वित्त मंत्री डा. अग्रवाल ने केंद्रीय वित्त मंत्री का जताया आभार, जीएसटी प्रतिपूर्ति में मिले साढ़े 341 करोड़ रूपए

वित्त मंत्री डा. प्रेमचंद अग्रवाल ने केंद्र सरकार की ओर से जीएसटी प्रतिपूर्ति के 341.5336 करोड़ रूपये जारी होने पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण जी का आभार व्यक्त किया है।

बता दें कि वस्तु एवं सेवा कर कार्यान्वयन के कारण उत्तराखंड को माह जून 2022 तक के लिए राजस्व की हानि की क्षतिपूर्ति के रूप में 744.84 करोड़ रूपये का लेखागत भुगतान किया जाना शेष था। इस क्रम में केंद्र सरकार की ओर से उत्तराखंड को 341.53 करोड़ रूपये प्राप्त हुए हैं।

इस मौके पर सूबे के वित्त मंत्री डा. प्रेमचंद अग्रवाल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण का आभार प्रकट किया है। उन्होंने कहा कि राज्य की जनता को डबल इंजन का लाभ मिल रहा है। देश के प्रधानमंत्री और केंद्रीय वित्त मंत्री के सहयोग से विभिन्न केंद्र पोषित योजनाओं व अनुदानों से प्रदेश का सर्वांगीण विकास हो रहा है।

चिंतन शिविर के दूसरे दिन सीएम ने की अधिकारियों से चर्चा

सशक्त उत्तराखंड / 25 चिंतन शिविर के द्वितीय सत्र के समापन पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से सभी अधिकारियों ने चर्चा भी की।

इस अवसर पर मुख्य सचिव एस.एस. संधू ने मुख्यमंत्री को बताया कि इन दिनों में काफी बेहतर चर्चा हुई। उन्होंने बताया कि चर्चा का सेसन आधा घंटा था लेकिन चर्चाएं एक से डेढ़ घंटे तक हुई।

साथ ही मुख्य सचिव ने मुख्यमंत्री को अवगत कराया कि जिस तरह से चिंतन शिविर हो रहा है उसी तर्ज पर प्रत्येक माह दो से तीन विभागों के साथ चर्चा की जाएगी।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि चिंतन शिविर में जितने भी विचार आए हैं उन्हें धरातल पर उतारा जाए और इन्हें कैबिनेट में लाया जाए।

चिंतन शिविर सभागार में अचानक पहुंच सीएम ने सुना अधिकारियों का विचार विमर्श

मसूरी स्थित लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय प्रशासनिक अकादमी में चल रहे चिंतन शिविर के आज के समापन सत्र में देर सायं मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी अचानक सरदार पटेल भवन सभागार में पहुँचे और अन्य अधिकारियों के मध्य बैठकर एक श्रोता के रूप में विचारों को सुनने लगे।

मुख्यमंत्री ने इस दौरान बेहद गंभीरता के साथ प्रस्तुतिकरण को देखने के साथ ही अधिकारियों के विचारों और सुझावों को सुना।

चिंतन शिविर के दूसरे दिन कृषि बागवानी, पर्यटन, वन विषयों पर हुआ मंथन

मसूरी स्थित लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय प्रशासनिक अकादमी में चल रहे चिंतन शिविर के द्वितीय दिन आज कृषि-बागवानी, पर्यटन, वन आदि विषयों पर मंथन हुआ। इस दौरान मुख्य सचिव एसएस संधू ने सत्र के शुरुआती उद्धबोधन में सभी अधिकारियों से कहा कि तीन दिन तक चलने वाले इस मंथन शिविर की प्रत्येक को एक सप्ताह के अंदर रिपोर्ट प्रेषित करनी होगी। उन्होंने कहा कि चिंतन शिविर में होने वाला ब्रेन स्टॉर्मिंग सेशन की असली चिंतन शिविर है। उन्होंने कहा कि इस शिविर में जो भी नए एवं इन्नोवेटिव विचार सामने आ रहे हैं उन पर हमें व्यापक विचार करना होगा।

इसके उपरांत सर्वप्रथम सचिव कृषि बीवीआरसी पुरुषोत्तम द्वारा अर्थव्यवस्था एवं रोजगार के अंतर्गत कृषि एवं बागवानी के अलावा एनिमल हसबेंडरी, डेयरी विकास एवं मत्स्य पालन पर प्रस्तुतिकरण पेश किया गया। इस दौरान उनके द्वारा बताया गया कि आज हमें कृषि एवं बागवानी के क्षेत्र में रिफार्म लाने की जरूरत है। पर्वतीय जिलों में बीज की गुणवत्ता सुधार की जरूरत है। पर्वतीय क्षेत्रों में जमीन की सेहत सुधार पर भी जोर दिया गया। आर्गेनिक के क्षेत्र को और आगे ले जाने पर जोर देते हुए बताया कि इससे कम से कम 50 हजार कृषकों को लाभ पहुँचाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि पर्वतीय क्षेत्रों में हमें रिसोर्स, टेक्नोलॉजी एवं इनोवेशन पर ध्यान देना होगा। साथ ही यह भी बताया कि वर्तमान में इस क्षेत्र में कई विभाग काम कर रहे हैं, इसके लिए हमको सबको साथ लाने का प्रयास करना होगा। अलग-अलग विभागों की ओर से होने वाले जीओ के बजाय हमको कॉम्प्रीहेन्सिव जीओ लाने होंगे। इसके अलावा क्लस्टर फार्मिंग पर जोर देने के साथ ही लैंड रिफार्म दोबारा किये जाने पर बल दिया गया। इससे कॉन्ट्रैक्ट फार्मिंग में मदद मिलेगी। यह भी बताया कि अगले पांच वर्षों में 5 फलों के क्षेत्र में 5 सेंटर फार एक्सेलेन्स बनाने का लक्ष्य है। इस दौरान रुद्रप्रयाग में स्टेट ऑफ आर्ट होमस्टे के अलावा नैनीताल जनपद में जिलाधिकारी धीराज गबर्याल द्वारा क्लस्टर बेस्ड कृषि प्रयासों की विशेष सराहना की गई।

प्रस्तुतिकरण में जोर दिया गया कि लाइवस्टॉक में सुधार के लिए हमें बाहर से भी इन्हें लेना चाहिए और बद्री गाय को भी बढ़ावा दिया जाना चाहिए। ऐसा करके रोजगार को भी बढ़ावा मिलेगा। इसके अलावा 13 जिलों में गोट वैली विकसित किये जाने पर बल दिया गया। इस अवसर पर बिसन जी द्वारा सक्सेस स्टोरीज पर प्रस्तुतिकरण (पीएम गतिशक्ति) दिया गया।

2025 तक श्रेष्ठ राज्य की बात कहने से नहीं बनेगा, करके दिखाना होगाः मुख्यमंत्री

लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय अकादमी मसूरी में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने तीन दिवसीय सशक्त उत्तराखंड / 25 चिंतन शिविर के प्रथम सत्र का शुभारंभ किया।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि इस चिंतन शिविर के आयोजन को लेकर हम बहुत दिनों से सोच रहे थे। उन्होंने कहा कि इन तीन दिनों तक हमें चिंतन के साथ चिंता भी करनी है कि प्रदेश का विकास कैसे हो? मुख्यमंत्री ने कहा कि भगवान ने आप सभी को बहुत विशिष्ट बनाया है। आईएएस हमारे देश की सबसे बड़ी प्रशासनिक सेवा है और आप देश-प्रदेश की नीतियों को तय करते हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि हमें चीजों को नोट करने की आदत डालनी चाहिए। एक दिन में हमारे अंदर हजारों विचार आते हैं। ऐसे में हर चीज याद नहीं रखी जा सकती। उन्होंने कहा कि आप के लिए कोई काम मुश्किल नहीं है।
उन्होंने कहा कि मैंने महसूस किया है कि विभाग अपनी जिम्मेदारी एक दूसरे पर डालने की कोशिश करते हैं, इस प्रवृत्ति को हमें त्यागना होगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि हमने सरलीकरण का मंत्र दिया है। हमें यहां सोचना होगा कि कितने विभागों ने कार्य का सरलीकरण किया। प्रक्रियाओं सरलीकरण कर के समाधान का रास्ता निकलना है। उन्होंने कहा कि आज पूरी सरकार यहां है। इन तीन दिनों में यहां मन से चिंतन करना होगा।

उन्होंने कहा कि उत्तराखंड के सभी अधिकारी अच्छा काम करते हैं और फीडबैक भी आते रहते हैं। उन्होंने कहा कि मैं ज्यादा से ज्यादा जनता के बीच रहने की कोशिश करता हूं। अभी कुछ दिनों से आदत बनाई है कि जिलों में भ्रमण के दौरान सुबह 6 से 8 बजे तक लोगों से बात करता हूँ और फीडबैक लेता रहता हूं और इस दौरान सबके बारे में पता चलता रहता है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि देखने में आता है कि कई अधिकारी फ़ाइल को ठीक से आगे नहीं बढ़ाते। ये आदर्श स्थिति नहीं है। कई दफा हम अपने स्तर से फैसले नहीं लेते। फ़ाइल नीचे से चलते हुए कई बार मेरे पास तक आ जाती है जिस पर सभी की एक ही टिप्पणी होती है कि उच्च अनुमोदन हेतु प्रेषित। जबकि जरूरत यह है कि हम अपना निर्णय भी उस पर लिखें। उन्होंने कहा कि हमारी जो काम करने की प्रणाली है। इसमें बदलाव की जरूरत है। हमें बेस्ट प्रैक्टिस करने की आदत डालनी होगी और 10 से 5 वाले कल्चर से बाहर आना होगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि हमें सरलीकरण, समाधान और संतुष्टिकरण के मंत्र पर कार्य करना होगा। हमारा फ़ोकस समाधान पर होना चाहिए। एसीआर भरे जाने के समय यह ध्यान दिया जाना चाहिए कि जो टास्क दिया गया था वो हुआ या नहीं। हम इस कार्य को इसी वर्ष से प्रारम्भ करेंगे।

उन्होंने कहा कि अभी यह आम धारणा है कि जो योजना हम बनाते हैं वो योजनाएं देहरादून बेस्ड बन रही हैं। हमें पर्वतीय जिलों को विकास के खाके में शामिल करना ही होगा। राज्य की हकच में जिन ज़िलों योगदान कम है, उनके लिए योजनाएँ बनाई जानी चाहिए। वर्तमान में भारत सरकार-नीति आयोग आदि सब हमें सहयोग करने को तैयार हैं। हिमाचल और हमारी जलवायु बहुत मिलती जुलती है। लेकिन हमें यह मंथन करना होगा कि कैसे वे बागवानी के क्षेत्र में हमसे बेहतर कर रहे हैं । हमारी स्थिति हिमाचल से बेहतर है। हम बाग़वानी को कैसे बढ़ायें। इस पर कार्यवाही होनी चाहिए
उन्होंने कहा कि आने वाले दिनों में देहरादून और आसपास के इलाके पहले से कहीं ज्यादा कंजस्टेड हो जाएंगे। हमें उसके अनुरूप सुविधाओं को विकसित करना होगा।स्मार्ट सिटी को लेकर शिकायतें आती हैं।इसको ठीक करना है। हम यह नहीं कह सकते यह काम हमारे। समय का नहीं है।अच्छा ख़राब जो भी है अब यह हमारी ज़िम्मेदारी है।इसको ठीक करना है।
उन्होंने कहा कि हमारा चिंतन व्यवहारिक होना चाहिए। प्रदेश के हित में होना चाहिए। वर्ष 2025 तक केवल श्रेष्ठ राज्य की बात कहकर कुछ नहीं होने वाला बल्कि इसे हमको करकर दिखाना है। हमें 2025 तक एक सशक्त उत्तराखंड बनाना है। हमें विकास की योजनाएं अपने भूगोल के अनुसार बनानी होंगी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि हमें कहाँ जाना है?हम कहाँ पर हैं?रुकावटें क्या हैं? अगर हम यह समझ पाए तो समस्या का समाधान आसान हो जाता है। उन्होंने कहा कि घोषणाएँ सुनियोजित होनी चाहिए। यह धारणा बदलनी चाहिए कि सरकार में काम नहीं होते। काम करने का रास्ता निकाला जाना चाहिए। हम नहीं बल्कि हमारा काम बोलना चाहिए। हमें अपने काम को मन-वचन-कर्म से करना चाहिए।
उन्होंने कहा कि सभी का काल खंड उसके द्वारा किए गए कामों के लिए जाना जाएगा।

हिमाचल के बाद दिल्ली में बतौर स्टार प्रचारक पार्टी के समर्थन में प्रचारकर रहे धामी

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की धमक हिमाचल चुनाव के बाद अब दिल्ली में भी देखने को मिल रही है। राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी बतौर स्टार प्रचारक भाजपा के लिए प्रचार में उतर गए हैं। रविवार को मुख्यमंत्री धामी ने एक ज़बरदस्त रोड शो से इसकी शुरुआत कर दी है। इससे पूर्व हिमाचल विधानसभा चुनाव में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी शिमला, सिरमौर, पौंटा साहिब, नाहन समेत एक दर्जन से ज्यादा सीटों पर जनसभा एवं चुनावी रैलियां कर चुके हैं।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी रविवार को दिनभर अल्मोड़ा ज़िले के दौरे पर तमाम बैठक और कार्यक्रमों में हिस्सा लेने के बाद दिल्ली पहुँचे। उन्होंने नगर निगम चुनाव में भाजपा प्रत्याशी विनोद नगर सीट से रवि नेगी और मंडावली सीट से शशी चांदना के पक्ष में शांति मार्ग से श्रीराम चौक तक रोड शो किया। इस दौरान उनके साथ दिल्ली सांसद गौतम गंभीर भी मौजूद रहे मुख्यमंत्री धामी के रोड शो में उमड़े हजारों की भीड़ ने साबित कर दिया कि सीएम धामी का चेहरा उत्तराखंड ही नहीं बल्कि राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में भी लोगों को खूब भा रहा है।
यह पहला मौका है जब उत्तराखंड के किसी भी मुख्यमंत्री को अन्य राज्यों में भी आम जनता का इतनी भारी तदात में प्यार मिल रहा है।

गौरतलब है कि उत्तराखंड के 22 सालों के सफर में पुष्कर सिंह धामी सबसे युवा चेहरे के तौर पर प्रदेश के मुख्यमंत्री के रूप में काम कर रहे हैं। पार्टी हाईकमान भी युवा चेहरे के तौर पर सीएम धामी को राष्ट्रीय परिदृश्य में विभिन्न राज्यों में चुनाव प्रचार की जिम्मेदारी सौंप रही है। इससे पूर्व हिमाचल चुनाव में मुख्यमंत्री धामी ने पौंटा, शिमला, सिरमौर समेत एक दर्जन विधानसभा सीटों पर भाजपा प्रत्याशियों के पक्ष में चुनावी रैलियां कर चुके हैं। अब दिल्ली नगर निगम चुनाव में सीएम धामी के जबरदस्त रोड शो से यह साबित हो गया है कि युवा मुख्यमंत्री धामी की राष्ट्रीय फलक पर एक मंझे हुए राजनीतिज्ञ के तौर पर पहचान बन गई है। भाजपा राष्ट्रीय नेतृत्व इसी वजह से सीएम धामी को विभिन्न प्रदेशों के चुनाव में जिम्मेदारी सौंप रहा है।

सीएम ने छावला केस पीड़िता मामले में वकील से ली जानकारी

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने नई दिल्ली स्थित उत्तराखण्ड सदन में छावला केस की पीड़िता के माता-पिता से मुलाकात कर कहा कि उत्तराखण्ड की बेटी को न्याय दिलाने के लिए राज्य सरकार हर संभव प्रयास कर रही है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि उन्होंने केंद्रीय कानून और न्याय मंत्री किरेन रिजिजू से भी बात की है। मामले से संबंधित वकील चारू खन्ना से भी पूरी जानकारी ली है। पूरा उत्तराखंड उनके साथ है। मुख्यमंत्री ने कुछ दिन पूर्व उत्तराखण्ड की बेटी के पिताजी से फोन पर बात की थी और कहा था कि वे जल्द ही दिल्ली आकर उनसे मुलाकात करेंगे। आज मुख्यमंत्री ने नई दिल्ली में उत्तराखण्ड सदन में पीड़िता के माता-पिता से मुलाकात कर कहा कि पीड़िता हमारे उत्तराखंड की बेटी है और उसे न्याय दिलाने के लिए हर संभव प्रयास करेंगे।

न थकूंगा और न रूकूंगा, मंजिल तक पहुंचूंगा, यही है धामी का मूल मंत्र

पिथौरागढ़ में अल सुबह दुकान में आम लोगों के साथ चाय की चुस्की के साथ फीड बैक लेना हो या रुद्रप्रयाग में दुकानदार से बिना लाव-लश्कर से मिलना। एक सच्चे जनसेवक के तौर पर पहचान बना रहे सीएम पुष्कर सिंह धामी ने कई राजनीतिक मिथकों को तोड़ने का काम किया है। उनका जुनून, कुछ कर गुजरने की चाहत और निरंतर गतिविधियों से प्रदेश तेजी से विकास के पथ पर अग्रसरित हो रहा है। इस अथक मेहनत के पीछे एक सपने को साकार करने की इच्छा है कि उत्तराखंड को सर्वश्रेष्ठ राज्य बनाना है।

ना रुकना है, ना थकना है ना झुकना है ना मिटना है राज्य के विकास, संस्कृति और विजन के लिए नए आयाम स्थापित करने हैं। प्रदेश के मुखिया के तौर पर धामी ने अपनी एक अलग पहचान बनाई है। वह जनता के हर सुख दुख में साथ हैं। आपदा के समय उत्तरकाशी का द्रोपदी का डांडा एवलांच हो या पौड़ी का बस हादसा, हर जगह खुद पहुंचते हैं। राहत और बचाव कार्यों की कमान खुद ही संभाल लेते हैं, इसका परिणाम होता है कि कहीं कोई ढिलाई या लापरवाही नहीं होती। अपने छोट से कार्यकाल में सीएम पुष्कर सिंह धामी ने एक बेहद संवेदनशील, सहृदयी और जननायक के तौर पर पहचान बनाई है। 4 जुलाई 2021 को मुख्य सेवक की शपथ लेते हुए एक युवा नेता के हाथ में देश के प्रधानमंत्री ने कमान सौंपी थी जिसे चरितार्थ कर रहे मुख्य सेवक पुष्कर सिंह धामी।

सुबह रुद्रप्रयाग, फिर गौचर चमोली उसके बाद जौलजीबी पिथौरागढ़, शाम को बच्चों के कार्यक्रम देहरादून में प्रतिभाग उसके बाद फाइलों का ढेर। ऐसे ही दिनचर्या है युवा मुख्यमंत्री की। हर कार्यक्रम में नई ऊर्जा, नये जोश के साथ लोगों से घुलना मिलना। जिस उमंग और उत्साह से विभिन्न कार्यक्रमों में स्थानीय जनता मुख्यमंत्री की राह देखती है, उसे युवा मुख्यमंत्री निराश नहीं होने देते, ऐसे ही कार्यशैली है पुष्कर सिंह धामी की।

एक ही दिन में उत्तराखंड के विभिन्न जिलों में मौसम खराब होने के बावजूद अपनी दमदार उपस्थिति आखिर कैसे दर्ज करा लेते हैं मुख्यमंत्री? सुबह 5 बजे उठकर रात 12 बजे तक कार्य करने की उनकी शैली उत्तराखंड को आगे बढ़ाने की सोच और कल्पना को साकार करते हुए दिखती है। यही सोच और कार्य करने की शैली से प्रभावित देश के प्रधानमंत्री ने यूं ही नही कहा कि आने वाला दशक उत्तराखंड का होगा। अपने यही विजन से मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री जी से देश के आखिरी गांव माणा को देश का पहला गांव घोषित कराया। मोदी जी की कार्य शैली अपनाते हुए युवा मुख्यमंत्री उनसे प्रेरणा लेते हुए जिस तरह उनके पद चिन्हों पर चलकर निरंतर कार्य कर रहे हैं उससे उत्तराखंड के लोगों में एक नई आशा की किरण जागी है निरंतर राजनीतिक अस्थिरताओं का शिकार रहा उत्तराखंड युवा मुख्यमंत्री के रूप में एक स्थिर राजनीति के साथ एक सर्वश्रेष्ठ राज्य बनने की ओर निरंतर अग्रसर हो रहा है।

सुप्रीम कोर्ट ने गरीब सवर्णों के लिए 10 प्रतिशत आरक्षण जारी रखने का किया ऐलान

उच्‍चतम न्‍ययालय की पांच न्‍यायाधीशों की संविधान पीठ ने आज तीन-दो के बहुमत से 103वें संविधान संशोधन की वैधता बरकरार रखी है जिसमें दाखिलों और सरकारी नौकरियों में आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के लिए दस प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान है।

न्‍यायाधीश दिनेश माहेश्वरी, न्‍यायाधीश बेला त्रिवेदी और न्‍यायाधीश जेबी पारदीवाला ने अधिनियम के पक्ष में राय दी है जबकि न्यायमूर्ति एस रवींद्र भटट ने कानून को भेदभावपूर्ण और बुनियादी ढांचे का उल्लंघन बताते हुए इस पर असहमति व्‍यक्‍त की। प्रधान न्यायाधीश यू यू ललित ने न्यायमूर्ति एस रवींद्र भटट की राय का समर्थन किया।

न्‍यायमूर्ति त्रिवेदी ने फैसला सुनाया कि आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग को दस प्रतिशत आरक्षण दिए जाने संबंधी कानून भेदभावपूर्ण नहीं है। न्यायमूर्ति माहेश्वरी ने कहा कि आर्थिक मानदंड को ध्यान में रखते हुए आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग को आरक्षण देने संबंधी कानून बुनियादी ढांचे या समानता संहिता का उल्लंघन नहीं करता। उनका कहना था कि इस प्रावधान से 50 प्रतिशत से अधिक आरक्षण देने की सीमा के किसी प्रावधान को कोई नुकसान नहीं पहुंचता।

बता दें कि जनवरी 2019 में संसद ने 103वें संविधान संशोधन को मंजूरी दी थी और इसे तुरंत ही उच्‍चतम न्‍यायालय में चुनौती दी गई थी। पहले इस मामले की सुनवाई तीन न्यायाधीशों ने की थी लेकिन बाद में 2019 में इसे पांच-न्यायाधीशों की एक बड़ी पीठ के पास भेज दिया गया। संविधान पीठ ने सितम्‍बर में छह दिन से अधिक समय तक इस मामले की सुनवाई की और अपना फैसला सुरक्षि‍त रखा था। वहीं, भारतीय जनता पार्टी ने आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों को आरक्षण दिए जाने को बराकरार रखने के उच्‍चतम न्‍यायालय के फैसले का स्‍वागत किया है। ट्वीट संदेश में पार्टी महासचिव बी एल संतोष ने कहा कि गरीब कल्‍याण का एक और श्रेय प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी को जाता है। उन्‍होंने कहा कि सामाजिक न्‍याय की दिशा में यह एक बड़ा निर्णय है।

मंगलवार को चंद्रग्रहण का सूतक नौ घंटे पूर्व लगेगा

साल का आखिरी चंद्र ग्रहण 8 नवंबर को पड़ने जा रहा है। चंद्र ग्रहण पर 200 साल बाद दो अशुभ योग बन रहे हैं, जो कुछ राशियों पर बुरा प्रभाव डाल सकते हैं। यह खग्रास चंद्रग्रहण है जो भारत में ग्रस्तोदय होगा। अर्थात मंगलवार को ग्रहण लगा हुआ चंद्रमा उदय होगा।

बता दें कि सूर्य व चंद्रमा के बीच पृथ्वी के आने से चंद्र ग्रहण लगता है। साथ ही चंद्र ग्रहण का सूतक काल नौ घंटे पहले शुरू हो जाता है। अभी विगत 25 अक्‍टूबर के दिन इस वर्ष का आखिरी सूर्यग्रहण लगा था तो ज्योतिष शास्त्र अनुसार 15 दिन के अंदर दो ग्रहण होना अशुभ माना जा रहा है। इस कारण भी कुछ राशियों पर ग्रहण बुरा प्रभाव डाल सकता है।

ग्रहण पर शनि और मंगल के आमने-सामने होने से अशुभ संयोग
ज्‍योतिषाचार्य आचार्य सुशांत राज के अनुसार ग्रहण पर शनि और मंगल के आमने-सामने होंगे।
इस कारण षडाष्टक और नीचराज भंग अशुभ योग बन रहा है।
यह योग मेष राशि और भरणी नक्षत्र में लगेगा।