बागी होकर जंगली बनी गाय में खेत में दिया बच्चा


ग्राम सभा खदरी खड़क माफ के खादर क्षेत्र में निराश्रित पशुओं की आमद थामे नहीं थम रही। पालतू से बागी होकर जँगली बने हुए इन मवेशियों ने खादर के खेतों को अपना किस कदर ठिकाना बना लिया है, इस बात का प्रमाण एक बार फिर पक्का हो गया।

बीते रोज एक पिछले पाँच साल से स्थानीय कृषक की बागी हुई गाय सहित निराश्रित मवेशियों का झुण्ड मोहर सिंह के खेत धर्म सिंह के खेत में घुस गया। जिसमें एक गाय खेतों में ही ब्याह गयी। सुबह जब स्थानीय खेतों की ओर घूमने निकले तो उन्होंने नवजात गौ वंश को देखा। जो कि अत्यधिक ठण्ड और पाला पड़ने के कारण अर्ध मूर्छित अवस्था में था, जबकि गाय लोगों को देखकर पहले ही भाग खड़ी हुई। बाद में पूर्व सैनिक सुरेंद्र प्रसाद रयाल ने स्थानीयों की मदद से नवजात गौवंश शिशु को उठाकर खेतों घर के पास बने घर में रखकर अलाव जलाते हुए गर्मी दी और घर से लाकर दूध पिलाया। जिला गंगा सुरक्षा समिति के सदस्य पर्यावरणविद विनोद जुगलान ने बताया कि बाद में भवन स्वामी गौ सेवक देव दत्त रयाल ने उस गौ वंश को अपनाने का निर्णय लिया और पालन पोषण हेतु साथ ले गए। मौके पर स्वामी भवात्मा नंद, देवेंद्र प्रसाद, मदनलाल, राय सिंह भण्डारी आदि मौजूद रहे।