टिहरी झील में सी प्लेन और व्यवसायिक गतिविधियां संचालित करने के लिए विशेष योजना तैयार

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने अपने एक दिवसीय जनपद भ्रमण के दौरान कोटी कॉलोनी में टिहरी झील का भ्रमण किया। इस दौरान उन्होंने डोबरा चांठी पुल फ्लोटिंग हट्स का भी निरीक्षण किया। टिहरी झील को विश्वस्तरीय पर्यटक स्थल बनाने के लिए वेपकॉस कंपनी को तीन माह में डीपीआर तैयार करने के निर्देश दिए है। 1200 करोड़ के इस प्रोजेक्ट से झील के आसपास व्यवस्थाएं स्थापित की जानी है। इससे बड़ी संख्या में स्थानीय लोगों को रोजगार उपलब्ध हो सकेगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि टिहरी झील को विश्व स्तरीय टूरिस्ट डेस्टिनेशन बनाने के लिए सरकार हर संभव प्रयास कर रही है उन्होंने कहा कि टिहरी झील में पर्यटन की अपार संभावनाएं हैं, जिस को मूर्त रूप देने के लिए बुनियादी सुविधाएं स्थापित की जाएगी, ताकि पर्यटकों के आवागमन से स्थानीय स्तर पर रोजगार उपलब्ध हो सके।
इस अवसर पर कृषि मंत्री सुबोध उनियाल, स्थानीय विधायक धन सिंह नेगी विधायक घनसाली शक्ति लाल शाह, विधायक प्रतापनगर विजय सिंह पवार जिलाधिकारी इवा आशीष श्रीवास्तव, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक तृप्ति भट्ट, अपर निदेशक पर्यटन पूनमचंद आदि उपस्थित थे।

सीएम पुष्कर सिंह धामी के निर्देश पर हो रही हैं मुख्यमंत्री घोषणाओं की समीक्षा

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देश पर विभिन्न विभागों के अन्तर्गत सीएम घोषणाओं की समीक्षा अपर मुख्य सचिव आनन्द बर्द्धन द्वारा की जा रही है। इसी क्रम में अपर मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन ने बुधवार को पर्यटन विभाग से सम्बन्धित सीएम घोषणाओं की समीक्षा की। उन्होंने निर्धारित समय सीमा के अन्दर सीएम घोषणाओं को पूर्ण करने के निर्देश दिये हैं। बैठक में बताया गया कि पर्यटन विभाग में मुख्यमंत्री घोषणा के अन्तर्गत 109 घोषणाएं हुई हैं, जिनमें से विभाग द्वारा 65 घोषणाओं में शासनादेश निर्गत किया जा चुका है।
अपर मुख्य सचिव ने निर्देश दिये कि विभाग द्वारा उन घोषणाओं जिनके क्रियान्वयन हेतु शासनादेश निर्गत कर दिया गया है, विभाग द्वारा निरन्तर प्रभावी अनुश्रवण सुनिश्चित किया जाय। विभाग द्वारा यह भी अवगत कराया गया कि शासनादेश किये जाने हेतु 34 घोषणाएं अवशेष हैं। उन्होंने निर्देश दिये कि विभाग द्वारा उक्त के संदर्भ में समयबद्ध रूप से 1 माह के भीतर माह में शासनादेश निर्गत करने की कार्यवाही की जाय एवं घोषणाओं की पूर्ति हेतु निरन्तर अनुश्रवण सुनिश्चित किया जाय।
बैठक में सचिव पर्यटन दिलीप जावलकर, प्रभारी सचिव एस०एन०पाण्डे, उपसचिव हीरा सिंह बसेड़ा, उप सचिव चिरंजी लाल उपस्थित थे।

11 हजार फीट की ऊंचाई पर स्थित है इंजीनियरिंग का नायाब नमूना गरतांग गली की सीढ़ियां

भारत-तिब्बत व्यापार की गवाह रही उत्तराखंड के उत्तरकाशी जिले की नेलांग घाटी में स्थित ऐतिहासिक गरतांग गली की सीढ़ियों का देश-विदेश के पर्यटक दीदार करने लगे हैं। गरतांग गली की सीढ़ियों का पुनर्निर्माण कार्य जुलाई माह में पूरा किया जा चुका है। इसके बाद से ही ऐसे में रोमांचकारी जगहों पर जाने के शौकीन पर्यटकों के लिए यह जगह एक शानदार विकल्प है।

गरतांग गली की करीब 150 मीटर लंबी सीढ़ियां अब नए रंग में नजर आने लगी हैं। करीब 11 हजार फीट की ऊंचाई पर बनी गरतांग गली की सीढ़ियां इंजीनियरिंग का नायाब नमूना है। इंसान की ऐसी कारीगरी और हिम्मत की मिसाल देश के किसी भी अन्य हिस्से में देखने के लिए नहीं मिलेगी।

1962 भारत-चीन युद्ध के बाद इस लकड़ी की सीढ़ीनुमा पुल को बंद कर दिया गया था, अब करीब 59 सालों बाद वह दोबारा पर्यटकों के लिए खोला गया है। कोरोना गाइडलाइन और सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए एक बार में दस ही लोगों को पुल में भेजा जा रहा है। पेशावर से आए पठानों ने 150 साल पहले इस पुल का निर्माण किया था। आजादी से पहले तिब्बत के साथ व्यापार के लिए उत्तकाशी में नेलांग वैली होते हुए तिब्बत ट्रैक बनाया गया था। यह ट्रैक भैरोंघाटी के नजदीक खड़ी चट्टान वाले हिस्से में लोहे की रॉड गाड़कर और उसके ऊपर लकड़ी बिछाकर रास्ता तैयार किया था। इसके जरिए ऊन, चमड़े से बने कपड़े और नमक लेकर तिब्बत से उत्तरकाशी के बाड़ाहाट पहुंचाया जाता था। इस पुल से नेलांग घाटी का रोमांचक दृश्य दिखाई देता है। यह क्षेत्र वनस्पति और वन्यजीवों के लिहाज से काफी समृद्ध है और यहां दुर्लभ पशु जैसे हिम तेंदुआ और ब्लू शीप यानी भरल रहते हैं।

सामरिक दृष्टि से संवेदनशील है नेलांग घाटी
नेलांग घाटी सामरिक दृष्टि से संवेदनशील क्षेत्र है। गरतांग गली भैरव घाटी से नेलांग को जोड़ने वाले पैदल मार्ग पर जाड़ गंगा घाटी में मौजूद है। उत्तरकाशी जिले की नेलांग घाटी चीन सीमा से लगी है। सीमा पर भारत की सुमला, मंडी, नीला पानी, त्रिपानी, पीडीए और जादूंग अंतिम चौकियां हैं।

वहीं, सतपाल महाराज पर्यटन मंत्री उत्तराखंड कहा ने भारत सरकार ने पर्यटकों की आवाजाही पर लगाई थी रोक। वर्ष 1962 में भारत-चीन युद्ध के बाद बने हालात को ध्यान में रखते हुए भारत सरकार ने उत्तरकाशी के इनर लाइन क्षेत्र में पर्यटकों की आवाजाही पर प्रतिबंध लगा दिया था। यहां के ग्रामीणों को एक निश्चित प्रक्रिया पूरी करने के बाद साल में एक ही बार पूजा अर्चना के लिए इजाजत दी जाती रही है। इसके बाद देश भर के पर्यटकों के लिए साल 2015 से नेलांग घाटी तक जाने के लिए गृह मंत्रालय भारत सरकार की ओर से इजाजत दी गई।

पर्यटन सचिव ने बताया कि दिलीप जावलकर उत्तराखंड धरोहर संरक्षण के लिए सरकार प्रतिबद्ध है। इसके तहत नेलांग घाटी में स्थित ऐतिहासिक गरतांग गली की सीढ़ियों का 64 लाख रुपये की लागत से पुनर्निर्माण कार्य पूरा करने के बाद पर्यटकों के लिए खोल दिया गया है। गरतांग गली के खुलने के बाद स्थानीय लोगों और साहसिक पर्यटन से जुड़े लोगों को फायदा मिल रहा है। ट्रैकिंग के शौकीनों के लिए यह एक मुख्य केंद्र बन रहा है।

वहीं, मयूर दीक्षित, जिलाधिकारी, उत्तरकाशी ने कहा के पुनर्निर्माण कार्यों में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। पुरानी शैली में पुननिर्माण कार्यों को जुलाई माह में पूरा कर लिया गया था। कोरोना नियमों और सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए एक बार में दस पर्यटकों को ही प्रवेश दिया जा रहा है।

नेलांग घाटी के आसपास-हर्षिल
हर्षिल, हिमालय की तराई में बसा एक गांव, जो अपनी प्राकृतिक सुंदरता से पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित करता है। यहां से गंगोत्री की दूरी मात्र 21 किलो मीटर ही बचती है, जो कि हिन्दुओं के प्रमुख धार्मिक स्थलों में से एक है। गंगोत्री तक रास्ता अपने आप में इतना मनमोहक है कि एक बार से आपका मन नहीं भरेगा।

केदारताल
केदारताल उत्तराखंड में सबसे खूबसूरत झीलों में से एक ताल है। यह गंगोत्री से 18 किमी की दूरी पर स्थित, गढ़वाल हिमालय में दूर केदार ताल निश्चित रूप से साहसिक और प्रकृति प्रेमियों के लिए एक आदर्श स्थान है। केदारताल से केदारगंगा निकलती है जो भागीरथी की एक सहायक नदी है।

लोक सुनवाई के दौरान ग्रामीणों ने उठाई रोजगार और विकास की मांग

दून और मसूरी के बीच बनने वाले रोपवे निर्माण में स्थानीय लोगों का पक्ष जानने के लिए उत्तराखंड पर्यटन विकास परिषद (यूटीडीबी) ने उत्तराखंड पर्यावरण संरक्षण एवं प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के सौजन्य से लोक सुनवाई का आयोजन किया गया। लोक सुनवाई में सभी उपस्थित ग्रामीणों ने पूर्णरूप से प्रोजेक्ट को लगाये जाने पर सहमति के साथ ही समर्थन प्रदान किया। इसके अलावा स्थानीय व्यक्तियों को रोजगार के अवसर प्रदान करने के साथ ही क्षेत्र के विकास की मांग भी की गई।

कोरोना गाइडलाइन का पालन करते हुए एडीएम जीसी गुणवंत की अध्यक्षता में सोमवार को पुरकुल स्थित प्राचीन शिव मंदिर में लोक सुनवाई का आयोजन किया गया। उन्होंने कहा कि यह रोपवे दोनों शहरों के लिए रोमांच और पर्यटन की नई संभावनाओं के द्वार खोलने वाला साबित होगा। वहीं, सबसे पहले मैसर्स मसूरी स्काई कार कम्पनी प्राइवेट लिमिटेड के अधिकारियों ने ग्रामीणों को रोपवे से होने वाले लाभ और परियोजना के संबंध में विस्तार से जानकारी दी।

ग्रामीणों ने मांग करते हुए कहा कि रोपवे से सृजित होने वाले रोजगार के अवसर में ग्रामीणों को प्राथमिकता देने के साथ क्षेत्र के विकास के लिए भी काम किया जाए। जिस पर अवगत कराया गया कि ग्रामीणों को रोजगार के मौके उपलब्ध कराने के साथ क्षेत्र का विकास भी तेजी से होगा। रोपवे के निर्माण से बड़े पैमाने पर ढांचागत विकास होगा, जिससे मौजूदा क्षेत्रों की तस्वीर पूरी तरह बदल जाएगी। साथ ही मसूरी में भी इससे जुड़े कई विकास कार्य होंगे, जिसका पर्यटकों और स्थानीय लोगों को लाभ मिलेगा। रोपवे से पर्यटक सुरक्षित व प्रदूषण मुक्त सफर कर सकेंगे। इसके साथ ही दून और मसूरी के बीच सुंदर प्राकृतिक दृश्य भी देख सकेंगे। रोपवे से एक घंटे में दो हजार यात्री दोनों ओर सफर कर सकते हैं। दिन भर में रोपवे का 10 घंटे तक संचालन किया जाएगा। वहीं इस मौके पर यूटीडीबी के अधिकारियों ने ग्रामीणों को वीर चंद्र सिंह गढ़वाली पर्यटन स्वरोजगार योजना और दीन दयाल उपाध्याय होमस्टे योजना के लिए आवेदन करने के बारे में भी बताया गया।

यूटीडीबी के निदेशक प्रशांत कुमार आर्य ने कहा रोपवे निर्माण के लिए ग्रामीणों ने विशेष सहयोग देने के साथ सहमति भी जताई है। इसके लिए क्षेत्र के ग्रामीण बधाई के पात्र हैं। पुरकुल गांव में रोपवे बनने से स्थानीय लोगों के लिए रोजगार के अवसर सृजित होने के साथ क्षेत्र का तेजी से विकास होगा। विभाग इस दिशा में तेजी से काम कर रहा है।

एशिया का दूसरा सबसे लंबा रोपवे होगा दून से मसूरी रोपवे
देहरादून और मसूरी के बीच बनने वाला यह रोपवे देश का सबसे लंबा (5.5 किमी) तथा एशिया का दूसरा सबसे लंबा रोपवे होगा। यह हांगकांग के गोंगपिंग 360 (5.7 किमी) से महज सौ मीटर ही छोटा है।

पर्यटकों को मिलेगी सुविधा, पर्यावरण का होगा बचाव
रोपवे निर्माण से पर्यटक दून से मसूरी 15-18 मिनट में पहुंच जाएंगे। इससे मसूरी में लगने वाले ट्रैफिक के साथ ही सुरक्षित एवं पर्यावरणीय दृष्टि से यात्रियों को सुविधाजनक यातायात का साधन सुलभ होगा।

इस मौके पर पर्यटन विभाग के वरिष्ठ शोध अधिकारी एसएस सामंत, जिला पर्यटन अधिकारी अतुल भंडारी, देहरादून जिला पर्यटन अधिकारी जसपाल सिंह चौहान, जिला पंचायत उपाध्यक्ष श्याम सिंह पुंडीर, क्षेत्र पंचायत सदस्य कनिका रावत, उपेन्द्र सिंह थापली, पूर्व अध्यक्ष मंडी परिषद, गोदावरी थापली, पूर्व जिला पंचायत सदस्य सहित होटल एसोसिएशन मसूरी और होटल एसोसिएशन देहरादून के पदाधिकारी मौजूद रहे।

साहसिक खेलों को बढ़ावा देने के लिए निम का प्रशिक्षण शिविर शुरु

उत्तराखंड में साहसिक खेलों को बढ़ावा देने के लिए देश-दुनिया को दर्जनों नामचीन पर्वतारोही देने वाले उत्तरकाशी स्थित नेहरू पर्वतारोहण संस्थान (निम) प्रदेश के युवाओं को कम ऊंचाई पर ट्रेकिंग, पहाड़ पर चढ़ने और राहत व बचाव की बारीकियां सिखाएंगे। सात दिन तक चलने वाले कम ऊंचाई पर ट्रेकिंग गाइड प्रशिक्षण कार्यक्रम का सोमवार को शुभारंभ हुआ।

पर्यटन मंत्री सतपाल महाराज ने यूटीडीबी व निम के संयुक्त तत्वावधान में चलने वाले सात दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम में भाग ले रहे अभ्यर्थियों को शुभकामनाऐं दी। पर्यटन मंत्री ने कहा कि उत्तराखंड में साहसिक खेलों की अपार संभावनाऐं हैं। साहसिक पर्यटन उत्तराखंड के पर्यटन उद्योग में महत्वपूर्ण हिस्सेदारी रखता है। प्रशिक्षण कार्यक्रम ग्रामीण के लिए रोजगार सृजित करने में अहम भूमिका निभाएगा। यह राज्य के साहसिक पर्यटन क्षेत्र मंू एक नवीनतम कदम है, जो राज्य में साहसिक पर्यटन को नई ऊचाईयां देगा। इससे उत्तराखंड में साहसिक पर्यटन को एक नई पहचान मिलेगी। प्रदेश भर के युवाओं को इससे जोड़कर उन्हें साहसिक खेलों में भविष्य बनाने में मदद मिलेगी।

यूटीडीबी के अपर मुख्य कार्यकारी अधिकारी (साहसिक पर्यटन) कर्नल अश्विन पुंडीर ने प्रशिक्षण कार्यक्रम के शुभारंभ अवसर पर बताया कि प्रदेश में स्थानीय स्तर पर स्वरोजगार उपलब्ध कराये जाने के उद्देश्य से ट्रेकिंग ट्रक्शन सेंटर होम स्टे अनुदान योजना को लागू किया गया था। योजना के तहत प्रदेश के छह जिलों में 13 ट्रेकिंग ट्रक्शन सेंटर में 73 गांवों को अधिसूचित किया गया है। इन अधिसूचित गांवों से इच्छुक युवाओं को रोजगार से जोड़ने के लिए विभाग की ओर से निम के साथ मिलकर सात दिन का प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया है। पहले चरण में पिथौरागढ़, बागेश्वर, चमोली, रुद्रप्रयाग और टिहरी गढ़वाल के 49 प्रतिभागी भाग ले रहे हैं। उन्होंने कहा कि प्रशिक्षण कार्यक्रम के लिए निम और यूटीडीबी के बीच जुलाई माह में समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर हुए थे।

उन्होंने बताया कि वित्तीय वर्ष 2021-22 में कम ऊंचाई पर ट्रेकिंग गाइड प्रशिक्षण के लिए 4 बैच संचालित किए जाने प्रस्तावित है, जिसमें लगभग 260 युवा व युवतियों को स्वरोजगार से जोड़े जाने की योजना है। प्रशिक्षण का पाठ्यक्रम पूरा होने के बाद युवाओं को निम और यूटीडीबी द्वारा संयुक्त रूप से पाठ्यक्रम पूर्णता प्रमाण पत्र प्रदान किया जाएगा।

प्रशिक्षण कार्यक्रम के शुभारंभ के अवसर पर मयूर दीक्षित जिलाधिकारी उत्तरकाशी, ले. कर्नल योगेश धूमल, वाइस प्रिंसिपल नेहरू पर्वतारोहण संस्थान, रनवीर सिंह नेगी थल क्रीड़ा विशेषज्ञ, जगमोहन सिंह रावत मुख्य प्रशिक्षक नेहरू पर्वतारोहण संस्थान, प्रकाश खत्री जिला पर्यटन अधिकारी उत्तरकाशी, निम क्यूरेटर विशाल रंजन मौजूद रहे।

लच्छीवाला नेचर पार्क पूरे देश के लोगों के लिये आकर्षण का केंद्र बनेगा-धामी

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने लच्छीवाला नेचर पार्क का लोकार्पण किया। म्यूजिकल फाउंटेन का भी उद्घाटन किया गया। इस अवसर पर लेजर एंड साउंड शो का भी आयोजन किया गया। अमृत महोत्सव के सॉंग को भी रीलिज किया गया।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने लच्छीवाला नेचर पार्क के लिए वन विभाग को बधाई देते हुए कहा कि यह पार्क पूरे देश के लोगों के लिये आकर्षण का केंद्र बनेगा। बहुत ही सुन्दर पार्क बनाया गया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि नेचर पार्क के द्वितीय चरण के काम के लिए आवश्यक धनराशि का प्रावधान किया जाएगा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि हम स्वतंत्रता के 75 वें वर्ष में प्रवेश कर रहे हैं। इस उपलक्ष्य में आजादी का अमृत महोत्सव मनाया जा रहा है। आजादी का अमृत महोत्सव नये भारत का सूत्रपात है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि भारत की स्वतंत्रता से एक दिन पूर्व देश के एक भाग को अलग करके पाकिस्तान का निर्माण किया गया। जो कि अखण्ड भारत की भावना से अलग था।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री के नेतृत्व में आज भारत का पूरे विश्व में मान सम्मान बढा है। यह हमारे वीर जवानों की शहादत और शौर्य है, जिसके कारण हम देश में सुरक्षित महसूस करते हैं। चीन और पाकिस्तान की चुनौतियों के साथ कोरोना की चुनौति से भी सफलतापूर्वक लड़े हैं। गलवान घाटी में हमारे वीर जवानों ने चीन की सेना के दांत खट्टे कर दिये। प्रधानमंत्री जी की प्रेरणा से दुनिया का सबसे बङा कोविड टीकाकरण अभियान हमारे देश में चल रहा है। 80 करोङ लोगों को प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना में निशुल्क राशन मिल रहा है। प्रधानमंत्री ने हमारे अनुरोध पर राज्य को कोविड वैक्सीन की अतिरिक्त डोज उपलब्ध कराई हैं। इस माह हमें 17 लाख डोज मिल चुकी हैं। चार माह में राज्य में शतप्रतिशत वैक्सीनैशन कर देंगे। प्रधानमंत्री जी के मार्गदर्शन में राज्य में कनेक्टीवीटी के क्षेत्र में ऐतिहासिक काम हुआ है। प्रधानमंत्री जी का उत्तराखण्ड से विशेष लगाव है। उन्हें यहां से संबंधित हर प्रकार की जानकारी है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि हम शिलान्यास भी करते हैं और लोकार्पण भी। सबका साथ, सबका विकास और सबका विश्वास हमारा ध्येय वाक्य है। भाव में भगवान होते हैं। हमारा भाव जनसेवा है।
वन मंत्री डॉ हरक सिंह रावत ने कहा कि पिछले तीन-चार वर्ष में वन विभाग की इमेज बदली है। अब यहां सकारात्मक सोच से काम हो रहा है। वन विभाग प्रदेश के विकास में सहभागी बन रहा है। लच्छीवाला नेचर पार्क अनूठा पार्क है। देश विदेश से लोग यहां आकर खुशी की अनुभूति करेंगे। कोटद्वार में टाईगर सफारी पर काम चल रहा है।
इस अवसर पर पूर्व मुख्यमंत्री एवं क्षेत्रीय विधायक त्रिवेन्द्र सिंह रावत, अपर मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन, मुख्य वन संरक्षक राजीव भरतरी, पी के पात्रो सहित अन्य विशिष्ट जन उपस्थित थे। कार्यक्रम का संचालन आर जे काव्य ने किया।

डीएम देहरादून ने कन्ट्रोल रुम का निरीक्षण कर दिए निर्देश

देहरादून के जिलाधिकारी/मुख्य कार्यकारी अधिकारी स्मार्ट सिटी लि0 डॉ आर राजेश कुमार ने स्मार्ट सिटी के कन्ट्रोल रूम सहस्त्रधारा रोड आईटी पार्क में स्मार्ट सिटी परियोजना के अधिकारियों के साथ बैठक की। बैठक से पूर्व जिलाधिकारी/मुख्य कार्यकारी अधिकारी ने कन्ट्रोलरूम का निरीक्षण कर कार्यप्रणाली का जायजा लेते हुए अधिकारियों को आवश्यक निर्देश दिए।

जिलाधिकारी/मुख्य कार्यकारी अधिकारी स्मार्ट सिटी लि0 ने स्मार्ट सिटी कन्ट्रोलरूम में लगाये गये मॉनिटिरिंग सिस्टम के सम्बन्ध में जानकारी प्राप्त करने पर बताया गया कि वर्तमान समय में शहर के 129 स्थानों पर पर स्मार्ट सिटी लि0 के कैमरों द्वारा नजर रखते हुए मॉनिटरिंग की जा रही है, जिसमें 49 स्थानों पर ई चालन की व्यवस्था बनाई गई है। जिसमें मुख्यतः यातायात नियमों का उल्लंघन करने वाले, ओवर स्पीड, गलत दिशा में वाहन चलाना, यातायात सिग्नल तोड़ने, नो पार्किंग जोन में वाहन खड़ा करने वालो पर नजर रखी जा रही है तथा शेष स्थानों को भी ई-चालान प्रक्रिया से जोड़ने की प्रक्रिया गतिमान जिस पर जिलाधिकारी ने मॉनिटिरिंग सिस्टम को व्यवहारिक बनाते हुए सिग्नल तोड़ने वालो, ओवर स्पीड, गलत दिशा में वाहन चलाने, नो पार्किंग क्षेत्र में वाहन खड़ा करने तथा मॉनिटिरिंग के दौरान यदि किसी व्यक्ति की गतिविधि संदिग्ध लगा रही हैं इसकी तत्काल सूचना पुलिस विभाग को दी जाय।

उन्होंने कहा कि तकनीकी का इस प्रकार इस्तेमाल किया जाय कि समय रहते किसी समस्या से निपटा जाय ताकि दुर्घटना/घटना घटित होने के बाद। उनकी मॉनिटिरिंग की जा सके। उन्होंने कहा कि शहर में प्रमुख स्थानों, सड़कों मौहल्लों में और अधिक सीसीटीवी कैमरे लगाते हुए इसके मॉनिटिरिंग के लिए स्टाफ भी बढायें। उन्होंने कहा कि दूरसंचार कम्पनी से समन्वय करते हुए कनैक्टिविटी बढाई जाय ताकि नेटवर्क की समस्या के कारण मॉनिटिरिंग में व्यवधान उत्पन्न ना हो। उन्होंने कहा कि शहर के सभी चौराहों, मुख्य सड़कों, प्रमुख स्थानों को ई-चालान व्यवस्था से जोड़ा जाए। जिलाधिकारी/सीईओ स्मार्ट सिटी ने कहा कि लगाये गये कैमरों से शहर की प्रत्येक गतिविधि को मॉनिटिर किया जाय साथ ही शहर में गंदगी फैलाने, खुले स्थानों पर कूड़ा डालने वालों पर भी नजर रखी जाय निगरानी के दौरान ऐसे व्यक्तियों के विरूद्ध चालान की कार्यवाही करने हेतु नगर निगम को सूचना प्रेषित की जाय।

बैठक में स्मार्ट सिटी के अधिकारियों ने बताया कि शहर के कई स्थानों पर पेड़ बड़े होने से मॉनिटरिंग में दिक्कत आ रही है जिस पर जिलाधिकारी ने ऐसे स्थानों को चिन्हित करते हुए पेड़ों की लोपिंग के लिए प्रभागीय वनाधिकारी को पत्र प्रेषित करने के निर्देश दिये।

जिलाधिकारी/मुख्य कार्यकारी अधिकारी स्मार्ट सिटी लि0 डॉ आर राजेश कुमार ने स्मार्ट सिटी परियोजना के अधिकारियों को स्मार्ट सिटी परियोजना के अन्तर्गत हो रहे निर्माण कार्यों को गुणवत्ता के साथ प्रगति बढाने को कहा तथा निर्माण कार्यों के लिए खोदी गई सड़कों तेजी से कार्य पूर्ण करते हुए समतलीकरण एवं गड्डामुक्त करें ताकि जनमानस को किसी प्रकार की समस्या का सामना ना करना पड़े। उन्होंने कहा कि इस प्रकार की योजना पर कार्य करें जिससे जनमानस को सहूलियत हो।

बैठक में स्मार्ट सीटी के सीजीएम श्रीराम मिश्रा, वित्तीय निंयत्रक अभिषेक आनन्द, एजीएम राम उनियाल सहित स्मार्ट सिटी के अधिकारी उपस्थित थे।

पर्यटन विभाग की पर्यटकों से अपील, पानी वाली जगहों से बचें

देेहरादून। उत्तराखंड में लगातार हो रही बारिश और मौसम विभाग के एक सप्ताह के पूर्वानुमान को ध्यान में रखते हुए उत्तराखंड पर्यटन विकास परिषद (यूटीडीबी) ने उत्तराखंड आने वाले पर्यटकों से पानी वाली जगहों में जाने से बचने की अपील की है। साथ ही मानसून में उत्तराखंड आने वाले पर्यटकों को सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराने के लिए पानी वाले पर्यटन स्थलों पर पुलिस बल को तैनात किया गया है।

मौसम विज्ञान केंद्र के पूर्वानुमान के अनुसार, प्रदेश को 30 जुलाई तक बारिश से राहत नहीं मिलने वाली है। वहीं, 28 से 30 जुलाई तक प्रदेश में ऑरेंज अलर्ट जारी है। अगस्त माह के शुरूआत के दिनों में भी प्रदेश के कुछ पहाड़ी इलाकों में बारिश का ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है। ऐसे में तेज और लगातार हो रही बारिश से पानी वाले पर्यटन स्थलों का जलस्तर बढ़ रहा है।

देहरादून जिला पर्यटन अधिकारी (डीटीओ) जसपाल सिंह चैहान बताया कि लगातार हो रही बारिश से सहस्त्रधारा, गुच्चूपानी, मालदेवता समेत सभी पानी की जगह वाले पर्यटन स्थलों में जलस्तर बढ़ने से खतरा बना हुआ है। पर्यटकों से अपील है कि इन स्थानों पर जाने से पहले सुरक्षा के तमाम इंतजाम कर पूरी जानकारी प्राप्त कर लें। साथ ही नदी तट से उचित दूरी बनाने के साथ किसी भी स्थिति में पानी में न जाए। जिससे किसी भी परेशानी से बचा जा सकता है। पर्यटकों के साथ स्थानीय निवासियों से अपील है कि अगले एक सप्ताह तक इन स्थानों पर जाने से बचें।

लगातार हो रही बारिश से पानी वाली जगहों का जल स्तर बढ़ रहा है। मौसम विभाग के अनुसार अलगे एक सप्ताह तक पहाड़ी जिलों में भारी बारिश होने की आशंका है। ऐसे में पर्यटक किसी भी समस्या से बचने के लिए पहाड़ी इलाकों के पर्यटन स्थालों के साथ पानी वाली जगहों पर जाने से पहले पूरी जानकारी जुटा लें। पर्यटकों को सुरक्षित वातावरण देने के लिए सरकार लगातार काम कर रही है। राज्य में आने वाले पर्यटक शासन द्वारा जारी कोविड गाइडलाइन का पालन करते हुए उचित दूरी, मास्क व सेनेटाइजर का इस्तेमाल करें।
दिलीप जावलकर, पर्यटन सचिव

उत्तराखंड सचिवालय में हुई कैबिनेट की बैठक में 11 प्रस्तावों पर मुहर लगी


कैबिनेट ने शिक्षण संस्थानों को 1 अगस्त से सुबह 6 से दोपहर 12 बजे तक के स्कूलों को खोले जाने का फैसला लिया है।

इसके साथ ही 23 से 27 अगस्त तक विधानसभा सत्र होगा।

कैबिनेट ने कौसानी को क्षेत्र घोषित कर दिया है। इसके साथ ही कौसानी को नगर पंचायत बनाने के रूप में मंजूरी दे दी है।

पंतनगर में ग्रीनफील्ड एअरपोर्ट को लेकर भी चर्चा हुई, जिस पर कैबिनेट ने 6 महीने के अंदर DPR बनाने के निर्देश दिए हैं।साथ ही एयर इंडिया को कंसल्टेंट नियुक्त करने की भी मंजूरी दी है।

आर्थिक संकट से गुजर रहे छात्रों को यूनियन पब्लिक सर्विस कमीशन द्वारा आयोजित परीक्षा में जिसमें प्रिमलरी टेस्ट का प्रावधान है। उसमें बच्चों को 50 हजार सहायता किया जाएगा। यानी राज्य सरकार अब 100 बच्चों को तैयारियों के लिए पैसा देगी।

सरकार द्वारा पर्यटन क्षेत्रों के तमाम लोगों को पैकेज के माध्यम से मदद करने की घोषणा को सरकार ने अनुमोदित किया।

सांस्कृतिक दलों को ₹2000 प्रति माह के हिसाब से 5 महीने तक सहायता दी जाएगी।

देहरादून एसीपी वेतन विसंगति सम्बन्धी प्रकरणों में फैसला लिया गया है। पूर्व चीफ सेक्रेटरी इंदु कुमार पांडेय के नेतृत्व में कमेटी बनी। इस रिपोर्ट के आधार पर सब कमेटी की रिपोर्ट बनेगी। अधिकतम तीन माह में मिलेगी रिपोर्ट।

ऊर्जा महकमे में जारी आंदोलन के बाबत बनी कमेटी।
अमिता जोशी,अरुन्द्र चैहान,वित्त अनुभाग के अफसर शामिल होंगे।

मेडिकल कॉलेज हरिद्वार, पिथौरागढ़, रुद्रपुर के प्राचार्य वित्तीय प्रशासनिक अधिकार के तहत खुद का वेतन, ऑफिस का खर्चा, पीए की सैलरी के लिए पैसा व्यक्तिगत हस्ताक्षर से ले सकते हैं।

वन भूमि की लीज से संबंधी नीति की लिपिकीय त्रुटि को ठीक करने की संस्तुति।

पर्यटन को पटरी पर लाने को 200 करोड़ की घोषणा को लेकर सीएम से मिले परिवहन व्यवसायी, जताया अभार

स्पीकर प्रेमचंद अग्रवाल ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से शिष्टाचार भेंट की। स्पीकर ने राज्य में कोविड-19 से प्रभावित पर्यटन और चार धाम यात्रा से संबंधित गतिविधियों से जुड़े लोगों के लिए 200 करोड़ के राहत पैकेज की घोषणा किये जाने को लेकर मुख्यमंत्री का आभार व्यक्त किया। मौके पर परिवहन व्यवसाय से जुड़े विभिन्न संगठनो के लोगों ने भी स्पीकर के संग मुख्यमंत्री से भेंटकर फूलमाला पहनाकर उनका आभार व्यक्त किया।

अवगत करा दें कि 9 जुलाई को स्पीकर ने मुख्यमंत्री से भेंट कर राज्य के परिवहन एवं पर्यटन से जुड़े व्यवसायियों को राहत पहुंचाने के संबंध में चर्चा वार्ता की थी। स्पीकर ने कहा कि मुख्यमंत्री ने उनकी बात को गंभीरता से लेते हुए परिवहन व्यवसायियों को राहत पहुंचाने का कार्य किया है। भेंटवार्ता के दौरान परिवहन व्यवसायियों ने मुख्यमंत्री एवं स्पीकर को पौधे भेंटकर एवं शाल ओढ़ाकर सम्मानित भी किया।

स्पीकर ने कहा कि 200 करोड़ के राहत पैकेज से निश्चित रूप से राज्य में पर्यटन, होटल, परिवहन, पोर्टर समेत पर्यटन की अन्य गतिविधियों से जुड़े व्यवसायियों के साथ ही सांस्कृतिक क्षेत्र से जुड़े लोगों को राहत मिलेगी। कहा कि तीर्थाटन एवं पर्यटन उत्तराखंड राज्य की आर्थिक रीढ़ है, इस राहत सहायता से राज्य के लगभग लाखों लोगों को उनके बैंक खाते के माध्यम से सीधे राहत मिल सकेगी। स्पीकर ने मुख्यमंत्री को धन्यवाद देते हुए कहा कि उत्तराखंड राज्य के गठन के उपरांत दिये जाने वाला अब तक का किसी भी सरकार द्वारा सर्वाधिक राहत पैकेज है।

इस अवसर पर स्पीकर ने मुख्यमंत्री से विभिन्न विषयों पर वार्ता करते हुए विशेषतौर पर उत्तराखंड में चारधाम यात्रा को सुचारू रूप से प्रारंभ किए जाने की अनुमति के लिए गंभीरता से विचार किये जाने की बात कही। कहा कि चारधाम के कपाट खुले हुए काफी समय हो चुका है परंतु चारधाम यात्रा की अनुमति न मिलने से जहॉ एक और लाखों श्रद्धालु गण दर्शन से वंचित हो रहे हैं वहीं दूसरी ओर तीर्थाटन से जुड़े लाखों कारोबारियों को आर्थिक नुकसान भी उठाना पड़ रहा है।

इस अवसर पर यातायात और पर्यटन विकास सहकारी संघ लिमिटेड के अध्यक्ष मनोज ध्यानी, रूपकुंड पर्यटन कंपनी के अध्यक्ष भोपाल सिंह नेगी, टीजीएमओसी के उपाध्यक्ष यशपाल राणा, यातायात संघ के संचालक मनोहर सिंह रौतेला, जीएमओ के पर्यटन अधिकारी अनिल वरगली, मोटर मजदूर संघ के सदस्य जगदीश नौटियाल, ऋषिकेश टूर ट्रेवल्स एसोसिएशन के अध्यक्ष दिनेश बहुगुणा, यातायात संघ के संचालक योगेश उनियाल, अरुण बडोनी आदि उपस्थित थे।