अग्निशमन कार्यशाला में छात्रों को मिली अहम जानकारियां

एमआईटी ढालवाला में आज उत्तराखंड पुलिस के अग्निशमन विभाग द्वारा अग्नि से उपायों के सम्बन्ध मे एक कार्यशाला का आयोजन किया गया।

कार्यशाला का शुभारंभ करते हुए संस्थान निदेशक रवि जुयाल ने छात्रों और अध्यापकों को संबोधित करते हुए कहा कि अग्नि हम सभी जीवों के जीवन का एक अनिवार्य अंग है अग्नि के बिना जीवन असंभव है हमारा शरीर जिन पांच तत्वों से बना है उसमे एक मुख्य तत्व अग्नि भी सम्मिलित है। अग्नि जीवन से मृत्यु तक जीवन के सभी क्षणों में विद्यमान है, अग्नि जिस प्रकार हमारे जीवन के लिए अनिवार्य है ठीक उसी प्रकार यदि अग्नि के बारे में हमे सही जानकारी नहीं है तो यह हमारे जीवन के लिए प्राणघातक भी हो सकती है।

नरेंद्र नगर प्रभाग के अग्निशमन अधिकारी प्रदीप चंदोला ने बताया कि बिजली तेल या किसी अन्य रसायनिक कारणों से लगी आग को कभी भी पानी से बुझाने का प्रयास नहीं करना चाहिए अपितु मिट्टी बालू या कपड़े का प्रयोग करना चाहिए। उन्होंने बताया कि गर्मी के मौसम में चीड़ के जंगलों में सबसे अधिक आग का प्रकोप रहता है, जंगलों की आग को बुझाने के लिए पेड़ों की हरी शाखाओं का उपयोग कर तत्काल अग्निशमन या वन विभाग को सूचित करना चाहिए जिससे जन हानि और जंगलों को जलने से बचाया जा सके। डा. प्रेम प्रकाश पुरोहित द्वारा सभी प्रतिभागियो का आभार व्यक्त किया गया ।
कार्यक्रम का संचालन राजेश सिंह एवं रवि कुमार द्वारा संयुक्त रूप से किया गया। कार्यक्रम में रवि थापा, मनीष चौहान, उपेंद्र नौटियाल, शिल्पी कुकरेजा, मुकेश राणा, रविन्द्र असवाल, दर्शन पैन्यूली आदि छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।

मॉडर्न इंस्टीट्यूट में स्ट्रेस फ्री मैनजमेंट पर कार्यशाला

ऋषिकेश।
गुरुवार को एमआईटी ढालवाला में एक दिवसीय कार्यशाला हुई जिसमें मॉडर्न स्कूल, अगापे मिशन स्कूल, आरपीएस, ओमकारानंद सरस्वती निलयम स्कूल के 60 से अधिक अध्यापकों ने भाग लिया। मॉडर्न स्कूल के आंतरिक आश्वासन प्रकोष्ठ के विशेषज्ञ फैजल खान ने अध्यापकों को तनाव दूर करने के तरीके बताए। विभिन्न खेल और मनोवैज्ञानिक तकनीकों के जरिए प्रतिभागियों को रचनात्मक सोच उजागर के लिए प्रेरित किया। गीत की पंक्तियों को गवाकर अध्यापकों को बताया गया कि तनाव दूर करने में संगीत किस तरह मददगार हो सकता है। विशेषज्ञ फैजल खान ने कहा कि जब अध्यापक स्वयं सकारात्मक ऊर्जा से भरा होगा तो ही वह बच्चों के भीतर की रचनात्मकता को उभार सकता है। कार्यशाला में अध्यापकों को बेहतर संवाद के तरीके भी बताए गए। इस अवसर पर एमआईटी संस्थान के संस्थापक एचजी जुयाल, कार्यक्रम संयोजक ज्योति जुयाल व डॉ. रजनीश पाण्डेय सहित अन्य उपस्थित रहे।