कैबिनेट ने अध्यादेश लाकर दूर की भाजपा विधायकों की नाराजगी

उत्तराखंड कैबिनेट बैठक में मलिन बस्तियों को अतिक्रमण हटाओ अभियान से राहत देने के लिए अध्यादेश लाकर मंजूरी दे दी गई है। साथ ही तीन साल के भीतर मलिन बस्तियों का नियमितीकरण करने का भी फैसला लिया गया है।

मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत की अध्यक्षता में कैबिनेट बैठक का आयोजन किया गया। जिसमें कई अहम फैसलों पर मुहर लगी है। बैठक में उत्तराखंड ग्राम पंचायत विकास अधिकारी संशोधन नियमावली को मंजूरी दी गई है। जबकि सातवें वेतनमान के भत्तों के लिए वित्त मंत्री प्रकाश पंत की अध्यक्षता में समिति गठित की है।

कैबिनेट के कुछ अन्य महत्वपूर्ण फैसले
-उत्तराखंड नगर निकाय एवं प्राधिकरण हेतु विशेष प्रावधान प्रावधान 2018 अध्यादेश कैबिनेट में पास। इसके अंतर्गत लागू तिथि से तीन साल तक कोई भी दंडात्मक कार्यवाही नहीं की जाएगी। पूर्व में 2016 के अध्यादेश की नियमावली कब तक लागू रहेगी, जब तक नई नियमावली नहीं बन जाती है। इस अध्यादेश का संबंध केवल मलिन बस्तियों के लिए ही है।

-किशोरी बालिका सेनेटरी नैपकिन योजना के अंतर्गत प्रति पैकेट आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को दो रुपये प्रोत्साहन धनराशि दी जाएगी। इसके लिए राज्य सरकार छह करोड़ रुपए का रिवॉल्विंग फंड बनाएगी।

-राज्य पुनर्गठन आयुक्त कार्यालय उत्तराखंड लखनऊ को धन कर संबंधित कार्मिकों को देहरादून वापस बुलाया जाएगा। इस वक्त चार कार्मिक कार्यरत हैं।

-न्यायालय शुल्क संशोधन विधेयक 2018 को मंजूरी। कोर्ट फीस ट्रेजरी के अतिरिक्त ई-पेमेंट को मिली मंजूरी। यह व्यवस्था नैनीताल हाईकोर्ट और अधीनस्थ न्यायालय में होगी लागू।

-उत्तराखंड पुलिस निरीक्षक एवं उप निरीक्षक सेवा नियमावली 2018 को मंजूरी।

-डब्ल्यूएचओ सहायतित उत्तराखंड परियोजना मे 25 आइटीआइ को चुनकर उन्हें अपग्रेड किया जाएगा।

-उत्तराखंड निवेश सम्मेलन 2018 को मंजूरी, 25 करोड़ का बजट स्वीकृत। 1250 करोड़ जारी करने को मिली मंजूरी।

महिलाओं ने किया मुख्यमंत्री के इस फैसले का स्वागत, जाने क्या है वह फैसला

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने कहा कि उत्तराखंड की देश और विश्वभर में एक अलग पहचान है। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड देवों की भूमि है और देव भूमि में नाबालिग बच्चियों के साथ जघन्य अपराधों के लिये मृत्युदंड से कम सजा हो ही नहीं सकती। इस दौरान प्रदेशभर से आयी 300 से अधिक महिलाओं ने मुख्यमंत्री के इस फैसले का स्वागत किया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि हमने विचार किया कि उत्तराखण्ड में छोटी मासूम बच्चियों के साथ दुष्कर्म जैसे जघन्य अपराधों के लिए मृत्युदंड का कानून बनाया जाएगा। उन्होंने कहा कि देश में वर्ष 2016 में 38947 रेप के केस दर्ज किए गए, जिनमें से 33628 में ही चार्जसीट दर्ज हो सकी। इनमें से 18552 में ट्रायल पूरी हुई एवं 4739 में सजा हो पाई। छोटी-छोटी बालिकाओं के साथ रेप जैसे जघन्य अपराधों के लिए मृत्यु दंड से कम सजा नहीं हो सकती।

अपराधी के मन में मौत का भय आना ही इस कानून का मकसद है। मुख्यमंत्री ने कहा इसके लिए मां को मजबूत होना आवश्यक है। मां मजबूत होगी तो परिवार मजबूत होगा। हमारी बच्चियां ऐसे हालात का मुकाबला कर सके इसके लिए हमें उन्हें मजबूत बनाना होगा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि आज के इस आधुनिक युग में सिर्फ नौकरी का इंतजार करना ठीक नहीं। आज के युवाओं को स्वरोजगार की ओर बढ़ना होगा। राज्य सरकार द्वारा इसके लिए छोटी सी शुरुआत की है। महिला स्वयं सहायता समूह की सहायता से देवभोग प्रसाद तैयार कर प्रदेश के मंदिरों में वितरित किया जा रहा है।

केदारनाथ में सवा करोड़ का देवभोग प्रसाद बेचा गया। उन्होंने कहा कि हमने 110 महिलाओं को एलईडी लाइट बनाने का प्रशिक्षण दिया है। हमारी महिला बहनों ने इसमें बहुत अच्छा प्रदर्शन किया। इनके द्वारा निर्मित उत्पाद बहुत ही सस्ता एवं टिकाऊ है। जहां अन्य उत्पादों की एक साल की वारंटी है, हमारी बहनों द्वारा तैयार उत्पाद की दो साल की वारंटी है।

उन्होंने कहा कि राज्य सरकार द्वारा पिरूल नीति तैयार की गई है। इस में महिला समूहों को प्राथमिकता दी जाएगी। हमारे प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा आयुष्मान भारत योजना शुरू की गई है जिसमें देश की 40 प्रतिशत आबादी को हेल्थ कवरेज दिया जा रहा है। इस योजना के अंतर्गत राज्य सरकार में प्रदेश के सभी नागरिकों को हेल्थ कवरेज देने का फैसला किया है। प्रदेश का प्रत्येक व्यक्ति देश के किसी भी हॉस्पिटल में इलाज करा सकेगा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि जानकारी के अभाव में प्रदेश की बहुत सी जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ पात्र लोगों को नहीं मिल पाता। हम सभी का प्रयत्न होना चाहिए, ऐसे पात्र लोगों को इसकी जानकारी देकर उनकी सहायता करें।

किसी भी जाति का प्रशिक्षित व्यक्ति बन सकता है मंदिर में पुजारी

हाईकोर्ट नैनीताल ने साफ किया है कि राज्य के एससी-एसटी व अन्य निम्न वर्ग के लोगों को किसी भी मंदिर में प्रवेश से रोका नहीं जाएगा। उच्च कुलीन पंडित निम्न जाति के लोगों को मंदिर में पूजा के लिये रोक नहीं सकते है। कोर्ट ने यह भी कहा कि एक प्रशिक्षित व योग्य व्यक्ति ही मंदिर का पुजारी बन सकता है। फिर चाहे वह किसी भी जाति का क्यों न हो।

राजस्थान निवासी पुखराज और अन्य ने जनहित याचिका दायर कर कहा था कि हरिद्वार हर की पैड़ी में अर्धकुंभ के दौरान बनाई गई सीढ़ियां संत रविदास मंदिर को जोड़ती हैं। इन सीढ़ियों के बनने से मंदिर को बहुत नुकसान हुआ है और लोगों को मंदिर दर्शन से वंचित रहना पड़ रहा है। 2016 में सरकार के आदेश के बाद रविदास मंदिर की सीढ़ियां 42.17 लाख रुपये खर्च कर फिर से बनाई जा रही हैं। जिससे मंदिर को फिर नुकसान हो रहा है और यह सरकारी धन का दुरुपयोग भी है। वरिष्ठ न्यायाधीश न्यायमूर्ति राजीव शर्मा व न्यायमूर्ति लोकपाल सिंह की खंडपीठ ने गुरुवार को इस मामले का विस्तृत संदर्भ लेते हुए एससी-एसटी वर्ग के व्यक्तियों के प्रवेश व पूजा को लेकर भी आदेश पारित किया है। खंडपीठ ने जिला प्रशासन हरिद्वार को सीढ़ियां हटाने से पहले नगर निगम व एससी-एसटी वर्ग के लोगों के साथ बैठक करने के निर्देश दिए।

डेढ़ माह में हरिद्वार की सभी सड़क, गलियों व पैदल मार्गो से अतिक्रमण हटाने, चंडीघाट, चंडी पुल पर अवैध कब्जे विशेष अभियान चलाकर हटाने को कहा है। जिलाधिकारी हरिद्वार को गंगा घाट की सफाई सुनिश्चित करने, कूड़े का वैज्ञानिक तरीके से निस्तारण करने के निर्देश दिए हैं। मंडलायुक्त गढ़वाल को उन अफसरों के खिलाफ कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं, जिनके कार्यकाल में अतिक्रमण हुआ। हर की पैड़ी में संत रविदास का उचित रखरखाव व सौंदर्यीकरण तीन माह में किया जाए।

वहीं पूर्व राज्यसभा सदस्य व भाजपा नेता तरूण विजय ने मंदिरों में पुजारी की नियुक्ति को लेकर हाइकोर्ट के फैसले का स्वागत किया है। उन्होंने कहा कि अब इस संबंध में हिंदू संगठनों को आगे आकर सेतु बनने का कार्य करना चाहिए।

विद्यालय विशेष बच्चों के लिये अलग से हॉस्टल बनायें

शारीरिक व मानसिक रूप से विकलांग व विशेष आवश्यकता वालें बच्चों पर हाईकोर्ट नैनीताल ने आदेश पारित किया है। इस आदेश में इन बच्चों के लिये विद्यालय को विशेष सुविधायें मुहैया करायी जायेंगी। साथ ही विद्यालयों को अलग से शिक्षकों की नियुक्ति करने व अलग हॉस्टल बनाये जाने के आदेश दिए गये है।

वरिष्ठ न्यायाधीश न्यायमूर्ति राजीव शर्मा व न्यायमूर्ति लोकपाल सिंह की खंडपीठ ने कमल गुप्ता के पत्र पर स्वतः संज्ञान लेते हुए जनहित याचिका दायर की थी। याचिकाकर्ता ने पत्र में कहा था कि प्रदेश के विद्यालयों में दिव्यांगों व विशेष आवश्यकता वाले बच्चों की शिक्षा के लिए कोई सुविधा नहीं है। जिस कारण उन्हें दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। संविधान के अनुच्छेद 21 ए में छह से 14 साल तक के बच्चों को निरूशुल्क व अनिवार्य शिक्षा की बात कही गई है। खंडपीठ ने पिछले दिनों मामले में सुनवाई पूरी कर फैसला सुरक्षित रख लिया था।

हाईकोर्ट ने जरूरतमंद बच्चों के लिए विशेष प्रशिक्षित शिक्षकों की नियुक्ति करने तथा बच्चों को हर माह एक हजार छात्रवृत्ति प्रदान करने के आदेश पारित किए हैं। आदेश में यह भी कहा है कि सरकार ऐसे बच्चों को शैक्षणिक सत्र से पहले यूनीफार्म, किताबें उपलब्ध कराई जाएं। राज्य सरकार विशेष आवश्यकता वाले बच्चों के लिए एक साल के भीतर राज्य के चार जिलों में छात्रवास बनाए। जिन विशेष आवश्यकता वाले बच्चों के अभिभावक उनकी जरूरतें पूरी नहीं कर सकते, ऐसे अभिभावकों की मदद सरकार करे। सरकार सरकारी, गैर सरकारी, सहायता प्राप्त व गैर सहायता प्राप्त विद्यालयों के दिव्यांग बच्चों को स्वतंत्र विचरण के लिए मुफ्त में ट्रांसपोर्ट सुविधा प्रदान करे।

राज्य को मिली आईडीपीएल की 833 एकड़ भूमि

इंडियन प्राइवेट लिमिटेड (आईडीपीएल) की 899.53 एकड़ भूमि से 833.25 एकड़ भूमि केंद्र ने राज्य सरकार को सौंप दी है। विदित हो कि इस भूमि में से 200 एकड़ भूमि राज्य सरकार एम्स ऋषिकेश को देने का एलान कर चुकी है तथा शेष भूमि पर राज्य सरकार कन्वेंशन सेंटर बनायेगी।

मंगलवार को देहरादून के निकट डोईवाला में सिपेट का उद्घाटन करने पहुंचे केंद्रीय रसायन एवं उर्वरक मंत्री अनंत कुमार ने मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र रावत को दस्तावेज सौंपने के बाद कहा कि आइडीपीएल का संचालन केंद्र सरकार पूर्ववत करती रहेगी।

उन्होंने राज्य को सौंपी गयी शेष भूमि में से 200 एकड़ भूमि ऋषिकेश एम्स के विस्तार के लिए प्रदान करने का आग्रह किया। जबकि शेष भूमि पर विश्वस्तरीय कन्वेंशन सेंटर खोलने की योजना को आगे बढ़ाने की सहमति दी।

मुख्यमंत्री ने केंद्र सरकार के इस फैसले को ऐतिहासिक बताते हुए कहा कि इस जमीन पर सरकार आगामी पांच वर्षों में विश्व स्तरीय कन्वेंशन सेंटर का निर्माण करेगी। जिससे राज्य में पर्यटन को नई दिशा मिलेगी।

आमजन के सहयोग से ही गंगा होगी स्वच्छः त्रिवेन्द्र

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने कहा कि गंगा को स्वच्छ व निर्मल बनाने के लिये आम जनता को सहयोग बहुत आवश्यक है। यह बात मुख्यमंत्री ने ऋषिकेश स्थित चंद्रेश्वर घाट में परमार्थ निकेतन के सौजन्य से निर्मित सीवरेज ड्रेन री-मीडिएशन प्रोजेक्ट के उद्धाटन के दौरान कही।

मुख्यमंत्री ने कहा कि परमार्थ निकेतन द्वारा सीवरेज के पानी को स्वच्छ बनाने के लिए उपयोग की जा रही हालैंड से आयातित तकनीक कम खर्च पर पानी को स्वच्छ बनाने में सक्षम है। इस तकनीक का उपयोग प्रायोगिक तौर पर चंद्रभागा नदी के माध्यम से गंगा नदी में मिलने वाले सीवरेज को साफ करने में किया जाएगा। यह तकनीक कारगर साबित होने पर इसे गंगा नदी से जुड़े अन्य सीवरों में भी स्थापित किया जाएगा। जिन नदियों को पार करने में बदबू के कारण लोगों को परेशानी होती थी। वर्ष 2020 तक इन्हें इतना स्वच्छ कर दिया जाएगा कि उन स्थानों पर सेल्फी खिंचवा सकेंगे।

मुख्यमंत्री ने कहा कि गोमुख से समुद्र तट पर 2500 किलोमीटर लंबी विश्व प्रसिद्ध नदी गंगा को स्वच्छ बनाने में आमजन के साथ अन्य संस्थाओं को भी आगे आना होगा। ताकि गंगा नदी को स्वच्छ व साफ रखा जा सके। उन्होंने कहा कि ऋषिकेश विश्व योग की राजधानी के रूप में स्थापित हुआ है, जो कि हमारे राज्य व देश के लिए गौरव की बात है।

विश्व प्रसिद्धि रखने वाले इस सुंदर शहर को स्वच्छ रखना हम सबकी नैतिक जिम्मेदारी है, जिसमें विभिन्न संस्थाओं का सहयोग अपेक्षित है। स्वच्छ गंगा की स्वच्छता व साफ सफाई से जुड़े अधिकारियों के कार्य की निरंतर समीक्षा की जाएगी। इस अवसर पर स्वामी चिदानंद महाराज ने कहा कि गंगा इस देश की धरोहर है। इस को स्वच्छ रखना हम सबकी नैतिक जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि दिल्ली निवासी विकास द्वारा एक वीडियों पिछले दिनों वायरल हुयी थी। जिसे हमने संज्ञान में लेकर गंगा पर गिर रहे इस नाले के दूषित पानी को स्वच्छ कर गंगा में मिलाने का संकल्प लिया। उन्होंने कहा कि हम सीवर प्वाइंट को सेल्फी प्वाइंट बनाएंगे और बुधवार को प्रोजेक्ट के उद्धाटन अवसर मुख्यमंत्री ने सेल्फी लेकर इसका शुभारंभ किया।

आपदा से निपटने की तैयारियों को लेकर सीएम ने की समीक्षा

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत राज्य में आपदा से निपटने को लेकर सचेत नजर आ रहे हे। इसलिये समय-समय पर जिलों के जिलाधिकारियों से आपदा को लेकर तैयारियों की समीक्षा कर रहे है। मंगलवार को भी सीएम ने समीक्षा बैठक ली। वीडियों कान्फें्रसिंग के माध्यम से उन्होंने आपदा की तैयारियों की समीक्षा ली। उन्होंने कहा कि आपदा के निपटने में धन की कमी नहीं आनी चाहिए। उन्होंने आपदा प्रबंधन संबधी प्रशिक्षण सुनिश्चित कराने के सुझाव जिलाधिकारियों को दिए।

मुख्यमंत्री ने सभी जिलाधिकारियों से विस्तृत जानकारी लेते हुये कहा कि प्रशासन को किसी भी स्थिति का सामना करने के लिए पूरी तरह से तैयार रहना होगा। सभी आवश्यक प्रबंध पहले ही सुनिश्चित कर लिए जाये। आकस्मिक परिस्थितियों में कम्यूनिकेशन टूटना नहीं चाहिए। रेस्पान्स टाईम सबसे महत्वपूर्ण है। जल्द से जल्द घटना स्थल तक पहुंचना और प्रभावितों को राहत उपलब्ध करवाने की व्यवस्था हो। चिन्हित आश्रय स्थलों पर भोजन, पेयजल, कैरोसीन, दवाईयां व अन्य आवश्यक सामग्री की व्यवस्था सुनिश्चित हो। राशन की क्वालिटी समय-समय पर चौक कर ली जाए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि अर्धसैन्य बलों के साथ भी समन्वय स्थापित किया जाए। सेना से भी आपदा की स्थिति में पूरा सहयोग मिलेगा। इस संबंध में सेना प्रमुख से उनकी बात हुई है। प्रचार माध्यमों से बाहर से आने वाले पर्यटकों को आगाह किया जाए कि वे नदियों के समीप न जाएं। कन्ट्रोल रूम 24 घंटे संचालित हों। मुख्यमंत्री ने ट्रैफिक प्रबंधन पर भी विशेष ध्यान देने के निर्देश दिए।

बैठक में सभी जिलाधिकारियों द्वारा विस्तार से जानकारी दी गई। बताया गया कि संवेदनशील भूस्खलन क्षेत्रों में वैकल्पिक मार्ग चिन्हित किए गए हैं। वर्षा से बाधित होने वाले मार्गों को कम से कम समय में खोला जा सके, इसके लिए जेसीबी, क्रेन व मानव संसाधनों को संवेदनशील स्थानों पर पहले से ही तैनात किया जा रहा है। जगह-जगह बनाए जाने वाले आश्रय स्थलों पर भोजन, पेयजल, कैरोसीन, दवाईयां व अन्य आवश्यक सामग्री की व्यवस्था की गई है। अधिकारियों व कर्मचारियों को आपदा प्रबंधन का प्रशिक्षण प्रदान किया गया है। मॉक ड्रिल भी समस-समय पर आयोजित की जाती है।

निर्धन व्यक्ति का जीवन स्तर ऊंचा उठाना केंद्र व राज्य सरकार की प्राथमिकताः त्रिवेन्द्र

मुख्यमंत्री त्रिर्वेन्द्र सिंह रावत ने कहा कि केद्र व राज्य सरकार की प्राथमिकता विकास की मुख्यधारा से पिछड़े देश व राज्य के सभी निर्धनों को आर्थिक व सामाजिक रूप से जीवन स्तर को ऊंचा उठाना हैं। नानकमत्ता ऊधमसिंह नगर में आयोजित केंद्रीय योजनाओं के लाभार्थियों के सम्मेलन में पहुंचे मुख्यमंत्री ने कहा कि 2022 तक भारत एक नये भारत के रूप में दिखे, यह देश के प्रधानमंत्री का सपना है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि ऊधमसिंह नगर जिले में उज्ज्वला, सौभाग्य, उजाला योजना के अन्तर्गत रजिस्टर्ड होने वाले परिवारों को 15 अगस्त तक पूरी तरह योजनाओं से लाभांवित कर दिया जायेगा। उन्होंने कहा कि राज्य में सरकार बनते ही भ्रष्टाचार मुक्त शासन देने की दशा में लगातार कदम बढ़ाये जा रहे हैं। जिस कढ़ी में अभी तक कई भ्रष्टाचारी जेल जा चुके हैं तथा कई जाने वाले हैं। उन्होंने कहा कि किसानों के उत्थान हेतु राज्य सरकार द्वारा कृषि के क्षेत्र में कार्य करने वाले एक लाख 80 हजार किसानों को दो प्रतिशत वार्षिक ब्याज दर पर ऋण उपलब्ध कराया गया है।

उन्होंने कहा कि मार्केट में चीनी सस्ती होने के कारण मिलों से अभी तक चीनी मार्केट में नही पहुॅचने के बावजूद भी राज्य सरकार द्वारा गन्ना किसानों के लिए 40 करोड़ रूपये की धनराशि जारी की गयी है। उन्होंने कहा कि गेहुॅ उत्पादन करने वाले किसानों को समय पर लाभ पहुॅचाया जायेगा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि गॉव के विकास के लिए पहले एक रूपया दिया जाता था तो भ्रष्टाचार के कारण 50 पैसे भी विकास कार्य में सही से नहीं लग पाते थे तथा सामाजिक उत्थान के कार्यों में भी भ्रष्टाचार फैला हुआ था। भ्रष्टाचार को खत्म करने के लिए प्रधानमंत्री ने बिचौलियों के रास्तों को बन्द किया तथा सभी कार्य डिजिटल किये जा रहे हैं। योजनाओं का शतप्रतिशत पैसा ग्राम प्रधान के खाते में आता है तथा विभिन्न लाभप्रद योजनाओं का पैसा डीबीटी योजना के अन्तर्गत सीधे लाभार्थियों के खाते में आता है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री के कुशल नेतृत्व के कारण विश्व में भारत माता की जय-जयकार होती है तथा भारत ने अपनी शाक्ति का एहसास दुनिया को कराया है।

उन्होंने कहा कि विदेश नीति में विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने कमाल कर दिखाया है तथा देश के किसी भी नागरिक के विदेश में फंसे होने पर उसे तत्काल देश में लाने का काम किया जाता है। उन्होंने कहा कि नितिन गडकरी के नेतृत्व में प्रत्येक दिन 27 किमी राजमार्ग का निर्माण किया जा रहा है जोकि पहले प्रतिदिन मात्र 04 किमी बनता था। गडकरी ने अगले वर्ष से प्रतिदिन 40 किमी राजमार्ग निर्माण का लक्ष्य तय किया है।

उन्होेंने कहा कि वर्तमान समय में भारत पोलियों मुक्त देश बन चुका है तथा वर्ष 2025 तक देश को टीबी मुक्त देश बनाने का लक्ष्य रखा गया है। उन्होंने कहा कि टीबी के रोगियों को निःशुल्क दवाईयां उपलब्ध कराने के साथ ही छह हजार रूपये पोषण हेतु वार्षिक दिये जा रहे हैं ताकि रोगी पुष्टाहार ग्रहण करते हुए जल्दी से स्वस्थ व निरोग हो सके। उन्होंने कहा कि आयुष्मान भारत योजना के अन्तर्गत अपना राज्य पहला ऐसा राज्य है जो 20 लाख परिवारों को 15 अगस्त तक योजना से कवर करने वाला है।

कार्यक्रम में 20 लाभार्थियों को उज्ज्वला योजना के अन्तर्गत गैस कनेक्शन वितरित किये गये तथा हाईस्कूल व इण्टरमीडिएट की बोर्ड परीक्षा में क्षेत्र का नाम रोशन करने वाले चार मेधावी विद्यार्थियों को सम्मानित किया गया।

ऋषिकेश में खुला देश का पहला सैक्स सीमन केंद्र

ऋषिकेश में अतिहिमीकृत वीर्य उत्पादन केंद्र का शिलान्यास शनिवार को हो गया। राष्ट्रीय गोकुल मिशन योजना के तहत देश का पहला सैक्स सोर्टेड सीमन उत्पादन प्रयोगशाला का शिलान्यास केंद्रीय कृषि मंत्री राधामोहन सिंह व मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने किया। इस प्रयोगशाला के द्वारा शर्तिया बछिया उत्पादन हो सकेगा। यानी कि बछिया पैदा करने की तकनीक विकसित हो सकेगी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राष्ट्रीय गोकुल मिशन देशी नस्ल के गौ वंश का संरक्षण कर उनकी दुग्ध उत्पादकता को बढ़ाना है। ऋषिकेश में स्थापित की जा रही सीमन प्रयोगशाला की इसमें महत्वपूर्ण भूमिका होगी। पशुपालन के माध्यम से किसानों की आय वृद्धि के लक्ष्य को हासिल किया जा सकता है। राज्य सरकार का प्रयास है कि वर्ष 2021 तक ऐसी व्यवस्था कर ली जाए जिससे हमारे गौवंश सड़कों पर आवारा न घूमें बल्कि किसानों की आजीविका के साथी बनें। बद्री नस्ल की गायों की दुग्ध उत्पादकता बढ़ाने में कुछ सफलता प्राप्त हुई है। इसे और अधिक बढ़ाने की कोशिश की जा रही है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि ऋषिकेश में अंतरराष्ट्रीय स्तर का कन्वेंशन सेंटर स्थापित किया जाएगा। उत्तराखण्ड को देश के अग्रणी राज्यों की पंक्ति में लाने के गम्भीरता से प्रयास किए जा रहे हैं। पीएमजीएसवाई में राज्य में लक्ष्य से 200 किमी अधिक सड़क का निर्माण किया गया है। पर्वतीय गर्वमेंट ई-मार्केट व बेस्ट फिल्म फ्रेंडली राज्य के रूप में भारत सरकार द्वारा सम्मानित किया गया है। दुर्गम क्षेत्रों में इंटरनेट की उपलब्धता के लिए एयरोस्टेट बैलून का सफल परीक्षण किया गया है। उत्तराखण्ड पहला राज्य है जो इस तकनीक का उपयोग करने जा रहा है।

केन्द्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री राधा मोहन सिंह ने कहा कि केन्द्र सरकार किसानों के कल्याण के लिए पिछले चार सालों में पूर्ण समर्पण के साथ कार्य कर रही है। सरकार के प्रयासों से देश के 700 से अधिक कृषि वैज्ञानिक लैब से निकलकर जमीनी परीक्षण के लिए फील्ड लेवल तक पहुंचाए हैं। उन्होंने कहा कि पशुपालन, गाँव की आर्थिकी की रीढ़ है। हमारा देश पशुपालन में पहले पायदान में होने के बावजूद यहां उत्पादकता में कमी है। हमें वार्षिक वृद्धि दर के साथ-साथ उत्पादन बढ़ाने पर जोर देना है।

उत्तराखंड पुलिस ने मांउट एवरेस्ट पर सफल आरोहण कर किया ऐतिहासिक कार्यः त्रिवेन्द्र

माउंट एवरेस्ट पर्वतारोहरण पर गये उत्तराखंड पुलिस के 15 सदस्यों को मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया। मुख्यमंत्री ने उन आठ सदस्यों जिन्होंने माउंट एवरेस्ट पर सफलतापूर्वक आरोहण किया। को पद में पदोन्नति व वेतन वृद्धि की घोषणा की।

जिन आठ सदस्यों ने सफलतापूर्वक आरोहण किया। उनमें से छह आरक्षी, एक निरीक्षक तथा एक मिनी फायरमैन शामिल हैं। मुख्यमंत्री ने इन छह आरक्षियों को मुख्य आरक्षी के पद पर पदोन्नति एवं निरीक्षक तथा मिनी फायरमैन को एक-एक वैयक्तिक वेतन वृद्धि की घोषणा की। माउंट एवरेस्ट आरोहण के लिए गये दल को पांच लाख रूपये देने की घोषणा भी की। जिन आरक्षियों को पदोन्नति दी जायेगी। उनमें विजेन्द्र प्रसाद काला, मनोज जोशी, सूर्यकान्त उनियाल, विजेन्द्र कुड़ियाल, प्रवीण सिंह, योगेश रावत शामिल हैं। जबकि निरीक्षक संजय उप्रेती एवं मिनी फायरमैन रवि चौहान को वेतन वृद्धि दी जायेगी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखण्ड पुलिस दल ने माउंट एवरेस्ट पर सफल आरोहण कर एक ऐतिहासिक कार्य किया है। उत्तराखण्ड पुलिस का दल देश का ऐसा पहला पुलिस दल है, जिसने माउंट एवरेस्ट पर सफल आरोहण किया है। उन्होंने कहा कि प्रदेश को अनुभवी और हिम्मत वाले जवानों की हमेशा आवश्यकता रहेगी। इस तरह के अभियानों में प्रतिभाग कर जवानों का हौंसला बढ़ता है और नये अनुभव प्राप्त होते हैं। इस तरह के अभियान समय-समय पर चलाने जरूरी हैं। उत्तराखण्ड पर्वतीय राज्य होने के साथ ही आपदा के दृष्टि से संवेदनशील राज्य है। राज्य में आपदा प्रबन्धन के लिए तकनीक के विकास के साथ ही प्रशिक्षित लोगों का होना जरूरी है। इसके लिए राज्य सरकार हर सम्भव प्रयास कर रही है।

मुख्य सचिव उत्पल कुमार सिंह ने उत्तराखण्ड पुलिस दल को माउंट एवरेस्ट पर सफल आरोहण पर बधाई देते हुए कहा कि जवानों के दृढ़ निश्चय एवं आत्मविश्वास की वजह से अभियान सफल रहा। उत्तराखण्ड में कार्य करने के लिए अपार सम्भावनाएं हैं, यहां के लोगों में बहुत क्षमता है। उन्होंने कहा कि पुलिस के इस दल ने टीम स्प्रिट का संदेश दिया है। हमें जनता की सेवा के लिए भी टीम स्प्रिट की भावना से कार्य करना होगा।

पुलिस महानिदेशक अनिल कुमार रतूड़ी ने कहा कि सीमित संसाधन होने के बावजूद भी उत्तराखण्ड पुलिस दल ने दुनिया की सबसे ऊँची चोटी पर आरोहण कर प्रदेश एवं उत्तराखण्ड पुलिस का गौरव बढ़ाया है। उन्होंने कहा कि ऐसे साहसिक अभियान के बाद जवानों को जो अनुभव प्राप्त हुए हैं, उससे निश्चित रूप से भविष्य में फायदा होगा।