मार्च 2019 के बाद पढ़ाई में बेहद कमजोर होंगे फेल

आठवीं तक फेल न करने वाली नीति में सरकार मार्च 2019 से बदलाव करने जा रही है। इसके लिये सरकार को देश के 25 राज्यों का भी समर्थन मिल चुका है और सरकार के बदलाव की इस नीति को संसदीय स्थायी समिति ने भी स्वीकार कर लिया है। इस नीति के बाद पांचवीं और आठवीं में कमजोर छात्रों को फेल किया जायेगा।

मानव संसाधन विकास मंत्रलय का मानना है कि इस बदलाव के बाद स्कूली शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार आएगा। क्योंकि मौजूदा समय में आठवीं तक छात्रों को फेल नहीं करने की नीति से शैक्षणिक गुणवत्ता में पहले के मुकाबले गिरावट आई है। हालांकि चार राज्य अभी भी परीक्षा में बदलाव की इस नीति के खिलाफ है, इनमें आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु, ओडिशा और तेलंगाना शामिल हैं। इन राज्यों ने पिछले दिनों कैब (सेंट्रल एडवाइजरी बोर्ड ऑफ एजुकेशन) की बैठक में भी इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाया था। यही वजह है कि सरकार ने परीक्षा में बदलाव की नीति में राज्यों को इस मामले में पूर्ण स्वायत्ता दे दी है।

मंत्रलय का मानना है कि वह राज्यों के बीच इस मसले पर कोई टकराव नहीं चाहता। यही वजह है कि उन्होंने राज्यों को इस मामले में अपने स्तर पर फैसला करने को कहा है। हालांकि नए नियमों के तहत जिन 25 राज्यों ने इस बदलाव का समर्थन किया है, वहां मार्च 2019 से पांचवी और आठवीं की परीक्षा होगी और इनमें कमजोर छात्रों को फेल भी किया जाएगा।

गौरतलब है कि संप्रग सरकार ने पढ़ाई के दौरान विद्यार्थियों के स्कूल छोड़ने की बढ़ती संख्या को देखते हुए आठवीं तक फेल नहीं करने की नीति बनाई थी। इसके चलते प्रत्येक छात्र आठवीं तक पास होता चला जाता है, जबकि नौवीं में वह फेल हो जाता है। ऐसे में नौवीं में अचानक छात्रों के फेल होने की संख्या बढ़ गई थी।

मुख्यमंत्री की सहमति के बाद तय होगा कंसेंसस कमेटी के लिये प्रतिनिधि

बीसीसीआइ की प्रशासक समिति ने उत्तराखंड के खिलाड़ियों की रणजी व अन्य घरेलू क्रिकेट प्रतियोगिताओं में शिरकत करने की राह प्रशस्त करने के बाद राज्य की दो एसोसिएशन ने अपने प्रतिनिधियों के नाम कंसेंसस कमेटी को भेज दिये है। राज्य सरकार अपना प्रतिनिधि मुख्यमंत्री की सहमति के बाद ही तय करेगी। बाकी अन्य दो एसोसिएशन भी जल्द अपने सदस्यों के नाम घोषित करेगी।

बीसीसीआई की मान्यता मिलने के बाद अब उत्तराखंड की क्रिकेट टीम बीसीसीआइ की ओर से वर्ष भर होने वाले विभिन्न आयु वर्गो की प्रतियोगिताओं में शिरकत कर सकेगी। उत्तराखंड में क्रिकेट गतिविधियों के संचालन के लिए बीसीसीआइ ने नौ सदस्यीय कंसेंसस कमेटी का गठन किया है। इसमें मान्यता का दावा करने वाली चार एसोसिएशनों के छह सदस्य, एक सरकारी सदस्य और दो सदस्य बीसीसीआइ के रखे गए हैं।

बीसीसीआइ ने पूर्व जनरल मैनेजर (क्रिकेट ऑपरेशन) प्रोफेसर रत्नाकर शेट्टी को कंसेंसस कमेटी का संयोजक बनाया है। बीसीसीआइ ने सभी क्रिकेट एसोसिएशनों से जल्द से जल्द अपने नाम भेजने को कहा है। मंगलवार को इनमें से उत्तरांचल क्रिकेट एसोसिएशन ने दो प्रतिनिधियों के नाम बीसीसीआइ की प्रशासक समिति को भेज दिए हैं।

उत्तरांचल क्रिकेट एसोसिएशन के सचिव चंद्रकांत आर्य ने बताया कि एसोसिएशन ने सर्वसम्मति से अध्यक्ष प्रदीप सिंह और उनका यानी चंद्रकांत आर्य का नाम तय किया है। इसकी सूचना ईमेल द्वारा प्रशासक समिति को भेज दी गई है। यूनाइटेड क्रिकेट एसोसिएशन ने सचिव संजय गुसाईं का नाम तय करते हुए इसकी सूचना प्रशासक समिति को भेज दी है। हालांकि क्रिकेट एसोसिएशन ऑफ उत्तराखंड अभी तक अपने दो प्रतिनिधि और उत्तराखंड क्रिकेट एसोसिएशन अपने एक प्रतिनिधि का नाम तय नहीं कर पाई हैं।

क्रिकेट एसोसिएशन ऑफ उत्तराखंड के सचिव महिम वर्मा ने कहा कि पदाधिकारी आपस में बैठक कर सदस्यों का नाम तय करेंगे। 22 जून तक नाम तय कर लिए जाएंगे, तब तक के लिए बीसीसीआइ से समय मांगा गया है। उत्तराखंड क्रिकेट एसोसिएशन के सचिव दिव्य नौटियाल ने कहा कि एक-दो दिनों के भीतर प्रतिनिधियों के नाम तय कर बीसीसीआइ को भेज दिए जाएंगे। वहीं सरकार के नामित प्रतिनिधि का नाम मुख्यमंत्री की सहमति के बाद तय किया जाएगा।

पूर्व सैनिक पिता ने दी शहीद बेटे विकास गुरूंग को मुखाग्नि

जब तक सूरज चांद रहेगा। विकास गुरूंग तेरा नाम रहेगा…., पाकिस्तान मुर्दाबाद, हिंदुस्तान जिंदाबाद के नारों के बीच शहीद विकास गुरूंग की अंतिम यात्रा तीर्थनगरी के विभिन्न मार्गों से होती हुयी मुनिकीरेती के पूर्णानंद घाट पहुंची। जहां उनका सैन्य सम्मान के साथ अंतिम संस्कार लामा रिति रिवाज से किया गया। शहीद विकास गुरूंग के पिता रमेश गुरूंग ने अपने बेटे को मुखाग्नि दी।

शनिवार को जम्मू-कश्मीर में नौशेरा के लाम सेक्टर में पाकिस्तान की तरफ से हुई गोलाबारी में 21 गोरखा रायफल में तैनात गुमानीवाला निवासी रायफलमैन विकास शहीद हो गए थे। 21 वर्षीय शहीद का पार्थिव शरीर रविवार को उनके पैतृक आवास पहुुंचा था, तभी से वहां श्रद्धांजलि देने वालों को तांता लगा हुआ था। सोमवार सुबह सेना के जवानों ने शहीद के पार्थिव शरीर को गार्ड ऑफ ऑनर दिया।

शहीद विकास गुरूंग को पूर्णानदं घाट पर 24 फील्ड रेजीमेंट के जवानों ने हवा में 32 राउंड फायर कर सशस्त्र सलामी दी। गंगा घाट पर शहीद जवान का लामा रीति से अंतिम संस्कार किया गया। पिता रमेश गुरुंग ने बेटे को मुखाग्नि दी। घाट पर विधानसभा अध्यक्ष, सेना के अधिकारियों व जन प्रतिनिधियों ने शहीद को पुष्पचक्र अर्पित कर श्रद्धांजलि दी।

इसे पहले सुबह करीब नौ बजे मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने शहीद के घर पहुंच कर उन्हें श्रद्धांजलि दी। मुख्यमंत्री ने कहा कि विकास गुरुंग की कुर्बानी व्यर्थ नहीं जाएगी। ऐसे वीरों के कारण ही हमारा देश सुरक्षित है। विधानसभा अध्यक्ष प्रेमचंद अग्रवाल ने शहीद विकास की स्मृति में द्वार बनाने, उनकी एक आदमकद मूर्ति स्थापित करने और गुलरानी फार्म का नाम शहीद के नाम पर करने की घोषणा की।

शहीद विकास गुरूंग की अंतिम या़त्रा में राजनैतिक संगठनों ने भी शिरकत की। मगर, राजनीति के लिये नहीं बल्कि देशभक्ति की भावना उन्हें एक साथ ले आयी। शहीद की विदाई यात्रा में हर पचास कदम की दूरी पर व्यापारी ने अपने-अपने प्रतिष्ठान बंद कर शहीद को श्रद्धांजलिद अर्पित की। शहीद विकास के सम्मान में देश भक्ति के गीत चल रहे थे। यह देश भक्ति ही थी जो लोगों को भीषण गर्मी में घर से बाहर सड़क तक ले आयी।

सभी वर्ग के लोगों ने दी नम आंखों से विदाई

शहीद की अंतिम यात्रा में क्या बच्चे, क्या बुढ़े और क्या जवान इन सभी के साथ सैकड़ों की संख्या में महिलायें भी चल रही थी। शहीद के घर से लेकर पूर्णानंद घाट तक सभी ने भारत माता की जय जैसे नारे के साथ शहीद जवान को अपनी-अपनी श्रद्धांजलि दी।

नीति आयोग की बैठक में सीएम त्रिवेन्द्र ने दिये ये अहम सुझाव

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में नीति आयोग की चतुर्थ बैठक आयोजित की गयी। बैठक में उत्तराखंड सीएम त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने सुझाव देते हुये कहा कि राज्य के विकास में जलविद्युत की अहम भूमिका हो सकती है। जलविद्युत ऊर्जा को क्लीन ऊर्जा बताते हुये कहा कि स्वीकृत जलविद्युत परियोजनाओं को बंद किया जना राज्य के विकास के लिये उचित कदम नहीं है।

मुख्यमंत्री ने सुझाव दिया कि पर्वतीय व पूर्वोत्तर राज्यों के लिए अलग से मंत्रालय का गठन किया जाना चाहिए। यदि ऐसा करना सम्भव न हो तो नीति आयेग में ‘पर्वतीय प्रकोष्ठ’ अवश्य स्थापित किया जाना चाहिए। पर्यावरण संरक्षण में योगदान देने वाले राज्यों को प्रोत्साहित किया जाना चाहिए। इसके लिए देश में ग्रीन एकाउंटिंग प्रणाली अपनाई जाए। मुख्यमंत्री ने आपदा की दृष्टि से अति संवदेनशील गांवों के विस्थापन में भारत सरकार से तकनीकी व वित्तीय सहयोग का भी अनुरोध किया।

मुख्यमंत्री ने विभिन्न बिंदुओं पर विस्तार से जानकारी देते हुए कहा कि उत्तराखण्ड में प्रत्येक स्तर पर मॉनिटरिंग की जा रही है। मुख्यमंत्री मॉनीटरिंग डैशबोर्ड ‘‘उत्कर्ष‘‘ की स्थापना की गयी है। इस डैशबोर्ड के माध्यम से महत्वपूर्ण योजनाओं तथा कार्यक्रमों के परिणामों का अनुश्रवण सीधे मुख्यमंत्री के स्तर पर किया जा रहा है। योजनाओं तथा कार्यक्रमों के भौतिक व वित्तीय प्रगति की मॉनिटरिंग के लिए ई-आंकलन पोर्टल बनाया गया है। कोषागार व सभी आहरण-वितरण अधिकारियों को इससे जोड़ा गया है। विकास कार्यक्रमों में उपलब्धियों के अनुसार ही विभागीय उच्चाधिकारियों की सेवा पुस्तिका में वार्षिक मूल्यांकन अंकित किया जायेगा। विकास में जनसहभागिता हेतु हर वर्ग के साथ जन-संवाद की व्यवस्था प्रारम्भ की गयी है। सेवा के अधिकार कानून के अन्तर्गत 162 नई सेवायें और जोड़ी गई हैं। अब इसमें कुल 312 सेवाएं हो गई हैं। जन-शिकायतों के समाधान के लिए हेल्पलाइन 1905 प्रारम्भ हुई है।

मुख्यमंत्री ने कहा नीति आयेग की कार्यकारिणी परिषद की पिछली बैठक में प्रधानमंत्री जी द्वारा ऐजेण्डा-2022, जी0एस0टी0, ळमड , डिजिटल इण्डिया व सुशासन के क्षेत्र में विशेष कदम उठाने की अपेक्षा राज्य सरकारों से की गयी थी। राज्य सरकार ने पिछले एक वर्ष में विशेष ध्यान दिया है जिसके परिणाम भी दिख रहे हैं। संकल्प से सिद्धि के अन्तर्गत राज्य में 2020 के लिए महत्वपूर्ण लक्ष्य निर्धारित किये है जिनकी मॉनिटरिंग मुख्य सचिव द्वारा सचिव समिति में साप्ताहिक तौर से की जाती है। ळमड के अन्तर्गत इस वर्ष उत्तराखण्ड ने डवेज ब्वउचसपंदज ठनलमत का पुरस्कार प्राप्त किया है। जी0एस0टी0 के क्षेत्र में हमने ई-रिफण्डिंग, जी0एस0टी0 मित्र, 24×7 हैल्प डैस्क एवं जनपद स्तर पर कार्यशालाओं आदि की व्यवस्थायें की है ताकि कारोबार में सुगमता बनी रहे।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार किसानों की आय दोगुनी करने के लिए योजनाबद्ध तरीके से काम कर रही है। राज्य में एक लैंड होल्डिंग से वर्तमान में औसतन पचहत्तर हजार रूपये की कृषि आय अनुमानित है उसे वर्ष 2022 तक डेढ़ लाख रूपये किया जाना है। इसके लिए विश्वविद्यालयों एवं शोध संस्थानों की तकनीकी दक्षता का उपयोग किया जा रहा है। क्लस्टर आधारित कार्य योजनायें तैयार की जा रही हैं। प्रदेश की कुल 16 मैदानी मण्डियों को अभी तक ई-राष्ट्रीय कृषि बाजार से जोड़ा जा चुका है। पर्वतीय मण्डियों को भी इससे जोड़ा जा रहा है। मृदा स्वास्थ्य कार्ड योजना के अन्तर्गत वर्ष 2015-16 से 2016-17 तक के प्रथम चरण में 7.5 लाख के लक्ष्य के सापेक्ष 7.65 मृदा स्वास्थ्य कार्ड वितरित किये गये थे। अगले चरण अर्थात् 2017-18 से 2018-19 तक कुल 9.12 लाख स्वास्थ्य कार्ड वितरित किये जाने हैं। मृदा नमूना लेते समय जी0पी0एस0 रीडिंग भी ली जा रही है। समस्त सूचनाओं को राष्ट्रीय मृदा स्वास्थ्य कार्ड पोर्टल पर अपलोड भी किया जा रहा है। ग्रामीण हाटों को बढ़ावा देने के लिए प्रत्येक न्याय पंचायत में ग्रोथ सेन्टर विकसित किया जायेगा। प्रथम चरण में 50 न्याय पंचायतें चयनित की गई हैं।

मुख्यमंत्री ने बताया कि नदियों को पुनर्जीवित व सदानीरा बनाने के लिए ‘‘जल संचय अभियान’’ के अन्तर्गत जलाशय,जल कुण्ड ट्रेंच, चौक डैम बनाये जा रहे है। कोसी नदी (कुमाऊँ) एवं रिस्पना नदी (देहरादून) के जल संग्रहण क्षेत्र में जन सहभागिता के साथ वृहद् वृक्षारोपण अभियान जुलाई में प्रस्तावित है। मनरेगा में पिछले वित्तीय वर्ष में रू0 786 करोड़ का शत-प्रतिशत उपयोग किया तथा 182 लाख मानव दिवस के सृजन के लक्ष्य से भी अधिक 223 लाख मानव दिवसों का सृजन किया। मनरेगा के अन्तर्गत हमने पिछले वर्ष 2500 फार्म पोण्ड तथा 1000 पारम्परिक जल सं्रोतों का संवर्धन किया किया गया।

‘‘आयुष्मान भारत’’ के अन्तर्गत समस्त उपकेन्द्रों को हैल्थ एण्ड वैलनेस सेन्टर मे उच्चीकृत किया जा रहा है। प्रत्येक सेन्टर में हैल्थ प्रोवाइडर नियुक्त करने हेतु ‘‘ब्रिज प्रोग्राम इन कम्यूनिटी हैल्थ’’ कोर्स प्रारम्भ किया गया है। सुदूर पर्वतीय एवं दुर्गम क्षेत्रों में रहने वाले निवासियों को टेली मेडिसिन एवं टेली-रैडियोलॉजी सेवायें यथा, एक्स-रे, सी0टी0 स्कैन, एम0आर0आइ0 एवं मेमोग्राफी की सुविधायें उपलब्ध करायी जा रही है। प्रधानमंत्री राष्ट्रीय स्वास्थ्य सुरक्षा मिशन के अन्तर्गत पांच लाख अड़तीस हजार परिवार चयनित किये गये हैं।

राष्ट्रीय पोषण मिशन के प्रथम चरण में 4 चिन्ह्ति जनपदों के 36 परियोजनाओं के अन्तर्गत 7396 आगनवाड़ी केन्द्रों में लगभग एक हजार अतिकुपोषित, 15 हजार कुपोषित तथा एक लाख गर्भवती धात्री महिलाओं को लाभान्वित किया गया। स्थानीय खाद्यानों से ही निर्मित पोष्टिक आहार ‘‘ऊर्जा’’ वितरित किया जा रहा है। मिशन इन्द्रधनुष के अन्तर्गत वर्ष 2017-18 में हमने 1 लाख 70 हजार बच्चों को प्रतिरक्षित किया। विश्व स्वास्थ्य संगठन के सहयोग से राज्य में माइक्रो प्लानिंग की जा रही है।

मुख्यमंत्री ने ली वन्य जीव बोर्ड की बैठक, लिया ये अहम फैसला

मुख्ममंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत की अध्यक्षता में उत्तराखंड राज्य वन्य जीव बोर्ड की बैठक बुलाई गयी। जिसमें अहम फैसला लेते हुये वन्य जीवों द्वारा मारे जाने व गंभीर रूप से घायल होने पर मिलने वाली मुआवजा राशि को बढ़ाया गया। इसके लिये कैबिनेट में प्रस्ताव लाया जायेगा। इसके बाद मारे गये मृतक के परिजनों को तीन के बजाए पांच लाख रूपये व गंभीर रूप से घायल व्यक्ति को 50 हजार रूपये की बजाए दो लाख रूपये की मुआवजा राशि मिलेगी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि वनों के प्रबंधन में स्थानीय लोगों की भागीदारी सुनिश्चित की जानी चाहिए। वनों के संरक्षण के लिए ग्रामीणों का सहयोग जरूरी है। वनों का संरक्षण भी हो और स्थानीय ग्रामीण इनसे आजीविका भी प्राप्त कर सकें इसके लिए ग्रीन टूरिज्म की कन्सेप्ट पर काम किया जाए। कार्बेट के बफर जोन व रामनगर वन प्रभाग में हाथी सफारी को भी अनुमति दी गई। यह भी तय किया गया कि राजाजी टाईगर रिजर्व में पर्यटन से होने वाली आय का 100 फीसदी राजाजी टाईगर रिजर्व कंजरवेशन फाउंडेशन के कोष में जमा किया जाएगा। इसका कुछ भाग सामुदायिक गतिविधियों में प्रयोग किया जाएगा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि साल में एक बार होने वाली उत्तराखण्ड राज्य वन्य जीव बोर्ड की बैठक हर छह माह में आयोजित की जाए। इसमें प्रस्तुत किए जाने वाले बिंदुओं के साथ विस्तृत रिपोर्ट भी संलग्न होनी चाहिए। यदि कोई मामला जनता से जुड़ा हो तो बोर्ड की बैठक में प्रस्तुत करने से पहले यह भी अध्ययन करा लिया जाए कि इससे सम्भावित लाभ व हानि क्या-क्या हैं।

आरक्षित वन और टाईगर रिजर्व के बफर जोन में एंगलिंग का परमिट नहीं दिया जाएगा। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि वन विभाग द्वारा जिन पर्वतारोही दलों को अनुमति दी जाती है उसकी सूचना पुलिस को भी दी जाए। ताकि किसी आकस्मिक स्थिति में फंसे पर्वतारोहियों को बचाया जा सके। बैठक में वाईल्ड लाईफ इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया द्वारा प्रस्तावित कंडी मार्ग पर किए गए फिजीबिलिटी सर्वे का प्रस्तुतिकरण किया गया। बताया गया कि इसके बनने से गढ़वाल से कुमायूं के लिए सीधा सम्पर्क मार्ग बनेगा और इससे यात्रावधि में लगभग तीन घंटे की कमी आएगी। इस पर कंडी मार्ग के संबंध में एक कार्यकारी समिति बनाने का निर्णय किया गया।

राजनैतिक दल की कार्यप्रणाली के चलते सेना के जवान असुरक्षित

देश में राजनीति इतनी हावी हो गयी हैं। जिसके चलते देश के अंदर सैनिक स्वयं की रक्षा नहीं कर पा रहे है। कश्मीर में आये दिन सेना के जवानों को घेर लिया जाता हैं। मगर, हमारे देश की राजनैतिक दलों की कार्यप्रणाली के चलते सैनिक स्वयं को ठगा महसूस कर रहे है। देश के अंदर पाकिस्तान के जैसे हालात पैदा न हो, इसके लिये सरकार को ठोस नीति अपनानी होगी। यह बात श्री गोवर्धन मठ पुरी पीठाधीश्वर शंकराचार्य स्वामी निश्चलानंद सरस्वती महाराज ने ऋषिकेश में आयोजित कार्यक्रम के दौरान कही।

पुरी पीठाधीश्वर शंकराचार्य स्वामी निश्चलानंद सरस्वती महाराज ने कहा कि देश में आम आदमी की सुरक्षा के लिये शरहद पर सेना के जवान सदैव मुस्तैद रहते है। मगर, इन सैनिकों की सुरक्षा के लिये क्या किसी ने सोचा है। हमारे सैनिक स्वयं सुरक्षित नहीं है। उन्होंने कहा कि जिस दिन सेना का सब्र टूट गया तो देश में पाकिस्तान की जैसी स्थिति उत्पन्न हो जायेगी।

हिंदू जागरण मंच की ओर से आयोजित विचार गोष्ठी और प्रश्नोत्तरी कार्यक्रम में पुंरी शंकराचार्य निश्चलानंद सरस्वती ने कहा कि आज राजनैतिक दल वोटों की राजनीति के कारण पाकिस्तान जैसे गंभीर मुद्दे को हल्के में ले रहे हैं। जम्मू-कश्मीर में जवानों की पाक पोषित आतंकवादी और पाक सैनिक निर्मम हत्या कर रहे हैं। इन दलों की कार्यप्रणाली के कारण अपने देश में ही सैनिक सुरक्षित नहीं हैं।

सेना पर पत्थरबाजी की घटना पर शंकराचार्य ने कहा कि आम आदमी को देश में आत्मरक्षा का अधिकार है तो कश्मीर में सैनिकों को यह अधिकार क्यों नहीं। इन हालातों में अगर हमारी सेना का सब्र टूटा तो देश के हालात पाकिस्तान जैसे हो जाएंगे।

आज तक किसी भी प्रधानमंत्री ने देश की मूल समस्याओं पर ध्यान नहीं दिया। अयोध्या में राम मंदिर का मुद्दा वर्षों से लटका है, जम्मू-कश्मीर में धारा 370 अब तक लागू है। शंकराचार्य ने कहा कि भारत देश ने मुस्लिम समाज के कई लोगों को राष्ट्रपति, उप राष्ट्रपति, राज्यपाल और मंत्री बनाया। मगर बांग्लादेश व पाकिस्तान बताए कि कितने हिंदुओं को उच्च पदों पर बिठाया गया। यह हमारी उदारता है, इसे कमजोरी न समझा जाए।

उन्होंने गो हत्या पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि आज कोई भी राजनैतिक दल ऐसा नहीं है जो गो हत्या रोकने के लिए एक स्वर से प्रस्ताव पारित कर सके। इन कारणों से गोवंश संकट में है। गो हत्या पर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि वह भी गो हत्या रोकने में असफल नजर आ रहे हैं। यूपी में सैकड़ों अवैध बूचडखाने चल रहे हैं।

देश में शंकराचार्यों की बाढ़

शंकराचार्य स्वामी निश्चलानंद सरस्वती महाराज ने कहा कि मान्यता के मुताबिक चार पीठ के चार शंकराचार्य परंपरानुसार हैं। मगर, आज देश में शंकराचार्यों की जो बाढ़ आई है, इन्हें पनपाने वाले देश के राजनैतिक दल हैं। शंकराचार्यों की ओर से विश्व का ध्यान भटकाने के लिए अंग्रेजों ने साधारण लोगों को महात्मा, आचार्य और महर्षि के रूप में स्थापित किया। आजादी के बाद राजनैतिक दलों ने इस तरह के शंकराचार्यों को बढ़ाया। भारत साधु समाज के नाम से यह काम किया गया। कहा कि इन कथित शंकराचायों की पहचान, भाजपायी, कांग्रेसी व सपाई शंकराचार्यों के रूप में होती है।

आपदा से निपटने की तैयारियों को लेकर सीएम ने की समीक्षा

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत राज्य में आपदा से निपटने को लेकर सचेत नजर आ रहे हे। इसलिये समय-समय पर जिलों के जिलाधिकारियों से आपदा को लेकर तैयारियों की समीक्षा कर रहे है। मंगलवार को भी सीएम ने समीक्षा बैठक ली। वीडियों कान्फें्रसिंग के माध्यम से उन्होंने आपदा की तैयारियों की समीक्षा ली। उन्होंने कहा कि आपदा के निपटने में धन की कमी नहीं आनी चाहिए। उन्होंने आपदा प्रबंधन संबधी प्रशिक्षण सुनिश्चित कराने के सुझाव जिलाधिकारियों को दिए।

मुख्यमंत्री ने सभी जिलाधिकारियों से विस्तृत जानकारी लेते हुये कहा कि प्रशासन को किसी भी स्थिति का सामना करने के लिए पूरी तरह से तैयार रहना होगा। सभी आवश्यक प्रबंध पहले ही सुनिश्चित कर लिए जाये। आकस्मिक परिस्थितियों में कम्यूनिकेशन टूटना नहीं चाहिए। रेस्पान्स टाईम सबसे महत्वपूर्ण है। जल्द से जल्द घटना स्थल तक पहुंचना और प्रभावितों को राहत उपलब्ध करवाने की व्यवस्था हो। चिन्हित आश्रय स्थलों पर भोजन, पेयजल, कैरोसीन, दवाईयां व अन्य आवश्यक सामग्री की व्यवस्था सुनिश्चित हो। राशन की क्वालिटी समय-समय पर चौक कर ली जाए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि अर्धसैन्य बलों के साथ भी समन्वय स्थापित किया जाए। सेना से भी आपदा की स्थिति में पूरा सहयोग मिलेगा। इस संबंध में सेना प्रमुख से उनकी बात हुई है। प्रचार माध्यमों से बाहर से आने वाले पर्यटकों को आगाह किया जाए कि वे नदियों के समीप न जाएं। कन्ट्रोल रूम 24 घंटे संचालित हों। मुख्यमंत्री ने ट्रैफिक प्रबंधन पर भी विशेष ध्यान देने के निर्देश दिए।

बैठक में सभी जिलाधिकारियों द्वारा विस्तार से जानकारी दी गई। बताया गया कि संवेदनशील भूस्खलन क्षेत्रों में वैकल्पिक मार्ग चिन्हित किए गए हैं। वर्षा से बाधित होने वाले मार्गों को कम से कम समय में खोला जा सके, इसके लिए जेसीबी, क्रेन व मानव संसाधनों को संवेदनशील स्थानों पर पहले से ही तैनात किया जा रहा है। जगह-जगह बनाए जाने वाले आश्रय स्थलों पर भोजन, पेयजल, कैरोसीन, दवाईयां व अन्य आवश्यक सामग्री की व्यवस्था की गई है। अधिकारियों व कर्मचारियों को आपदा प्रबंधन का प्रशिक्षण प्रदान किया गया है। मॉक ड्रिल भी समस-समय पर आयोजित की जाती है।

भीड़ के आगे हमलावर गुलदार ने टेके घुटने

पौड़ी जिले में कपड़े धो रही एक महिला पर गुलदार ने हमला कर दिया। हमला होते ही महिला ने शोर मचाकर ग्रामीणों को बुला लिया। लाठी-डंडों से लैस ग्रामीणों ने गुलदार को मौत के घाट उतार दिया। इस दौरान गुलदान ने भी दो ग्रामीणों को घायल कर दिया। जिन्हें श्रीनगर के बेस अस्पताल में भर्ती कराया गया है।

घटना श्रीनगर से नौ किलोमीटर दूर ग्रामसभा गहड़ के बसोल्यूं तोक में मंगलवार सुबह लगभग दस बजे हुई। फतेह सिंह की 40 वर्षीय पत्नी ममता गांव के समीप गदेरे (बरसाती नाला) में कपड़े धो रही थी, तभी गुलदार ने उस पर हमला कर दिया। शोर सुनकर नजदीकी ग्रामीण लाठी-डंडे के साथ वहां पहुंचे। भीड़ से घिरा देख गुलदार और आक्रामक हो गया। तभी उसने दो अन्य लोगों 52 वर्षीय राजेंद्र सिंह और 35 वर्षीय लल्लन सिंह पर भी झपट्टा मार दिया। यह देख ग्रामीणों ने बचाव में उस पर पत्थर और डंडों से प्रहार किया।

जख्मी गुलदार वहां से भागने को मजबूर हुआ। वह कुछ ही दूरी पर पहुंचा था कि उसने दम तोड़ दिया। हमले में ममता के सिर और हाथ-पैर जख्मी हुए हैं, जबकि बीच बचाव को आए राजेंद्र और लल्लन सिंह के हाथ में खरोचें आई हैं। लल्लन को छोड़ बाकी दो को उपचार के लिए बेस अस्पताल श्रीनगर में ले जाया गया है।

इस बीच, सूचना पर रेंजर अनिल भट्ट टीम के साथ मौके पर पहुंचे। उन्होंने बताया कि गुलदार के शरीर पर गनशॉट जैसा कोई निशान नहीं पाया गया। अंदरूनी चोट की वजह से उसकी मौत होने का अनुमान है। उसके शव का पोस्टमार्टम कराया जा रहा है। गहड़ के प्रधान राकेश भंडारी ने बताया कि इलाके में दो अन्य गुलदार देखे गए हैं। अनुमान लगाया जा रहा है कि मारा गया गुलदार भी इसी परिवार का सदस्य था। उसकी उम्र एक से डेढ़ साल है। रेंजर ने बताया कि इन गुलदारों को पकड़ने के लिए क्षेत्र में पिंजड़ा लगा दिया गया है। पूर्व क्षेत्र पंचायत सदस्य विभोर बहुगुणा ने बताया कि मारे गए गुलदार ने घटना से कुछ पहले घास लेने जा रही पांच महिलाओं पर भी झपटने की कोशिश की थी। उनके शोर मचाने से गुलदार गदेरे की ओर चला गया था।

कुमांऊ और नागा रेजीमेंट के इतिहास में जुड़ा एक नया अध्याय

भारतीय सेना के कुमाऊं और नागा रेजीमेंट के इतिहास में एक और अध्याय जुड़ गया है। इस स्वर्णिम अवसर पर मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने भी मौजूद रहे। मुख्यमंत्री ने इस मौके पर कहा कि हम सभी को अपने सैनिकों की बहादुरी पर नाज है। हमारे सैनिकों ने हमेशा से ही एकता अखंडता को बनाये रखने के लिये सीमाओं के सजग प्रहरी के रूप में कार्य किया है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि इन जवानों ने देश की सेवा के लिए सेना में शामिल होकर अपने जीवन का महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। मुख्यमंत्री ने बताया कि उनके पिता स्व. प्रताप सिंह रावत भी सैनिक थे। इसी कारण वे भी सेना की गौरवशाली परंपरा से वाकिफ है। देवभूमि के सैनिकों ने अपने त्याग और साहस के बल पर प्रदेश और देश का नाम रोशन किया है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि नव प्रशिक्षित जवान सेना की महान गौरवशाली परम्परा को बनाए रखेंगे।

सोमवार को सोमनाथ मैदान में 155 भारतीय सेना के जवानों की कसम परेड़ आयोजित की गई। जिसमें 67 जवान उत्तराखण्ड के थे, शेष 88 जवान महाराष्ट्र, बिहार, दिल्ली, उत्तर प्रदेश, हरियाणा, राजस्थान व अन्य राज्यों के थे। इस समारोह में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले रिक्रूट को विशेष मेडल से सम्मानित किया गया। जिनमें महेश ऐरी, रोहित चिलवाल, प्रदीप मेहरा, विशाल सिंह, अतुल जोशी, रमेश कुमार, पंकज सिंह सम्मिलित थे।

कसम परेड़ में पहुंचे धर्मगुरू गणेश दत्त जोशी व अन्य सहयोगियों ने राष्ट्रीय ध्वज व गीता को साक्षी मानकर नव प्रशिक्षुओं को शपथ दिलायी। मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत, कर्नल ऑफ द रजिमेंट ले. जनरल बीएस सेरावत, सेना मैडल और कमांडेट ब्रिगेडियर जीएस राठौर ने भी परेड की सलामी ली।

निर्धन व्यक्ति का जीवन स्तर ऊंचा उठाना केंद्र व राज्य सरकार की प्राथमिकताः त्रिवेन्द्र

मुख्यमंत्री त्रिर्वेन्द्र सिंह रावत ने कहा कि केद्र व राज्य सरकार की प्राथमिकता विकास की मुख्यधारा से पिछड़े देश व राज्य के सभी निर्धनों को आर्थिक व सामाजिक रूप से जीवन स्तर को ऊंचा उठाना हैं। नानकमत्ता ऊधमसिंह नगर में आयोजित केंद्रीय योजनाओं के लाभार्थियों के सम्मेलन में पहुंचे मुख्यमंत्री ने कहा कि 2022 तक भारत एक नये भारत के रूप में दिखे, यह देश के प्रधानमंत्री का सपना है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि ऊधमसिंह नगर जिले में उज्ज्वला, सौभाग्य, उजाला योजना के अन्तर्गत रजिस्टर्ड होने वाले परिवारों को 15 अगस्त तक पूरी तरह योजनाओं से लाभांवित कर दिया जायेगा। उन्होंने कहा कि राज्य में सरकार बनते ही भ्रष्टाचार मुक्त शासन देने की दशा में लगातार कदम बढ़ाये जा रहे हैं। जिस कढ़ी में अभी तक कई भ्रष्टाचारी जेल जा चुके हैं तथा कई जाने वाले हैं। उन्होंने कहा कि किसानों के उत्थान हेतु राज्य सरकार द्वारा कृषि के क्षेत्र में कार्य करने वाले एक लाख 80 हजार किसानों को दो प्रतिशत वार्षिक ब्याज दर पर ऋण उपलब्ध कराया गया है।

उन्होंने कहा कि मार्केट में चीनी सस्ती होने के कारण मिलों से अभी तक चीनी मार्केट में नही पहुॅचने के बावजूद भी राज्य सरकार द्वारा गन्ना किसानों के लिए 40 करोड़ रूपये की धनराशि जारी की गयी है। उन्होंने कहा कि गेहुॅ उत्पादन करने वाले किसानों को समय पर लाभ पहुॅचाया जायेगा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि गॉव के विकास के लिए पहले एक रूपया दिया जाता था तो भ्रष्टाचार के कारण 50 पैसे भी विकास कार्य में सही से नहीं लग पाते थे तथा सामाजिक उत्थान के कार्यों में भी भ्रष्टाचार फैला हुआ था। भ्रष्टाचार को खत्म करने के लिए प्रधानमंत्री ने बिचौलियों के रास्तों को बन्द किया तथा सभी कार्य डिजिटल किये जा रहे हैं। योजनाओं का शतप्रतिशत पैसा ग्राम प्रधान के खाते में आता है तथा विभिन्न लाभप्रद योजनाओं का पैसा डीबीटी योजना के अन्तर्गत सीधे लाभार्थियों के खाते में आता है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री के कुशल नेतृत्व के कारण विश्व में भारत माता की जय-जयकार होती है तथा भारत ने अपनी शाक्ति का एहसास दुनिया को कराया है।

उन्होंने कहा कि विदेश नीति में विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने कमाल कर दिखाया है तथा देश के किसी भी नागरिक के विदेश में फंसे होने पर उसे तत्काल देश में लाने का काम किया जाता है। उन्होंने कहा कि नितिन गडकरी के नेतृत्व में प्रत्येक दिन 27 किमी राजमार्ग का निर्माण किया जा रहा है जोकि पहले प्रतिदिन मात्र 04 किमी बनता था। गडकरी ने अगले वर्ष से प्रतिदिन 40 किमी राजमार्ग निर्माण का लक्ष्य तय किया है।

उन्होेंने कहा कि वर्तमान समय में भारत पोलियों मुक्त देश बन चुका है तथा वर्ष 2025 तक देश को टीबी मुक्त देश बनाने का लक्ष्य रखा गया है। उन्होंने कहा कि टीबी के रोगियों को निःशुल्क दवाईयां उपलब्ध कराने के साथ ही छह हजार रूपये पोषण हेतु वार्षिक दिये जा रहे हैं ताकि रोगी पुष्टाहार ग्रहण करते हुए जल्दी से स्वस्थ व निरोग हो सके। उन्होंने कहा कि आयुष्मान भारत योजना के अन्तर्गत अपना राज्य पहला ऐसा राज्य है जो 20 लाख परिवारों को 15 अगस्त तक योजना से कवर करने वाला है।

कार्यक्रम में 20 लाभार्थियों को उज्ज्वला योजना के अन्तर्गत गैस कनेक्शन वितरित किये गये तथा हाईस्कूल व इण्टरमीडिएट की बोर्ड परीक्षा में क्षेत्र का नाम रोशन करने वाले चार मेधावी विद्यार्थियों को सम्मानित किया गया।