पैक्ड फूड व पेय पदार्थों से पैदा हो रही बीमारियां, चिकित्सकों ने बंद करने दिया जोर

अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान ऋषिकेश में आयोजित कार्यशाला में देश के राष्ट्रीय महत्व के चिकित्सा संस्थानों से जुड़े विशेषज्ञ चिकित्सकों ने जनमानस को एनसीडी और मोटापे के संकट को दूर करने के लिए फ्रंट-ऑफ-पैक लेबल (एफओपीएल) पर तत्काल कार्रवाई का मांग की है। उनका कहना है कि पैक्ड फूड व पेय पदार्थों के बढ़ता चलन लोगों के अनेक घातक बीमारियों से ग्रसित होकर असमय मृत्यु का कारण बन रहा है, लिहाजा इसे रोका जाना चाहिए।

अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान, पोस्ट ग्रेजुएट इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल एजुकेशन एंड रिसर्च, इंस्टीट्यूट ऑफ लिवर एंड बिलीरी साइंसेज, इंडियन एसोसिएशन ऑफ प्रिवेंटिव एंड सोशल मेडिसिन, इंडियन पब्लिक हेल्थ एसोसिएशन, इंडियन एकेडमी ऑफ पीडियाट्रिक्स एंड एपिडेमियोलॉजिकल फाउंडेशन ऑफ इंडिया ने अन्य शीर्ष चिकित्सा संस्थानों के प्रमुख ​चिकित्सकों के साथ अनिवार्य फ्रंट-ऑफ-पैक फूड लेबल के लिए विशेष मांग की है।

बताया गया है कि 135 मिलियन लोग मोटापे और गैर-संचारी रोगों (एनसीडी) के कारण होने वाली मौतों की वर्तमान वृद्धि दर है, जबकि भारत खराब भोजन के विनाशकारी प्रभाव का सामना कर रहा है। पैकेज्ड जंक फूड जो अस्वास्थ्यकर आहार का एक प्रमुख घटक है। विशेषज्ञ चिकत्सकों के अनुसार दुनियाभर में किसी भी अन्य जोखिम कारक की तुलना में अधिक मौतों के लिए जिम्मेदार है और मोटापे, टाइप- 2 मधुमेह, हृदय रोग (सीवीडी) और कैंसर का एक प्रमुख कारण है। मोटापे की महामारी और एनसीडी के प्रसार में एक प्रमुख योगदानकर्ता के रूप में शर्करा, सोडियम और संतृप्त वसा के उच्च स्तर वाले अल्ट्रा-प्रोसेस्ड खाद्य पदार्थों की बाजार उपलब्धता में तेजी का हवाला देते हुए, भारत के शीर्ष चिकित्सा विशेषज्ञों ने अपील की है कि इसकी रोकथाम के लिए एक प्रभावी एफओपीएल को अपनाना आवश्यक है।

एम्स ऋषिकेश द्वारा आयोजित कार्यक्रम में संस्थान के राष्ट्रव्यापी नेटवर्क, इंडियन एकेडमी ऑफ पीडियाट्रिक्स, इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ लिवर एंड बिलीरी साइंसेज, पीजीआईएमईआर, आईपीएचए, नेशनल हेल्थ मिशन, उत्तराखंड और अन्य चिकित्सा संस्थानों के विशेषज्ञों ने दावा किया कि यदि देश में नमक, चीनी, संतृप्त वसा के लिए वैज्ञानिक कट-ऑफ सीमा लागू करता है और पैकेज्ड उत्पादों पर स्पष्ट और सरल चेतावनी लेबल अनिवार्य करता है, जैसा कि चिली, मैक्सिको और ब्राजील जैसे देशों में किया गया है तो ऐसा करने से इन तमाम वजहों से होने वाली अकाल मौतों को रोका जा सकता है।

निदेशक प्रोफेसर रवि कांत ने देश के लिए एक मजबूत और प्रभावी एफओपीएल सार्वजनिक स्वास्थ्य प्राथमिकता है। निदेशक एम्स पद्मश्री प्रो. रवि कांत जी ने बताया कि भारत का चिकित्सा समुदाय इस महत्वपूर्ण नीतिगत उपाय के साथ एकजुटता के साथ खड़ा है, जिससे कि हजारों भारतीय लोगों की जीवन रक्षा हो सकती है।

कार्यक्रम में मुख्य अतिथि निदेशक राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन, उत्तराखंड डॉ. सरोज नैथानी ने कहा कि स्वस्थ भोजन हमारे दैनिक जीवन का हिस्सा होना चाहिए, हमारे पूर्वजों द्वारा कहा गया है कि “भारत की एक समृद्ध परंपरा है जो ऐसे भोजन की वकालत करता है जो पौष्टिक, शुद्ध और स्वादिष्ट हो, लेकिन बाजार में पैक्ड खाद्य पदार्थों के आने से हमारा जीवन, खानपान बदल गया है। उन्होंने बताया कि युवा आमतौर पर प्रोसेस्ड पैकेज्ड फूड के आदी होने लगे हैं और इस तरह का भोजन आमतौर पर हरेक घर में इस्तेमाल किया जाने लगा है। जो कि स्वास्थ्य वर्धक न होकर जनस्वास्थ्य के लिए बेहद खतरनाक है। उनका कहना है कि इस बात के पर्याप्त प्रमाण हैं कि य​दि ऐसी खाद्य सामग्री पर कड़ाई से रोक लगाई जाती है तो लगतार बढ़ती हृदय रोग, मधुमेह और कैंसर जैसी बीमारियों को कुछ हद तक नियंत्रित किया जा सकता है।

उनका कहना है कि आंकड़ों के मुताबिक लगभग 5.8 मिलियन लोग यानि 4 में से 1 व्यक्ति की 70 वर्ष की आयु तक पहुंचने से पहले ही एनसीडी से मृत्यु हो जाती है।

इंडियन एसोसिएशन ऑफ प्रिवेंटिव एंड सोशल मेडिसिन (आईएपीएसएम) की अध्यक्ष डॉ. सुनीला गर्ग के अनुसार मधुमेह, मोटापा, हृदय रोग या कैंसर जैसी कई अन्य घातक बीमारियां पैक्ड फूड व पेय पदार्थों के अत्यधिक सेवन से बढ़ रही हैं। लिहाजा दुनियाभर के कई देश इस बात को स्वीकार करने लगे हैं कि उपभोक्ताओं को उनके स्वास्थ्य के अधिकार के हिस्से के रूप में इन उत्पादों के बारे में सटीक जानकारी प्राप्त करने का अधिकार है जो कि उन्हें दिया जाना चाहिए।

उनका कहना है कि दुनिया के देश बीते वर्ष जब कोविड-19 महामारी के दुष्प्रभाव का सामना कर रहे थे, तब खाद्य और पेय उद्योग जनस्वास्थ्य के लिए खतरनाक पैक्ड फूड व शर्करा युक्त पेय पदार्थों के अपने बाजार का विस्तार कर रहे थे। यूरोमॉनिटर के अनुमान के मुताबिक, भारत में अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड की बिक्री 2005 में प्रति व्यक्ति 2 किलोग्राम से बढ़कर 2019 में 6 किलोग्राम हो गई है और 2024 में 8 किलोग्राम तक बढ़ने की उम्मीद है।
एम्स ऋषिकेश द्वारा शुरू की गई इस मुहिम के तहत आयोजित कार्यक्रम के समन्वयक व सीएफएम विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर डा. प्रदीप अग्रवाल ने कहा कि एम्स द्वारा की गई यह पहल जन-जन तक पहुंचनी चाहिए। उनका कहना है कि इसके जनजागरुकता अभियान बनने से ही समुदाय एवं आम नागरिकों का स्वास्थ्य लाभ संभव हो सकता है।
इंडियन पब्लिक हेल्थ एसोसिएशन (आईपीएचए) के अध्यक्ष डॉ. संजय राय ने जोर दिया कि एफओपीएल वास्तव में सार्वजनिक स्वास्थ्य को सकारात्मक रूप से प्रभावित करने के सबसे प्रभावी तरीकों में से एक है।

गरतांग गली को नुकसान पहुंचाने पर गंगोत्री थाने में अज्ञात पर मुकदमा दर्ज

असामाजिक तत्व खूबसूरत चीजों को बदरंग करने से बाज नहीं आते। उत्तरकाशी में भारत-तिब्बत के बीच व्यापारिक रिश्तों की गवाह रही ऐतिहासिक गरतांग गली (Gartang gali disfigured) पर भी ऐसे ही असामाजिक तत्वों की नजर पड़ी है। 300 साल पुराने लकड़ी से बने इस खूबसूरत पुल को हाल में पर्यटकों के लिए खोला गया है। लेकिन अराजक तत्वों ने इस लकड़ी पर भी अपने नाम गोद डाले हैं। जिससे इसकी खूबसूरती पर दाग लग रहा है। ऐसे अराजक तत्वो के खिलाफ केस दर्ज कर लिया गया है।

गंगोत्री थाने में इन अज्ञात अराजक तत्वों के खिलाफ वन क्षेत्राधिकारी प्रमोद सिंह की तहरीर पर धारा 427 के तहत सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने की धारा में मुकदमा दर्ज किया गया है। डीआईजी गढ़वाल नीरू गर्ग ने आरोपियों के खिलाफ जल्द से जल्द उचित कारवाई के आदेश दिए हैं।

ऐतिहासिक गरतांगगली भारत-तिब्बत व्यापार का प्रमुख मार्ग रहा है। करीब 300 साल पहले पेशावर सेआए पठानों ने इसका निर्माण किया था। लेकिन भारत चीन युद्ध के बाद इस मार्ग को बंद कर दिया गया था। इस मार्ग पर करीब 500 मीटर लंबाई की लकड़ी की सीढ़ियां आकर्षण का केंद्र हैं।

राज्य सरकार के प्रयासों के बाद हाल ही में इस गली का जीर्णोद्धार कराया गया है। देवदार की लकड़ी से दोबारा सीढ़ीदार रास्ता तैयार किया गया है। इस ऐतिहासिक जगह को देखने पर्यटकों की भीड़ उमड़ रही है।

लोकतंत्र का गला घोंटने वाली कांग्रेस हमें न दे सीखः मदन कौशिक

भाजपा प्रदेश अध्यक्ष मदन कौशिक ने कहा कि कांग्रेस द्वारा भाजपा को लोकतान्त्रिक सीख दी जा रही है जो कि हास्यास्पद है और बेहतर होता कि वह अपनी पार्टी के नेताओं को इस बारे में ज्ञान देते। कौशिक ने कहा कि अपने ही प्रधानमन्त्री के बनाए कानून को रद्दी की टोकरी में फेंकते समय लोकतन्त्र कंहा था और उससे पहले देश में इमर्जेंसी थोपने वाले अब लोकतंत्र कहा सिखा रहे हैं।

उन्होंने कहा कि कांग्रेस में प्रदेश ही नहीं,बल्कि पूरे देश में गुटबाजी और अन्तर्कलह जगजाहिर है और कांग्रेस को यह बताना चाहिए कि तब वह लोकतंत्र को किस तरह से सुशोभित कर रही थी। उत्तराखंड में कांग्रेस के पहले से ही तीन गुट माने जाते हैं और अब गुटबाजी के कारण 6 गुट बन गये हैं। 5 अध्यक्ष और एक चुनाव संचालन समिति के अध्यक्ष पूर्व सीएम हरीश रावत का माना जाता है। विवाद पर लोकतंत्र का ज्ञान बांटने वाली कांग्रेस की स्तिथि ‘‘घर में नहीं है दाने, अम्मा चली भुनाने’’ की है। कांग्रेस सत्ता में रही तो सरकार और संगठन में शीत युद्ध खुलकर दिखा और विपक्ष में रही तो संगठन में कब्जे की लड़ाई सामने आती रही। उन्होंने कहा कि आज कांग्रेस को केवल कार्यकर्ताओ की पह्चान गुट के आधार पर की जाती है और उनके पीछे क्षत्रपो का नाम लिया जाता है।

महत्वाकांक्षी इस कदर हावी है कि राजनैतिक अस्तित्व और मुख्यमंत्री की लड़ाई भी साथ साथ चल रही है। लेकिन कांग्रेस को न लोकतंत्र की चिन्ता है और न ही इस बात का फर्क की पार्टी में कार्यकर्ताओ, युवाओ पर क्या फर्क पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस को बेहतर है कि वह अपने घर में चल रहे बबाल को शांत करे और लोकतंत्र की रक्षा करे। क्योंकि इसी के चलते आज कांग्रेस हाशिये पर खिसक गयी है।

शिक्षक दिवस पर यंग एजुकेटर सम्मान से सम्मानित हुए ऋषिकेश के राजेश चंद्र

तीर्थनगरी के युवा व प्रसिद्ध कलाकार राजेश चंद्र को शिक्षक दिवस पर राष्ट्रीय स्तर का सम्मान मिला है। यह अवार्ड उन्हें तमिलनाडु की ओर से दिया गया है।

शिक्षक दिवस पर नेशनल फॉउंडेशन फ़ॉर एंटरप्रेन्योरशिप डेवलोपमेन्ट तमिलनाडु द्वारा कार्यक्रम का आयोजन हुआ। इसमें देशभर से शिक्षा के क्षेत्र में सराहनीय कार्य करने के लिए शिक्षको को सम्मानित किया गया। इस वर्ष उत्तराखंड से चित्रकार राजेश चन्द्र को यंग एजुकेटर सम्मान से नवाज़ा गया। यह सम्मान राजेश को 2020-2021 कला के क्षेत्र में उनके बतौर कला शिक्षक किये गए उत्कृष्ठ प्रदर्शन के लिए दिया गया।

बता दें कि चित्रकारी के क्षेत्र में राजेश ने राष्ट्रीय व अंतरार्ष्ट्रीय स्तर पर कई उपलब्धियां हासिल की। जिसमे सयुंक्त राष्ट्र संघ में की सागर दिवस की प्रदर्शनी में दो बार देश का प्रतिनिधित्व करने वाले व पहले चित्रकार है। साथ ही पर्यावरण संरक्षण व उत्तराखंड की संस्कृति को कई दफा अपनी कला के द्वारा उन्होंने विश्व स्तर पर किया है जिसके लिए हाल ही में मुख्यमंत्री से भी सम्मानित हुए है।

शिक्षक दिवस के दिन ऑनलाइन माध्यम से तमिलनाडु द्वारा उनको ये राष्ट्रीय पुरस्कार दिया गया। 25 सितम्बर तक उन्हें मेडल, प्रमाण पत्र व शिक्षकों की मैगजीन दी जाएगी, जिसमें 2021 के सभी सम्मानित शिक्षकों के बारे में कहानी होगी। राजेश ने बताया कि यह पुरुस्कार निर्मल आश्रम ज्ञान दान अकादमी को समर्पित करना चाहते है। जहाँ मुफ्त शिक्षा पाकर वह इस मुकाम पर पहुंचे हैं।

वीकेंड पर घूमने आए दो लोग गंगा की तेज धारा में बहे

नोएडा की एक एंड्राइड कंपनी का नौ सदस्यीय दल वीकेंड पर ऋषिकेश घूमने आया था। वह रामझूला के समीप दर्शन महाविद्यालय घाट पहुंचे। इस बीच एक व्यक्ति गंगा में हाथ धोने गया और अचानक पैर फिसलने से बहने लगे। तभी एक साथी उसे बचाने के लिए आगे बढ़े तो वह भी गंगा के तेज बहाव की चपेट में आ गये। किनारे पर खड़े साथियों को दोनों कुछ दूर तक बहते दिखे। इसके बाद दोनों ही गंगा की लहरों में ओझल हो गए। हादसे से पूरे ग्रुप के लोग सकते में है।

थानाध्यक्ष मुनिकीरेती कमल मोहन भंडारी ने बताया कि नोएडा की एक मोबाइल कंपनी से नौ लोगों का ग्रुप वीकेंड पर यहां घूमने आया था। वह रामझूला पुल के पास दर्शन महाविद्यालय का घाट पहुंचे। उनमें से दो लोग सुबह करीब नौ बजे गंगा में डूब गए। आपदा प्रबंधन दल को मौके पर बुलाकर रेस्क्यू अभियान शुरू कर दिया गया है। एसडीआरएफ की टीम भी गंगा में उनकी तलाश में जुटी रही। बताया कि डूबने वालों में एक कंपनी के सेंटर हेड राहुल सिंह पुत्र स्व. प्रेमपाल सिंह निवासी 190 तहरी वाली गली कलाम, पुलिस लाइन मार्ग, बुलंदशहर, यूपी और दूसरे मैनेजर भानू मूर्ति पुत्र एबीएम नारायण, निवासी प्लैट 8 थर्ड फ्लोर, मयूर विहार फेस वन ईस्ट पूर्व दिल्ली के रूप में हुई है।

हरदा के तीन-तीन राजनीतिक दलों के लिए लगाया पूर्व आईएएस पर उगाही का आरोप

देहरादून। उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने चडीगढ़ से फेसबुक पर एक ऐसा पोस्ट लिखा है, जिसने उत्तराखंड के सियासी गलियारों में हलचल मचा दी है । हरदा ने एक रिटायर्ड आईएएस अधिकारी पर अवैध उगाही का आरोप लगाया है। साथ ही तीन राजनीतिक दलों के साथ उगाही करने की बात भी कही है। दरअसल, पूर्व सीएम और कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव हरीश रावत ने फेसबुक पर एक पोस्ट लिखा है । जिसमें उन्होंने लिखा है, चंडीगढ़ में हूं और आज सुबह बहुत जल्दी आंख खुल गई थी । मन में बहुत सारे अच्छे और आशंकित करने वाले दोनों भाव हैं। कभी अपने साथ लोगों के द्वेष को देख कर मन करता है कि सब किस बात के लिए और फिर भी मैं तो राजनीति में वह सब कुछ प्राप्त कर चुका हूं, जिस लायक मैं था । फिर भी मेरे मन में एक भाव आ रहा है कि सभी लड़ाइयां चाहे, वह राजनीतिक क्यों ना हो, वो स्वयं सिद्धि के लिए नहीं होती हैं।हरीश रावत ने कहा है कि मैं जानता हूं कि केंद्र में सत्तारूढ़ दल मेरे ऊपर कई प्रकार के अत्याचार ढाने की भी कोशिश करेगा, जिसकी तैयारियां हो रही हैं। इसका मुझे आभास है, लेकिन जैसे-जैसे ऐसा आभास बढ़ता जा रहा है, चुनाव में लड़ने की मेरी संकल्प शक्ति भी बढ़ती जा रही है।

हरीश रावत का कहना है कि एक नहीं बल्कि कई निहित स्वार्थ जो अलग-अलग स्थानों पर विद्यमान हैं, मेरी राह को रोकने के लिए एकजुट हो रहे हैं। हरीश रावत ने एक पूर्व नौकरशाह पर अवैध उगाही का आरोप लगाते हुए कहा कि एक रिटायर्ड नौकरशाह आज तो सत्तारूढ़ दल ही नहीं, बल्कि तीन-तीन राजनीतिक दलों के लिए एक साथ राजनीतिक उगाही कर रहा है । इसमें खनन की उगाई भी बंट रही है, क्योंकि उत्तराखंड में बहुत सारे लोगों के आर्थिक स्वार्थ जुड़े हुए हैं। उन सभी लोगों के एकजुट होने का प्रयास चल रहा है, ताकि वो सत्तारूढ़ दल की कुछ मदद कर सकें। वहीं, हरदा ने आगे लिखा है कि कहीं-कहीं 2022 नहीं तो 2027 की सुगबुगाहट भी हवाओं में है, मगर चंडीगढ़ का यह एकांत मुझे प्रेरित कर रहा है कि जितनी शक्ति बाकी बची है, उससे उत्तराखंड और उत्तराखंडियत की रक्षा, पार्टी की मजबूती के लिए, जो मैं अपने व्यक्तिगत कष्ट मान-अपमान और यातनाओं को झेलने के लिए तैयार रहना चाहिए।

टिहरी निवासी जबर सिंह के पार्थिव शरीर को भारत में लाने का अनुरोध

टिहरी जिले के कंदीसौड़ स्थित थौलधार ब्लाक निवासी जबर सिंह के पार्थिव शरीर को नाइजीरिया से भारत वापस लाने के लिए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने विदेश मंत्री एस जय शंकर को पत्र लिखकर अनुरोध किया है कि भारत सरकार इस मसले पर गंभीरता से प्रयास करे।

ज्ञातव्य है कि टिहरी जनपद के कंदीसौड़ गांव के निवासी जबर सिंह नाइजीरिया स्थित ताज रेस्टोरेंट में काम में कार्यरत थे, बीते 24 अगस्त को देर रात को अचानक उनका स्वास्थ्य खराब होने के कारण उनका आकस्मिक निधन हो गया था। जबर सिंह के आकस्मिक निधन के बाद उनके परिजनों द्वारा उनका पार्थिव शरीर अपने गाँव लाये जाने हेतु नाइजीरिया सरकार से सम्पर्क किया गया, लेकिन उनके द्वारा स्व. जबर सिंह के पार्थिव शरीर को भारत वापस भेजे जाने में असमर्थता व्यक्त कर दी गई। स्व. जबर सिंह के परिवारजनों की आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण स्वयं के संसाधनों से वे मृतक का शरीर भारत वापस लाने में असमर्थ है।

इस बात का संज्ञान लेते हुए मुख्यमंत्री ने भारत सरकार के विदेश मंत्री से विशेष अनुरोध करते हुए इस मामले की गम्भीरता को ध्यान में रखते हुए शीर्ष प्राथमिकता के आधार पर स्व. जबर सिंह के पार्थिव शरीर भारत वापस लाये जाने हेतु केन्द्र सरकार से आग्रह किया है. विदेश मंत्रालय से इस सम्बन्ध में राज्य सरकार को सकारात्मक आश्वासन मिला है।

एम्स ऋषिकेश में शुरू हुआ 11वां एटीसीएन प्रशिक्षण कार्यक्रम

अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान ऋषिकेश में 13वां विश्वस्तरीय एटीएलएस एवं 11वां एटीसीएन प्रशिक्षण कार्यक्रम विधिवत शुरू हो गया। जिसमें एम्स के साथ ही अन्य मेडिकल संस्थानों के 16 चिकित्सक एवं 16 सीनियर नर्सिंग ऑफिसर व नर्सिंग ऑफिसर टर्सरी केयर सेंटर में भर्ती होने वाले दुर्घटना में घायल ट्रॉमा मरीजों के उपचार संबंधी प्रशिक्षण ले रहे हैं।

आज एडवांस सेंटर फॉर कंटिनिवस प्रोफेशनल डेवलपमेंट (एसीसीपीडी विभाग) में एम्स निदेशक प्रोफेसर रवि कांत की देखरेख में तीन दिवसीय एटीएलएस एवं एटीसीएन प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू हो गया है। निदेशक ने कहा कि दुनिया का कोई भी ट्रॉमा सिस्टम ट्रेंड ट्रॉमा चिकित्सकों एवं नर्सिंग ऑफिसर्स के बिना प्रभावी नहीं हो सकता। बताया कि पहाड़ी क्षेत्रों के लिए इस तरह का विश्वस्तरीय प्रशिक्षण कार्यक्रम नितांत आवश्यक है, इसकी सबसे मुख्य वजह यह है कि पहाड़ी क्षेत्रों में विभिन्न तरह की दुर्घटनाओं के कारण ट्रॉमा के मामले सर्वाधिक होते हैं, लिहाजा प्रत्येक हैल्थ केयर वर्कर को टर्सरी केयर लेवल पर चिकित्सा कार्य करने के लिए यह प्रशिक्षण लेना जरुरी है, तभी वह दुर्घटना में घायल मरीजों की ठीक प्रकार से देखभाल कर सकते हैं।
उनका कहना है कि ट्रॉमा मैनेजमेंट एक टीमवर्क है, लिहाजा उसकी ट्रेनिंग भी विश्वस्तरीय मानकों के तहत कराई जानी जरुरी है। ट्रेनिंग प्रोग्राम डा. अजय कुमार व दीपिका कांडपाल के संयोजन में आयोजित किया जा रहा है।
ट्रॉमा सर्जरी विभागाध्यक्ष प्रो. कमर आजम की अगुवाई में आयोजित एटीएलएस प्रशिक्षण कार्यक्रम में बतौर प्रोग्राम डायरेक्टर डा. मधुर उनियाल व ट्रेनिंग फैकल्टी डा. फरहान उल हुदा, डा. अजय कुमार,डा. जितेंद्र चतुर्वेदी, डा. दिवाकर कोयल, डा. अंकिता काबि, दिल्ली एम्स ट्रामा सेंटर से डा. दिनेश बगराई ने प्रतिभागियों को प्रशिक्षण दिया, जबकि एटीसीएन कोर्स में महेश देवस्थले, डा. राजेश कुमार, चंदू राज बी., अरुण वर्गीस, जोमोन चाको ने प्रशिक्षणार्थियों को ट्रॉमा प्रबंधन का प्रशिक्षण दिया।

अफगानिस्तान से वापस लौटे उत्तराखण्ड वासियों ने मुख्यमंत्री का जताया आभार

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने आज मुख्यमंत्री आवास स्थित कैम्प कार्यालय के जनता मिलन हॉल में अफगानिस्तान से सकुशल लौटे 56 उत्तराखण्ड वासियों का स्वागत किया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि कठिन संघर्ष एवं जतन के बाद वतन वापस आने वालों का वे प्रदेश में स्वागत करते हैं। उन्होंने कहा कि अफगानिस्तान से उत्तराखण्ड वासियों की सकुशल वापसी के लिये वे निरंतर प्रयासरत रहे हैं। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, विदेश मंत्री एस जयशंकर के साथ ही राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल का भी आभार व्यक्त करते हुए उनके सहायोग के लिये धन्यवाद भी ज्ञापित किया। कहा कि यह सब प्रधानमंत्री मोदी के कुशल नेतृत्व के कारण संभव हो पाया। प्रधानमंत्री मोदी के कारण आज दुनिया में भारत का स्वाभिमान व इज्जत बढ़ी है। शक्तिशाली भारत की पहचान बनी है। देश के सक्षम एवं मजबूत लीडरशिप के कारण हमारे लोग विदेशों में सुरक्षित हैं। उन्होंने कहा कि अफगानिस्तान में फंसे लोगों को सकुशल वापसी के प्रयास जारी रहेंगे।

मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखण्ड के लोगों को दिल्ली से उनके घरों तक वापस लाने के लिये आवश्यक व्यवस्था सुनिश्चित करने के लिये स्थानिक आयुक्त को भी निर्देश दिये गये हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि अभी तक 400 से अधिक लोगों की उत्तराखण्ड वापसी हो चुकी है। उन्होंने कहा कि उत्तराखण्ड लौटे लोगों के स्वास्थ्य एवं स्वरोजगार की समस्याओं के समाधान का भी रास्ता तलाशा जायेगा। उन्होंने इस अवसर पर उपस्थित 56 लोगों के साथ ही सभी वापस लौटे लोगों के सुखद भविष्य की भी कामना की।

इस अवसर पर कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी ने कहा कि वे भी निरंतर अफगानिस्तान में फंसे लोगों के परिवार के सम्पर्क में रहे हैं। उन्होंने कहा कि उत्तराखण्ड लौटे लोगों में से यदि कोई अपना उद्यम स्थापित करना चाहेगा तो उसके लिये सहयोग दिया जायेगा।

इस अवसर पर गोरखाली सुधार सभा के पदाधिकारियों ने गोरखा समाज की विभिन्न समस्याओं से सम्बन्धित ज्ञापन भी मुख्यमंत्री को सौंपा। इस अवसर पर विशेष सचिव मुख्यमंत्री डॉ पराग मधुकर धकाते, जिलाधिकारी आर राजेश कुमार, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक डॉ. योगेंद्र सिंह रावत, संयोजक चेतन गुरंग, केंट वार्ड के पूर्व उपाध्यक्ष विष्णु गुप्ता, गोरखाली सुधार सभा की पुष्पा, सुधा, उमा के साथ ही बड़ी संख्या में अन्य लोग उपस्थित थे।

तीर्थ पुरोहितों से मुलाकात में सीएम ने कहा, नहीं होगा अहित


सीएम आवास में देवप्रयाग विधायक विनोद कण्डारी और केदारनाथ की पूर्व विधायक शैलारानी रावत के नेतृत्व में केदारनाथ व बदरीनाथ के तीर्थ पुरोहितों के प्रतिनिधिमण्डल ने सीएम पुष्कर सिंह धामी से भेंट की।

मुख्यमंत्री ने कहा कि देवस्थानम बोर्ड से तीर्थ पुरोहितों, हक हकूक धारियों और पण्डा समाज का किसी प्रकार का अहित नहीं होने दिया जाएगा। वरिष्ठ नेता श्री मनोहर कांत ध्यानी जी को संबंधित तीर्थ पुरोहितों के पक्ष को जानकर पूरी रिपोर्ट देने का आग्रह किया गया है। राज्य सरकार सभी को सुनेगी और उनकी चिंताओं का समाधान करेगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि कम्यूनिकेशन गैप नहीं होना चाहिए। राज्य सरकार बातचीत के माध्यम से रास्ता निकालेगी। बातचीत से सभी शंकाएं दूर की जाएगी और जहां सुधार की जरूरत होगी, राज्य सरकार सुधार करेगी।

बदरीनाथ मास्टर प्लान को मूर्त रूप देने से पूर्व सभी संबंधित पक्षों की भी बात सुनी जाएगी और उनकी शंकाओं का निवारण किया जाऐगा। सभी के हित यथासंभव सुरक्षित रहेंगे।

प्रतिनिधिमंडल के सदस्यों ने भी वार्ता के माध्यम से रास्ता निकाले जाने पर सहमति व्यक्त की।