बीआरओ द्वारा निर्मित 75 प्रमुख परियोजनाओं को रक्षा मंत्री ने किया राष्ट्र को समर्पित

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने सीमा सड़क संगठन द्वारा निर्मित 75 प्रमुख बुनियादी ढांचा परियोजनाओं का लोकार्पण कर राष्ट्र को समर्पित किया। इसमें 09 परियोजनाएं उत्तराखंड की शामिल हैं। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी वर्चुअल रूप से उपस्थित थे।

उत्तराखंड में जिन 09 परियोजनाओं का लोकार्पण किया गया उनमें गढ़वाल क्षेत्र में करछा पुल, मींग गधेरा पुल, घस्तोली पुल, पागल नाला पुल और देहरादून जनपद में शिवालिक परियोजना का कार्यालय और रहने का स्थान शामिल हैं। कुमाऊं क्षेत्र में सुरिंगघाट पुल, चिमला पुल, पैनागढ़ पुल और गोसीगढ़ पुल का लोकार्पण किया गया।

उत्तराखंड की 09 परियोजनाओं का लोकार्पण करने पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह का आभार व्यक्त किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड में पूरी हुई बुनियादी ढांचे की ये परियोजनाएं विशेष रूप से दूरदराज और वंचित क्षेत्रों के उत्थान के लिए काफी सहायक होंगी। ये परियोजनाएं कनेक्टिविटी को बढ़ाकर और सामाजिक-आर्थिक विकास को बढ़ावा देकर राज्य के परिदृश्य को बदलने में सहयोग करेंगी। इनसे न केवल पर्यटन और स्थानीय अर्थव्यवस्था को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि महत्वपूर्ण रोजगार के अवसरों के सृजन का भी अवसर मिलेगा। ये परियोजनाएं जीवंत ग्राम समुदायों के विकास को गति देंगी और दूरदराज के सीमावर्ती क्षेत्रों तक पहुंच में सुधार करेंगी, जिससे इन रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण स्थानों में आर्थिक विकास और रक्षा क्षमताएं दोनों मजबूत होंगी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि नए पुलों के निर्माण से राज्य में कनेक्टिविटी में काफी सुधार होगा। यात्रा के समय को कम करेंगे। इससे धार्मिक एवं सामान्य पर्यटन के साथ ही सांस्कृतिक आदान-प्रदान को बढ़ावा देंगे और उत्तराखंड को एक प्रमुख पर्यटन स्थल के रूप में स्थापित करेंगे। ये बुनियादी ढांचा परियोजनाएं क्षेत्र के लिए दीर्घकालिक सतत विकास और समृद्धि को बढ़ावा देंगी।

इस अवसर पर सचिव आर. मीनाक्षी सुंदरम, शैलेश बगोली, शिवालिक परियोजना के मुख्य अभियंता ब्रिगेडियर प्रसन्न जोशी और कर्नल प्रदीप शर्मा उपस्थित थे।

आतिशबाजी कर मंत्री अग्रवाल ने मनाई कार्यकर्ताओं के साथ हरियाणा फतह की खुशी

हरियाणा विधानसभा चुनाव में भाजपा की हैट्रिक लगने व प्रचंड बहुमत की सरकार बनने पर क्षेत्रीय विधायक व मंत्री डॉ प्रेमचंद अग्रवाल ने कार्यकर्ताओं के साथ आतिशबाजी की और मिष्ठान खिलाकर एक दूसरे को बधाई दी।

मंगलवार को भाजपा कार्यकर्ता कोयल घाटी किराए पर एकत्रित हुए यहां मंत्री डॉ प्रेमचंद अग्रवाल ने कहा कि केंद्र की मोदी सरकार व हरियाणा की भाजपा सरकार के विकास कार्यों से प्रभावित होकर जनता ने पुनः अपना आशीर्वाद दिया है। कहा कि भाजपा ने हरियाणा विधानसभा चुनाव में जीत की हैट्रिक लगाई है और प्रचंड बहुमत की सरकार बनाई है।

डॉ अग्रवाल ने इस जीत का श्रेय हरियाणा के देवतुल्य कार्यकर्ताओं को दिया। उन्होंने कहा कि किसी भी पार्टी की रीढ़ उसके कार्यकर्ता होते हैं। भाजपा कार्यकर्ताओं ने सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं को आम जनता तक पहुंचाया।

डॉ अग्रवाल ने कहा कि जम्मू कश्मीर में भाजपा ने अपना जनादेश बढ़ाया है। वहां की जनता ने भी भाजपा के कार्यों को सराहते हुए उसके पक्ष में मतदान किया है। उन्होंने कहा कि भाजपा ने जम्मू और कश्मीर में अपना ग्राफ बढ़ाया है।

इस मौके पर भाजपा कार्यकर्ताओं ने गोलघाटी पर आतिशबाजी की और मिष्ठान खिलाकर एक दूसरे को बधाई दी। इस अवसर पर मंडल अध्यक्ष सुमित कुमार, पूर्ण दायित्वधारी संदीप गुप्ता, संजय व्यास, संजय शास्त्री, इंद्र कुमार गोदवानी, जिला उपाध्यक्ष दिनेश सती, प्रतीक कालिया, चेतन शर्मा, जितेंद्र अग्रवाल, कपिल गुप्ता, महिला मोर्चा मण्डल अध्यक्ष गुप्ता, शिव कुमार गौतम, रुचि जैन, नितिन सक्सेना, दीपक बिष्ट, देवदत्त शर्मा, जगावर सिंह, शंभू पासवान, राजपाल ठाकुर, नंदकिशोर जाटव, एकांत गोयल, जितेंद्र पाल, सोनू पांडे, रूपेश गुप्ता, सचिन अग्रवाल, सीमा रानी, रेखा चौबे, आशा शुक्ला, रुचि जैन, सुधा असवाल, निवेदिता सरकार, उषा जोशी, प्रदीप कोहली, राजेंद्र बिजलवान, रमन भट्ट, सुभाष जायसवाल, अनंतराम भट्ट, विशाल शाही, गंभीर मेवाड़, रंजन अंथवाल, विनायक कुमार आदि उपस्थित रहे।

नई बातः उत्तराखंड में 14 महिलाओं ने हासिल किया व्हाइट वॉटर रिवर राफ्टिंग गाइड सर्टिफिकेट, अब चलाएंगी राफ्ट

देहरादून। उत्तराखण्ड की बेटियां जल्द ही ऋषिकेश में गंगा नदी पर पर्यटकों को राफ्टिंग कराती नजर आएंगी। इसके लिए पर्यटन विभाग की ओर से 14 महिलाओं को व्हाइट वॉटर रिवर राफ्टिंग गाइड का प्रशिक्षण दिया गया है। जो अब पंजीकरण प्रक्रिया पूरी होने के बाद, बतौर प्रोफेशनल राफ्टिंग गाईड अपना करियर शुरू करने को तैयार हैं।

ऋषिकेश हाल के समय में राफ्टिंग के प्रमुख केंद्र के रूप में उभरा है, यहां हर साल पांच लाख से अधिक पयर्टक राफ़्टिंग के लिए आ रहे हैं, इस तरह राफ्टिंग गतिविधि, कारोबार के साथ ही रोजगार का भी जरिया बन रही है। लेकिन अब तक राफ्टिंग गाइड का काम पूरी तरह पुरुष ही कर रहे थे। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देश पर पहली बार उत्तराखंड पर्यटन विभाग ने महिलाओं को रिवर राफ्टिंग गाइड का प्रशिक्षण दिया है। इसके बाद पर्यटन विभाग ने चुनिंदा 14 महिलाओं को अप्रैल से जून के बीच तीन महीने का निशुल्क प्रशिक्षण दिया। इसमें प्रशिक्षण के साथ ही रहने खाने का खर्च भी पर्यटन विभाग की ओर से उठाया गया।
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सफलता की कहानी
01- पौड़ी जिले में सिरांसू गांव निवासी प्रियंका राणा, वर्तमान में बीबीए कर रही हैं, प्रियंका क्याकिंग एथलीट हैं। प्रियंका बताती हैं कि उनके गांव के पास बड़ी संख्या में राफ्टिंग होती है, ऐस में जब उन्हे उत्तराखंड सरकार के अधीन महिलाओं को राफ्टिंग गार्डड का प्रशिक्षण दिए जाने की जानकारी मिली तो उन्होंने इसमें अपना पंजीकरण कर लिया। प्रियंका इसके लिए पुष्कर सिंह धामी सरकार का आभार व्यक्त करते हुए कहती हैं कि अब बतौर राफ्टिंग गाइड अपना करियर बनाना चाहती हैं।

02- रामनगर निवासी कामाक्षी गोयल वर्तमान में गोवा की नॉटिकल कंपनी में काम कर रही हैं। कामाक्षी बताती हैं कि वो पहले से ही वाइट वॉटर फील्ड में जॉब कर रही थी, इसलिए उन्होंने स्किल बढ़ाने के लिए राफ्टिंग प्रशिक्षण लिया। इसके लिए उत्तराखण्ड सरकार की ओर से तीन महीने का प्रशिक्षण के साथ ही रहने खाने की सुविधा निशुल्क मिली। कामाक्षी इसे महिला सशक्तिकरण की दिशा में बड़ा प्रयास करार दे रही हैं।

03- ऋषिकेश निवासी मुस्कान भी पहले बैच में प्रशिक्षण प्राप्त कर चुकी हैं। मुस्कान अभी ऋषिकेश से ग्रैज्यूएशन कर रही हैं, मुस्कान बताती हैं कि तीन महीने तक उन्हें विदेशी प्रशिक्षकों ने रिवर राफ्टिंग की ट्रेनिंग दी, इस दौरान एक हफ्ते तक उन्होंने देवप्रयाग से लेकर ऋषिकेश तक गंगा में राफ्टिंग भी की, पूरी तरह महिलाओं के द्वारा संचालित यह अभियान लाजवाब था, मुस्कान अब इसी क्षेत्र में करियर बढ़ाना चाहती हैं, वो इसके लिए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी का आभार व्यक्त कर रही हैं।
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उत्तराखण्ड में साहसिक पर्यटन के क्षेत्र में रोजगार की अपार संभावनाएं हैं, अब बड़ी संख्या में महिला पयर्टक भी राफ्टिंग के लिए आ रही हैं। ऐसे में महिलाओं को बतौर राफ्ट गाईड प्रशिक्षण दिया जाने का प्रयास किया जा रहा है। अच्छी बात है कि महिलाओं ने इसके लिए रुचि दिखाई है, यह उत्तराखण्ड की बेटियों और महिलाओं को सशक्त बनाने की दिशा में अहम कदम साबित होगा।

– पुष्कर सिंह धामी
मुख्यमंत्री उत्तराखंड

सीएम धामी ने तीन साल कार्यकाल में 519 नई सड़कों और 195 सेतुओं का निर्माण किया

देहरादून। पुष्कर सिंह धामी सरकार के तीन साल बेमिसाल के दौरान पीएमजीएसवाई में उत्तराखण्ड में कुल 1481 किमी लंबाई युक्त 519 सड़कों का निर्माण किया गया, जिस कारण 250 सौ से अधिक आबादी वाले 35 नए गांवों तक सड़क पहुंच पाई।

धामी सरकार के तीन साल के कार्यकाल में जहां योजना के तहत कुल 1481 किमी लम्बाई युक्त 519 नई सड़कों और 195 सेतुओं का निर्माण किया गया, वहीं पहले से निर्मित 159 किमी लंबी 61 ग्रामीण सड़कों का भी अपग्रेडेशन किया गया। इन सड़कों और पुलों के निर्माण पर कुल 2310 करोड़ रुपए व्यय किए गए। धामी सरकार के दौरान 250 से अधिक जनसंख्या की 35 बसावटों को सड़क से जोड़कर ग्रामीणों की आवाजाही सुगम की गई है। योजना के तहत प्रथम और दूसरे चरण के कार्य अब पूरे होने की स्थिति में पहुंच गए हैं, अब पीएमजीएसवाई तृतीय चरण के तहत पूर्व में निर्मित सड़कों के अपग्रेडेशन के लिए 1824 करोड़ रुपए की स्वीकृति भारत सरकार से मिल गई है, इसके तहत कुल 2288 किमी लंबी सड़कों का अपग्रेडेशन किया जाना है। इसके अलावा वाइब्रेंट विलेज योजना के तहत सड़क से वंचित आठ बसावटों को सड़क सम्पर्क से जोड़े जाने के लिए 119 करोड़ की स्वीकृति भारत सरकार से प्राप्त की गई है। इसके बाद प्रदेश में 150 से कम जनसंख्या की कुल 1796 बसावटें ही ऐसी रह गई हैं, जहां सड़क नहीं पहुंच पाई है।

प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना दिसम्बर, 2000 में केंद्र की तत्कालीन अटल बिहारी वाजपेई सरकार ने प्रारम्भ की थी। योजना का मुख्य उद्देश्य गांवों को सम्पर्क मार्गों से जोड़ना है। यह योजना 90 प्रतिशत केंद्र पोषित है, शेष दस प्रतिशत अंशदान राज्य सरकार का होता है। योजना के प्रारंभ होने से अब तक उत्तराखण्ड में कुल 2329 सड़कों और 312 पुलों का निर्माण पूरा कर लिया गया है। योजना पर अब तक कुल 10183 करोड़ रुपए खर्च हो चुके हैं, जिसके फल स्वरूप 250 से अधिक जनसंख्या वाली 1846 बसावटों को सड़क से जोड़ा जा चुका है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की प्रेरणा से गांवों को सड़कों से जोड़ने के लिए प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना पर तेजी से काम किया जा रहा है। सड़कें प्रगति का आधार होती हैं, इसलिए हमारी सरकार का संकल्प है कि प्रत्येक गांव तक सडक पहुंचे। साथ ही सड़क मार्ग से वंचित शेष गांवों तक भी सड़क पहुंचाने के प्रयास किए जा रहे हैं।

– पुष्कर सिंह धामी
मुख्यमंत्री उत्तराखण्ड

धामी सरकार के बेहतर यात्रा प्रबंधन ने जीता यात्रियों का विश्वास

प्रदेश सरकार के बेहतर यात्रा प्रबंधन और सुरक्षा इंतजामों के चलते चार धाम यात्रा को लेकर यात्रियों में भारी उत्साह है। मानसून थमते ही यात्रा ने फिर रफ्तार पकड़ ली है। बीते दिवस 30 सितंबर को 20497 श्रद्धालु चार धाम दर्शन को पहुंचे। इनमें केदारनाथ धाम में सर्वाधिक 7350 तीर्थयात्री पहुंचे। अभी तक के पूरे यात्राकाल की संख्या पर नजर दौडाएं तो करीब 38 लाख श्रद्धालु चारधाम दर्शन को आ चुके हैं। केदारघाटी आपदा से निपटने में सरकार ने पूरी ताकत झोंककर जिस तेजी से स्थिति को सामान्य बनाया है, उससे यात्रियों का सरकार के प्रति विश्वास गहराया है। यात्री पूरे उत्साह और आस्था के साथ बाबा केदार के दर्शन को उमड़ पड़े हैं।
चारधाम यात्रियों की सुरक्षा मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की सर्वाेच्च प्राथमिकता रही है। मुख्यमंत्री के इस ध्येय वाक्य के अनुसार राज्य सरकार के यात्रा इंतजामों और व्यवस्थाओं का असर यात्रा पर दिखाई दिया है। केदारघाटी में 31 जुलाई को आई बड़ी आपदा का जिस प्रकार सरकार ने सामना किया, उसकी आम यात्रियों ने खुले दिल से तारीफ की है। पैदल मार्ग और पड़ावों पर फंसे यात्रियों और स्थानीय निवासियों को सुरक्षित निकालने में जरा भी देरी नहीं की गई। करीब 18 हजार लोगों को सुरक्षित रेस्क्यू कर उन्हें उनके गंतव्य तक सुरक्षित पहुंचा दिया गया। यही नहीं केदारघाटी में आम जनजीवन को बहाल करते हुए पैदल यात्रा मार्ग को सुधार कर यात्रा भी शुरू कर दी गई।
अब दूसरे चरण की यात्रा जोर पकड़ गई है। अक्टूबर और नवंबर माह में भी यात्रा के लिए बड़ी संख्या में यात्रियों ने पंजीकरण कराया है। 30 सितंबर को हेमकुंड और गोमुख समेत 22 हजार 244 श्रद्धालु चारधाम यात्रा पर पहुंचे। इनमें केदारनाथ के अलावा बदरीनाथ में 6811, गंगोत्री 3619, यमुनोत्री 2717, हेमकुंट 1632 और 115 श्रद्धालु गोमुख पहुंचे।

रिकॉर्ड बनाएगी चारधाम यात्रा
इस यात्राकाल में बीते दिवस 30 सितंबर तक कुल 37 लाख 91 हजार 205 यात्री चारधाम दर्शन को आ चुके हैं जबकि बीते वर्ष पूरे यात्राकाल में 56.13 लाख यात्री पहुंचे थे। इसी प्रकार वर्ष 2022 में 46.29 लाख और वर्ष 2019 में 34.77 लाख यात्री चारधाम दर्शन को पहुंचे। वर्ष 2020 और 2021 में कोरोना संक्रमण के चलते यात्रा प्रभावित रही। इन दो वर्षों में यात्री संख्या क्रमशः 3.30 लाख और 5.29 लाख रही।

इस वर्ष 17 दिन की देरी से शुरू हुई चारधाम यात्रा
इस वर्ष चारधाम यात्रा 10 मई से शुरू हुई है जबकि पिछले वर्ष 23 अप्रैल को गंगोत्री और यमुनोत्री धाम के कपाट खुलने के साथ ही यात्रा का श्रीगणेश हो गया था। तब केदारनाथ के कपाट 25 अप्रैल और बदरीनाथ धाम के कपाट 27 अप्रैल को खुले थे। इस वर्ष गंगोत्री, यमुनोत्री और केदारनाथ धाम के कपाट 17 दिन बाद यानी 10 मई को खुले हैं, जबकि बदरीनाथ धाम की यात्रा 12 मई से शुरू हुई है। यात्रा अभी अगले माह नवंबर तक चलेगी।

केदारघाटी आपदा से भी प्रभावित रही यात्रा
केदारघाटी में 31 जुलाई की रात आई भीषण आपदा का असर भी यात्रा पर पड़ा है। हालांकि धामी सरकार ने तेजी से राहत और बचाव कार्य करते हुए कुछ दिनों के अंतराल में ही आम जनजीवन को बहाल कर दिया लेकिन सुरक्षा कारणों से यात्रा को कई दिनों के लिए रोक दिया गया था।

बेहतर यात्रा प्रबंधन पर नजर
केदारनाथ धाम यात्रा मार्ग पर बनाए गए बीस पार्किंग स्थल।
पार्किंग प्रबंधन के लिए एक क्यूआर कोड-आधारित प्रणाली।
यातायात प्रबंधन के लिए सेक्टर मजिस्ट्रेट की तैनाती।
यात्रा पर निगरानी के लिए 850 सीसीटीवी कैमरे और 8 ड्रोन।
यात्रियों की सुविधा के लिए 56 पर्यटन सहायता केंद्रों की स्थापना।
ट्रैक रूट को साफ करने के लिए कुल 657 पर्यावरण मित्रों की तैनाती।
स्वास्थ्य विभाग की ओर से यात्रा मार्ग पर 50 स्क्रीनिंग कियोस्क की स्थापना। स्वास्थ्य मित्र हैं तैनात।
यात्रा मार्ग पर 156 एम्बुलेंस तैनात। 8 ब्लड बैंक और 2 भंडारण इकाइयां स्थापित
49 स्थायी स्वास्थ्य सुविधाएं और 26 चिकित्सा राहत पोस्ट। 22 विशेषज्ञ, 179 चिकित्सा अधिकारी और 299 पैरामेडिकल स्टाफ तैनात।

सुगम, सुरक्षित, सुलभ और सुव्यवस्थित चारधाम यात्रा सरकार की सर्वाेच्च प्राथमिकता है। देश-विदेश से हर वर्ष लाखों श्रद्धालु चारधाम यात्रा पर आते हैं। यात्रियों को सुरक्षित वातावरण प्रदान करने के लिए हमारी सरकार प्रतिबद्ध हैं। चारधाम यात्रा राज्य की आर्थिकी से भी जुड़ी है। राज्य में आज जिस तेजी के साथ श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ रही है, उसे देखते हुए हमें यात्रा व्यवस्थाओं को और विस्तार देना होगा। इसकी कवायद भी शुरू कर दी गई है। इस बार केदारघाटी आपदा के चलते व्यवस्थाएं प्रभावित हुई, लेकिन सरकार ने इस कठिन चुनौती का भी दृढ़तापूर्वक सामना कर केदार यात्रा को बहाल किया।
-पुष्कर सिंह धामी, मुख्यमंत्री, उत्तराखंड

सीएम धामी का संकल्प ले रहा आकार, 15-29 के आयु वर्ग में बेरोजगारी में आई 4.4 फीसदी की कमी

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी का संकल्प आकार ले रहा है। रोजगार देने में भी उत्तराखंड कीर्तिमान बना रहा है। पीरियोडिक लेबर फोर्स सर्वे (पीएलएफएस) रिपोर्ट में भी उत्तराखंड ने राष्ट्रीय औसत को भी पछाड़ दिया है। उत्तराखंड में बीते एक वर्ष में रोजगार के अवसर बढ़ने से बेरोजगारी घटी है। सभी आयु वर्गाे पर नजर डालें तो इसकी दर 4.5 फीसदी से घटकर 4.3 प्रतिशत पर आ गई है। जबकि 15-29 वर्ष के आयु वर्ग में 14.2 से घटकर 9.8 प्रतिशत पर आ गई है।

राज्य में वर्ष 2022-23 की तुलना में 2023-24 में सभी आयु वर्गों में श्रमिक जनसंख्या अनुपात में उल्लेखनीय सुधार हुआ है। 15-29 वर्ष के आयु वर्ग में श्रमिक जनसंख्या अनुपात 27.5 प्रतिशत से बढ़कर 44.2 प्रतिशत हो गया है। युवाओं को रोजगार के अधिक अवसर मिले हैं।

इसी प्रकार 15-59 वर्ष के आयु वर्ग में श्रमिक जनसंख्या अनुपात अनुपात 57.2 प्रतिशत से बढ़कर 61.2 प्रतिशत पहुंच गया है। जबकि 15 साल और उससे ऊपर की श्रेणी के लिए यह 53.5 प्रतिशत से बढ़कर 58.1 फीसदी हो गया है।

श्रम बल में युवाओं की भागीदारी बढ़ी
श्रम बल में भी वर्ष 2022-23 के मुकाबले में वर्ष 2023-24 में युवाओं की भागीदारी बढ़ी है। 15-29 वर्ष के आयु वर्ग में श्रम बल भागीदारी दर 43.7 से बढ़कर 49 प्रतिशत पहुंच गई है। इसी प्रकार 15-59 के आयु वर्ग में 60.1 प्रतिशत से बढकर 64.4 प्रतिशत और 15 वर्ष और उससे अधिक की श्रेणी में 56 प्रतिशत से बढ़कर 60.7 प्रतिशत पहुंच गई है।

राष्ट्रीय औसत को भी पछाड़ा
श्रमिक जनसंख्या औसत में उत्तराखंड ने राष्ट्रीय औसत को भी पीछे छोड़ दिया है। उत्तराखंड में 15-29 के आयु वर्ग में यह औसत 49 प्रतिशत रहा है वहीं राष्ट्रीय औसत 46.5 प्रतिशत है। इसी प्रकार 15-59 के आयु वर्ग में उत्तराखंड का 64.4 तो राष्ट्रीय औसत 64.3 और 15 वर्ष और उससे अधिक वर्ष की श्रेणी में उत्तराखंड का 60.7 तो राष्ट्रीय औसत 60.1 रहा है।
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उत्तराखंड को देश के अग्रणी राज्यों के साथ खड़ा करना हमारा संकल्प है। देवतुल्य जनता के आशीर्वाद से हम इस संकल्प को पूरा करने लिए दिन-रात काम कर रहे हैं। हम रोजगार के अधिकाधिक अवसर सृजित कर रहे हैं। सरकारी क्षेत्र में ही 16 हजार से अधिक युवाओं को हमने नियुक्ति दी है। निजी क्षेत्र में भी यह सिलसिला शुरू हो चुका है। आने वाले वर्षों में निवेश के अधिकांश करारों के धरातल पर उतरने से लाखों युवाओं को रोजगार मिलेगा। उत्तराखंड युवाओं को सिर्फ रोजगार ही नहीं देगा, बल्कि उन्हें दूसरों को भी रोजगार देने वाला बनाएगा।

-पुष्कर सिंह धामी
मुख्यमंत्री, उत्तराखंड

उत्तराखंड प्रीमियर लीग खिलाड़ियों के लिए नया प्लेटफॉर्म, प्रतिभा दिखाने के अवसर बढ़ेः सीएम

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने आज को राजीव गांधी अन्तर्राष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम रायपुर में क्रिकेट एशोसिएसन ऑफ उत्तराखण्ड के तत्वावधान में आयोजित उत्तराखण्ड प्रिमियर लीग का शुभारम्भ किया। मुख्यमंत्री ने प्रिमियर लीग की ट्रॉफी का अनावरण कर प्रतिभागी खिलाडियों को शुभकामनाएं दी। मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखण्ड प्रीमियर लीग जैसे प्रतियोगिताओं से हमारे प्रदेश के खिलाड़ियों को भी अपनी प्रतिभा दिखाने के नए अवसर प्राप्त होंगे जिससे वे राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर हमारे देश और प्रदेश का नाम रोशन कर सकेंगे।

इस अवसर पर कैबिनेट मंत्री रेखा आर्य, गणेश जोशी, सांसद एवं पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत, सांसद मनोज तिवारी, विधायक उमेश शर्मा काऊ, विशेष प्रमुख सचिव अमित सिन्हा, फिल्म अभिनेता सोनू सूद, क्रिकेट एशोसिएसन ऑफ उत्तराखण्ड के सचिव महिम वर्मा सहित क्रिकेट खिलाडी एवं अन्य गणमान्य लोग उपस्थित थे।

संस्कृत भारती द्वारा आयोजित अखिल भारतीय गोष्ठी में पहुंचे सीएम, किया शुभारंभ

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने व्यास मंदिर, भूपतवाला, हरिपुर कलां, देहरादून में संस्कृत भारती द्वारा आयोजित ‘अखिल भारतीया गोष्ठी’ के शुभारंभ सत्र में प्रतिभाग किया। इस अवसर पर उन्होंने श्री वेद व्यास मंदिर में पूजा अर्चना कर प्रदेश में सुख शांति की कामना की।

मुख्यमंत्री ने संगोष्ठी में देशभर से आए लोगों का देवभूमि उत्तराखंड में स्वागत करते हुए कहा कि संस्कृत भारती का हर सदस्य संस्कृत भाषा के प्रचार-प्रसार में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। यह राज्य का गौरव है कि देववाणी संस्कृत देवभूमि उत्तराखण्ड की द्वितीय राजभाषा है। संस्कृत भाषा अभिव्यक्ति का साधन एवं मनुष्य के संपूर्ण विकास की कुंजी भी है। संस्कृत भाषा से ही मानव सभ्यताएं विकसित हुई हैं। ऋग्वेद को भी संस्कृत में लिखा गया था। आज यह भाषा साहित्य के अन्य क्षेत्रों में भी वृहद स्तर पर अभिव्यक्ति का साधन बन गई है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार संस्कृत भाषा के संरक्षण एवं उसे अधिक से अधिक बढ़ावा देने के लिए कई पहल कर रही है। संस्कृत शिक्षा विभाग द्वारा गैरसैंण में आयोजित हुए विधानसभा सत्र के दौरान संस्कृत संभाषण शिविर चलाकर सभी मंत्रियों, विधायकों और अधिकारियों को संस्कृत बोलने के लिए प्रेरित किया गया। राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के अंतर्गत प्रदेश में कक्षा 1 से 5 तक संस्कृत पाठशालाएं प्रारंभ की जा रही है। सभी बस स्टेशन, रेलवे स्टेशन, एयरपोर्ट पर स्थित बोर्ड को हिंदी के साथ संस्कृत में लिखा जाए, इस प्रकार के प्रयास जारी हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि सनातन संस्कृति के इतिहास और वैदिक काल के समस्त वेद, पुराणों और शास्त्रों की रचना संस्कृत में की गई है। संस्कृत भाषा अनादि और अनंत है। उन्होंने कहा साहित्य से लेकर विज्ञान तक, धर्म से लेकर आध्यात्म तक और खगोलशास्त्र से लेकर शल्य चिकित्सा तक, हर क्षेत्र से जुड़े ग्रंथ संस्कृत में लिखे गए हैं। हजारों साल पहले भारतीयों ने उत्कृष्ट ज्ञान के चलते पंचांग, ग्रहों और नक्षत्रों की जानकारी जुटा ली थी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि अन्य भाषाओं की तुलना में संस्कृत के स्वर और व्यंजनों की संख्या अधिक है। संस्कृत ही एकमात्र ऐसी भाषा है जिसके शब्दों के आगे-पीछे हो जाने से वाक्य के भाव में कोई अंतर नहीं आता। उन्होंने कहा संस्कृत भाषा का शब्द भण्डार भी बहुत वृहद है। उन्होंने कहा विष्णु सहस्रनाम में भगवान विष्णु के 1000 नाम लिखे गए हैं, ऐसे ही ललिता सहस्रनाम और शिव सहस्रनाम भी है। यह सिर्फ संस्कृत में ही संभव है कि किसी नाम के एक हजार पर्यायवाची हो।

मुख्यमंत्री ने कहा कि अनेकों यूरोपीय भाषाओं के अनेकों शब्द संस्कृत से ही प्रभावित दिखाई देते हैं। संस्कृत अत्यंत ही समृद्ध, सरल और व्यवहारिक भाषा है। उन्होंने कहा कई सदियों तक विदेशी आक्रांताओं का शासन होने के कारण हम अभी संस्कृत भाषा से दूर होते चले गए। हमें एकजुट होकर अपनी मूलभाषा देववाणी संस्कृत को पुनः मुख्यधारा में लाने का प्रयास करना है। उन्होंने कहा निश्चित रूप यह कार्यक्रम इस दिशा में एक सकारात्मक प्रभाव छोड़ेगा। उन्होंने कहा संस्कृत भारती संस्कृत को पुनः आम बोलचाल की भाषा बनाने के लिए भारत के साथ ही कई अन्य देशों में संस्कृत के प्रचार-प्रसार का कार्य कर रहा है।

इस अवसर परमार्थ निकेतन के अध्यक्ष स्वामी चिदानन्द सरस्वती महाराज, प्रो. गोपबन्धु, दिनेश कामत, के. श्रीनिवास प्रभु, जानकी त्रिपाठी, एवं अन्य लोग मौजूद रहे।

उत्तराखंड में ट्रैकिंग ट्रैक्शन सेंटर होम स्टे अनुदान योजना से स्थानीय युवाओं को मिल रहा लाभ

अपने लुभावने परिदृश्यों और समृद्ध सांस्कृतिक विरासत के लिए प्रसिद्ध उत्तराखंड भारत में पर्यटन के लिए एक महत्वपूर्ण गंतव्य के रूप में उभरा है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में, पर्यटन के बुनियादी ढांचे को बढ़ाने और स्थानीय जुड़ाव को बढ़ावा देने के लिए विभिन्न पहलों को लागू किया गया है, जिससे क्षेत्र में सतत विकास सुनिश्चित हो सके। ऐसी ही एक पहल है ‘‘ट्रैकिंग ट्रैक्शन सेंटर होम स्टे अनुदान योजना,’’ पर्यटन में सामुदायिक भागीदारी को बढ़ावा देने के उद्देश्य से महत्वपूर्ण योजना है।

ट्रैकिंग ट्रैक्शन सेंटर होम स्टे अनुदान योजना पर्यटन क्षेत्र में स्थानीय भागीदारी के महत्व पर जोर देती है। पहचाने गए ट्रेकिंग केंद्रों के 2 किलोमीटर के दायरे में ग्रामीणों को वित्तीय सहायता प्रदान करके, सरकार का उद्देश्य होम स्टे के निर्माण और सुधार को प्रोत्साहित करना है। यह पहल पर्यटन और स्थानीय समुदायों के बीच एक सहजीवी संबंध बनाने में महत्वपूर्ण है, यह सुनिश्चित करते हुए कि पर्यटन के आर्थिक लाभ जमीनी स्तर तक पहुँचें।

इस योजना के तहत, राज्य सरकार विभिन्न उद्देश्यों के लिए वित्तीय अनुदान आवंटित करती है। ग्रामीणों को नए भवनों के निर्माण के लिए प्रति कमरा 60,000 रुपये तक मिल सकते हैं, जिसमें शौचालय जैसी आवश्यक सुविधाएँ शामिल हैं। जिन लोगों के पास पहले से ही बने हुए कमरे हैं, उन्हें सरकार पर्यटकों की ज़रूरतों को पूरा करने के लिए इन स्थानों को सुसज्जित करने के लिए 25,000 रुपये प्रदान करती है। यह वित्तीय सहायता न केवल होम स्टे विकास को प्रोत्साहित करती है, बल्कि पारंपरिक पहाड़ी शैली की इमारतों सहित स्थानीय स्थापत्य शैलियों के पालन को भी बढ़ावा देती है, जो पर्यटकों के अनुभव की सौंदर्य अपील और प्रामाणिकता को बढ़ा सकती है। यह सुनिश्चित करने के लिए कि यह योजना वास्तव में उत्तराखंड के निवासियों को लाभान्वित करती है, इसमें विशिष्ट पात्रता मानदंड शामिल हैं। ट्रेकिंग केंद्रों के पास रहने वाले मूल ग्रामीणों को वरीयता दी जाती है। यह शर्त आगंतुकों के लिए समृद्ध अनुभव प्रदान करने में स्थानीय ज्ञान और आतिथ्य के महत्व को पुष्ट करती है। इसके अलावा, होम स्टे संचालकों के लिए अपने परिवारों के साथ परिसर में रहने की आवश्यकता एक स्वागत योग्य वातावरण को बढ़ावा देती है जहाँ पर्यटक वास्तविक स्थानीय संस्कृति और गर्मजोशी का अनुभव कर सकते हैं। होम स्टे पंजीकरण के लिए अनिवार्यता इस पहल का एक और महत्वपूर्ण पहलू है। यह न केवल पर्यटकों के लिए सेवा और सुरक्षा के मानकों को बनाए रखने में मदद करता है, बल्कि सरकार को इस उभरते क्षेत्र के विकास की निगरानी और समर्थन करने की भी अनुमति देता है। होम स्टे को औपचारिक रूप देकर, सरकार यह सुनिश्चित कर सकती है कि पर्यटन का अनुभव उत्तराखंड के मूल्यों के अनुरूप हो और साथ ही स्थानीय परिवारों के लिए महत्वपूर्ण राजस्व प्रदान करे।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की इच्छशक्ति के तहत, ट्रैकिंग ट्रैक्शन सेंटर होम स्टे अनुदान योजना के माध्यम से पर्यटन को बढ़ावा देने के प्रयास सतत पर्यटन विकास के लिए एक उल्लेखनीय दृष्टिकोण का प्रतिनिधित्व करते हैं। स्थानीय भागीदारी को प्राथमिकता देकर, पारंपरिक वास्तुकला को संरक्षित करके और वित्तीय सहायता प्रदान करके, उत्तराखंड सरकार एक ऐसा मॉडल बना रही है जो न केवल आगंतुकों के अनुभव को बढ़ाता है बल्कि स्थानीय समुदायों का उत्थान भी करता है। ये पहल एक संपन्न पर्यटन उद्योग को बढ़ावा देने की प्रतिबद्धता का उदाहरण है, जबकि यह सुनिश्चित करता है कि इस तरह के विकास का लाभ उत्तराखंड के लोगों के बीच समान रूप से साझा किया जाए।

हरिद्वार में सिटी स्पोर्ट्स कांप्लैक्स का मंत्री अग्रवाल ने किया निरीक्षण

शहरी विकास व आवास मंत्री डॉ प्रेमचंद अग्रवाल ने हरिद्वार रुड़की विकास प्राधिकरण द्वारा सुंदर हरिद्वार, स्वच्छ हरिद्वार के तहत 17 करोड़ 85 लाख रुपये की धनराशि से निर्मित सिटी स्पोर्ट्स काम्प्लेक्स के जीर्णाेद्धार, 06 करोड़ रुपए की धनराशि से प्राधिकरण क्रिकेट स्टेडियम के नवीनीकरण कार्य का निरीक्षण किया। डॉ अग्रवाल ने किये गए कार्यों की प्रशंसा करते हुए एचआरडीए के अधिकारियों की प्रशंसा की।

मंत्री डॉ प्रेमचंद अग्रवाल ने बताया कि समग्र विकास के लिए संकल्पित हरिद्वार रुड़की विकास प्राधिकरण द्वारा हरिद्वार जनपद में खेल भावना से मायापुर में भल्ला कालेज की नजदीक पूर्व से निर्मित सिटी स्पोर्टस कॉम्पलेक्स के जीर्णाेद्धार के साथ-साथ उसके विस्तारीकरण का कार्य कराया जा रहा है। बताया कि यह अन्तिम चरण में है, इस कॉम्पलेक्स में 02 स्कैवश कोर्ट तथा 02 तलों पर जिम, टेरेस पर फुटसेल कोर्ट तथा भूतल पर जलपान गृह की निर्मित किया गया है।

डॉ अग्रवाल ने बताया कि नवनिर्मित स्पोर्टस कॉम्पलेक्स के पार्श्व 02 नये लॉन टेनिस कोर्ट का निर्माण किया गया है। बताया कि नवनिर्मित स्पोर्टस कॉम्पलेक्स के सामने बॉक्स किकेट हेतु पफ शीट हॉल निर्मित किया गया है, जिसमें दिन-रात 03 किकेट अभ्यास मैच कराया जाएगा। बताया कि पूर्व निर्मित बैडमिंटन कोर्ट का पुनरोद्धार तथा आधुनिकीकरण करते हुए वातानुकूलित 05 बैडमिन्टन कीडाएं एक साथ कराये जायेगें तथा दर्शकों हेतु दर्शक दीर्घा का निर्माण कार्य अन्तिम चरण में है।

डॉ अग्रवाल ने बताया कि भल्ला कालेज के नजदीक स्थित प्राधिकरण किक्रेट स्टेडियम के नवीनीकरण में 05 पिचों का निर्माण प्रस्तावित है, जिसमें से 03 किकेट पिचों का निर्माण तथा पूर्व एथेलीक मैदान का विस्तारीकरण करते हुए ग्रासिंग तथा स्वचलित वाटर स्प्रिंकलर कार्य पूर्ण किया गया है। बताया कि रात्रि में अभ्यास एवं खेल के लिए 04 स्पोर्टस हाईमास्ट लाईट स्थल पर स्थापित कर की गयी है। शेष 02 स्पोर्टस हाईमास्ट लाईट का कार्य गतिमान है। बताया कि प्राधिकरण स्टेडियम की सुरक्षा तथा जल निकासी हेतु दीवार तथा ड्रेनेज प्रणाली का कार्य गतिमान है।

डॉ अग्रवाल ने बताया कि प्राधिकरण स्टेडियम से सम्बन्धित समस्त कार्य, जैसेः- मैदान का विस्तारीकरण, नये किकेट पिचों का निर्माण, पार्किंग का निर्माण, दिन-रात किकेट मैच हेतु स्पोर्टस हाईमास्ट लाइट की आपूर्ति व स्थापना, किकेट मैदान के अनुरक्षण हेतु मशीनरी और औजारों की आपूर्ति तथा सुरक्षा दीवार व जल निकासी प्रणाली का कार्य किया गया है।

इस अवसर पर उपाध्यक्ष एचआरडीए अंशुल, सचिव उत्तम चौहान, जिला अध्यक्ष भाजपा संदीप गोयल, जिला महामंत्री आशु चौधरी, आशुतोष शर्मा, निवर्तमान पार्षद अनिरुद्ध भाटी, जोली, तरुण चौधरी, विकास पाल, ध्रुव गुप्ता, जिला अध्यक्ष युवा मोर्चा विक्रम भुल्लर, अमन गुप्ता आदि उपस्थित रहे।