, अल्मोड़ा जनपद, ताड़ीखेत विकास खंड, बिल्लेख गांव के केवलानंद उप्रेती के सिविल इंजीनियर पुत्र गोपाल दत्त उप्रेती द्वारा व्यक्तिगत प्रयासो के बल अपने बिल्लेख गांव स्थित सेव बगान में सात फुट एक इंच ऊंचे सुगंधित व औषधीय धनिये के पौंधे जैविक विधि से उत्पादित कर, कृषि उघम के क्षेत्र मे नई वैश्विक क्रान्ति की अलख जगा, कृषि वैज्ञानिकों, काश्तकारों तथा उद्यम विकास मे संघर्षरत उद्यमियो का ध्यान अपना नाम गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड मे दर्ज करा, वैश्विक फलक पर ख्याति अर्जित की है। इससे पूर्व यह रिकॉर्ड छह फुट एक इंच का था।

जैविक विधि से उत्पादित उक्त धनिया पौंधों का वैज्ञानिक अध्ययन करने के लिए 21 अप्रैल को विवेकानंद पर्वतीय कृषि अनुसंधान संस्थान अल्मोड़ा के वैज्ञानिक डॉ गणेश चौधरी द्वारा उत्पादित पौंधों का निरीक्षण कर इसकी पुष्टि की गई थी। माह मई प्रथम सप्ताह मे इस उपलब्धि को लिम्का बुक ऑफ रिकॉड्स में दर्ज किया जा चुका था।

आईसीएआर वैज्ञानिक डॉ गणेश चौधरी व उत्तराखंड के चीफ हॉर्टिकल्चर आफिसर टीएन पांडे, उत्तराखंड आर्गेनिक बोर्ड रानीखेत-मजखाली इंचार्ज डॉ देवेन्द्र सिंह नेगी, उद्यान सचल दल केंद्र बिल्लेख प्रभारी राम सिंह नेगी के द्वारा उक्त सुगंधित व औषधीय गुणों से युक्त तथा पाचन तंत्र को मजबूत करने वाला अम्बेलीफेरी कुल के धनिया पौंधे को विटामिन श्एश्, श्सीश् तथा श्केश् गुणों के साथ-साथ कैल्शियम, कॉपर, आयरन, कार्बोहाइट्रेड, थियामिन, पोटेशियम, फास्फोरस से युक्त बताया गया था। वैज्ञानिकों के मुताबिक आमतौर पर धनिया पौंधों की ऊंचाई वैश्विक स्तर पर दो से छह फुट एक इंच तक देखी जाती रही। पहली बार उत्तराखंड मे सात फुट एक इंच धनिये पौंधे की अदभुत व आश्चर्य चकित कर देने वाली पैदावार कृषि वैज्ञानिकों द्वारा अवलोकित की गई थी।

कृषि वैज्ञानिकों द्वारा की गई प्रत्यक्ष पुष्टि के बाद, उत्पादित पौंधों के पुनर्वालोकन तथा डाक्यूमेंटेशन कराने हेतु गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड तथा लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड्स से जुड़े पदाधिकारियों को 23 अप्रैल को पत्र भेज आमंत्रित किया गया था।

24 मई को टिहरी के डीएम बने मंगेश घिल्डियाल बने प्रेरक

एक मल्टीनेशनल संस्थान की ओर से देशभर के बेहतर डीएम के सर्वे में टिहरी के जिलाधिकारी मंगेश घिल्डियाल को प्रेरक डीएम घोषित किया गया है। उत्तराखंड मूल के आईएएस अधिकारी घिल्डियाल ने कम समय मे अपनी एक अलग छाप छोड़ी है। 24 मई को ही उन्होंने टिहरी के डीएम का पदभार संभाला है।

2011 बैच के आईएएस ऑफिसर मंगेश घिल्डियाल मूल रूप से उत्तराखंड के ही पौड़ी जिले के निवासी हैं। पहले बागेश्वर और फिर 3 साल रुद्रप्रयाग के डीएम के रूप में उन्होंने खूब नाम कमाया है। केदारनाथ आपदा पुनर्निर्माण कार्य, जिले के स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार लाने के लिए उन्होंने बेहतर कार्य किया।

24 मई को टिहरी के डीएम बनते ही उन्होंने सबसे पहले मुनिकीरेती में प्रवासियों को कुआरन्टाइन करने का निर्णय लिया, जिस कारण जिले में रेड जोन से आने वालों को गांव में प्रवेश नही करने दिया। उनके इस निर्णय की तारीफ हो रही है। एक संस्थान ने देशभर के बेस्ट डीएम का सर्वे किया जिसमें उन्हे प्रेरक डीएम का खिताब मिला है। सम्पर्क करने पर उन्होंने खुशी जताते हुए कहा कि लोगों को सुलभ प्रशासनिक सुविधा देने और सरकार योजनाओं का लाभ देना उनका लक्ष्य है। बता दें कि घिल्डियाल का फेसबुक पेज आइएएस मंगेश घिल्डियाल फैन क्लब भी बहुत पॉपुलर है।

टिकटॉक को आ गया बाय-बाय करने का समय, स्वदेशी एप मित्रों हो रहा पॉपुलर

भारत में टिकटॉक का बाय-बाय करने का वक्त आ गया है। भारत के युवाओं की जुबां पर अब टिकटॉक नहीं बल्कि स्वदेशी निर्मित एप मित्रों का नाम है। अभी तक इस एप को 50 लाख से ज्यादा युवा गूगल प्ले स्टोर से डाउनलोड कर चुके है। इसे आईआईटी रूड़की के पूर्व छात्रों ने बनाया है। इसे टिकटॉक का क्लोन भी कहा जा रहा है।

आईआईटी के पूर्व छात्रों का कहना है कि एप लांच करते समय हमें ऐसे ट्रैफिक की उम्मीद नहीं थी। इसे बनाने के पीछे लोगों को सिर्फ भारतीय विकल्प देना था। आईआईटी रुड़की में वर्ष 2011 में कंप्यूटर साइंस इंजीनियरिंग ब्रांच से पासआउट छात्र शिवांक अग्रवाल ने अपने चार साथियों के साथ मित्रों एप बनाया है।

11 अप्रैल को हुआ था मित्रों एप लांच
पेटीएम के पूर्व सीनियर वाइस प्रेजिडेंट दीपक के ट्वीट के बाद इसकी चर्चा हर किसी की जुबान पर है। अचानक बड़ी संख्या में लोगों के एप डाउनलोड करने से नेटवर्क ट्रैफिक भी प्रभावित होने लगा। टीम मेंबर ने बताया कि वास्तव में 11 अप्रैल को एप लांच करते समय यह नहीं सोचा था कि इसे इतनी सफलता मिलेगी। टिकटॉक को पीछे छोड़ना जैसी कोई बात नहीं है। हमारा उद्देश्य लोगों को सिर्फ एक भारतीय विकल्प देना था। लोग इसका इस्तेमाल करना चाहेंगे या नहीं यह हमारे हाथ में नहीं है, लेकिन हमें लोगों से जो आशीर्वाद मिला, उससे हम बहुत खुश हैं। उन्होंने बताया कि हमें किसी ने फंड नहीं दिया है, उनका फंड लोगों का प्यार ही है।

मित्रों स्वदेशी नाम, इसलिए देना उचित
टीम मेंबर ने बताया कि मित्रों का अर्थ मित्र ही है। एक तो यह भारतीय उपभोक्ताओं को भारतीय मंच के जरिए सेवा देने के लिए है। हम स्वदेशी नाम देकर भारतीय नामों के खिलाफ पूर्वाग्रहों को भी दूर करना चाहते हैं।

सरकार हर परिस्थिति से लड़ने और निपटने को है सक्षम

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने जनपद भ्रमण के दौरान राधास्वामी सत्संग व्यास स्टेजिग एरिया में क्वारंटीन सेंटर का निरीक्षण किया। इसके बाद जिला चिकित्सालय मे रामसुमेर शुक्ल मेडिकल कालेज के 300 बेडों के चिकित्सालय का निरीक्षण एवं चिकित्सालय मे व्यवस्थाओं का जानकारी ली। मुख्यमंत्री ने एपीजे अब्दुल कलाम सभागार मे कोविड-19 राहत कार्यो एवं बचाव मे लगे सम्बन्धित अधिकारियों की समीक्षा बैठक की।

सीएम ने कहा कि उत्तराखण्ड में विभिन्न प्रांतों से आ रहे प्रवासियों से कोरोना पॉजिटिव केस बढ़ रहे है ऐसे मे सभी लोगों को एहतियात बरतने की आवश्यकता है। उन्होने कहा कि विभिन्न प्रान्तो़ से उत्तराखण्ड के लोगों को लाने का निर्णय सरकार द्वारा लिया गया है। सरकार को पहले से ही अनुमान था कि बाहर से लोगों को लाने पर कोरोना केस बढेंगे इसलिए सरकार पहले से ही तैयारियों में जुटी है। उन्होने कहा कि सरकार हर परिस्थिति से लडने व निपटने के लिए तैयार व सक्षम है।

क्वारंटीन व्यक्ति नियमों का पालन न करें, तो सख्ती से निपटें
मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र ने कहा कि क्वारंटीन किये गये व्यक्ति यदि क्वारंटीन के नियमों का पालन नहीं करते हैं, तो उनसे सख्ती से पालन करवाया जाए। संक्रमण का दौर है सभी जनता अपनी जिम्मेदारियों को समझे व इस लडाई मे सहयोग करें।

सांसद ने प्रवासियों से की अपील
सांसद अजय भटट ने प्रवासियों से अपील की है कि वे क्वारंटीन के नियमों का अनिवार्य रूप से पालन करें। उन्होने जिला प्रशासन, स्वास्थ्य विभाग, पुलिस विभाग व अन्य विभागीय अधिकारियों, कर्मचारियों द्वारा इस आपदा दौर मे किये जा रहे कार्यो की सराहना की। उन्होने कहा कि सरकार की पहली प्राथमिकता प्रत्येक आम नागरिक को बचाने की है।

धनिष्ठा नक्षत्र में सुबह साढ़े चार बजे खुले बदरीनाथ धाम के कपाट

शुक्रवार सुबह विधि-विधान से पूजा अर्चना के बाद सुबह 4.30 बजे धनिष्ठा नक्षत्र में बदरीनाथ धाम के कपाट खोले गए। कपाटोद्घाटन मे मुख्य पुजारी रावल, धर्माधिकारी भूवन चन्द्र उनियाल, राजगुरु, हकहकूकधारियो सहित केवल 11 लोग ही शामिल हुए।

भगवान बदरी विशाल के गर्भ गृह के द्वार खुलते ही सबसे पहले बदरीनाथ के रावल ईश्वरी प्रसाद नम्बूदरी ने गर्भ गृह में सबसे पहले प्रवेश किया। शीतकाल में जिस ऊनी घृत कम्बल को भगवान ओढ़ाया गया था उसे रावल जी ने श्रद्धा पूर्वक निकाला। इसके बाद रावल ने पवित्र जलों से भगवान का स्नान करवाया और भव्य अभिषेक किया। इस दौराना सभा मंडप में धर्माधिकारी और अपर धर्माधिकारी वेद पाठी मंत्रोच्चार करते रहे।

मंदिर परिसर को किया सैनिटाइज
कपाट खोलने से पहले बदरीनाथ सिंह द्वार, मंदिर परिसर, परिक्रमा स्थल, तप्त कुंड के साथ ही विभिन्न स्थानों को सैनिटाइज किया गया। योग ध्यान बदरी मंदिर पांडुकेश्वर में कुबेर जी, उद्धव जी और गरुड़ जी की विशेष पूजाएं हुईं। हक-हकूकधारियों ने सामाजिक दूरी का पालन करते हुए भगवान श्री बदरीनाथ की पूजा अर्चना की और पुष्प अर्पित किए। 

ऋषिकेश पुष्प सेवा समिति ने सजाया बदरीनाथ मंदिर
बदरीनाथ धाम को 10 क्विंटल गेंदे के फूलों से सजाया गया है। पुष्प सेवा समिति ऋषिकेश की ओर से मंदिर को सजाया गया। देवस्थानम बोर्ड के मीडिया प्रभारी डॉ. हरीश गौड़ ने बताया कि पुष्प सेवा समिति ऋषिकेश की ओर से मंदिर को सजाया गया है।

वन नेशन वन राशन कार्ड इसी अगस्त से लागूः सीएम

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने आत्मनिर्भर भारत पैकेज में आज केंद्रीय वित मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा की गई घोषणाओं को छोटे किसानों, गरीबों, प्रवासी मजदूरों, स्ट्रीट वेंडरों के लिए समर्पित बताते हुए स्वागत किया है। उन्होंने कहा कि इससे गरीब किसानों और मजदूरों को लाभ मिलेगा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि आज की गई घोषणाओं से समूचे देश के साथ उत्तराखण्ड को भी लाभ मिलेगा। हमें घर लौटने वाले प्रवासी भाइयों, किसानों और मजदूरों को राहत देने में काफी मदद मिलेगी। प्रवासी मजदूरों को फ्री राशन, सस्ते किराए पर मकान की योजना, स्ट्रीट वेंडरों के लिए ऋण की योजना, किसान क्रेडिट कार्ड के विशेष अभियान, इन सभी उपायों से निश्चित तौर पर उत्तराखण्ड के लोगों को बहुत फायदा होगा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि वन नेशन वन कार्ड प्रवासियों के लिए काफी लाभकारी होगी। वन नेशन वन राशन कार्ड अगस्त से लागू किया जाएगा। प्रवासी राशन कार्ड से किसी भी राज्य की किसी भी दुकान से खाद्य सामग्री ले सकेंगे। प्रवासी मजदूरों के लिए फ्री राशन की सुविधा उपलब्ध करवाने के लिए 3500 करोड़ रुपए का प्रावधान किया जा रहा है। जिनके पास राशन कार्ड नहीं है, उन्हें दो माह तक प्रति व्यक्ति 5 किलो गेहूं या चावल और एक किलो चना प्रति परिवार दिया जाएगा। प्रवासी मजदूरों और शहरी गरीबों को सस्ते किराए पर मकान दिलवाने की योजना को प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत शुरू किया जा रहा है।

स्ट्रीट वेंडरों के लिए 5000 करोड़ रुपए की स्पेशल क्रेडिट सुविधा की योजना एक महीने में योजना लागू की जाएगी। इससे 50 लाख स्ट्रीट वेंडर को फायदा होगा। मिडिल इनकम ग्रुप जिनकी सालाना आय 6 लाख से 18 लाख तक है। उनके लिए अफोर्डेबल हाउसिंग के तहत क्रेडिट लिंक सब्सिडी स्कीम मार्च 2021 तक बढ़ाई जा रही है। इससे 2.5 लाख लोगों को फायदा होगा।
किसान क्रेडिट कार्ड का विशेष अभियान चलाकर 2 करोड़ 50 लाख किसानों के लिए कुल 2 लाख करोड़ रूपए की कन्सेशनल क्रेडिट उपलब्ध कराया जाएगा। फसल ऋण पर इंटरेस्ट सबवेंशन को 31 मई तक बढ़ाने से तीन करोड किसानों को फायदा होगा। 25 हजार करोड़ रूपए की लोन लिमिट के साथ कुल 25 लाख नए किसान क्रेडिट कार्ड स्वीकृत किए गए हैं।

किसानों और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को लिक्विडिटी सपोर्ट के लिए केंद्र सरकार ने कई कदम उठाए हैं। मार्च से फसल की खरीद के लिए राज्यों को दी जाने वाली वित्तीय मदद 6700 करोड़ रुपए केंद्र सरकार ने बढ़ाई है। ग्रामीण इलाकों में इन्फ्रास्ट्रक्चर के विकास के लिए 4200 करोड़ रुपए दिए गए हैं। अपने गृह राज्यों में लौटे प्रवासी मजदूरों को काम दिया गया है। उन्हें रजिस्टर किया जा रहा है। इन्हें मनरेगा का सपोर्ट भी दिया जा रहा है। राज्यों को सलाह दी गई है कि घर लौटे प्रवासी मजदूरों को मनरेगा से काम दिया जाए। मनरेगा के काम मानसून में भी जारी रखे जाएंगे। मजदूरों को समय पर पैसा मिले, गरीब से गरीब मजदूर को भी न्यूनतम वेतन मिले और क्षेत्रीय असामनता दूर हो इसके लिए कानून बनाया जाएगा।