हमारे प्राचीन गुरुकुलों में भी संवाद और चर्चा को शिक्षा का आधार माना गयाः सीएम

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने दून विश्वविद्यालय, देहरादून में आयोजित गंग धारा-विचारों का अविरल प्रवाह कार्यक्रम में प्रतिभाग किया। इस अवसर पर उन्होंने पहाड़ी उत्पादों पर आधारित स्टालों का अवलोकन किया।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कार्यक्रम हेतु आयोजकों को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि इस प्रकार के आयोजन हमारी संस्कृति और परंपराओं को पोषित करने के साथ समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाते हैं। जिस प्रकार गंगा का प्रवाह अविरल है, उसी प्रकार हमारे विचारों का प्रवाह भी गतिमान रहता है। विचारों का प्रवाह हमें जीवन में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करता है। उन्होंने कहा विचारों का आदान-प्रदान सदैव हमारी परंपरा का हिस्सा रहा है। हमारे प्राचीन गुरुकुलों में भी संवाद और चर्चा को शिक्षा का आधार माना गया है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि इस कार्यक्रम में भारतीय संस्कृति पर हमें श्रद्धेय स्वामी अवधेशानंद गिरि जी महाराज का मार्गदर्शन प्राप्त होगा। इस दो दिवसीय व्याख्यान श्रृंखला के दौरान पलायन, शिक्षा, संस्कृति, पर्यावरण जैसे विषयों के साथ हिमालयी क्षेत्रों की धारण क्षमता पर भी विचार-विमर्श किया जाएगा। सभी विषय हमारे राज्य के साथ समस्त हिमालयी क्षेत्र के कल्याण के लिए महत्वपूर्ण हैं। मुख्यमंत्री ने कहा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत समृद्ध सांस्कृतिक परंपराओं के संरक्षण और संवर्धन की दिशा में कार्य कर रहा है। लोकल फॉर वोकल, मेक इन इंडिया, मेड इन इंडिया और स्टार्टअप इंडिया के माध्यम से आत्मनिर्भर भारत के सपने को साकार किया जा रहा है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में राज्य सरकार, राज्य में सांस्कृतिक परंपराओं को बढ़ावा देने, एवं समग्र विकास के लिए पूर्ण प्रतिबद्धता से कार्य कर रही है। राज्य सरकार दून विश्वविद्यालय में सेंटर फॉर हिंदू स्टडीज की स्थापना करने जा रही है। जहाँ हिंदू सभ्यता, दर्शन, इतिहास और सिद्धांतों पर गहन अध्ययन और शोध कार्य किया जाएगा। इकॉनमी और इकोलॉजी के समन्वय के साथ राज्य के सर्वांगीण विकास को आगे बढ़ाया जा रहा है। उत्तराखंड एकमात्र राज्य है जहां जीडीपी के साथ जीईपी को भी मापने का प्रयास किया गया है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि नीति आयोग द्वारा जारी सतत विकास के लक्ष्यों की सूची में उत्तराखंड देश में प्रथम स्थान पर रहा। राज्य सरकार स्टेट मिलेट मिशन, एप्पल मिशन, नई पर्यटन नीति, नई फिल्म नीति, जैसी अनेकों योजनाओं के माध्यम से स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती प्रदान कर रही है। मुख्यमंत्री ने कहा उत्तराखंड सरकार ने देश में सबसे पहले समान नागरिक संहिता पर कार्य किया। जिसे जनवरी 2025 तक लागू कर दिया जाएगा। समान नागरिक संहिता के कई प्रावधानों का सरलीकरण किया जा रहा है। इसे समझने हेतु एप्लीकेशन भी तैयार किया जा रहा है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार ने अतिक्रमण के खिलाफ कार्यवाही तेज की है। सख्त धर्मांतरण कानून, दंगा रोधी कानून एवं नकल विरोधी कानून भी लागू किया गया है। मुख्यमंत्री ने कहा सरकार ने जो भी कार्रवाई की है, वो किसी धर्म या समुदाय विशेष के खिलाफ नहीं, बल्कि प्रदेश की सांस्कृतिक एकता और सामाजिक सद्भाव को बनाए रखने के उद्देश्य से की है।

इस अवसर पर आचार्य महामंडलेश्वर जूना अखाड़ा स्वामी अवधेशानंद गिरी जी महाराज, पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत, विधायक विनोद चमोली, कुलपति दून विश्वविधालय डॉ. सुरेखा डंगवाल, एंव अन्य लोग मौजूद रहे।

उत्तराखण्ड प्राचीन काल से रही है आयुर्वेद व प्रज्ञा की भूमिः सीएम

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने उत्तराखण्ड को योग एवं आयुष की भूमि बताते हुए देहरादून में आयोजित होने वाली 10वीं विश्व आयुर्वेद कांग्रेस को आयुर्वेद के क्षेत्र में राज्य को नई पहचान दिलाने वाला प्रयास बताया है। उन्होंने कहा कि इस माह 12 से 15 दिसम्बर तक आयोजित होने वाले इस वैश्विक आयोजन में होने वाले चिंतन, मंथन एवं विचार विमर्श से निकलने वाला अमृत आयुर्वेद के क्षेत्र में भारत को ही नहीं विश्व को जगाने का कार्य करेगा। उन्होंने कहा कि कोरोना महामारी के दौर में आयुर्वेद एवं आयुष का प्रभाव लोगों ने देखा है। सोमवार को मीडिया सेन्टर सचिवालय में 10वें विश्व आयुर्वेद कांग्रेस के कर्टेन रेजर एवं प्रोग्राम गाइड का विमोचन करते हुए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि यह आयोजन सर्वे सन्तु निरामयः का संदेश भी घर घर तक पहुंचाने में मददगार होगा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखण्ड प्राचीन काल से आयुर्वेद व प्रज्ञा की भूमि रही है। हमारे ऋषि मुनियों एवं मनीषियों ने इस दिशा में व्यापक शोध कर हमें यह विधा प्रदान की है। हमारे राज्य की जलवायु औषधीय पादपों के सर्वथा अनुकूल है। आयुर्वेद का विषय राज्य के साथ हिमालय व वनों का भी है। हमारा राज्य हर क्षेत्र में अग्रणी बनें आगे बढ़े इस दिशा में हम प्रयासरत है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने राज्य स्थापना दिवस के अवसर पर अपने संदेश में कहा था कि उत्तराखण्ड में विकास का यज्ञ चल रहा है। प्रधानमंत्री का मार्गदर्शन राज्य के विकास के प्रति हमें सतत प्रयत्नशील रहने की प्रेरणा देता है। मुख्यमंत्री ने कहा कि हमने राज्य हित में अनेक निर्णय लिये है। राज्य में कठोर नकल विरोधी कानून बनाया गया है, समान नागरिक संहिता लागू करने की दिशा में प्रयास जारी है। राज्य के समग्र विकास में हमारे प्रयासों को नीति आयोग द्वारा भी सराहा गया है। इसी का परिणाम है कि सतत विकास लक्ष्यों की प्राप्ति में राज्य को प्रथम स्थान प्राप्त हुआ है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड अपनी प्राकृतिक संपदा, औषधीय पौधों और शांत हिमालयीय वातावरण के लिए दुनिया भर में प्रसिद्ध है। इस वैश्विक आयुर्वेद कांग्रेस में 58 देशों से 300 से अधिक अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधि प्रतिभाग कर रहे हैं। जबकि देश भर के 6500 प्रतिनिधियों और 2 लाख आगंतुकों के साथ यह आयोजन ज्ञान और सहयोग का अद्वितीय मंच बनेगा। उत्तराखण्ड का पवेलियन-प्रदेश के 8 विभागों आयुर्वेदिक, होम्योपैथी, स्वास्थ्य, कौशल विकास, पर्यटन, उद्योग, उद्यान, ग्राम्य विकास के स्टॉल समेकित रूप से उत्तराखण्ड को आयुर्वेद और वेलनेस पर्यटन के प्रमुख केन्द्र के रूप में बढ़ावा देने में सहायक होंगे। यह आयुर्वेद के फायदों और आधुनिक तकनीक के साथ इसके एकीकरण के प्रति जागरूकता फैलायेगा तथा आयुर्वेद के क्षेत्र में ज्ञान साझा करने, शोध सहयोग और व्यापार के अवसरों को बढ़ावा देगा। उत्तराखण्ड और भारत में आयुष क्षेत्र के विकास और प्रगति में योगदान देने में भी यह आयोजन मददगार रहेगा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में आयुष नीति के माध्यम से आयुष निर्माण, वेलनेस, शिक्षा, कृषि सेक्टर को गति प्रदान की जा रही है। देश की प्रथम योग नीति निर्माण का कार्य भी प्रगति पर है। जबकि राज्य में 03 नये 50 शैय्या युक्त आयुष चिकित्सालयों का निर्माण कार्य टिहरी /कोटद्वार/टनकपुर में किया जा रहा है। राज्य में आयुष आधारित 300 आयुष्मान आरोग्य मंदिरों की स्थापना पूर्ण की जा चुकी है। सभी आयुष अस्पतालों में टेलीमेडिसिन/पंचकर्म/ मर्म चिकित्सा इत्यादि सुविधाएं प्रदान की जा रही हैं। राज्य के 150 से अधिक आयुष चिकित्सालय छ।ठभ् ।बबतमकपजंजपवद प्राप्त कर चुके है।
इस अवसर पर मुख्य सचिव राधा रतूडी, सचिव रविनाथ रमन ने भी अपने विचार रखे। 10वें विश्व आयुर्वेद कांग्रेस के ट्रस्टी श्री रजनीश पौराणिक द्वारा कार्यक्रम की विस्तृत जानकारी प्रदान की गई। कार्यक्रम का संचालन निदेशक आयुष विजय जोगदंडे ने किया।

होमगार्ड्स विभाग के राजपत्रित एवं अराजपत्रित अधिकारियों एवं कर्मचारियों को प्रत्येक 3 वर्ष में दिये जाने वाला वर्दी भत्ता होगा प्रतिवर्ष

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने ननूरखेड़ा, देहरादून में होमगार्ड्स स्थापना दिवस पर आयोजित कार्यक्रम में रैतिक परेड का निरीक्षण किया। मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर होमगार्ड्स जवानों के मेधावी बच्चों को छात्रवृत्ति की धनराशि के चेक भी प्रदान किये। होमगार्ड्स एवं नागरिक सुरक्षा विभाग की स्मारिका 2024 और विभागीय कलेण्डर 2025 का भी मुख्यमंत्री ने किया विमोचन। इस अवसर पर उन्होंने घोषणा की कि 9 हजार फीट से अधिक ऊंचाई पर ड्यूटीरत होमगार्ड्स स्वयंसेवकों को पुलिस कार्मिकों एवं एस०डी०आर०एफ० की भांति प्रति जवान को 200 रू. प्रतिदिन अतिरिक्त प्रोत्साहन राशि दी जायेगी। एस०डी०आर०एफ० जवानों के साथ प्रशिक्षित होमगार्ड्स को तैनाती होने पर 100 रुपए प्रति जवान को प्रतिदिन प्रोत्साहन राशि अनुमन्य की जाएगी। होमगार्ड्स विभाग के राजपत्रित एवं अराजपत्रित अधिकारियों एवं कर्मचारियों को प्रत्येक 3 वर्ष में दिये जाने वाले वर्दी भत्ता को प्रतिवर्ष किया जाएगा। 60 वर्ष की अधिवर्षता आयु पूर्ण करने वाले प्रत्येक होमगार्ड्स को होमगार्ड्स कल्याण कोष से दी जाने वाली अनुग्रह राशि में 50 हजार रुपए की बढ़ोत्तरी की जाएगी।

मुख्यमंत्री ने सभी जवानों को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि राष्ट्र सेवा का अद्वितीय उदाहरण अगर कहीं स्पष्ट देखने को मिलता है तो वह जवानों के मध्य आकर देखने को मिलता है। होमगार्ड्स संगठन राज्य में सामाजिक सुरक्षा और व्यवस्था नियंत्रण के लिए सक्रिय रूप से काम करता है। हर स्थिति में अपने दायित्वों को पूरा करने के लिए तत्पर रहते हैं। होमगार्ड्स जवान कानून – व्यवस्था को बनाए रखने, यातायात नियंत्रित करने, चारधाम यात्रा, कुम्भ मेला एवं कांवड़ यात्रा जैसे धार्मिक आयोजनों में भी अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। प्राकृतिक आपदाओं के समय भी आवश्यकता पड़ने पर हमेशा तैयार रहते हैं। हमारे ये जवान “जहां कम वहां हम“ की भावना से कार्य करते हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारे इन जवानों के हौसले और समर्पण को सम्मान देते हुए राज्य सरकार ने उनके कल्याण और संगठन के उत्थान के लिए अनेक निर्णय लिए हैं। प्रेमनगर, देहरादून में एक अत्याधुनिक इंडोर फायरिंग रेंज का निर्माण किया जा रहा है, जो हमारे होमगार्ड्स को शस्त्र प्रशिक्षण में लाभ पहुंचाएगी। होमगार्ड्स के लिए सेना के जवानों की तर्ज पर सीएसडी कैंटीन की सुविधा भी प्रारंभ की है। होमगार्ड्स जवानों को 12 आकस्मिक अवकाश देने का निर्णय भी हमारी सरकार द्वारा ही लिया गया है। महिला होमगार्ड्स को प्रसूति अवकाश प्रदान करने का ऐतिहासिक निर्णय भी हमारी सरकार ने ही लिया। प्रदेश के 9 स्थानों पर कंपनी कार्यालय-ट्रांजिट कैंप और इमरजेंसी सर्च एवं रेस्क्यू सेंटर स्थापित करने की योजना बनाई गई है। 13 करोड़ से अधिक की वित्तीय स्वीकृति से इन केंद्रों का निर्माण हो रहा है, ये केंद्र उत्तराखंड को आपदा प्रबंधन के क्षेत्र में मजबूत करेंगे।

इस अवसर पर विधायक उमेश शर्मा काऊ, खजान दास, पूर्व मेयर सुनील उनियाल गामा, अनिता ममगाईं, सचिव शैलेश बगोली, डीजीपी दीपम सेठ, कमांडेंट जनरल होमगार्ड पी.वी.के. प्रसाद, मुख्य राज्य सूचना आयुक्त विवेक शर्मा एवं अन्य अधिकारी उपस्थित थे।

वर्ल्ड आयुर्वेद कांग्रेस एवं आरोग्य एक्सपो में 12 तरह की ओपीडी, तैनात रहेंगे विशेषज्ञ चिकित्सक

आयुर्वेद के परंपरागत ज्ञान को समझने-जानने के अलावा इसके उपचार की सुविधा भी एक ही जगह पर मिले, तो इससे बेहतर और क्या हो सकता है। वर्ल्ड आयुर्वेद कांग्रेस एवं आरोग्य एक्सपो-2024 में ऐसा ही मौका उपलब्ध हो रहा है। विश्व स्तरीय इस कार्यक्रम में विषय विशेषज्ञ आयुर्वेद के हर एक पहलू पर बात करेंगे, तो विशेषज्ञ चिकित्सक डेलीगेट्स के साथ ही सामान्य लोगों को भी इसका उपचार उपलब्ध कराएंगे। इसके लिए 12 तरह की ओपीडी पूरे समय एक्टिव रहेंगी। हर एक ओपीडी में दो-दो विशेषज्ञ चिकित्सक तैनात रहेंगे, जिनसे परामर्श भी मिलेगा और उपचार भी।

परेड ग्राउंड देहरादून में यह कार्यक्रम 12 दिसंबर से शुरू होने जा रहा है, जो कि 15 दिसंबर तक चलेगा। आयुर्वेद का विश्व स्तरीय यह कार्यक्रम पहली बार उत्तराखंड में हो रहा है। वर्ष 2002 से इस तरह के कार्यक्रम की शुरुआत हुई है। पिछले वर्ष गोवा को इस कार्यक्रम की मेजबानी मिली थी। उत्तराखंड इस आयोजन के लिए उत्साहित है और तैयारियों पर पूरा जोर है। वैसे भी, आयुर्वेद के लिहाज से उत्तराखंड की समृद्ध विरासत रही है। इसलिए यहां से इस कार्यक्रम के संदेश देश-दुनिया में प्रभावी ढंग से जाने तय माने जा रहे है।

अपर सचिव आयुष डॉ विजय कुमार जोगदंडे के अनुसार कार्यक्रम स्थल पर 12 ओपीडी सक्रिय रहेंगी। इसके लिए तैयारियां चल रही हैं। हर ओपीडी में दो-दो विशेषज्ञ चिकित्सकों की ड्यूटी लगाई जा रही है। मकसद ये ही है कि कार्यक्रम का हिस्सा बनने वालों को आयुर्वेद का ज्ञान भी मिले, साथ ही उनके रोगों का निदान भी परंपरागत चिकित्सा से संभव हो पाए।

ये होंगी ओपीडी, जहां मिलेगा परामर्श और उपचार

1-मर्म चिकित्सा (अस्थि संधि एव मर्म आघात चिकित्सा हेतु)
2-नाड़ी परीक्षा
3-क्षार सूत्र, अग्निकर्म एवं रक्तमोक्षण
4-नेत्र, शिरो, नासा एवं कर्ण रोग चिकित्सा
5-पंचकर्म चिकित्सा
6-स्त्री एवं प्रसूति रोग चिकित्सा
7-बाल रोग चिकित्सा
8-वृद्धजन रोग एवं मानस रोग चिकित्सा
9-स्वस्थवृत्त एवं अष्टांग योग चिकित्सा
10-किचन फार्मेसी एवं अरोमा थेरेपी
11-प्राकृतिक चिकित्सा
12-होम्योपैथी चिकित्सा
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विश्व आयुर्वेद कांग्रेस और आरोग्य एक्सपो-2024 परंपरागत आयुर्वेद चिकित्सा को समझने और जानने के लिए एक बेहतरीन अवसर है। देवभूमि में आयुर्वेद के विभिन्न पहलुओं पर विचार मंथन निश्चित तौर पर सभी के लिए उपयोगी साबित होगा। इसके अलावा, निशुल्क स्वास्थ्य शिविर में विशेषज्ञ डॉक्टरों के अनुभव का लाभ भी लोगों को मिलेगा।
– पुष्कर सिंह धामी, मुख्यमंत्री 

अंतर्राष्ट्रीय प्रवासी उत्तराखंडी सम्मेलन के आयोजन की जिम्मेदारी को एक सप्ताह में एक्शन प्लान तय करने के निर्देश

सीएस राधा रतूड़ी ने 12 जनवरी 2025 को देहरादून में प्रस्तावित अन्तर्राष्ट्रीय प्रवासी उत्तराखण्डी सम्मेलन के आयोजन के दौरान विभिन्न सत्रों की जिम्मेदारी सम्बन्धित सचिवों को देते हुए एक सप्ताह में कार्ययोजना तय करने के निर्देश दिए हैं। मुख्य सचिव ने अन्तर्राष्ट्रीय प्रवासी उत्तराखण्डी सम्मेलन के दौरान आयोजित होने वाले सत्रों में राज्य में विभिन्न क्षेत्रों जैसे मैन्युफेक्चरिंग, पावर जनरेशन, स्टार्ट-अप आदि में निवेश के सम्भावनाओं पर चर्चा करवाने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने विशेषकर पर्यटन, कृषि, बागवानी, ग्राम्य विकास, उच्च शिक्षा, स्किल डेवलपमेण्ट, हेल्थ केयर, आयुष, योगा आदि पर विचार मंथन करवाने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने इन सत्रों में विषय विशेषज्ञों एवं अधिकारियों के साथ ही अतिथि प्रवासियों को भी वक्ताओं के रूप में शामिल करने के निर्देश दिए हैं।

सचिवालय में आयोजित बैठक में मुख्य सचिव राधा रतूड़ी ने प्रस्तावित अन्तर्राष्ट्रीय प्रवासी उत्तराखण्डी सम्मेलन के आयोजन के दौरान राज्य की लोक संस्कृति, खानपान, स्थानीय हस्तशिल्प, उत्पादों के बेहतरीन प्रदर्शन के निर्देश दिए हैं। मुख्य सचिव ने सम्मेलन के दौरान आयोजित किए जाने वाले प्रत्येक सत्र हेतु सम्बन्धित विभाग के सचिव को नोडल अधिकारी बनाने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने जिलाधिकारी एवं वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक देहरादून को सम्मेलन के आयोजन के दौरान शहर एवं आयोजन स्थल की स्वच्छता, पार्किंग व्यवस्था, विदेश से आने वाले प्रवासी अतिथियों के स्वागत-सत्कार हेतु सम्पर्क अधिकारियों, परिवहन, प्रोटोकॉल, रहने, ट्रैफिक की पुख्ता व्यवस्था हेतु निर्देश दिए हैं।

बैठक में अपर मुख्य सचिव आनंद बर्धन, प्रमुख सचिव आर के सुधांशु, सचिव मीनाक्षी सुन्दरम, सचिन कुर्वे, विनोद कुमार सुमन सहित सभी विभागों के सचिव, अपर सचिव एवं सम्बन्धित विभागों के अधिकारी मौजूद रहे।

उत्तराखंड आवास विकास परिषद 15 आवासीय परियोजनाओं पर कर रहा है काम

सर के ऊपर पक्की छत का सपना, हर कोई देखता है। पर जमीन से लेकर निर्माण की लागत के कारण लाखों लोग इस सपने को पूरा करने से वंचित रह जाते हैं। उत्तराखंड आवास विकास परिषद और एमडीडीए इसी क्रम में निर्बल आय वर्ग वाले परिवारों के लिए करीब 16 हजार किफायती घरों का निर्माण कर रहे हैं।

उत्तराखंड आवास विकास परिषद राज्य बनने के बाद पहली बार अपनी आवासीय परियोजनाओं पर काम कर रहा है। परिषद 15 परियोजनाएं निजी निवेशकों के साथ तैयार कर रहा है, जिसमें कुल 12,856 आवास शामिल हैं। जबकि शेष पांच संबंधित विकास प्राधिकरणों द्वारा विकसित की जा रही हैं, प्राधिकरणों के जरिए कुल 3104 आवास तैयार किये जा रहे हैं। अपर आयुक्त आवास पीसी दुम्का के मुताबिक अब तक निजी भागीदारी के साथ 1760 घर बनाते हुए लाभार्थियों को सौंपे जा चुके हैं, जबकि 14635 आवासों का आबंटन भी किया जा चुका है। शेष सभी परियोजनाओं को मार्च 2025 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।

लाभार्थी को ढाई लाख में मिलता है घर
योजना के तहत निजी निवेशक छह लाख रुपए की लागत से दो कमरे, किचन और शौचालय जैसी सुविधाओं से युक्त घर तैयार करता है, जिसमें से उन्हें केद्र और राज्य सरकार की विभिन्न योजनाओं से साढ़े तीन लाख रुपए मिलते हैं, इस तरह लाभार्थी को महज ढाई लाख रुपए की लागत में आसान होम लोन के जरिए घर मिल जाता है। इसमें जमीन सहित निर्माण का समस्त खर्च निजी निवेशक द्वारा उठाया जाता है। योजना के तहत तीन लाख रुपए से कम सालाना आय वर्ग वाले आवासहीन परिवार पात्र होते हैं। साथ ही पात्र परिवार का 15 जून 2015 से पहले उत्तराखंड का निवासी होना भी जरूरी है।

एमडीडीए की तीन परियोजनाएं
योजना के तहत मसूरी देहरादून विकास प्राधिकरण (एमडीडीए) ट्रांसपोर्ट नगर में 224, तरला आमवाला में 240 फ्लैट वाली परियोजनाएं पूरी हो चुकी हैं, जबकि धौलास में 240 फ्लैट मार्च 2025 तक तैयार हो जाएंगे। एमडीडीए उपाध्यक्ष बंशीधर तिवारी के मुताबिक परियोजना के लिए लाभार्थियों का चयन पारदर्शिता के साथ किया गया है। तय समय में सभी को फ्लैट की चाबी सौंप दी जाएगी।
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी ने अंत्योदय के लक्ष्य को केंद्रित करते हुए, पीएम आवास योजना लागू की है। इसके तहत आवासहीन परिवारों को पक्का घर बनाकर दिया जा रहा है। उत्तराखंड में आवास विकास प्राधिकरण ने इस लक्ष्य को प्राप्त करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

पुष्कर सिंह धामी, मुख्यमंत्री

देहरादून में 12 से 15 दिसंबर के बीच होगा नेशनल आरोग्य एक्सपोः 2024

देहरादून में 12 से 15 दिसंबर के बीच होने जा रहे 10वें विश्व आयुर्वेद कांग्रेस और आरोग्य एक्सपो- 2024 में 40 से अधिक देशों के विशेषज्ञों सहित छह हजार से अधिक डेलीगेट्स शामिल होंगे। आयोजन में आयुर्वेद, योग, यूनानी, सिद्धा और होम्योपैथी जैसी परंपरागत चिकित्सा पद्धतियों को लोकप्रिय बनाने पर विचार विमर्श किया जाएगा।

हिमालय और गंगा दृ यमुना जैसी सदानीरा नदियों के चलते उत्तराखंड हमेशा से योग साधकों के साथ ही आयुर्वेद व अन्य परंपरागत चिकित्सा पद़धतियों के शोधार्थियों के लिए अहम पड़ाव रहा है। अब इसी क्रम में उत्तराखंड में 12 से 15 दिसंबर के बीच वर्ल्ड आयुर्वेद फाउंडेशन की ओर से ‘10वां विश्व आयुर्वेद कांग्रेस और आरोग्य एक्सपो- 2024’ का आयोजन किया जा रहा है। इस आयोजन को 40 देशों के 20 अंतराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त स्पीकर के साथ ही विभिन्न सत्रों में 150 से अधिक वक्ता संबोधित करेंगे। आयोजन में छह हजार से अधिक डेलीगेट्स के सामने परंपरागत चिकित्सा पद्धतियों पर आधारित 900 से अधिक पेपर प्रस्तुत किए जाएंगे। इसके साथ ही आयुर्वेद, यूनानी, सिद्धा और होम्योपैथी में निवेश और व्यापार को बढ़ावा देने के लिए, आयुष ड्रग्स निर्माता के साथ ही बॉयर सेलर मीट का भी आयोजन किया जाएगा। अपर सचिव विजय जोगदंडे ने बताया कि आयुष मंत्रालय के सहयोग से देहरादून के परेड ग्राउंड में होने जा रहे इस एक्सपो में आम लोगों के लिए फ्री आयुष क्लीनिक का आयोजन किया जाएगा, जिसमें डायबिटीज, महिला और बाल स्वास्थ्य, वृद्धावस्था, न्यूरोलॉजी, आंकोलॉजी, प्रिवेंटिव कार्डियोलॉजी पर निशुल्क परामर्श दिया जाएगा। यह आयोजन एक तरह से आयुर्वेद, योग, यूनानी, सिद्धा और होम्योपैथी का समग्र मेला साबित होगा। जिसमें प्रदेशभर से तीन लाख लोगों के सामने होने की उम्मीद है।
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देहरादून में 10वां विश्व आयुर्वेद कांग्रेस और आरोग्य एक्सपो- 2024 का आयोजन किया जाना पूरे उत्तराखंड के लिए गौरव की बात है। इस आयोजन के जरिए, प्रदेश के आयुष और अन्य परंपरागत दवा निर्माताओं को खासकर लाभ होगा। साथ ही प्रदेश में परंपरागत चिकित्सा के जरिए भी जागरूकता पैदा होगी।
– पुष्कर सिंह धामी, मुख्यमंत्री

50वां खलंगा मेला स्मारिका पुस्तक का सीएम ने किया विमोचन

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सागरताल नालापानी, देहरादून में बलभद्र खलंगा विकास समिति द्वारा आयोजित ‘50वाँ खलंगा मेला’ में प्रतिभाग किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने खलंगा मेला आयोजन समिति को 5 लाख रुपए दिए जाने की घोषणा की। ‘50वाँ खलंगा मेला स्मारिका’ का विमोचन भी मुख्यमंत्री द्वारा किया गया।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने अपने संबोधन में कहा कि खलंगा मेला पूर्वजों की वीरता और अदम्य साहस को स्मरण करने का अवसर है। उन्होंने महान सपूत सेनानायक कुंवर बलभद्र थापा और उनके वीर साथियों, वीरांगनाओं को भी नमन किया। उन्होंने कहा खलंगा की वीरभूमि में वर्ष 1814 के एंग्लो-गोरखा युद्ध में सेनानायक कुंवर बलभद्र थापा और उनके वीर सैनिकों ने मातृभूमि की रक्षा के लिए अपने प्राणों की आहुति दी थी। इस युद्ध में कुंवर बलभद्र थापा और उनके वीर सैनिकों ने ब्रिटिश सैनिकों की विशाल सेना का सामना करते हुए अपनी वीरता और रणनीतिक कौशल से ब्रिटिश सेना को खदेड़ दिया था।

मुख्यमंत्री ने कहा कि ये युद्ध हमारे वीर गोरखा योद्धाओं के अदम्य साहस और मातृभूमि के प्रति उनके असीम प्रेम का प्रतीक है, जो हमेशा हमें देशभक्ति की प्रेरणा देता रहेगा। खलंगा की गाथा हमारे वीर पूर्वजों के अप्रतिम साहस का एवं हमारी गौरवशाली विरासत का प्रतीक है। उन्होंने कहा ये मेला हमारी समृद्ध सांस्कृतिक परंपराओं को सहेजते हुए उसे अगली पीढ़ी तक पहुंचाने का भी एक माध्यम है। हमारे देश की ऐतिहासिक धरोहरें हमारे गौरवमयी अतीत की पहचान होने के साथ हमारे संस्कृति रूपी वट वृक्ष की मजबूत जड़ें भी हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में हमारी संस्कृति को मजबूत करने का कार्य पूरे देश में किया जा रहा है। प्रधानमंत्री के नेतृत्व में विकास के साथ विरासत को भी आगे बढ़ाया जा रहा है। खलंगा युद्ध स्मारक को भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के संरक्षण में रखना, इसका बड़ा उदाहरण है। उन्होंने कहा राज्य सरकार गोरखा समाज के उत्थान के प्रति पूर्णतः प्रतिबद्ध है और उनके विकास व कल्याण के लिए निरंतर प्रयासरत है। निश्चित ही ऐसे आयोजनों से नई पीढ़ी को इन गोरखा समाज की परंपराओं को संजोए रखने तथा अपने पूर्वजों की वीरता और बलिदान को याद रखने में सहायक सिद्ध होंगे।

इस अवसर पर विधायक उमेश शर्मा काऊ, बलभद्र ख़लंगा विकास समिति के अध्यक्ष कर्नल विक्रम सिंह थापा, कुलदीप बुटोला, विश्वास डाबर, विजय बलूनी, पदम सिंह, ब्रिगेडियर राम सिंह थापा एंव लोग मौजूद रहे।

सिल्क्यारा विजय अभियान पुस्तक का राज्यपाल सहित सीएम ने किया विमोचन

राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (से नि) एवं मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने गुरुवार को दून विश्वविद्यालय, देहरादून में आयोजित ‘सिलक्यारा विजय अभियान’ प्रथम वर्षगाँठ एवं 19वाँ राज्य विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी सम्मेलन-2024 में प्रतिभाग किया। इस अवसर पर उन्होंने सिल्क्यारा विजय अभियान पुस्तक एंव अन्य पुस्तकों का विमोचन किया। उन्होंने सिल्क्यारा रेस्क्यू अभियान पर बनी लघु फिल्म का अवलोकन भी किया।

राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह ने कहा कि यह अभियान राज्य आपदा प्रबंधन क्षमता का उत्कृष्ट उदाहरण है। विश्व के पर्वतीय देशों के लिए यह उदाहरण है कि किस प्रकार से सिलक्यारा टनल में फँसने के बाद किस प्रकार 41 श्रमिकों को बचाव कार्य सफलतापूर्वक पूर्ण किया गया। यह धैर्य, लीडरशिप, कॉर्डिनेशन और अपने संकल्प को पूरा करने का बहुत बड़ा उदाहरण है। पूरे विश्व ने देखा है कि किस 17 देशों के एक्सपर्ट्स 41 फँसे हुए श्रमिकों को सुरक्षित बाहर निकालने का कार्य जिसमे एक भी श्रमिक को खरोंच तक नहीं आई। उन्होंने कहा कि इस विजय अभियान का डॉक्यूमेंटेशन किया जाना भी एक ऐतिहासिक कार्य है। यह एक बहुत बड़ी उपलब्धि थी। राज्यपाल ने कहा कि भारतीयों के अंदर जो क्षमता है, जिसे पूरी दुनिया ने कोविड के दौरान भी देखा था। इसके बाद सिलक्यारा टनल में फंसे श्रमिकों का बचाव कार्य भी इसका एक और उदाहरण है।

राज्यपाल ने कहा कि प्रदेश को ईश्वर ने बहुत से प्राकृतिक संसाधनों से नवाजा है। अब इनके संरक्षण की जिम्मेदारी भी हमारी है। उन्होंने कहा कि राजभवन में वाटर हार्वेस्टिंग पर कार्य किया जा रहा है, जिसके अच्छे परिणाम दिख रहे हैं। उन्होंने आम जन से अपने आस-पास नौले धारों और प्राकृतिक जल स्रोतों के संरक्षण का आह्वान किया। राज्यपाल ने कहा कि हमें स्थानीय समुदायों की भागीदारी को भी प्रोत्साहित करना है जल प्रबंधन में ग्राम पंचायतों और नागरिक संगठनों को महत्वपूर्ण भूमिका निभानी होगी।

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हमसे आग्रह किया है कि पर्यावरण की रक्षा करते हुए उन्होंने कहा कि एक पेड़ माँ के नाम लगाकर इस आंदोलन को आगे बढ़ाने में अपना योगदान दें। उन्होंने कहा कि माताओं, बहनों में कुछ भी कर गुजरने की एक अद्भुत क्षमता है। हमें अपनी बहनों को आगे बढ़ाने में उनका साथ देना है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि बीते वर्ष सिलक्यारा के सफल बचाव अभियान ने आपदा प्रबंधन के क्षेत्र में एक नया अध्याय लिखा था। उन्होंने कहा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन और सहयोग से 17 दिनों के अथक प्रयासों से सिलक्यारा टनल में फंसे हुए 41 श्रमिकों को सुरक्षित बचाया गया था। उन्होंने कहा पूरा विश्व और देश के लोग सिल्क्यारा के लिए दुवा कर रहा था। जो अभियान सामूहिक समर्पण और तकनीकी दक्षता की अनुपम मिसाल बना। जिसे अब आपदा प्रबंधन के क्षेत्र में वैश्विक स्तर पर अध्ययन और शोध का विषय भी माना जा रहा है। उन्होंने सिल्क्यारा के सफल रेस्क्यू के एक वर्ष होने पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का आभार व्यक्त किया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी सम्मेलन बीते 19 वर्षों से प्रदेश में विज्ञान एवं नवाचार को प्रोत्साहित करने के साथ युवा वैज्ञानिकों को प्रेरित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। ये सम्मेलन शोध पत्रों के प्रस्तुतीकरण, सामाजिक महत्व के शोध, नवाचार और नीतिनिर्धारण जैसे गंभीर विषयों पर चिंतन का मंच भी है। हर वर्ष सम्मेलन में राज्य से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा होती है, पिछले तीन वर्षों में हमने ग्रामीण विज्ञान, भारतीय ज्ञान-विज्ञान परंपरा और आपदा प्रबंधन जैसे विषयों पर नवाचार और शोध को प्रोत्साहित किया है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि इस वर्ष सम्मेलन में उत्तराखण्ड में जल एवं प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण जैसे प्रासंगिक और महत्वपूर्ण विषय पर चर्चा होगी, जो जलवायु परिवर्तन और बढ़ती हुए जनसंख्या को देखते हुए अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने कहा हमारा राज्य जल संपदा को संजोए हुए है। उन्होंने कहा इस सम्मेलन में राज्य और देशभर से आए वैज्ञानिकों व शोधकर्ताओं द्वारा जल स्रोतों के संरक्षण और संवर्धन जैसे विषयों पर भी गहन मंथन होगा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि विज्ञान के क्षेत्र में भारत दशकों से नित नए कीर्तिमान स्थापित करता रहा है। कोरोना वैक्सीन से ब्रह्माण्ड के अबूझ रहस्यों तक, हम भारतीय विज्ञान को नए स्तर पर ले जाने का कार्य निरंतर कर रहे हैं। भारत ने समय समय पर अपनी वैज्ञानिक और बौद्धिक संपदा को सिद्ध करके दिखाया है। भारत के महान खगोलशास्त्री आर्यभट्ट, आचार्य कणाद, आचार्य नागार्जुन, महर्षि सुश्रुत जैसे अनेक लोग, भारत के वो वैज्ञानिक स्तंभ हैं, जिनके सिद्धांतों पर आज का आधुनिक विज्ञान स्थापित है। दुनिया को ज्ञान, विज्ञान और शिक्षा देने का काम भारत ने किया है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश में विज्ञान और प्रौद्योगिकी क्षेत्र में अनेकों कार्य हुए हैं। आज भारत में गुड गवर्नेंस के लिए विज्ञान और तकनीकी का व्यापक उपयोग हो रहा है। प्रधानमंत्री की प्रेरणा से हम उत्तराखण्ड में भी नई प्रतिभाओं को प्रोत्साहित करने और नवाचार को बढ़ावा देने के लिए कार्य कर रहे हैं। देहरादून में देश की पांचवीं साइंस सिटी का निर्माण तेजी से हो रहा है। प्रदेश के प्रत्येक जनपद में साइंस और इनोवेशन सेंटर, लैब्स ऑन व्हील्स, और ैज्म्ड लैब्स के माध्यम से विज्ञान, प्रौद्योगिकी और नवाचार के क्षेत्र में विश्व स्तरीय इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार किया जा रहा है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि विकसित भारत की परिकल्पना में महिलाओं की अहम भूमिका है। मुख्यमंत्री ने सभी विश्वविद्यालयों और संस्थाओं से बालिकाओं को साइंस और टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में आगे बढ़ने हेतु विशेष प्रोत्साहित करने का आग्रह किया। मुख्यमंत्री ने कहा सरकार, राज्य की भौगोलिक विशेषताओं को ध्यान में रखते हुए पर्यटन, कृषि और पर्यावरण के लिए उन्नत तकनीकों का उपयोग सुनिश्चित कर रही है। हमारा प्रयास है कि विज्ञान और प्रौद्योगिकी के माध्यम से आम लोगों के जीवन स्तर को बेहतर बनाया जाए। उन्होंने कहा इस सम्मेलन के सभी सत्रों में मिले सुझावों को प्रदेश सरकार अमल में लाकर प्रदेश के समग्र विकास को गति प्रदान करेगी।

इस अवसर पर सचिव नितेश झा, महानिदेशक यूकॉस्ट प्रो. दुर्गेश पंत, कुलपति डॉ. सुरेखा डंगवाल, डॉ विनोद एवं विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञ और वैज्ञानिक उपस्थित रहे।

सीएम ने सुनी पीएम के मन की बात का 116वां संस्करण

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने हाथीबड़कला में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के मन की बात का 116वां संस्करण सुना। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री का मन की बात कार्यक्रम हमेशा प्रेरणादायक होता है। देश के सामूहिक प्रयासों, युवा सपनों और नागरिकों की आकांक्षाओं की बात को प्रधानमंत्री सबसे साझा कर, बेहतर कार्यों के लिए देशवासियों को प्रेरित करते हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री ने युवाओं को एनसीसी से जोड़ने के लिए आग्रह किया है। एनसीसी युवाओं में अनुशासन, नेतृत्व और सेवा की भावना पैदा करती है । उन्होंने प्रदेश के युवाओं से अपील की है कि वे एनसीसी से अवश्य जुड़े। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री द्वारा चलाया गया ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान अब अन्य देशों में भी फैल रहा है, यह हमारे लिए गर्व का विषय है। उत्तराखण्ड में भी इस अभियान के तहत व्यापक स्तर पर वृक्षारोपण किया गया है।

इस अवसर पर कैबिनेट मंत्री डा. प्रेमचंद अग्रवाल, गणेश जोशी, सुबोध उनियाल, राज्यसभा सांसद एवं भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष महेन्द्र भट्ट, लोकसभा सांसद माला राज्यलक्ष्मी शाह, विधायक खजान दास, उमेश शर्मा काऊ, सहदेव सिंह पुण्डीर, सविता कपूर एवं अन्य जन प्रतिनिधि उपस्थित थे।