16 फरवरी से महिंद्रा थार फेस्टिवल की शुरूआत, पर्यटन को मिलेगा बढ़ावा

उत्तराखंड में पर्यटन की अपार संभावनाएं है, प्रदेश के सभी 13 जिलों में एक से बढ़कर एक पर्यटक स्थलों के अलावा कई विशेष खासियत हैं, जिससे देश दुनिया में उत्तराखंड को अलग पहचान मिलती है। इन्हीं सब बातों को देखते हुए उत्तराखंड के रुद्रप्रयाग जिले स्थित केदारघाटी में होटल इंडस्ट्री के तौर पर अपने देश दुनिया में अलग पहचान बना चुके हैं, क्लब रिट्रीट ग्रुप द्वारा केदारघाटी में स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार और पर्यटन गतिविधियों को बढ़ाने के लिए महिंद्रा थार फेस्टिवल का आयोजन किया जा रहा है। दो दिन तक चलने वाले इस फेस्टिवल की आगामी 16 फरवरी से शुरुआत होगी।

क्लब रिट्रीट ग्रुप के संचालक और कम उम्र के एट्रप्रन्योर जतिन बगवाड़ी ने बताया कि महिंद्रा थार फेस्टिवल 16 फरवरी को गुप्तकाशी में और 17 फरवरी को चोपता में आयोजित किया जाएगा। इस आयोजन से केदार घाटी के अलावा आस-पास के इलाके भी एक्सप्लोर हो सकेंगे। इसके अलावा पर्यटक ऑफ रोड ड्राइविंग का मजा ले सकेंगे। इतना ही नही एडवेंचर टूरिज्म में दिलचस्पी रखने वाले पर्यटक के लिए केदार घाटी खास जगह बन जाएगी। जतिन की खास बात यह है कि समय-समय पर इस तरीके के आयोजन से केदारघाटी को गुलजार रखते हैं। वर्तमान में वे विलेज रिवर रिट्रीट गुप्तकाशी केदार रिवर रिट्रीट सीतापुर (गौरीकुंड), आईवीवाई टॉप श्रीनगर समेत आधे दर्जन रिसोर्ट का संचालन कर रहे हैं।

विस्तारीकरण के नाम पर टिहरी बांध विस्थापितों को न किया जाए दुबारा विस्थापित- निशंक

भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण देहरादून हवाई अड्डा सलाहकार समिति की राज्य अतिथि गृह भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण में एक बैठक आयोजित की गई।
बैठक में समिति के अध्यक्ष देश के शिक्षा मंत्री डॉ रमेश पोखरियाल निशंक की अध्यक्षता में हुई। बैठक में भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण देहरादून हवाई अड्डा सलाहकार समिति के समक्ष निदेशक डीके गौतम ने एयरपोर्ट के विकास कार्यों, उपलब्धियों और भविष्य की योजनाओं के एजेंडे को रखा।
बैठक में डाॅ. निशंक ने देहरादून एयरपोर्ट के विस्तारीकरण एवं विकास के कार्यों की समीक्षा की। उन्होंने देहरादून एयरपोर्ट को देश का नंबर वन एयरपोर्ट बनाने के लिए हर सम्भव मदद का भरोसा दिया। उन्होंने सभी फ्लाइट प्रबंधकों को सुझाव दिया कि देहरादून से रात्रि 9 बजे भी फ्लाइट जानी चाहिए। जिससे आम जनमानस को सुविधा मिल सके। उन्होंने जीएमवीएन और केएमवीएन के साथ मिलकर पर्यटन के लिए एक अच्छी सी योजना बनाने के निर्देश दिये।
उन्होंने कहा कि उत्तराखंड बहुत ही खूबसूरत जगह है इसके लिए एक हिमालय दर्शन योजना बनानी चाहिए। जिससे देश विदेश से आने वाले पर्यटकों को हिमालय दर्शन का अवसर मिले। बैठक में डीके गौतम ने बताया की अभी आने वाले समय में एयर टैक्सी नामक एक योजना शुरू होने वाली है जो चंडीगढ़ से हिसार के लिए शुरू होगी। इसमें लगभग 3 लोग जा पाएंगे और जिसका किराया लगभग ढाई हजार के करीब होगा।
केन्द्रीय मंत्री डाॅ. निशंक जी ने कहा की एयरपोर्ट को सुंदर और नंबर वन बनाने के लिए हमें पूरा प्रयास करना होगा और एयरपोर्ट विस्तारीकरण, विकास कार्य का कार्य तेजी से हो, इसमें ढिलाई नहीं होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि टिहरी बांध विस्थापित पहले ही अपना घर बार छोड़कर यहां विस्थापित हुए हैं, विस्तारीकरण में दोबारा टिहरी बांध के विस्थापितों को घर ना छोड़ना पड़े, इस पर गहनता से विचार होना चाहिए।
उन्होंने कहा कि एक हिमालयन लाइब्रेरी, एयरपोर्ट के सौजन्य से किसी स्थान पर बने और सीएसआर फंड द्वारा स्थानीय स्कूलों का विकास किया जाए। जिस पर एयरपोर्ट डायरेक्टर ने माजरी इंटर कॉलेज को गोद लेने को बात कही। उन्होंनेे कहा कि हमारी प्राथमिकता स्थानीय लोगों के प्रति संवेदना होनी चाहिए। स्थानीय लोगों को रोजगार मिले, किसी भी कारण से उनका रोजगार ना छीन पाए। वहीं, सलाहकार समिति सदस्य रविंद्र बेलवाल के द्वारा स्थानीय जन समस्याओं को लेकर केन्द्रीय मंत्री को अवगत कराया गया। जिस पर उन्होंने गंभीरता लेते हुए उक्त मार्ग को चैड़ा करने के लिए शीघ्र प्रयास करने के निर्देश दिए।
केन्द्रीय मंत्री ने एयरपोर्ट पर बीएसएनल की कनेक्टिविटी में सुधार हेतु केन्द्रीय राज्य मंत्री संजय धोत्रे से फोन पर वार्ता की। बैठक में डायरेक्टर ने एयरपोर्ट बिल्डिंग की आख्या प्रस्तुत की। उसके बाद डाॅ निशंक ने निर्माणाधीन नई टर्मिनल बिल्डिंग का भी निरीक्षण किया और कार्य को शीघ्र पूरे करने के निर्देश दिए।
बैठक में सदस्य रविन्द्र बेलवाल, संजीव चैहान, पूर्व मित्तल, राजीव तलवार, मोहन सिंह बर्निया, राजेंद्र सिंह खाती, एसडीएम लक्ष्मी राज चैहान, मनवीर चैहान आदि उपस्थित रहे।

कोटद्वार से श्रीनगर के बीच बनेगी ऑलवेदर रोड

ऑलवेदर रोड की तर्ज पर कोटद्वार से श्रीनगर तक हाईवे का निर्माण किया जाएगा। इसके तहत कोटद्वार से श्रीनगर तक हाईवे की चैड़ाई 12 मीटर होगी। एनएच के चैड़ीकरण और डामरीकरण का कार्य चार चरणों में किया जाएगा। कोटद्वार-पौड़ी-श्रीनगर हाईवे चारधाम यात्रा का वैकल्पिक मार्ग बनेगा और इसके बनने से यूपी, दिल्ली के पर्यटकों को आवाजाही में सुगमता होगी। यह बातें वन मंत्री डा. हरक सिंह रावत ने पत्रकार वार्ता में कहीं।

वन मंत्री डा. हरक सिंह रावत ने बताया कि कोटद्वार-पौड़ी-श्रीनगर हाईवे पौड़ी गढ़वाल जिले की लाइफ लाइन बनेगी। इस हाईवे के बनने से जिले में पलायन पर रोक लगेगी और टूरिज्म को बढ़ावा मिलेगा। उन्होंने कहा कि कोटद्वार से श्रीनगर तक हाईवे की चैड़ाई 12 मीटर होगी, जबकि मेरठ से कोटद्वार तक एनएच को फोर लेन बनाया जा रहा है।

उन्होंने कहा कि गत विधानसभा चुनाव के दौरान नितिन गडकरी ने एनएच को आलवेदर रोड की तर्ज पर निर्माण कराने की घोषणा की थी, जिसे सरकार जल्द पूरा करने जा रही है। कहा कि पहले चरण में सतपुली से अगरोड़ा के लिए वन भूमि क्लीयरेंस के साथ ही 82 करोड़ की धनराशि की स्वीकृति मिल चुकी है। अगले तीन-चार दिनों में टेंडर की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। कहा कि कोटद्वार से दुगड्डा के लिए 196 करोड़, दुगड्डा से गुमखाल के लिए 225 करोड़, गुमखाल से सतपुली के लिए 250 करोड़ और अगरोड़ा से श्रीनगर के लिए 280 करोड़ के प्राक्कलन को भी जल्द स्वीकृति मिल जाएगी। इस मौके पर वन मंत्री के ओएसडी विनोद रावत, पीआरओ सीपी नैथानी, सुरेंद्र सिंह गुसाईं, मुकेश नेगी आदि मौजूद रहे।

द्वितीय चरण में बनेंगी सुरंग
वन मंत्री ने कहा कि एनएच के चीफ और मुख्य वन संरक्षक गढ़वाल की बैठक में वन भूमि हस्तांतरण की प्रक्रिया की जा रही है। द्वितीय चरण में दुगड्डा से सतपुली और सतपुली से खंडाह के लिए सुरंगें प्रस्तावित की जाएगी।

लोकपरंपरा व संस्कृति के रंगों से सराबोर हुई कुंभनगरी

हरिद्वारः कुंभ 2021 के लिए तैयार हो रही धर्म नगरी इस बार लोक परंपराओं व संस्कृति के रंगों से सराबोर हो उठी है। यहां दीवारों पर उकेरा गया धार्मिक आस्था, लोक परंपराओं व पौराणिक सांस्कृति का वैभव भी श्रद्धालुओं को अपनी ओर आकर्षित करेगा। सरकार की ओर से धर्मनगरी को सजाने-संवारने के साथ ही स्वच्छ बनाने में कोई कसर नहीं छोड़ी गई है।

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने कहा कि “राज्य सरकार दिव्य और भव्य कुम्भ के लिए प्रतिबद्ध है। प्रयास किए जा रहे हैं कि कुंभ में यहां आने वाले करोड़ों श्रद्धालु उत्तराखण्ड की लोक व सांस्कृतिक विरासत से भी रूबरू हों।“

प्रदेश में देवभूमि की सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण व संवर्धन के लिए सरकार गम्भीरता से प्रयास कर रही है। हरिद्वार कुंभ-2021 को भी इसके लिए मुफीद मौका माना जा रहा है। इसके लिए चित्रकला को जरिया बनाया गया है। कुंभ क्षेत्र में सरकारी भवनों समेत पुल, घाट आदि की दीवारों को धार्मिक मान्यताओं के पौराणिक चित्रों व संस्कृति के रंग बिखेरते चित्रों से सजाया गया है। इसके पीछे भी मंशा यही है कि देश और दुनिया से आए श्रद्धालुओं के मन में आस्था भाव का तो जागृत हो ही वह यहां की परंपरा, संस्कृति और पौराणिक विरासत से भी रूबरू हो सकें। हरिद्वार रुड़की विकास प्राधिकरण के ‘पेंट माई सिटी’ कैम्पेन से धर्म नगरी की फिजा ही बदल दी गई है। यहां दीवारों व खाली स्थानों पर देवभूमि की परंपराओं और संस्कृति के बखरे पड़ें रंग देखने लायक है। कहीं देवी-देवताओं, धार्मिक परम्पराओं के तो कहीं लोक संस्कृति के चित्र सजीवता लिए हुए हैं। कैबिनेट मंत्री मदन कौशिक ने बताया कि कुंभ मेला क्षेत्र को चित्रकला से सजाने में विभिन्न संस्थाओं का सहयोग रहा है। सरकार की मंशा के अनुरूप मेक माय सिटी कैंपेन से धर्म नगरी में परंपराओं और संस्कृति के रंग भी देखने को मिलेंगे। कुंभ तैयारियां लगभग पूरी हो चुकी हैं। इस बार का कुंभ दिव्य और भव्य होगा।

स्पीकर प्रेमचंद ने जम्मूतवी ट्रेन को योगनगरी रेलवे स्टेशन से हरी झंडी दिखाकर किया रवाना

ऋषिकेश से जम्मू तक जाने वाली जम्मूतवी ट्रेन अब ऋषिकेश के पुराने रेलवे स्टेशन से नहीं, बल्कि नए योगनगरी रेलवे स्टेशन से संचालित होगी। आज इस ट्रेन को विधानसभा अध्यक्ष प्रेमचंद अग्रवाल ने हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। दोपहर तीन बजकर 40 मिनट पर योगनगरी रेलवे स्टेशन से जम्मूतवी ट्रेन संचालित हुई। इस मौके पर यात्रियों में अलग ही उत्साह देखने को मिला।
विधानसभा अध्यक्ष प्रेमचंद अग्रवाल ने कहा कि योग नगरी ऋषिकेश से जम्मू तवी (ट्रेन सं०04605) के लिए रेल यातायात को खोले जाने पर उन्हें अत्यंत हर्ष का अनुभव हो रहा है।उन्होंने कहा कि योग नगरी ऋषिकेश में विहंगम दृश्य वाली पहाड़ी शैली से बनाया गया स्टेशन यहां आने वाले श्रद्धालुओं एवं पर्यटकों को आकर्षित करेगा। योग नगरी ऋषिकेश स्टेशन से संचालित सभी ट्रेनें उत्तराखंड की जनता के आवागमन को सुगम एवं सुरक्षित करेगी एवं उत्तराखंड को भारत के पर्यटन मानचित्र में स्थापित करने का भी काम करेगी।

विधानसभा अध्यक्ष ने कहा कि उत्तराखंड की रेल परियोजना में प्रकृति के संरक्षण के लिए भी विशेष ध्यान रखा जा रहा है जिसका सफल उदाहरण वीरभद्र से योग नगरी ऋषिकेश स्टेशन के मार्ग पर स्पष्ट दिखाई दे रहा है।

इस अवसर पर विधानसभा अध्यक्ष ने कहा कि देवभूमि उत्तराखंड में स्थित चारों धामों को रेल मार्ग से जोड़ने का संकल्प प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा 2014 में लिया गया था, इसी सपने को साकार करने के उद्देश्य से 125 किलोमीटर लंबी ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल परियोजना का कार्य तीव्र गति से चल रहा है।श्री श्री अग्रवाल ने कहा कि इस महत्वकांक्षी परियोजना के 105 किलोमीटर हिस्से का निर्माण पहाड़ों के भीतर 70 सुरंग एवं नदियों के ऊपर 16 पुलों के निर्माण के रुप में होना है, परियोजना में 14.7 किलोमीटर भारत की सबसे लंबी रेलवे सुरंग का भी निर्माण किया जाना है साथ ही शिवपुरी, व्यासी, देवप्रयाग, श्रीनगर, धारी देवी, रुद्रप्रयाग, गौचर, कर्णप्रयाग सहित 12 स्टेशनों का निर्माण होना है।

विधानसभा अध्यक्ष ने कहा कि इस परियोजना से पर्यटन के अलावा प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रूप से राज्य की जनता को रोजगार के नये अवसर भी प्राप्त होंगे। विधानसभा अध्यक्ष ने इस मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एवं रेल मंत्री पीयूष गोयल का आभार व्यक्त किया है।

इस मौके पर मुरादाबाद मंडल रेल प्रबंधक तरुण प्रकाश, मंडल वाणिज्य प्रबंधक रेखा शर्मा, मैकेनिकल इंजीनियर समर्थ सिंह, स्टेशन प्रबंधक ज्ञानेंद्र सिंह परिहार, मेयर अनिता मंमगाई, ऋषिकेश मंडल अध्यक्ष दिनेश सती, प्रदेश उपाध्यक्ष कुसुम कंडवाल, जिला महामंत्री सुदेश कंडवाल, राजेश जुगलान, पार्षद वीरेंद्र रमोला, पार्षद विपिन पंत, पार्षद बिजेंद्र मोगा, पार्षद ऋषि कांत गुप्ता, पार्षद संजीव पाल, पार्षद राजू नरसिम्हा, पार्षद शिव कुमार गौतम, अरुण बडोनी, सीमा रानी, मनोज शर्मा, गोपाल सती, सुमित पवार, मुकेश ग्रोवर, सुमित सेठी, सचिन अग्रवाल, रविंद्र राणा, ऋषि राजपूत, पार्षद प्रदीप कोहली, रजनी बिष्ट, भूपेंद्र राणा, अरविंद गुप्ता, अनीता तिवाडी, विनोद भट्ट, जयंत शर्मा, मनोज ध्यानी, विनीत रामपाल, विजय बडोनी आदि उपस्थित थे।

नजरियाः अब श्रद्धालु आसानी से जा सकेंगे बदरीनाथ धाम

डोबराचांटी पुल के बाद त्रिवेन्द्र सरकार ने एक और ऐसे प्रोजेक्ट का काम पूरा कर लिया है जो बीते ढाई दशकों (26 वर्ष) से अटका हुआ था। बदरीनाथ धाम की यात्रा में नासूर बने ‘लामबगड़ स्लाइड जोन’ का स्थायी ट्रीटमेंट कर लिया गया है। मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत की इच्छाशक्ति और सख्ती की बदौलत यह प्रोजेक्ट महज दो वर्ष में ही पूरा हो गया। तकरीबन
500 मीटर लम्बे स्लाइड जोन का ट्रीटमेंट 107 करोड़ की लागत से किया गया। अब बदरीनाथधाम की यात्रा निर्बाध हो सकेगी, जिससे तीर्थयात्रियों को परेशानियों से निजात मिलेगी।

सीमांत जनपद चमोली में 26 साल पहले ऋषिकेश-बदरीनाथ नेशनल हाईवे पर पाण्डुकेश्वर के पास लामबगड़ में पहाड़ के दरकने से स्लाड जोन बन गया। हल्की सी बारिश में ही पहाड़ से भारी मलवा सड़क पर आ जाने से हर साल बदरीनाथधाम की यात्रा अक्सर बाधित होने लगी। लगभग 500 मीटर लम्बा यह जोन यात्रा के लिए नासूर बन गया। पिछले ढाई दशकों में इस स्थान पर खासकर बरसात के दिनों मे कई वाहनों के मलवे में दबने के साथ ही कई लोगों की दर्दनाक मौत हो गई। करोड़ों खर्च होने पर भी इस समस्या का समाधान नहीं हो पा रहा था। पूर्व मे जब लामबगड़ में बैराज का निर्माण किया जा रहा था, तब जेपी कंपनी ने इस स्थान सुरंग निर्माण का प्रस्ताव रखा, लेकिन उस वक्त यह सड़क बीआरओ के अधीन थी और बीआरओ ने भी सुरंग बनाने के लिए हामी भर दी थी। दोनों के एस्टीमेट कास्ट मे बड़ा अंतर होने के कारण मामला अधर मे लटक गया था। इसके बाद वर्ष 2013 की भीषण आपदा में लामबगड स्लाइड जोन में हाईवे का नामोनिशां मिट गया। तब सडक परिवहन मंत्रालय ने लामबगड स्लाइड जोन के स्थाई ट्रीटमेंट की जिम्मेदारी एनएच पीडब्लूडी को दी। एनएच से विदेशी कम्पनी मैकाफेरी नामक कंपनी ने यह कार्य लिया। फॉरेस्ट क्लीयरेंस समेत तमाम अड़चनों की वजह से ट्रीटमेंट का यह काम धीमा पड़ता गया।

वर्ष 2017 में त्रिवेन्द्र सरकार के सत्ता में आते ही ये तमाम अड़चनें मिशन मोड में दूर की गईं और दिसम्बर 2018 में प्रोजेक्ट का काम युद्धस्तर पर शुरू हुआ। महज दो वर्ष में अब यह ट्रीटमेंट पूरा हो चुका है। अगले 10 दिन के भीतर इसे जनता के लिए समर्पित कर दिया जाएगा। इसे त्रिवेन्द्र सरकार की बड़ी उपलब्धियों में से एक माना जा रहा है।

उत्तराखंड हैं वास्तव में ईश्वर का घर

प्राचीन काल का मौलिक वातावरण, हिमालय की बुलंद चोटियां और अनेकानेक प्राणियों एवं वनस्पतियों का पर्यावास उत्तराखंड वास्तव में ईश्वर का घर है। यहां ऐसे कई मनोरम स्थल हैं जहां जाने की आकांक्षा दुनिया भर के लोगों के मन में है। कई जगहों के बारे में तो सैलानी बखूबी जानते हैं लेकिन शहरों की भीड़-भाड़ से दूर प्रकृति में गोद में छुपे कई ऐसे भी स्थल हैं जिनसे कम ही लोग वाकिफ हैं। हिल स्टेशन खिरसु ऐसी ही जगह है पौड़ी जिले में 1700 मीटर की ऊंचाई पर स्थित यह स्थल शांति की तलाश कर रहे लोगों के लिए बिल्कुल मुफीद है। इस छुपे नगीने तक पहुंचने के लिए पौड़ी शहर से 11 किलोमीटर उत्तर दिशा में जाना पड़ेगा।

सर्दियां आ चुकी हैं और यहां से बर्फ से भरे हिमालय के शिखरों का विहंगम दृश्य देखा जा सकता है। यहां के अछूते प्राकृतिक दृश्य शांतिमय वातावरण प्रदान करते हैं जहां आगंतुकों को बहुत तसल्ली मिलती है। शहरी जिंदगी की व्यस्तता से क्लांत पर्यटक यहां आध्यात्मिक सुकून और शरीर में नई ऊर्जा पाते हैं।

खिली धूप वाले दिन में आप साफ आकाश और चहचहाते पंछियों का दर्शन कर सकते हैं। चीड़, बांज, देवदार से ढके सुंदर पथ और उनके अगल-बगल हरियाली काई और दिलचस्प वनस्पतियां प्रत्येक इंसान में मौजूद भ्रमण-अनुरागी को चिंताओं से मुक्त कर देते हैं और उसे जीवन के वास्तविक अर्थ की खोज हेतु उन्मुख करते हैं। पहले खो जाने का ऐहसास और फिर अपनी आत्मा से जुड़ने का अनुभव व्यक्ति को छोटी-छोटी चीजों के महत्व के बारे में भी जागृत कर देता है। इस निराले शहर में आने वाला सैलानी प्रकृति के मध्य आनंद का पान करते हुए स्वयं को संपूर्ण अनुभव करता है।

कोविड-19 महामारी के इस दौर में ’वर्केशन’ शब्द भी लोकप्रिय हो रहा है, खासकर उत्तराखंड में। जो लोग प्राकृतिक सुषमा एवं शांति के संगम की तलाश में हैं, जहां पर दफ्तरी कार्य करने की उनकी क्षमता बढ़ जाए, उनके लिए खिरसु सही विकल्प है।

खिरसु की संभावनाओं और उत्तराखंड के अहम पर्यटन स्थल के तौर पर उसके विकास के बारे में उत्तराखंड पर्यटन के सचिव दिलीप जावलकर ने कहा, ’’उत्तराखंड में खिरसु जैसे बहुत से सुंदर स्थल हैं जिन पर अब तक पर्यटकों का अधिक ध्यान नहीं गया है। इस कोरोनाकाल में वर्केशन का ट्रैंड राज्य में फलफूल रहा है। हम इस आपदा को अवसर में बदलने के लिए निरंतर कार्यरत हैं तथा उत्तराखंड आने वाले पर्यटकों के लिए हम ऐसे और कई विकल्प पेश करते रहेंगे।’’

खिरसु में वर्केशन सुविधाओं एवं पर्यटकों के आगमन के बारे में पौड़ी जिले के पर्यटन विकास अधिकारी कुशल सिंह नेगी ने कहा, ’’खिरसु पौड़ी के बाहरी क्षेत्र में स्थित है, यह वास्तव में सैलानियों के लिए एक छुपा हुआ खजाना है। सरकार द्वारा पर्यटन संबंधी प्रतिबंध हटा दिए जाने के बाद से पर्यटकों से अच्छी प्रतिक्रिया मिल रही है। किसी भी राज्य का खालिस स्थानीय खानपान भी वह कारक होता है जो विभिन्न इलाकों के सैलानियों को आकर्षित करता है। इसी तथ्य के फलस्वरूप हमारे खिरसु में बासा होमस्टे की स्थापना हुई है जिसे यहां की स्थानीय महिलाओं द्वारा चलाया जाता है। वे अतिथियों को अत्यंत सुस्वादु भोजन परोसती हैं और लोक कथाएं भी सुनाती हैं। ऐसे कुछ अन्य प्रोजेक्ट भी निर्माणाधीन हैं जैसे बासा होमस्टे 2, हंटर हाउस और फिशरी होमस्टे।

सैर-सपाटे के लिए नजदीकी स्थल

ज्वाल्पा देवी मंदिरः यह प्रसिद्ध मंदिर है जो पौड़ी-कोटद्वार मार्ग पर स्थित है, पर्यटकों के बीच यह जगह खूब जानीमानी है। स्थानीय लोगों का विश्वास है कि यहां शुद्ध हृदय से की गई प्रार्थनाएं अवश्य फलीभूत होती हैं। यह मंदिर पूरे साल भर खुला रहता है। हर साल नवरात्रों में यहां एक बड़ा धार्मिक मेला लगता है जिसमें पूरे क्षेत्र भर से लोग आते हैं। यहां बिना खर्च के कई विवाह भी सम्पन्न किए जाते हैं।

घंडीयाल देवता मंदिरः घंडियाल देवता का प्राचीन मंदिर स्थानीय भक्तों के बीच प्रसिद्ध है। इन्हें रक्षक देव भी कहा जाता है और मान्यता है कि ये देवता अभिमन्यु का अवतार हैं जो कि भगवान शिव के उपासक थे। घंडियाल मेला इस मंदिर का बहुत बड़ा आकर्षण है। यह 9 दिन 9 रात तक चलता है। आसपास के इलाकों में रहने वाले श्रद्धालु उच्च धार्मिक जज्बे के साथ इस मेले में भाग लेते हैं और धार्मिक अनुष्ठान करते हैं।

खिरसु से आगे पर्यटकों के लिए घूमने वाले स्थल

श्रीनगरः यह शहर राष्ट्रीय राजमार्ग 58 पर अलकनंदा नदी के किनारे पर स्थित है। किसी जमाने में यह शहर गढ़वाल के राजाओं की राजधानी हुआ करता था, इस क्षेत्र में राज्य के विस्तार के लिए श्रीनगर की बहुत अहमियत थी। आज यहां गढ़वाल विश्वविद्यालय का केन्द्र है। इस क्षेत्र का यह सबसे बड़ा नगर है।

देवलगढ़ः खिरसु से श्रीनगर की दिशा में यह 16 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। यह गढ़वाल साम्राज्य की प्रमुख गढ़ राजधानियों में से एक है। यह साम्राज्य कितना समृद्ध हुआ करता था इसकी बानगी यहां आकर देखने को मिलती है। राज राजेश्वरी मंदिर और गौरी देवी मंदिर इस इलाके के मुख्य आकर्षण हैं।

उल्कागढ़ीः खिरसु (चैबट्टाखाल) से तीन किलोमीटर के फासले पर है उल्कागढ़ी। इसे एक छोटे मंदिर, उल्केशवरी मंदिर के लिए जाना जाता है तथा गढ़वाल साम्राज्य के बहुत से ढांचे भी इस इलाके में देखने को मिल जाएंगे।

पौड़ीः पौड़ी गढ़वाल का जिला मुख्यालय और गढ़वाल मंडल के आयुक्त का मुख्यालय भी यहां स्थित है। खिरसु से यह 20 किलोमीटर और श्रीनगर से 32 किलोमीटर है। पौड़ी के खूबसूरत हिल स्टेशन में औपनिवेशिक वास्तुशिल्प की शैली में कई टूरिस्ट बंगलो बने हुए हैं। यहां ठहरने के लिए आपको कई प्राइवेट होटल मिल जाएंगे। इस शहर में एक बड़ा बाजार भी है जहां से शॉपिंग के शौकीन आसपास के गांवों के निवासियों द्वारा बनाई गई स्थानीय वस्तुएं खरीद सकते हैं।

लैंसडाउनरू देश भर के पर्यटकों को आकर्षित करने के लिए सबसे लंबे इतिहास वाला एक हिल स्टेशन है। यह हिल स्टेशन मोटर मार्ग से अच्छी तरह से जुड़ा है। यहां आकर आप शहर की भागमभाग जीवन से आराम मिल सकता है। लैंसडाउन में लंबे सप्ताहांत के ब्रेक के लिए पर्यटक आकर आनंद ले सकते हैं।

वाइल्डलाइफ व नमामि गंगे की टीमों ने किया गंगा अवलोकन केंद्र, गंगा वाटिका व संजय झील का निरीक्षण

विकास के रथ पर सवार नगर निगम के तीन महत्वपूर्ण प्रोजेक्टों पर विभागीय अधिकारियों ने स्वीकृति की मुहर लगा दी है। आज निगम कार्यालय में वाइल्ड लाइफ व नमामि गंगे के टीम के अधिकारियों के साथ मेयर की महत्वपूर्ण बैठक सम्पन हुई।

नूतन वर्ष में नगर निगम प्रशासन ने योग नगरी ऋषिकेश को पर्यटन हब के रूप में विकसित कर शहर वासियों को एक नायाब तोहफा देने की तैयारी पूरी कर ली है। संजय झील के जीर्णोद्धार के साथ साथ गंगा तट त्रिवेणी घाट पर गंगा अवलोकन केंद्र एवं आस्था पथ पर गंगा वाटिका के निर्माण के लिए विभागीय कवायद शुरू हो गई है। सब कुछ योजना मुताबिक रहा तो वर्ष 2021 में शहर की अन्य महत्वपूर्ण योजनाओं के साथ यह तीनों योजनाएं भी धरातल पर उतरती हुई नजर आयेंगी।सोमवार की दोपहर नमामि गंगे की सेंट्रल टीम ने उत्तराखंड की वाइल्डलाइफ टीम के साथ तीनों महत्वाकांक्षी प्रोजेक्टों का स्थलीय निरीक्षण किया। नगर निगम आयुक्त नरेंद्र सिंह क्वीरियाल ने भारतीय वन्यजीव संस्थान भारत सरकार के वरिष्ठ वैज्ञानिक श्रेयश, भारतीय पर्यटन विकास निगम के चिन्मय शर्मा, नमामि गंगे उत्तराखण्ड के सामाजिक विशेषज्ञ डॉ पूरन चन्द्र जोशी एवं संदीप उनियाल को मौका मुआयना करा कर तीनों योजनाओं की विस्तृत जानकारी अधिकारियों को दी। इसके पश्चात तमाम अधिकारी निगम कार्यालय में पहुंचे जहां महापौर को उन्होंने जानकारी देते हुए बताया कि तीनों प्रोजेक्टों का कांसेप्ट बहुत शानदार है ।इन योजनाओं को धरातल पर लाने के बाद पर्यटन के साथ-साथ तीर्थाटन को भी इसका लाभ मिलेगा। महापौर ममगाई ने बताया कि उनके द्वारा भारतीय वन्यजीव संस्थान उत्तराखंड की विभागाध्यक्ष डॉ रुचि बडौला को त्रिवेणी घाट पर अवलोकन केन्द्र, आस्था पथ पर गंगा वाटिका एवं संजय झील के जीर्णोद्धार के लिए पत्र प्रेषित किया गया था ।उनके द्वारा तुरंत पत्र का संज्ञान लेकर आज जिस रफ्तार के साथ मौका मुआयना कराने के लिए टीमों को भेजा गया है उससे साफ है कि जल्द ही यह योजनाएं धरातल पर उतर कर ऋषिकेश को पर्यटन हब के रुप में विकसित कराने के लिए मील का पत्थर साबित होगी।

गंगा तट पर बनी ये अद्भुत पेंटिंग्स तीर्थनगरी की सुंदरता पर लगाएंगी चार चांदः अनिता

ऋषिकेश के आस्थापथ पर नगर निगम द्वारा शहर के उदयीमान कलाकारों द्वारा बनवाई गई पेंटिंग्स का आज दोपहर मेयर अनिता ममगाई ने लोकार्पण किया। मौके पर गंगा की स्वच्छता के लिए सजग प्रहरी बनकर कार्य करने की शपथ दिलाई गई। वहीं शहर में गंगा की स्वच्छता के लिए शानदार कार्य कर रहे रवि शास्त्री, रोहित प्रताप, अशोक बेलवाल को तीर्थ नगरी का स्वच्छता ब्रांड एम्बेसडर बनाया गया।

आज सांई घाट के समीप आस्था पथ पर बनी खूबसूरत पेंटिंग का लोकार्पण कर मेयर अनिता ने कहा कि शहर के कलाकारों द्वारा बनाई गई पेंटिंग से आस्था पथ की आभा में चार चांद लगाने का काम किया है ।यहां आने वाले श्रद्धालुओं एवं पर्यटकों को इन पेंटिंग को देख कर उत्तराखंड की महान संस्कृति के दर्शन होंगे। पेंटिंग में गोमुख, हिमालय, भागीरथी नदी अलकनंदा नदी, देवप्रयाग संगम, कौड़ियाला, ऋषिकेश, त्रिवेणी घाट, हरिद्वार हरकी पैड़ी आदि का सजीव चित्रण देवभूमि के हुनरमंद कलाकारों द्वारा किया गया है। आस्थापथ पर 400 स्क्वायर फिट के एरिया में माँ गंगा की गोमुख से हरिद्वार तक कि यात्रा के जीवंत चित्रण की पेंटिंग सभी के आर्कषण का केन्द्र रही।

इस दौरान सहायक नगर आयुक्त विनोद लाल, पार्षद मनीष शर्मा, विजय बडोनी, विजेंद्र मोगा, अनीता प्रधान, अनीता रैना, लक्ष्मी रावत, राजेश दिवाकर, उमा बृजपाल राणा, शकुंतला शर्मा, पंकज शर्मा, गौरव कैंथोला, शीलू अग्रवाल, प्रिया ढकाल, गुरविंदर सिंह, लक्ष्मी शर्मा, शैलेंद्र रस्तोगी, ममता नेगी, सफाई निरीक्षक धीरेंद्र सेमवाल, अभिषेक मल्होत्रा, सचिन रावत, प्रशांत कुकरेती आदि मौजूद रहे।

बाघ बाड़े का निरीक्षण कर स्पीकर ने जानी वनाधिकारियों से बाघों को लाने की प्रक्रिया

स्पीकर प्रेमचंद अग्रवाल ने राजाजी नेशनल पार्क मोतीचूर रेंज में बन रहे बाघ बाड़े का निरीक्षण किया। उन्होंने वन अधिकारियों से बाघ बाडे की प्रगति के बारे में जानकारी ली।

अवगत करा दें कि राजाजी नेशनल पार्क का 550 वर्ग किमी का मोतीचूर-धौलखंड क्षेत्र वीरान सा है। वहां पिछले सात साल से सिर्फ दो बाघिनें ही हैं। दरअसल, पार्क से गुजर रहे हाइवे और रेल लाइन के कारण बाघों की आवाजाही एक से दूसरे क्षेत्र में नहीं हो पाती। यही वजह है कि गंगा के दूसरी तरफ के चीला, गौहरी और रवासन से बाघ मोतीचूर-धौलखंड क्षेत्र में नहीं आ पाते।इस सबको देखते हुए कॉर्बेट या दूसरे क्षेत्रों से मोतीचूर- धौलखंड क्षेत्र में बाघ शिफ्ट करने की योजना बनी। जिसके मद्देनजर मोतीचूर रेज में बाघ बाड़ा बनाया जा रहा है।

विधानसभा अध्यक्ष के द्वारा निरीक्षण के दौरान पूछने पर रेंजर महेंद्र गिरी ने बताया कि बाघ शिफ्टिंग के मद्देनजर सभी तैयारियां पूरी हो चुकी हैं। बाघों को यहां लाकर मोतीचूर में बनाए गए बाड़े में रखा जाएगा। वहां इनके व्यवहार पर नजर रखी जाएगी और फिर इन्हें मोतीचूर-धौलखंड क्षेत्र में छोड़ा जाएगा। रेडियो कॉलर से इन पर निरंतर नजर रखी जाएगी। बताया कि बाघ बाड़े की हाथियों से सुरक्षा के दृष्टिगत इसके चारों तरफ सोलर पावर फेंसिंग भी की जा रही है।रेंजर ने बताया कि बाड़े में पाँच बाघों को लाने की योजना बनायी गई है जिन्हें चरणबद्ध तरीके से बाड़े में लाया जाएगा।

स्पीकर ने जंगल सफारी का लुप्त भी उठाया। वहीं विधानसभा अध्यक्ष ने वन अधिकारियों से राजाजी नेशनल पार्क में आने वाले सैलानियों एवं पर्यटक की संख्या के बारे में जानकारी ली।

इस अवसर पर मोतीचूर रेंज के रेंजर महेंद्र गिरी, वन दरोगा देवी प्रसाद, वन दरोगा उदय सिंह, वन दरोगा नरेंद्र सिंह, वन आरक्षी नवीन ध्यानी सहित अन्य लोग उपस्थित थे।