ऐतिहासिक जौलजीबी मेला और विकास प्रदर्शनी-2022 का सीएम ने किया शुभांरभ

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने काली एवं गोरी नदी के संगम स्थल जौलजीबी में आयोजित ऐतिहासिक जौलजीबी मेला एवं विकास प्रदर्शनी-2022 का उद्घाटन रिबन काटकर एवं दीप प्रज्ज्वलित कर किया।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि जौलजीबी मेला क्षेत्र के आर्थिक एवं सांस्कृतिक विकास में बहुत महत्व रखता है। यह मेला भारत, नेपाल एवं तिब्बत के पारस्परिक व्यापार को बढ़ावा देता आ रहा है। यह मेला भारत एवं नेपाल के रिश्तों को ऑक्सीजन देने का काम करता है। मुझे प्रसन्नता है कि यह मेला भारत एवं नेपाल देश के बीच संस्कृति, सभ्यता के साथ-साथ व्यापारिक संबंधों को बढ़ाता आ रहा है। अपनी बचपन की यादों को ताजा करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि वे बचपन से ही यहां के रीति-रिवाज और संस्कृति को देखते आ रहे हैं। उन्हें बचपन से ही इस मेले से बहुत लगाव रहा है। उन्होंने जनता द्वारा किए गए भव्य स्वागत पर आभार व्यक्त करते हुए कहा कि मैं आप लोगों का बेटा व भाई हूं। मैं जब भी यहां आया हूं मेरा हमेशा गर्मजोशी से स्वागत किया गया है, इसके लिए मैं आप सभी का आभार व्यक्त करता हूं तथा आप लोगों का भी हाथ जोड़कर स्वागत करता हूं।
मुख्यमंत्री ने सीमान्त क्षेत्र के विकास को लेकर अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि हम मानते हैं कि सीमांत क्षेत्रों का ठीक प्रकार से विकास होना चाहिए, हम सीमांत क्षेत्रों में सभी योजनाओं के क्रियान्वयन के लिए दृढ़ संकल्पित है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी देश के सीमान्त गांवों के विकास के प्रति बहुत गंभीर है। अब देश के सीमान्त गांव देश के अंतिम गांव न होकर देश के पहले गांव होंगे, उनका संपूर्ण विकास हमारी प्राथमिकता में शामिल है। उन्होंने कहा कि हम जनपद के इस सीमान्त क्षेत्र के विकास के लिए काली नदी पर डबल लेन मोटर पुल का निर्माण कर रहे हैं, जिससे भारत और नेपाल देश के बीच व्यापारिक संबंधों को बढ़ावा मिलेगा। हम क्षेत्र में राष्ट्रीय राजमार्ग का भी निर्माण व चौड़ीकरण कर रहे हैं, इस क्षेत्र में राष्ट्रीय राजमार्ग के बन जाने से कैलाश मानसरोवर जाने वाले यात्री इसी मार्ग से होकर जाएंगे, जिससे व्यापार बढ़ेगा तथा क्षेत्र का विकास होगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि हम क्षेत्र के आपदा प्रभावित एलधारा भूस्खलन क्षेत्र का ट्रीटमेंट वरूणावत पर्वत की तर्ज पर करेंगे। मुख्यमंत्री द्वारा इस अवसर पर जौलजीबी मेले हेतु रुपए 5 लाख दिए जाने एवं जौलजीबी संगम स्थल का सौंदर्यीकरण किये जाने की घोषणा की गई। मुख्यमंत्री ने संगम स्थल पर स्थित जालेश्वर महादेव मंदिर में पूजा अर्चना कर प्रदेश की खुशहाली की कामना भी की।
इस अवसर पर क्षेत्रीय सांसद अजय टम्टा, विधायक डीडीहाट बिशन सिंह चुफाल, विधायक धारचूला हरीश धामी, जिलाधिकारी रीना जोशी, एसपी लोकेश्वर सिंह, गिरीश जोशी आदि उपस्थित रहे।

हमारी संस्कृति और व्यापार का संगम है गौचर मेला-सीएम

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सोमवार को गौचर में 70वें राजकीय औद्योगिक विकास एवं सांस्कृतिक मेले का विधिवत उद्घाटन किया। मेले के उद्घाटन समारोह में मुख्यमंत्री के पहुंचने पर उनका बैंड की मधुर धुन के साथ फूल मालाओं से भव्य स्वागत किया गया। इस दौरान मुख्यमंत्री ने ऐतिहासिक गौचर मेला मैदान को मिनी स्टेडियम के रूप में विकसित करने और गौचर मेले के सफल संचालन के लिए 10 लाख देने की घोषणा की।
मुख्यमंत्री ने गौचर मेले में विशाल जनसभा को संबोधित करते हुए कहा कि गौचर मेला संस्कृति, बाजार तथा उद्योग तीनों के समन्वय के कारण एक प्रसिद्व राजकीय मेला है और साल दर साल यह मेला अपनी ऊंचाइयों को छू रहा है। उन्होंने मेले को भव्य एवं आकर्षक स्वरूप देने के लिए जिला प्रशासन की सराहना की। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह विशिष्ट और ऐतिहासिक मेला हमारे राज्य के प्रमुख मेलों में से एक है और इसमें सरकार के अधिकांश विभाग भाग लेते हैं। मेले हमारे जीवन में इन्द्रधनुषी रंगों की तरह हैं, जो जीवन में ताजगी और उत्साह भर देते हैं। प्राचीन समय में, जब संचार और परिवहन की कोई ऐसी सुविधाएं नहीं थीं, तो इन मेलों ने सामाजिक ताने बाने को बुनने में बहुत मदद की और लोगों का सामाजिक और व्यावहारिक दायरा बढ़ाया। हमारे देश में और विशेष रूप से उत्तराखंड में अधिकतर मेले सांस्कृतिक मेल मिलाप का माध्यम रहे हैं, परंतु गोचर मेला विशेष है, क्योंकि संस्कृति की छठा बिखेरने के अलावा यह मेला यहां की जनता के व्यापारिक अवसरों को भी बढ़ाता है। इस मेले में प्रदर्शित झांकियों ने उत्तराखंड की विशिष्ट एवं बहुआयामी संस्कृति को प्रदर्शित किया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारा मुख्य लक्ष्य उत्तराखंड के सकल घरेलू उत्पाद को बढ़ाना है और इसके लिए औद्योगिक विकास का महत्व सर्वाधिक है। औद्योगिक विकास के लिए बुनियादी ढांचे को मजबूत करना अत्यंत आवश्यक है। इसके लिए हम रोड कनेक्टिविटी, रेल कनेक्टिविटी, ऊर्जा आदि क्षेत्रों में विशेष ध्यान दे रहे हैं। पर्यटन की किसी भी देश के सामाजिक, सांस्कृतिक और आर्थिक विकास में महत्वपूर्ण भूमिका होती है और पर्यटन तो हमारे राज्य की लाईफ लाईन है। केंद्र सरकार और राज्य सरकार के सहयोग द्वारा रोड कनेक्टिविटी एवं हवाई कनेक्टिविटी के विस्तार से निश्चित रूप से राज्य में पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा और हमारी आर्थिकी को भी लाभ मिलेगा। प्रदेश में चारधाम सड़क परियोजना, ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेलवे लाईन का निर्माण तथा निर्माणाधीन रोप वे परियोजनाएं इस बात का स्पष्ट उदाहरण हैं कि किस प्रकार सरकार प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के मार्गदर्शन में प्रदेश के विकास के लिए तत्पर है, उन्होंने सभी को मेले के सफल आयोजन के लिए हार्दिक शुभकामनाएं एवं बधाई दी।
कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने पत्रकार रमेश गैरोला को गोविंद प्रसाद नौटियाल पत्रकार सम्मान और यूथ फाउंडेशन संचालित करने के लिए अनिल नेगी को सम्मानित किया। मुख्यमंत्री ने देवेश जोशी द्वारा लिखी पुस्तक ‘धूम सिंह चौहान’ का विमोचन भी किया।
गौचर मेले में पहले दिन रावल देवता की पूजा के बाद प्रातः स्कूली बच्चों ने प्रभात फेरी निकाली। मेलाध्यक्ष द्वारा झंडारोहण कर मार्चपास की सलामी ली गई। गौचर मेला मुख्य द्वार से चटवापीपल पुल तक एवं वापसी उसी रूट से होते हुये मुख्य मेला द्वार तक क्रास कण्ट्री दौड़ का आयोजन किया गया। खेल मैदान में बालक एवं बालिकाओं की दौड़, नेहरू चित्रकला प्रतियोगिता, शिशु प्रदर्शनी और शिक्षण संस्थाओं द्वारा रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किए गए। गौचर मेले में पारम्परिक पहाडी संस्कृति से सजा पांडाल मेलार्थियों के बीच खासे आकर्षण का केन्द्र बना हुआ है।
क्षेत्रीय विधायक अनिल नौटियाल एवं मेला उपाध्यक्ष अंजू बिष्ट ने गौचर मेले का शुभारंभ करने पर मुख्यमंत्री का हार्दिक अभिनंदन एवं स्वागत किया और मुख्यमंत्री को क्षेत्र की समस्या से अवगत कराते हुए समस्याओं के निदान के लिए मांग पत्र भी दिया।
इस अवसर पर कैबिनेट मंत्री/जनपद के प्रभारी मंत्री डॉ. धन सिंह रावत, कर्णप्रयाग विधायक अनिल नौटियाल, थराली विधायक भूपाल राम टम्टा, रुद्रप्रयाग विधायक भरत चौधरी, केदारनाथ विधायक शैला रानी रावत, भाजपा प्रदेश अध्यक्ष महेन्द्र भट्ट, पूर्व विधायक मुन्नी देवी शाह, कर्णप्रयाग ब्लाक प्रमुख चन्द्रेश्वरी देवी, गौचर नगर पालिका अध्यक्ष अंजू बिष्ट, कमिश्नर गढ़वाल/मेला संरक्षक सुशील कुमार, जिलाधिकारी/मेलाध्यक्ष हिमांशु खुराना, पुलिस अधीक्षक प्रमेन्द्र डोभाल, मुख्य विकास अधिकारी ललित नारायण मिश्रा, सहित बडी संख्या में लोग मौजूद रहे।

पिथौरागढ़ में शरदोत्सव और विकास प्रदर्शनी में मुख्यमंत्री ने की कई घोषणाएं

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने शनिवार को देव सिंह मैदान, पिथौरागढ़ में नगर पालिका परिषद् बोर्ड द्वारा आयोजित शरदोत्सव एवं विकास प्रदर्शनी-2022 का शुभारम्भ किया।
कार्यक्रम में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने घोषणा की कि पिथौरागढ़ बॉस-गंगोलीहाट मोटर मार्ग के अवशेष कार्य के साथ रामगंगा नदी में मोटर पुल का निर्माण किया जाएगा। पिथौरागढ़ महाविद्यालय में विधि विभाग को प्रारम्भ किये जाने की स्वीकृति प्रदान की जायेगी। जनपद पिथौरागढ़ के अन्तर्गत देव सिंह मैदान के सौन्दर्यीकरण का कार्य प्रारम्भ करने के लिये वित्तीय स्वीकृति प्रदान की जाती है और इसके प्रथम चरण के लिये 2 करोड़ की धनराशि स्वीकृत की जाती है। पिथौरागढ़ शरदोत्सव के सफल आयोजन हेतु पिछले वर्ष की भांति इस वर्ष भी समान सहयोग राशि प्रदान की जायेगी साथ ही पिथौरागढ़ के प्राचीन मंदिरों को मानसखण्ड कोरिडोर में सम्मिलित किया जायेगा।
कार्यक्रम में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि यह बहुत ही हर्ष का विषय है कि शरदोत्सव के माध्यम से स्थानीय प्रतिभाशाली बच्चों और युवाओं को अपनी कला का प्रदर्शन करने का मौका मिल रहा है। उन्होंने कहा कि उन्हें पूर्ण विश्वास है कि आम लोगों को सरकार की विभिन्न विकास योजनाओं की अधिक से अधिक जानकारी देने का प्रयास भी शरदोत्सव के माध्यम से किया जाएगा। उन्होंने कहा कि 21 अक्टूबर को माणा में आयोजित कार्यक्रम में प्रधानमंत्री ने उनके इस कथन को कि हमारे सीमांत गांव देश के अंतिम नहीं बल्कि पहले गांव है अपनी सहमति प्रदान कर हमारे सीमान्त गांवों को पहचान दिलाने का कार्य किया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि सीमान्त क्षेत्रों के समग्र विकास के लिये हमारी सरकार प्रतिबद्धता से कार्य कर रही है। वर्तमान में सीमाओं के अन्तिम गांवों को प्रथम गांवों की श्रेणी में मानकर विकास योजनाओं का निर्माण और क्रियान्वयन किया जा रहा है। हमारे सीमान्त गांव सामरिक दृष्टिकोण से भी विशेष महत्व रखते हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि सीमान्त क्षेत्रों के स्थानीय लोग केवल नागरिक नहीं है बल्कि हमारे सीमा प्रहरी भी है। उन्होंने कहा कि देश की रक्षा में उनका योगदान काफी महत्वपूर्ण है। सीमाओं पर बसे गांवों पर पलायन देश की सुरक्षा के लिए भी गंभीर खतरा है। इसे लेकर हमारी सरकार सजग है। हमारी सरकार सीमान्त गांवों में रिवर्स पलायन हेतु गंभीर प्रयास कर रही हैं। रोजगार, स्वरोजगार एवं होम स्टे जैसी कई विकास योजनाओं को लेकर हम पलायन रोकने में प्रसासरत है। जिसके परिणामस्वरूप आज कई युवा अपने गांव में वापिस आकर उसे बसाने का कार्य कर रहे हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारे अन्य सीमान्त जिलों की तरह पिथौरागढ़ का विकास हमारी सरकार की सर्वाेच्च प्राथमिकता है। इसके साथ ही दूरस्थ एवं सीमान्त क्षेत्रों में जैविक कृषि तथा स्वरोजगार को प्रोत्साहित करने के भी प्रयास किए जा रहे हैं, जिसके अंतर्गत धौलादेवी, मुनस्यारी, बेतालघाट, बेरीनाग के चाय बागानों को जैविक चाय बागान में परिवर्तित करने का कार्य किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि हमारी सरकार राज्य स्थापना के रजत जयंती वर्ष 2025 तक उत्तराखण्ड को प्रत्येक क्षेत्र में अग्रणी राज्य बनाने हेतु प्रतिबद्ध है। हम उत्तराखण्ड के विकास में नये संकल्पों के साथ प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रहे हैं। राज्य हित में सभी विभागों द्वारा रोडमैप तैयार किया गया है। नई कार्य संस्कृति के साथ हम आगे बढ़ रहे हैं। उन्होंने अधिकारियों एवं कर्मचारियों से अपेक्षा की, कि राज्य हित में 10 से 5 तक कार्य करने की मानसिकता का परित्याग करना होगा, तभी हम राज्य के विकास में सहयोगी बन पायेंगे।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में 7 हजार पदों पर नियुक्ति प्रक्रिया अधीनस्थ सेवा चयन आयोग से लोक सेवा आयोग को स्थानांतरित की गई है। आयोग द्वारा भी इन पदों पर भर्ती प्रक्रिया आरम्भ कर दी गई है। हमारे युवाओं को रोजगार तथा स्वरोजगार के बेहतर अवसर उपलब्ध हों इस दिशा में हमारे प्रयास निरंतर जारी है।
इस अवसर पर सांसद अजय भट्ट, विधायक बिशन सिंह चुफाल, जिला पंचायत अध्यक्ष दीपिका बोहरा, राजेन्द्र रावत सहित अन्य गणमान्य उपस्थित रहे।

नियमित समीक्षा कर पर्यटन क्षेत्र को पर्यटन उद्योग बनाने के निर्देश

मुख्य सचिव डॉ. एस.एस. संधु ने गुरुवार को सचिवालय में पर्यटन विभाग की समीक्षा की। समीक्षा के दौरान मुख्य सचिव ने पर्यटन विभाग द्वारा कराए जा रहे विभिन्न कार्यों की प्रगति की जानकारी ली। उन्होंने विभाग द्वारा कराए जा रहे कार्यों के लिए ऑपरेशन एंड मेंटेनेंस को अपने सिस्टम में शामिल करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि पिछले अनुभवों से सीखते हुए अपने सिस्टम की कमियों को लगातार दूर किए जाने के प्रयास किए जाएं। उन्होंने चारधाम यात्रा में बुकिंग सिस्टम को मजबूत किए जाने की भी बात की। कहा कि चारधाम यात्रा के लिए अभी से तैयारियां शुरू की जाएं। उन्होंने चारधाम यात्रा हेतु संचालित कमांड एंड कंट्रोल सिस्टम को सालभर संचालित किए जाने के भी निर्देश दिए।
मुख्य सचिव ने कहा कि प्रदेश में एडवेंचर टूरिज्म की असीम संभावनाओं को देखते हुए योजनाएं तैयार की जाएं। पूरे विश्व में वाटर स्पोर्ट्स में क्या-क्या चल रहा है, और उसमें यहां क्या-क्या किया जा सकता है? इसके लिए डेडिकेटेड टीम या कन्सल्टेंट लगाया जाए। उन्होंने टिहरी झील में सी-प्लेन, स्कूबा डाईविंग और अन्य एडवेंचर स्पोर्ट्स पर भी कार्य करने के निर्देश दिए। साथ ही कहा कि प्रदेश में लैंड बैंक तैयार कर फाईव स्टार और फॉर स्टार होटेल्स के लिए स्थान चयनित कर निवेशकों को आकर्षित करने पर फोकस किया जाए। इससे प्रदेश में रोजगार के अवसर बढ़ेंगे और प्रदेश की आर्थिकी के लिए भी लाभप्रद होंगें। उन्होंने प्रदेश में रोप-वे प्रोजेक्ट्स पर तेजी से कार्य करने के निर्देश दिए। कहा कि फॉरेस्ट क्लीयरेंस एवं अन्य आपत्तियों का निस्तारण प्रतिदिन और वीकली मॉनिटरिंग कर के किया जाए।
मुख्य सचिव ने होमस्टे योजना के सरलीकरण के भी निर्देश दिए। कहा कि होमस्टे योजना का स्थानीय लोग ज्यादा से ज्यादा लाभ ले सकें इसके लिए सरलीकरण आवश्यक है। साथ ही, इस योजना का फीडबैक भी लिया जाना जरूरी है। यदि योजना में सुधार की गुंजाईश है तो उसे भी किया जाए। उन्होंने नए उद्यमियों के लिए मार्केटिंग प्लेटफॉर्म उपलब्ध कराए जाने के भी निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि बहुत से स्थानीय लोगों ने होमस्टे खोले हैं, परन्तु मार्केटिंग और एडवरटाइजिंग के लिए उनके पास धन एवं संसाधनों की कमी है। इसके लिए लोगों को नॉमिनल चार्ज पर एक प्लेटफॉर्म उपलब्ध कराया जाना चाहिए। उन्होंने पर्यटन विभाग को वेटर, टूर गाईड आदि की फ्री ऑनलाईन ट्रेनिंग की भी व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि बहुत से लोग ट्रेनिंग इसलिए नहीं कर पाते कि उन्हें ट्रेनिंग के दौरान रोजगार और सैलरी का नुकसान होगा। कहा कि छोटे-छोटे वीडियोज के माध्यम से गाईड और वेटर आदि की सर्विस देते समय क्या करें, क्या न करें, जैसे वीडियोज के माध्यम से निशुल्क ट्रेनिंग उपलब्ध कराए जाने की दिशा में कार्य किया जाए। इसके लिए सिस्टम विकसित किया जाए।
मुख्य सचिव ने पूर्णागिरी क्षेत्र के विकास के लिए मास्टर प्लान तैयार करने के भी निर्देश दिए। कहा कि यह क्षेत्र पर्यटन के क्षेत्र में गेम चेंजर साबित हो सकता है। उन्होंने कहा कि प्रदेश की प्राकृतिक सुंदरता एवं शुद्धता ऐस्ट्रो टूरिज्म के अनुकूल है। सम्भावनाओं को तलाशते हुए हर डेस्टीनेशन में ऐस्ट्रो टूरिज्म पर कार्य किया जाना चाहिए। उन्होंने उत्तराखण्ड में पर्यटन की दृष्टि से युवाओं को आकर्षित करने के लिए नई से नई तकनीक के माध्यम से विभिन्न प्रकार की जानकारियां उपलब्ध कराए जाने की बात भी कही।
मुख्य सचिव ने कहा कि प्रदेश में आयुष, योगा और पंचकर्म महत्त्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। आयुष, योगा और पंचकर्म विभिन्न बीमारियों को जड़ से दूर करने में सक्षम हैं। उत्तराखण्ड योगा कैपिटल के रूप में विश्वविख्यात है। हमारे वेलनेस सेंटर स्वास्थ्य के प्रति जागरूक लोगों को आकर्षित कर पर्यटन और रोजगार दृष्टि से प्रदेश के लिए अत्यधिक महत्वपूर्ण हैं। उन्होंने पर्यटन के क्षेत्र में अच्छा कार्य कर रहे अन्य राज्यों की बेस्ट प्रेक्टिसेज का अध्ययन कर प्रदेश की योजनाओं में शामिल किए जाने की भी बात कही।
इस अवसर पर सचिव सचिन कुर्वे सहित अन्य विभागीय अधिकारी उपस्थित रहे।

गंगा के तेज बहाव में बहे दिल्ली के दो पर्यटक

मुनिकीरेती थाना क्षेत्र में गंगा में नहाते समय पानी के तेज बहाव में आकर दिल्ली के दो पर्यटक डूब गए। गहरे पानी में लापता लोगों की तलाश में एसडीआरएफ की टीम ने गंगा में तलाश की, लेकिन उनका कुछ पता नहीं चल सका। अंधेरा होने पर तलाशी अभियान बीच में ही रोकना पड़ा।
जानकारी के मुताबिक शनिवार को वीकेंड पर दिल्ली से एक युवती समेत पांच युवक सैर सपाटे के लिए ऋषिकेश आए थे। इन्होंने दोपहर में राफ्ट हायर कर ब्रह्मपुरी से मुनिकीरेती तक राफ्टिंग की। बताया जा रहा है कि दल में शामिल दो युवक राफ्टिंग करने के बाद लाइव जैकेट के बगैर नहाने के लिए गंगा में उतर गए। इसी बीच पानी के तेज बहाव में आकर डूबने लगे। उन्हें संकट में देख साथी बचाने का प्रयास करते इससे पहले ही दोनों पानी की गहराई में ओझल हो गए।
सूचना पाकर एसडीआरएफ निरीक्षक कविंद्र सिंह सजवाण रेस्क्यू टीम के साथ मौके पर पहुंचे। राफ्ट और आपदा उपकरणों से गंगा में सर्च आपरेशन चलाया, लेकिन पानी में लापता पर्यटकों का कोई सुराग नहीं मिला। एसडीआरएफ निरीक्षक ने गंगा में लापता पर्यटकों की पहचान वंश कौशल (26) पुत्र अनिल शर्मा निवासी प्रशांत विहार, दिल्ली और कुमार गौरव (26) निवासी छत्तरपुर, फतेहपुर, दिल्ली के रूप में की है। बताया कि दोनों दिल्ली में प्राइवेट जॉब करते हैं। रविवार सुबह इनकी तलाश में फिर से सर्च ऑपरेशन चलाया जाएगा।

रक्षा मंत्रालय कर सकता है लैंसडौंन का नाम परिवर्तन, जानिए क्या हो सकता है नया नाम


देहरादून। रक्षा मंत्रालय ने प्रस्ताव पर अमल किया तो उत्तराखंड राज्य के पौड़ी जिले में स्थित सैन्य छावनी क्षेत्र लैंसडौन का नाम बदलकर ‘कालौं का डांडा (अंधेरे में डूबे पहाड़)’ हो जाएगा। 100 साल से भी अधिक पुराने लैंसडौन नाम को बदलने की तैयारी है। रक्षा मंत्रालय ने लैंसडौन के सैन्य अधिकारियों से इस संबंध में रिपोर्ट मांगी है। लैंसडौन नाम से पहले इस इलाके को ‘कालौं का डांडा’ नाम से पुकारा जाता था। रक्षा मंत्रालय ने ब्रिटिशकाल में छावनी क्षेत्रों की सड़कों, स्कूलों, संस्थानों, नगरों और उपनगरों के रखे गए नामों को बदलने के लिए उत्तराखंड सब एरिया के साथ सेना के अधिकारियों से प्रस्ताव मांगें हैं।

उनसे ब्रिटिशकाल के समय के नामों के स्थान पर क्या नाम रखे जा सकते हैं, इस बारे में भी सुझाव देने को कहा गया है। बता दें कि स्थानीय स्तर पर लंबे समय से लैंसडौन का नाम बदलने की मांग होती आ रही है। स्थानीय लोग लैंसडौन का नाम कालौं का डांडा रखने की मांग करते आए हैं। इस संबंध में रक्षा मंत्रालय को भी पत्र भेजे जा चुके हैं।

तत्कालीन वायसराय लैंसडौन के नाम से बदल गया नाम
गढ़वाली जवानों की वीरता और अद्वितीय रणकौशल से प्रभावित होकर 1886 में गढ़वाल रेजीमेंट की स्थापना हुई। पांच मई 1887 को ले.कर्नल मेरविंग के नेतृत्व में अल्मोड़ा में बनी पहली गढ़वाल रेजीमेंट की पलटन चार नवंबर 1887 को लैंसडौन पहुंची। उस समय लैंसडौन को कालौं का डांडा कहते थे। इस स्थान का नाम 21 सितंबर 1890 तत्कालीन वायसराय लार्ड लैंसडौन के नाम पर लैंसडौन रखा गया।

608 हेक्टेयर में फैला है लैंसडौन
लैंसडौन नगर सैन्य छावनी क्षेत्र है, जो 608 हेक्टेयर में फैला है। नगर के आधे से अधिक भाग में बांज, बुरांस और चीड़ के वृक्षों के सदाबहार वनों का विस्तार है। यह एक प्रसिद्ध और पसंदीदा पर्यटक स्थल भी है।

केंद्रीय रक्षा राज्यमंत्री अजय भट्ट ने कहा समय-समय पर क्षेत्र के लोग नाम बदलने की मांग करते हैं। ऐसे प्रस्तावों का रक्षा मंत्रालय परीक्षण करता है। देश, काल और परिस्थितियों को देखकर प्रस्ताव पर विचार किया जाता है।

वैली ऑफ वर्ड्स में पहली बार सूचना और संस्कृति विभाग भी होंगे सहयोगी

आगामी 12-13 नवंबर को देहरादून में वैली ऑफ वर्ड्स का छठा संस्करण आयोजित किया जाएगा। यह पहला अवसर है जब उत्तराखंड सरकार के सूचना एवं संस्कृति विभाग भी इस आयोजन में सहयोगी होंगे। वैली ऑफ वर्ड्स में इस बार 100 लेखक, 40 सेशन और 10 किताबों का विमोचन आकर्षण होगा।
उत्तरांचल प्रेस क्लब में आयोजित पत्रकार वार्ता में विशेष प्रमुख सचिव सूचना अभिनव कुमार एवं सेवानिवृत्त आईएएस संजीव चोपड़ा ने यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि वैली ऑफ वर्ड्स का शुभारंभ उत्तराखंड के राज्यपाल सेवानिवृत्त लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह करेंगे जबकि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी भी मौजूद रहेंगे। 13 नवंबर को केरल के राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहेंगे। उन्होंने बताया कि बीते 5 वर्षों से लगातार यह आयोजन देहरादून में हो रहा है। इस बार मुख्यमंत्री की सहमति के बाद उत्तराखंड सरकार भी इसमें भागीदार है। उन्होंने कहा कि वैली ऑफ वर्ड्स के दौरान उत्तराखंड की फिल्म नीति को लेकर भी चर्चा होगी। वर्तमान में इस नीति को लेकर सुझाव आमंत्रित किये गए हैं। विशेष प्रमुख सचिव अभिनव कुमार ने कहा कि एक दो माह के अंदर फिल्म नीति को फाइनल कर लिया जाएगा। अभी तक आउटडोर शूटिंग पर ही फोकस होता था लेकिन अब प्रयास है कि फिल्म से जुड़ा हर पहलू मसलन लेखन, फोटोग्राफी, सिनेमेटोग्राफी इत्यादि यहीं पर हो।
वैली ऑफ वर्ड्स के दौरान विभिन्न गतिविधियां जैसे नृत्य प्रस्तुति, मंत्रणा कार्यक्रम भी होंगे। उन्होंने कहा कि हमारा पूरा प्रयास है कि देहरादून के वैली ऑफ वर्ड्स को जल्द से जल्द देश के सर्वश्रेष्ठ लिटरेचर फेस्टिवल के तौर पर पहचान मिले। इसके अलावा इस कार्यक्रम के दौरान रूसी एवं इसरायली किताबों पर भी चर्चा की जाएगी।

मुख्यमंत्री ने सरस मेले में स्वयं सहायता समूहों के प्रयासों की सराहना की

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने रेसकोर्स में आयोजित सरस मेले में प्रतिभाग कर मेले में प्रतिभागी महिला स्वयं सहायता समूहों को सम्मानित किया। उन्होंने विभिन्न प्रदेशों से आये स्वयं सहायता समूहों के प्रयासों की सराहना करते हुए सरस मेलों के आयोजन को ग्रामीण आर्थिकी एवं महिला सशक्तिकरण को मजबूती प्रदान करने वाला बताया। मुख्यमंत्री ने मेले में स्वयं सहायता समूहों के स्टॉलों का भ्रमण कर उनके द्वारा तैयार किये गये उत्पादों की सराहना की।

मुख्यमंत्री ने कहा कि ऐसे आयोजन विभिन्न राज्यों के परम्परागत हस्तशिल्प एवं लोक कलाओं को प्रभावी मंच प्रदान करने के साथ उनके संरक्षण के लिये भी प्रोत्साहन प्रदान करते हैं। इससे शिल्पियों, बुनकरों एवं कारीगरों को अपने उत्पादों के विपणन के लिये बाजार भी उपलब्ध कराने में भी मदद मिलती है। मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखण्ड में स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा देने के लिए विशेष प्रयास किये जा रहे हैं। इसके लिये महिला स्वयं सहायता समूहों को 05 लाख तक का ऋण बिना ब्याज के उपलब्ध कराया जा रहा है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने वोकल फॉर लोकल का मंत्र दिया है जिससे प्रतिभाओं को आगे आने का मौका मिलेगा तथा जहां बाजारों को उत्पाद मिलेंगे वहीं उत्पादकों को बाजार उपलब्ध होगा। प्रदेश में वोकल फॉर लोकल को बढ़ावा देने के लिए भी इस तरह के आयोजन महत्वपूर्ण हैं।

इस अवसर पर कैबिनेट मंत्री सुबोध उनियाल, विधायक खजान दास, सचिव बी.वी.आर.सी. पुरूषोतम, जिलाधिकारी सोनिका, मुख्य विकास अधिकारी झरना कमठान आदि उपस्थित थे।

उत्तराखंड को पर्यटन पुरस्कार मिलने पर सीएम ने दी बधाई

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मंगलवार को नई दिल्ली में विश्व पर्यटन दिवस के अवसर पर उत्तराखंड को बेस्ट एडवेंचर टूरिज्म डेस्टिनेशन एवार्ड तथा पर्यटन के सर्वांगीण विकास के लिए प्रथम पुरस्कार प्रदान किये जाने पर प्रदेशवासियों को शुभकामना दी है। मुख्यमंत्री ने इसे प्रदेश के पर्यटन को बढ़ावा देने वाला बताते हुए कहा कि इससे उत्तराखंड के नैसर्गिक प्राकृतिक सौंदर्य एवं पर्यटन क्षेत्रों को देश व दुनिया में पहचान मिलेगी। उन्होंने कहा कि विश्व पर्यटन दिवस के अवसर पर राज्य के पर्यटन को यह एक सौगात है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश का नैसर्गिक प्राकृतिक सौन्दर्य पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र रहा है। साहसिक पर्यटन के दृष्टिगत माउंटेनियरिंग, रिवर राफ्टिंग, ट्रैकिंग, कैम्पिंग, पैराग्लाइडिंग, माउंटेन बाईकिंग आदि गतिविधियों का भी राज्य में काफी विस्तार हुआ है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में चारधाम कॉरिडोर की तर्ज पर कुमाऊं क्षेत्र में मानस खंड कॉरिडोर बनाने के लिये भी प्रयासरत है। इससे जहां एक ओर क्षेत्र में पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा, वहीं दूसरी ओर पूरे कुमाऊं के आधारभूत ढ़ांचे को भी मजबूती मिलेगी।

पर्यटन के सर्वांगीण विकास के लिए प्रदेश को मिला प्रथम पुरस्कार

विश्व पर्यटन दिवस के अवसर पर उत्तराखंड राज्य को पर्यटन मंत्रालय भारत सरकार द्वारा बेस्ट एडवेंचर टूरिज्म डेस्टिनेशन और पर्यटन के सर्वांगीण विकास के लिए प्रथम पुरस्कार प्रदान किया गया है। प्रदेश के पर्यटन व संस्कृति मंत्री सतपाल महाराज ने मंगलवार को नई दिल्ली में एक कार्यक्रम में उपराष्ट्रपति जगदीप धनकड़ से यह पुरस्कार प्राप्त किया। इस अवसर पर सचिव पर्यटन सचिन कुर्वे भी उपस्थित रहे।

उत्तराखंड को ये पुरस्कार मिलने पर पर्यटन मंत्री महाराज ने समस्त प्रदेशवासियों और पर्यटन उद्योग से जुड़े लोगों को बधाई दी। महाराज ने कहा कि यह सम्मान उत्तराखंड के लिए गौरव की बात है। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड राज्य देश-विदेश के सैलानियों को प्रदेश में आने का निमंत्रण देता है जहां पर्यटन की सभी श्रेणियों में हर प्रकार की सुविधाएं और अवसर उपलब्ध हैं। उन्होंने बताया कि मंगलवार को ही मसूरी में हेलीकॉप्टर के माध्यम से हिमालय दर्शन की सेवा का भी शुभारंभ किया गया है।

पर्यटन मंत्री सतपाल महाराज ने कहा पर्यटन विभाग उत्तराखंड में पर्यटकों को आकर्षित करने वाली कई परियोजनाओं पर काम कर रहा है। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड को मिले दोनों पुरस्कार यह सिद्ध करते हैं कि प्रदेश को लेकर पर्यटकों के बीच लोकप्रियता निरंतर बढ़ रही है। श्री महाराज ने कहा कि हिमालय दर्शन सेवा शुरू होने से प्रदेश में पर्यटकों की संख्या में और बढ़ोत्तरी होगी। पर्यटक जॉर्ज एवरेस्ट से हेलीकॉप्टर के माध्यम से हिमालय की ऊंची-ऊंची चोटियों और उत्तराखंड के अलौकिक नैसर्गिक सौंदर्य का आनंद ले सकेंगे।

पर्यटन के क्षेत्र में राज्य में उठाये गये नए कदमों की जानकारी देते हुए सतपाल महाराज ने कहा कि पर्यटकों की बढ़ती हुई रूचि को देखते हुए पर्यटन विभाग ने विश्व पर्यटन दिवस के अवसर पर एक बहुत ही आकर्षक फोटोग्राफी एवं वीडियोग्राफी कॉन्टेस्ट का भी शुभारंभ किया है। इसके अंतर्गत पांच विभिन्न श्रेणियों में फोटो एवं वीडियो ऑनलाइन आमंत्रित किए जा रहे हैं। इस कॉन्टेस्ट के माध्यम से पर्यटन प्रेमियों को 25 लाख रुपए से भी अधिक के पुरस्कार प्रदान किए जाएंगे।

महाराज ने बताया उत्तराखंड पर्यटन द्वारा देशभर के ट्रैवल इनफ्लुएंसर के लिए भी एक आकर्षक योजना लांच की गई है जिसके अंतर्गत अंग्रेजी ही नहीं अपितु क्षेत्रीय भाषाओं में वीडियो बनाने वाले ट्रैवल इनफ्लुएंसर का इंपैनलमेंट पर्यटन विभाग में किया जाएगा। इसके पश्चात उन्हें उत्तराखंड में विभिन्न स्थानों पर परिचयात्मक भ्रमण अर्थात फैमिलियराइजेशन टूर आयोजित करवाए जाएंगे, जो उत्तराखंड सरकार द्वारा प्रायोजित होंगे। श्री महाराज ने कहा कि हमारी योजना है कि ट्रैवल और टूरिज्म क्षेत्र के इनफ्लुएंसर्स के माध्यम से उत्तराखंड की प्राकृतिक सुंदरता, यहां की लोक कलाएं, यहां की ग्रामीण संस्कृति, यहां की एडवेंचरस भू-पारिस्थितिकी, होमस्टे, अद्वितीय आध्यात्मिक अनुभव और पौष्टिक व्यंजन देश के कोने-कोने तक पहुंचें।

पर्यटन मंत्री महाराज ने कहा, प्रदेश में शीतकालीन पर्यटन को प्रोत्साहन देने के लिए इस बार कई कार्यक्रमों का आयोजन किया जा रहा है। इनमें अक्टूबर 2022 से जनवरी 2023 तक होने वाला ट्रैक ऑफ द ईयर-पिंडारी ग्लेशियर और बागची बुग्याल, मसूरी व नैनीताल में दिसंबर 2022 में आयोजित होने वाला विंटर लाइन कार्निवाल, दिसंबर 2022 से जनवरी 2023 तक चंपावत में राफ्टिंग चौंपियनशिप, फरवरी 2023 में औली में आयोजित होने वाली नेशनल स्कीइंग चौंपियनशिप और मार्च 2023 में ऋषिकेश में होने वाला अंतरराष्ट्रीय योग महोत्सव जैसे आयोजन शामिल हैं।