आंतरिक मार्गों का मंत्री डा. प्रेमचंद अग्रवाल ने किया लोकार्पण

कैबिनेट मंत्री व क्षेत्रीय विधायक डा. प्रेमचंद अग्रवाल ने गुमानीवाला में एमडीडीए द्वारा निर्मित आंतरिक मार्ग का लोकार्पण किया। इस मौके पर डा. अग्रवाल ने सात अन्य आंतरिक मार्गों के निर्माण के लिए एमडीडीए के अधिकारियों को निर्देशित किया। साथ ही स्थानीय लोगों की मांग पर मुख्य मार्गों में एमडीडीए द्वारा लगाई गई स्ट्रीट लाइटों के पोल से अवैध बोर्ड हटाने के लिए भी निर्देशित किया।

गुमानीवाला में आयोजित कार्यक्रम में मंत्री डा. प्रेमचंद अग्रवाल ने सुशीला देवी जैन के घर से सुधीर शर्मा एवं रमेश जैन के घर से बृजमोहन के घर तक 11.23 लाख की लागत से बने सीसी मार्ग का लोकार्पण किया। डा. अग्रवाल ने कहा कि ऋषिकेश विधानसभा का चहुंमुखी विकास हो रहा है, उनके पहले कार्यकाल से अभी तक ऋषिकेश में बिजली, पानी और सड़क जैसी मूलभूत समस्याओं का निदान हुआ है।

डा. अग्रवाल ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास और सबका प्रयास की भावना से कार्य करते हैं। इसी के अनुरूप राज्य सरकार भी कार्य कर रही है। डा. अग्रवाल ने स्वयं को ऋषिकेश विधानसभा की जनता का सारथी बताया। कहा कि एक सारथी की तरह वह भी ऋषिकेश को आदर्श विधानसभा बनाने की दिशा में लगातार कार्य कर रहे हैं।

इस मौके पर डा. अग्रवाल ने मसूरी देहरादून विकास प्राधिकरण के अधिकारियों को अन्य आंतरिक मार्गों के निर्माण के लिए निर्देशित किया। उन्होंने कहा कि जनता की बदौलत वह चौथी बार विधायक बने और मंत्री पद तक पहुंचे है। जनता की मूलभूत समस्याओं का निदान ही उनकी प्राथमिकता है। डा. अग्रवाल ने ग्रामीणोें की मांग पर एमडीडीए द्वारा मुख्य मार्ग पर लगी स्ट्रीट लाइटों के पोल से अवैध बोर्ड हटाने के लिए एमडीडीए के अधिकारियों को निर्देशित भी किया।

इस मौके पर डा. अग्रवाल ने ग्रामीणों को भाई बहन के पवित्र त्यौहार रक्षा बंधन पर्व की बधाई व शुभकामनाएं भी दीं।

इस मौके पर मंडल अध्यक्ष श्यामपुर गणेश रावत, महामंत्री रवि शर्मा, उपाध्यक्ष राजवीर रावत, मंडल मं़त्री गौतम राणा, प्रधान दीपिका व्यास, प्रदेश कार्यालय प्रभारी ओबीसी मोर्चा सतपाल सैनी, श्रीधर गुप्ता मानवेंद्र कंडारी, पार्षद वीरेंद्र रमोला, एमडीडीए के अधीक्षण अभियंता हरीश चंद सिंह राणा, अधिशासी अभियंता एसएस रावत, सहायक अभियंता पीपी सिंह, लक्ष्मी सेमवाल, कांता चौहान, सुप्रिया शर्मा, प्रभा पैंयूली, अर्चना पैंयूली, सुनिता भट्ट, किरण पैंयूली, शीलू पंत, राजेश शर्मा, जीवन सिंह बिष्ट, पदमराज थापा, सजेंद्र शर्मा, श्रीधर गुप्ता, सुनिता भट्ट आदि ग्रामीण उपस्थित रहे।

छात्रों ने ली नशे से दूर रहने की शपथ

जनपद देहरादून को नशा मुक्त करने के लिए जिलेभर में शिक्षण संस्थानों, एनजीओ, ग्राम सभाओं, जनप्रतिनिधियों एवं आम जनता को साथ लेकर व्यापक जन जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है। इसी क्रम में थानाध्यक्ष रायवाला द्वारा द्वारा आज प्राथमिक विद्यालय खैरीकला/ठाकुरपुर नेपाली तिराहा रायवाला जनपद देहरादून में छात्र-छात्राओं को नशे के कुप्रभाव, साइबर संबंधी अपराधों एवं ट्रैफिक नियमों के संबंध में जानकारी दी गइ। समस्त छात्र-छात्राओं को लगन व मेहनत के साथ और एक अनुशासित होकर कठिन परिश्रम के साथ अपने लक्ष्य को हासिल करने हेतु प्रोत्साहित भी किया गया। वहीं, छात्र-छात्राओं द्वारा नशे के खिलाफ देहरादून पुलिस के अभियान को सफल बनाने तथा उत्तराखंड को नशा मुक्त करने हेतु प्रण लिया गया। इसके साथ ही पुलिस के अभियान की सराहना की गई।

हिमालयी राज्यों की भौगोलिक परिस्थिति के हिसाब से बने हमारी नीति-धामी

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने नई दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में आयोजित नीति आयोग की शासी परिषद की 7 वीं बैठक में प्रतिभाग किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री की अपेक्षा के अनुसार इक्कीसवीं शताब्दी के तीसरे दशक को उत्तराखण्ड का दशक बनाने के लिये राज्य सरकार ने आदर्श उत्तराखण्ड/2025 को अपना मंत्र बनाकर त्वरित गति से कार्य प्रारम्भ किया है। आजादी के अमृत काल के लिए आगामी 25 वर्ष की योजना बनाना भी प्रदेश की प्राथमिकता है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि नीति आयोग द्वारा हिमालयी राज्यों में, यहां की इकोलॉजी, जनसंख्या धनत्व, फ्लोटिंग पॉपुलेशन व पर्यावरणीय संवेदनशीलता को देखते हुए ही विकास का मॉडल बनाया जाए, जो विज्ञान-प्रौद्योगिकी पर आधारित हो। प्रधानमंत्री के नेतृत्व में हिमालयी राज्यों के लिए एक विशेष गोष्ठी का आयोजन किया जाए। मुख्यमंत्री ने इसका आयोजन उत्तराखण्ड में करने का अनुरोध किया।
उत्तराखण्ड राज्य के कुछ महत्वपूर्ण नीतिगत बिन्दुओं की ओर ध्यान आकृष्ट करते हुए मुख्यमंत्री ने अनुरोध किया कि केन्द्र पोषित योजनाओं के फॉरम्यूलेशन में राज्य की विशिष्ट भौगोलिक परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए ‘वन स्किम फिट्स ऑल’ के स्थान पर राज्य के अनुकूल ‘टेलर मेड स्किम्स’ तैयार करने पर भारत सरकार द्वारा विशेष ध्यान दिया जाना चाहिये। पर्यटन, हार्टीकल्चर तथा सगन्ध पौध आधारित योजनाओं से राज्य को अत्यधिक लाभ प्राप्त होगा। जल धाराओं के पुनर्जीवीकरण के लिये एक वृहद कार्यक्रम जिसमें चेक डैम एवं छोटे-छोटे जलाशय निर्माण सम्मिलित हों, को प्रारम्भ करने की प्रबल आवश्यकता है। इसमें भारत सरकार का तकनीकी एवं वित्तीय सहयोग चाहिए होगा। उत्तराखण्ड सम्पूर्ण राष्ट्र को महत्वपूर्ण इको सिस्टम सर्विस उपलब्ध करा रहा है। राज्यों के मध्य संसाधनों के आवंटन में इन पारिस्थितिकी सेवाओं को भी देखा जाना चाहिए।
मुख्यमंत्री ने कहा कि देवभूमि उत्तराखण्ड में फ्लोटिंग जनसंख्या का दबाव अवस्थापना सुविधाओं पर पड़ता है। इस वर्ष अब तक लगभग 30 लाख चारधाम यात्री तथा चार करोड़ से अधिक कांवड़ियों का आवागमन राज्य में हुआ है व इस संख्या में निरन्तर वृद्धि होने की सम्भावनायें अत्यन्त प्रबल हैं। राज्य की अधिकांश स्थानीय निकायों का आकार एवं उनके वित्तीय संसाधन काफी कम है। इसलिये केन्द्र सरकार द्वारा वित्तीय संसाधनों के हस्तांतरण में इस महत्वपूर्ण तथ्य को भी ध्यान में रखा जाना चाहिए।
मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 2014 के बाद प्रधानमंत्री के आर्शीवाद से सड़कों, रेलमार्गाे, स्वास्थ्य सेवाओं एवं विभिन्न केन्द्र पोषित योजनाओं से उत्तरोत्तर प्रगति के ओर अग्रसर हैं। विश्व प्रसिद्व तीर्थ स्थल बद्रीनाथ, केदारनाथ के मास्टर प्लान के अनुरुप पुनः निर्माण कार्य भी तीव्र गति से कराया जा रहा है। एसडीजी के लक्ष्यों को प्राप्त करने में उत्तराखण्ड अग्रणी राज्य रहा है।
प्रदेश में विभिन्न क्षेत्रों में विकास कार्यों के बारे में जानकारी देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में कृषि विविधिकरण की अपार सम्भावनायें हैं। मंडुआ, झिंगोरा, मादिरा, रामदाना, पर्वतीय दलहन जैसे गहथ, राजमा आदि तथा संगध एवं औषधीय पौधों को निरन्तर बढ़ावा दिया जा रहा है। सेब तथा उच्च मूल्य वाले कीवी फल के क्षेत्रफल और खाद्य प्रसंस्करण क्षमता को विस्तारित किया जा रहा है। राज्य में 38,500 हैक्टेयर क्षेत्रफल में मिलेट एवं पौष्टिक अनाज फसलों का जैविक उत्पादन किया जा रहा है। राज्य से डेनमार्क को मिलेट का निर्यात प्रारम्भ किया गया है। 6400 हैक्टेयर क्षेत्रफल में प्राकृतिक खेती के लिये क्लस्टर चयन की कार्यवाही पूर्ण कर ली गयी है।
राज्य में सगन्ध सेक्टर को बढ़ावा देने हेतु प्रधानमंत्री द्वारा अन्तर्राष्ट्रीय स्तर की स्टेट ऑॅफ द आर्ट लेबोरेट्रिज का लोकार्पण और सेंटर ऑफ एक्सीलेंस फॉर एरोमेटिक क्रॉप्स का शिलान्यास किया गया। राज्य में 40 एकड़ में ऐरोमा पार्क की स्थापना की गयी है। जिसमें ऐरोमा उद्योगों की स्थापना से लगभग रू0 300करोड के निवेश एवं 5000 से अधिक रोजगार के अवसर सृजित होंगे। प्रदेश में पर्यटन व हॉर्टीकल्चर को बढ़ावा देने के लिये हॉर्टी-टूरिज्म विकसित किया जा रहा है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य द्वारा आस्ट्रेलिया से मैरिनों भेड़ों को आयात करके स्ट्रक्चर्ड ब्रीडिंग प्रोग्राम के माध्यम से गुणवत्ता सुधार एवं उत्पादकता में वृद्धि करके ऊन के क्षेत्र में अभिनव पहल की गयी है। लघु विकेन्द्रीकृत दुग्ध प्रसंस्करण इकाईयां के माध्यम से दूरस्थ स्थानों में हिमालयन हार्ड चीज (बीममेम) एवं घी जैसे मूल्य वर्धित दुग्ध उत्पाद तैयार किये जा रहे हैं। भारत सरकार द्वारा विकसित किये जा रह एग्री-स्टेक पोर्टल के लिये राज्य द्वारा अपेक्षित सभी कार्य समय पर पूरे कर लिये जायेंगे।
मुख्यमंत्री ने कहा कि नई शिक्षा नीति के क्रियान्वयन के लिये उत्तराखण्ड राज्य संकल्पबद्ध है। राज्य में 4457 को-लोकेटेड आंगनवाड़ी केन्द्रों में बालवाटिकायें प्रारम्भ हो चुकी है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अनुपालन हेतु विभिन्न कार्यक्रम जैसे ‘‘प्रवेशोत्सव’’, ‘‘आरोही’’, ’’कौशलम‘‘, ’’आनन्दम‘‘, ’’विद्या सेतु‘‘ आदि संचालित किये जा रहे हैं। ऑनलाइन शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए केन्द्रीय स्टूडियो तथा राज्य के समस्त 13 जनपदों के 500 विद्यालयों में वर्चुअल क्लास रूम की स्थापना की जा चुकी है। 200 विद्यालयों में 08 व्यावसायिक शिक्षा पाठ्यक्रम भी प्रारम्भ कर दिये गये हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि उच्च शिक्षा में भी राज्य में शैक्षणिक सत्र 2022-23 से राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 को लागू कर दिया गया है। विद्यार्थियों को भारतीय संस्कृति व इंडियन नॉलेज सिस्टम से परिचित कराने के उद्देश्य से वैदिक विज्ञान, वैदिक गणित व भगवत गीता से प्रबन्धन परिचय जैसे विषयों को सह-पाठ्यक्रम के रूप में लागू किया गया है। उच्च शिक्षा के अर्न्तगत राज्य में कुल 108 पाठ्यक्रम आनलाईन एवं ओपन डिस्टेन्स लर्निंग माध्यम से संचालित किये जा रहे हैं। उच्च शिक्षण संस्थानों में शोध व स्टार्ट-अप को बढ़ावा देने के उद्देश्य सेस्टार्ट-अप पॉलिसी लागू की गयी है। राज्य सरकार द्वारा नेशनल स्किल डेवलपमेंट कारपोरेशन के साथ एमओयू किया गया है जिससे राज्य के युवाओं के लिये विदेशों में रोजगार के अवसर सृजित होंगे।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य के स्थानीय निकायों में जीआईएस और ड्रोन मैपिंग द्वारा सम्पत्ति की माप एवं गणना तथा मास्टर प्लान तैयार किये जा रहे हैं। राज्य द्वारा भारत सरकार की अपेक्षा अनुसार टीओडी (ट्रांजिट ओरिएंटेड डेवलपमेंट) और टीडीआर (ट्रांसफेरेबल डेवलपमेंट राईट) पॉलिसी को अधिसूचित कर दिया गया है। उत्तराखण्ड में श्री केदारनाथ, श्री बद्रीनाथ एवं अन्य धार्मिक एवं पर्यटक स्थलों पर तीर्थ यात्रियों एवं पर्यटकों की अत्यधिक आवाजाही के कारण पार्किंग की गम्भीर समस्या रहती है। इसके समाधान के लिए पहाड़ों में अंडरग्राउंड/केविटी पार्किंग की शुरूआत की गयी है, जिससे बाहर से पहाड़/पेड़ कटान एवं पर्यावरण को नुकसान भी नहीं होगा तथा पहाड़ के अन्दर केविटी बनाकर पार्किंग की स्थापना की जायेगी। राज्य के स्थानीय निकायों में भुगतान सुविधा ऑनलाईन उपलब्ध है तथा नागरिकों के लिये महत्वपूर्ण ऑनलाईन सेवाएं राज्य के अपुणी सरकार पोर्टल पर उपलब्ध हैं।
बैठक में उपाध्यक्ष नीति आयोग, केंद्र सरकार के मंत्रिगण, राज्यों के मुख्यमंत्री, उप-राज्यपाल और शासी परिषद के अन्य सदस्य उपस्थित रहे।

एनएचएम के तहत शत-प्रतिशत खर्च करें धनराशि-धन सिंह रावत

स्वास्थ्य मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के अंतर्गत वर्तमान वित्तीय वर्ष में केन्द्र सरकार द्वारा उपलब्ध कराई गयी धनराशि को समय पर शत-प्रतिशत खर्च करने के निर्देश विभागीय अधिकारियों को दिये। उन्होंने विभिन्न चिकित्सा इकाईयों में चल रहे निर्माण कार्यों की धीमी प्रगति पर नाराजगी जताते हुये अधिकारियों को निर्माणाधीन कार्यों में तेजी लाने के निर्देश दिये। एनएचएम के अंतर्गत कार्यरत कार्मिकों को विगत तीन माह से वेतन न मिलने पर उन्होंने विभागीय अधिकारियों को जमकर फटकार लगाते हुये शीघ्र वेतन निर्गत करने को कहा।
चिकित्सा स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा मंत्री डॉ धन सिंह रावत ने स्वास्थ्य महानिदेशालय में आयोजित उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक में विभागीय अधिकारियों को सख्त निर्देश दिये। उन्होंने वर्तमान वित्तीय वर्ष में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के अंतर्गत स्वीकृत धनराशि को शत-प्रतिशत खर्च करने के निर्देश विभागीय अधिकारियों को दिये। डॉ रावत ने बताया कि सूबे में एनएचएम के अंतर्गत हुये बेहत्तर कार्यों के आधार पर भारत सरकार द्वारा इस वित्तीय वर्ष रूपये 1129.5 करोड़ का बजट उपलब्ध कराया गया है जो कि जो कि विगत वित्तीय वर्ष में मिले बजट के मुकाबले रूपये 280 करोड़ अधिक है। जिसे तय समय के भीतर शत-प्रतिशत खर्च करने का लक्ष्य निर्धारित कर दिया गया है ताकि प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्थाओं को और अधिक मजबूत किया जा सके। बैठक में विभागीय मंत्री ने विभिन्न चिकित्सा इकाईयों में चल रहे निर्माण कार्यों की धीमी प्रगति पर भारी नाराजगी जताई। उन्होंने अधिकारियों से दो टूक कहा कि निर्माणाधीन कार्यों में तेजी लाकर सभी निर्माण कार्यां को निश्चत समय सीमा के भीतर पूरा करें। डॉ रावत ने बताया कि ई0आर0सी0पी0 के अंतर्गत 08 चिकित्सा इकाईयों में प्रीफैब्रिकेटेड 42 बेड एवं 10 चिकित्सा इकाईयों में 32 बेड का निर्माण किया जायेगा जिसके लिये शासन ने रूपये 5073.12 लाख की धनराशि स्वीकृत कर दी है। इसके अलावा इस वित्तीय वर्ष में 7 क्रिटिकल केयर यूनिट (सी0सी0यू0) की स्थापना की जायेगी, जिसके लिये कार्यदायी संस्था नामित कर दी गई है, शीघ्र ही निर्माण कार्य शुरू कर दिया जायेगा। एनएचएम कार्मिकों को विगत तीन माह से वेतन न मिलने पर डॉ रावत ने विभागीय अधिकारियों की जमकर क्लास लगाई। उन्होंने मिशन निदेशक एनएचएम डॉ आर राजेश कुमार को व्यवस्थाएं ठीक कर शीघ्र वेतन निर्गत करने के निर्देश दिये। उन्होंने कहा कि एनएचएम के अंतर्गत कार्यरत कार्मिक अल्प वेतनभोगी हैं और उनका कई महीनों तक बिना किसी कारण वेतन रोकना न्यायोचित नहीं है।
बैठक में प्रभारी सचिव स्वास्थ्य एवं मिशन निदेशक एनएचएम डॉ आर राजेश कुमार, महानिदेशक स्वास्थ्य डॉ शैलजा भट्ट, संयुक्त निदेशक डॉ आर0पी0 खंडूडी, वित्त अधिकारी दीपाली भरणे, वित्त नियंत्रक एनएचएम खजान चन्द्र पाण्डेय सहित अन्य विभागीय अधिकारी उपस्थित रहे।

शहरी विकास मंत्री ने स्मार्ट सिटी के विभिन्न निर्माणाधीन कार्यो की प्रगति जानी

शहरी विकास मंत्री डॉ प्रेमचंद अग्रवाल ने स्मार्ट सिटी के कार्यों की समीक्षा बैठक की। इस अवसर पर उन्होंने सीईओ स्मार्ट सिटी कार्यों में तेजी लाने के निर्देश दिए। कहा कि कार्य में किसी प्रकार की लापरवाही या कोताही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
बुधवार को विधानसभा में आयोजित बैठक के बाद डॉ अग्रवाल ने बताया कि परेड ग्राउंड में निर्माणाधीन जी4 लाइब्रेरी का काम अधिकांश पूरा हो गया है। यह कार्य शीघ्र पूरा कर लिया जाएगा। इसी तरह क्रैश बिल्डिंग का कार्य भी शीघ्र पूरा कर लिया जाएगा। कहा कि 15 इलेक्ट्रिक बसें विभिन्न मार्गों पर संचालित हो रही है। शेष 15 जल्द सड़क पर होंगी।
बताया कि स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के तहत तीन स्मार्ट स्कूल संचालित हो रहे हैं। जिनमें एक जीजीआईसी और दो जीआईसी शामिल हैं। बताया कि 24 वाटर एटीएम चालू हो चुके हैं। जिनमें 1 लीटर पानी 3 रुपए में मिल रहा है। डॉ अग्रवाल ने बताया कि कंट्रोल रूम काम गतिमान है।
डॉ अग्रवाल ने बताया कि स्काडा के तहत 274 जल संस्थान के पुराने पंप हैं, जिन्हें नई तकनीक के साथ बदलने का कार्य गतिमान है। बताया कि वाटर सप्लाई में वृद्धि के क्रम में पुरानी लाइन को बदलकर नई लाइन के साथ जोड़ा जा रहा है। डॉ अग्रवाल ने बताया कि स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के तहत शीघ्र राष्ट्रीय ध्वज लगाया जाएगा। जिसे दूर से देखा जा सकेगा। यह धरोहर का कार्य करेगा।
डॉ अग्रवाल ने कहा कि जहां 7 स्मार्ट टॉयलेट तैयार हो रहे हैं वही 6 हज़ार स्मार्ट मीटर लगाने का कार्य गतिमान है। कहा कि कार्यों में तेजी लाई जाए, इस मामले में सम्बंधित विभागों के साथ समन्वय बनाया जाए। किसी भी प्रकार की कोताही होने पर कार्यवाही की जाये।
इस मौके पर सीईओ सोनिका, वित्त नियंत्रक डॉ तरजीम अली, सीजेएम पदम कुमार आदि उपस्थित रहे।

गढ़वाल महासभा ने त्रिवेणी घाट पर की तिरंगा लगाने की मांग

देवभूमि ऋषिकेश की हृदय स्थली त्रिवेणी घाट पर 101 फीट ऊंचा पोल तिरंगे के बिना सूना पड़ा है। यहां कुछ माह पूर्व तिरंगा फहराया गया था। लेकिन तेज हवा और बारिश के चलते झंडा खराब हो गया।

गढ़वाल महासभा के अध्यक्ष डा. राजे सिंह नेगी ने त्रिवेणी घाट पर 101 फीट ऊंचा तिरंगा लहराने की मांग की है। उन्होंने कहा कि त्रिवेणी घाट पर एमडीडीए की ओर से स्थापित 101 फीट ऊंचे राष्ट्रीय ध्वज तिरंगे का अनावरण तत्कालीन उत्तराखंड विधानसभा अध्यक्ष प्रेमचंद अग्रवाल और मेयर अनिता ममगाईं ने संयुक्त रूप से किया गया था। लेकिन तेज हवा और बारिश के चलते झंडा खराब हो गया। देश में सबसे ऊंचा तिरंगा झंडा लहराने की प्रतिस्पर्धा मची हुई है। लेकिन हवा से झंडे को बचा पाना मुश्किल हो रहा है। उन्होंने जल्द से जल्द नगर की हृदय स्थली के पोल पर राष्ट्रीय ध्वज तिरंगा लगाने की मांग की है।

सीएम ने कहा इकोलॉजी और इकोनॉमी में संतुलन रखना जरूरी

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि विज्ञान और तकनीकी का उपयोग करते हुए इकोलॉजी और इकोनॉमी में संतुलन रखना है। मुख्यमंत्री, सीएम कैम्प कार्यालय में चम्पावत जनपद को आदर्श जनपद के रूप में विकसित करने के लिए आयोजित बोधिसत्व संवाद कार्यक्रम में सम्बोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 2025 तक उत्तराखण्ड को देश का सर्वश्रेष्ठ राज्य बनाने के लिए पूरे समर्पित भाव से काम करना है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखण्ड पूरे हिमालय क्षेत्र को विकास की राह दिखा सकता है। इकोनोमी और इकोलॉजी में संतुलन रखते हुए सतत विकास की रूपरेखा तैयार की जा रही है। चम्पावत जिले को मॉडल के रूप में लिया गया है। चम्पावत में सभी तरह की भौगोलिक परिस्थितियां मौजूद हैं। यह न केवल उत्तराखण्ड बल्कि सभी हिमालयी राज्यों के लिए मॉडल बनेगा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि तमाम विभाग और संस्थाएं विभिन्न विकासात्मक गतिविधियां कर रही हैं। इनमें समन्वय की आवश्यकता है। इंटिग्रेटेड एप्रोच अपनानी होगी ताकि विभाग व संस्थाएं एक दूसरे के कामों से लाभान्वित हो जिसका फायदा राज्य को भी होगा। उपलब्ध संसाधनों का अनुकूलतम उपयोग करना है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि चम्पावत जनपद को आदर्श जनपद बनाने के लिए यूकास्ट नोडल एजेंसी के रूप में काम करे। चम्पावत में कार्बेट ट्रेल व आयुष ग्राम पर तेजी से काम किया जाए। हैलीपेड बनाने की सम्भावना का अध्ययन किया जाए। सिडकुल द्वारा छोटे इंडस्ट्रीयल एरिया विकसित किये जा सकते हैं। आईटीआई में रोजगार परक व बाजार की मांग आधारित कोर्सेज संचालित हों। सडक व रेल कनेक्टिविटी को विकसित करने के लिए राज्य सरकार केंद्रीय मंत्रालयों के सम्पर्क में है। इको टूरिज्म, मत्स्य पालन व औद्यानिकी में भी काफी सम्भावनायें है।
बैठक में हेस्को के संस्थापक पद्मभूषण डॉ अनिल जोशी ने कहा कि हमें सभी की भागीदारी से आगे बढ़ना है। एक दूसरे के अनुभवों का लाभ उठाना है। उन्होंने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की बोधिसत्व संवाद कार्यक्रम की पहल की सराहना करते हुए कहा कि उत्तराखण्ड को प्रकृति प्रदत्त बौद्धिकता है। यहां ऋषि परम्परा रही है। चम्पावत को विभिन्न क्लस्टरों में विकसित किया जा सकता है। वैज्ञानिक दृष्टिकोण से काम करना होगा।
भारतीय सुदूर संवेदन संस्थान के अधिकारियों ने टोपोग्राफी, भू उपयोग, साईट सूटेबिलिटी एनालिसिस, सॉयल, सिंचाई, जैव विविधता, इन्फ्रास्ट्रक्चर, ड्रैनेज, भूजल, जियोलाजिकल स्ट्रक्चर, लैंडस्लाइड से संबंधित मैपिंग पर प्रस्तुतिकरण दिया। उन्होंने कहा कि उनका संस्थान सैटेलाइट कम्यूनिकेशन, टेली एजुकेशन व टेली मेडिसन में सहयोग कर सकता है।
आईआईपी द्वारा बताया गया कि हाल ही में उनकी एक टीम चम्पावत गई थी और विभिन्न सम्भावनाओं का अध्ययन किया है। आईआईपी ने चीड़ की पत्तियों का आर्थिक उपयोग व बायोडीजल के क्षेत्र में काम कराने की बात कही।
मत्स्य संस्थान द्वारा बताया गया कि ट्राउट फिशिंग में काम की काफी सम्भावनायें हैं। वन विभाग की ओर से कहा गया कि इको टूरिज्म के साथ ही वन पंचायतों के माध्यम से हर्बल व ऐरोमैटिक के क्षेत्र में काम किया जा सकता है।
बैठक में यूकास्ट के निदेशक प्रो. दुर्गेश पंत, हॉफ विनोद सिंघल, अपर सचिव सी रविशंकर, रंजना, बंशीधर तिवारी, डीएम चम्पावत नरेन्द्र सिंह भण्डारी सहित विभिन्न विभागों व नाबार्ड के अधिकारी उपस्थित रहे।

उत्तराखंड में केन्द्र के सहयोग से चल रही कई योजनायें-धामी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से आजादी के अमृत महोत्सव के तहत ’उज्ज्वल भारत उज्ज्वल भविष्य-पावर/2047’ के समापन समारोह कार्यक्रम में पुनर्निर्मित वितरण क्षेत्र योजना का शुभारंभ किया। एनटीपीसी की विभिन्न हरित ऊर्जा परियोजनाओं का शिलान्यास तथा लोकार्पण एवं नेशनल रूफटॉप सोलर पोर्टल को भी प्रधानमंत्री द्वारा लांच किया गया। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मुख्यमंत्री आवास स्थित मुख्य सेवक सदन में इस कार्यक्रम में वर्चुअल प्रतिभाग किया। कार्यक्रम में केन्द्रीय मंत्री, विभिन्न राज्यों के मुख्यमंत्री भी जुड़े थे।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि प्रधानमंत्री के नेतृत्व में बीते आठ वर्षों में देश का मान-सम्मान पूरी दुनिया में बढ़ा है। उन्होंने कहा कि देश में विभिन्न क्षेत्रों में अनेक नए कार्यों की शुरुआत हुई है। एक नई कार्य संस्कृति देश में आई है। कोरोना काल में पूरे विश्व की अर्थव्यवस्था गड़बड़ा गई थी, ऐसे समय में भी प्रधानमंत्री के नेतृत्व में भारत ने कोरोना पर पूरी तरीके से नियंत्रण किया। भारत ने 2 स्वदेशी कोविड वैक्सीन तैयार की। अन्य देशों को भी भारत ने 20 करोड़ से अधिक वैक्सीन दी। भारत में कोविड की 200 करोड़ से अधिक वैक्सीन लगाई जा चुकी है। बूस्टर डोज का अभियान भी तेजी से चल रहा है।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि प्रधानमंत्री के नेतृत्व में ऊर्जा मंत्रालय द्वारा कई योजनाएं चलाई जा रही हैं। उत्तराखंड में भी कई परियोजनाओं को स्वीकृति मिली है। राज्य गठन के समय ऊर्जा और पर्यटन राज्य निर्माण की मूल अवधारणा में शामिल था। जिसको लेकर राज्य सरकार आगे बढ़ रही है। उन्होंने कहा 2025 तक प्रदेश को देश का अग्रणी राज्य बनाने के लिए सबकी सहभागिता जरूरी है। हाल ही राज्य में बिजली का संकट था, सरकार ने महंगी बिजली खरीद कर लोगों की बिजली आपूर्ति पूरी की गई।
इस अवसर पर मेयर सुनील उनियाल गामा, विधायक सविता कपूर, सचिव आर. मीनाक्षी सुंदरम, जिलाधिकारी देहरादून सोनिका, एमडी यूपीसीएल अनिल कुमार उपस्थित रहे।

मुख्य सचिव ने खाद्य पदार्थों में मिलावट को रोकने के दिए निर्देश

मुख्य सचिव डॉ. एस.एस. संधु की अध्यक्षता में शुक्रवार को सचिवालय में फूड सेफ्टी एण्ड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन की राज्य स्तरीय सलाहकार समिति की प्रथम बैठक संपन्न हुई। बैठक के दौरान मुख्य सचिव ने कहा कि खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम-2006 का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जाए। इसके लिए सभी सम्बन्धित विभागों और हितधारकों को आपसी सहयोग के साथ कार्य करना होगा।
मुख्य सचिव ने सैंपलिंग और टेस्टिंग बढ़ाए जाने के निर्देश देते हुए कहा कि खाद्य पदार्थों में मिलावट को रोकने हेतु कड़े कदम उठाए जाएं। इसके लिए मोबाइल टेस्टिंग वैन की संख्या बढ़ाए जाने की आवश्यकता है। उन्होंने सही, सुरक्षित और पोषक आहार हेतु अभियान में आमजन की भागीदारी सुनिश्चित किए जाने पर बल दिया। उन्होंने राज्य के छोटे-बड़े होटल एवं रेस्टोरेंट के हाइजीन सर्टिफिकेशन पर जोर देते हुए इसे अभियान के रूप में चलाए जाने की बात कही। उन्होंने कहा कि होटल्स को भी हाइजीन रेटिंग प्राप्त करने एवं होटल के बाहर अथवा साइनबोर्ड में प्रदर्शित करने हेतु जागरूक किया जाए, साथ ही लोगों को भी जागरूक किया जाए कि वे हाइजीन रेटिंग देखकर ही होटल रेस्टोरेंट में जाएं।
मुख्य सचिव ने कहा कि भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण द्वारा संचालित ’ईट राइट अभियान’ के उद्देश्य को पूर्ण करने के लिए लोगों को सही भोजन, बेहतर भोजन के विषय में अवगत कराए जाने हेतु प्रयास किए जाएं। विडियोज एवं जिंगल्स के माध्यम से आमजन के साथ ही होटल, रेस्तरां आदि से सम्बन्धित लोगों को भी मौसमी, जैविक तरीके से उगाई गई साग-सब्जियों, तेल, नमक एवं चीनी के कम उपयोग वाले उत्पादों की बिक्री के लिए प्रेरित किया जाए। उन्होंने कैपेसिटी बिल्डिंग पर फोकस करते हुए होटल रेस्टोरेंट से जुड़े लोगों को ऑनलाइन एवं ऑफलाइन माध्यम से लगातार प्रशिक्षण दिए जाने के निर्देश दिए।
मुख्य सचिव ने कहा कि इस्तेमाल किए गए खाद्य तेल के डिस्पोजल और अन्यत्र प्रयोग पर विशेष ध्यान देते हुए इसका लगातार प्रचार प्रसार किया जाए। इसके लिए प्रत्येक होटल रेस्टोरेंट संचालक को खाद्य तेल को बार-बार प्रयोग करने से होने वाले खतरों से अवगत कराते हुए प्रयोग किए जा चुके खाद्य तेल के डिस्पोजल की उचित जानकारी उपलब्ध कराई जाए।
बैठक के दौरान सचिव राधिका झा ने बताया गया कि मार्च 2022 तक 13777 लीटर यूज्ड कुकिंग ऑयल एकत्र किया गया जिससे आईआईपी देहरादून ने 7000 लीटर बायोडीजल और 6000 लीटर बायोजेट फ्यूल तैयार किया गया।
सचिव राधिका झा ने बताया कि पिछले 2-3 वर्षों में राज्य सरकार खाद्य सुरक्षा के क्षेत्र में लगातार बेहतर कार्य कर रही है। खाद्य सुरक्षा की दृष्टि से राज्य शीर्ष 10 राज्यों में शामिल है। वर्ष 2019-20 में राज्य की 17वीं रैंक थी जो वर्ष 2020-21 में 14वीं हो गई। वर्ष 2021-22 में राज्य की रैंक 7वीं है। उन्होंने कहा कि कैपेसिटी बिल्डिंग के लिए 28 ट्रेनिंग सेशन किए गए जिसमें लगभग 2600 लोगों को प्रशिक्षण दिया गया। साथ ही प्रवर्तन, निरीक्षण, नमूना अभियोजन और न्यायनिर्णयन की लगातार निगरानी की जा रही है।
इस अवसर पर महिला एवं बाल कल्याण विभाग, शिक्षा विभाग, खाद्य आपूर्ति, कृषि एवं अन्य सम्बन्धित विभागों के उच्चाधिकारी भी उपस्थित रहे।