खाली पदों को भरने के लिए सिडकुल के उद्यामियों और राज्य सरकार एमओयू करेंः हरीश रावत

पूर्व मुख्यमंत्री व पंजाब कांग्रेस के प्रभारी हरीश रावत बेरोजगारी के खिलाफ सरकार का ध्यान आकर्षित करने हरिद्वार पहुंचे है। यहां वह सिडकुल पर पैदल पदयात्रा निकालेंगे। हरीश रावत ने कहा कि उन्होंने संकल्प लिया था कि बढ़ती बेरोजगारी को लेकर हरिद्वार और रुद्रपुर सिडकुल में नौ लोगों के साथ परिक्रमा करूंगा। इसका उद्देश्य सिडकुल में खाली पड़े पदों पर स्थानीय युवाओं को रोजगार और जो कार्यरत लोगों को उनकी मेहनत का उचित मेहनताना मिलना है।

पत्रकारों से बातचीत में कहा कि वह बेरोजगारी मुद्दे पर राज्य सरकार का ध्यान आकर्षित करना चाहते हैं। उन्होंने सुझाव देते हुए कहा कि खाली पदों को भरने को लेकर सिडकुल क्षेत्र के उद्यमियों के साथ राज्य सरकार एक एमओयू हस्ताक्षर करंे। इसको लेकर पहले हुए समझौतों को सख्ती से लागू किया जाए।

जानिए क्यों, हरीश रावत बाल दिवस पर करेंगे उपवास

कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव और पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने अब सार्वजनिक उपक्रमों को लेकर केंद्र और राज्य सरकार को निशाने पर लिया है। उन्होंने 14 नवंबर को देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू की जयंती पर टिहरी डैम को बेचे जाने की साजिश का आरोप लगाते हुए इसके खिलाफ टीएचडीसी मुख्यालय ऋषिकेश में सांकेतिक उपवास पर बैठने की घोषणा की है।

सोशल मीडिया पर अपनी पोस्ट में पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने कहा कि पंडित जवाहरलाल नेहरू ने सरकारी उपक्रमों और संस्थाओं की नींव डालकर आज के भारत के निर्माण की बुनियाद ही नहीं रखी, बल्कि उसमें इमारत भी खड़ी कर दी। आज की सत्ता, भारतीय अर्थव्यवस्था के उसी कोर सेक्टर सरकारी उपक्रमों को एक-एक कर पूंजीपतियों के हाथ में बेच रही है। अब उत्तराखंड के सपनों का सागर टिहरी सागर को भी बेचा जा रहा है। हमारा नारा है, नेहरू के सपनों को मिटने नहीं देंगे। उत्तराखंड की संपत्तियों को बिकने नहीं देंगे।

उन्होंने कहा कि नेहरू जी के जन्मदिन पर टिहरी डैम को को बेचे जाने की साजिश के खिलाफ सांकेतिक उपवास उन्हें सच्ची श्रद्धांजलि होगी। उन्होंने लोगों का आह्वान किया कि उपवास में शामिल हों।

हाईकोर्ट में दाखिल अपनी याचिका को वापस लेने के मूड़ में है वन मंत्री

उत्तराखंड में 2016 के हॉर्स-ट्रेडिंग केस में सीबीआई द्वारा पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत के स्टिंग केस में चल रही जांच मामले बीजेपी नेता हरक सिंह रावत हाईकोर्ट से अपनी याचिका वापस ले सकते हैं। कोर्ट को इस बारे में जानकारी दे दी गई है।

बता दें कि सीबीआई जांच मामले में हरक सिंह रावत ने याचिका दाखिल की है। उन्होंने सीबीआई की जांच को कैबिनेट द्वारा निरस्त कर एसआईटी जांच को चुनौती दी है। पूरे मामले पर एफआईआर दर्ज करने की मांग की थी, जिसके बाद सीबीआई ने एफआईआर दर्ज कर ली है. सीबीआई ने हरक सिंह रावत को भी आरोपी बनाया है।

यह है पूरा घटनाक्रम
गौरतलब है कि 2016 में विधायकों की खरीद-फरोख्त के आरोप में किए गए एक स्टिंग में केंद्र सरकार ने 2 अप्रैल, 2016 को राज्यपाल की मंजूरी के बाद सीबीआई जांच शुरू की थी। तब राज्य में कांग्रेस सरकार की बहाली हो गई और सरकार ने कैबिनेट बैठक में सीबीआई जांच को निरस्त कर मामले की जांच के लिए एसआईटी का गठन कर दिया। इसके बाद भी सीबीआई ने जांच जारी रखी और पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत को जांच के लिए 9 अप्रैल, 2016 को समन भेजा।

सीबीआई के लगातार समन भेजे जाने को हरीश रावत ने हाईकोर्ट में चुनौती दी और कहा कि राज्य सरकार ने 15 मई, 2016 को सीबीआई जांच के आदेश को वापस ले लिया था और एसआईटी का गठन कर दिया गया था। इसलिए सीबीआई को इस मामले की जांच का कोई अधिकार ही नहीं है। सीबीआई की पूरी कार्रवाई को निरस्त किया जाए। हाईकोर्ट ने सीबीआई को केस की जांच जारी रखने की इजाजत देते हुए यह कहा था कि कोई भी कदम उठाने से पहले उसे हाईकोर्ट की अनुमति लेनी होगी।

बहरहाल, हरीश रावत के सामने सीबीआई केस के रूप में बड़ी चुनौती है. 70 की उम्र पार कर चुके हरीश रावत के लिए राजनीति का यह दौर इतना भारी पड़ेगा इसका अंदाजा उन्हें शायद ही रहा हो। केस दर्ज होने के बाद अब उन पर गिरफ्तारी की तलवार लटक रही है।

तो हरीश ने अपने चहेते को कमान देने के लिए इस्तीफे का दाव चला

लोकसभा चुनाव में हार की जिम्मेदारी लेते हुए राष्ट्रीय महासचिव और असम प्रभारी के पदभार से इस्तीफा देकर हरीश रावत ने प्रदेश में कांग्रेस की सियासत को गर्मा दिया है। रावत के इस्तीफे के बाद प्रदेश कांग्रेस कमेटी अध्यक्ष प्रीतम सिंह समेत प्रदेश पदाधिकारियों पर भी इस्तीफे को लेकर दबाव बढ़ गया है।
लोकसभा चुनाव में कांग्रेस को मिली करारी हार के बाद जिस तरह राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी ने पद छोड़ा है, उससे कांग्रेस की अंदरूनी सियासत में हलचल और असमंजस बढ़ गया है। अपने इस्तीफे के बाद राहुल गांधी पार्टी के अन्य पदाधिकारियों को भी निशाने पर ले चुके हैं। इस बीच राष्ट्रीय महासचिव और असम प्रभारी के पद से पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने भी इस्तीफा दे दिया है। यह दीगर बात है कि इसकी जानकारी उन्होंने फेसबुक पोस्ट पर दी। हरीश रावत उत्तराखंड की सियासत से गहरे जुड़े रहे हैं। उत्तराखंड में भी कांग्रेस को लोकसभा की पांचों सीटों पर हार मिली। पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत नैनीताल संसदीय सीट, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष प्रीतम सिंह टिहरी संसदीय सीट और राज्यसभा सदस्य प्रदीप टम्टा अल्मोड़ा संसदीय सीट से पार्टी प्रत्याशी थे।
इन तीनों दिग्गजों को भी हार का मुंह देखना पड़ा। कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव और असम के प्रभारी के तौर पर हरीश रावत ने इस्तीफा तो दिया ही, साथ ही लोकसभा चुनाव में हार के लिए पार्टी की संगठनात्मक कमजोरी के लिए भी पदाधिकारियों को जिम्मेदार ठहराया। असम में पार्टी का प्रदर्शन अपेक्षित नहीं रहने के लिए भी बतौर प्रभारी उन्होंने खुद को उत्तरदायी ठहराने से गुरेज नहीं किया।
रावत के इस स्टैंड को प्रदेश कांग्रेस कमेटी पर दबाव बढ़ाने वाला माना जा रहा है। हालांकि इससे प्रदेश में पार्टी के भीतर गुटबंदी तेज होने के आसार हैं। प्रदेश में कांग्रेस के भीतर प्रदेश अध्यक्ष प्रीतम सिंह और नेता प्रतिपक्ष इंदिरा हृदयेश की सियासी जुगलबंदी को हरीश रावत खेमे से गाहे-बगाहे चुनौती मिलती रहती है। हालांकि श्रीनगर और बाजपुर में आठ जुलाई को होने वाले नगर निकाय चुनाव में पार्टी को कामयाबी दिलाने को पार्टी के सभी दिग्गज नेता एकजुट दिख रहे हैं। पहले बाजपुर और फिर गुरुवार को श्रीनगर नगरपालिका परिषद अध्यक्ष पद के चुनाव में पार्टी प्रत्याशी के समर्थन में सभी दिग्गजों ने एक साथ प्रचार भी किया। फिलहाल पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने मीडिया से बातचीत में प्रदेश में कांग्रेस के भीतर किसी तरह की गुटबाजी होने से साफ इन्कार किया है।

भ्रष्टाचार आयोग का गठन लोकायुक्त नही बनाये जाने की तरफ कर रहा इशाराः हरीश रावत

देहरादून पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने भ्रष्टाचार के मुद्दे पर सीएम त्रिवेंद्र रावत पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि यदि भ्रष्टाचार को समाप्त करने के लिए वह प्रभावी कदम उठाते हैं तो वह सरकार के हर कदम का स्वागत करेंगे।
एक बयान में पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र रावत के भ्रष्टाचार आयोग की घोषणा पर कड़ी टिप्पणी व्यक्त की। उन्होंने कहा कि लगता है कि मुख्यमंत्री की लोकायुक्त व कड़ा कानून लाने में रुची नही है। फिर भी यदि भ्रष्टाचार को जड़मूल से समाप्त करने के लिए उच्च न्यायालय के कार्यरत न्यायधीश के अध्यक्षता में कोई आयोग सहित प्रभावी कदम उठाते है तो मैं उसका स्वागत करता हूं। उन्होंने यह भी कहा कि राज्य निर्माण से आज तक के सभी भ्रष्टाचार संबंधित आरोपों के सभी मामले व भविष्य में भी भ्रष्टाचार रुक सके इसका प्रभावी प्राविधान हो तो वह राज्य सरकार का इस मुद्दे पर समर्थन करेंगे। उन्होने कहा कि लगता है कि लोकायुक्त बनाए जाने पर राज्य सरकार गंभीर नही है। उन्होने राज्य के उद्योगो के लिए दिए गए जीएसटी पैकेज को देर से उठाया गया कदम बताया। कहा कि उनकी सरकार ने जीएसटी कांउसिल में लगातार राज्य को दस वर्ष के लिए इस छूट की पैरवी की थी। यह उस समय की गई हमारी पहल का भी नतीजा है। 

हार के बाद कौन सा दांव खेल रहे हरीश रावत

देहरादून।
पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत को विधानसभा चुनाव ने भले ही मायूस किया हो, लेकिन उनके हौसले अभी पस्त नहीं हुए हैं। दावतों का सिलसिला जारी रख वह खुद को सूबे की सियासत के केंद्र में बनाए रखने का कोई मौका चूकने को तैयार नहीं हैं। लेकिन, दो माह के भीतर उनकी दावतों का अंदाज कुछ अलहदा ही है।
विधानसभा चुनाव में हरिद्वार और ऊधमसिंहनगर की जिन दो सीटों पर मुख्यमंत्री रहते हुए उन्होंने जो दांव खेला था, उसमें उन्हें कामयाबी नहीं मिली। इसके बाद उन्होंने दून शहर से दूरी बनाकर पहाड़ की तलहटी को अपने आशियाने के लिए चुना। इसके बाद पहाड़ को केंद्र में रखकर उनकी दावतों का जो सिलसिला शुरू हुआ, उससे पार्टी के बाहर और भीतर उनके प्रतिद्वंद्वी भी खासे सकते में हैं। हरदा सुर्खिया बटोरने में उनसे कहीं आगे हैं।
पहाड़ के उत्पादों को उनकी दावतों में मिल रही तरजीह को उनके पहाड़ को केंद्र में रखकर बुने जा रहे सियासी एजेंडे से जोड़कर देखा जा रहा है। इस एजेंडे के निशाने पर वर्ष 2019 में होने वाले लोकसभा चुनाव भी हैं। विधानसभा चुनाव उनके नेतृत्व में लड़ा जा चुका है, लिहाजा हरीश रावत यह जानते हैं कि लोकसभा चुनाव में उनकी सियासी हैसियत उनकी सक्रियता से ही साबित होनी है। ऐसे में हरदा अभी से फूंक-फूंककर कदम बढ़ाते दिख रहे हैं। पहाड़ की सियासत में रिवर्स पलायन को उनकी रणनीति का ही हिस्सा माना जा रहा है। इसके बूते ही पलायन से शहरों में उभर गए मतदाताओं के पहाड़ों पर भी उनकी नजरें टिकी हैं।

भाजपा सरकार को बताया हर र्मोचे पर विफल

पूर्व सीएम हरीश रावत ने भाजपा सरकार को पूरी तरह विफल बताते हुए कहा कि आज भाजपा शासन में विकास कार्य ठप हो गए हैं। पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार द्वारा शुरू की गई योजनाओं को भी ठंडे बस्ते में डाल दिया है। ऐसे में आम जनता परेशान है। मंगलवार को पूर्व सीएम हरीश रावत कार्यकर्ताओं की बैठक को संबोधित कर रहे थे। इससे पूर्व पूर्व सीएम ने पूरे बाजार में जनसंपर्क किया एवं पैतृक गांव मोहनरी में भी ग्रामीणों से मुखातिब हुए। इस दौरान लोगों ने क्षेत्र की समस्याएं भी उठाई।
पूर्व सीएम ने कहा कि उनके शासन में जो विकास कार्य शुरू हुए थे, वे आज ठप हैं। गांवों को सड़कों से जोड़ने का कार्य भी आगे नहीं बढ़ रहा है। दूर गांव के लोग कल्याणकारी योजनाओं के लाभ से वंचित हैं। किसान आत्महत्या कर रहे हैं, लेकिन सरकार समाधान ढूंढने के प्रति कतई गंभीर नहीं है। चुनाव के दौरान प्रधानमंत्री ने किसानों का कर्ज माफ करने का वादा किया था, जिसे पूरा नहीं किया जा रहा है। इस दौरान लोगों ने उन्हें जन समस्याएं बताई एवं कहा कि गांवों में आज भी पेयजल व सड़क जैसी समस्याएं यथावत बनी हैं। रावत ने पार्टी कार्यकर्ताओं से जन समस्याओं को उठाने के लिए आगे आने का आह्वान किया एवं गांवों में संगठन को भी प्रभावी बनाने पर जोर दिया।

एसओजी कर रही पूर्व सीएम की पुत्रवधू को आ रहे कॉल्स की जांच


तकनीक का जमाना सूबे के पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत की पुत्रवधू के लिए जी का जंजाल बन गया है।  आलम ये है कि गंदे- मैसेज के लगातार हो रहे प्रवाह से उन्हें शर्मिंदगी का सामना करना पड़ रहा है। पूर्व सीएम के पुत्र ने पहले उस नंबर पर बात कर उसे ऐसा न करने की हिदायत दी लेकिन सिरफिरे पर  आनंद की बात का कोई असर नहीं हुआ। उसकी हरकत लगातार बढ़ती रही।
मजबूरन रावत दम्पति को पुलिस में शिकायत दर्ज करवानी पड़ी। जैसे ही यह खबर आम हुई पूरे राज्य  में हंगामा मच गया। लिखित शिकायत के बाद मामले की गंभीरता को देखते हुए SOG दस्ते ने जांच को अपने हाथ मे ले लिया है। बताया जा रहा है कि प्रारंभिक जांच में मैसेज राजस्थान से भेजे गए हैं। हालांकि अभी पूरी जांच रिपोर्ट  और बदतमीज सिरफिरे का पकड़ा जाना बाकी है।
बहरहाल असल बात ये है कि ऐसी मानसिकता वाले सिरफिरों से आम आदमी कैसे बचेगा जो खास की भी परवाह न करते हों। जरूरत है ऐसी नापाक दंबगई को सबक सिखाने की, ताकि जमीर वालों के आत्मसम्मान को ठेस न पहुंचे।  फिर चाहे वो आम हो या फिर खास ।

कांग्रेस के लिए काला दिन था रावत का हारना

हरिद्वार।
हरिद्वार पहुंची नेता प्रतिपक्ष इंदिरा हृदयेश का कांग्रेसी कार्यकर्ताओ ने स्वागत किया। मिडिया से बात करते हुए नेता प्रतिपक्ष ने कांग्रेस की हार के लिए पूर्व सीएम हरीश रावत को जिम्मेदार ठहराया तो वही प्रदेश में सरकार के बाद खनन और शराब के विरोध में जुटी भाजपा के दोहरे चरित्र पर जमकर हमला बोला।
कांग्रेस की हार पर बोलते हुए इशारों ही इशारो में पूर्व सीएम हरीश रावत पर निशाना साधा। कहा की मुख्यमंत्री का दो सीटों पर हार जाना कांग्रेस के लिए सबसे काला दिन था राजनीति के इतिहास में यह पहली बार हुआ है। उन्होंने कहा की प्रदेश की जनता ने चेहरे को स्वीकार नही किया इस लिए कांग्रेस की यह स्थिति हुई।
वही, नेता प्रतिपक्ष ने शराब बंदी और खनन को लेकर राज्य सरकार की भूमिका पर सवाल खड़े किए। कहा की जो काम हमारे समय हो रहे थे तो भाजपा उनको जमकर कोस रही थी लेकिन आज सत्ता पर काबिज होने के बाद जिन मुद्दों पर भाजपा ने चुनाव लड़ा आज उनको किनारा कर शराब और खनन में तालमेल बैठाने में लग गयी है। प्रदेश में शराब बंदी हो इसके हम पक्षधर है हम इसमें सरकार के साथ खड़े है।

हरीश रावत सीबीआई के सम्मन पर हाजिर नही हुए

देहरादून।
विधायकों की खरीद फरोख्त मामले से संबंधित कथित स्टिंग मामले में फंसे उत्तराखंड के मुख्यमंत्री हरीश रावत तय तिथी के अनुसार सीबीआई के समक्ष पेश नहीं हुए। उन्हें 26 दिसंबर यानि सोमवार के लिए सीबीआई ने समन जारी किया था। सीबीआई को सीएम हरीश रावत की ओर से अनुरोध पत्र मिला, जिसमें उन्होंने उपस्थित नहीं हो पाने की बात कही है। इसी वर्ष मार्च में उत्तराखंड विधानसभा में विनियोग विधेयक पर चर्चा के साथ कांग्रेस विधायकों के एक गुट ने मतदान की मांग करते हुए हंगामा किया था। हंगामे के बीच विधानसभा अध्यक्ष ने विनियोग विधेयक को पारित घोषित कर दिया। इसके बाद बागी विधायकों ने भाजपा विधायकों के साथ राज्यपाल से मुलाकात की थी।
विश्वास मत प्राप्त करने के विशेष सत्र से पहले तत्कालीन मंत्री हरक सिंह रावत ने दिल्ली में एक स्टिंग की सीडी जारी की। इसमें कथित तौर पर सीएम रावत को बहुमत के लिए विधायक जुटाने के लिए मोलभाव की बातचीत करते दिखाया गया था। इस मामले की सीबीआइ जांच के निर्देश दिए गए। मुख्यमंत्री हरीश रावत ने केंद्र की सीबीआइ जांच की अधिसूचना के खिलाफ हाई कोर्ट में याचिका दायर की। जिसमें न्यायाधीश न्यायमूर्ति यूसी ध्यानी की एकल पीठ के समक्ष सीएम की याचिका पर सुनवाई हुई। सीएम की ओर से अधिवक्ता देवीदत्त कॉमथ ने प्रार्थना पत्र प्रस्तुत करते हुए कोर्ट को बताया कि सीबीआइ ने सीएम को पूछताछ के लिए 26 दिसंबर को सीबीआइ मुख्यालय में पेश होने को कहा है।
हरीश रावत के प्रार्थना पत्र में यह भी कहा गया था कि स्टिंग ऑपरेशन राजनीतिक दुर्भावना व साजिश के तहत किया गया और जांच एजेंसी साजिशकर्ताओं और मुख्य आरोपियों से पूछताछ की बजाय उन्हें परेशान कर रही है। इसलिए इस मामले की जल्द सुनवाई की जाए। सीबीआइ के अधिवक्ता संदीप टंडन ने दलीलों का विरोध करते हुए कहा कि हाई कोर्ट ने पूर्व के आदेश में मामले की जांच करने में किसी तरह की रोक नहीं लगाई है। यह भी कहा कि जांच एजेंसी मुख्यमंत्री के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने से पहले अदालत को सूचित करेगी।